मृतकों में पांच स्काइडाइविंग प्रशिक्षक और पहली बार स्काइडाइव करने आए पांच लोग शामिल हैं। विमान स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 11 बजे अचानक दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे के बाद विमान में आग लग गई। विमान एयरफील्ड के किनारे रिहायशी इलाके और शॉपिंग सेंटर के पास गिरा, लेकिन कुछ मीटर के अंतर से आसपास के घर बड़ी दुर्घटना से बच गए। हादसे के समय पहली बार स्काइडाइव करने आए लोगों के परिजन एयरफील्ड पर मौजूद थे। कई लोगों ने दुर्घटना अपनी आंखों के सामने देखी, जिससे वे गहरे सदमे में हैं। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, मृतकों में पांच नर्स भी शामिल थीं, जो पहली बार स्काइडाइविंग का अनुभव लेने आई थीं। फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट न्यूनेज़ ने बताया कि पेरिस अभियोजन कार्यालय ने हादसे की जांच शुरू कर दी है। फ्रांसीसी विमानन सुरक्षा एजेंसी के अनुसार, सैन्य और व्यावसायिक उड़ानों को छोड़कर यह फ्रांस के इतिहास का सबसे बड़ा निजी विमान हादसा माना जा रहा है।
Anushka Ranjan Godh Bharai: माता-पिता बनने जा रहे आदित्य सील और अनुष्का रंजन ने अपने पहले बच्चे के स्वागत से पहले पारंपरिक गोद भराई की। अनुष्का ने रविवार को अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल के स्टोरीज़ सेक्शन में बेबी शॉवर की दो तस्वीरें अपलोड कीं।
पहली तस्वीर में आदित्य अनुष्का की गोद में बैठे हुए नजर आ रहे हैं और दोनों कैमरे के सामने अपनी मनमोहक मुस्कान बिखेर रहे हैं। इसके बाद आदित्य और अनुष्का की एक तस्वीर सामने आई, जिसमें वे एक-दूसरे का हाथ थामे हुए हैं और हाथ अनुष्का के बेबी बंप के पास है।
इस खास मौके पर होने वाली मां ने ऑरेंज रंग का सलवार सूट पहना था और उनके चेहरे पर प्रेग्नेंसी का ग्लो साफ़ दिख रहा था। उनके साथ आदित्य ने पीले रंग का कुर्ता और सफ़ेद पजामा पहना था। आदित्य और अनुष्का ने हाल ही में सोशल मीडिया पर घोषणा की कि शादी के चार साल बाद वे अपने पहले बच्चे का स्वागत करने वाले हैं।
एक जॉइंट पोस्ट में, इस कपल ने कुछ शानदार मैटरनिटी तस्वीरें और एक दिल को छू लेने वाला नोट शेयर किया, जिसमें लिखा था, “मैंने सौ साल इंतज़ार किया है, लेकिन तुम्हारे लिए मैं दस लाख साल और इंतज़ार कर सकता हूं। किसी भी चीज़ ने मुझे इस बात के लिए तैयार नहीं किया था कि तुम्हारा होना मेरे लिए कितना खास होगा।”
HDFC Bank New Chairman: प्राइवेट सेक्टर का दिग्गज लेंडर एचडीएफसी बैंक अगले 7-10 दिनों में नए चेयरमैन की नियुक्ति कर लेगा। सीएनबीसी-टीवी18 को यह जानकारी सूत्रों के हवाले से मिली है। बैंक की NRC (नॉमिनेशन एंड रिम्यूनेरेशन) कमेटी चेयरमैन पद के लिए प्राथमिकता क्रम में तीन नाम बोर्ड को भेजेगी और अंतिम फैसला बैंक के बोर्ड का होगा। सूत्रों के मुताबिक बैंक फिलहाल पांच कैंडिडेट्स के नाम पर विचार कर रहा है- आरबीआई के हाल ही में रिटायर्ड डिप्टी गवर्नर, एक पीएसयू बैंक के सीनियर अधिकारी, एक पूर्व ब्यूरोक्रेट, एक एमएनसी के पूर्व इंडिया हेड और एक टेक सेक्टर के अनुभवी शख्स। सूत्रों के मुताबिक NRC अभी इनसे अनौपचारिक तौर पर मुलाकात कर रही है। इसके बाद तीन नामों की सूची तैयार कर बोर्ड को भेजी जाएगी।
अभी कौन है HDFC Bank का चेयरमैन?
