UGC NET June 2026 Re-Exam: 9 और 10 सितंबर को होने वाले री-एग्जाम के लिए जारी हुआ एडमिट कार्ड, जानें कैसे मिलेगा एडमिट कार्ड

UGC NET June 2026 Re-Exam: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने यूजीसी नेट जून 2026 के इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी पेपर्स के री-एग्जाम के लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिए हैं। ये पेपर्स 9 और 10 सितंबर को पूरे देश में होने वाले हैं। इस परीक्षा में शामिल होने वाले परीक्षार्थी अपने लॉगिन क्रेडेंशियल्स का इस्तेमाल करके ऑफिशियल वेबसाइट ugcnet.nta.nic.in से अंडरटेकिंग के साथ अपने एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं।

कैंडिडेट्स को सलाह दी जाती है कि वे परीक्षा के दिन किसी भी परेशानी से बचने के लिए एडमिट कार्ड पर दिए गए निर्देशों को ध्यान से पढ़ें। इनमें परीक्षा के दिन की खास गाइडलाइंस, क्या ले जाना है, रिपोर्टिंग टाइम, ड्रेस कोड और दूसरी जरूरी जानकारी शामिल है। एडमिट कार्ड डाउनलोड करते समय किसी भी तरह की दिक्कत होने या उस पर दिए गए विवरण में कोई गड़बड़ी होने पर, कैंडिडेट्स को एनटीए हेल्पडेस्क से 011-40759000 पर संपर्क करना चाहिए या ugcnet@nta.ac.in पर लिखना चाहिए।

कैंडिडेट्स को उनके परीक्षा शहर और तारीख के बारे में 1 सितंबर को जारी एडवांस सिटी इंटिमेशन स्लिप के जरिए पहले ही बता दिया गया था।

परीक्षा एजेंसी ने 28 अगस्त को 87 में से 84 सब्जेक्ट्स के यूजीसी नेट जून 2026 के रिजल्ट घोषित किए।

एनटीए को मुख्य परीक्षा में इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी, तीन विषयों के पेपर में गलतियों के बारे में कई शिकायतें मिली थीं। इसके बाद परीक्षा एजेंसी ने इनके लिए दोबारा परीक्षा की घोषणा की।

इसके बाद एनटीए ने बताई गई गलतियों की जांच के लिए एक कमेटी बनाई। कमेटी ने पाया कि तीनों पेपर्स में कई फैक्ट्स, टाइपिंग और ट्रांसलेशन की गलतियां थीं। इनमें जाने-माने स्कॉलर्स के नामों की गलत स्पेलिंग, किताबों के टाइटल में गड़बड़, क्वेश्चन स्टेम्स के शब्दों में गलतियां, ग्रामर की गलतियां, जेंडर और नंबर एग्रीमेंट की गलतियां, पंक्चुएशन की गलतियां और पहले से मौजूद कॉन्सेप्ट्स के लिए बनाए गए नॉन-स्टैंडर्ड शब्द शामिल थे। इसने यह भी पाया कि पहले हुए एग्जाम्स से काफी सारे सवाल रिपीट किए गए थे।

Guru Purnima vs Teachers Day Difference: शिक्षक को समर्पित हैं गुरु पूर्णिमा और शिक्षक दिवस, जानें दोनों में क्या है अंतर और क्या है इतिहास

Guru Purnima vs Teachers Day Difference: शिक्षक को समर्पित हैं गुरु पूर्णिमा और शिक्षक दिवस, जानें दोनों में क्या है अंतर और क्या है इतिहास

Guru Purnima vs Teachers Day Difference: शिक्षक का स्थान भगवान से भी ऊपर माना गया है, क्योंकि शिक्षक सिर्फ अक्षर ज्ञान नहीं देता, वह हमें जीने का, अपने उसूलों पर चलने और सही-गलत में फर्क करने की समझ भी देता है। इसलिए हमारे देश में दो खास दिन गुरु को समर्पित हैं। एक है गुरु पूर्णिमा और दूसरा है टीचर्स डे। अक्सर लोग ‘गुरु पूर्णिमा’ और ‘शिक्षक दिवस’ को एक ही मानते हैं। लेकिन असल में इन दोनों में मूल अर्थ में बहुत अंतर है। भारतीय संस्कृति और इतिहास में इन दोनों पर्वों के भाव और मायने में बहुत दिलचस्प फर्क है।

गुरु पूर्णिमा हजारों साल पुरानी आध्यात्मिक साधना और ‘अंधकार से प्रकाश’ की तरफ ले जाने वाले गुरु को समर्पित है। वहीं शिक्षक दिवस आधुनिक भारत के शैक्षणिक योगदान और महान दार्शनिक राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन का सम्मान है। एक पर्व तिथि और पंचांग से चलता है तो दूसरा कैलेंडर की तय तारीख से यानी 5 सितंबर को मनाया जाता है। शिक्षक दिवस 2026 के खास अवसर पर जनरल नॉलेज में जानिए ‘शिक्षक’ और ‘गुरु’ के बीच अंतर।

गुरु पूर्णिमा और शिक्षक दिवस के बीच अंतर

बहुत से लोग गुरु पूर्णिमा और शिक्षक दिवस को एक ही समझते हैं। लेकिन इनका मूल अर्थ एक-दूसरे से बिलकुल भिन्न है। आइए आज समझें गुरु पूर्णिमा और शिक्षक दिवस के बीच कुछ प्रमुख अंतर।

