संघ परिवार: किस का पैरोकार?

आरएसएस

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अमेरिका में कहा: “यदि कोई हिन्दू सोचे, कि भारत में कोई मुस्लिम नहीं रहना चाहिए, तो वह हिन्दू नहीं है। यदि आप अपने को हिन्दू कहना चाहते हैं, तो आप को विश्वास होना चाहिए कि सभी रास्ते एक ही लक्ष्य की ओर जाते हैं।” पूछना चाहिए: यदि वे इतना अभेद मानते हैं, तो उन के शिष्य ने ‘कांग्रेस मुक्त भारत‘ का नारा किसलिए दिया? भाजपा और कांग्रेस दोनों का तो लक्ष्य ही नहीं, रास्ता, देश, समाज सब कुछ एक है।

आरएसएस नेता ने अमेरिका में कहा: “यदि कोई हिन्दू सोचे, कि भारत में कोई मुस्लिम नहीं रहना चाहिए, तो वह हिन्दू नहीं है। यदि आप अपने को हिन्दू कहना चाहते हैं, तो आप को विश्वास होना चाहिए कि सभी रास्ते एक ही लक्ष्य की ओर जाते हैं।”

पूछना चाहिए: यदि वे इतना अभेद मानते हैं, तो उन के शिष्य ने ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ का नारा किसलिए दिया? भाजपा और कांग्रेस दोनों का तो लक्ष्य ही नहीं, रास्ता, देश, समाज सब कुछ एक है।

जब आप इस्लाम व हिन्दू धर्म का लक्ष्य एक मानते हैं; तब आरएसएस एवं कांग्रेस तो सहोदर जैसे हैं — एक ही हिन्दू समाज के जाए! तब इस से इतना द्वेष क्यों? एक ओर, विजातीय, नृशंस, साम्राज्यवादी मतवाद को सनातन धर्म के समान उद्देश्यधारी बता रहे! जबकि घर में ऐसी घृणा कि एक राष्ट्रीय दल को मिटा देने की घोषणा। यह दोहरी मति क्या दर्शाती है?

यह भी पूछें: जब आप ने “हिन्दुओं का ठेका नहीं ले रखा” — तब क्या मुसलमानों का ठेका ले लिया, जो उन्हें अतिरिक्त बल पहुँचा कर हिन्दुओं पर चोट करते रहते हैं? इस्लामियों की पैरोकारी करते हैं जिन्हें ताकत, समझ, और नजर की कमी नहीं!

पर सब से ऊपर यह प्रश्न:  किस हिन्दू ने कहा कि ‘भारत में मुसलमान नहीं रहना चाहिए’? यदि उत्तर न मिले, तो यह अनुचित आरोप था। उस से हिन्दुओं की घोर बदनामी हुई। पूरी दुनिया में हुई!

आखिर संघ नेता के मुँह से — जो खुद हिन्दू हैं और इतने महत्वपूर्ण जिन के पैर भारत का प्रधानमंत्री छूता है — यह आरोप कि हिन्दू सोचते हैं कि भारत में मुसलमान न रहे, हिन्दुओं को फासिस्ट, असहिष्णु, साबित करने के सिवा और क्या था? अखिल विश्व को संदेश गया कि भारत में मुसलमान पीड़ित, वंचित हैं! क्या यही सच है?

सच तो उलटा है। यहाँ मुस्लिम नेता ही सदैव धमकी देते और दंगे करते रहे हैं। यह पंडित नेहरू और डॉ. अंबेडकर ने भी कहा था कि दंगे करना मुस्लिम राजनीति का औजार है। जिस पर तब जिन्ना से लेकर आज के ओवैसी जूनियर तक घमंड भी दिखाते रहे हैं। पश्चिमी पंजाब, सिंध, और कश्मीर से हिन्दुओं को मुस्लिमों ने मार भगाया। शेष भारत के लिए भी वही मकसद है, जिस की झलक असम, बंगाल में मिलती रहती है।

पर संघ नेता ने उलटा ही संदेश दुनिया को दिया! उन का बयान हिन्दुओं पर एक क्रूर चोट है। यहाँ हजार साल से हिन्दू ही इस्लामियों से पीड़ित होता रहा है। तब उसी को उत्पीड़क कहना? आज यदि भारत में न्याय होता तो संघ नेता को कठघरे में खड़ा कर हिसाब लेता। पर अफसोस! अंग्रेजों के जाते ही यहाँ सामुदायिक न्याय उठ गया।

फलत: आज भी भारत के अनेक इलाकों में हिन्दू ही असुरक्षित जीवन झेलते हैं। उस जिहाद से सशंकित जिस का घोषित मकसद दुनिया को गैर-मुस्लिमों (काफिरों) से खाली कराना है। इस क्रम में गत आठ दशकों में ही एक तिहाई से अधिक भारत हिन्दुओं से खाली करा चुका है!

