इंदौर में MCA स्‍टूडेंट ने लगाई फांसी, सहेलियों ने बताया क्‍यों थी परेशान, एक साल से कर रही थी परीक्षा की तैयारी

इंदौर से लगातार आत्‍महत्‍याओं की खबरें सामने आ रही हैं। रविवार को एक MCA की छात्रा ने फांसी लगा ली। मृतक छात्रा परदेशीपुरा थाना क्षेत्र की रहने वाली थी। शुरुआती जांच में सामने आया है कि छात्रा परीक्षा को लेकर तनाव में थी। पुलिस ने मामला जांच में लिया है और परिजनों को सूचना दे दी गई है।

परदेशीपुरा थाना पुलिस के मुताबिक मृतका का नाम रेखा (22) पिता उत्तम गाढे मूल निवासी बुरहानपुर थी। वह पिछले एक साल से इंदौर में रहकर चमेली देवी कॉलेज से MCA की पढ़ाई कर रही थी।

सहेलियां लौटीं तो लटका मिला शव : जानकारी के मुताबिक  रविवार रात करीब 11 बजे रेखा की सहेलियों ने उसे कमरे में फंदे पर लटका हुआ देखा। बताया जा रहा है कि रविवार शाम सहेलियों ने उसे राजबाड़ा घूमने चलने के लिए कहा था, लेकिन उसने जाने से मना कर दिया था। बाद में जब सहेलियां वापस लौटीं तो वह कमरे में फांसी के फंदे पर लटकी मिली।

पुलिस ने मौके पर मौजूद सहेलियों से पूछताछ की। उन्होंने बताया कि रेखा MCA सेकंड सेमेस्टर की परीक्षा दे रही थी। उसके कुछ पेपर खराब हो गए थे, जिसके कारण वह काफी स्‍ट्रेस में थी। पिछले कुछ दिनों से वह पढ़ाई भी ठीक से नहीं कर पा रही थी और परेशान रहने लगी थी।

पुलिस को मौके से किसी प्रकार का सुसाइड नोट नहीं मिला है। फिलहाल आत्महत्या के कारणों की जांच की जा रही है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। सोमवार को पोस्टमार्टम कराया जाएगा। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का स्पष्ट पता चल सकेगा। वहीं, छात्रा के परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है।
Edited By: Naveen R Rangiyal

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने दिया इस्तीफा, क्या इसमें हैं ट्रंप कनेक्शन?

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लेबर पार्टी में बगावत और राजनीतिक दबाव के चलते ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केर स्टार्मर ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। वे जुलाई 2024 से ब्रिटेन की कमान संभाल रहे थे। स्टार्मर 10 साल में प्रधानमंत्री पद छोड़ने वाले छठे नेता है। र्स्टामर के इस्तीफे के पीछे अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्ड का कनेक्शन भी सामने आया है।

 

स्टार्मर ने क्यों दिया इस्तीफा?

देश के नाम अपने संबोधन के आखिर में कीर स्टार्मर की आवाज भावुक होकर भर्रा गई। स्टारमर ने कहा कि अब मेरी पार्टी यह सवाल पूछ रही है कि क्या मैं अगले आम चुनाव में पार्टी का नेतृत्व करने के लिए सबसे सही व्यक्ति हूं। मैंने इस सवाल पर अपनी संसदीय पार्टी का जवाब सुन लिया है और मैं उस जवाब को सम्मान के साथ स्वीकार करता हूं। ALSO READ: ट्रंप ने कहा- मेलोनी ने फोटो के लिए की थी मिन्नत, इटली की पीएम ने दिया ऐसा जवाब कि छिड़ गई नई बहस

 

कई दिनों से था इस्तीफे का दबाव?

निकाय चुनाव में लेबर पार्टी की करारी हार के बाद से ही स्टार्मर पर पद छोड़ने का दबाव था। कैबिनेट साथियों के साथ ही लेबर पार्टी से जुड़े नेताओं के साथ ही पार्टी के डोनर्स और ट्रेड यूनियन के नेता पिछले 2 दिनों से स्टार्मर के इस्तीफे के संकेत दे रहे थे।

 

क्या है स्टार्मर के इस्तीफे का ट्रंप कनेक्शन?

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भी स्टार्मर के पद छोड़ने की आशंका जताई थी। उन्होंने कहा था कि आव्रजन और ऊर्जा को लेकर स्टार्मर की नीतियां उनके असफल होने का कारण रही। बहरहाल ट्रंप की घोषणा के अगले ही दिन र्स्टामर ने पद छोड़ दिया। इससे पहले भी भारत-पाकिस्तान सीजफायर से लेकर ईरान डील तक ट्रंप की कई बातें सच हुई है। ALSO READ: ब्रेक्जिट के 10 साल: ब्रिटेन को भारी पड़ा अलग होने का फैसला

 

बर्नहम पीएम पद की दौड़ में सबसे आगे

स्टार्मर के इस्तीफे के साथ ही ब्रिटेन में नए प्रधानमंत्री को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। एंडी बर्नहम प्रधानमंत्री के पद पर बैठने और लेबर पार्टी के लीडर के तौर पर स्टार्मर की जगह लेने की दौड़ में सबसे आगे हैं। उन्होंने मेकरफील्ड सीट पर हुए उपचुनाव में जीत हासिल की थी। खुद स्टार्मर ने संकेतों में उनके नाम की सिफारिश कर दी है। 

edited by : Nrapendra Gupta

 

EPFO Pension Rules: मृत्यु, दिव्यांगता या अर्ली रिटायरमेंट पर EPS पेंशन का क्या होता है? समझिए सभी नियम

EPFO Pension Rules: कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) 1995 को सिर्फ रिटायरमेंट पेंशन योजना समझना बड़ी भूल हो सकती है। यह सोशल सिक्योरिटी स्कीम भी है, जो कर्मचारी के साथ-साथ उसके परिवार को भी सुरक्षा देने का काम करती है। कर्मचारी की रिटायरमेंट, दिव्यांगता या मृत्यु जैसे हालात में EPS के नियम भी अलग-अलग लागू होते हैं।

रिटायरमेंट पर कब मिलती है पेंशन?

