Silver Outlook: अगस्त में 20% उछली चांदी, क्या अब खरीदारी करें, होल्ड रखें या मुनाफा वसूलें? एक्सपर्ट्स से समझिए

Silver Price Outlook: अगस्त 2026 में चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली है। कॉमेक्स पर शुरुआती कारोबार के दौरान चांदी उछलकर $69.71 प्रति औंस पर पहुंच गई, जो 16 जून 2026 के बाद का इसका उच्चतम स्तर है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आई इस मजबूती के असर से भारतीय वायदा बाजार (MCX) पर भी सितंबर कॉन्ट्रैक्ट की चांदी मंगलवार (25 अगस्त) को ₹2,44,328 प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखी।

इस महीने अब तक चांदी निवेशकों को करीब 20% का शानदार रिटर्न दे चुकी है। इस बड़ी तेजी के बाद अब हर निवेशक के मन में सवाल है कि क्या इस भाव पर नई खरीदारी करनी चाहिए, मौजूदा पोर्टफोलियो को होल्ड रखना चाहिए या फिर प्रॉफिट बुक कर लेना चाहिए?

चांदी में इस बड़ी तेजी के ये है 4 मुख्य कारण

Bonanza के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट निरपेंद्र यादव के अनुसार, चांदी में यह तेजी केवल सट्टेबाजी नहीं बल्कि ठोस मैक्रो-इकोनॉमिक कारणों पर टिकी है:

1. अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद: अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दरों में कटौती की संभावना से डॉलर कमजोर हुआ है। बिना ब्याज वाली परिसंपत्तियों (जैसे सोना-चांदी) को रखने की अपॉर्च्युनिटी कॉस्ट कम होने से निवेशक चांदी की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।

2. सोने की तेजी का सपोर्ट: अमेरिका के बढ़ते राजकोषीय घाटे और ट्रेजरी लिक्विडिटी की चिंताओं के कारण सोने में तेजी बनी हुई है। इसका सीधा फायदा चांदी को भी मिल रहा है।

3. मजबूत औद्योगिक मांग: सोने से इतर, चांदी का बड़ा हिस्सा उद्योगों में इस्तेमाल होता है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) और हाई-टेक सेक्टर्स से आती भारी मांग इसे मजबूत सपोर्ट दे रही है।

4. सप्लाई की तंगी और ETF इनफ्लो: फिजिकल सिल्वर की कम उपलब्धता और ETF खरीदारी ने इस रैली को और तेज कर दिया है। इसी वजह से चांदी सोने के मुकाबले ज्यादा तेजी से रिएक्ट करती है।

इन्वेस्टर्स के लिए रणनीति: Buy, Hold या Sell?

वीटी मार्केट्स के ग्लोबल स्ट्रेटजी ऑपरेशंस लीड रॉस मैक्सवेल और बोनान्ज़ा के निरपेंद्र यादव के अनुसार, चांदी सोने की तुलना में अधिक वोलाटाइल होती है। इसलिए निवेशकों को ये तरीके अपनाने चाहिए:

मौजूदा निवेशक (Hold): अगर आपके पास पहले से चांदी या सिल्वर ETF मौजूद है, तो इसे होल्ड रखें। एक डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो के लिहाज से चांदी को बनाए रखना समझदारी होगी।

नए निवेशक: एक महीने में 20% चढ़ने के बाद एकमुश्त पैसा लगाने से बचें। हर उछाल के बाद तीखा करेक्शन आ सकता है। नए निवेशकों को ‘बाय ऑन डिप्स’ यानी गिरावट पर खरीदारी या SIP के तहत स्टैगर्ड बाइंग का रास्ता चुनना चाहिए।

कब बेचें: जब तक आपका इन्वेस्टमेंट गोल पूरा न हो जाए या पोर्टफोलियो में चांदी का एलोकेशन जरूरत से ज्यादा न बढ़ गया हो, तब तक घबराकर बिकवाली न करें।

सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल पर रखें नजर

एनालिस्ट्स के मुताबिक, अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी $70 प्रति औंस का स्तर पार करके टिक जाती है, तो यह तेजी और आगे जाएगी। अगर यह स्तर टूटता है तो मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है।

बाजार रेजिस्टेंस सपोर्ट
Comex (ग्लोबल)$69 – $70 / औंस$68 / औंस
MCX (भारत)₹2,55,000 / किग्रा₹2,35,000 – ₹2,38,000 / किग्रा

वैसे एक्सपर्ट्स का ये सुझाव है कि जनवरी के रिकॉर्ड स्तरों के बाद चांदी में बड़ी गिरावट आई थी। इसलिए वर्तमान तेजी एक ‘रिकवरी/कैच-अप रैली’ भी हो सकती है। नए निवेशक जल्दबाजी में दांव लगाने के बजाय कीमतों के थोड़ा स्थिर होने या गिरावट आने का इंतजार करें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

MCX पर सोना ₹1.61 लाख के पार, चांदी ₹2.50 लाख के करीब ,जानें आगे तेजी रहेगी जारी या फिर होगा प्रॉफिट-बुकिंग का दौर शुरू

Gold Silver Price: शुक्रवार को घरेलू फ्यूचर्स मार्केट में सोने और चांदी की कीमतों में और बढ़ोतरी हुई। इसकी वजह अंतराष्ट्रीय बाज़ार में बुलियन (सोने-चांदी) की कीमतों में तेज़ उछाल थी, जो कमज़ोर अमेरिकी डॉलर, अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों और सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) के तौर पर इनकी लगातार मांग के कारण हुआ।

एक्सचेंज की वेबसाइट पर मौजूद ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दोपहर 4:55 बजे सोना फ्यूचर्स ₹1,61,405 प्रति 10 ग्राम और चांदी फ्यूचर्स ₹2,46,400 प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रहे थे। ये कीमतें क्रमशः 5 अक्टूबर के सोने और 4 सितंबर के चांदी फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए हैं।

यह तेज़ी तब आई है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतें लगभग तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे यह धातु लगातार तीसरे हफ़्ते बढ़त की ओर अग्रसर है। इस साल जनवरी में, भारत में सोने की कीमत ₹1.8 लाख प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी, जबकि चांदी की कीमत ₹4.25 लाख प्रति किलोग्राम तक उछल गई थी।

सोने और चांदी की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?

कमज़ोर अमेरिकी डॉलर, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उतार-चढ़ाव, सुरक्षित निवेश के तौर पर मांग और अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी (मौद्रिक नीति) को लेकर उम्मीदों ने बुलियन की कीमतों को सहारा दिया है। चॉइस ब्रोकिंग की पिंकी यादव के अनुसार, COMEX पर बढ़त के अनुरूप MCX पर कीमतें ऊंचे स्तर पर खुलीं। अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड बायबैक और बढ़ते राष्ट्रीय कर्ज ने अस्थिरता को बढ़ावा दिया।

उन्होंने यह भी बताया कि तेल की बढ़ती कीमतों (जो ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों से जुड़ी हैं) ने महंगाई की चिंताएं बढ़ा दी हैं, जबकि डॉलर की कमज़ोरी ने कीमती धातुओं को और सहारा दिया है।

कमज़ोर डॉलर से बुलियन को सहारा

अमेरिकी डॉलर यहां एक अहम कारक रहा है। डॉलर इंडेक्स 98.8 के आसपास बना हुआ था और साप्ताहिक गिरावट की ओर बढ़ रहा था।चूंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने और चांदी की कीमत डॉलर में तय होती है, इसलिए डॉलर के कमज़ोर होने से अन्य करेंसी रखने वाले खरीदारों के लिए ये सस्ती हो जाती हैं, जिससे मांग बढ़ सकती है और कीमतें ऊपर जा सकती हैं।

रॉयटर्स के अनुसार, गोल्डसिल्वर सेंट्रल के ब्रायन लैन ने कहा कि डॉलर की कमज़ोरी ने कीमती धातुओं को व्यापक रूप से सहारा दिया है, साथ ही यील्ड में भी उल्लेखनीय बदलाव आया है।

