Monsoon Breaking: डाल्टेनगंज, मोतिहारी से गुजर रहा मानसून, अब IMD ने बताई यूपी में इसकी एंट्री की तारीख

Monsoon Entry in UP Forecast: उत्तर प्रदेश समेत देश के किसानों और आम जनता के लिए राहत की बड़ी खबर है। दो हफ्तों तक पश्चिमी भारत में सुस्त पड़े रहने के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून ने एक बार फिर जबरदस्त रफ्तार पकड़ ली है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के मुताबिक मानसून अब झारखंड के डाल्टेनगंज और बिहार के मोतिहारी से गुजर रहा है।

इसके साथ ही मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश में मानसून की एंट्री की तारीख भी साफ कर दी है। केंद्रीय और पश्चिमी क्षेत्रों में मानसून के आगे बढ़ने से खरीफ फसलों की बुवाई को बड़ा बूस्ट मिलने की उम्मीद है। साथ ही लोगों को भीषण लू से भी बड़ी राहत मिलेगी।

डाल्टेनगंज और मोतिहारी पहुंची मानसून की सीमा

IMD के मुताबिक 23 जून को मानसून की उत्तरी सीमा अब देश के कई महत्वपूर्ण हिस्सों को पार कर चुकी है। आज की तारीख में मानसून की यह रेखा दहानू, वर्धा, रायपुर, डाल्टेनगंज और मोतिहारी से होकर गुजर रही है। मानसून ने मध्य अरब सागर के बचे हुए हिस्सों, मुंबई सहित महाराष्ट्र के कुछ और इलाकों, तेलंगाना, ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के कई नए क्षेत्रों को पूरी तरह कवर कर लिया है।

उत्तर प्रदेश में इस दिन होगी मानसून की एंट्री

IMD ने अपने लेटेस्ट वेदर बुलेटिन में देश के विभिन्न राज्यों में मानसून के आगे बढ़ने का एक अनुमानित टाइमफ्रेम जारी किया है। अगले 2-3 दिनों में उत्तर अरब सागर के कुछ हिस्सों, गुजरात, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के कुछ और इलाकों के साथ-साथ मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में मानसून दस्तक दे देगा।

मध्य प्रदेश में एंट्री के बाद मानसून अगले 3-5 दिनों में आगे बढ़ेगा और झारखंड व बिहार के बचे हुए हिस्सों को कवर करते हुए उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में प्रवेश कर जाएगा। यानी अगले एक हफ्ते के भीतर यूपी में मानसूनी बारिश का दौर शुरू होने की पूरी संभावना है।

दो हफ्ते तक क्यों अटका रहा मानसून?

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक मानसून ने 8 जून को ही दक्षिणी महाराष्ट्र में दस्तक दे दी थी लेकिन इसके बाद करीब दो हफ्तों तक इसकी रफ्तार थम गई थी। मौसम अधिकारियों के मुताबिक भूमध्य सागर से उठने वाले पश्चिमी विक्षोभ के कारण मानसून की प्रगति रुक गई थी। पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत में बारिश और बर्फबारी लाते हैं लेकिन कभी-कभी ये मानसूनी हवाओं के मार्ग में रुकावट भी पैदा कर देते हैं। अब यह बाधा दूर हो चुकी है और मानसून दोबारा मोमेंटम पकड़ रहा है।

भारतीय अर्थव्यवस्था और खेती के लिए क्यों अहम है यह बदलाव?

भारत की लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लिए जून से सितंबर के बीच होने वाली मानसूनी बारिश बेहद महत्वपूर्ण है। देश की करीब आधी आबादी अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है। भारत की लगभग आधी कृषि भूमि सिंचाई के लिए पूरी तरह बारिश पर निर्भर है। यह चार महीने का मानसून देश की सालाना बारिश का लगभग 70% हिस्सा देता है। इससे जल स्रोतों की रीफिलिंग भी होती है।

जून में अब तक सामान्य से कम रही है बारिश

मौसम विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि अल नीनो के प्रभाव के चलते इस साल जून के पहले 21 दिनों में भारत में औसत से 42.2% कम बारिश दर्ज की गई है। इस पूरे हफ्ते भी बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है। इससे पहले मौसम विभाग ने अपने पूर्वानुमान में कहा था कि चार महीने के इस मानसूनी सीजन में देश में दीर्घावधि औसत (LPA) की 90% बारिश होने की संभावना है जबकि अकेले जून महीने में एल नीनो के कारण एलपीए (LPA) की 92% बारिश होने का अनुमान जताया गया था।

Mumbai Weather: मुंबई में आज गरज-चमक के साथ तेज बारिश का अलर्ट, 60 kmph की रफ्तार से चल सकती हैं हवाएं

Mumbai Weather: मंगलवार, 23 जून को मुंबई में आसमान बादलों से ढका रहा, क्योंकि शहर और आसपास के कई इलाकों में प्री-मानसून बारिश, बिजली चमकने और गरज के साथ बारिश देखने को मिली। समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक, लोनावला में भी आज सुबह बारिश हुई, जिससे आसपास के इलाकों में मौसम सुहावना हो गया।

IMD का अलर्ट

इस बीच, मुंबई और रायगढ़ के लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का हवाला देते हुए मंगलवार को मौसम को लेकर एक नया अलर्ट जारी किया है। इस अलर्ट में कुछ जगहों पर गरज-चमक के साथ बिजली गिरने, हल्की से मध्यम बारिश और 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान जताया गया है।

IMD ने मुंबई और रायगढ़ के लिए आज ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इस दौरान अचानक गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और जोरदार बारिश होने की उम्मीद है।