बैंक के बोर्ड के प्रमुख अभी एक अंतरिम चेयरमैन हैं- फाइनेंशियल सर्विसेज के अनुभवी केकी मिस्त्री। पिछले हफ्ते ही उनका कार्यकाल बढ़ाया गया और अब वह अगले तीन महीनों के लिए यानी 18 सितंबर, 2026 तक या रेगुलर पार्ट-टाइम चेयरमैन की नियुक्ति होने, जो भी पहले हो, तक इस पद पर रहेंगे। बैंक के पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने नैतिक मूल्यों और एथिक्स का हवाला देते हुए 19 मई 2026 को तत्काल प्रभाव से पार्ट-टाइम चेयरमेन के पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद आरबीआई ने एचडीएफसी बैंक विलय के पहले एचडीएफसी के आखिरी सीईओ केकी मिस्त्री को अंतरिम तौर पर यह जिम्मेदारी सौंपी थी।
मौजूदा CEO को बढ़ सकता है कार्यकाल
एचडीएफसी बैंक के मौजूदा सीईओ शशिधर जगदीशन का भी कार्यकाल अक्टूबर 2026 में समाप्त हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक शशिधर को दोबारा सीईओ बनाया जा सकता है और इस बारे में ऐलान जुलाई के पहले दो हफ्तों में हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक लॉ फर्मों ने पहले ही क्लीन चिट दे दी है। अब बोर्ड को सीईओ की फिर से नियुक्ति के लिए नए चेयरमैन को शामिल करेगा। आरबीआई के नियमों के मुताबिक बैंक को मौजूदा सीईओ का कार्यकाल खत्म होने से कम से कम 6 महीने पहले या तो मौजूदा सीईओ को दोबारा नियुक्त करना होता है या फिर नया सीईओ नियुक्त करना होता है। मौजूदा हालात के मुताबिक शशिधर जगदीशन का कार्यकाल चार महीने से भी कम समय में 26 अक्टूबर 2026 को खत्म हो रहा है।
HDFC Bank News: HDFC बैंक के चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती ने नैतिकता का हवाला देते हुए दिया इस्तीफा
Silver Price Today India: अगर आप चांदी में निवेश करने की योजना बना रहे हैं तो यह खबर आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। दरअसल, 29 जून को सर्राफा बाजार में चांदी की कीमतों में नरमी देखने को मिली। जो आम खरीददारों के लिए राहत भरी खबर है। बता दें कि चांदी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार, मांग और सप्लाई जैसे कई कारणों पर निर्भर करती हैं, इसलिए सही समय पर इसकी जानकारी होना आपको बेहतर निवेश निर्णय लेने में मदद कर सकता है। खासकर उन लोगों के लिए जो सुरक्षित और लॉन्ग-टर्म निवेश के तौर पर कीमती धातुओं को चुनते हैं, उनके लिए यह अपडेट और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
आज भारत में चांदी की कीमत इस प्रकार है:
| मात्रा | कीमत |
|---|---|
| 10 ग्राम | ₹2,092.98 |
| 100 ग्राम | ₹20,929.78 |
| 1 किलोग्राम | ₹2,09,298 |
भारतीय महानगरों में आज चांदी की कीमत
| शहर | 10 ग्राम | 100 ग्राम | 1 किलोग्राम |
|---|---|---|---|
| नई दिल्ली | ₹2,092.98 | ₹20,929.78 | ₹2,09,298 |
| चेन्नई | ₹1,997.66 | ₹19,976.59 | ₹1,99,766 |
| कोलकाता | ₹2,060.53 | ₹20,605.29 | ₹2,06,053 |
| मुंबई | ₹2,086.89 | ₹20,868.94 | ₹2,08,689 |
| बेंगलुरु | ₹1,993.60 | ₹19,936.03 | ₹1,99,360 |
| हैदराबाद | ₹2,001.71 | ₹20,017.15 | ₹2,00,171 |
| पटना | ₹2,001.71 | ₹20,017.15 | ₹2,00,171 |
| जयपुर | ₹2,001.71 | ₹20,017.15 | ₹2,00,171 |
| लखनऊ | ₹2,001.71 | ₹20,017.15 | ₹2,00,171 |
| चंडीगढ़ | ₹2,001.71 | ₹20,017.15 | ₹2,00,171 |
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Latest News Today Live Updates in Hindi : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जल्द सुनवाई से इनकार किया। पल पल की जानकारी…
