Guru Purnima 2026: 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा पर 56 साल बाद एक साथ 3 राजयोगों का बना दुर्लभ संयोग, जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Guru Purnima 2026: हिंदू धर्म में आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चारों वेदों और महाभारत के रचयिता ऋषि वेद व्यास का जन्म हुआ था। इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। साथ ही, इस दिन गुरु पूर्णिमा का पर्व भी पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन धार्मिक कार्यक्रमों के अलावा लोग अपने गुरुओं का सम्मान करते हैं और उनका आभार जताते हैं।

माना जाता है कि इस दिन जो लोग अपने माता-पिता और बड़े-बुजुर्गों को अपना गुरु मानकर उनका सम्मान करते हैं, उन्हें सद्गति प्राप्त होती है। इस दिन अपने गुरु के पास जाकर उनके चरण स्पर्श करके उनका आशीर्वाद लेना चाहिए। इस बार गुरु पूर्णिमा पर ग्रहों का बहुत अद्भुत और शुभ संयोग बन रहा है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, ऐसा संयोग 56 वर्षों में पहली बार देखने को मिल रहा है। आइए जानें इस दिन की विशेष पूजा विधि, मुहूर्त और इस दिन बन रहे 3 राजयोगों के बारे में

गुरु पूर्णिमा 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 28 जुलाई 2026 को शाम 06:18 बजे से होगी। इसका समापन 29 जुलाई को रात 08:05 बजे होगा। उदयातिथि के अनुसार, गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व 29 जुलाई को मनाया जाएगा।

सत्यनारायण व्रत और गुरु पूजन का समय

29 जुलाई को सुबह 05:41 बजे से लेकर प्रातः 09:47 बजे तक पूजा का सबसे उत्तम मुहूर्त रहेगा। इस दौरान आप सत्यनारायण भगवान की कथा और अपने गुरु का पूजन कर सकते हैं।

56 साल बाद बन रहे हैं 3 राजयोग

ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार गुरु पूर्णिमा पर एक साथ 3 राजयोगों का निर्माण हो रहा है। इस दिन बुधादित्य राजयोग, शश महापुरुष और हंस राजयोग बन रहा है। बुधादित्य राजयोग सूर्य और बुध की युति से बनता है, जो बौद्धिक क्षमता, करियर और मान-सम्मान में वृद्धि करेगा। वहीं, इस दिन ग्रहों की विशेष स्थिति के कारण शश राजयोग जैसे शक्तिशाली योग भी बन रहे हैं।

गुरु पूर्णिमा पूजा मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 04:17 से 04:59 बजे तक

प्रातःकाल पूजा का श्रेष्ठ समय : सुबह 05:41 से 09:05 बजे तक

विजय मुहूर्त : दोपहर 02:43 से 03:37 बजे तक

सांध्यकाल मुहूर्त : शाम 07:14 से रात 08:17 बजे तक

राहुकाल : दोपहर 12:27 PM से 02:08 PM बजे तक

पूजा विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और गुरु/महर्षि वेदव्यास जी का ध्यान करके व्रत/पूजन का संकल्प लें।

महर्षि वेदव्यास जी (आदि गुरु) के चित्र या मूर्ति पर रोली, चंदन, अक्षत और पीले फूल अर्पित करें।

अपने प्रत्यक्ष गुरुजनों का आशीर्वाद लें, वस्त्र/फल/दक्षिणा भेंट करें और उनका पूजन करें।

सावन में शिव पूजा से इन 5 राशियों की चमक सकती है किस्मत, जाने पूजा के सही नियम

Guru Purnima 2026 Date: कब है गुरु पूर्णिमा? कुंडली से गुरु दोष दूर करने के लिए इस दिन कर सकते हैं 5 उपाय

Guru Purnima 2026 Date: हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ माह में आने वाली पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा भी कहा जाता है। यह पूर्णिमा सभी पूर्णिमा में महत्वपूर्ण मानी गई है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार इस तिथि पर किए गए दान-पुण्य द्वारा व्यक्ति को शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है। गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरु का आदर-सत्कार करते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं। गुरु पूर्णिमा यानि आषाढ़ पूर्णिमा के दिन महाभारत और वेदों के रचयिता महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था। इस वजह से इस दिन वेद व्यास जयंती मनाते हैं। यह दिन कुंडली के गुरु दोष को दूर करने का भी एक अच्छा अवसर है। इस साल आषाढ़ पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई को शाम 6:18 बजे से शुरू होगी और यह 29 जुलाई को रात 8:05 बजे तक मान्य होगी। उदयातिथि के अनुसार, गुरु पूर्णिमा का पर्व 29 जुलाई बुधवार को मनाया जाएगा।