अगर कोई कर्मचारी कम से कम 10 साल तक EPS में योगदान करता है, तो वह 58 साल की उम्र के बाद मंथली पेंशन पाने का हकदार बन जाता है। हालांकि कर्मचारी चाहे तो 50 साल की उम्र के बाद अर्ली पेंशन भी ले सकता है। लेकिन ऐसी स्थिति में पेंशन की रकम कम हो जाती है, क्योंकि उसे तय उम्र से पहले निकाला जा रहा होता है।

दिव्यांगता की स्थिति में क्या होता है?

अगर कर्मचारी नौकरी के दौरान स्थायी और पूर्ण रूप से दिव्यांग हो जाता है, तो उसे डिसेबिलिटी पेंशन मिल सकती है। इस मामले में सामान्य रिटायरमेंट पेंशन की तरह 10 साल की सेवा शर्त उसी तरह लागू नहीं होती। इसका मकसद ऐसे कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा देना है, जिनकी कमाने की क्षमता खत्म हो गई हो।

कर्मचारी की मौत होने पर किसे मिलते हैं पैसे?

EPS की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यह कर्मचारी की मृत्यु के बाद भी परिवार को सुरक्षा देता है। कर्मचारी की मौत होने पर पात्र परिवार के सदस्यों को फैमिली पेंशन मिल सकती है। इसमें विधवा या विधुर पेंशन, बच्चों की पेंशन और कुछ मामलों में अनाथ पेंशन भी शामिल है।

यही वजह है कि EPS को सिर्फ रिटायरमेंट पेंशन नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी योजना माना जाता है।

क्या नॉमिनी को हमेशा पेंशन मिलती है?

कई लोग मानते हैं कि EPF की तरह EPS में भी नॉमिनी को सीधे फायदा मिल जाएगा। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। EPS में पेंशन का अधिकार मुख्य रूप से योजना में तय पात्र परिवार के सदस्यों को मिलता है।

उदाहरण के लिए, अगर कोई अविवाहित कर्मचारी किसी बाहरी व्यक्ति को नॉमिनी बना देता है, तो सिर्फ नॉमिनी होने से उस व्यक्ति को पेंशन का अधिकार नहीं मिल जाता। पेंशन का फैसला EPS के नियमों के मुताबिक होता है।

किन गलतियों से हो सकती है परेशानी?

कई परिवारों को कर्मचारी की मौत के बाद पता चलता है कि रिकॉर्ड में गड़बड़ी है। नाम, जन्मतिथि, आधार, बैंक खाते या सर्विस रिकॉर्ड में अंतर होने से पेंशन क्लेम अटक सकता है। कई बार नौकरी बदलने के दौरान पुराने रिकॉर्ड सही तरीके से ट्रांसफर नहीं होते, जिससे सेवा अवधि का पूरा रिकॉर्ड नहीं दिखता।

इसी तरह Form 11 में गलतियां भी बाद में बड़ी समस्या बन सकती हैं। इसलिए कर्मचारियों को अपने EPF पासबुक, ट्रांसफर रिकॉर्ड, सर्विस हिस्ट्री और KYC जानकारी समय-समय पर जांचते रहना चाहिए।

EPS को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमियां

कई कर्मचारी मानते हैं कि हर EPF सदस्य अपने आप EPS सदस्य भी बन जाता है। वहीं, 1 सितंबर 2014 के बाद नियम बदल चुके हैं और सभी कर्मचारी EPS के लिए पात्र नहीं होते।

दूसरी बड़ी गलतफहमी यह है कि EPS को लोग बचत खाते की तरह समझते हैं। जबकि यह पेंशन योजना है। इसमें मिलने वाला फायदा सेवा अवधि और पात्रता पर निर्भर करता है, न कि खाते में दिख रही रकम पर।

रिटायरमेंट प्लानिंग में EPS की क्या भूमिका है?

EPS को रिटायरमेंट की पूरी व्यवस्था नहीं माना जाना चाहिए। यह केवल एक बुनियादी सामाजिक सुरक्षा देता है। कर्मचारियों को EPF, NPS, निजी निवेश और पर्याप्त जीवन बीमा के साथ अपनी रिटायरमेंट योजना बनानी चाहिए।

साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि नौकरी के दौरान उनके सभी पेंशन रिकॉर्ड सही और अपडेट रहें। इससे भविष्य में परिवार को पेंशन पाने में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।

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क्या ऑनलाइन पर्सनल लोन के लिए वीडियो KYC जरूरी है?

पर्सनल लोन एक ऐसा फाइनेंशियल टूल है, जो मेडिकल बिल्स, एजुकेशन फीस या दूसरी जरूरी फाइनेंशियल जरूरतों को पूरा करने में मदद करता है. डिजिटल लेंडिंग के बढ़ने से ऑनलाइन पर्सनल लोन लेना अब पहले से कहीं ज्यादा तेज और आसान हो गया है. इस प्रोसेस का एक अहम स्टेप है KYC (Know Your Customer) वेरिफिकेशन, जिसके जरिए लेंडर्स आपकी आइडेंटिटी यानि कि आपकी पहचान वेरिफाई करते हैं. जब ये प्रोसेस डिजिटली होता है, तो इसे e-KYC कहते हैं.

प्रोसेस को और तेज व आसान बनाने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) अब लेंडर्स को वीडियो कॉल के जरिए e-KYC करने की इजाजत देता है, जिसे वीडियो KYC कहते हैं. इससे फिजिकल डॉक्युमेंट्स जमा करने की जरूरत खत्म हो जाती है, जिससे लोन अप्रूवल तेज और हैसल-फ्री हो जाता है.