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सेशेल्स के 50वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। पहली बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री को सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि बनने का सम्मान मिला।
सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जल्द सुनवाई से इनकार किया। याचिकाकर्ता ने मामले में जल्द सुनवाई की मांग की थी।
अयोध्या पुलिस ने चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया। राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े अन्य सदस्यों से भी हो सकती है पूछताछ।

अयोध्या धाम में प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर का निर्माण केवल शिल्पकला का दर्शन नहीं, बल्कि करोड़ों सनातनियों की सदियों पुरानी अगाध आस्था, तप और संकल्प की पूर्णाहुति है। इस पावन काज में देश-विदेश के रामभक्तों ने अपनी गाढ़ी कमाई का अंश समर्पित किया है।ALSO READ: अयोध्या के श्री रामलला मंदिर पर लोभ का साया
ऐसे में, यदि मंदिर परिसर या दान राशि के प्रबंधन में किसी भी स्तर पर कोई विसंगति या मानवीय भूल सामने आती है, तो सनातनी समाज का उद्वेलित होना स्वाभाविक है। किंतु, इस संवेदनशील घटनाक्रम पर जिस प्रकार की विपक्ष की राजनीति शुरू हुई है, उसने एक बार फिर साबित किया है कि देश के विरोधी दलों के लिए जन-आस्था केवल चुनावी लाभ-हानि का जरिया मात्र है।
देखा जाए तो इस पूरे प्रकरण में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार का तरीका अत्यंत सराहनीय और अनुकरणीय रहा है। मुख्यमंत्री ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि दूध का दूध और पानी का पानी होकर रहेगा।
सरकार ने केवल बातें नहीं की, बल्कि त्वरित कार्रवाई से जीरो टॉलरेंस की नीति को धरातल पर उतार कर दिखाया। जैसे ही 5 जून को मामला सामने आया, सरकार ने 13 जून को एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया। इस जांच दल ने बिना किसी दबाव के, पूरी निष्पक्षता से मात्र 10 दिनों में ही अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी।
इसका ही परिणाम है कि 24 घंटे के भीतर प्राथमिकी दर्ज कर, आठ मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया गया है और बाकी संदिग्धों से भी कड़ी पूछताछ जारी है। यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि वर्तमान योगी शासन तंत्र में चाहे कोई कितना भी रसूखदार क्यों न हो, प्रभु राम के काज में और सनातन की सात्विकता के साथ खिलवाड़ करने वाले को छोड़ा नहीं जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे गरिमामय पक्ष श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों, चंपत राय जी और अनिल मिश्रा जी का निर्णय रहा। इन दोनों विभूतियों ने अपना संपूर्ण जीवन राम काज और सनातन धर्म की सेवा में समर्पित कर दिया है। विशेषकर चंपत राय जी के उस संघर्ष को देश कभी नहीं भूल सकता, जिन्होंने बिना रुके, बिना थके पत्थरों की नक्काशी से लेकर अदालती दस्तावेजों को सहेजने तक, मंदिर निर्माण के हर मोर्चे पर एक सच्चे सेनापति की तरह काम किया। जन-जन उन्हें आदर से राम जी का पटवारी कहता है।
जब जांच की बात आई, तो उन्होंने भारतीय लोक-मर्यादा की श्रेष्ठ परंपरा का निर्वहन करते हुए अपने पदों से त्यागपत्र दे दिया। उनका यह इस्तीफा किसी दोष की स्वीकारोक्ति नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी का वह उत्कृष्ट उदाहरण है जो त्रेतायुग की न्यायप्रियता की झलक है। उन्होंने पद इसलिए छोड़ा ताकि जांच प्रक्रिया पूरी तरह स्वतंत्र, निष्पक्ष और बिना किसी प्रभाव के पूरी हो सके। ऐसे तपस्वी व्यक्तित्वों पर राजनीतिक लाभ के लिए कीचड़ उछालना, उनकी जीवनभर की तपस्या का अपमान करना है।
