20वें दिन भी जारी सोनम वांगचुक का अनशन, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर विपक्ष एकजुट, क्या बोले पवन खेड़ा?

sonam wangchuk hunger strike

NEET परीक्षा मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनशन 20वें दिन भी जारी है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक से मुलाकात की। धीरे धीरे राजनीतिक पार्टियां सोनम वांगचुक के समर्थन में सामने आने लगी हैं। अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव, राज ठाकरे समेत कई राजनीतिक दिग्गज सोनम वांगचुक का समर्थन कर चुके हैं। ALSO READ: 'आपने देश की अंतरात्मा जगा दी, अब अनशन खत्म कीजिए'— शशि थरूर की सोनम वांगचुक से भावुक अपील

 

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि हम सभी सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर चिंतित हैं। हमारा सामना एक बेहद असंवेदनशील सरकार से है, जो लोकतांत्रिक विरोध की भाषा नहीं समझती। ऐसी सरकार के सामने विरोध के तरीकों में बदलाव लाना होगा। इस सरकार के खिलाफ अपनी जान जोखिम में डालने से कोई नतीजा नहीं निकलेगा।

 

कांग्रेस नेता ने कहा कि हम छात्रों की गूंज के नाम से एक अभियान चला रहे हैं। हमारे लोग सक्रिय रूप से सड़क, कैम्पस, हर जगह इस मुद्दे को उठा रहे हैं। हम सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग नहीं कर रहे बल्कि परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग भी कर रहे हैं।

कॉकरोच जनता पार्टी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, किसी भी स्थिति में देश के इस अनमोल रत्न को खो नहीं सकते है, लेकिन देश के युवाओं के भविष्य को भी अधर में नहीं छोड़ सकते हैं। ALSO READ: सोनम वांगचुक को मिला विपक्ष का साथ, केजरीवाल-अखिलेश ने की यह अपील, क्‍या अब तोड़ेंगे अनशन?

 

क्या बोले राज ठाकरे?

पहले महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने सोनम वांगचुक को लेकर एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि सरकार ने शायद देश में विरोध प्रदर्शन के अधिकार को ही समाप्त करने का फैसला कर लिया है। राज ठाकरे ने कहा कि यदि यह सरकार अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के दौरान मूक दर्शक बनी रह सकती है, तो नागरिकों के विरोध प्रदर्शन का उस पर आखिर क्या असर हो सकता है।

 

ठाकरे ने कहा कि वांगचुक के स्वास्थ्य से संबंधित रिपोर्ट और टेलीविजन पर दिखाई जा रही तस्वीरें निश्चित रूप से चिंताजनक हैं। यह कहना बेहद पीड़ादायक है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार ने सोनम वांगचुक को कुर्बान करने का फैसला कर लिया है और इसके साथ ही शायद देश में विरोध प्रदर्शन के लिए मौजूद लोकतांत्रिक अधिकार को भी समाप्त करने का निर्णय ले लिया है। 

केजरीवाल ने की वांगचुक को शिक्षा मंत्री बनाने की मांग

दिल्ली के पूर्व मुख्‍यमंत्री और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी जंतर मंतर पर सोनम वांगचुक से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा था कि धर्मेंद्र प्रधान को तो इस्तीफा देना चाहिए और सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाना चाहिए।

आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर चलेगा बुलडोजर, 40 में से 38 कमरे अवैध

johar university rampur

Johar University Demolition : रामपुर विकास प्राधिकरण ने वरिष्ठ सपा नेता मोहम्मद आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट जौहर यूनिवर्सिटी के 40 में से 38 भवनों को बिना स्वीकृत मानचित्र के बना हुआ अवैध निर्माण मानते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया है। विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार को भी आम रास्ता घोषित कर दिया गया है। संस्थान को 15 दिन के भीतर स्वयं अवैध निर्माण हटाने के लिए कहा गया है। ऐसा नहीं होने पर प्राधिकरण नियमानुसार कार्रवाई करेगा। ALSO READ: ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका! राज्यसभा सांसद कोएल मल्लिक ने दिया इस्तीफा

 

प्राधिकरण ने रामपुर सदर के ग्राम सिंगनखेड़ा में स्थित इस यूनिवर्सिटी की जांच में पाया गया कि वहां बने अधिकांश भवन बिना अनुमति और बिना स्वीकृत मानचित्र के बनाए गए हैं। इस संबंध में संस्था को नोटिस भी भेजा गया।

 