गुरु पूर्णिमा 2026 मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त : प्रात: 04:17 बजे से लेकर प्रात: 04:59 बजे तक

लाभ-उन्नति मुहूर्त : सुबह 05:41 बजे से सुबह 07:22 बजे तक

अमृत-सर्वोत्तम : मुहूर्त सुबह 07:22 बजे से सुबह 09:04 बजे तक

शुभ-उत्तम मुहूर्त : सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक

चर-सामान्य मुहूर्त : दोपहर 03:51 बजे से शाम 05:32 बजे तक

लाभ-उन्नति मुहूर्त : शाम 05:32 बजे से शाम 07:14 बजे तक

प्रीति योग और उत्तराषाढा नक्षत्र में गुरु पूर्णिमा

इस साल की गुरु पूर्णिमा प्रीति योग और उत्तराषाढा नक्षत्र में है। प्रीति योग प्रात:काल से लेकर रात के 11 बजकर 58 मिनट तक है, उसके बाद से आयुष्मान योग बनेगा। प्रीति योग के स्वामी ग्रह बुध और देवता भगवान विष्णु हैं। यह योग नए रिश्तों की शुरुआत और विवादों के निपटारे के लिए उत्तम माना जाता है। इस दिन उत्तराषाढा नक्षत्र सुबह से लेकर दोपहर 03:37 पी एम तक है, उसके बाद से श्रवण नक्षत्र है।

कुंडली से गुरु दोष दूर करने के अचूक उपाय

कुंडली में गुरु कमजोर या पीड़ित हो, तो व्यक्ति के विवाह, करियर, शिक्षा और मान-सम्मान में बाधाएं आने लगती हैं। गुरु पूर्णिमा का दिन गुरु दोष के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इस दिन आप निम्नलिखित उपाय कर सकते हैं:

  • गुरु पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की संयुक्त पूजा करें। पूजा में पीले फूल, पीले फल, चंदन, पंचामृत और बेसन के लड्डू अर्पित करें। इस दिन घर पर सत्यनारायण भगवान की कथा सुनना या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना अत्यंत लाभकारी होता है।
  • पूजा के समय पीले हकीक या तुलसी की माला से `ॐ बृं बृहस्पतये नमः` और `ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः` मंत्रों का कम से कम 108 बार जाप करें।
  • गुरु पूर्णिमा पर किसी मंदिर या जरूरतमंद को पीले रंग की वस्तुएं दान करें। जैसे— चने की दाल, हल्दी, पीला अनाज, केसर, पीली मिठाइयां या पीले वस्त्र। इससे गुरु ग्रह मजबूत होते हैं।
  • यदि कुंडली में गुरु अत्यधिक कमजोर है, तो इस दिन (और उसके बाद हर गुरुवार को) नहाने के पानी में एक चुटकी हल्दी मिलाकर स्नान करें। स्नान के पश्चात पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
  • गुरु पूर्णिमा के दिन शिवलिंग पर चने की दाल के 108 साबुत दाने “ॐ नमः शिवाय” बोलते हुए एक-एक करके अर्पित करें। इससे भगवान शिव के साथ-साथ विष्णु जी की भी असीम कृपा मिलती है।

Devshayani Ekadashi 2026: हरिशयनी एकादशी से चार माह के लिए लग जाएगी मांगलिक कार्यों पर रोक, इस विधि से कराएं भगवान विष्णु को शयन

Guru Purnima 2026 Date: इस साल प्रीति योग और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में मनाई जाएगी गुरु पूर्णिमा, जानें तारीख, मुहूर्त और महत्व

Guru Purnima 2026 Date: हिंदू धर्म में गुरु पूर्णिमा का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। यह दिन गुरुओं के प्रति सम्मान, कृतज्ञता व्यक्त करने और कुंडली में देवगुरु बृहस्पति की कृपा प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इस दिन को महाभारत और पुराणों के रचयिता महर्षि वेदव्यास के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इसी कारण इसे ‘व्यास पूर्णिमा’ भी कहते हैं। इस दिन गुरु की पूजा और आशीर्वाद प्राप्त करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और बुद्धि, ज्ञान तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस साल गुरु पूर्णिमा पर प्रीति योग और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का योग बन रहा है। यह दिन गुरु दोष दूर करने के लिए भी विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।

प्रीति योग और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में गुरु पूर्णिमा

इस साल की गुरु पूर्णिमा पर प्रीति योग और उत्तराषाढा नक्षत्र बन रहा है। प्रीति योग प्रात:काल से लेकर रात के 11 बजकर 58 मिनट तक है, उसके बाद से आयुष्मान योग बनेगा। प्रीति योग के स्वामी ग्रह बुध और देवता भगवान विष्णु हैं। प्रीति योग में आप नए रिश्तों की शुरुआत कर सकते हैं, कोई विवाद है तो उसको निपटाने का प्रयास कर सकते हैं या कोई महत्वपूर्ण डील फाइनल करके मान-सम्मान प्राप्त कर सकते हैं। उत्तराषाढा नक्षत्र सुबह से लेकर दोपहर 03:37 पी एम तक है, उसके बाद से श्रवण नक्षत्र है।