दूसरी ओर, विरोधी दलों का रवैया हमेशा की तरह निराशाजनक और सनातन विरोधी ही है। इतिहास गवाह है कि यह वही विपक्ष है जिसने सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर के अस्तित्व को नकारने के लिए वकीलों की भारी-भरकम फौज खड़ी कर दी थी, रामभक्तों पर गोलियां चलवाई थीं, कदम-कदम पर रोड़े अटकाए और राम जी का निमंत्रण सिरे से खारिज किया था। आज वही लोग अचानक दान की पारदर्शिता के सबसे बड़े पैरोकार बनने का ढोंग कर रहे हैं।
वास्तव में, विपक्ष को इस संवेदनशील मामले में कोई जनहित या आस्था की चिंता नहीं है; उन्हें तो बस आगामी चुनावों में भुनाने के लिए एक राजनीतिक मुद्दा मिल गया है। इनका असली एजेंडा सनातनी समाज की उस अटूट एकता को भंग करना है, जो मंदिर निर्माण के बाद अभूर्व रूप से सुदृढ़ हुई है। वे भ्रामक आंकड़े फैलाकर और श्रद्धालुओं के मन में संशय के बीज बोकर इस सांस्कृतिक पुनर्जागरण को कमजोर करना चाहते हैं। देश की जनता को यह समझना होगा कि जो दल कभी सनातन को मिटाने की बात करने वालों के साथ खड़े होते हैं, उनकी सहानुभूति केवल एक छलावा और नया चुनावी पैंतरा मात्र है।
स्मरण रखना होगा कि आज का दौर केवल जमीनी राजनीति का नहीं, बल्कि सूचना युद्ध (इन्फॉर्मेशन वॉर) का भी है। ऐसे समय में प्रत्येक सनातनी का यह परम कर्तव्य है कि वह सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अफवाहों से पहले विवेक का उपयोग करे। किसी भी अपुष्ट या सनसनीखेज खबर को बिना जांचे आगे फॉरवर्ड न करें, क्योंकि यह श्री राम मंदिर की वैश्विक छवि को धूमिल करने का एक सोचा-समझा प्रयास भी हो सकता है। हमें केवल श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और सरकारी जांच एजेंसियों के आधिकारिक बयानों व तथ्यों पर ही विश्वास करना चाहिए। यहां कहने का अर्थ यह नहीं कि चढ़ावे में हुई किसी गड़बड़ी पर हम आंखें मूंद लें, बल्कि हमारी डिजिटल सतर्कता ही विरोधियों के दुष्प्रचार को ध्वस्त करेगी।
उत्तर प्रदेश सरकार ने दोषियों को पकड़कर अपना काम पूरी निष्पक्षता से किया है, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर कुछ कड़े कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। मंदिर को मिलने वाले हर छोटे-बड़े दान का ब्लॉकचेन या अत्याधुनिक रीयल-टाइम डिजिटल ऑडिट होना चाहिए, ताकि संपूर्ण वित्तीय लेखा-जोखा एक पारदर्शी और सुरक्षित प्रणाली के तहत रहे।
इसके साथ ही, मंदिर परिसर और सुरक्षा घेरे में अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे, बायोमेट्रिक एक्सेस और एआई-संचालित सुरक्षा उपकरणों का प्रयोग अनिवार्य किया जाए, जिससे किसी भी मानवीय चूक की गुंजाइश शेष न बचे। ट्रस्ट के दैनिक कार्यों और वित्तीय लेन-देन की समय-समय पर समीक्षा के लिए तिरुपति, सांवरिया सेठ या वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की तर्ज पर देश के शीर्ष व ईमानदार प्रशासनिक अधिकारियों या सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की एक उच्च स्तरीय निगरानी समिति भी बनाई जा सकती है, जो इस व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ करे।