रामपुर विकास प्राधिकरण को भेजे गए जवाब में जौहर यूनिवर्सिटी की ओर से यह कहा गया कि जब भवनों का निर्माण हुआ था, तब यह क्षेत्र रामपुर विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता था। इस पर रामपुर के डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने कहा, वर्ष 2024 से पहले यह क्षेत्र जिला पंचायत के अधिकार क्षेत्र में था। यूनिवर्सिटी ने दो भवनों के मानचित्र जिला पंचायत से स्वीकृत कराए थे।

 

उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार संस्थान को 15 दिन का समय का समय दिया गया है। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगा। ALSO READ: केतन की मंगेतर सिया गोयल के परिवार की बढ़ी मुश्किल, FDA ने बंद कराया कामकाज
 

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि भाजपा को शिक्षा में भी साम्प्रदायिकता नजर आती है। शिक्षा, शिक्षक, शिक्षार्थी और शिक्षा के बाद मिलनेवाली नौकरी भाजपा के एजेंडे में है ही नहीं। भाजपा अपने अनरजिस्टर्ड संगी-साथियों के अवैधानिक भवनों को कब ढहाएगी? जब संगी-साथी ही अपंजीकृत है, तो उनके भवन, कार्यालय, संस्थान कैसे जायज होंगे? निंदनीय!

उल्लेखनीय है कि जेल में बंद सपा नेता आजम खान 2006 में बनी इस यूनिवर्सिटी के चांसलर है। रामपुर रेलवे स्टेशन से करीब 12 किलो मीटर की दूरी पर स्थित यूनिवर्सिटी का कैंपस 250 एकड़ से ज्यादा के क्षेत्र में फैला है।

Ram Mandir Donation Row: ‘भगवान श्री राम के दर्शन करना चाहते थे, लेकिन…’; अयोध्या में कांग्रेस नेता अजय राय हाउस अरेस्ट, पुलिस को दी चेतावनी

Ram Mandir Donation Row: उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान के कथित गबन को लेकर जारी विवाद के बीच कांग्रेस का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल मंगलवार (30 जून) को अयोध्या में राम मंदिर में पूजा-अर्चना करेगा। लेकिन, इस बीच, कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अजय राय को अयोध्या के एक होटल में नजरबंद कर दिया गया है।

पार्टी की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अजय राय करेंगे। इसमें पार्टी के सांसद किशोरी लाल शर्मा (अमेठी), राकेश राठौर (सीतापुर), उज्ज्वल रमण सिंह (प्रयागराज) और तनुज पुनिया (बाराबंकी) शामिल होंगे।

प्रतिनिधिमंडल के साथ बाराबंकी के पूर्व सांसद एस.पी. गौतम, विधान परिषद के पूर्व सदस्य दीपक सिंह, महाराजगंज के पूर्व विधायक वीरेंद्र चौधरी और बाराबंकी की पूर्व विधायक मीता गौतम भी मौजूद रहेंगी। पार्टी ने प्रस्तावित यात्रा कार्यक्रम की जानकारी स्थानीय प्रशासन को दे दी है। इस बीच, कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अजय राय को अयोध्या के एक होटल में नजरबंद कर दिया गया। पार्टी ने देर रात एक बयान में इसकी पुष्टि की है।

‘अयोध्या नहीं छोड़ेंगे’

अजय राय ने मंगलवार को दावा किया कि जब तक उन्हें राम मंदिर जाने की इजाजत नहीं मिलती तब तक अयोध्‍या नहीं छोड़ेंगे। अयोध्‍या से अजय राय ने मंगलवार को फोन पर पीटीआई से बातचीत में कहा, “मंगलवार के कार्यक्रम के लिए अयोध्या पहुंचते ही पुलिस ने उन्हें तुरंत ‘हाउस अरेस्ट’ (नजरबंद) कर लिया।” हालांकि, उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें राम मंदिर जाने की इजाजत नहीं मिलती, वे अयोध्या नहीं छोड़ेंगे।

राय ने एक अतिथि गृह से पीटीआई फोन पर बातचीत में पूछा, “यह कैसी सरकार है जो हमारे राम मंदिर जाने से डरती है।” राय ने कहा कि उन्हें मंगलवार के कार्यक्रम के लिए मंदिर शहर पहुंचने के तुरंत बाद सोमवार आधी रात को एक अतिथि गृह में ले जाया गया था। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, “आधी रात को मुझे मेरे होटल से आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय के अतिथि गृह में ले जाया गया और अभी मुझे वहीं रखा गया है।”

उनकी पत्नी ने उनके ठिकाने को लेकर चिंता जताई थी। राय यह पक्का नहीं बता पाए कि उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया है या नजरबंद किया गया है। उन्होंने अंदेशा जताते हुए कहा, “मुझे लगता है कि उन्होंने मुझे गिरफ़्तार कर लिया है, वरना वे मुझे आधी रात को इस अतिथि गृह में क्यों लाते और यहां क्यों रोककर रखते?” राय ने कहा, ‘‘मेरे दल के कई सदस्य जो आज के कार्यक्रम के लिए अलग-अलग क्षेत्रों से आ रहे थे, उन्हें रोका गया, गिरफ्तार किया गया या उनके घरों में ही रोक दिया गया।’’

कौन-कौन नेता शामिल?