मुंबई में जल्द पहुंचेगा मॉनसून

इससे पहले, IMD ने कहा था कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून महाराष्ट्र के कई हिस्सों में आगे बढ़ चुका है और अगले 48 घंटों में मुंबई समेत और भी इलाकों में इसके पहुंचने की संभावना है।

रीजनल मौसम केंद्र (RMC) के मुताबिक, मॉनसून मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में और आगे बढ़ गया है। साथ ही, इसने कर्नाटक के बाकी हिस्सों को भी कवर कर लिया है और छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और बिहार के कुछ इलाकों में भी फैल गया है।

मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो दिनों में मानसून के और आगे बढ़ने के लिए मौसम पूरी तरह अनुकूल है। इस दौरान मानसून मध्य अरब सागर के बाकी हिस्सों, मुंबई समेत महाराष्ट्र के अन्य इलाकों, तेलंगाना और ओडिशा के शेष भागों, साथ ही छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के और क्षेत्रों में पहुंच सकता है।

IMD के अनुसार, पश्चिमी हवाओं के मजबूत होने और मानसून के लगातार आगे बढ़ने की वजह से आने वाले दिनों में महाराष्ट्र के कई हिस्सों में तेज बारिश, गरज-चमक और आंधी की संभावना है।

बता दें कि 22 जून से 26 जून के बीच कोंकण क्षेत्र में कुछ जगहों पर भारी बारिश होने की संभावना है। IMD ने इसी दौरान मध्य महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में बिजली कड़कने, तेज हवाओं और मध्यम से भारी बारिश के साथ आंधी-तूफान की भी भविष्यवाणी की है।

मराठवाड़ा के लिए, 22 जून से 24 जून के बीच बिजली कड़कने, तेज हवाओं और हल्की से मध्यम बारिश के साथ आंधी-तूफान की उम्मीद है।

IMD ने दक्षिण महाराष्ट्र-गोवा तट के मछुआरों के लिए चेतावनी जारी की है और उन्हें सलाह दी है कि खराब मौसम के कारण 22 जून से 26 जून तक समुद्र में न जाएं। इस दौरान हवा की गति 40-50 किमी प्रति घंटा तक पहुंचने की उम्मीद है, और हवा के झोंके 60 किमी प्रति घंटा तक हो सकते हैं।

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि भारी बारिश की वजह से निचले इलाकों और शहरों में जलभराव, अचानक बाढ़, सड़क, रेल, हवाई और फेरी सेवाओं में रुकावट, खड़ी फसलों और बागवानी को नुकसान और तट के पास समुद्र की स्थिति खराब होने जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।

लोगों को सलाह दी गई है कि वे ट्रैफिक एडवाइजरी का पालन करें, कमजोर या जर्जर इमारतों और पेड़ों से दूर रहें, तूफान के दौरान जलाशयों के पास न जाएं और खराब मौसम में सुरक्षित जगहों पर शरण लें।

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Lucknow fire tragedy update: अब तक 15 लोगों की मौत, 4 आरोपी गिरफ्तार, चार अधिकारी निलंबित… लखनऊ कोचिंग अग्निकांड में अब तक क्या हुआ?

Lucknow fire tragedy update:  उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार (22 जून) को तीन मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग में आग लगने के कारण झुलसने से 15 लोगों की मौत हो गई। जबकि 9 लोग घायल हो गए। पुलिस ने इस मामले में बिल्डिंग के मालिकों समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। जबकि लापरवाही बरतने के आरोप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। मामले की पड़ताल के लिए एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई है। इस बिल्डिंग में एक एनिमेशन सेंटर था जहां छात्र मौजूद थे। साथ ही निचली मंजिलों पर एक पेट शॉप और एक क्लिनिक भी था।

पीएम नरेंद्र मोदी ने इस घटना में लोगों की मौत पर दुख जाहिर करते हुए मृतकों के परिजन को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो-दो लाख और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने का ऐलान किया है। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी मृतकों के परिजन को पांच-पांच लाख तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटनास्थल पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया।

पॉश रिहायशी इलाके में है कोचिंग सेंटर

घटना अलीगंज थाना इलाके में उषा मेहता मार्ग पर स्थित तीन मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग में दोपहर करीब तीन बजे हुई। पुरनिया बाजार से चंद कदमों की दूरी पर स्थित यह बिल्डिंग अलीगंज के पॉश रिहायशी इलाके में है, जहां कई कोचिंग सेंटर और कैफे मौजूद हैं।

किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के जनसंपर्क अधिकारी के.के. सिंह ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि बचाव दल ने इस घटना में घायल कुल 22 लोगों को केजीएमयू पहुंचाया, जिनमें से 15 को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

मतृकों की हुई पहचान

अस्पताल द्वारा जारी लिस्ट के अनुसार हादसे में मरने वालों की शिनाख्त सागर, नीलेश, अनामिका, संयम, अनुछा, सुखमनी, आदित्य श्रीवास्तव, ज्योति, भविष्य, अब्दुल रहमान, सूरज शाह, शाहजान, जयनिल चक्रवर्ती, मोहम्मद अम्मार और सुमाल्या के रूप में हुई है। के.के. सिंह ने बताया कि हादसे में घायल हुए नौ लोगों में से सात को छुट्टी दे दी गई है। जबकि दो अन्य का इलाज किया जा रहा है। एक बयान के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर दो सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है।

SIT में कौन-कौन अधिकारी शामिल?