प्राचीन परंपरा और आधुनिक इतिहास

गुरु पूर्णिमा हमारे देश और हिंदू धर्म की प्राचीन संस्कृति से जुड़ा पर्व है। यह आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन महाभारत और चारों वेदों की रचना करने वाले महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। इसीलिए इसे ‘व्यास पूर्णिमा’ भी कहा जाता है।

शिक्षक दिवस (5 सितंबर) आधुनिक भारत के इतिहास से जुड़ा है। यह दिन भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान शिक्षाविद और दार्शनिक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के रूप में मनाया जाता है। जब डॉ. राधाकृष्णन के छात्रों ने उनका जन्मदिन मनाने की इच्छा जताई तो उन्होंने कहा कि इसे देश के सभी शिक्षकों के सम्मान में समर्पित किया जाए।

‘शिक्षक’ और ‘गुरु’ की भूमिका में अंतर

‘शिक्षक’ शब्द का सीधा संबंध शिक्षा, किताबी ज्ञान और जीवन में इस्तेमाल आने वाले हुनर से है। शिक्षक गणित, विज्ञान, भाषा या कोई विषय सिखाते हैं जो प्रैक्टिकल लाइफ चलाने और आजीविका कमाने योग्य बनाता है। वे बौद्धिक विकास की नींव रखते हैं।

वहीं, ‘गुरु’ का अर्थ बहुत व्यापक और गहरा है। संस्कृत में ‘गु’ का अर्थ है अंधकार (अज्ञान) और ‘रु’ का अर्थ है प्रकाश (ज्ञान)। गुरु आपकी चेतना को जगाते हैं, जीवन दर्शन समझाते हैं और आत्मानुभूति करवाते हैं। शिक्षक साक्षर बनाते हैं, जबकि गुरु जीवन जीने का दृष्टिकोण बदल देते हैं। शिक्षक और छात्र का संबंध मुख्य रूप से औपचारिक होता है। वहीं, गुरु और शिष्य का नाता जीवनभर का और आत्मिक होता है।

मनाने का तरीका और पंचांग का नियम

गुरु पूर्णिमा का त्योहार हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ पूर्णिमा को पड़ता है। इसलिए अंग्रेजी कैलेंडर में इसकी तारीख हर साल बदलती रहती है। इस दिन मंदिरों और आश्रमों में गुरु पूजन, चरण स्पर्श और आध्यात्मिक अनुष्ठान होते हैं। लेकिन, शिक्षक दिवस हर साल 5 सितंबर को ही आता है। यह स्कूल और कॉलेजों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों, शिक्षकों को कार्ड या उपहार देने और उनका आभार व्यक्त करने का शानदार दिन होता है।

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गुरु पूर्णिमा महोत्सव : सीएम योगी ने किया महायोगी गोरखनाथ का विशिष्ट पूजन

Guru Purnima Mahotsav CM Yogi Adityanath

Guru Purnima Mahotsav CM Yogi Adityanath: गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर बुधवार प्रातःकाल गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ का नाथपंथ की परंपरा के अनुसार विशिष्ट पूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ, दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ, योगिराज बाबा गंभीरनाथ समेत नाथपंथ के सभी गुरुजन का भी विधि विधान से पूजा की।

 

गोरक्षपीठाधीश्वर ने भगवान गोरखनाथ और अन्य गुरुजन को श्रद्धा निवेदित कर लोक कल्याण के पथ पर मार्गदर्शन के लिए भावपूर्ण कृतज्ञता व्यक्त की की।  गोरखनाथ मंदिर में गुरु पूर्णिमा का विशेष अनुष्ठान प्रातः काल से ही प्रारंभ हो गया और सामूहिक आरती के साथ अनुष्ठान की पूर्णता हुई।

गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी देशवासियों को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं भी दीं। वैसे तो गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ जब भी गोरखनाथ मंदिर में होते हैं, गुरु गोरखनाथ जी तथा नाथपंथ के गुरुजन का दर्शन-पूजन उनकी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा होता है। पर, गुरु पूर्णिमा का अवसर गोरखनाथ मंदिर में विशिष्ट पूजा का होता है। बुधवार को गोरक्षपीठाधीश्वर ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महायोगी गोरखनाथ, मंदिर परिसर में मौजूद सभी देव विग्रहों और नाथपंथ के गुरुओं की प्रतिमाओं के समक्ष विधि विधान के साथ पूजन किया।

 

आनुष्ठानिक कार्यक्रमों के क्रम में उन्होंने सबसे पहले नाथपंथ के आदिगुरु भगवान गोरखनाथ के दरबार में हाजिरी लगाई। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उनकी विशिष्ट पूजा की। वह परिसर में मौजूद सभी देव-विग्रहों के पास पहुंचे और उनका पूजन किया। उसके बाद वह बारी-बारी से बाबा गंभीरनाथ, अपने दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ समेत ब्रह्मलीन गुरुओं की समाधि पर गए। सभी का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन कर आशीर्वाद लिया।

 

गोरखनाथ मंदिर में नाथपंथ की विशिष्ट परंपरा के अनुसार गुरु गोरखनाथ को रोट का महाप्रसाद भी अर्पित किया गया। पूजा-अर्चना की आनुष्ठानिक प्रक्रिया संपन्न होने के बाद गुरु पूर्णिमा पर होने वाली परंपरागत सामूहिक आरती हुई तथा सभी गुरुओं के प्रति आस्था निवेदित की गई।