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पर्सनल लोन वीडियो KYC क्या है?

जैसा कि नाम से पता चलता है, वीडियो KYC आपकी आइडेंटिटी वेरिफाई करने का वीडियो-बेस्ड तरीका है. ये एक नॉर्मल वीडियो कॉल की तरह ही है. आपके लैपटॉप, कंप्यूटर या स्मार्टफोन का फ्रंट-फेसिंग कैमरा यूज होता है ताकि लेंडिंग इंस्टीट्यूशन के ऑफिशियल्स आपकी आइडेंटिटी वेरिफाई कर सकें. इस दौरान ऑफिशियल्स आपकी इमेज कैप्चर कर सकते हैं.

इस प्रोसेस में आपको आधार कार्ड और पैन कार्ड जैसे जरूरी डॉक्युमेंट्स दिखाने होते हैं. ऑफिशियल्स एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग और KYC गाइडलाइंस के हिसाब से कुछ सवाल पूछ सकते हैं. साथ ही, लाइव लोकेशन ट्रैकिंग ऑन रखना जरूरी है ताकि लेंडर को आपकी लोकेशन पता रहे.

क्या पर्सनल लोन के लिए वीडियो KYC जरूरी है?

वीडियो KYC की जरूरत हर लेंडर के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है. कुछ लेंडर्स इसे पर्सनल लोन देने के लिए जरूरी मानते हैं, जबकि कुछ के लिए ये ऑप्शनल हो सकता है. आप बैंक-वाइज पर्सनल लोन वीडियो KYC डिटेल्स चेक कर सकते हैं ताकि पता चल सके कि किसी खास बैंक से ऑनलाइन लोन लेने के लिए वीडियो KYC जरूरी है या नहीं.

वीडियो KYC के फायदे

वीडियो KYC के कुछ बड़े फायदे हैं:

फिजिकल डॉक्युमेंट्स की जरूरत नहीं: वीडियो KYC का सबसे बड़ा फायदा ये है कि आपको कोई डॉक्यूमेंट फिजिकली जमा नहीं करना पड़ता. आप वीडियो कॉल में डॉक्युमेंट्स दिखाकर प्रोसेस पूरा कर सकते हैं.

फास्ट लोन अप्रूवल: वीडियो KYC से आइडेंटिटी वेरिफिकेशन मिनटों में हो जाता है, जिससे लोन सैंक्शन का टाइम कम हो जाता है.

लेकिन आपको कौन सा लोन चुनना चाहिए? मनीकंट्रोल ऐप और वेबसाइट पर आप लेंडर्स के लोन चेक कर सकते हैं. आप 50 लाख रुपए तक का लोन ले सकते हैं, जिसमें इंटरेस्ट रेट्स 9.99% सालाना से शुरू होते हैं. ये लोन सर्च करने का तेज और ऑनलाइन तरीका है और कोई चीज गिरवी रखने की जरूरत नहीं पड़ती है.

बढ़ी हुई एक्सेसिबिलिटी और रिमोट बोर्डिंग: वीडियो KYC से कस्टमर्स अपने घर से ही पर्सनल लोन KYC प्रोसेस पूरा कर सकते हैं. ये स्ट्रेस-फ्री और कन्वीनियंट है और कस्टमर्स को लेंडर की लोकल ब्रांच में जाने की जरूरत नहीं पड़ती. ये खास तौर पर रिमोट और कम सर्विस वाले इलाकों में रहने वालों के लिए फायदेमंद है.

वीडियो KYC पूरा करने के स्टेप्स

वीडियो KYC पूरा करने के लिए आपको ये स्टेप्स फॉलो करने होंगे:

डिवाइस सेट करें: पहले तय करें कि आप वीडियो KYC के लिए कौन सा डिवाइस यूज करेंगे. आप डेस्कटॉप, लैपटॉप या स्मार्टफोन यूज कर सकते हैं. इसमें वेबकैम या फ्रंट-फेसिंग कैमरा और अच्छा इंटरनेट कनेक्शन होना चाहिए. रूम में पर्याप्त लाइटिंग हो और कोई नॉइज न हो.

आधार-बेस्ड e-KYC पूरा करें: लेंडर आपको एक लिंक देगा, जिससे आपको आधार वेरिफिकेशन पूरा करना होगा. आपके आधार-रजिस्टर्ड नंबर पर एक ओटीपी आएगा, जिसे आपको एंटर करना होगा.

वीडियो KYC लिंक रिसीव करें: लेंडर आपको वीडियो कॉल जॉइन करने का लिंक भेजेगा. आपका अपॉइंटमेंट KYC ऑफिशियल्स की अवेलेबिलिटी के हिसाब से शेड्यूल होगा.

वीडियो कॉल जॉइन करें: शेड्यूल के हिसाब से टाइम पर वीडियो कॉल जॉइन करें. कैमरा और माइक्रोफोन ऑन करें ताकि प्रोसेस शुरू हो सके.

जरूरी डॉक्युमेंट्स दिखाएं: वीडियो कॉल में आपको आधार कार्ड और पैन कार्ड जैसे रिलेवेंट डॉक्युमेंट्स ऑफिसर को दिखाने होंगे. आपको एम्प्लॉयमेंट या इनकम प्रूफ भी दिखाना पड़ सकता है.

सवालों के जवाब दें: KYC ऑफिसर आपके लोन एप्लिकेशन और दिखाए गए डॉक्युमेंट्स के आधार पर कुछ सवाल पूछेगा. सभी सवालों के सही जवाब दें.

KYC प्रोसेस पूरा करें: KYC ऑफिशियल्स को आपकी KYC एप्लिकेशन चेक करने और अप्रूव या रिजेक्ट करने में आमतौर पर कुछ मिनट लगते हैं.