गुरु पूर्णिमा 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है। साल 2026 में गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई, बुधवार को मनाई जाएगी।

पूर्णिमा तिथि का आरंभ : 28 जुलाई 2026 को शाम 06:18 बजे से

पूर्णिमा तिथि का समापन : 29 जुलाई 2026 को रात 08:05 बजे तक

पूजन व स्नान-दान के शुभ चौघड़िया मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 04:17 से 04:59 तक

लाभ-उन्नति मुहूर्त : सुबह 05:41 से 07:22 तक

अमृत मुहूर्त : सुबह 07:22 से 09:04 तक

शुभ मुहूर्त : सुबह 10:46 से दोपहर 12:27 तक

गुरु पूर्णिमा का महत्व

गुरु पूर्णिमा के दिन महर्षि वेद व्यास जी का जन्म हुआ था। इस वजह से हर इस दिन वेद व्यास जयंती मनाते हैं और उनकी पूजा करते हैं। वेद व्यास जी ने महाभारत और वेदों की रचना की थी। भारतीय संस्कृति में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सभी गुरुजनों का सम्मान करते हैं और उनकी दी गई शिक्षा के प्रति आभार और कृतज्ञता जताते हैं। गुरु के ज्ञान से ही जीवन में सफलता के लिए हमें सही मार्ग मिलता है।

Sawan 2026: 29 या 30 जुलाई, कब से शुरू हो रहा है सावन का महीना? जानें इस साल कितने होंगे सावन के सोमवार और सावन शिवरात्रि कब मनाई जाएगी

Yogini Ekadashi 2026 Vrat Katha: गृहस्थ आज करेंगे योगिनी एकादशी का व्रत, आज विष्णु पूजा का पुण्य पाने के लिए जरूर सुनें ये व्रत कथा

Yogini Ekadashi 2026 Vrat Katha: हिंदू धर्म हर हिंदी माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। योगिनी एकादशी का व्रत भी इनमें से एक है। यह व्रत हर साल आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। इस साल योगिनी एकादशी का व्रत 10 जुलाई और 11 जुलाई दो दिन किया जाएगा। 10 जुलाई को श्री हरि के गृहस्थ भक्त योगिनी एकादशी का व्रत रखेंगे, जबकि 11 जुलाई को वैष्णव लोग व्रत रहेंगे। व्रत के दिन पूजा के समय व्रती को योगिनी एकादशी व्रत कथा जरूर सुननी चाहिए। इससे स्वर्ग की प्राप्ति होती है और 80 हजार ब्राह्मणों को भोज कराने के बराबर पुण्य लाभ मिलता है।

अलकापुरी के राजा और हेममाली की कथा

योगिनी एकादशी की व्रत कथा भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को सुनाई थी। स्वर्ण नगरी अलकापुरी में धनपति कुबेर राजा करते थे। वे भगवान शिव के परम भक्त थे और रोज उनकी पूजा के लिए मानसरोवर से सुंदर और ताजे फूल लाने का कार्य हेममाली नाम का एक यक्ष करता था।

हेममाली की पत्नी का नाम विशालाक्षी था, जो अत्यंत रूपवान थी और हेममाली उससे अगाध प्रेम करता था। एक दिन हेममाली रोज की तरह मानसरोवर से शिव पूजा के लिए पुष्प लेकर आया, लेकिन महल जाने के बजाय वह अपनी पत्नी के पास घर पर ही रुक गया। पत्नी के साथ आमोद-प्रमोद में व्यस्त हेममाली को समय का भान ही नहीं रहा। उधर, भगवान शिव की पूजा के लिए फूलों का इंतजार करते रहे। जब बहुत देर हो गई, तो राजा ने क्रोध में आकर अपने सेवकों से हेममाली के बारे में पूछा।

सेवकों ने पता लगाकर राजा को बताया, “महाराज! हेममाली अपनी पत्नी के प्रेम में अंधा होकर अपने घर पर ही रुक गया है और वहीं रमण कर रहा है।” यह सुनकर राजा कुबेर अत्यंत क्रोधित हो गए और उन्होंने तुरंत हेममाली को दरबार में उपस्थित होने का आदेश दिया। डर से कांपता हुआ हेममाली राजा के सामने उपस्थित हुआ। क्रोधित कुबेर ने उससे कहा, “अरे पापी! तूने मेरे परम आराध्य देवों के देव महादेव की पूजा का अनादर किया है। तू कर्तव्यच्युत हुआ है, इसलिए मैं तुझे श्राप देता हूं कि तू स्त्री के वियोग को भोगेगा और मृत्युलोक (पृथ्वी) पर जाकर कोढ़ी (कुष्ठ रोगी) हो जाएगा।”