प्रभु श्री राम का मंदिर भारत की आत्मा और हमारी राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है। इसकी नींव हमारे पुरखों के सदियों के संघर्ष और करोड़ों भक्तों के अटूट विश्वास पर टिकी है। योगी सरकार की कड़ी और पारदर्शी कार्रवाई ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि न्याय होकर रहेगा। अब यह प्रत्येक सनातनी का कर्तव्य है कि वह राजनीतिक गिद्धों की अफवाहों पर ध्यान न देकर व्यवस्था पर भरोसा रखे। हमारी एकजुटता ही उन ताकतों को सबसे करारा जवाब होगी जो आस्था के बहाने सनातनियों को बांटना चाहती हैं; क्योंकि सत्य परेशान हो सकता है, पर पराजित नहीं।
(इस लेख में व्यक्त विचार/विश्लेषण लेखक के निजी हैं। 'वेबदुनिया' इसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेती है।)ALSO READ: त्रेता से लेकर कलयुग तक कहानी चरण पादुका की
SBI Life Child Plans: माता-पिता के रूप में बच्चों की उच्च शिक्षा और उनकी शादी के लिए फंड जुटाना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। इस जरूरत को पूरा करने के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) लाइफ के दो बेहतरीन चाइल्ड प्लान SBI Life Smart Champ Insurance और SBI Life Smart Scholar हैं।
भले ही ये दोनों प्लान बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने का दावा करते हैं, लेकिन इनके काम करने का तरीका, रिटर्न की गारंटी और निवेश का ढांचा एक-दूसरे से पूरी तरह अलग है। आइए इन दोनों स्कीमों की तुलना करते हुए समझते कि कौन सा प्लान ज्यादा फायदेमंद है।
निवेश का तरीका: पारंपरिक सुरक्षा बनाम मार्केट का मुनाफा
दोनों स्कीमों के बीच सबसे बड़ा अंतर इनके फंड मैनेजमेंट और रिटर्न की प्रकृति में है:
SBI Life Smart Champ (पारंपरिक बचत प्लान): यह एक पूरी तरह सुरक्षित और मनी-बैक प्लान है। इसका शेयर बाजार से कोई संबंध नहीं होता। कंपनी अपने मुनाफे के आधार पर हर साल बोनस देती है। इसमें रिस्क न के बराबर होता है।
SBI Life Smart Scholar (मार्केट-लिंक्ड यूलिप): यह एक ‘यूनिट-लिंक्ड’ (ULIP) प्लान है। इसमें आपका पैसा शेयर बाजार या सरकारी बॉन्ड में निवेश किया जाता है। इसमें रिटर्न पूरी तरह मार्केट के प्रदर्शन पर निर्भर करता है, जिसके कारण लंबी अवधि में यह ज्यादा रिटर्न देने की क्षमता रखता है।
पात्रता और नियम: दोनों स्कीमों का तुलनात्मक चार्ट

पैसा वापस मिलने का तरीका: किश्तों में या एकमुश्त?
दोनों ही स्कीमें बच्चों की कॉलेज की उम्र में पैसा देती हैं, लेकिन इनके भुगतान का तरीका अलग है:
Smart Champ का ‘स्मार्ट पे-आउट’: यह प्लान बच्चे की कॉलेज की पढ़ाई के दौरान 4 बराबर सालाना किश्तों में पैसा लौटाता है। जब बच्चा 18, 19, 20 और 21 वर्ष का पूरा होता है, तब हर साल कुल बीमा राशि और बोनस का 25-25% दिया जाता है।
Smart Scholar का ‘लम्प-सम पे-आउट’: इस प्लान में पॉलिसी की अवधि खत्म होने पर यानी मैच्योरिटी पर पूरा फंड वैल्यू एकमुश्त माता-पिता या बच्चे को दे दिया जाता है।
सुरक्षा कवच: माता-पिता के न रहने पर ‘प्रीमियम वेवर’ का जादू
इन दोनों चाइल्ड प्लान्स की सबसे बड़ी यूएसपी इनका इन-बिल्ट प्रीमियम वेवर बेनिफिट है। अगर पॉलिसी के दौरान कमाऊ माता-पिता के साथ कोई अनहोनी हो जाती है, तो दोनों ही प्लान में आगे के सारे प्रीमियम पूरी तरह माफ कर दिए जाते हैं।कंपनी खुद आगे का पूरा प्रीमियम भरती है ताकि बच्चे के भविष्य पर कोई आंच न आए।
Smart Champ में बच्चे को तय समय पर चारों सालाना किश्तें मिलती रहती हैं, जबकि Smart Scholar में मैच्योरिटी पर पूरा मार्केट फंड बच्चे को सौंप दिया जाता है।
आपके लिए कौन सा प्लान है बेहतर?