अगर वीडियो KYC सक्सेसफुल होती है, तो लेंडर आपकी लोन एप्लिकेशन का मूल्यांकन करेगा. लोन अप्रूव होने पर लोन अमाउंट आपके बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया जाएगा.

वीडियो KYC लोन एप्लिकेशन प्रोसेस में एक शानदार स्टेप है. ये KYC पूरा करने का बहुत कन्वीनियंट और सिक्योर तरीका है. इससे आपका काफी टाइम और मेहनत बचती है और ये फाइनेंशियल इनक्लूजन को भी बढ़ावा देता है. अगर आप पर्सनल लोन लेने की सोच रहे हैं, तो मनीकंट्रोल ऐप पर आप लेंडर्स से 50 लाख रुपए तक का लोन अप्लाई कर सकते हैं. आपको बस लोन सेक्शन में जाना है, अपने लिए सही लोन चुनना है, एप्लिकेशन फॉर्म भरना है और जरूरी डॉक्युमेंट्स अपलोड करने हैं. इंटरेस्ट रेट्स 9.99% सालाना से शुरू होते हैं.

Delhivery Share Price: मोतीलाल ओसवाल बुलिश रिपोर्ट, शेयर ने लगाई 5% की छलांग, 26% अपसाइड की और बढ़त संभव

Delhivery Share Price: लॉजिस्टिक्स सेक्टर की दिग्गज कंपनी डेल्हीवरी ( DELHIVERY) के शेयर में आज शानदार तेजी देखने को मिली। शेयर करीब 5 फीसदी की उछाल के साथ वायदा का टॉप गेनर बना हुआ है। शेयर में आई तेजी की मुख्य वजह ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल की बुलिश रिपोर्ट के बाद देखी गई है। दरअसल, ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOSL) ने मजबूत वॉल्यूम ग्रोथ और कॉस्ट कंट्रोल का हवाला देते हुए स्टॉक में 26 फीसदी तक की बढ़त का अनुमान लगाया।

NSE पर स्टॉक दोपहर 2.33 बजे 5 फीसदी बढ़कर 484.30 रुपये प्रति शेयर के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया। कंपनी के शेयर लगातार चार सेशन से बढ़ रहे हैं और इस दौरान 4 फीसदी से ज़्यादा ऊपर हैं।

MOSL ने स्टॉक पर ‘Buy’ रेटिंग बनाए रखी है और इसका टारगेट प्राइस 580 रुपये प्रति शेयर रखा है, जिसका मतलब है कि शुक्रवार के 461.10 रुपये के क्लोजिंग प्राइस से लगभग 26 प्रतिशत की बढ़त।

ब्रोकरेज फर्म के अनुसार, डेल्हीवरी के एक्सप्रेस सेगमेंट ने FY26 की चौथी तिमाही में 73 प्रतिशत साल-दर-साल वॉल्यूम ग्रोथ दर्ज की, जिसमें ECOM एक्सप्रेस एक्विजिशन का योगदान भी शामिल है, जबकि वेस्ट एशिया संकट के कारण चुनौतीपूर्ण ऑपरेटिंग माहौल और त्योहारों वाली तीसरी तिमाही के बाद देखी जाने वाली सामान्य नरमी के बावजूद दिखी। ब्रोकरेज ने कहा कि ग्रोथ को अच्छी कंजम्प्शन-ड्रिवन डिमांड, कस्टमर्स द्वारा ज़्यादा आउटसोर्सिंग और बड़े ई-कॉमर्स प्लेयर्स से लगातार मोमेंटम का सपोर्ट मिला।

ब्रोकरेज ने आगे कहा कि मार्जिन मजबूत बने रहे, जिसमें मजबूत वॉल्यूम और कड़े कॉस्ट कंट्रोल उपायों से मदद मिली।

MOSL ने यह भी बताया कि कंपनी के PTL बिजनेस में स्ट्रक्चरल टर्नअराउंड हो रहा है, जिसमें सर्विस EBITDA मार्जिन FY24 की पहली तिमाही में नेगेटिव 8.5 प्रतिशत से बढ़कर FY26 की चौथी तिमाही में 13.4 प्रतिशत हो गया।

ब्रोकरेज के अनुसार सुधार ज़्यादा यील्ड वाले SME और रिटेल कस्टमर्स की ओर कस्टमर मिक्स में एक अच्छा बदलाव, कम प्रॉफिट वाले कॉन्ट्रैक्ट्स को रैशनलाइज़ करने और कस्टमर एक्विजिशन और प्राइसिंग डिसिप्लिन को मज़बूत करने के लिए सेल्स टीम के विस्तार से हुआ, जिससे यील्ड में बढ़ोतरी हुई।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

मध्यप्रदेश में मोहन कैबिनेट के विस्तार का काउंटडाउन, परफॉर्मेंस पर छंटेंगे पुराने नाम, इन नए चेहरों को मिल सकती है जगह

भोपाल। मध्यप्रदेश में मोहन सरकार के ढाई साल पूरा होने के बाद अ्ब मंत्रिमंडल के नए सिरे से गठन की कवायद शुरु हो गई है। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश में मोहन कैबिनेट का विस्तार कभी भी हो सकता है। कैबिनेट विस्तार में कई पुराने चेहरों को बाहर का रास्ता दिखा कर नए चेहरों की एंट्री कराई जा सकती है। 20 जुलाई से विधानसभा के  मानसून सत्र से पहले ही नई मोहन टीम के गठन की पूरी संभावना है। 

 

आधा दर्जन नए चेहरों को मिलेगी एंट्री!- वर्तमान में मोहन कैबिनेट में मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्रियों सहित कुल 31 सदस्य हैं। चूंकि विधानसभा की सदस्य संख्या के मुताबिक राज्य में अधिकतम 35 मंत्री बनाए जा सकते हैं, इसलिए इस समय चार पद पूरी तरह खाली हैं। ऐसे में मोहन सरकार के पहले कैबिनेट विस्तार में इन खाली पदों को भरने के साथ नॉन परफॉर्मर मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। कैबिनेट विस्तार में  4 से 6 मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है और 7 से 8 नए चेहरों को मौका मिल सकता है।