संघ नेता यह सब जानते हैं।  क्या उन्होंने कभी कश्मीर में संघ की रैली की है? क्या आज भी कर सकते हैं? जबकि मुसलमान भारत के किसी भी शहर में रैली कर सकते हैं। सो, जिस ने कश्मीर को हिन्दुओं से खाली करा लिया उस पर कुछ कहने के बजाए उन्होंने आक्रामक को ही पीड़ित बता दिया!

वह भी, जब इस्लामी नेता, संगठन अपनी टेक दुहराते रहते हैं। जो उन के संस्थापक की बुनियादी टेक थी। यह मुहम्मद के शब्द थे: ‘‘तुम सुरक्षित रहोगे, अगर इस्लाम कबूल कर लो। यह पूरी दुनिया अल्लाह की और मेरी है।’’ (सहीह बुखारी, 4:53:392)। उसी टेक पर तब से इस्लाम का अभियान बढ़ता गया है।

आज भी मुस्लिम नेता मुहम्मद की बातों को अपना कानून मानते व लागू करते हैं। जो लाहौर, ढाका, श्रीनगर, पहलगाम, आदि में लागू किया। आज संघ-भाजपा राज में भी देश में अनेक गाँव, मुहल्ले हिन्दुओं से खाली हो रहे हैं। संघ के अपने अखबार में भी उस की रिपोर्टें, फोटो समेत छपती रही हैं।

वही इस्लाम का लक्ष्य है। उसी पर बढ़ते, लड़ते उस के लड़ाके जान लेते और देते हैं। उसी टेक पर कि मूर्तिपूजकों, क्रिश्चियनों, नास्तिकों, आदि को सब को इस्लाम कबूल करना होगा। सीधे-सीधे नहीं, तो ‘जेरे खंजर’ (अल्लामा इकबाल)।

क्या हिन्दू धर्म का भी वही लक्ष्य है, जो संघ नेता ने कहा?

तमाम मुहम्मदी दस्तों, खलीफाओं, मौलानाओं, सुल्तानों, लीडरों ने जब जहाँ जितना जोर चला, गैर-मुस्लिमों को यही विकल्प दिया था:  इस्लाम या मौत! यह दुनिया भर की तारीख में दर्ज है। वह जगह-जगह अभी भी हो रहा है — जिस समय संघ के नेता उलटे बयान देकर हिन्दुओं को बदनाम कर रहे हैं।

यह कितना बड़ा धर्म-द्रोह, सत्य-द्रोह, देश-द्रोह है — इसे ठंडे दिमाग से परखना चाहिए। जिस समय जम्मू-कश्मीर, मुर्शिदाबाद, मराड, कैराना, उदयपुर, पहलगाम, आदि अनेक जगहों में हिन्दू भगाए और कत्ल किए जा रहे हैं, और जिस पर संघ-भाजपा चुप रहते हैं — उसी समय ये मुस्लिमों को भारत में उत्पीड़ित जैसे होने का सर्टिफिकेट दे रहे हैं!

इस का लाभ उठाते हुए स्थानीय जिहादी जहाँ-तहाँ हिन्दू बस्तियाँ खाली करा लेंगे। जिस का पहले तो समाचार दबाया जाएगा। यदि किसी ने छाप भी दिया, तब कहा जाएगा: ‘आखिर मुसलमान कितना बर्दाश्त करेंगे, प्रतिक्रिया होगी ही’! यानी, भारत में मुसलमानों की हिंसा ‘उत्पीड़ित का प्रतिरोध’ है।

इस झूठी दलील को बल पहुँचाना वह धर्म-द्रोह है जो भारत के हिन्दू नेता अपने ही समाज के विरुद्ध करते रहे हैं। गाँधी, नेहरू से लेकर वाजपेई, भागवत तक ने अपने-अपने तरीके यह किया है — उत्पीड़क जिहाद को ढाल दे देना, और उत्पीड़ित हिन्दू की ही भर्त्सना।