Guru Purnima Essay: हिन्दी निबंध: गुरु पूर्णिमा: गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता का महापर्व

A photo of a guru imparting teachings to his disciple on the auspicious occasion of Guru Purnima

Essay on Guru Purnima: प्रस्तावना: भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊंचा माना गया है। हमारे शास्त्रों में कहा गया है-ALSO READ: गुरु पूर्णिमा 2026: आधुनिक भारत के 7 महान गुरु, जिनके ज्ञान ने बदल दी लाखों लोगों की जिंदगी

'गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु र्गुरुदेवो महेश्वरः।

गुरुः साक्षात परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः'

– अर्थात् गुरु ही ब्रह्मा हैं, गुरु ही विष्णु हैं और गुरु ही महादेव हैं। वे साक्षात् परमब्रह्म के समान हैं। इसलिए भारतीय परंपरा में गुरु का सम्मान सर्वोच्च माना गया है। इसी सम्मान, श्रद्धा और कृतज्ञता को व्यक्त करने के लिए प्रत्येक वर्ष आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व मनाया जाता है।

 

गुरु पूर्णिमा का इतिहास

गुरु पूर्णिमा का संबंध महर्षि वेदव्यास से माना जाता है। महर्षि वेदव्यास ने वेदों का संकलन किया तथा महाभारत और अनेक पुराणों की रचना की। इसलिए उन्हें आदि गुरु कहा जाता है। उनके जन्मदिवस के रूप में गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है, जिसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है।

यह केवल धार्मिक आस्था से ही नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार और जीवन के सही मार्गदर्शन से भी जुड़ा हुआ है। इस दिन महर्षि वेदव्यास की जयंती भी मनाई जाती है। वेदव्यास जी ने चारों वेदों का विभाजन किया, महाभारत की रचना की और अठारह पुराणों का संकलन किया। इसी कारण उन्हें 'आदि गुरु' और 'व्यास ऋषि' के नाम से सम्मानित किया जाता है। इस पर्व को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है।

 

गुरु केवल विद्यालय में पढ़ाने वाले शिक्षक ही नहीं होते, बल्कि माता-पिता, आध्यात्मिक गुरु, जीवन में सही दिशा दिखाने वाले मार्गदर्शक और प्रेरणा देने वाले प्रत्येक व्यक्ति गुरु के समान होते हैं। गुरु ही अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। वे हमें केवल पुस्तक का ज्ञान नहीं देते, बल्कि जीवन जीने की कला, नैतिक मूल्य, अनुशासन और सही निर्णय लेने की क्षमता भी प्रदान करते हैं। अहंकार को त्यागकर गुरु के चरणों में श्रद्धा अर्पित करना ही इस पावन पर्व का वास्तविक संदेश है।

 

गुरु पूर्णिमा पर क्या करते हैं: गुरु पूर्णिमा के दिन विद्यार्थी अपने शिक्षकों का सम्मान करते हैं, उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और उन्हें धन्यवाद देते हैं। आश्रमों, विद्यालयों और धार्मिक स्थलों पर विशेष पूजा, सत्संग, भजन-कीर्तन, प्रवचन तथा गुरु वंदना का आयोजन किया जाता है। अनेक लोग अपने गुरु को पुष्प, वस्त्र, पुस्तकें या अन्य उपयोगी उपहार भेंट कर उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। कई स्थानों पर गुरु के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लेना अत्यंत शुभ माना जाता है।

 

वर्तमान समय में गुरु का महत्व: वर्तमान समय में जब तकनीक और आधुनिक जीवनशैली तेजी से बदल रही है, तब भी गुरु का महत्व पहले की तरह बना हुआ है। आज इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों से ज्ञान प्राप्त करना आसान हो गया है, लेकिन सही और गलत का अंतर समझाने, व्यक्तित्व का निर्माण करने तथा जीवन में मूल्यों का विकास करने का कार्य केवल एक सच्चा गुरु ही कर सकता है। इसलिए गुरु का स्थान किसी भी पुस्तक, मशीन या तकनीक से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

 

गुरु पूर्णिमा का संदेश: गुरु पूर्णिमा हमें यह संदेश देती है कि हमें अपने जीवन में जिन लोगों ने ज्ञान, प्रेरणा और सही दिशा दी है, उनके प्रति सदैव सम्मान और कृतज्ञता का भाव रखना चाहिए। गुरु का सम्मान केवल एक दिन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनके बताए मार्ग पर चलकर अपने जीवन को सफल और सार्थक बनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

 

उपसंहार: गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति का ऐसा महान पर्व है, जो गुरु और शिष्य के पवित्र संबंध को मजबूत बनाता है। यह दिन हमें विनम्रता, ज्ञान, संस्कार और कृतज्ञता का महत्व सिखाता है। यदि हम अपने गुरु के आदर्शों और शिक्षाओं को जीवन में अपनाएं, तो निश्चित रूप से सफलता, सम्मान और आत्मिक उन्नति प्राप्त कर सकते हैं। यही गुरु पूर्णिमा का वास्तविक संदेश और महत्व है। गुरु पूर्णिमा हमें याद दिलाती है कि हम अपने जीवन में जिनके भी ऋणी हैं- चाहे वे हमारे शिक्षक हों, माता-पिता हों या मार्गदर्शक, उनके प्रति आभार व्यक्त करें। 