इस दल में शामिल अन्य कांग्रेस नेताओं में सांसद किशोरी लाल शर्मा (अमेठी), राकेश राठौर (सीतापुर), उज्ज्वल रमन सिंह (प्रयागराज) और तनुज पुनिया (बाराबंकी) के अलावा अन्य लोग भी शामिल थे। अजय राय ने इस बीच मंगलवार को भारतीय युवक कांग्रेस के X पर एक पोस्ट को साझा किया जिसमें कहा गया कि आज कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल प्रभु श्री राम के दर्शन के लिए अयोध्या जा रहा था, लेकिन भाजपा सरकार ने उप्र कांग्रेस अध्यक्ष अजय रा जी समेत प्रतिनिधिमंडल को हाउस अरेस्ट कर लिया।

पोस्‍ट में सवाल उठाया गया है कि आखिर प्रभु श्री राम के भक्तों से इतना डर क्यों? जय श्री राम। अयोध्या में राम मंदिर दान में कथित गबन का मामला आने के बाद इसके पहले भी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने 18 जून को अयोध्या की यात्रा करके दर्शन पूजन किया था। अयोध्या में दान में गबन का मामला सात जून को समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव ने मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए उठाया और न्यायिक हस्तक्षेप पर जोर दिया था।

हालांकि, इस मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर यूपी के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने एक तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया जिसकी रिपोर्ट के आधार पर आठ आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

‘भगवान श्री राम के दर्शन करना चाहते थे, लेकिन…’

अजय राय ने कहा, “आज हम सभी भगवान श्री राम के दर्शन करना चाहते थे, लेकिन बीजेपी सरकार ने हमें गिरफ़्तार कर लिया है और आचार्य नरेंद्र देव कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस में बंद कर दिया है। उन्होंने हमारे सभी साथियों को भी नजरबंद कर दिया है। हम प्रार्थना करते हैं कि भगवान राम बीजेपी और आरएसएस के लोगों को सद्बुद्धि दें, जो उनके नाम का इस्तेमाल करके सत्ता में आए हैं, ताकि वे इस पवित्र शहर में हो रहे घोटालों को रोकें। हमारी सामूहिक मांग है कि पुलिस रिमांड लेकर उन निचले स्तर के कर्मचारियों से पूछताछ करे जिन्हें जेल भेजा गया है।”

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यूपी कांग्रेस प्रमुख ने आगे कहा, “इसके अलावा, इसमें शामिल हाई-प्रोफ़ाइल लोगों के ख़िलाफ़ FIR दर्ज होनी चाहिए, जिनमें निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र (जो पांच साल तक प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव रहे), अनिल मिश्र (जो इस भ्रष्टाचार और चोरी में सीधे तौर पर शामिल हैं), गोपाल राय, चंपत राय, बंसल और गोविंद देव गिरी शामिल हैं। उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए और उनके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई होनी चाहिए।”

राम मंदिर चंदा केस: FIR के बाद सभी 8 आरोपी गिरफ्तार, रामशंकर यादव से अनुकल्प मिश्रा तक ये पूरी लिस्ट देखिए

Ram Temple Donation Case: उत्तर प्रदेश पुलिस ने गुरुवार को राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए चंदे की कथित हेराफेरी के मामले में सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी अयोध्या मंदिर में भक्तों द्वारा दिए गए चंदे के कथित दुरुपयोग के संबंध में पहली FIR दर्ज करने के कुछ ही घंटों बाद हुई। सूत्रों के अनुसार, सभी आठ आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। साथ ही गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेज और अन्य कानूनी औपचारिकताएं भी पूरी की जा रही हैं।

न्यूज 18 के मुताबिक,  यह मामला स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की शुरुआती रिपोर्ट में की गई सिफारिश और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर दर्ज किया गया था।

FIR में इन लोगों के नाम आरोपी के रूप में दर्ज

FIR में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रामाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू को आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा, एफआईआर में कुछ अज्ञात लोगों का भी जिक्र किया गया है।