यही करके हिन्दू नेता अपनी मतिहीनता, अज्ञान, और  अटपटापन छिपाते रहे हैं। ताकि उन की आरामपसंद राजनीति चलती रहे। ऊपर से महात्मा, उदार, मानवतावादी, चमत्कारी होने का सेहरा भी मिले।

यदि इस अन्याय को कोई कठघरे में खड़ा नहीं करता, तो यह लुप्त नहीं हो जाता! अनेक देसी-विदेशी इतिहासकार इसे दर्ज करते रहे हैं। जिस का कभी खंडन नहीं हुआ, क्योंकि किया ही नहीं जा सकता। केवल मौन के षड्यंत्र से उसे दबाने की कोशिश रही है।

केवल 1947 से अब तक हुई हिंसा में मुसलमानों की तुलना में नौ गुना हिन्दू मारे गए हैं। सामूहिक विस्थापन के आँकड़े भी वही कहते हैं। पाकिस्तान -बंगलादेश से उत्पीड़न के मारे हिन्दू लाखों में भारत आते रहे, जबकि उसी कारण भारत से पाकिस्तान जाने वाले मुस्लिम कोई न थे!

सो, मुस्लिम राजनीति की स्थाई विशेषता रही है: आरोप लगाना, शिकायत करना, माँगें रखना, कोसना, और दंगे करना। हिन्दू राजनीति की स्थाई विशेषता: मान लेना, छूट देना, खुशामद करना, भीरुता, आत्म-निन्दा, और आत्म-समर्पण। इसी क्रम में भारत तोड़ एक अलग इस्लामी ‘पाक’ देश भी बन गया।

उन्हीं विशेषताओं का लाभ उठाकर मुस्लिम नेता बची ‘नापाक’ जमीन भी पाक बनाने की योजना में लगे हुए हैं। क्योंकि बचे भारत में भी किसी शासक ने आज तक हिन्दुओं से नहीं पूछाः कि ‘‘क्या हमारे राज में तुम सुरक्षित महसूस करते हो?’’

यह विगत अस्सी सालों से भारत का सब से उपेक्षित सवाल है। इसीलिए यहाँ नन्दीमर्ग, मराड, गोधरा, कैराना, शाहीन बाग जैसी घटनाएं अनवरत दुहराती हुई हैं। हिन्दुओं पर उत्पीड़न से किसी राजनीतिक हानि का भय नहीं। उन्हें हिन्दू नेता भी बेधड़क चोट पहुँचाते हैं।

इस प्रकार, हिन्दू समाज दरअसल नेतृत्वविहीन है! उस के कथित नेता भ्रामक या निजी स्वार्थ की दुनिया में रहते हैं।  इस्लामियों की सेवा, उन से शाबासी पाने, अपने को महात्मा और दैवी बताने की झक पालते हैं। हिन्दुओं से ही वोट, धन और शक्ति हासिल करते हैं, फिर उन्हीं पर चोट करते हैं। यह कितनी मूढ़ता, और कितना विश्वासघात है — इस का हिसाब इतिहास करेगा।

जब वोट लेना हो तब संघ परिवार हिन्दुओं पर एकाधिकार जताता है। यह प्रचार कि दूसरे दलों को वोट देने वाला हिन्दू ‘प्रॉब्लम’ है। वैसे हिन्दू को सोशल मीडिया पर गालियाँ दी जाती हैं। जिसे उन का आईटी सेल प्रेरित करता है। किन्तु जब हिन्दुओं पर संकट आए, तब ‘हमने हिन्दुओं का ठेका नहीं ले रखा’ कह कर पल्ला झाड़ लेना। यह विश्वासघात नहीं तो क्या है?

पर यही वर्तमान युग की हिन्दू राजनीति है। गाँधीजी से आज तक बार-बार देखी जाती:  सज्जन पर चढ़ना और दुर्जन से बचना। अज्ञानी, अहंकारी, आरामपसंद राजनीति। जिसे ज्ञान, न्याय, या कर्तव्य से अधिक कुर्सी से लगाव है। जिस समुदाय में निरंतर ऐसे ही नेता रहें, उस का भविष्य भाग्य-भरोसे ही है।

आज का एक्सप्लेनर:‘भूल गए 500 साल दिल्ली मुसलमानों की थी’, जिहाद की धमकी देने वाला तल्हा सईद कौन; आसिम मुनीर की तारीफ क्यों कर रहा