 

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Guru Purnima Satya Narayan Vrat Katha: आज गुरु पूर्णिमा के मौके पर पढ़ें सत्यनारायण भगवान की ये कथा, जीवन से मिट जाएगी दुख-दरिद्रता

Guru Purnima Satya Narayan Vrat Katha: हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष स्थान है। पूरे हिंदू कैलेंडर में हर माह एक पूर्णिमा तिथि आती है। इस तरह पूरे साल में 12 पूर्णिमाएं आती हैं। इनमें से ही एक है आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि। आषाढ़ पूर्णिमा की तिथि गुरु को समर्पित है और इस दिन लोग अपने गुरु का सम्मान करते हैं और उनके प्रति आभार प्रकट करते हैं। पूर्णिमा तिथि पर गंगा आदि पवित्र नदियों में स्नान, दान, और सत्यनारायण भगवान का व्रत और कथा भी की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सच्चे मन से सत्यनारायण व्रत कथा सुनने से जीवन के सभी दुख-दरिद्रता दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का वास होता है। माना जाता है कि चतुर्मास के दौरान सत्यनारायण कथा करवाने से विशेष फल मिलता है और श्रीहरि की कृपा बनी रहती है। आइए जानें सत्यनारायण व्रत कथा के बारे में

सत्यनारायण की कथा

कथा के अनुसार, एक बार नारद जी पृथ्वी लोक पर घूमते हुए लोगों की स्थिति देखकर दुखी हो गए। उन्होंने देखा कि मनुष्य अपने कर्मों के कारण तरह-तरह के कष्ट झेल रहे हैं। यह देखकर उनका मन करुणा से भर गया और वे भगवान विष्णु के पास क्षीरसागर पहुंच गए। वहां उन्होंने भगवान से प्रार्थना की कि कोई ऐसा सरल उपाय बताएं, जिससे लोगों के दुख दूर हो सकें। भगवान विष्णु ने नारद जी से कहा कि उन्होंने बहुत ही अच्छा प्रश्न किया है।

इसके बाद उन्होंने श्री सत्यनारायण व्रत के बारे में बताया, जो बहुत पुण्य देने वाला और मोक्ष दिलाने वाला माना जाता है। भगवान ने कहा कि इस व्रत को श्रद्धा और विधि से करने पर मनुष्य के जीवन के दुख दूर होते हैं और उसे सुख-समृद्धि मिलती है। इसके बाद यह व्रत एक ब्राह्मण, लकड़हारे, राजा और व्यापारी जैसे कई लोगों ने किया और उन्हें इसका लाभ मिला। इससे यह संदेश मिलता है कि यह व्रत कोई भी व्यक्ति कर सकता है, चाहे वह अमीर हो या गरीब, पुरुष हो या महिला।

कथा में एक व्यापारी का भी उल्लेख मिलता है, जिसने पहले इस व्रत को गंभीरता से नहीं लिया। उसने संतान होने के बाद व्रत करने का वादा किया, लेकिन बाद में भी टालता रहा। परिणामस्वरूप उसे कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। बाद में जब उसकी पत्नी और बेटी ने श्रद्धा से व्रत किया, तो भगवान की कृपा से उसके सभी कष्ट दूर हो गए।

इसी तरह एक राजा ने भी भगवान का अनादर किया और प्रसाद तक नहीं लिया, जिसके कारण उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा। बाद में जब उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने सच्चे मन से पूजा की, तो उसकी सारी परेशानियां खत्म हो गईं। मुख्य संदेश यह है कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति आती है। सत्य को अपनाना और भक्ति के मार्ग पर चलना ही इस व्रत का असली महत्व है।

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Happy Guru Purnima Messages: गुरु पूर्णिमा के 10 सबसे खास, भावात्मक और आकर्षक शुभकामना संदेश

An image featuring 10 heartfelt greeting messages dedicated to the Guru on the occasion of Guru Purnima 2026

Guru Purnima 2026 Wishes: भारतीय संस्कृति में गुरु पूर्णिमा का पर्व गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का सबसे पावन अवसर माना जाता है। यह दिन महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है, जिन्होंने वेदों और पुराणों के ज्ञान को संकलित कर मानव समाज को अमूल्य धरोहर प्रदान की। गुरु केवल शिक्षा देने वाले व्यक्ति नहीं होते, बल्कि वे जीवन की सही दिशा दिखाने वाले मार्गदर्शक, प्रेरणास्रोत और व्यक्तित्व निर्माण के आधार स्तंभ होते हैं।ALSO READ: गुरु पूर्णिमा 2026: आधुनिक भारत के 7 महान गुरु, जिनके ज्ञान ने बदल दी लाखों लोगों की जिंदगी

 

