Bank of Baroda से मांगा ₹1.42 लाख करोड़ का हर्जाना, बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका, 9 प्वाइंट्स में समझें पूरा मामला

Bank of Baroda in Fraud Case: एनएमसी हेल्थकेयर ग्रुप और यूएई एक्सचेंज (UAE Exchange) के फाउंडर बीआर शेट्टी ने अपने ग्रुप में फर्जीवाड़े को लेकर बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) को कोर्ट में घसीट लिया है। सिर्फ बैंक ऑफ बड़ौदा ही नहीं बल्कि 25 और भी लोगों से बीआर शेट्टी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर $1500 करोड़ (₹1.42 लाख करोड़) का हर्जाना मांगा है। शेट्टी का दावा है कि उनके ग्रुप में जो धोखाधड़ी हुई है, उसमें बैंक और उसके कुछ अधिकारियों ने मदद की। साथ ही उनका दावा है कि बैंक ने उनके खिलाफ जिन गारंटियों के आधार पर कार्रवाई की है, उस पर तो उन्होंने कभी साइन ही नहीं किए हैं। इस मामले में बैंक ऑफ बड़ौदा और बीआर शेट्टी की तरफ से मनीकंट्रोल को तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई।

हर्जाने के साथ-साथ पेमेंट होने तक सालाना 18% ब्याज की मांग

बीआर शेट्टी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर $1500 करोड़ का हर्जाना मांगा है। इसमें $500 करोड़ तो उन्होंने सीधे नुकसान के रूप में मांगे हैं। इसके चलते बिजनेस और निवेश के मौकों के नुकसान के रूप में $500 करोड़ और $500 करोड़ के मुआवजे की मांग की है। इस प्रकार कुल मिलाकर बिजनेस की साख और गुडविल के नुकसान के लिए उन्होंने $1500 करोड़ (लगभग ₹1.44 लाख करोड़) का मांग की है। बीआर शेट्टी ने इस पर केस शुरू होने से लेकर पेमेंट या वसूली होने तक सालाना 18% की दर से ब्याज भी मांगा है।

क्या है पूरा मामला?

बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर याचिका के मुताबिक बैंक ऑफ बड़ौदा साल 2019 के आसपास एनएमसी हेल्थकेयर ग्रुप का मुख्य बैंकर था।

शेट्टी का आरोप है कि ग्रुप की कंपनियों के बीच पैसे के लेन-देन में गड़बड़ियां हुईं और बैंक ने उन्हें रोकने के बजाय इसमें मदद की। उनका दावा है कि बैंक ने ग्रुप की कंपनियों और इंडिपेंडेंट सप्लायर्स के तौर पर दिखाई गई एंटिटीज के बीच ट्रांसफर के जरिए फंड डायवर्जन में भी मदद की।

शेट्टी का यह भी आरोप है कि बैंक के सिस्टम ने मनी-लॉन्ड्रिंग के 100 से ज्यादा अलर्ट दिए, जिन्हें बाद में बंद कर दिया गया।

याचिका में बैंक पर यह आरोप लगाया गया है कि उसने बिना पर्याप्त सिक्योरिटी के क्रेडिट देना जारी रखा और ऑडिटर को ग्रुप की उधारी और ट्रांजैक्शन से जुड़ी चिंताओं के बारे में नहीं बताया।

शेट्टी की याचिका की एक अहम बात पर्सनल गारंटी और दूसरे डॉक्यूमेंट्स से जुड़ी है, जिन पर उनके अनुसार फर्जी साइन हैं। उनका आरोप है कि बैंक ने इन डॉक्यूमेंट्स की असलियत की ठीक से जांच किए बिना ही उनके खिलाफ देनदारी का दावा किया। शेट्टी ने यह भी दावा किया है कि कुछ अकाउंट इंस्ट्रक्शन और ट्रांसफर बिना मंजूरी के किए गए थे।

शेट्टी ने अपनी याचिका में जून 2026 में लगभग $60 करोड़ (यानी करीब ₹5,700 करोड़) के समझौते का भी जिक्र किया है, जोकि बैंक ने एनएमसी ग्रुप की कंपनियों के जॉइंट एडमिनिस्ट्रेटर्स के साथ किया था। शेट्टी की शिकायत है कि यह सेटलमेंट 2 जुलाई 2026 को हुआ लेकिन बैंक ने अपनी गलती नहीं मानी। अब शेट्टी का कहना है कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी नुकसान हुआ है और चूंकि वह समझौते का हिस्सा नहीं थे, तो उनके अपने दावे अभी बाकी हैं।

शेट्टी ने अपने खिलाफ जारी लुक आउट सर्कुलर में बैंक की भूमिका को भी चुनौती दी है।

अब शेट्टी ने बैंकिंग रिकॉर्ड्स को सार्वजनिक करने की मांग की है, जिसमें अकाउंट खोलने और KYC (नो-योर-कस्टमर) से जुड़े डॉक्यूमेंट्स, ट्रांजैक्शन इंस्ट्रक्शन, इंटरनल कंप्लायंस अलर्ट और ट्रांसफर को वेरिफाई करने वाले अधिकारियों की पहचान करने वाले रिकॉर्ड्स शामिल हैं।