‘भूल गए दिल्ली किसकी थी। हिंद में 500 साल मुसलमान हुक्मरान रहे।’ ये बयान है आतंकी हाफिज सईद के बेटे तल्हा सईद का। उसने पाकिस्तान के शेखपुरा में सरेआम भारत के खिलाफ जिहाद जारी रखने की बात कही। इसी भाषण में उसने पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर को ‘ईमान और तकवा’ वाला जनरल बताया। आखिर कौन है तल्हा सईद, आसिम मुनीर की इतनी तारीफ क्यों कर रहा और इस वक्त ऐसे बड़बोलेपन के पीछे की पूरी कहानी, आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: तल्हा सईद ने ऐसा क्या बोला, जो सुर्खियों में है? जवाबः सोशल मीडिया पर तल्हा सईद का 2 मिनट 5 सेकेंड का एक वीडियो वायरल है। उसमें कही 3 बातें चर्चा में हैं… इससे पहले सिंधु जल संधि पर रोक लगाने की वजह से पीएम मोदी को धमकी देते हुए तल्हा ने कहा था, ‘अगर तू पानी बंद करेगा, तो हम तेरी सांस बंद कर देंगे।’ सवाल-2: तल्हा सईद है कौन? जवाबः 26/11 मुंबई आंतकी हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद का बेटा है तल्हा सईद। फिलहाल लाहौर में रहता है। हाफिज के बाद उसे आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की कमान मिल सकती है। फिलहाल वो नंबर-2 माना जाता है। 12 साल की उम्र में लश्कर से जुड़ाः तल्हा की पैदाइश 25 अक्टूबर, 1975 की है। 1987 में लश्कर-ए-तैयबा की शुरुआत के साथ आतंकी अब्दुर रहमान मक्की की देखरेख में तल्हा की ट्रेनिंग शुरू हो गई। 2000 के दशक में हाफिज सईद खुद को समाजसेवा और राजनीतिक नरैटिव बनाने लगे, तब लश्कर में तल्हा की जिम्मेदारी बढ़ी। मुंबई आतंकी हमले में भी नामः 2008 के मुंबई आतंकी हमले के बाद, हाफिज सईद ने पाकिस्तान की आवाम के सामने दिखाया कि हमले की साजिश उसकी नहीं थी। तब तल्हा ने ही मीडिया में लश्कर का पूरा प्रोपेगैंडा कैंपेन चलाया था। वह सोशल मीडिया का भी एक्सपर्ट है। भारत-अमेरिका में आतंकी घोषितः भारतीय गृह मंत्रालय के मुताबिक, PoK से भारत के खिलाफ आतंकी साजिशें करना, आतंकियों की भर्ती, फंड जमा करना, हमलों की प्लानिंग, भारत और अफगानिस्तान में आतंकी गतिविधियां, यह सब तल्हा संभालता है। भारत सरकार ने 2022 में उसे आतंकी घोषित किया था। अमेरिका ने भी उसे टेररिस्ट घोषित किया है। हालांकि चीन के वीटो की वजह से UN में ग्लोबल टेररिस्ट घोषित नहीं हो सका। पाकिस्तान की घरेलू राजनीति में भी सक्रियः 2019 में हाफिज सईद के कैद में जाने के बाद तल्हा लाइमलाइट में आया। इसी साल बम ब्लास्ट उसकी जान बची। 2024 में पाकिस्तान चुनाव के दौरान हाफिज सईद ने ‘पाकिस्तान मरकज़ी मुस्लिम लीग’ (PMML) बनाई थी। तब तल्हा लाहौर की NA-127 सीट से उतरा लेकिन पाकिस्तान मुस्लिग लीग- नावज (PML-N) के कैंडिडेट से हार गया। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पढ़े-लिखे लड़ाकों की भर्ती शुरू की: रिपोर्ट्स के मुताबिक, तल्हा ने लश्कर में पढ़े-लिखे और कम उम्र के लड़ाकों की भर्ती का हुक्म दिया है। वो पाकिस्तान के मस्जिदों, मदरसों, सभाओं और सोशल मीडिया के जरिए जिहादी प्रोपेगैंडा फैलाता है। ऑनलाइन क्लासेस लेता है और आतंक के साथ-साथ राजनीति के लिए भी लड़के तैयार करता है। सवाल-3: आसिम मुनीर की इतनी तारीफ क्यों कर रहा है तल्हा सईद? जवाबः इसकी 3 बड़ी वजहें हैं… मुनीर की ‘मौलाना जनरल’ वाली इमेज भारत विरोधी और कश्मीर पर कट्टर रुख ऑपरेशन सिंदूर के बाद आतंकियों की मदद सवाल-4: तल्हा सईद के बयान की टाइमिंग क्यों अहम है? जवाबः इस समय 4 मोर्चों पर पाकिस्तान सुलग रहा है… तल्हा सईद के बयान के पीछे सुशांत सरीन दो आशंकाएं जताते हैं। पहली- घरेलू मुद्दे को डायवर्ट करने के लिए भारत पर हमला हो सकता है। दूसरा- पाकिस्तान सिंधु जल समझौते का मुद्दा फिर से उठा सकता है। इसके लिए तल्हा सईद जैसे मोहरों का इस्तेमाल हो सकता है, जो अपने भाषणों से नैरटिव बनाते हैं। सवाल-5: पाक आतंकियों के ऐसे बयानों पर भारत का मौजूदा रुख क्या है? जवाबः तल्हा सईद के बयान पर भारत ने कोई बयान जारी नहीं किया। हालांकि इससे पहले भी भारत पाकिस्तानी आतंकियों के ऐसे भाषणों पर सीधी टिप्पणियां नहीं करता। भारत कई मौकों पर कह चुका है कि ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है और पाकिस्तान समर्थित किसी भी आतंकी हमले को ‘एक्ट ऑफ वॉर’ माना जाएगा। सुशांत सरीन के मुताबिक, ‘ऐसे मामले में भारत के पास इंतजार करने का ही विकल्प है। अगर पाकिस्तान कोई करतब दिखाता है, तो उसे जवाब दिया जाएगा।’ ——– ये खबर भी पढ़िए… आसिम मुनीर ने गुपचुप ‘तख्तापलट’ कर दिया; कैसे पाकिस्तान में सबसे ताकतवर बने, आखिर हासिल क्या करना चाहते हैं पाकिस्तान में 5वीं बार सेना के जनरल ने ‘तख्तापलट’ कर दिया है। फर्क बस इतना है कि इस बार ये टैकों के जरिए नहीं, संसद के रास्ते हुआ है। नए कानून से फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पाकिस्तान के सबसे ताकतवर शख्स बन गए हैं। पूरी खबर पढ़िए…