गुरु पूर्णिमा के दिन अपने गुरु, शिक्षक, माता-पिता, आध्यात्मिक गुरु या जीवन में मार्गदर्शन देने वाले किसी भी व्यक्ति के प्रति सम्मान व्यक्त करना शुभ माना जाता है। एक श्रेष्ठ गुरु का मिलना ईश्वर का सबसे सुंदर उपहार है। आपका मार्गदर्शन मेरे जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा है। आपने केवल किताबों का ज्ञान नहीं दिया, बल्कि सच्चाई, विनम्रता और मानवता का पाठ भी पढ़ाया। आपके चरणों में मेरा सादर नमन। यह संदेश गुरु पूर्णिमा को खास बना देता है। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर अपने गुरु, शिक्षकों या मार्गदर्शक को भेजने के लिए यहां 10 बेहद खास, भावात्मक और सम्मानजनक शुभकामना संदेश दिए गए हैं जिन्हें आप WhatsApp, Facebook, Instagram या SMS के माध्यम से साझा कर सकते हैं।

 

यहां पढ़ें संस्कृत श्लोक, भावात्मक तथा पारंपरिक और विचारशील संदेश…

 

1. अज्ञानता के अंधेरे से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाने वाले मेरे पूज्य गुरुदेव को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं। आप हैं तो मेरी हर राह आसान है। 

 

2. सिर्फ किताबें पढ़ाना ही शिक्षा नहीं, जीवन जीने की सही कला सिखाना असली ज्ञान है। मुझे एक बेहतर इंसान बनाने के लिए आपका कोटि-कोटि धन्यवाद। शुभ गुरु पूर्णिमा!

 

3. जब भी जीवन के रास्तों पर भटका, आपकी सीख ने ही सही मार्ग दिखाया। मेरे जीवन के सबसे बड़े मार्गदर्शक को गुरु पूर्णिमा की सप्रेम शुभकामनाएं।

 

4. गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु र्गुरुदेवो महेश्वरः।

गुरुः साक्षात परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥

– आप ही मेरे मार्गदर्शक हैं और आप ही मेरी प्रेरणा। गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर आपके चरणों में सादर प्रणाम!ALSO READ: गुरु पूर्णिमा पर जरूर जपें ये 5 गुरु मंत्र, जीवन की बाधाएं होंगी दूर और मिलेगा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद

 

5. जिसने अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान का दीप जलाया, वही सच्चा गुरु है। ऐसे पूजनीय गुरु को गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व की अनंत शुभकामनाएं।

आपका आशीर्वाद सदैव बना रहे।

 

6. अक्षर-अक्षर हमें सिखाते, शब्द-शब्द का अर्थ बताते।

कभी प्यार से तो कभी डांट से, जीवन जीना हमें सिखाते।

गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं!

 

7. मिट्टी से तराशकर जिसने मुझे इंसान बनाया,

उस गुरु के चरणों में मेरा शत-शत नमन।

हैप्पी गुरु पूर्णिमा! 

 

8. गुरु का सान्निध्य जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। आपका मार्गदर्शन ही मेरी सफलता की सबसे मजबूत नींव है।

गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं!

 

9. सफलता के इस मुकाम पर आज मैं जहां भी हूं, उसमें सबसे बड़ा योगदान आपकी सीख और विश्वास का है। गुरु पूर्णिमा पर आपको मेरा सादर प्रणाम।

 

10. गुरु केवल ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि जीवन जीने की सही दिशा भी दिखाते हैं। आपके आशीर्वाद से हर कठिन राह आसान हो जाती है। आपके चरणों में मेरा सादर प्रणाम। गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं!

 

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Guru Purnima 2026 Shubh Sanyog: आज गुरु पूर्णिमा पर 5 राशियों की नैया पार लगाएंगे बृहस्पति, शश, बुधादित्य और हंस राजयोग के प्रभाव से मिलेगा लाभ

Guru Purnima 2026 Shubh Sanyog: आज आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, आज के दिन महर्षि वेद व्यास का जन्म भी हुआ था। इसलिए आज के दिन व्यास जयंति के साथ ही अपने गुरु के प्रति आभार जताने का यानि आज गुरु पूर्णिमा भी है। आज का दिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के साथ ही ज्योतिषीय कारणों से भी अहम माना जा रहा है।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, इस बार गुरु पूर्णिमा पर प्रीति योग, आयुष्मान योग बन रहा है। साथ ही गुरु के उच्च राशि में होने से हंस महापुरुष जैसे दुर्लभ योग का संयोग भी बन रहा है, जो सिंह समेत 5 राशियों के लिए बेहद कल्याणकारी रहने वाला है। इन राशियों को गुरु कृपा से सौभाग्य की प्राप्ति होगी और जीवन में चल रही परेशानियों से मुक्ति भी मिलेगी।

मेष राशि : इस दुर्लभ संयोग का सबसे सकारात्मक प्रभाव मेष राशि वालों पर देखने को मिल सकता है। इनके लंबे समय से रुके हुए कार्यों में गति आएगी और आत्मविश्वास पहले से अधिक मजबूत रहेगा। नौकरी करने वालों को वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा, जिससे नई जिम्मेदारियां के अवसर बन सकते हैं।

सिंह राशि : सिंह राशि वालों के लिए यह दुर्लभ संयोग कई शुभ अवसर लेकर आ सकता है। इन्हें करियर में नई ऊंचाइयों तक पहुंचने के अवसर प्राप्त होंगे और लंबे समय से किए गए प्रयासों का सकारात्मक परिणाम मिल सकता है। नौकरी बदलने की सोच रहे लोगों को मनचाहा प्रस्ताव मिलने की संभावना है।