राजा कुबेर के श्राप के प्रभाव से हेममाली उसी क्षण स्वर्ग से पृथ्वी पर गिर पड़ा। उसका सुंदर शरीर कुष्ठ रोग से ग्रसित हो गया और उसकी त्वचा गलने लगी। उसकी पत्नी भी उससे बिछड़ गई। वह पृथ्वी पर भूख, प्यास और भयंकर शारीरिक पीड़ा से तड़पता हुआ जंगलों में भटकने लगा। शिव पूजा के प्रभाव के कारण उसकी याददाश्त नष्ट नहीं हुई थी, इसलिए वह अपने पाप पर निरंतर पश्चाताप करता रहता था।

घूमते-घूमते एक दिन वह हिमालय पर्वत पर मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम पहुंचा। हेममाली की दयनीय स्थिति देखकर ऋषि मार्कण्डेय ने दयापूर्वक उससे पूछा, “तुमने ऐसा कौन सा घोर पाप किया है, जिसके कारण तुम्हारी यह दुर्दशा हुई है?” हेममाली ने रोते हुए अपनी पूरी कहानी और राजा कुबेर के श्राप के बारे में ऋषि को सच-सच बता दिया। उसने कहा, “हे मुनिवर! मैंने अज्ञानता और काम के वश में आकर भूल की है। कृपया मुझ पर कृपा करें और इस कष्ट से मुक्ति का कोई उपाय बताएं।”

ऋषि मार्कण्डेय ने कहा, “तुमने मेरे सामने सच बोला है, इसलिए मैं तुम्हें एक उपाय बताता हूँ। आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की ‘योगिनी एकादशी’ का व्रत करो। इस व्रत के पुण्य प्रभाव से तुम्हारे सभी पाप नष्ट हो जाएंगे और तुम पुनः अपने पुराने स्वरूप को प्राप्त कर लोगे।”

हेममाली ने विधि-विधान और निष्ठा के साथ योगिनी एकादशी का व्रत रखा और रात्रि जागरण किया। इस व्रत के प्रभाव से हेममाली का कुष्ठ रोग पूरी तरह ठीक हो गया। वह पहले की तरह अत्यंत सुंदर और दिव्य स्वरूप वाला हो गया। इसके बाद वह वापस अलकापुरी लौट गया और अपनी पत्नी विशालाक्षी के साथ पुनः सुखपूर्वक रहने लगा।

Guru Purnima 2026: इस साल गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरु को राशि अनुसार दें उपहार, जानें आपकी राशि के अनुसार क्या दे सकते हैं भेंट

Guru Purnima 2026: इस साल गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरु को राशि अनुसार दें उपहार, जानें आपकी राशि के अनुसार क्या दे सकते हैं भेंट

Guru Purnima 2026: भारतीय संस्कृति में “गुरु” का स्थान भगवान से भी ऊपर माना गया है, क्योंकि गुरु ही शिष्य को अज्ञानता के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। इस दिन लोग अपने गुरुओं के पास जाते हैं, उनका आशीर्वाद लेते हैं और उनके प्रति आभार व्यक्त करते हैं। जिनके गुरु इस संसार में नहीं हैं, वे उनके चित्र की पूजा करते हैं या गुरु स्वरूप मानकर माता-पिता और शिक्षकों का सम्मान करते हैं। गुरु पूर्णिमा हर साल आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। इस पावन अवसर पर अपने गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए अपनी राशि के अनुसार शुभ वस्तुओं को भेंट या दान करना बेहद फलदायी माना जाता है।

हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा कहा जाता है। चूंकि यह दिन महान ऋषि वेदव्यास जी के जन्मदिवस के रूप में भी मनाया जाता है, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। साल 2026 में गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई 2026, बुधवार को मनाई जाएगी। नीचे सभी 12 राशियों के अनुसार गुरु को भेंट करने या दान देने योग्य वस्तुओं की सूची दी गई है :

आपकी राशि अनुसार गुरु के लिए भेंट

मेष राशि : मेष राशि के जातकों को गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरु को लाल रंग के वस्त्र, मूंगा, या लाल चंदन भेंट करना चाहिए। इसके साथ ही गेहूं और गुड़ का दान करना भी शुभ रहेगा।

वृषभ राशि : इस राशि के लोग अपने गुरु को सफेद या रेशमी वस्त्र भेंट कर सकते हैं। इसके अलावा मिश्री, चांदी या चावल का दान करने से गुरु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