ट्रेजरी बायबैक से अनिश्चितता

अमेरिकी ट्रेजरी डेट मैनेजमेंट (कर्ज प्रबंधन) एक और कारक है जिस पर बाज़ार की पैनी नज़र है। ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिया कि सरकार ट्रेजरी सिक्योरिटीज की रीपरचेज (वापसी खरीद) को और बढ़ा सकती है। उन्होंने पहले ही अगले तिमाही में लंबी अवधि के कर्ज की बायबैक को प्रति ऑपरेशन कम से कम $4 बिलियन तक दोगुना करने की योजना का संकेत दिया था।

इस कदम से बाजार में उतार-चढ़ाव आया है और यील्ड, दरों और कर्ज की व्यापक स्थिति पर नया ध्यान केंद्रित हुआ है।

OCBC के क्रिस्टोफर वोंग ने रॉयटर्स को बताया कि अब ध्यान इस बात पर होगा कि क्या यह कदम टिकाऊ है या नहीं। अमेरिकी डेटा और 27-29 अगस्त को होने वाला जैक्सन होल सिम्पोजियम डॉलर और यील्ड की दिशा तय कर सकते हैं।

फेड की दरे अहम

सोने के आउटलुक के लिए फेड की दरों की उम्मीदें अहम बनी हुई हैं। CME फेडवॉच टूल के अनुसार, बाजार में इस बात की 67% संभावना है कि फेड अगले महीने दरों को स्थिर रखेगा, जबकि दरों में बढ़ोतरी की संभावना 33% है।

चूंकि सोने पर कोई ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता है, इसलिए ऊंची दरों के कारण ब्याज देने वाली संपत्तियों की तुलना में इसकी अपील आमतौर पर कम हो जाती है। लेकिन पॉलिसी को लेकर अनिश्चितता, साथ ही यील्ड और डॉलर में बदलाव, सोने की ‘सेफ-हेवन’ (सुरक्षित निवेश) अपील को बढ़ा सकते हैं।

जियोपॉलिटिकल टेंशन से ‘सेफ-हेवन’ की मांग में बढ़त

भू-राजनीतिक जोखिम भी इसे बढ़ावा दे रहे हैं। बेसेंट ने कहा कि अमेरिका ईरान पर अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाएगा। तेल की आपूर्ति पर इसके असर की चिंता ने कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ा दिया है, जिससे महंगाई की चिंताएं भी बढ़ गई हैं।

ऐसी अनिश्चितता निवेशकों को सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों की ओर ले जाती है। यादव ने कहा कि मजबूत निवेश मांग और चीनी केंद्रीय बैंक की लगातार खरीदारी के कारण पूंजी सुरक्षित धातुओं की ओर बढ़ी है।

केंद्रीय बैंक की खरीदारी अभी भी एक अहम आधार

केंद्रीय बैंकों की लगातार मांग सोने के लिए एक बड़ा संरचनात्मक आधार बनी हुई है, क्योंकि देश अपने रिजर्व में विविधता ला रहे हैं। यादव ने जुलाई में ग्लोबल गोल्ड ETF में आए निवेश और केंद्रीय बैंकों की जारी खरीदारी की ओर भी इशारा किया, जो ज्वैलरी और रिटेल निवेश के अलावा मांग बढ़ाने वाले अन्य कारक हैं।

चांदी की कीमतों में भी तेजी

चांदी भी इस तेजी में शामिल हो गई है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्पॉट कीमतें 1.8% बढ़कर लगभग $69.31 प्रति औंस हो गई हैं। प्लैटिनम 2.6% बढ़कर $1,875.75 और पैलेडियम 1.7% बढ़कर $1,356.59 हो गया।

चांदी पर भी सोने की तरह ही कई मैक्रो-इकोनॉमिक कारकों का असर पड़ता है – जिसमें डॉलर की कमजोरी और दरों को लेकर बदलती उम्मीदें शामिल हैं – लेकिन इसकी औद्योगिक मांग के कारण इसकी कीमतों में स्वतंत्र रूप से भी बदलाव हो सकता है। हाल की तेज़ी से MCX पर चांदी की कीमत ₹2,46,400 प्रति किलोग्राम तक पहुँच गई है, जिससे यह ₹2.50 लाख के स्तर के बहुत करीब आ गई है।

सोने और चांदी के लिए आगे क्या होगा?