अगर आप पारंपरिक सोच वाले निवेशक हैं, बाजार के जोखिमों से पूरी तरह दूर रहना चाहते हैं और यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि बच्चे की पढ़ाई के लिए (18-21 वर्ष की उम्र में) एक निश्चित पैसा बिना किसी रिस्क के मिलता रहे, तो SBI Life Smart Champ प्लान चुनें।
वहीं अगर आपके पास निवेश के लिए कम से कम 10 से 15 साल का लंबा समय है, आप महंगाई को पछाड़कर बड़ा फंड बनाना चाहते हैं और थोड़ा मार्केट रिस्क लेने को तैयार हैं तो SBI Life Smart Scholar चुनें।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

राज्य में चालू शैक्षणिक वर्ष से कक्षा 10वीं में तीन भाषाएं अनिवार्य रूप से पढ़ाई जाएंगी। शिक्षा बोर्ड ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस फैसले के हिस्से के रूप में शिक्षा विभाग द्वारा कक्षा 10वीं के विषय पैटर्न (स्ट्रक्चर) में बड़ा बदलाव किया गया है। नए नियमों के मुताबिक अब छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन करना अनिवार्य होगा। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य छात्रों में भाषाई कौशल का सर्वांगीण विकास करना और राज्य में नई शिक्षा नीति को प्रभावी ढंग से लागू करना है। ALSO READ: Gujarat : गुजरात में बड़ा पल्स पोलियो अभियान शुरू! 82 लाख बच्चों को दी जाएगी जिंदगी बचाने वाली 2 बूंदें
कैसे होगा प्रथम और द्वितीय भाषा का चयन?
नए विषय पैटर्न के अनुसार, स्कूल जिस माध्यम का होगा, वह भाषा छात्र के लिए 'प्रथम भाषा' (First Language) के रूप में रहेगी। यानी गुजराती माध्यम के स्कूलों में गुजराती पहली भाषा होगी, जबकि अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में अंग्रेजी पहली भाषा के रूप में पढ़ाई जाएगी। इसके साथ ही, स्कूल के माध्यम से विपरीत भाषा यानी अंग्रेजी माध्यम के लिए गुजराती और गुजराती माध्यम के लिए अंग्रेजी 'द्वितीय भाषा' (Second Language) के रूप में पढ़ाई जाएगी। इस प्रकार, छात्रों के लिए प्रथम और द्वितीय भाषा के रूप में निर्धारित भाषाओं का अध्ययन करना अनिवार्य होगा।
तीसरी भाषा के रूप में इन विषयों में से चयन करना होगा जरूरी
शिक्षा विभाग के नए नियमों के मुताबिक अब तीसरी भाषा का अध्ययन भी अनिवार्य कर दिया गया है। छात्रों को तीसरी भाषा के रूप में उपलब्ध विकल्पों जैसे हिंदी, संस्कृत, अरबी, फारसी, सिंधी या उर्दू में से किसी एक भाषा को चुनकर उसका अध्ययन करना होगा। इससे पहले छात्रों को तीसरी भाषा के विकल्प के रूप में अन्य विषयों को रखने की भी छूट मिलती थी, लेकिन अब नई व्यवस्था के तहत राष्ट्रीय शिक्षा नीति के दिशानिर्देशों के अनुसार तीसरी भाषा के अध्ययन को पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया गया है। ALSO READ: मानसून से पहले गुजरात सरकार की नई गाइडलाइन: जर्जर कमरों में नहीं लगेगी क्लास, स्कूलों में फर्स्ट एड किट अनिवार्य
पुरानी व्यवस्था में बड़ा बदलाव
अब तक के ढांचे में छात्रों के लिए तीसरी भाषा के वैकल्पिक स्थान पर वोकेशनल (व्यावसायिक) विषय रखने का प्रावधान उपलब्ध था। हालांकि, शिक्षा बोर्ड द्वारा नए विषय पैटर्न में इस व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। अब तीसरी भाषा के बदले वोकेशनल विषय रखने का विकल्प हटा दिया गया है। उसकी जगह वोकेशनल विषय को अलग तरह से व्यवस्थित किया गया है, ताकि छात्र भाषा शिक्षा के साथ-साथ कौशल आधारित (Skill-based) अध्ययन का लाभ भी उठा सकें।
अब वोकेशनल विषय '8वां विषय'
शिक्षा विभाग के निर्णय के अनुसार, अब से वोकेशनल विषय को मुख्य ढांचे से हटाकर 'आठवें विषय' (8th Subject) के रूप में एक विशेष स्थान दिया गया है। इसका मतलब यह है कि छात्र अब तीसरी भाषा की कीमत पर वोकेशनल विषय का चयन नहीं कर पाएंगे, लेकिन यदि वे चाहें तो इसे एक अतिरिक्त (एडिशनल) विषय के रूप में अलग से जरूर पढ़ सकते हैं। यह नया विषय पैटर्न राज्य के सभी स्कूलों में इसी शैक्षणिक वर्ष से लागू कर दिया गया है, इसलिए कक्षा 10वीं के छात्रों को अब इन नए नियमों के अनुसार ही परीक्षा की तैयारी करनी होगी।
edited by : Nrapendra Gupta