मिथुन राशि : मिथुन राशि वालों को अपने गुरु को हरे रंग के वस्त्र, धार्मिक पुस्तकें, या मूंग की दाल भेंट करनी चाहिए। गुरु के सानिध्य में गायत्री मंत्र का जाप करना भी आपके लिए लाभकारी रहेगा।

कर्क राशि : कर्क राशि के जातकों को गुरु को सफेद चंदन, चावल, या चांदी का कोई पात्र भेंट करना चाहिए। जरूरतमंदों को दूध या मिठाई का दान देना भी उत्तम माना जाता है।

सिंह राशि : सिंह राशि के लोग अपने गुरु को पीले या सुनहरे रंग के वस्त्र, केसर, या तांबे का पात्र भेंट करें। इसके अलावा गेहूं और धार्मिक ग्रंथों का दान भी बहुत फलदायी होता है।

कन्या राशि : कन्या राशि वालों को गुरु को किताबें, पेन, या शिक्षण सामग्री भेंट करनी चाहिए। इसके साथ ही हरे फल या मूंग की दाल का दान करना आपके बौद्धिक विकास के लिए शुभ है।

तुला राशि : तुला राशि के जातकों को अपने गुरु को सफेद रेशमी वस्त्र या मिश्री भेंट करनी चाहिए। आप आश्रम या मंदिर में चावल और घी का दान भी कर सकते हैं।

वृश्चिक राशि : इस राशि के लोग अपने गुरु को लाल या महरून रंग के वस्त्र, तांबे के बर्तन, या कलावा भेंट करें। जरूरतमंदों को भोजन कराना भी आपके लिए शुभ रहेगा।

धनु राशि : धनु राशि के स्वामी स्वयं बृहस्पति (गुरु) हैं। आपको अपने गुरु को पीले वस्त्र, चना दाल, केसर, या हल्दी भेंट करनी चाहिए। गुरु से गुरु मंत्र दीक्षा लेना आपके लिए सबसे सर्वोत्तम रहेगा।

मकर राशि : मकर राशि वालों को गुरु को नीले या भूरे रंग के वस्त्र या कोई उपयोगी कंबल भेंट करना चाहिए। साथ ही, गुरु के चरणों में तिल या उड़द की दाल का दान समर्पित करें।

कुंभ राशि : इस राशि के जातक अपने गुरु को सफेद या नीले रंग के वस्त्र, सूखे मेवे (जैसे काजू, बादाम) या औषधि भेंट कर सकते हैं। इसके अलावा अनाथालय या वृद्धाश्रम में अन्न दान करना विशेष फल देता है।

मीन राशि : मीन राशि के जातकों को गुरु को पीले वस्त्र, सोने की कोई छोटी वस्तु, पुखराज (यदि सामर्थ्य हो) या धार्मिक पुस्तकें (जैसे भगवद गीता या रामायण) भेंट करनी चाहिए। हल्दी और चने की दाल का दान करना भी बहुत शुभ है।

Yogini Ekadashi 2026: 10 या 11 जुलाई कब किया जाएगा योगिनी एकादशी का व्रत? जानें सही तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त

Bhadli Navami 2026: 22 या 23 जुलाई, कब है भड़ली नवमी? जानें सही तारीख, धार्मिक महत्व और इस दिन के अबूझ मुहूर्त

Bhadli Navami 2026: हिंदू धर्म में भड़ली नवमी तिथि को अत्यंत शुभ माना गया है। यह दिन पूरे साल में आने वाले उन खास अवसरों में से एक है, जब कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य करने के लिए दिन, समय या मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं होती है। इस दिन पूरे समय सिद्ध मुहूर्त होता है। यदि आप इस वर्ष कोई बड़ा मांगलिक कार्य या खरीदारी करने की योजना बना रहे हैं, तो चातुर्मास शुरू होने से पहले भड़ली नवमी का दिन आपके लिए सर्वश्रेष्ठ साबित हो सकता है।

हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भड़ली नवमी मनाई जाती है। इसे भड़रिया नवमी, कंदर्प नवमी आदि नामों से भी जाना जाता है। इस तिथि की महत्ता और प्रभाव अक्षय तृतीया और देवउठनी एकादशी के समान ही माना गया है। इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। लोग विष्णु सहस्रनाम का पाठ करते हैं। हिंदू धर्म में इस तिथि का विशेष धार्मिक महत्व है और इसे एक बेहद पवित्र ‘अबूझ मुहूर्त’ माना जाता है। आइए जानें इस साल भड़ली नवमी की पावन तिथि कब है और इसका धार्मिक महत्व क्या है ?