निकट भविष्य में इनकी चाल डॉलर, ट्रेजरी यील्ड, अमेरिका से आने वाले डेटा और फेड के संकेतों पर निर्भर करेगी, जिसमें जैक्सन होल पर खास नज़र रहेगी।

भारतीय निवेशकों के लिए रुपया-डॉलर का रेट भी मायने रखता है। अगर रुपया कमज़ोर होता है, तो डॉलर में कीमत वाली चीज़ें देश में महंगी हो जाती हैं, भले ही ग्लोबल कीमतें स्थिर रहें। इस तेज़ी की वजह से भारत में फिजिकल डिमांड पर कुछ असर पड़ा है, क्योंकि ऊंची कीमतों के कारण रिटेल खरीदार पीछे हट रहे हैं, जबकि चीन में डिमांड तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई है।

MCX पर सोना ₹1,61,405 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2,46,400 प्रति किलोग्राम पर है। अब सवाल यह है कि क्या ये ग्लोबल हालात तेज़ी को बनाए रख पाएंगे या फिर इससे मुनाफावसूली (प्रॉफिट-बुकिंग) का नया दौर शुरू हो जाएगा।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Silver price: फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीद हुई कम, फिर भी सोने-चांदी की कीमतें स्थिर, आखिर क्या है इसकी वजह

Gold Silver price: इंटरनेशनल मार्केट में सोने और चांदी की कीमतें स्थिर रहीं। दरअसल, सितंबर में अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें कम हो गईं और निवेशक केंद्रीय बैंक की पॉलिसी की दिशा के बारे में संकेत पाने के लिए फेडरल रिजर्व की हालिया बैठक के मिनट्स का इंतजार कर रहे थे।

COMEX पर, सोना $4,467.70 प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा था, जो पिछले बंद भाव $4,473.40 प्रति औंस से $6 या 0.13% कम था। धातु की कीमत $4,493.10 प्रति औंस के उच्चतम और $4,466 प्रति औंस के निचले स्तर के बीच रही।

चांदी $66.07 प्रति औंस पर थी, जो पिछले बंद भाव $65.895 प्रति औंस से 0.161 या 0.24% कम थी। इसने दिन के दौरान $66.685 प्रति औंस का उच्चतम और $65.760 प्रति औंस का निचला स्तर छुआ।स्पॉट मार्केट में, सोना 0.2% बढ़कर $4,424.28 प्रति औंस हो गया, जबकि दिसंबर डिलीवरी के लिए अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.2% बढ़कर $4,480.90 प्रति औंस हो गए। स्पॉट सिल्वर 0.9% बढ़कर $66.40 प्रति औंस हो गई।

सोने और चांदी की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?

सबसे बड़ा कारण अमेरिकी ब्याज दरों के बारे में बदलता नजरिया है।हालिया अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों ने सितंबर में ब्याज दर में बढ़ोतरी की उम्मीदों को कम कर दिया है। जुलाई में अप्रत्याशित रूप से नौकरियों का नुकसान, कंज्यूमर प्राइस इन्फ्लेशन में नरमी और कमजोर रिटेल बिक्री ने बाजारों को सख्त मॉनेटरी पॉलिसी की संभावना का फिर से आकलन करने के लिए प्रेरित किया है।