बता दें कि इन सभी पर लगे आरोपों में चोरी, आपराधिक विश्वासघात, चोरी का सामान लेना या छिपाना, आपराधिक साजिश और किसी साझा इरादे को पूरा करने के लिए किए गए काम से जुड़े अपराध शामिल हैं।

इस मामले में उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 305, 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61 और 3(5) के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की धारा 13(1)(a) के तहत भी केस दर्ज किया गया है।

यह FIR SIT की सिफारिशों के आधार पर दर्ज की गई थी। गौतलब है कि SIT का गठन उत्तर प्रदेश सरकार ने राम मंदिर में भक्तों द्वारा दिए गए दान और चढ़ावे के प्रबंधन में अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए किया था।

ट्रस्टी कृष्ण मोहन कौन हैं?

कृष्ण मोहन को 16 सितंबर 2025 को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का ट्रस्टी बनाया गया था। उन्हें यह जिम्मेदारी फरवरी 2025 में ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद दी गई थी।

उत्तर प्रदेश के हरदोई के रहने वाले कृष्ण मोहन ने लखनऊ विश्वविद्यालय से एमएससी (MSc) की पढ़ाई की है। उन्होंने करीब छह साल तक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में काम किया। इसके बाद वह भारतीय वन सेवा (Indian Forest Service) में शामिल हुए, जहां उन्हें महाराष्ट्र कैडर मिला।

साल 2012 में इंडियन फॉरेस्ट सर्विस से रिटायर होने के बाद, वे समाज सेवा के कामों में सक्रिय हो गए। ट्रस्ट के सदस्यों के बीच कई महीनों तक चर्चा के बाद, कामेश्वर चौपाल के निधन से खाली हुई जगह को भरने के लिए उन्हें सर्वसम्मति से चुना गया।

विवाद कैसे बढ़ा

राम मंदिर में मिले दान के कथित दुरुपयोग के आरोपों के बाद, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की मांग पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को SIT का गठन किया।

यह विवाद तब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया जब समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने 7 जून को उन रिपोर्टों का जिक्र किया जिनमें आरोप लगाया गया था कि मंदिर में दिए गए दान के करोड़ों रुपये गायब हैं, और उन्होंने अदालतों से इस मामले का संज्ञान लेने का आग्रह किया।

उस समय लगे इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के प्रमुख आलोक कुमार ने आरोप लगाया था कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस इस विवाद का इस्तेमाल 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक फायदा उठाने के लिए कर रहे हैं।

छोटी मछलियों को सजा मिलेगी: अखिलेश यादव

गुरुवार को FIR दर्ज होने के बाद, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने X पर एक पोस्ट में जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP सरकार के तहत, “छोटी मछलियों को सजा मिलेगी जबकि बड़ी मछलियां बच जाएंगी।”

अखिलेश यादव ने आगे दावा किया कि लोग कह रहे हैं कि SIT प्रक्रिया का इस्तेमाल FIR दर्ज होने से पहले सबूत मिटाने और यह तय करने के लिए किया गया हो सकता है कि “किस बड़ी मछली को बचाना है और किसे फंसाना है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ऐसा लगता है कि SIT रिपोर्ट पहले ही तैयार कर ली गई थी और जांच पहले से तय नतीजों के हिसाब से की गई थी।

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पहली FIR दर्ज! इन 8 लोगों के नाम शामिल, जानिए अब तक क्या-क्या हुआ

Ram Mandir donation row: उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित चढ़ावा एवं चंदा चोरी से जुड़े मामले में गुरुवार (25 जून) को पहली FIR दर्ज की गई। इससे दो दिन पहले मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंपी थी। पुलिस के एक अधिकारी ने पीटीआई से गुरुवार को पुष्टि की है कि इस मामले में FIR दर्ज कर ली गई है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने आठ लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। यह केस अयोध्या थाने में दर्ज की गई है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी का गठन किया था। यह कदम अयोध्या राम मंदिर को मिले चढ़ावे की रकम के दुरुपयोग के आरोप सामने आने के बाद उठाया गया था। एसआईटी में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं।

किसके खिलाफ दर्ज हुआ है केस?