बयान के अनुसार एसआईटी में पर्यटन, धर्मार्थ और संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और लखनऊ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है। उसे सात दिन के अंदर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। इस मामले में पुलिस ने देर रात चार लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं, चार अधिकारियों को निलंबित भी किया गया है।

चार अरेस्ट, 4 सस्पेंड

लखनऊ पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों में राम कृष्ण उपाध्याय (43), वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (62), तुषार कृष्ण जायसवाल (31) और सुरेश कुमार साहू शामिल हैं। उन्होंने बताया कि उपाध्याय, शुक्ला और जायसवाल बिल्डिंग के संयुक्त रूप से मालिक हैं।

एक आधिकारिक बयान के मुताबिक मामले में मुख्यमंत्री के आदेश पर जानकीपुरम में बिजली विभाग के अधिकारी गौरव कुमार, अग्निशमन विभाग की इंदिरा नगर शाखा के अधिकारी कमलेन्द्र कुमार सिंह, लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के सहायक अभियंता अनिल कुमार और कनिष्ठ अभियंता प्रमोद पांडेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

घायलों से मिले सीएम योगी, पीएम मोदी ने जताया दुख

घटना की सूचना मिलने पर मुख्यमंत्री अलीगढ का अपना दौरा बीच में ही छोडकर लखनऊ लौटे और घटनास्थल पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया। वह अस्पताल भी पहुंचे और घायल पीड़ितों से मुलाकात करके संवेदना प्रकट की। रक्षा मंत्री और लखनऊ से सांसद राजनाथ सिंह भी देर रात घटनास्थल पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। बाद में उन्होंने केजीएमयू के ट्रामा सेंटर पहुंचकर घायलों का हाल जाना और मुख्यमंत्री को फोन करके घटना की जानकारी ली।

मुआवजे की घोषणा

प्रधानमंत्री मोदी ने इस घटना में लोगों की मौत पर दुख जाहिर करते हुए मृतकों के परिजन को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने का ऐलान किया है। इसके अलावा सरकार की ओर से जारी एक बयान के अनुसार मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजन को पांच-पांच लाख तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता का भी ऐलान किया है।

अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री शाम करीब छह बजकर 15 मिनट पर घटनास्थल पर पहुंचे। फिर हादसे की शिकार इमारत की स्थिति का जायजा लिया और इमारत की ऊपरी मंजिलों का भी दौरा किया। अधिकारियों के अनुसार घटनास्थल का मुआयना करने के बाद आदित्यनाथ केजीएमयू पहुंचे, दुर्घटना में घायल हुए लोगों से मुलाकात करके उनका हाल जाना और उन्हें भरोसा दिलाया कि घटना के लिए जिम्मेदार किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।

कैसे लगी आग?

घटनास्थल का दौरा करने पहुंचे नगर विकास और ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने आग लगने के कारणों के बारे में पूछे जाने पर कहा कि शुरुआती जानकारी से पता चलता है कि आग शायद इमारत के एसी डक्ट से शुरू हुई। उन्होंने कहा कि बाहर निकलने का सही रास्ता न होने के कारण धुएं से दम घुटने से मौतें हुई हैं। उन्होंने कहा कि इस घटना की पूरी जांच की जाएगी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। स्थानीय बीजेपी विधायक नीरज बोरा ने पीटीआई को बताया कि इस हादसे में मरने वाले लोगों में से आधे स्थानीय निवासी थे।

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India Weather Today: बिहार समेत इन 12 राज्यों में IMD ने भारी बारिश का अलर्ट दिया, मुंबई-राजस्थान में ‘ऑरेंज अलर्ट’

India Weather Update Today (23 June): देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार तेज होने के साथ ही मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 23 जून के लिए देशव्यापी मौसम बुलेटिन जारी करते हुए बड़ा अलर्ट घोषित किया है। मानसून के तेजी से आगे बढ़ने के कारण आज बिहार समेत देश के 12 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मुंबई और राजस्थान के लिए मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए लोगों को विशेष सावधानी बरतने की हिदायत दी है। आइए जानते हैं आज देश के अलग-अलग हिस्सों में कैसा रहने वाला है मौसम का हाल।

मुंबई और राजस्थान के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी

मुंबई (IMD Mumbai Warning): मुंबई के लिए विशेष तौर पर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। यहां गरज-चमक के साथ मध्यम से तीव्र दौर की बारिश होने और 30-40 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की प्रबल आशंका है। प्रशासन ने लोगों को एहतियात बरतने की सलाह दी है।

राजस्थान में महातूफान की आशंका: आज पूरे राजस्थान में 50-60 किमी/घंटे की रफ्तार से विनाशकारी थंडरस्क्वाल चलने का अलर्ट है, जिसकी रफ्तार बढ़कर 70 किमी/घंटे तक भी पहुंच सकती है।

बिहार समेत इन 12 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट

आईएमडी वेदर बुलेटिन के मुताबिक आज देश के 12 राज्यों/क्षेत्रों में मूसलाधार मानसूनी बारिश होने वाली है:-

बेहद भारी बारिश: असम और मेघालय में मानसून का सबसे रौद्र रूप दिखेगा, जहां भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी आज मूसलाधार बारिश का कहर जारी रहने वाला है।

भारी बारिश वाले अन्य 10 राज्य

बिहार और ओडिशा: कल मानसून के आगे बढ़ने के बाद आज इन दोनों राज्यों में भारी बारिश का दौर शुरू हो रहा है।

कोंकण व गोवा और मध्य महाराष्ट्र: पश्चिमी तट से सटे इन इलाकों में भारी मानसूनी बारिश होगी।

दक्षिण भारत: तटीय कर्नाटक, केरल व माहे और तेलंगाना में भारी बारिश का कड़ा अनुमान है।