यह सोने और चांदी के लिए मायने रखता है क्योंकि दोनों ही नॉन-यील्डिंग एसेट्स (जिनसे कोई निश्चित रिटर्न नहीं मिलता) हैं। जब ब्याज दरें अधिक होती हैं, तो निवेशक बॉन्ड जैसी ब्याज देने वाली एसेट्स से अपेक्षाकृत आकर्षक रिटर्न कमा सकते हैं। अगर दर-वृद्धि की उम्मीदें कम हो जाती हैं, तो कीमती धातुओं को रखने की अपॉर्चुनिटी कॉस्ट (अवसर लागत) कम हो जाती है।इससे बुलियन (सोना-चांदी) अधिक आकर्षक हो सकता है।

कमजोर डॉलर बुलियन करता है सपोर्ट

अमेरिकी डॉलर कई प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले कई महीनों के निचले स्तर के करीब बना हुआ है।कमजोर डॉलर आम तौर पर सोने को सपोर्ट करता है क्योंकि धातु की कीमत डॉलर में तय होती है। इससे अन्य मुद्राओं वाले निवेशकों के लिए बुलियन अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है, जिससे संभावित रूप से मांग को सपोर्ट मिलता है।

डॉलर का यही असर चांदी की कीमतों को भी सपोर्ट कर सकता है। सोने और चांदी के लिए फेड (Fed) क्यों अहम है?

फेडरल रिजर्व की पॉलिसी का नजरिया बाजार के लिए एक अहम ट्रिगर बन गया है। 12 से 17 अगस्त के बीच हुए रॉयटर्स के एक सर्वे में पाया गया कि ज्यादातर अर्थशास्त्रियों का मानना ​​है कि फेड 2026 के आखिर तक अपनी मुख्य ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं करेगा।

बाजार अब फेड की हालिया बैठक के मिनट्स (बैठक का ब्योरा) का इंतजार कर रहा है, जो बुधवार (19 अगस्त) को आने वाले हैं। इन मिनट्स से इस बात का अंदाजा लग सकता है कि पॉलिसी बनाने वाले महंगाई, रोजगार और ब्याज दरें और बढ़ाने की जरूरत के बारे में क्या सोचते हैं। अगर फेड कम सख्त रुख का संकेत देता है, तो सोने और चांदी को और सपोर्ट मिल सकता है। दूसरी ओर, अगर रुख सख्त (हॉकिश) रहता है, तो डॉलर और बॉन्ड यील्ड बढ़ सकते हैं और कीमती धातुओं पर दबाव पड़ सकता है।

चांदी के लिए एक और वजह

चांदी की चाल सिर्फ ब्याज दरों की उम्मीदों पर निर्भर नहीं करती।इस धातु की औद्योगिक मांग भी काफी है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर से जुड़े इस्तेमाल शामिल हैं। इससे सोने के मुकाबले चांदी की कीमत पर असर डालने वाला एक और कारक जुड़ जाता है।हालांकि, अभी के लिए मॉनेटरी पॉलिसी, डॉलर और निवेशकों की आम धारणा दोनों धातुओं के लिए अहम कारक बने हुए हैं।

निवेशकों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?

फेड की बैठक के मिनट्स तुरंत असर डालने वाली घटना हैं। इसके अलावा, बाजार सितंबर में होने वाले पॉलिसी फैसले के संकेतों के लिए अमेरिका में महंगाई और रोजगार के आंकड़ों पर नजर रखेगा।बाजार की कमेंट्री के मुताबिक, सोना अभी $4,450-$4,460 प्रति औंस के दायरे में रेजिस्टेंस (बाधा) का सामना कर रहा है, जबकि चांदी $63 प्रति औंस के स्तर से ऊपर बनी हुई है।

भारतीय निवेशकों के लिए, ग्लोबल कीमतें समीकरण का सिर्फ एक हिस्सा हैं। घरेलू स्तर पर सोने और चांदी की कीमतें रुपये-डॉलर एक्सचेंज रेट, इंपोर्ट कॉस्ट, टैक्स और स्थानीय बाजार की स्थितियों पर भी निर्भर करती हैं।इसलिए, भले ही इंटरनेशनल बुलियन की कीमतें बढ़ें, भारतीय कीमतों में उसी अनुपात में बदलाव न हो।

फिलहाल, फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदों में कमी, डॉलर का कमजोर होना और लगातार बनी हुई जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता की वजह से कीमती धातुओं को सपोर्ट मिल रहा है।

नहीं थम रही सोने-चांदी की तेजी, रुपया और ग्लोबल फैक्टर्स कैसे डाल रहे है असर, अब क्या करें निवेशक!