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि मंत्रिमंडल विस्तार का मुख्य आधार मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा और उनका रिपोर्ट कार्ड होने वाला है। गौरतलब है कि कैबिनेट विस्तार से पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद विभागों की समीक्षा कर मंत्रियों के कामकाज की पूरी रिपोर्ट ली है। वहीं कैबिनेट विस्तार को लेकर केंद्रीय हाईकमान से हरी झंडी मिलने के बाद अब मंत्रिमंडंल विस्तार की उल्टी गिनती शुरु हो गई है।

 

क्षेत्रीय और जातिगण समीकरण साधने की कवायद-मोहन सरकार का यह कैबिनेट विस्तार ऐसे समय होने जा रहा है, जब सरकार के ढाई साल पूरे हो चुकी है और अब सरकार और पार्टी 2027 में होने वाले नगरीय निकाय और पंचायत और 2028 के  विधानसभा चुनाव की तैयारियों में  जुट गई है। कैबिनेट विस्तार में पूरा फोकस क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने, महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने और आगामी नगरीय निकाय व 2028 के चुनावों के लिए जातिगत समीकरण साधने पर है।  

 

कैबिनेट विस्तार में कई सीनियर मंत्रियों के साथ विवादों में रहने वाले मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। पहली बाहर विधायक के साथ मंत्री बने चेहरों पर भी गाज गिरना तय माना जा रहा है। वहीं कैबिनेट महिला प्रतिनिधित्व को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। महिला वोट बैंक और क्षेत्रीय समीकरण को साधने के लिए सांसद से विधायक बनी रीति पाठक , अर्चना चिटनीस और मालिनी गौड़ को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता  है। वहीं कैबिनेट में मौजूदा महिला चेहरे राज्यसभा मंत्री राधा सिंह और प्रतिमा बागरी की छुटटी हो सकती है।

 

इसके साथ  सागर और बुंदेलखंड क्षेत्र की नाराजगी दूर करने के लिए सागर, दमोह या पन्ना क्षेत्र के वरिष्ठ विधायकों को जगह मिल सकती है। इसमें सागर के आने  वााले पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह के साथ पन्ना से आने वाले पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह की दोबारा सरकार में एंट्री हो सकती है। इसके साथ जातिगत समीकरण साधने के लिए सिंधिया समर्थक पूर्व मंत्री प्रभुराम चौधरी की दोबारा सरकार में एंट्री हो सकती है।

 

मोहन कैबिनेट के होने वाले विस्तार में सबकी निगाहें मौजूद सरकार के दिग्गज मंत्रियों पर भी टिकी है। दिग्गज नेता कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल और राकेश सिंह जैसे सीनियर मंत्रियों की कैबिनेट विस्तार के बाद नई भूमिका क्या होगी, इसको  लेकर भी सियासी चर्चा तेज है। पिछले दिनों जिस तरह से  कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल को लेकर सियासी गलियाओं में चर्चाएं तेज है, ऐसे में  इस बात  की संभावना बुहत अधिक है कि कैबिनेट विस्तार में इनकी नई भूमिका तया हो।   

लोकल से ग्लोबल: एमएसएमई, ओडीओपी और जीआई टैग से वैश्विक पटल पर चमक रहा MP

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यकाल 12 वर्ष पूर्ण कर 13वें वर्ष में प्रवेश कर गया है। ये 12 वर्ष देश के किसी भी नेता के कार्यकाल से ज्यादा सफल रहे हैं, या यूं कहें कि ये 12 वर्ष सफलतम रहे हैं। क्योंकि इन 12 वर्षों में भारत ने एक राष्ट्र पुरुष के रूप में वो काम होते हुए देखें हैं, जिनकी कभी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। इसके लिए प्रमाण देने की आवश्यकता नहीं है। मिशन GYAN यानी गरीब-युवा-अन्नदाता-नारी शक्ति, इस पर ध्यान केंद्रित करने के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगर किसी शब्द पर जोर दिया है तो वो है आत्मनिर्भर भारत।

प्रधानमंत्री मोदी का मानना है कि हमारा देश आत्मनिर्भर होगा, तो हमें सबसे आगे खड़े होने से कोई नहीं रोक सकता। प्रधानमंत्री मोदी की इसी लाइन पर चल रहे हैं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव।  सीएम डॉ. यादव ने प्रदेश का आर्थिक स्थिति न केवल बेहतर किया है, बल्कि उसे और सुदृढ़ करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने राज्य को आर्थिक दिशा देने के लिए ग्लोबल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव और रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव जैसे नवाचार किए हैं।   

तेजी से आत्मनिर्भर हो रहा मध्यप्रदेश-मोदी सरकार के आत्मनिर्भर भारत  मिशन में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम  क्षेत्र को आर्थिक विकास का बड़ा इंजन माना जाता रहा है। बीते 12 वर्षों में इस दिशा में एमएसएमई सेक्टर , एक जिला एक उत्पाद योजना और  जीआई टैग ने स्थानीय उत्पादों को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है। नमो सरकार के विजन और मोहन सरकार के मिशन से मध्यप्रदेश आज अपने  सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम, एक जिला-एक उत्पाद और जीआई टैग्स के दम पर देश के सबसे तेजी से आत्मनिर्भर होते राज्यों में गिना जा रहा है। मोहन सरकार के प्रयासों से एक तरफ जहां प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है, वहीं  कारीगरों और उद्यमियों को रोजगार मिलने के साथ ही ग्लोबल मार्केट में एमपी की  धमक तेजी से बढ़ रही है।