कन्या राशि : कन्या राशि वालों के लिए यह समय उन्नति और सफलता का संकेत दे सकता है। इस राशि के नौकरी पेशा जातकों की ऑफिस में मेहनत की सराहना होगी और नई जिम्मेदारियां मिलने से भविष्य में लाभ के रास्ते खुल सकते हैं। परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा, जिससे रिश्तों में मधुरता बढ़ेगी।

मकर राशि : मकर राशि वालों के लिए गुरु पूर्णिमा का यह विशेष संयोग भाग्य का साथ दिलाने वाला माना जा सकता है। मकर राशि वालों को करियर में आगे बढ़ने के नए अवसर मिलेंगे और मेहनत का पूरा फल प्राप्त होने की संभावना है। परिवार में आपसी प्रेम और सहयोग बढ़ेगा तथा जीवनसाथी का पूरा साथ मिलेगा।

कुंभ राशि : कुंभ राशि वालों के लिए आज बना दुर्लभ संयोग जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति के संकेत दे सकता है। कुंभ राशि वालों के करियर में नई उपलब्धियां हासिल करेंगे और कार्यस्थल पर आपकी सराहना होगी। आर्थिक मामलों में स्थिरता आएगी और लंबे समय से रुकी हुई योजनाएं पूरी होने की संभावना बनेगी।

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Guru Purnima 2026: आज गुरु पूर्णिमा के साथ मनाया जाएगा व्यास जयंति और शिव शयनोत्सव का पर्व, जानें आज मनाए जा रहे त्योहारों का महासंगम

Guru Purnima 2026: आज आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि है। धार्मिक मान्यतओं के अनुसार, आज के दिन गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है, जो जीवन में मार्ग दर्शन करने वाले सभी गुरुओं को समर्पित है। साथ ही, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महाभारत के रचयिता महर्षि वेद वयास का जन्म भी आषाढ़ पूर्णिमा के दिन हुआ था। इसलिए आज व्यास जयंति भी मनाते हैं। इसके अलावा, आज के दिन भागवान शिव का शयनोत्सव भी मनाया जाता है। आषाढ़ पूर्णिमा के दिन आषाढ़ी पूर्णिमा, सत्यनारायण व्रत और बुधवार व्रत का पावन संयोग भी बन रहा है। ज्योतिष और धर्मशास्त्र के अनुसार एक ही दिन इन सभी पर्वों का संगम साधना, ज्ञान, भक्ति और पुण्य प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धालुओं को इस दिन गुरु पूजन, भगवान विष्णु और भगवान शिव की आराधना के साथ व्रत एवं दान-पुण्य करने का अवसर मिल रहा है। आइए जानें आज कौन-कौन से पर्व मनाए जाएंगे

गुरु पूर्णिमा : गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति में गुरु के प्रति श्रद्धा और सम्मान का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है। इस दिन अपने गुरु का पूजन, आशीर्वाद प्राप्त करना तथा शिक्षा और आध्यात्मिक उन्नति का संकल्प लेना विशेष फलदायी माना जाता है।

आषाढ़ी पूर्णिमा : आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को आषाढ़ी पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। यह दिन स्नान, जप, तप, दान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। साथ ही पितरों के नाम का भोजन और दान करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।

व्यास पूजा : गुरु पूर्णिमा को महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। उन्होंने वेदों का विभाजन, महाभारत और अनेक पुराणों की रचना कर सनातन ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाया। इसलिए इस दिन व्यास पूजा कर उन्हें आदिगुरु के रूप में स्मरण किया जाता है।

सत्यनारायण व्रत : पूर्णिमा तिथि भगवान विष्णु के सत्यनारायण स्वरूप की पूजा के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। इस दिन सत्यनारायण व्रत और कथा का सुनने के बाद श्रद्धालु पंचामृत, फल और प्रसाद अर्पित करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से श्रीहरि और माता लक्ष्मी की कृपा रहती है।

शिव शयनोत्सव : धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आषाढ़ पूर्णिमा पर भगवान शिव का शयनोत्सव भी मनाया जाता है। जैसे देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु योग निद्रा में जाते हैं, उसी तरह भगवान शिव भी शयन के लिए चले जाते हैं और सृष्टि का कार्यभार रूद्र संभालते हैं। इस दिन शिव मंदिरों में विशेष श्रृंगार, रुद्राभिषेक और शयन आरती की जाती है।

बुधवार व्रत : इस बार पूर्णिमा तिथि बुधवार के दिन पड़ रही है। बुधवार का दिन प्रथम पूज्य भगवान गणेश और ग्रहों के राजकुमार बुधदेव को समर्पित है। मान्यत है कि इस दिन गणपति की पूजा करने से बुद्धि, विवेक, व्यापार, शिक्षा और वाणी से जुड़े कार्यों में सफलता प्राप्त होती है और कुंडली में बुध ग्रह की स्थिति मजबूत होती है।

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Guru Purnima 2026: गुरु पूर्णिमा है बृहस्पति का साथ पाने का सबसे अच्छा दिन, जानें इस दिन का आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व

Guru Purnima 2026: हिंदू धर्म में गुरु को माता-पिता ही नहीं भगवान से भी ऊंचा दर्जा दिया जाता है। यही वजह है कि गुरु पूर्णिमा का हिंदू धर्म के प्रमुख पर्व और उत्सवों में विशेष स्थान है। गुरु पूर्णिमा आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन वेदों के संकलनकर्ता और महाभारत के लेखक महर्षि वेद व्यास की जयंती है। गुरु पूर्णिमा का दिन धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से जितना अहम है, उतना ही ज्योतिषीय रूप से भी है।