PAK ग्रूमिंग गैंग ने लंदन में सिख युवती को फंसाया:ब्रेनवॉश किया, नितनेम-गुरुद्वारा जाना छोड़ा, पुलिस को मां-बाप की शिकायत की, फिर घर छोड़ चली गई

इंग्लैंड (UK) में पंजाबी युवती पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग के चंगुल में फंस गई। युवती की मां ने एक पंजाबी चैनल से बातचीत में कहा कि उसकी 19 साल की बेटी है। वह नितनेम करती, गुरुद्वारे जाकर सेवा करती थी लेकिन गैंग ने उसे फंसा लिया। उसने सब कुछ छोड़ दिया। उसका ब्रेनवॉश कर दिया। जब हमने समझाने की कोशिश की तो हमारी शिकायत लंदन पुलिस को कर दी। इसके बाद हमें छोड़कर चली गई। मां ने कहा कि यूनिवर्सिटी में लड़कियों के एक ग्रुप से जोड़ने के बाद एक लड़का उसके टच में आया, उसके बाद ही उसका पूरा व्यवहार बदल गया। उसने इंग्लैंड में रहते सिखों से इस मामले में मदद मांगी है। लड़की को कैसे फंसाया, ग्रूमिंग गैंग का पूरा प्रोसेस क्या है, आगे क्या होता है, ये जानने के लिए पूरी रिपोर्ट पढ़िए… 5 पॉइंट में जानिए, युवती की मां ने ग्रूमिंग को लेकर क्या कहा.. 1. स्कूल में पढ़ी, यूनिवर्सिटी तक सब ठीक था
मां ने कहा- मेरी बेटी का नाम सिमरन है। वह 19 साल की है। बेटी यहीं (लंदन) की जन्मी है, लेकिन फिर भी वह जैसी हमारी भारतीय समुदाय की बच्चियां होती हैं, उस तरह थी। हमारे घर में एक अच्छे माहौल में पली-बढ़ी थी उसने स्कूल खत्म किया और सितंबर 2025 में यूनिवर्सिटी में पढ़ने के लिए गई। तब तक सब कुछ ठीक था। 2. यूनिवर्सिटी में लड़कियों का ग्रुप बना, फिर एक लड़का उसके टच में आया
मां ने कहा- यूनिवर्सिटी में जाकर मुस्लिम लड़कियों का ग्रुप बना। फिर एक लड़का उनके संपर्क में आया। जिसने मेरी बेटी से संपर्क किया और फिर उसका थोड़ा-थोड़ा व्यवहार बदलने लगा। वह पहले बहुत अच्छी थी, बहुत इज्जत करती थी हमारी, कभी वह हमारे आगे बोलती नहीं थी। फिर हमें शक हुआ कि शायद कुछ गलत है। हमें जून 2026 में पता चला कि एक मुस्लिम लड़का उसके साथ जुड़ चुका है। उसके बाद उसका व्यवहार बदल गया। 3. मां-बाप को वह बातें बोलती, जिससे यकीन नहीं आता
मां ने कहा- वह काफी आक्रामक होने लगी। यहां तक कि उसको यह पता चलना बंद हो गया कि हम उसके माता-पिता हैं। वह कभी-कभी हमें इतनी गलत चीजें बोल देती थी कि हम विश्वास ही नहीं कर पाते थे कि यह सिमरन ही बोल रही है। स्कूल में हर टीचर उसकी तारीफ करता था कि यह हमारी बहुत इज्जत करती है। 4. घर पर पाठ करती, गुरुद्वारे जाती, फिर पूरी बदल गई