पूर्वोत्तर भारत: अरुणाचल प्रदेश के साथ-साथ नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के अलग-अलग हिस्सों में भारी वर्षा की चेतावनी है।

दिल्ली-NCR समेत देश के 21 राज्यों में आंधी-तूफान और बिजली का कहर

देश के एक बहुत बड़े हिस्से में आज तेज आंधी-पानी और आकाशीय बिजली गिरने का खतरा मंडरा रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक, 40-50 किमी/घंटे की रफ्तार वाली हवाओं और गरज-चमक के साथ इन राज्यों में मौसम खराब रहेगा।

हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश (उत्तराखंड समेत) और जम्मू-कश्मीर-लद्दाख, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और गंगीय पश्चिम बंगाल, गुजरात रीजन, कोंकण एवं गोवा, पूरे महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिल नाडु, पुडुचेरी व कराइकल और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के साथ हिमाचल प्रदेश और आंतरिक कर्नाटक में 30-40 किमी/घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और बिजली कड़कने की संभावना है।

विदर्भ में हीटवेव और गर्म रात का टॉर्चर जारी

जहां एक तरफ देश का बड़ा हिस्सा मानसून की फुहारों से भीग रहा है। वहीं कुछ इलाकों में गर्मी का टॉर्चर अभी भी बरकरार है। विदर्भ के कुछ हिस्सों में आज भीषण से अत्यधिक भीषण लू की स्थिति बनी रहेगी। इसके साथ ही यहां रातें भी बेहद असहज और गर्म रहने वाली हैं। पूर्वी यूपी, छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश के अलग-अलग पॉकेट्स में आज भी लू का असर देखने को मिलेगा।

Monsoon Alert: अगले 48 घंटों में इस ओर बढ़ने का इशारा कर रही मानसून की रफ्तार, IMD ने जारी किया लेटेस्ट अनुमान

देशभर में मानसून धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार 22 जून को दक्षिण-पश्चिम मानसून महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक के शेष हिस्सों, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और बिहार के कई नए इलाकों तक पहुंच गया है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले 48 घंटों के दौरान मानसून के मुंबई समेत महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों, तेलंगाना, ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार में और आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं।

यहां भारी बारिश का अलर्ट

पूर्वोत्तर राज्यों में अगले कुछ दिनों तक तेज बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में व्यापक बारिश का अनुमान है। मौसम विभाग ने मेघालय और असम के कुछ इलाकों में  भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के कई हिस्सों में भी तेज बारिश हो सकती है।

बिहार, ओडिशा और झारखंड में बरसेंगे बादल

पूर्वी भारत के राज्यों बिहार, झारखंड और ओडिशा में भी मौसम सक्रिय रहने वाला है। बिहार में 22 से 23 जून और फिर 27 से 28 जून के बीच भारी बारिश की संभावना जताई गई है। ओडिशा में 25 जून तक कई इलाकों में भारी बारिश हो सकती है। वहीं झारखंड में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश का दौर जारी रहने की उम्मीद है।

बारिश के साथ तेज हवाओं का अलर्ट

दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने कुछ इलाकों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का भी अनुमान जताया है। राजस्थान में 22 और 23 जून को आंधी और तेज हवाओं का असर अधिक देखने को मिल सकता है।

पश्चिमी भारत में भी सक्रिय रहेगा मानसून

कोंकण, गोवा और तटीय महाराष्ट्र में अगले सात दिनों तक अच्छी बारिश होने की संभावना है। गुजरात, मराठवाड़ा और मध्य महाराष्ट्र के कई हिस्सों में भी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। मौसम विभाग ने कोंकण और गोवा क्षेत्र में कई स्थानों पर भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

दक्षिण भारत में कई राज्यों के लिए चेतावनी

दक्षिण भारत में भी मानसून सक्रिय बना हुआ है। तेलंगाना, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और लक्षद्वीप में अगले कुछ दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। तेलंगाना में 23 से 28 जून के बीच कई स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। वहीं तटीय कर्नाटक और केरल में भी तेज बारिश का अनुमान है।

कई इलाकों में अभी भी गर्मी का कहर

एक तरफ देश के कई हिस्सों में बारिश हो रही है, वहीं दूसरी तरफ कुछ क्षेत्रों में भीषण गर्मी का असर बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार विदर्भ में 22 से 26 जून तक लू से लेकर गंभीर लू चल सकती है। पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और तेलंगाना के कुछ इलाकों में भी गर्म हवाओं का असर देखने को मिल सकता है।

तेज हवाएं और आंधी बढ़ाएंगी परेशानी

बिहार, झारखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और कई अन्य राज्यों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने की संभावना है। कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों पर न रहने और सुरक्षित जगहों पर रहने की सलाह दी है।

मछुआरों के लिए खास चेतावनी

मौसम विभाग ने अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के कई हिस्सों में तेज हवाएं और खराब समुद्री परिस्थितियां बनने की चेतावनी दी है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। खासकर ओडिशा, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, केरल, कर्नाटक, गोवा और लक्षद्वीप के तटीय क्षेत्रों में सतर्क रहने को कहा गया है।

लोगों के लिए सलाह

भारी बारिश वाले इलाकों में जलभराव, यातायात बाधित होने और निचले क्षेत्रों में पानी भरने की आशंका है। मौसम विभाग ने लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने, मौसम की जानकारी पर नजर रखने और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है। वहीं लू प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को पर्याप्त पानी पीने, धूप से बचने और जरूरत पड़ने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी गई है। कुल मिलाकर, आने वाला सप्ताह देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश, गरज-चमक और बदलते मौसम का रहने वाला है। जहां मानसून कई राज्यों को राहत देगा, वहीं कुछ इलाकों में भारी बारिश और कुछ क्षेत्रों में भीषण गर्मी लोगों की चुनौती बनी रहेगी।

Monsoon Rain crisis: 18 जून तक इस इलाके में हुई सिर्फ 2% बुवाई, बारिश का ये आंकड़ा तो डरा रहा है!