ज्योतिष में गुरु पूर्णिमा का महत्व

ज्योतिषशास्त्र में देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान, बुद्धि, शिक्षा, भाग्य, संतान, धर्म, विवेक और उच्च पद-प्रतिष्ठा का कारक माना गया है। गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु ग्रह का आशीर्वाद प्राप्त करना बहुत सुलभ होता है। जिनकी कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर, नीच या पीड़ित स्थिति में होता है, उनके लिए इस दिन किए जाने वाले उपाय और मंत्र-जाप विशेष लाभ प्रदान करते हैं। ज्योतिषियों का कहना है कि इस दिन प्रार्थना, ध्यान और आभार व्यक्त करने से, कोई भी अपनी कुंडली में बृहस्पति को मजबूत कर सकता है। ज्ञान, करियर, रिश्तों और आध्यात्मिक विकास के रास्ते में आने वाली रुकावटों को दूर कर सकता है।

पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व

गुरु पूर्णिमा में पूर्णिमा तिथि का स्वामी स्वयं चंद्रमा है, जो व्यक्ति के मन, भावनाओं और मानसिक ऊर्जा को नियंत्रित करता है। आषाढ़ पूर्णिमा के दिन चंद्रमा 16 कलाओं से युक्त होता है। इस दिन गुरु (ज्ञान) और चंद्रमा (मन) की ऊर्जा मिलकर साधक को आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि, एकाग्रता और मानसिक शांति प्रदान करती है। इसलिए, गुरु पूर्णिमा को साल की सबसे आध्यात्मिक रूप से चार्ज पूर्णिमा में से एक माना जाता है, क्योंकि यह बताती है:

  • जीवन के अर्थ के बारे में सोचें और समझने की कोशिश करें।
  • नकारात्मक भावनाओं को छोड़ें, अपनी समझ को विकसित करें।
  • आभार जताएं और विनम्रता रखें।
  • भगवान की चेतना से जुड़ें।

कुंडली में गुरु की स्थिति का परिणाम

ज्योतिष के हिसाब से, बृहस्पति विस्तार, उम्मीद, अच्छाई और खुशहाली का ग्रह है। जन्म कुंडली में बृहस्पति मजबूत होने पर जातक को पढ़ाई में सफलता, रुपये-पैसे में स्थिरता, समाज में सम्मान, परिवार के रिश्ते अच्छे रहते हैं, आध्यात्मिक रुझान, समझदारी पूर्ण और सही फैसला लेते हैं। इसके उलट, कमजोर बृहस्पति अनिश्चितता, देर से सफलता, गाइडेंस की कमी, पढ़ाई में दिक्कतें या गलत फैसला लेने का कारण बन सकता है।

इसलिए जताएं अपने गुरु का आभार

हर इंसान का जीवन सिर्फ़ ग्रहों की चाल से ही नहीं, बल्कि कर्म से भी प्रभावित होती है। बृहस्पति इंसान को समझदारी और अनुशासन से उस कर्म को समझने और बदलने में मदद करता है। गुरु पूर्णिमा पर माता-पिता, टीचर, आध्यात्मिक गुरु या गुरुओं को सम्मान देना, बृहस्पति का प्रतीक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गुरु का आशीर्वाद कर्म की रुकावटों को दूर करने और तरक्की और कामयाबी की संभावनाओं को आकर्षित करने में मदद करता है।

गुरु पूर्णिमा 2026 के उपाय

1. गुरु पूजा : अपने गुरु या गुरुओं को पीली मिठाई या फूल, फल या एक छोटी सी प्रार्थना दें। अगर आपके गुरु शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हैं, तो उनकी शिक्षाओं के प्रति आभार जताएं।

2. बृहस्पति के मंत्रों का जाप करें : गुरु मंत्रों का जाप करने से बृहस्पति की एनर्जी बढ़ती है। इन मंत्रों का जाप करें :

ॐ गुरवे नमः, ॐ बृं बृहस्पतये नमः। इन मंत्रों का 108 बार श्रद्धा से जाप करना बहुत शुभ माना जाता है।

3. ध्यान करें : गुरु पूर्णिमा के दिन, ध्यान मन को शांत करने और ध्यान लगाने में मदद करता है। कुछ पल का मौन और सोच-विचार खुद के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए काफी है।

4. दान करें : बृहस्पति उदारता का ग्रह है। खाना, किताबें, पढ़ाई के सामान, हल्दी, या पीले कपड़े दान करने या स्टूडेंट्स और टीचरों की मदद करने से भगवान का आशीर्वाद और अच्छे कर्म मिलते हैं।

5. कुछ नया सीखें : गुरु पूर्णिमा को कुछ नया सीखने के लिए या नई शुरुआत के लिए बहुत शुभ दिन माना जाता है।

गुरु पूर्णिमा 2026 की लकी राशियां

गुरु पूर्णिमा का सभी राशियों पर अच्छा असर पड़ता है, लेकिन बृहस्पति की प्रिय राशियों पर इसका शुभ प्रभाव पड़ता है। इनमें शामिल हैं