मां ने कहा- वह घर पर पाठ करती थी। जब भी उसको समय मिलता था, हम गुरुद्वारे जाते, सेवा करके आते थे। उसका ब्रेनवाश कर दिया गया। मतलब कि पूरी तरह से बदल दिया उसको। वह अपना किरदार ही भूल गई। मेरी फैमिली गुरसिख है। पति का परिवार अमृतधारी है। बेटी सिमरन भी सिक्खी को मानती थी लेकिन फिर वह पूरी तरह से बदल गई। 5. समझाया तो पुलिस को हमारी ही शिकायत कर दी, फिर छोड़कर चली गई
मां ने कहा- जब हमने उसे समझाने की कोशिश की तो उसने लंदन पुलिस को शिकायत कर दी। उसने झूठ कहा कि हमने उसको मारा-पीटा। जबकि हमने कभी भी उस पर हाथ नहीं उठाया। यहां तक कि हमने उससे ऊंची आवाज में बात करना भी बंद कर दिया था। हमें लगता था कि हम प्यार से उसको समझा लें, घर वापस ले आएं, हर वह चीजें करने लगे, जिससे वह खुश रहती थी। लेकिन मुझे नहीं पता कि उसका इतना माइंडवॉश कर दिया उन्होंने कि हमारी मेरी पूरी फैमिली पर आरोप लगाकर वह चली गई।
पहले भी एक युवती ने ऑनसक्रीन किए थे खुलासे बता दें, 6 महीने पहले इंग्लैंड में रहने वाले पंजाबी नवदीप सिंह ने एक युवती का वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें युवती ने ऐसे ही कुछ दावे किए थे। उसने बताया था कि ब्रिटेन में कौर-टू-खान मूवमेंट चल रहा है। सिख लड़कियों को फंसाकर उन्हें मुसलमान बनाया जा रहा है। इसके लिए यूके में पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग सक्रिय है। युवती ने वीडियो में दावा किया था कि यूके में ग्रूमिंग गैंग को कौर (सिख लड़की) से खान (मुस्लिम) बनाने पर 10 हजार पाउंड दिए जा रहे हैं। युवती का कहना था कि पाकिस्तानी मूल की ग्रूमिंग गैंग सोची-समझी साजिश के तहत गैर-मुस्लिम लड़कियों, खासकर सिख लड़कियों को निशाना बना रहे हैं। युवती ने ग्रूमिंग गैंग की स्ट्रेटजी का भी खुलासा किया था। उसका कहना था कि ग्रूमिंग गैंग पहले लड़कियों को टारगेट कर उनसे इमोशनली अटैच होते हैं, फिर उन्हें महंगी गाड़ियों व रेस्टोरेंट्स में घुमाते हैं और जब लड़की उनके जाल में फंस जाती है तो उसका धर्म परिवर्तन करा देते हैं। युवती का दावा है कि अलग-अलग धर्म की लड़कियों को फंसाने के रेट भी अलग हैं। सिख लड़की को फंसाकर मुस्लिम बनाने पर युवक को 10,000 पाउंड (करीब 11 लाख रुपये) मिलते हैं। वहीं, हिंदू या ईसाई लड़की के धर्म परिवर्तन कराने पर 5,000 पाउंड (करीब साढ़े 5 लाख रुपये) का इनाम दिया जाता है। कैसे जाल बिछाते हैं ग्रूमिंग गैंग, स्टेप-टू-स्टेप प्रोसेस जानिए…