Monsoon Rain Update: दक्षिण-पश्चिम मानसून की सुस्ती और बारिश में हो रही देरी ने महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में खेती का पूरा गणित बिगाड़ दिया है। पानी की कमी और रूठे मानसून की वजह से इस क्षेत्र के आठ जिलों में खरीफ की बुवाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक 18 जून तक मराठवाड़ा में बुवाई का आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले महज 2 प्रतिशत रह गया है। सूखे की मार झेलने वाले इस इलाके के किसानों और प्रशासन के लिए बारिश और बुवाई का यह आंकड़ा बेहद डराने वाला है।

बुवाई के आंकड़े: 10 लाख हेक्टेयर के मुकाबले सिर्फ 1 लाख हेक्टेयर

मराठवाड़ा मध्य महाराष्ट्र का एक अर्ध-शुष्क क्षेत्र है। यहां की खेती पूरी तरह से मानसूनी बारिश पर निर्भर करती है। पीटीआई ने एक रिपोर्ट को कोट करते हुए बताया है कि यहां बारिश में देरी से बुवाई के आंकड़ों में ऐतिहासिक गिरावट आई है। इस साल 18 जून तक पूरे क्षेत्र में अब तक केवल 1.07 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि पर ही बुवाई हो पाई है। पिछले साल इसी दिन तक यह आंकड़ा 10.77 लाख हेक्टेयर था। पिछले पांच वर्षों में इस पूरे क्षेत्र में औसतन लगभग 49.72 लाख हेक्टेयर भूमि पर फसलें बोई जाती रही हैं। आंकड़ों से साफ है कि पिछले साल 18 जून तक जितनी बुवाई हुई थी, उसकी तुलना में इस साल अब तक केवल 2 प्रतिशत ही बुवाई हो सकी है।

जिलावार बुवाई का हाल (बीड सबसे आगे, लातूर सबसे पीछे)

मराठवाड़ा के कुल आठ जिले (छत्रपति संभाजीनगर, जालना, बीड, लातूर, धाराशिव, परभणी, हिंगोली और नांदेड़) बारिश की इस देरी का सीधा खामियाजा भुगत रहे हैं। इन 1.07 लाख हेक्टेयर में से आधी से ज्यादा बुवाई (68,572 हेक्टेयर) अकेले बीड जिले में हुई है। दूसरे जिले अपने ऐतिहासिक स्तर से मीलों पीछे हैं। उदाहरण के तौर पर छत्रपति संभाजीनगर में पिछले साल इसी अवधि में 1.64 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई थी जबकि इस साल यहां सिर्फ 3072 हेक्टेयर में ही फसल बोई जा सकी है।

बारिश और जलाशयों का गहराता संकट

बुवाई में इस भयंकर गिरावट का सीधा कारण बारिश का न होना और जलाशयों में पानी की कमी है। एक अधिकारी के मुताबिक, जून महीने में मराठवाड़ा में औसतन 98.3 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए, लेकिन 18 जून तक इस क्षेत्र में अपने सामान्य कोटे की मात्र 42.7% बारिश (यानी सिर्फ 42.7 मिमी) ही दर्ज की गई है। मराठवाड़ा में मौजूद 11 प्रमुख मेगा प्रोजेक्ट्स (बांधों) में जल स्तर लगातार गिर रहा है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक 18 जून तक इन बांधों में सिर्फ 60.84 टीएमसी (Thousand Million Cubic Feet – tmc) पानी बचा था, जबकि पिछले साल इसी दिन यह 67.35 टीएमसी था।

कल का मौसम 23 जून: IMD ने बिहार समेत इन 16 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट दिया, दिल्ली-यूपी से झारखंड तक आंधी-तूफान

Tomorrow Weather Update (23 June 2026): दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार तेज होते ही देश के मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 23 जून के लिए एक बड़ा और विस्तृत वेदर बुलेटिन जारी किया है। मानसून अब छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और बिहार के रास्ते आगे बढ़ रहा है। इससे कई राज्यों में भीषण बारिश का दौर शुरू होने वाला है। आईएमडी के मुताबिक 23 जून को बिहार और असम समेत देश के 16 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट है।

दिल्ली-NCR, उत्तर प्रदेश से लेकर झारखंड और दक्षिण भारत तक देश के 21 से अधिक राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में तेज आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और झंझावात का तांडव देखने को मिलेगा।

आइए जानते हैं कल कैसा रहेगा आपके राज्य में मौसम का हाल:-

इन 16 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग ने 23 जून देश के अलग-अलग हिस्सों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी दी है। प्रभावित राज्यों को दो श्रेणियों में बांटा गया है-

भारी से बहुत भारी बारिश

असम और मेघालय में 23 जून को मानसून सबसे प्रचंड रूप में रहेगा, जहां कई जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी मूसलाधार बारिश का दौर जारी रहेगा।

भारी बारिश का अलर्ट

देश के अन्य 12 राज्यों/क्षेत्रों में 23 जून को भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है:-