मेष : करियर गाइडेंस और पढ़ाई के ज्यादा मौके।

कर्क : भावनाओं और पारिवारिक रिश्तों में मजबूती आएगी।

सिंह : लीडरशिप स्किल्स और कॉन्फिडेंस बढ़ेगा।

धनु : बृहस्पति की राशि होने के कारण, धनु राशि वालों को नई उम्मीद, आध्यात्मिक तरक्की और पढ़ाई में सफलता की उम्मीद करनी चाहिए।

मीन : आपके लिए ध्यान करने या कुछ क्रिएटिव करने का बहुत अच्छा समय है।

गुरु पूर्णिमा 2026: अपने कर्मों से अपना भाग्य बदलने का मौका

गुरु पूर्णिमा का दिन बड़े बदलावों का दिन होता है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, ज्ञान में किस्मत बदलने की ताकत होती है। यह पूर्णिमा लोगों को अहंकार छोड़ने, विनम्रता अपनाने, जरूरत पड़ने पर मार्गदर्शन लेने और धैर्य, दया, ईमानदारी और उदारता जैसे गुण अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है। ये गुण बृहस्पति की ऊर्जा के साथ गहराई से जुड़ते हैं और माना जाता है कि ये हमेशा रहने वाला आशीर्वाद देते हैं। गुरु पूर्णिमा 2026 सिर्फ एक पारंपरिक त्योहार ही नहीं है, बल्कि ज्ञान और आभार की ताकत की एक कॉस्मिक याद भी है जो बदलाव ला सकती है।

Guru Purnima 2026 Date: 28 या 29, कब है गुरु पूर्णिमा? जानें स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और सही तारीख

Guru Purnima 2026 Date: 28 या 29, कब है गुरु पूर्णिमा? जानें स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और सही तारीख

Guru Purnima 2026 Date: गुरु पूर्णिमा, जिसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं, हिंदू धर्म के अत्यंत प्रसिद्ध त्योहारों में से एक है। यह पर्व अपने शिक्षक या गुरु के प्रति आभार और सम्मान प्रकट करने का अवसर प्रदान करता है। हिंदू धर्म में गुरु का स्थान माता-पिता और भगवान से भी ऊपर माना जाता है। “गुरु” शब्द संस्कृत से आया है, जहां ‘गु’ का मतलब है ‘अंधेरा’ या ‘अज्ञान’ और ‘रु’ का मतलब है ‘अंधेरे को दूर करने वाला’। गुरु पूर्णिमा न सिर्फ हिंदू धर्म में मनाई जाती है, बल्कि जैन और बौद्ध धर्म में भी इसका बहुत महत्व है।

हिंदू धर्म में, गुरु पूर्णिमा महर्षि वेद व्यास के सम्मान में मनाई जाती है। वहीं, बौद्ध धर्म में, यह सारनाथ में भगवान बुद्ध के पहले उपदेश का प्रतीक है। जबकि, जैन धर्म में, यह भगवान महावीर के पहले शिष्य, गौतम स्वामी के सम्मान में मनाई जाती है। कुल मिलाकर, यह त्योहार आभार, सीखने और आध्यात्मिक विकास का प्रतीक है। गुरु पूर्णिमा के दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है, इस दिन व्यक्ति का अन्न दान भी किया जाता है, मान्यता है कि अन्न दान करने से लोगों के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं, मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्यक्ति को स्नान-ध्यान करने के बाद गुरु के पास जाकर उनकी विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए।

गुरु पूर्णिमा 2026: तारीख, समय और तिथि

द्रिक पंचांग के अनुसार, गुरु पूर्णिमा 2026 बुधवार, 29 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी। यह त्योहार हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार आषाढ़ महीने की पूर्णिमा (पूर्णिमा) को पड़ता है।

गुरु पूर्णिमा समय

पूर्णिमा तिथि शुरू : 28 जुलाई, 2026 को शाम 06:18 बजे

पूर्णिमा तिथि खत्म : 29 जुलाई, 2026 को रात 08:05 बजे

गुरु पूर्णिमा 2026 : मतलब और महत्व

सनातन धर्म में गुरु पूर्णिमा का पर्व अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन गुरुओं को समर्पित होता है, जिन्होंने हमें ज्ञान, संस्कार और सही दिशा दिखाई है। इसी पावन तिथि पर महर्षि वेद व्यास जी का जन्म भी हुआ था, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन गुरुजनों का पूजन कर उनका आशीर्वाद लेने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और ज्ञान का प्रकाश फैलता है।

गुरु पूर्णिमा स्नान दान मुहूर्त

गुरु पूर्णिमा के दिन स्नान और दान ब्रह्म मुहूर्त में करना चाहिए। इसका मुहूर्त सुबह 4 बजकर 17 मिनट से लेकर सुबह 4 बजकर 59 मिनट तक रहेगा।

क्यों मनाई जाती है गुरु पूर्णिमा?

धार्मिक पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ पूर्णिमा के दिन ही महाभारत, 18 पुराणों और ब्रह्मसूत्रों के रचयिता महर्षि वेद व्यास जी का जन्म हुआ था। महर्षि व्यास को ही सनातन परंपरा में प्रथम गुरु का दर्जा प्राप्त है, क्योंकि उन्होंने ही चारों वेदों का वर्गीकरण किया था। इसी कारण गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन शिष्य अपने गुरुओं की पूजा करते हैं, उन्हें उपहार भेंट करते हैं और उनके बताए सन्मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं।

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