 

ओडीओपी से उत्पादों को मिला बड़ा मंच-एक जिला एक उत्पाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उस दूरदर्शी सोच का हिस्सा है, जो किसी भी प्रदेश के हर जिले की अनोखी क्षमता को बढ़ावा देता है। एमपी की मोहन सरकार ने पीएम मोदी के पदचिन्हों पर चलते हुए इसे प्रदेश में प्रभावी ढंग से लागू किया है। राज्य में प्रत्येक जिले से एक प्रमुख उत्पाद चुना गया है। धार का बाग प्रिंट,छतरपुर के हस्तशिल्प, रीवा का सुंदरजा आम, मुरैना की गजक, शिवपुरीकी  जैकेट, चंदेरी साड़ी सरीखे 26 उत्पादों का जीआई टैग प्राप्त हो चुका है। मोहन सरकार द्वारा उज्जैन में ओडीओपी प्रोडक्ट के लिए 284 करोड़ रुपए की लागत से यूनिटी मॉल बनाने की भी घोषणा हुई है। इन दिनों आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के पीएम मोदी के मिशन पर आगे बढ़ते हुए मध्यप्रदेश के सभी जिलों की विशिष्ट पहचान को ओडीओपी के जरिए प्रमोट किया जा रहा है। इससे हर जिले का एक मुख्य उत्पाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में चमक रहा है।

भोपाल की जरी-जरदोजी और जूट उत्पाद हो या धार के बाग प्रिंट, बुरहानपुर का केला  हो या बड़वानी का अदरक,बालाघाट का चिन्नौर चावल हो या मंदसौर का लहसुन आज ओडीओपी के जरिए  पूरे देश और दुनिया में जीआई  टैग के जरिए यह अपनी विशेष पहचान बनाने में कामयाब हुआ है।  सरकार द्वारा ओडीओपी के तहत इन उत्पादों के उत्पादन, प्रशिक्षण, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बाजार उपलब्ध करने की दिशा में मजबूती के साथ कार्य किया जा रहा है। मृगनयनी एम्पोरियम और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए इन उत्पादों की बिक्री बढ़ रही है और इसी का परिणाम है कि राष्ट्रीय स्तर पर ओडीओपी में मध्यप्रदेश ने रजत पदक हासिल किया है। एमपी सरकार वन डिस्ट्रिक-वन प्रोडक्ट को सशक्त बनाकर स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने और अंतरराज्यीय सहयोग को गति देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार  के साथ भी विशेष सहयोग कर रही है। 

 

जीआई टैग: स्थानीय उत्पादों को मिली वैश्विक पहचान-जीआई टैग से उत्पादों की बाजार कीमत बढ़ती है, नकली उत्पादों से बचाव होता है और निर्यात संभावनाएं खुलती हैं। यह स्थानीय कारीगरों के ज्ञान और परंपरा को संरक्षित रखते हुए आर्थिक आत्मनिर्भरता प्रदान करता है। हाल के वर्षों में मध्यप्रदेश की पारंपरिक कलाओं, हथकरघा और कृषि उत्पादों को जीआई टैग मिलने से उनकी प्रामाणिकता और डिमांड  दोनों तेजी मार्केट में से बढ़ी है। इससे नकली उत्पादों पर रोक लगी है और किसानों व कारीगरों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल रहा है। 

 

एमएसएमई से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम-आज एमपी में 24 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां सक्रिय हैं, जो सवा करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार दे रही हैं। राज्य सरकार की  बेहतर एमएसएमई  प्रोमोशन स्कीम और एमएसएमई  डेवलपमेंट पॉलिसी 2025 के तहत वित्तीय सहायता प्रदान करने, तकनीकी अपग्रेडेशन के साथ स्किल डेवलपमेंट और कॉमन फैसिलिटी सेंटर्स बढ़ाने की दिशा में ठोस काम किया जा रहा है। स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने  की दिशा में ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं, युवाओं और आदिवासी समुदायों को जोड़ा जा रहा है जिससे  पारंपरिक शिल्प और कृषि उत्पादों  को भी नई  पहचान मिल रही है। मोहन सरकार के प्रयासों से मध्यप्रदेश में एमएसएमई सेक्टर आज  राज्य की अर्थव्यवस्था की बड़ी रीढ़ बन चुका है। मध्यप्रदेश सरकार की एमएसएमई विकास नीति, मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप नीति एवं कार्यान्वयन योजना का प्रभाव धरातल पर दिखने लगा है। नई औद्योगिक नीतियों और वित्तीय सहायता, निवेश की बेहतरीन नीतियों  के माध्यम से स्थानीय स्तर पर भारी निवेश आया है। 31 मार्च 2026 को 600 से अधिक एमएसएमई इकाइयों को सरकार द्वारा  375 करोड़ रुपए से अधिक की राशि का अंतरण किया गया है। 

 

विकसित भारत के विजन को मिल रही गति-आज एमपी  में रेडीमेड गारमेंट्स, फर्नीचर और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में आधुनिक क्लस्टर विकसित किए जा रहे  हैं, जिससे स्थानीय युवाओं को भारी मात्रा में रोजगार मिलेगा। युवा जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर बनेंगे। एमएसएमई, ओडीओपी और जीआई टैग का संगम आज के मध्यप्रदेश के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की तस्वीर बदल रहा है। मोहन सरकार द्वारा 'मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना' जैसी पहलों के माध्यम से युवाओं को स्वरोजगार के लिए आसान शर्तों में  ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार के प्रयासों से ओडीओपी उत्पादों की जबरदस्त  ब्रांडिंग हो रही है। इन उत्पादों को ई-कॉमर्स और एक्सपोर्ट हब्स से भी जोड़ा जा रहा है जिससे पीएम मोदी के आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के विजन को गति मिल रही है। “वोकल फॉर लोकल” से आगे बढ़कर “ग्लोबल फॉर लोकल” बनने की दिशा में मोहन सरकार मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है।