बिहार और ओडिशा के कई जिलों में मानसून के आगे बढ़ने से भारी वर्षा होगी। अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भारी बारिश का अनुमान है। कोंकण व गोवा और मध्य महाराष्ट्र के घाट इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी है। तटीय कर्नाटक, केरल व माहे और तेलंगाना में भी 23 जून को मानसून जमकर बरसेगा।

राजस्थान में ‘महातूफान’, दिल्ली से झारखंड तक 21 राज्यों में आंधी-पानी

मौसम विभाग के मुताबिक 23 जून को देश के एक बड़े हिस्से में आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली का व्यापक असर देखने को मिलेगा।

राजस्थान में 60 किमी की रफ्तार से थंडरस्क्वाल: 23 जून को पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान में 50-60 किमी/घंटे की रफ्तार से विनाशकारी थंडरस्क्वाल (तीव्र झंझावात) चलने की आशंका है, जिसके झोंके 70 किमी/घंटे तक पहुंच सकते हैं।

दिल्ली-NCR और मैदानी इलाके: हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पंजाब में गरज-चमक और 40-50 किमी/घंटे की रफ्तार वाली तेज आंधी के साथ बारिश होने की संभावना है।

बिहार, झारखंड और यूपी: बिहार और झारखंड में भी कल 40-50 किमी/घंटे की तेज रफ्तार हवाओं और गरज-चमक के साथ धूलभरी आंधी चलेगी। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी ऐसा ही मौसम रहेगा।

इन राज्यों में भी आंधी का अलर्ट: जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश (30-40 किमी/घंटे), मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गंगीय पश्चिम बंगाल, ओडिशा, गुजरात रीजन, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, महाराष्ट्र (मराठवाड़ा समेत), आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिल नाडु, पुडुचेरी और कर्नाटक (आंतरिक हिस्सों में 30-40 किमी/घंटे की हवाएं) समेत कुल 21 राज्यों में आंधी-तूफान और बिजली कड़कने का कड़ा अलर्ट है।

यूपी और विदर्भ समेत इन इलाकों में अभी भी हीटवेव

एक तरफ जहां देश के आधे हिस्से में मानसून और आंधी-पानी की बौछारें राहत देंगी, वहीं कुछ इलाके अभी भी भीषण गर्मी की चपेट में रहेंगे। महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में 23 जून को भीषण से अत्यधिक भीषण लू का प्रकोप जारी रहेगा। इसके साथ ही यहां रातें भी बेहद गर्म रहने वाली हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश और पूर्वी मध्य प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में भी लू का सितम बना रहेगा। छत्तीसगढ़ में भी लू चलने की आशंका है।

मानसून पर ‘विलेन’ अल नीनो का ग्रहण : 5 राज्यों में सूखे का खतरा, IMD की चिंताजनक चेतावनी

Indian Monsoon Update 2026

प्रशांत महासागर में बन रही एक वैश्विक मौसमी घटना भारत के मानसून के लिए बड़ी चुनौती बनती दिखाई दे रही है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआती प्रगति के बाद कई क्षेत्रों में इसकी रफ्तार धीमी पड़ गई है, जिसके चलते देश के अनेक हिस्सों में सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई है।
 

मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि अल नीनो का प्रभाव अगले कुछ महीनों तक बना रहता है, तो न केवल मानसून कमजोर पड़ सकता है, बल्कि कृषि उत्पादन, जल संसाधनों और खाद्य कीमतों पर भी इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है। ALSO READ: Monsoon : मौसम के महादानव अल-नीनो को परास्त करेगा Indian Ocean Dipole, जानिए कैसे होगी झमाझम बारिश

क्या है अल नीनो और क्यों बढ़ जाती है चिंता?

'अल नीनो' (El Niño) प्रशांत महासागर में समुद्री सतह के तापमान में असामान्य वृद्धि की एक प्राकृतिक जलवायु घटना है। इसके कारण वैश्विक मौसम चक्र प्रभावित होता है और भारत में मानसून कमजोर पड़ने की आशंका बढ़ जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार अल नीनो का प्रभाव जून से ही दिखाई देने लगा है। यदि इसकी तीव्रता बढ़ती है, तो मानसून सीजन के मध्य और अंतिम चरण में वर्षा की कमी और अधिक गंभीर हो सकती है।

किन राज्यों पर सबसे ज्यादा खतरा?

मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि अल नीनो लंबे समय तक सक्रिय रहा, तो देश के पांच प्रमुख कृषि राज्यों पर सबसे अधिक असर पड़ सकता है:

  • महाराष्ट्र
  • मध्य प्रदेश
  • उत्तर प्रदेश
  • बिहार
  • उत्तरी कर्नाटक

Indian Monsoon Update 2026

इन राज्यों में खरीफ फसलों की बुआई और उत्पादन पर सीधा प्रभाव पड़ने की आशंका है।

 

शहरों में भी बढ़ रहा जल संकट

सूखे का खतरा केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। देश के कई बड़े शहर पहले से ही जल संकट का सामना कर रहे हैं।
 

विशेषज्ञों का कहना है कि जल संचयन और वर्षा जल संरक्षण की दिशा में पर्याप्त प्रगति न होने के कारण कई महानगर मानसून पर अत्यधिक निर्भर हैं। यदि वर्षा सामान्य से कम रहती है, तो मुंबई, पुणे समेत कई शहरों में जलापूर्ति प्रभावित हो सकती है।
 

जल विशेषज्ञों का मानना है कि अब जल संरक्षण, रीसाइक्लिंग और वर्षा जल संग्रहण को जीवनशैली का हिस्सा बनाना समय की मांग है। ALSO READ: 5 चक्रव्यूह में फंसा मानसून, बारिश को तरसते 7 राज्यों में पारा 40°C के पार, जानें आपके शहर का हाल

 

क्या 2026-27 की गर्मियां रिकॉर्ड तोड़ सकती हैं?

मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अल नीनो के प्रभाव के चलते आगामी वर्षों में वैश्विक तापमान नए रिकॉर्ड बना सकता है।
 

कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारत के कई हिस्सों में गर्मी की तीव्रता बढ़ सकती है और हीटवेव की घटनाएं अधिक गंभीर रूप ले सकती हैं। ऐसे हालात में कई क्षेत्रों में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंचने की आशंका भी जताई जा रही है।

किसानों पर दोहरी मार

कम बारिश का सबसे बड़ा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ता है।

केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार, यदि वर्षा में उल्लेखनीय कमी बनी रहती है, तो खरीफ सीजन की प्रमुख फसलें प्रभावित हो सकती हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • धान
  • तुअर और मूंग जैसी दालें
  • सोयाबीन और मूंगफली जैसे तिलहन
  • कपास
  • बाजरा
  • फल और सब्जियां

विशेषज्ञों का कहना है कि किसान अचानक फसल पैटर्न नहीं बदल सकते, क्योंकि खेती केवल तकनीकी नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था से भी जुड़ी होती है।

Indian Monsoon Update 2026

महंगाई पर भी पड़ सकता है असर

कृषि उत्पादन घटने का सीधा असर बाजार पर पड़ता है।

यदि उत्पादन कम हुआ और त्योहारी सीजन में मांग बढ़ी, तो खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है। दाल, तेल, सब्जियां और अन्य आवश्यक वस्तुएं महंगी हो सकती हैं, जिससे आम उपभोक्ता की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका है।

राहत की खबर भी है

हालांकि स्थिति पूरी तरह निराशाजनक नहीं है। भारत के पास वर्तमान में पर्याप्त खाद्यान्न भंडार मौजूद है, जो किसी भी संभावित आपूर्ति संकट से निपटने में मदद कर सकता है। इसके अलावा :

  • देश का सिंचित क्षेत्र पिछले दशक में बढ़ा है।
  • मौसम पूर्वानुमान तकनीक पहले से अधिक सटीक हुई है।
  • AI आधारित कृषि सलाह किसानों को समय रहते निर्णय लेने में मदद कर रही है।
  • केंद्र और राज्य सरकारें लगातार निगरानी कर रही हैं।

विशेषज्ञों की सलाह: किसान क्या करें?

विशेषज्ञों ने किसानों को निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:

✔ एक ही फसल पर पूरी निर्भरता से बचें।

✔ मिश्रित खेती अपनाएं।

✔ कम पानी वाली फसलों को प्राथमिकता दें।

✔ मौसम पूर्वानुमान के आधार पर बुआई की योजना बनाएं।

✔ सूखा प्रभावित क्षेत्रों में दोबारा बुआई का जोखिम सोच-समझकर लें।

उम्मीद की किरण: IOD बन सकता है गेमचेंजर

मौसम वैज्ञानिकों की नजर अब 'पॉजिटिव इंडियन ओशन डिपोल' (IOD) पर है। यदि मानसून के उत्तरार्ध में पॉजिटिव IOD सक्रिय होता है, तो यह अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को कुछ हद तक संतुलित कर सकता है और देश के कई हिस्सों में अतिरिक्त वर्षा का कारण बन सकता है।
 

फिलहाल देश की निगाहें आसमान पर टिकी हैं। आने वाले कुछ सप्ताह तय करेंगे कि अल नीनो भारत के लिए केवल एक मौसमी चुनौती साबित होगा या फिर यह खेती, पानी और महंगाई से जुड़ा बड़ा राष्ट्रीय संकट बन जाएगा।

 

बालकनी, छत या गमलों में उगाएं अपनी पसंदीदा सब्जियां, मानसून में मिलेगा शानदार रिजल्ट

मानसून का मौसम किचन गार्डन शुरू करने के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है क्योंकि इस दौरान नमी और ठंडक पौधों की ग्रोथ को तेजी से बढ़ाते हैं। अच्छी बात यह है कि इसके लिए बड़े बगीचे या आंगन की जरूरत नहीं होती, बल्कि बालकनी, छत या छोटे गमलों में भी आसानी से सब्जियां उगाई जा सकती हैं। थोड़ी सी सही देखभाल, उपयुक्त मिट्टी और नियमित पानी देने से कई तरह की हरी सब्जियां और हर्ब्स घर पर ही तैयार हो सकते हैं।

यह न सिर्फ ताजा और ऑर्गेनिक खाने का विकल्प देता है, बल्कि बाजार पर निर्भरता भी कम करता है। कुछ ही हफ्तों में पौधे तैयार होकर उपज देने लगते हैं, जिससे रसोई में ताजी सब्जियों की उपलब्धता बनी रहती है और सेहत भी बेहतर रहती है।

करेला

मानसून की नमी करेले की बेल को तेजी से बढ़ने में मदद करती है। इसे सहारा देने के लिए जाली या ट्रेलिस जरूरी होता है। गर्म और उमस भरा मौसम इसकी ग्रोथ के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।

हरी मिर्च

हरी मिर्च मानसून में आसानी से उगने वाली सब्जियों में से एक है। बस ध्यान रखें कि मिट्टी में पानी जमा न हो। रोज कुछ घंटे धूप मिल जाए तो पौधा ज्यादा फल देता है।

लौकी

लौकी की बेल बारिश में तेजी से फैलती है और ज्यादा मेहनत नहीं मांगती। इसे गमले या छत पर आसानी से उगाया जा सकता है। बेहतर ग्रोथ के लिए इसे सपोर्ट यानी जाली देना जरूरी है।