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Silver Price: 2 महीने के हाई पर पहुंचने के बाद सोना हुआ और भी महंगा, चांदी फिसली

Gold Silver Price: इंटरनेशनल मार्केट में गुरुवार (13 अगस्त) की शुरुआती ट्रेडिंग में सोने की कीमतों में थोड़ी बढ़ोतरी हुई, जबकि चांदी की कीमत में गिरावट आई। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि बाजार महंगाई के ताजा आंकड़ों के बाद अमेरिकी ब्याज दरों के भविष्य पर विचार कर रहे थे। COMEX पर सोना $4,473.40 प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा था, जो पिछली क्लोजिंग से $5.90 या 0.13% अधिक था। इस मेटल ने दिन के दौरान $4,509.10 प्रति औंस का उच्चतम और $4,456.50 प्रति औंस का निचला स्तर छुआ।

COMEX पर चांदी की कीमत $65.58 प्रति औंस थी, जिसमें $0.12 या 0.18% की गिरावट आई। सेशन के दौरान इसकी कीमत $66.45 और $65.22 प्रति औंस के बीच रही।

ये ताजा बदलाव बुधवार यानी 12 अगस्त को सोने की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के बाद आए हैं। उस दिन जुलाई के अमेरिकी महंगाई के आंकड़े उम्मीद के मुताबिक आने के बाद सोना दो महीने से अधिक समय के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था।

बुधवार (12 अगस्त) को स्पॉट गोल्ड 0.9% बढ़कर $4,406.64 प्रति औंस हो गया, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.6% बढ़कर $4,467.50 प्रति औंस पर बंद हुआ। जून में 0.4% की गिरावट के बाद जुलाई में अमेरिकी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स में 0.1% की बढ़ोतरी हुई। यह आंकड़ा बाजार की उम्मीदों के अनुरूप था और इससे निकट भविष्य में सख्त मौद्रिक नीति की ओर बढ़ने की उम्मीदें कम हो गईं।

बाजार अब फेडरल रिजर्व की सितंबर की बैठक में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना कम मान रहे हैं। CME फेडवॉच टूल के अनुसार, महंगाई के आंकड़ों से पहले दरें बढ़ने की संभावना 46% थी, जो अब घटकर लगभग 40% हो गई है।

आमतौर पर ब्याज दरें बढ़ने पर सोने पर दबाव पड़ता है क्योंकि अधिक यील्ड (रिटर्न) से नॉन-यील्डिंग एसेट (जिससे कोई ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता) को रखने की अपॉर्चुनिटी कॉस्ट बढ़ जाती है। इसके विपरीत, कम या स्थिर दरों की उम्मीदें बुलियन की मांग को सहारा दे सकती हैं।

कमजोर अमेरिकी डॉलर ने भी सोने को कुछ सहारा दिया है। निवेशक अब महंगाई और ब्याज दरों के भविष्य के बारे में और संकेतों के लिए गुरुवार को आने वाले अमेरिकी प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स पर नजर रखेंगे।

कीमती धातुओं के लिए भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी एक अन्य कारक बने हुए हैं। शिपिंग रूट को लेकर फिर से बढ़े तनाव और ईरान-समर्थक हूथी विद्रोहियों से जुड़े टकराव का असर तेल की कीमतों पर पड़ सकता है, और इसके चलते महंगाई और ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें भी प्रभावित हो सकती हैं।

बुधवार (12 अगस्त) को चांदी की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई। यह 1.3% बढ़कर $65.49 प्रति औंस पर पहुंच गई और 22 जून के बाद अपने सबसे ऊंचे स्तर को छू लिया।

 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।