Keir Starmer: ब्रिटेन के पीएम कीर स्टारमर ने दिया इस्तीफा, लेबर पार्टी में मची उथल-पुथल के बीच लिया बड़ा फैसला

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने अपने पद से इस्तीफे का ऐलान कर दिया है। सोमवार 22 जून को कीर स्टारमर ने यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री और लेबर पार्टी के नेता के पद से इस्तीफे का ऐलान किया। जानकारी के मुताबिक, स्टारमर पर इस्तीफे का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा था और उनकी अपनी लेबर पार्टी के कई सांसद और कैबिनेट मंत्री चाहते हैं कि वह पद छोड़ दें।

डाउनिंग स्ट्रीट से जारी आधिकारिक बयान में स्टारमर ने कहा कि उन्होंने अपने फैसले की जानकारी किंग को दे दी है। उन्होंने साफ किया कि अगले प्रधानमंत्री के चुने जाने तक वह पद पर बने रहेंगे। बता दें कि, हाल के वर्षों में ब्रिटेन में पीएम पद के छोटे-छोटे कार्यकाल का सिलसिला जारी है। अब स्टार्मर भी इस लिस्ट में शामिल हो गए हैं।

बता दें कि, सिर्फ दो साल पहले स्टारमर ने लेबर पार्टी को 14 साल बाद सत्ता में वापसी दिलाई थी, लेकिन अब उनकी नेतृत्व क्षमता पर लगातार सवाल उठ रहे थें। हालांकि, शुक्रवार (19 जून ) को उन्होंने कहा था कि वह पार्टी को छोड़कर नहीं जाएंगे और सभी को एकजुट होकर काम करना चाहिए।

ट्रंप ने कही थी ये बात

बता दें कि, इससे पहले ब्रिटेन में जारी राजनीति उठल-पुथल पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस राजनीतिक संकट पर टिप्पणी की थी। ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि स्टारमर जल्द ही प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। ट्रंप ने कहा कि स्टारमर आव्रजन और ऊर्जा नीति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सफल नहीं रहे। ट्रंप के इस बयान ने ब्रिटेन की राजनीति में चल रही अटकलों को और हवा दे दी है।

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ब्रिटिश PM स्टार्मर का इस्तीफा:कहा- पार्टी को नहीं लगता मैं अगला चुनाव जिता सकता हूं; एंडी बर्नहैम नए प्रधानमंत्री बन सकते हैं

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोमवार को प्रधानमंत्री और लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफा दे दिया है। 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर राष्ट्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि लेबर पार्टी को नहीं लगता कि मैं अगले चुनाव में नेतृत्व करने के लिए सही व्यक्ति हूं। स्टार्मर का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब लेबर पार्टी के भीतर उनके नेतृत्व को लेकर लंबे समय से असंतोष बढ़ रहा था। हाल के महीनों में कई सांसदों और मंत्रियों ने उनके नेतृत्व पर सवाल उठाए थे। स्थानीय चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन और गिरती लोकप्रियता ने भी उनके ऊपर दबाव बढ़ा दिया था। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक एंडी बर्नहैम उनके उत्तराधिकारी बनने की दौड़ में सबसे आगे हैं। बर्नहैम ने हाल ही में मेकरफील्ड उपचुनाव जीतकर संसद में वापसी की है और उन्हें लेबर सांसदों के बड़े वर्ग का समर्थन प्राप्त बताया जा रहा है। स्टार्मर पर पद छोड़ने का दबाव क्यों बढ़ा स्टार्मर ने 2024 में लेबर पार्टी को बड़ी चुनावी जीत दिलाई थी, लेकिन उसके बाद उनकी लोकप्रियता लगातार घटी है। कई विवादों, नीतिगत यू-टर्न और जीवनस्तर में सुधार के वादों को पूरा नहीं कर पाने की वजह से उनकी इमेज को नुकसान पहुंचा। स्टार्मर की मुश्किलें तब और बढ़ गईं, जब उनके विरोधी एंडी बर्नहैम ने शुक्रवार को उपचुनाव जीत लिया। इस जीत के बाद बर्नहैम पार्टी की कमान संभालने की दावेदारी पेश कर सकते हैं। जीत के बाद बर्नहैम ने कहा कि वह देश को नई दिशा देना चाहते हैं। बर्नहैम के सहयोगी स्टार्मर से इस्तीफा देने की मांग कर रहे हैं। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने भी संकेत दिया कि वह जरूरत पड़ने पर स्टार्मर को नेतृत्व के लिए चुनौती दे सकते हैं। हालांकि, स्टार्मर ने 19 जून को साफ कहा था कि मैं अपने नेतृत्व के खिलाफ आने वाली किसी भी चुनौती का सामना करूंगा। साथ ही लेबर पार्टी के नेताओं से आपसी खींचतान से बचने की अपील की थी। ब्रिटेन को 7 साल में छठा प्रधानमंत्री मिलेगा स्टार्मर पिछले 10 साल में कार्यकाल पूरा होने से पहले पद छोड़ने वाले छठे ब्रिटिश प्रधानमंत्री होंगे। इससे पहले डेविड कैमरन, थेरेसा मे, बोरिस जॉनसन, लिज ट्रस और ऋषि सुनक भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके थे। 2016 में ब्रेक्जिट जनमत संग्रह में हार के बाद डेविड कैमरन ने इस्तीफा दिया था। उनके बाद प्रधानमंत्री बनीं थेरेसा मे संसद से ब्रेक्जिट समझौता पारित नहीं करा सकीं और 2019 में पद छोड़ना पड़ा। इसके बाद बोरिस जॉनसन ने कोविड लॉकडाउन के दौरान सरकारी आवास पर हुई पार्टियों और कई राजनीतिक विवादों के बीच 2022 में इस्तीफा दिया। जॉनसन के बाद लिज ट्रस प्रधानमंत्री बनीं, लेकिन उनकी आर्थिक नीतियों से बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई। वह सिर्फ 49 दिन ही पद पर रह सकीं और अक्टूबर 2022 में इस्तीफा देना पड़ा। उनके बाद ऋषि सुनक प्रधानमंत्री बने, लेकिन बढ़ती महंगाई, आर्थिक चुनौतियों और आम चुनाव में कंजर्वेटिव पार्टी की हार के बाद जुलाई 2024 में उन्होंने भी पद छोड़ दिया। अब कीर स्टार्मर के इस्तीफे के साथ ब्रिटेन को सात साल में छठा और 10 साल में सातवां प्रधानमंत्री मिलने जा रहा है ब्रिटेन में प्रधानमंत्री बार-बार बदलने की वजह एक्सपर्ट्स के मुताबिक ब्रिटेन में प्रधानमंत्री बार-बार बदलने की बड़ी वजह वहां की संसदीय व्यवस्था है। वहां प्रधानमंत्री को लोग सीधे नहीं चुनते, बल्कि उनकी पार्टी के सांसद उनका समर्थन करते हैं। प्रधानमंत्री तब तक पद पर बने रहते हैं, जब तक पार्टी के सांसद उनके साथ खड़े हों। अगर सांसदों को लगने लगे कि किसी नेता की घटती लोकप्रियता से अगले चुनाव में पार्टी को नुकसान हो सकता है, तो वे बिना आम चुनाव कराए भी नया नेता चुनने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। यही वजह है कि ब्रिटेन में पार्टी का समर्थन कमजोर पड़ते ही प्रधानमंत्री बदलने की नौबत जल्दी आ जाती है। ब्रिटेन की बड़ी पार्टियों के नियम भी नेताओं को हटाने का रास्ता आसान बना देते हैं। कंजर्वेटिव पार्टी में अगर 15% सांसद किसी नेता के खिलाफ चिट्ठी लिख दें, तो उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है। वहीं, लेबर पार्टी में कोई दूसरा नेता तब दावेदारी पेश कर सकता है, जब उसे पार्टी के 20% से ज्यादा सांसदों और सदस्यों का समर्थन मिल जाए।