तोरई

तोरई मानसून में बहुत अच्छी तरह बढ़ती है। नियमित पानी और धूप मिलने पर यह भरपूर उत्पादन देती है। सही जगह और थोड़ी देखभाल से यह पौधा जल्दी तैयार हो जाता है।

पालक

अगर आपके पास कम जगह है तो पालक सबसे अच्छा विकल्प है। यह जल्दी तैयार हो जाता है और पोषक तत्वों से भरपूर होता है। गमलों में इसे आसानी से उगाया जा सकता है।

मेथी

मेथी मानसून में बोई जाती है और बाद में ताजी पत्तियों का अच्छा उत्पादन देती है। नियमित कटाई से इसकी ग्रोथ और बेहतर हो जाती है।

धनिया

धनिया बहुत तेजी से बढ़ने वाला पौधा है और बार-बार काटकर इस्तेमाल किया जा सकता है। मिट्टी में नमी बनाए रखना इसकी सबसे बड़ी जरूरत है।

बैंगन

बैंगन मानसून में अच्छा उत्पादन देता है लेकिन कीड़ों से बचाव जरूरी होता है। सही धूप, खाद और पानी के संतुलन से यह लंबे समय तक फल देता है।

वर्ल्ड अपडेट्स:फिलीपींस के स्कूल में गोलीबारी में 3 छात्रों की मौत, हिरासत में 2 संदिग्ध

फिलीपींस के एक हाई स्कूल में सोमवार को हुई गोलीबारी में तीन छात्रों की मौत हो गई, जबकि पांच घायल हो गए। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, दो लोगों ने टैकलोबान सिटी के सैन जोस नेशनल हाई स्कूल में गोलीबारी की। पुलिस ने दोनों संदिग्धों को हिरासत में ले लिया है। अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से एक इसी स्कूल का छात्र है। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गोलीबारी की वजह क्या थी और हमलावरों ने इस घटना को क्यों अंजाम दिया। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। स्कूल और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है और शुरुआती पूछताछ के आधार पर घटना के पीछे के कारणों का पता लगाया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… जर्मनी में रिटायरमेंट की उम्र 70 साल करने की तैयारी
जर्मन सरकार पेंशन सिस्टम में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। प्रस्ताव के तहत रिटायरमेंट की उम्र 67 से बढ़ाकर 70 साल की जा सकती है। साथ ही 45 साल तक पेंशन फंड में योगदान देने वाले कर्मचारियों को मिलने वाली अर्ली रिटायरमेंट सुविधा भी समाप्त की जा सकती है। जर्मन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और श्रम मंत्री बार्बेल बास द्वारा गठित आयोग मंगलवार को अपनी सिफारिशें पेश करेगा। आयोग ने सुझाव दिया है कि रिटायरमेंट की उम्र को जीवन प्रत्याशा से जोड़ा जाए और इसे चरणबद्ध तरीके से 70 साल तक बढ़ाया जाए। आयोग ने ‘पेंशन एट 63’ नाम से लोकप्रिय उस योजना को खत्म करने की भी सिफारिश की है, जिसके तहत 45 साल तक योगदान देने वाले कर्मचारी बिना कटौती के जल्दी रिटायर हो सकते हैं। प्रस्ताव में कर्मचारियों और उनके नियोक्ताओं से अतिरिक्त 2% योगदान लेने की भी बात कही गई है। यह राशि एक नए सरकारी निवेश फंड में जमा होगी। फिलहाल जर्मनी में पेंशन के लिए 18.6% योगदान लिया जाता है। रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार संसद के जुलाई अवकाश से पहले इस सुधार पैकेज को मंजूरी दिलाने की कोशिश में है। जर्मनी में तेजी से बढ़ती उम्रदराज आबादी और बड़ी संख्या में लोगों के रिटायर होने से पेंशन व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। यूरोप में हीटवेव: तापमान 40°C के करीब, फ्रांस में ट्रेनें रद्द; इटली-स्पेन में रेड अलर्ट
यूरोप के कई देश भीषण हीटवेव की चपेट में हैं। इटली, स्पेन, फ्रांस और जर्मनी में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है। हालात को देखते हुए कई शहरों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। गर्मी का असर परिवहन, पर्यटन और वन्यजीवों पर भी दिखाई देने लगा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि सहारा रेगिस्तान से उत्तर की ओर बढ़ रही गर्म हवा और “अफ्रीकन एंटीसाइक्लोन” नामक उच्च दबाव प्रणाली के कारण पश्चिमी और मध्य यूरोप के ऊपर “हीट डोम” बन गया है। इससे गर्म हवा फंस गई है और तापमान लगातार बढ़ रहा है। इटली में कई दिनों से तापमान 35°C से ऊपर बना हुआ है। इसके चलते बोलोन्या, फ्लोरेंस, मिलान और ट्यूरिन समेत 8 शहरों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। स्पेन की मौसम एजेंसी AEMET ने देश के कई हिस्सों में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। फ्रांस में भीषण गर्मी का असर रेल नेटवर्क पर पड़ रहा है। राष्ट्रीय रेल ऑपरेटर SNCF के अनुसार अधिक तापमान के कारण बिजली की ओवरहेड लाइनों और रेल पटरियों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ गया है। एहतियात के तौर पर प्रमुख मार्गों पर सोमवार तक 71 इंटरसिटी ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं। जर्मनी में तापमान 38°C तक पहुंच चुका है। मौसम विभाग DWD ने बर्लिन समेत पूर्वी क्षेत्रों में तेज आंधी और भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।