भड़ली नवमी 2026 तारीख और शुभ समय

पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भड़ली नवमी (या भड्डली नवमी) कहा जाता है।

नवमी तिथि का आरंभ : 22 जुलाई 2026 को सुबह 05:16 बजे से

नवमी तिथि का समापन : 23 जुलाई 2026 को सुबह 07:03 बजे तक

मुख्य तिथि : उदयातिथि के अनुसार भड़ली नवमी का पर्व 22 जुलाई 2026 को ही मनाया जाएगा।

अबूझ मुहूर्त का क्या मतलब है?

हिंदू शास्त्रों के अनुसार, भड़ली नवमी को ‘अबूझ मुहूर्त’ माना गया है। इसका तात्पर्य यह है कि इस दिन समय या नक्षत्र देखने की आवश्यकता नहीं होती। पूरा दिन अपने आप में सिद्ध और शुभ होता है। यदि किसी व्यक्ति के विवाह, गृह प्रवेश या मुंडन आदि के लिए सामान्य दिनों में कोई शुभ मुहूर्त नहीं निकल पा रहा हो, तो वे बिना किसी हिचकिचाहट के इस दिन अपने मांगलिक कार्य संपन्न कर सकते हैं। इस दिन किए गए कार्यों में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आता और सफलता प्राप्त होती है।

भड़ली नवमी का धार्मिक महत्व

चातुर्मास से पहले अंतिम शुभ मुहूर्त : भड़ली नवमी के ठीक तीन दिन बाद देवशयनी एकादशी होती है। इस दिन से चातुर्मास की शुरुआत होती है। चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं और इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे सभी मांगलिक कार्यों पर पूरी तरह रोक लग जाती है। इसलिए, भड़ली नवमी को चातुर्मास से पहले शुभ कार्यों के लिए साल का आखिरी और सबसे सुरक्षित मौका माना जाता है।

अक्षय तृतीया के समान फलदायी : इस तिथि की महत्ता अक्षय तृतीया और देवउठनी एकादशी के समान ही मानी गई है। मान्यता है कि इस दिन नया व्यवसाय शुरू करने, सोना या वाहन खरीदने, भूमि पूजन या नया काम शुरू करने से घर में सुख-समृद्धि और बरकत आती है।

भगवान विष्णु की कृपा : यह दिन मुख्य रूप से जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन मंदिरों और घरों में भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ किया जाता है और भजन-कीर्तन आयोजित होते हैं।

गुप्त नवरात्रि का समापन : इसी तिथि के साथ आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का समापन भी होता है, जिससे इस दिन की आध्यात्मिक और धार्मिक शक्ति और अधिक बढ़ जाती है।

Guru Purnima 2026: आषाढ़ माह में कब मनाई जाएगी गुरु पूर्णिमा, जानें इसकी सही तारीख और इस दिन गुरु को क्या दें भेंट

Guru Purnima 2026: आषाढ़ माह में कब मनाई जाएगी गुरु पूर्णिमा, जानें इसकी सही तारीख और इस दिन गुरु को क्या दें भेंट

Guru Purnima 2026: गुरू पूर्णिमा का दिन हमारे देश में हर साल बहुत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन धार्मिक आयोजनों के साथ ही माता-पिता सहित अपने सभी गुरुओं को नमन करते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं। हिंदू धर्म में गुरु को भगवान से भी ऊंचा स्थान दिया जाता है। गुरु ही हमें सही और गलत में अंतर करना सिखाते हैं, भक्त को भगवान से मिलाते हैं और जीवन का सही मार्ग दिखाते हैं। गुरु के इसी महत्व का उत्सव आषाढ़ मास में हर साल मनाया जाता है। यह दिन सिर्फ शिक्षकों के लिए नहीं है, बल्कि हर उस व्यक्ति के प्रति आभार जताने का मौका है जिसने हमें जीवन में सही राह दिखाई हो। आइए जानें इस साल गुरु पूर्णिमा कब मनाई जाएगी और इस दिन हम अपने गुरु को क्या भेंट दे सकते हैं ?

कब है गुरु पूर्णिमा?

इस साल पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 28 जुलाई 2026 को शाम 6 बजकर 18 मिनट पर हो रही है। यह अगले दिन 29 जुलाई 2026 को रात 8 बजकर 5 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि को मानते हुए देश भर में गुरु पूर्णिमा का पर्व 29 जुलाई को ही मनाया जाएगा।

गुरु पूर्णिमा की पूजा विधि

ऋषिकेश के ज्योतिषी अखिलेश पांडेय ने नेटवर्क 18 को बताया कि इस दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान आदि के बाद साफ कपड़े पहनें। इसके बाद अपने गुरु का ध्यान करें और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें। इस दिन गुरु की सेवा करना और उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लेना बहुत शुभ माना जाता है। लोग इस दिन दान-पुण्य और पाठ-पूजा भी करते हैं।