शेट्टी का आरोप है कि इन विवादित ट्रांजैक्शन से मिले कुछ पैसे एविटिस सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल्स और SMARD बिल्डिंग सॉल्यूशंस जैसी भारतीय एंटिटीज में लगाए गए। याचिका में कोर्ट से उन एसेट्स का खुलासा करने की मांग की गई है, जिनके लिए इस पैसे का इस्तेमाल हुआ। उन्होंने बैंक रिकॉर्ड्स और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को सुरक्षित रखने की भी मांग की है।

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वसूली के आरोपों पर FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे का पलटवार, अब कर दिया ये बड़ा चैलेंज

महाराष्ट्र में होटल, रेस्टोरेंट और क्विक कॉमर्स कंपनियों से कथित तौर पर पैसे वसूलने के आरोपों ने खाद्य सुरक्षा विभाग को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन आरोपों पर अब महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के कमिश्नर तुकाराम मुंडे ने प्रतिक्रिया दी है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि ये आरोप काफी सामान्य है और अपील की कि जिनके पास भी सबूत हों, वे सामने आएं।

संजय राउत ने लगाया था आरोप

बता दें कि ये आरोप शिवसेना नेता संजय राउत ने लगाए थे। उन्होंने कथित तौर पर एक चिट्ठी लिखकर दावा किया था कि FDA अधिकारी पैसे वसूलने के लिए कारोबारियों को लाइसेंस रद्द करने की धमकी दे रहे थे। हालांकि, मुंधे ने कहा कि उन्हें ऐसी कोई चिट्ठी नहीं मिली है।

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक, मुंडे ने कहा कि उन्हें इन आरोपों के बारे में सिर्फ मीडिया रिपोर्ट से पता चला। उन्होंने आगे कहा कि अगर राउत के पास कोई सबूत है, तो उन्हें वह सबूत उनके साथ या एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) के साथ शेयर करना चाहिए।

इससे पहले, राउत ने आरोप लगाया था कि FDA के डेजिग्नेटेड ऑफिसर (DOs), असिस्टेंट कमिश्नर (ACs) और फूड सेफ्टी ऑफिसर (FSOs) खुलेआम कारोबारियों से पैसे मांग रहे थे। आरोप के मुताबिक, मुंडे के FDA कमिश्नर बनने से पहले अधिकारी नोटिस बंद करने के लिए 10,000 से 12,000 रुपये लेते थे, लेकिन उनके चार्ज संभालने के बाद यह रकम बढ़कर 75,000 से 2 लाख रुपये के बीच हो गई।

मुंडे ने आरोपों को किया खारीज

इन आरोपों को खारिज करते हुए, मुंडे ने सीधे उन कारोबारियों से अपील की जिनसे रिश्वत मांगी गई हो। उन्होंने कहा कि जिस किसी ने भी पैसे दिए हैं या जिनसे पैसे मांगे गए हैं, वे उनसे संपर्क करें और शामिल अधिकारी की जानकारी और लेन-देन का कोई सबूत दें।

शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रहेगी

मुंडे ने यह भी कहा कि शिकायत करने वाले लोगों को अगर अधिकारियों की ओर से परेशान किए जाने का डर है, तो उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।

उन्होंने कहा कि FDA का शिकायत पोर्टल भी शिकायत करने वाले की पहचान छिपाकर रखता है और वे खुद यह पक्का करेंगे कि नाम जाहिर न हों। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी भ्रष्ट अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सबूत जरूरी हैं।

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Nirav Modi PNB Fraud Case: नीरव मोदी से जुड़े PNB बैंक फ्रॉड केस में केंद्रीय जांच एजेंसी CBI को बड़ी कामयाबी मिली है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने विदेश मंत्रालय (MEA) और गृह मंत्रालय (MHA) के समन्वय से UAE से रेड नोटिस आरोपी संदीप मिस्त्री को डिपोर्ट कराकर भारत लाया है।

दरअसल CBI के मुताबिक, संदीप मिस्त्री नीरव मोदी PNB फ्रॉड केस में वांटेड था। यह मामला CBI की बैंक सिक्योरिटीज एंड फ्रॉड ब्रांच (BSFB), मुंबई में दर्ज है। आरोपी पर फर्जी अंतरराष्ट्रीय व्यापार लेनदेन के जरिए बैंक फ्रॉड में शामिल होने का आरोप है।

फर्जी डायमंड-ज्वेलरी ट्रेड के जरिए बैंक फ्रॉड का आरोप

जांच के मुताबिक, संदीप मिस्त्री विभिन्न कंपनियों के बीच एक अहम कड़ी के तौर पर काम करता था। वह इन कंपनियों के रोजमर्रा के कामकाज की निगरानी करता था और सबूत छिपाने के लिए गुप्त और सेल्फ-डिलीटिंग कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म के जरिए निर्देश देता था।