सूत्रों के मुताबिक, इस FIR में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम नहीं है। हालांकि, बताया जा रहा है कि उनके ड्राइवर टिन्नू यादव का नाम शामिल किया गया है। इसके अलावा अनुकल्प मिश्रा और अविनाश शुक्ला के नाम भी शामिल हैं। हालांकि, अभी यह दावा मीडिया रिपोर्ट्स में किया गया है। यूपी सरकार की तरफ से आधिकारिक बयान का इंतजार है।

पुलिस सूत्रों ने पीटीआई को बताया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रमाशंकर यादव, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्र, रमाशंकर मिश्र, सुभाष श्रीवास्तव तथा मनीष कुमार यादव नामक व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज कराई है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि एसआईटी ने कुछ कठोर सिफारिशें की हैं। अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस मामले को लेकर बहुत गंभीर हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी गठित की गई थी।

यह कदम अयोध्या राम मंदिर को मिले चढ़ावे की रकम के दुरुपयोग के आरोप सामने आने के बाद उठाया गया था। एसआईटी में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं।

गंभीर धाराओं में FIR दर्ज

पुलिस के अनुसार चोरी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक षड़यंत्र समेत विभिन्न आरोपों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों पर BNS की धारा 306, 316 (5) , 317 (4) और 317 (5) लगाई गई हैं। मंदिर ट्रस्ट के एक सदस्य ने SIT की शुरुआती जांच के आधार पर यह FIR कराई है।

किसने दर्ज कराई FIR?

न्यूज 18 के मुताबिक, यह FIR श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की लिखित शिकायत के आधार पर अयोध्या में दर्ज की गई है। पुलिस ने उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर यह मामला दर्ज किया है। यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत दर्ज किया गया है, जिनमें धारा 306, 316(5) और 317 शामिल हैं।

यह घटनाक्रम तब हुआ जब दान में मिली रकम की चोरी के आरोपों की जांच कर रही SIT ने उत्तर प्रदेश सरकार को अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट सौंप दी है। यह रिपोर्ट लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत ने एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (होम) संजय प्रसाद को सौंपी, जो ट्रस्ट के पदेन सदस्य भी हैं।

राम मंदिर के लिए भक्तों द्वारा दिए गए दान के गलत इस्तेमाल के आरोपों पर विवाद इस महीने की शुरुआत में तब शुरू हुआ, जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि रिपोर्टों से पता चलता है कि दान के करोड़ों रुपये गायब हैं।

VHP ने की थी केस दर्ज करने की मांग

विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने अयोध्या में राम मंदिर को मिले चढ़ावे की कथित हेराफेरी मामले में FIR दर्ज करने और समयबद्ध जांच करने की मांग करते हुए कहा है कि दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। VHP के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अलोक कुमार ने पीटीआई से कहा कि जांच चार महीने के भीतर पूरी होनी चाहिए और और आरोपियों को न्याय के दायरे में लाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “हम मांग करते हैं कि अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले में FIR दर्ज होनी चाहिए, जांच में तेजी लाई जानी चाहिए, फास्ट-ट्रैक कोर्ट में रोजाना सुनवाई होनी चाहिए और दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।” कुमार ने कहा कि जांच चार महीने के भीतर पूरी होनी चाहिए ताकि दोषियों को बिना विलंब के सजा मिल सके।

VHP की यह मांग ऐसे समय में आई है जब दान राशि में कथित हेराफेरी के आरोपों की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मंगलवार को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। एसआईटी की यह रिपोर्ट लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय प्रसाद को सौंपी।

SIR जांच जारी

अधिकारियों ने बताया कि एसआईटी की जांच अभी जारी है और मामले से जुड़े तथ्यों का संकलन किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर दान में कथित अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था।

एसआईटी द्वारा प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद पंत ने कहा कि टीम अगले 10 से 15 दिनों में अंतिम रिपोर्ट सौंपने का प्रयास कर रही है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सात जून को आरोपों से जुड़ी खबरों का हवाला देते हुए कहा था कि राम मंदिर को चंदे में मिले करोड़ों रुपये गायब हैं। उन्होंने अदालत से मामले का संज्ञान लेने की अपील की थी।

FIR पर अखिलेश का रिएक्शन

अयोध्या मामले में केस दर्ज होने के बाद सपा मुखिया अखिलेश यादव का बयान सामने आया है। अखिलेश ने X पर लिखा, “भाजपा राज में नाइंसाफी की दिखेगी ये झांकी… फुनगी को फांसी, शाखाओं को मिलेगी माफी! जनता कह रही है कि पहले SIT के बहाने सारे सबूत साफ कर दिये गये होंगे और ये निश्चित कर लिया गया होगा कि किन बड़ी मछलियों को बचाना है और किसको फंसाना है, उसके बाद FIR हो  रही है। लगता है SIT को पहले रिपोर्ट बनाकर दे दी गई होगी और उसके हिसाब से जांच की गई होगी मतलब निष्कर्ष पहले निकाल लिया गया होगा।”

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