गुरु को दिखावा नहीं अपनी भावना की भेंट दें

गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर आप क्या उपहार दे रहे हैं, ये मायने नहीं रखता। गुरु के प्रति आपका आदर भाव सबसे जरूरी है। मान्यताओं के अनुसार आप अपने गुरु को किताबें, धार्मिक ग्रंथ, साफ कपड़े, फल, मिठाई, पेन या डायरी दे सकते हैं। इसके अलावा ज्ञान और तरक्की के प्रतीक के रूप में पौधा भेंट करना भी बहुत अच्छा माना जाता है।

ये गलतियां करने से बचें

इस पवित्र दिन पर किसी भी हाल में अपने गुरु का आदर करना चाहिए। भूल से भी उनका अपना नहीं करना चाहिए। अगर गुरु से किसी बात पर मतभेद भी हो, तब भी इस दिन पूरी विनम्रता बनाए रखें। अगर आपके जीवन में कोई प्रत्यक्ष गुरु नहीं हैं, तो आप अपने माता-पिता या शिक्षकों को गुरु मानकर उनके प्रति अपनी कृतज्ञता जाहिर कर सकते हैं।

Chaturmas 2026: जानें कब से लग रहा है चातुर्मास, सही तारीख, महत्व और नियम क्या हैं? इस दिन रुक जाएंगे मांगलिक कार्य

Jyeshtha Purnima 2026: क्या है ज्येष्ठ पूर्णिमा की सही तारीख? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और स्नान-दान का समय

Jyeshtha Purnima 2026: पूर्णिमा तिथि का हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और प्रमुख स्थान है। इस दिन माता लक्ष्मी के साथ ही भगवान सत्यनारायण और चंद्र देव की पूजा का विधान है। बहुत से लोग पूर्णिमा तिथि के शुभ अवसर पर सत्यनारायण की कथा कहते या सुनते हैं। पूरे साल में 12 पूर्णिमा तिथियां आती हैं, जिनमें से ज्येष्ठ पूर्णिमा भी एक है। इस साल ज्येष्ठ पूर्णिमा 29 जून, सोमवार को मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। सुहागिन महिलाएं इस दिन पति की लंबी उम्र के लिए वट सावित्री पूर्णिमा (वट पूर्णिमा) का व्रत भी रखती हैं।

ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026 तिथि

हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि की शुरुआत और समाप्ति का समय इस प्रकार है :

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ : 29 जून 2026 को प्रातः 03:06 बजे से

पूर्णिमा तिथि समाप्त : 30 जून 2026 को प्रातः 05:26 बजे तक

उदयातिथि के अनुसार : पूर्णिमा का व्रत, पूजा और स्नान-दान 29 जून 2026 (सोमवार) को ही किया जाएगा।

ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026 शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 04:06 बजे से 04:46 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त : सुबह 11:57 बजे से दोपहर 12:52 बजे तक

चंद्रोदय का समय : शाम 07:11 से 07:16 बजे

ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026 पर भद्र का साया

ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन 29 जून को प्रात:काल 03:06 बजे से लेकर दोपहर 04:16 बजे तक भद्रा का साया रहेगा। हालांकि, शास्त्रों के अनुसार भद्रा पाताल लोक में होने के कारण पृथ्वी पर इसका प्रभाव नहीं होगा, इसलिए जप, तप, स्नान और पूजा-पाठ बिना किसी बाधा के किए जा सकते हैं। फिर भी शुभ कार्यों की शुरुआत या गृह प्रवेश जैसे काम भद्रा के बाद करना बेहतर माना जाता है।

स्नान-दान का सही समय

ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 04:06 बजे) से लेकर पूरे दिन स्नान और दान किया जा सकता है। सूर्योदय के समय का स्नान सबसे उत्तम माना जाता है।

स्नान विधि : इस दिन पवित्र नदियों (जैसे गंगा, यमुना) में स्नान करने का महत्व है। यदि नदी पर जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें।

दान का महत्व : ज्येष्ठ का महीना अत्यधिक गर्मी का होता है, इसलिए इस दिन जल (जल दान), मिट्टी के घड़े, छाता, हाथ का पंखा, खरबूजा या आम जैसी ठंडी चीजों का दान सबसे बड़ा पुण्य माना जाता है। इसके अलावा सफेद वस्तुएं जैसे चावल, चीनी, दूध, दही और सफेद कपड़ों का दान करने से कुंडली में चंद्रमा मजबूत होता है।