Anubhav Plast IPO Listing: अनुभव प्लास्ट के शेयरों की आज BSE SME पर फ्लैट एंट्री हुई। इसके आईपीओ को ओवरऑल 2 गुना से अधिक बोली मिली थी। आईपीओ के तहत ₹80 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE SME पर इसकी ₹80.00 पर ही एंट्री हुई यानी कि आईपीओ निवेशकों को कोई लिस्टिंग गेन नहीं मिला। आईपीओ निवेशकों को और झटका तब लगा, जब शेयर टूट गए। टूटकर यह ₹76.05 (Anubhav Plast Share Price) पर आ गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 4.94% घाटे में हैं।
Anubhav Plast IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च
अनुभव प्लास्ट का ₹24 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 19-23 जून तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का अच्छा रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 2.18 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 1.23 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 2.49 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 2.60 गुना भरा था। इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 30 लाख नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹2.20 करोड़ मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग प्रेमिसेज में ही क्रैश बैरियर्स और सोलर पैनल स्ट्रक्चर्स बनाने के लिए एक नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी के सेटअप, ₹13.75 करोड़ वर्किंग कैपिटल की जरूरतों और बाकी पैसे आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।
Anubhav Plast के बारे में
अनुभव प्लास्ट गोल और चौकोर खोखले सेक्शन वाले इलेक्ट्रिक रेजिस्टेंस वेल्डिंग (ERW) स्टील पाइप और ट्यूब, और साथ ही स्वैज्ड स्टील ट्यूबलर पोल बनाने का काम करती है। इसके प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल बिजली ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन, स्ट्रीट लाइटिंग, टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर, कंस्ट्रक्शन, सिंचाई, पानी की सप्लाई, जनरल इंजीनियरिंग और फैब्रिकेशन जैसे कई क्षेत्रों में होता है। यह अपने प्रोडक्ट्स की बिक्री अनुभव ब्रांड नाम से करती है। कानपुर देहात में इसके दो मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स हैं और देश के कई राज्यों में यह सरकार के कई टेंडर वाले प्रोजेक्ट्स में अपनी दमदार मौजूदगी दिखा चुकी है।
कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2023 में इसे ₹74 लाख का शुद्ध मुनाफा हुआ था जो अगले वित्त वर्ष 2024 में उछलकर ₹2.08 करोड़ और फिर वित्त वर्ष 2025 में ₹6.00 करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान कंपनी की टोटल इनकम भी सालाना औसतन 6% से अधिक की चक्रवृद्धि दर (CAGR) से बढ़कर ₹98.31 करोड़ पर पहुंच गई। पिछले वित्त वर्ष 2026 की बात करें तो अप्रैल-दिसंबर 2025 में कंपनी को ₹5.30 करोड़ का शुद्ध मुनाफा और ₹80.60 करोड़ का टोटल इनकम हासिल हो चुका है। दिसंबर 2025 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹34.81 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹12.85 करोड़ पड़े थे।
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
ITR Deadline Missed: क्या आपने किसी वित्तीय वर्ष के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की डेडलाइन मिस कर दी है? अगर हां, तो सबसे पहला डर यही सताता है कि जो टैक्स एडवांस में कट चुका है (TDS), क्या वह पैसा अब हमेशा के लिए डूब गया? टैक्सपेयर्स के बीच अक्सर यह उलझन रहती है कि क्या आईटीआर विंडो बंद होने के बाद भी टीडीएस रिफंड क्लेम किया जा सकता है।
जवाब है- हां, आप अभी भी अपना रिफंड पा सकते हैं, लेकिन इसके लिए आपको सही कानूनी रास्ता चुनना होगा। बहुत से लोग सोचते हैं कि अपडेटेड आईटीआर भरकर रिफंड ले लेंगे, लेकिन टैक्स नियम इसके बिल्कुल उलट हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि डेडलाइन चूकने के बाद टीडीएस रिफंड वापस पाने का असली और कानूनी तरीका क्या है।
सवाल: क्या अपडेटेड आईटीआर (U-ITR) भरकर टीडीएस रिफंड मिल सकता है?