CBI का आरोप है कि आरोपी ने हीरे, सोने और मोती की ज्वेलरी के फर्जी व्यापार को वास्तविक दिखाने के लिए जाली इंपोर्ट-एक्सपोर्ट दस्तावेज तैयार कराने में भी मदद की।

डमी कंपनियों के डायरेक्टरों पर दबाव बनाने का आरोप

CBI के अनुसार, संदीप मिस्त्री ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर विदेशी कंपनियों के डमी डायरेक्टरों पर भी दबाव बनाया। उन्हें गिरफ्तारी की धमकी देने, दूसरी जगहों पर भेजने, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त करने और ऐसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने का आरोप है, जिनसे इन डमी कंपनियों को वास्तविक मालिकों के स्वामित्व वाली कंपनियों के तौर पर दिखाया जा सके।

जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपी ने UAE में डमी कंपनियों के बैंक खातों से रकम निकालने यानी फंड सिफोनिंग में भी भूमिका निभाई। इस मामले में सक्षम अदालत के समक्ष चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।

जुलाई 2026 में जारी हुआ था रेड कॉर्नर नोटिस

CBI के अनुरोध पर जुलाई 2026 में INTERPOL चैनल के जरिए संदीप मिस्त्री के खिलाफ रेड नोटिस प्रकाशित किया गया था। इसके बाद UAE अधिकारियों ने आरोपी को ट्रेस कर गिरफ्तार किया और भारत डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू की।

CBI के मुताबिक, रेड नोटिस जारी होने के करीब दो महीने के भीतर आरोपी को ट्रेस कर गिरफ्तार किया गया और भारत वापस लाया गया। एजेंसी ने इसे संबंधित भारतीय और विदेशी एजेंसियों के बीच तेज अंतरराष्ट्रीय समन्वय का परिणाम बताया है।

मुंबई पहुंचते ही CBI ने लिया कब्जे में

संदीप मिस्त्री 28 सितंबर 2026 की रात 11:55 बजे मुंबई पहुंचा, जिसके बाद CBI BSFB, मुंबई के अधिकारियों ने उसे हिरासत में ले लिया। आरोपी को सक्षम अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे जेल कस्टडी में भेज दिया गया।

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PNB Bank Fraud case: 48.48 करोड़ के बैंक फ्रॉड में CBI का बड़ा एक्शन! हैदराबाद और ओडिशा में PCH ग्रुप के ठिकानों पर छापेमारी

पंजाब नेशनल बैंक (PNB) से जुड़े 48.48 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले में हैदराबाद और ओडिशा में कई ठिकानों पर एक साथ रेड मारी। यह कार्रवाई सीबीआई के बैंक सिक्योरिटीज एंड फ्रॉड ब्रांच (BSFB), बेंगलुरु में दर्ज मामले के सिलसिले में की गई है।

PNB की शिकायत पर दर्ज हुआ मामला

यह पूरी कार्रवाई पंजाब नेशनल बैंक (PNB) चेन्नई की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई FIR के तहत हुई है। सीबीआई ने इस केस में M/s PCH Corporation Ltd, M/s PCH Retail Ltd, दोनों कंपनियों के निदेशक और कुछ अज्ञात लोक सेवकों के खिलाफ केस दर्ज किया है। FIR में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और बैंक को ₹48.48 करोड़ रुपये का गलत नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

हाइपोथिकेटेड स्टॉक बेचकर रकम गबन करने का आरोप

सीबीआई के मुताबिक आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर जानबूझकर बैंक के पास हाइपोथिकेटेड (गिरवी) अपने कारोबार का पूरा स्टॉक बेच दिया। आरोप यह भी है कि स्टॉक की बिक्री से जो रकम हासिल हुई, उसे संबंधित लोन अकाउंट के जरिए बैंकिंग चैनल में जमा नहीं कराया गया। इसके बजाय कथित तौर पर उस रकम का दुरुपयोग और गबन किया गया। सीबीआई इन आरोपों के आधार पर संबंधित कंपनियों और उनके निदेशकों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, आपराधिक गबन और आपराधिक साजिश से जुड़े अपराधों की जांच कर रही है।

हैदराबाद और ओडिशा में कई ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन

19 सितंबर को सीबीआई की टीमों ने हैदराबाद और ओडिशा में एक साथ कई जगहों पर छापेमारी की। तलाशी अभियान के दायरे में PCH Corporation Ltd और PCH Retail Ltd के निदेशकों के आवासीय परिसर भी शामिल रहे। तलाशी के दौरान सीबीआई को कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जिन्हें जब्त कर लिया गया है। इनमें जांच से जुड़े कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड भी शामिल हैं।

सीबीआई अब जब्त की गई सामग्री और दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है, ताकि कथित आपराधिक साजिश के पूरे दायरे का पता लगाया जा सके। यह पता चल सके कि रकम को किस तरह डायवर्ट किया गया और उसका मूवमेंट कहां-कहां हुआ। मामले में शामिल सभी व्यक्तियों की भूमिका तय की जा सके। इस पूरे मामले में सीबीआई की आगे की जांच फिलहाल जारी है।