ज्येष्ठ पूर्णिमा पूजा विधि

  • सुबह स्नान करने के बाद साफ या पीले रंग के वस्त्र धारण करें। हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
  • घर के मंदिर में दीपक जलाएं। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। उन्हें पीले फूल, चंदन, अक्षत, तुलसी दल (विष्णु जी को) और भोग अर्पित करें। इस दिन सत्यनारायण भगवान की कथा पढ़ना या सुनना अत्यंत फलदायी होता है।
  • सुहागिन महिलाएं इस दिन बरगद (वट) के पेड़ की पूजा करती हैं, सूत लपेटती हैं और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनती हैं।
  • पूर्णिमा की रात को चंद्रदेव अपने पूर्ण स्वरूप में होते हैं। चंद्रोदय (शाम लगभग 07:16 बजे) के बाद एक लोटे में जल, थोड़ा सा कच्चा दूध, अक्षत और सफेद फूल डालकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। इससे मानसिक तनाव दूर होता है और सुख-शांति आती है।
  • रात के समय माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए मिश्री वाली सफेद खीर का भोग लगाएं और उसे प्रसाद के रूप में परिवार में बांटें। इससे घर की दरिद्रता दूर होती है।

Guru Purnima 2026: गुरु को समर्पित होती है साल की ये पूर्णिमा तिथि, जानें गुरु पूर्णिमा की सही तारीख, मुहूर्त और महत्व

Guru Purnima 2026: गुरु को समर्पित होती है साल की ये पूर्णिमा तिथि, जानें गुरु पूर्णिमा की सही तारीख, मुहूर्त और महत्व

Guru Purnima 2026: हिंदी कैलेंडर में पूरे साल में 12 पूर्णिमा तिथियां आती हैं। पूर्णिमा तिथि माता लक्ष्मी को समर्पित है, लेकिन इस दिन भगवान सत्यनारायण और चंद्र देव की भी पूजा की जाती है। पूरे साल में आने वाली सभी पूर्णिमा तिथियों में आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि गुरु को समर्पित की गई है। इस दिन अपने आराध्य के साथ-साथ गुरु का भी सम्मान करने की प्राचीन परंपरा है। यह दिन पूरे देश में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, गुरु पूर्णिमा आषाढ़ महीने की पूर्णिमा को मनाई जाती है, जो आमतौर पर जून और जुलाई के बीच आती है। यह त्योहार भारत, नेपाल और भूटान में हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म के लोग मनाते हैं। हिंदू अपने गुरुओं की पूजा करते हैं, बौद्ध इसे भगवान बुद्ध को समर्पित करते हैं। वहीं, जैन धर्म के अनुयायी अपने आध्यात्मिक गुरुओं का सम्मान करते हैं।

गुरु पूर्णिमा 2026 कब है?

गुरु पूर्णिमा बुधवार, 29 जुलाई, 2026 को है

पूर्णिमा तिथि शुरू – 28 जुलाई, 2026 को शाम 06:18 बजे

पूर्णिमा तिथि खत्म – 29 जुलाई, 2026 को रात 08:05 बजे

गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यह महाभारत के रचयिता और वेदों को इकट्ठा करने वाले महर्षि वेद व्यास की जयंती है। इससे इस मौके का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व और बढ़ जाता है।

गुरु पूर्णिमा कैसे मनाई जाती है?

गुरु पूर्णिमा को बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है। सुबह जल्दी उठें और घर की साफ-सफाई करें, स्नान करके साफ कपड़े पहनें, अपने माता-पिता और बड़ों का आशीर्वाद लें और सूर्य भगवान को जल यानी अर्घ्य अर्पित करें। इस दिन भक्त मंदिरों, आश्रमों और मठों में आशीर्वाद लेने जाते हैं। कई लोग व्रत भी रखते हैं और अपने गुरुओं को समर्पित भजन और श्लोक पढ़ते हैं।

गुरु पूर्णिमा पूजा विधि

सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें, क्योंकि वे ज्ञान और बुद्धि के देवता हैं। अगर, आपने किसी गुरु से दीक्षा ली है, तो गुरु मंत्र का जाप करें। अपने आध्यात्मिक या जीवन के गुरु से मिलकर उनका आशीर्वाद लें।

गणेश मंत्र

ॐ गं गणपतये नमः

ॐ वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ, निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा…

गुरु पूर्णिमा का महत्व

हिंदू धर्म में पूर्णिमा का दिन बहुत शुभ माना जाता है, इस दिन लोग भगवान विष्णु और चंद्र देव की पूजा करते हैं। साल में 12 पूर्णिमा आती हैं, लेकिन गुरु पूर्णिमा खास है, क्योंकि यह दिन गुरु के सम्मान के लिए समर्पित होता है।

Yogini Ekadashi 2026 Date: ये होगी आषाढ़ मास की पहली एकादशी, जानें योगिनी एकादशी व्रत की तारीख, पूजा मुहूर्त और विधि