जवाब: बिल्कुल नहीं।
अक्सर टैक्सपेयर्स को सलाह मिलती है कि वे इनकम टैक्स एक्ट की धारा 139(8A) के तहत ‘अपडेटेड आईटीआर’ फाइल कर दें। नियम के मुताबिक, आप पिछले चार असेसमेंट ईयर के लिए यू-आईटीआर भर सकते हैं। लेकिन, इसमें एक बहुत बड़ी शर्त जुड़ी हुई है- आप अपडेटेड आईटीआर तब दाखिल नहीं कर सकते जब आपको कोई टैक्स रिफंड क्लेम करना हो या आपके ऊपर टैक्स की देनदारी शून्य से कम हो रही हो। चूंकि आप अपना टीडीएस रिफंड वापस मांग रहे हैं, इसलिए आप कानूनी रूप से अपडेटेड आईटीआर भरने के हकदार नहीं हैं।
इसके अलावा, आप किसी बीते हुए साल का टीडीएस रिफंड अगले नए फाइनेंशियल ईयर के आईटीआर में भी क्लेम नहीं कर सकते हैं। हर साल के टीडीएस का हिसाब उसी साल के रिटर्न में देना जरूरी होता है।
ये है डूबा हुआ टीडीएस वापस पाने का कानूनी तरीका
अगर रेगुलर आईटीआर की तारीख निकल चुकी है और अपडेटेड आईटीआर से रिफंड मिल नहीं सकता, तो फिर रास्ता क्या है? यहीं पर काम आती है इनकम टैक्स एक्ट की धारा 119(2)(b)।
यह धारा सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस को यह विशेष पॉवर देती है कि वह उन करदाताओं को राहत दे सके जो किसी वाजिब वजह से समय पर अपना रिटर्न नहीं भर पाए थे। इसके तहत, सीबीडीटी ने 1 अक्टूबर 2024 को एक नया सर्कुलर जारी किया है। इस सर्कुलर के मुताबिक, अगर कोई जेनयून मामला है, तो टैक्सपेयर ‘कॉन्डोनशेन ऑफ डिले’ यानी देरी के लिए माफी की अर्जी लगा सकता है।
माफी की अर्जी मंजूर होने की शर्तें:
अगर आप इस विशेष प्रावधान के तहत अपना छूटा हुआ टीडीएस रिफंड पाना चाहते हैं, तो आपकी अर्जी में इन बातों का होना जरूरी है:
ठोस और वाजिब कारण: आपको इनकम टैक्स विभाग को यह साबित करना होगा कि आप किसी अपरिहार्य परिस्थितियों या गंभीर कारण जैसे- बीमारी या कोई अन्य बड़ा संकट की वजह से समय पर आईटीआर नहीं भर सके।
वास्तविक कठिनाई: आपको यह दिखाना होगा कि अगर विभाग आपको रिफंड क्लेम करने की इजाजत नहीं देता है, तो आपको बड़ा वित्तीय नुकसान या वास्तविक कठिनाई का सामना करना पड़ेगा।
स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस: कैसे मिलेगा पैसा वापस?
अर्जी दाखिल करें: सबसे पहले आपको धारा 119(2)(b) के तहत संबंधित टैक्स अथॉरिटी या सीबीडीटी के पास देरी के लिए माफी की ऑनलाइन या ऑफलाइन एप्लीकेशन देनी होगी।
आदेश का इंतजार करें: टैक्स अधिकारी आपके कारणों की समीक्षा करेंगे। अगर वे संतुष्ट होते हैं, तो देरी को माफ करने का एक आधिकारिक आदेश जारी करेंगे।
आईटीआर फाइल करें: एक बार जब आपको माफी का आदेश मिल जाता है, तो आप इनकम टैक्स पोर्टल पर जाकर उस आदेश का रेफरेंस नंबर दर्ज करके अपना पेंडिंग आईटीआर ऑनलाइन दाखिल कर सकते हैं। इसके बाद आपका टीडीएस रिफंड प्रोसेस कर दिया जाएगा।
इसलिए, अगर आपका भी टीडीएस कटा हुआ है और आईटीआर की तारीख निकल चुकी है, तो घबराएं नहीं। अपडेटेड आईटीआर के चक्कर में पड़ने के बजाय किसी एक्सपर्ट की मदद से धारा 119(2)(b) के तहत माफी की अर्जी दाखिल करें और अपना पैसा वापस पाएं।
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