धामी सरकार की सख्ती, भड़काऊ बयान मामले में मौलाना मुफ्ती मुजीब गिरफ्तार, CM धामी बोले- उत्तराखंड में नफरत की कोई जगह नहीं

धामी सरकार की सख्ती, भड़काऊ बयान मामले में मौलाना मुफ्ती मुजीब गिरफ्तार, CM धामी बोले- उत्तराखंड में नफरत की कोई जगह नहीं

pushkar singh dhami

उत्तराखंड के रुद्रपुर में ईद मिलादुन्नबी के जुलूस के दौरान दिए गए एक कथित भड़काऊ बयान को लेकर विवाद बढ़ गया है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी मुफ्ती को गिरफ्तार कर लिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले का संज्ञान लेते हुए उत्तराखंड में कट्टरवादी सोच को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करने की बात कही और कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए।

त्रिशूल चौक के पास जुलूस को संबोधित करते हुए मुस्लिम वक्ता मुफ्ती मुजीब अहमद अजहरी के बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। अवैध मदरसों पर धामी सरकार के एक्शन से भड़का मौलाना धमकी दे रहा था। उसने कहा था कि अगर मदरसों को बंद किया तो मुसलमान वो हाल कर देगा जो कभी नहीं हुआ। मौलाना की भड़काऊ तकरीर पर लोग तालियां बजा रहे थे।

बारावफ़ात के मौके पर 26 अगस्त को मुफ़्ती मुजीब ने ये भडकाऊ तकरीर की थी।  सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि सामाजिक ताने बाने को बिगाड़ने नहीं दिया जाएगा। ऐसे मौलानाओं के खिलाफ सख़्त एक्शन लिया जाएगा। पुलिस उस मौलाना को गिरफ़्तार कर करके सख़्त कार्रवाई करेगी।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में नफ़रत की कोई जगह नहीं है। ऐसी तकरीरें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। सीएम धामी ने कहा कि मौलाना भारत के संविधान को नहीं मानते हैं और इसी प्रकार से धमकी देने का काम करते हैं। वो ज़माना चला गया जब लोग धमकी पर आते थे और इनके वोटों के चक्कर में तुष्टिकरण करते थे। इनके कब्जों के सहन करते थे। इनके डेमोग्राफ़िक बदलाव पर कुछ नहीं बोलते थे। अब सरकार बदल गई है। कानून का राज स्थापित हुआ है। संवैधानिक जो हमारी मान्यताएं हैं। संविधान ने जो प्रावधान किया है, उसके अनुरूप काम होता है।

Mohan Bhagwat New York Visit: ‘अगर कोई हिंदू नहीं चाहता कि भारत में मुस्लिम रहें, तो…’; न्यूयॉर्क में क्या बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत?

Mohan Bhagwat New York Visit: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार (29 अगस्त) को न्यूयॉर्क में ‘वन वर्ल्ड वन ह्यूमैनिटी’ (एक दुनिया: एक मानवता) नाम के धर्म गुरुओं के एक सम्मेलन को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने अलग-अलग धर्मों के बीच एकता और सद्भाव की अपील की। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत में कोई मुस्लिम न रहे, ऐसा सोचने वाला हिंदू नहीं हो सकता। भागवत ने कहा कि आज धर्मों की पहचान मुख्य रूप से रीति-रिवाजों से होती है। उन्होंने कहा, “धार्मिक अनुशासन का पालन करने और दिव्यता की राह पर चलने के लिए रीति-रिवाजों का अनुशासन भी जरूरी है। लेकिन धर्म का मकसद क्या है? यह हमें सच्चाई की ओर ले जाता है।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं ऐसे समाज में काम कर रहा हूं जो पारंपरिक रूप से कहता है कि धर्म भले ही अलग-अलग हों, लेकिन मानवता एक है। सच्चाई एक है और मानवता उसी सच्चाई का नतीजा है।” भागवत ने कहा, “हिंदुत्व का मतलब मुस्लिम को बाहर (देश से) करना नहीं है। मुस्लिम नहीं होने चाहिए ऐसा सोचना हिंदुत्व नहीं हो सकता। धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन मानवता एक है।” भागवत ने कहा कि अगर आप खुद को हिंदू कहते हैं, तो आपको यह मानना होगा कि सभी रास्ते एक ही लक्ष्य की ओर ले जाते हैं।