लुईस सुआरेज स्टैंड्स में बैठकर देख रहे हैं FIFA WC में उरुग्वे का शर्मनाक प्रदर्शन

लुईस सुआरेज उरुग्वे के स्टार फुटबॉलर हैं लेकिन फिलहाल वह राष्ट्रीय टीम से बाहर होकर दर्शक दीर्घा में अपनी टीम को संघर्ष करता हुआ देख रहे हैं।लगभग 15 साल तक उरुग्वे की टीम उनपर गोल दागने पर निर्भर रही।लेकिन कल वह केप वर्दे के खिलाफ 2-2 से ड्रॉ छूटे मैच को दर्शक दीर्घा से देख रहा थे।

सुआरेज़ ने 2024 में अपना अंतरराष्ट्रीय करियर समाप्त किया और राष्ट्रीय टीम के लिए 143 मैचों में 69 गोल करके सर्वकालिक शीर्ष स्कोरर रहे। महीनों की अटकलों के बाद अंततः उन्हें कोच मार्सेलो बिएल्सा की टीम में जगह नहीं मिली।

सुआरेज़ ने अप्रैल में घोषणा की कि वह विश्व कप में उरुग्वे के लिए खेलने के लिए संन्यास से वापसी करने को तैयार हैं। इस घोषणा से यह अटकलें तेज हो गईं कि उरुग्वे का यह स्टार फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर एक आखिरी बार खेल सकता है। लेकिन मुख्य कोच ने इसके बजाय टीम के युवा खिलाड़ियों पर भरोसा जताया।

उरुग्वे के प्रशंसकों को इस बात का अहसास था कि सुआरेज़ जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी की जगह लेना कितना मुश्किल हो सकता है।सऊदी अरब और केप वर्दे के खिलाफ ड्रॉ के बाद और स्पेन की मजबूत टीम के खिलाफ एक मैच बाकी होने के कारण दो बार के चैंपियन पर पहले दौर से बाहर होने का खतरा मंडरा रहा है।

केप वर्डे ने उरुग्वे को 2-2 के ड्रा पर रोक कर अंक किया हासिल

केप वर्डे ने एक और चौंकाने वाला प्रदर्शन करते हुए उरुग्वे को 2-2 से ड्रॉ पर रोककर अपने पहले विश्व कप में लगातार दूसरा अंक हासिल किया। केप वर्डे दो अंकों के साथ राउंड ऑफ 32 में जाने की दौड़ में बने हुए हैं।

केविन पिना ने 34 यार्ड की शानदार फ्री-किक पर गोल कर केप वर्डे को बढ़त दिलाई, लेकिन हाफ-टाइम से पहले मैक्सी अराउजो और अगस्टिन कैनोबियो के गोलों ने उरुग्वे को 2-1 से आगे कर दिया। केप वर्डे पर हार का संकट दिखाई दे रहा था ऐसे समय उसने मुकाबले के 57वें मिनट में अपने तुरुप के इक्के हेलियो वरेला को मैदान पर उतारा। वरेला ने मैदान पर उतरने के 136वें सेकंड में ही अपना काम कर दिया।

मैच के 60वें मिनट में उन्होंने गोल दागा कर स्कोर 2-2 की बराबरी पर ला खड़ा किया। यह दो बार की विश्व चैपियन रही उरुग्वे के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। हेलियो वरेला का यह पहला अंतरराष्ट्रीय गोल था।इसके बाद दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर हुई। लेकिन वे गोल करने में विफल रही और मुकाबला 2-2 से ड्रा पर समाप्त हुआ।