भागवत ने अपने संबोधन में समाज को प्राचीन परंपराओं के बारे में शिक्षित करने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की परंपराएं विदेशी आक्रमणों के बावजूद बची हुई हैं। इन परंपराओं ने लोगों को ‘एक दुनिया, एक मानवता’ का पाठ पढ़ाया है।

‘इंसानों के बीच कोई फर्क नहीं होता’

मोहन भागवत ने कहा, “असल में मैंने 2018 में दिल्ली में एक लेक्चर सीरीज के दौरान यह बात कही थी। वहां मुस्लिम भाई भी मौजूद थे। उन्होंने मुझसे सवाल पूछा, “आप एक हिंदू संगठन हैं, आप हिंदू राष्ट्र की बात करते हैं, तो हम मुसलमानों का क्या होगा? क्या आप हमें बाहर निकाल देंगे?” मैंने उनसे कहा, “नहीं…, हिंदुत्व यह नहीं है। अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में कोई मुसलमान नहीं होना चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रह जाएगा।” अगर आप खुद को हिंदू कहलाना चाहते हैं, तो आपको यह मानना ​​होगा कि सभी रास्ते एक ही मंजिल तक ले जाते हैं। और हर इंसान की अपनी गरिमा होती है। इंसानों के बीच कोई फर्क नहीं होता।”

RSS चीफ ने आगे कहा, “मैं कोई धार्मिक विद्वान नहीं हूं, न ही आपकी तरह कोई धार्मिक अथॉरिटी हूं। लेकिन मैं एक ऐसे समाज में काम कर रहा हूं जो ट्रेडिशनली कहता है कि धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन इंसानियत एक है। सच एक है, और इंसानियत उस सच का उत्पाद है। इसलिए इंसानियत एक है। वह सच एक सच है, लेकिन उसे बताने वाले के हिसाब से कई तरीकों से बताया गया है। क्योंकि इंसान होने के नाते, हम उस सॉफ्टवेयर के कैदी हैं जो हमारे दिमाग में बनाया गया है।”

हिंदू धर्म पर मोहन भागवत का संदेश

अपने संबोधन के दौरान RSS प्रमुख ने कहा कि यह समझना जरूरी है कि हिंदू जीवन शैली का पालन करने के कई रास्ते हैं। लेकिन वे सभी एक ही परम सत्य की ओर ले जाते हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इंसानों के बीच कोई बुनियादी अंतर नहीं है। हर किसी को सम्मान के साथ जीने का अधिकार है।

भागवत ने यह भी कहा कि संगठन ने भारत में रहने वाले मुस्लिम और ईसाई समुदायों के साथ बातचीत शुरू की है। उन्होंने कहा, “बातचीत पहला कदम है। सेवा एक और कदम है, लेकिन जरूरी नहीं कि वह बातचीत के बाद ही हो। ये दोनों काम साथ-साथ होने चाहिए। हम सेवा कर रहे हैं। और जब हम सेवा करते हैं, तो कोई भेदभाव नहीं करते।”

उन्होंने आगे कहा, “यही वजह है कि प्रचार-प्रसार के मामले में हम काफी पीछे हैं। गलत नैरेटिव (धारणाओं) की वजह से एक गलत सोच बन गई है। लेकिन जब लोग असल में आकर और समझदारी के साथ हमारे काम को देखते हैं, तो वे गलत धारणाएं बहुत तेज़ी से खत्म हो सकती हैं।”

ये भी पढ़ें- UP News: रक्षाबंधन पर सीएम योगी का बेटियों को तोहफा! बताया कब मिलेगी 50,000 छात्राओं को फ्री स्कूटी

आधुनिक राजनीति पर भागवत के विचार!

RSS प्रमुख ने आधुनिक राजनीति के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि राजनीति काफी हद तक जनमत पर निर्भर करती है। खासकर लोकतंत्र में कोई भी राजनेता आसानी से इसके खिलाफ नहीं जा सकता। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि घटनाओं के होने से पहले ही राजनीति को बदलें और उसे सही दिशा में प्रभावित करें। हम युद्ध रोकना चाहते हैं। हम ये सभी काम करना चाहते हैं। इसलिए किसी न किसी समय हमें राजनीति को प्रभावित करना ही होगा।” हालांकि, भागवत ने संकेत दिया कि राजनीति के कारण धार्मिक सद्भाव नहीं बन पा रहा है।