अस्पताल से डिस्चार्ज होकर राजघाट पहुंचे सोनम वांगचुक, बोले- बापू का शांति का रास्ता आज भी सबसे प्रासंगिक

sonam wangchuk on rajghat

एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक सोमवार को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद अपनी पत्नी गीतांजलि आंग्मो के साथ सीधे दिल्ली के राजघाट पहुंचे और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि शांति के रास्ते हर हल मुमकिन है। बापू का रास्ता आज भी प्रासंगिक है। ALSO READ: बिहार छात्र आंदोलन पर AK-47 से फायरिंग करने वाला सिपाही सस्पेंड, भाजपा सांसद संबित पात्रा घिरे

 

वांगचुक ने कहा कि 26 दिन के अनशन और इस आंदोलन के अंत पर मैं सबसे पहले बापू को याद करने के लिए राजघाट आना चाहता था। मैं देश को बताना चाहता था कि उनका बताया गया रास्ता आज भी उतना ही उपयुक्त है जितना 100 साल पहले था।

उन्होंने कहा कि मेरी समझ है कि ये तरीके जनता के दिल तक संदेश पहुंचाते हैं। इस बार मुझे यह तसल्ली हुई कि यह देश के स्तर पर प्रासंगिक है। मैं लोगों से कहता हूं कि वे बापू द्वारा शांति के मार्ग पर चलकर ही अपनी बात रखें। मैं सभी नागरिकों को बधाई देता हूं। ALSO READ: जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद CJP का पार्टी वीडियो वायरल, फंडिंग पर उठे सवाल; क्या बोले तवलीन सिंह और सौरव दास?

 

वीडियो संदेश में क्या बोले सोनम वांगचुक

अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वांगचुक ने एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी सेहत की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वह अब काफी बेहतर महसूस कर रहे हैं। वह धीरे-धीरे भोजन कर रहे हैं और उनके शरीर में ताकत लौट रही है। उन्होंने अपने स्वास्थ्य लाभ के लिए डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ को भी धन्यवाद दिया।

वांगचुक ने लद्दाख के आंदोलन को मिले व्यापक समर्थन के लिए जनता का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि यह सभी के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने लोगों की एकजुटता और अपनी आवाज उठाने की सराहना की। वांगचुक ने अपने संदेश में आंदोलन की सफलता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह जीत उन सभी की है जिन्होंने इस मुहिम में साथ दिया।

 

गौरतलब है कि सीजेपी के आंदोलन की सबसे अहम कड़ी सोनम वांगचुक का अनशन ही था। सोनम वांगचुक की 26 दिनों की भूख हड़ताल ने बड़ी संख्या में युवाओं को जंतर मंतर की ओर आने के लिए प्रेरित किया। वांगचुक आ अनशन समाप्त होने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद CJP का पार्टी वीडियो वायरल, फंडिंग पर उठे सवाल; क्या बोले तवलीन सिंह और सौरव दास?

mahesh jethmalani, tavleen singh and saurabh dass on CJP party viral video

दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई दिनों तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें सीजेपी से जुड़े कई लोग एक होटल में पार्टी करते दिखाई दे रहे हैं। इससे अलावा प्रदर्शनस्थल पर सीजेपी कार्यकर्ताओं के जश्न मनाते वीडियो भी जमकर वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो पर मचे बवाल के बाद सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और प्रख्यात लेखिका तवलीन सिंह के जवाब भी चर्चा में है। ALSO READ: धर्मेंद्र प्रधान पर पोस्ट से BJP में बवाल! अपराजिता सारंगी की बेटी अर्चिता राहर घिरीं, पार्टी नेताओं ने जताई नाराजगी

 

महेश जेठमलानी ने उठाए फंडिंग पर सवाल?

इस वीडियो को सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किया है। वायरल वीडियो में CJP के कुछ लोग एक होटल में पार्टी करते हुए दिखाई दे रहे हैं। वहां जश्न का माहौल है और नाच-गाना भी चल रहा है।

महेश जेठमलानी ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'क्या सच में ऐसा हो रहा है? CJP की लीडरशिप दिल्ली के एक होटल में पार्टी दे रही है। राजधानी दिल्ली में कई दिनों तक विरोध प्रदर्शन हुए। ऐसे में सवाल यह है कि इनके ट्रैवल, खाने और रहने का खर्च किसने उठाया? इनकी फंडिंग किसने की? ALSO READ: 'बेटी के बयान से दुखी हूं, लेकिन पिता को दोष नहीं दे सकते'— केशव महंता के बचाव में बोले हिमंत बिस्वा सरमा

तवलीन सिंह ने दिया जवाब

तवलीन सिंह ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, भाजपा अब कॉकरोच को एक 'फाइव-स्टार होटल' में पार्टी करते हुए दिखाकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रही है। क्या हम यह पूछ सकते हैं कि इतने सारे भाजपा मंत्रियों और उनकी संतानों के पास डिजाइनर कपड़े और कार्टियर के चश्मे खरीदने के लिए पैसे कहाँ से आते हैं? ALSO READ: प्रधान के बाद अब गडकरी निशाने पर! 100% शुद्ध पेट्रोल के लिए 'E20 जनता पार्टी' मैदान में

 

क्या बोले सौरव दास?

कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद सीजेपी के कार्यकर्ताओं साथ पार्टी और डांस करने के वायरल वीडियो पर की जा रही टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दी है। सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'इससे एक बार फिर साफ़ हो जाता है कि सरकार और गोदी एंकर, जेन-ज़ी और नई पीढ़ी की सोच और भाषा को समझ ही नहीं पा रहे हैं।'

 

उन्होंने कहा कि हम जितने दिन जरूरत होगी, उतने दिन सड़क पर बैठ सकते हैं। हम नाचते-गाते हुए भी प्रदर्शन कर सकते हैं। हम हाथ में कोल्ड कॉफी लेकर भी आंदोलन को संगठित कर सकते हैं। बदलाव के लिए लड़ने के लिए हमारा वैसा दिखना जरूरी नहीं है, जैसा पिछली पीढ़ियां किसी आंदोलन से उम्मीद करती हैं।

सौरव दास ने कहा कि यही इस पीढ़ी की पहचान है-आत्मविश्वासी, रचनात्मक, जुझारू और ऐसी, जिसे किसी एक तयशुदा छवि में बांधा नहीं जा सकता। अंकल-आंटी चाहे जितनी शिकायत करते रहें, उन्हें हमारी इस पीढ़ी के साथ जीना और हमें स्वीकार करना ही होगा।

जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद क्या होगा CJP का अगला कदम? कॉकरोच जनता पार्टी ने खुद किया खुलासा

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) फिलहाल खुद को एक राजनीतिक पार्टी के बजाय युवाओं के आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है। संगठन ने अभी यह साफ नहीं किया है कि वह भविष्य में पूरी तरह चुनावी राजनीति में उतरेगा या नहीं। 37 दिनों तक चले विरोध प्रदर्शन के खत्म होने के बाद सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इस समय संगठन का मुख्य लक्ष्य चुनाव लड़ना नहीं है। उन्होंने बताया कि उनकी प्राथमिकता देशभर में संगठन का विस्तार करना, ज़्यादा से ज़्यादा युवाओं तक पहुंचना और जमीनी स्तर पर मजबूत नेटवर्क तैयार करना है।

क्या होगा सीजेपी का अगला कदम?

सौरव दास ने कहा कि संगठन का लक्ष्य अभी पूरी तरह साफ है। उनकी प्राथमिकता आंदोलन को देश के हर हिस्से और गांव-शहर तक पहुंचाना है। इसके लिए संगठन पूरे भारत में दौरा करेगा और युवाओं से सीधे बातचीत करेगा। उन्होंने कहा कि हाल के अनुभवों से यह पता चला है कि युवाओं और सरकार के बीच संवाद की बड़ी कमी है। उन्होंने कहा, “पिछले एक महीने में हमें महसूस हुआ कि बहुत से लोगों के पास अपनी समस्याएं और बातें रखने के लिए कोई मंच नहीं है। इसलिए हम जमीनी स्तर पर जाकर लोगों की बात सुनेंगे और उनसे जुड़ेंगे।”

सौरव दास का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब चर्चा हो रही है कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) भविष्य में चुनावी राजनीति में उतर सकती है। नीट-यूजी 2026 पेपर लीक के आरोपों और शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधारों की मांग को लेकर संगठन के लंबे आंदोलन ने देशभर का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य

सौरव दास ने कहा कि संगठन का लक्ष्य अभी पूरी तरह साफ है। उनकी प्राथमिकता आंदोलन को देश के हर हिस्से और गांव-शहर तक पहुंचाना है। इसके लिए संगठन पूरे भारत में दौरा करेगा और युवाओं से सीधे बातचीत करेगा। उन्होंने कहा कि हाल के अनुभवों से यह पता चला है कि युवाओं और सरकार के बीच संवाद की बड़ी कमी है। उन्होंने कहा, “पिछले एक महीने में हमें महसूस हुआ कि बहुत से लोगों के पास अपनी समस्याएं और बातें रखने के लिए कोई मंच नहीं है। इसलिए हम जमीनी स्तर पर जाकर लोगों की बात सुनेंगे और उनसे जुड़ेंगे।” सौरव दास का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब चर्चा हो रही है कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) भविष्य में चुनावी राजनीति में उतर सकती है। नीट-यूजी 2026 पेपर लीक के आरोपों और शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधारों की मांग को लेकर संगठन के लंबे आंदोलन ने देशभर का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

फिलहाल संगठन ने चुनाव लड़ने की कोई घोषणा नहीं की है। सौरव दास के बयान से साफ है कि अभी उनकी प्राथमिकता संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाना है। उनका कहना है कि किसी भी राजनीतिक फैसले से पहले संगठन देशभर में अपना नेटवर्क मजबूत करेगा और लोगों की आवाज़ बनने की कोशिश जारी रखेगा।

खत्म हुआ आंदोलन

केंद्र सरकार की ओर से संगठन की कई मांगों पर विचार करने का भरोसा मिलने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने शनिवार को अपना विरोध प्रदर्शन खत्म कर दिया। संगठन की प्रमुख मांगों में नीट के उन अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजा देना शामिल था, जिन्होंने आत्महत्या की, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेना और परीक्षा व्यवस्था में सुधार से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा करना भी शामिल था।

विरोध प्रदर्शन उसी दिन खत्म हुआ, जिस दिन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दिया। इसके बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस बीच, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर समर्थकों का आभार जताया। उन्होंने इसे “युवाओं की बड़ी जीत” बताया।

अभिजीत दिपके ने कहा कि आंदोलन खत्म होने के बाद उन्हें काफी राहत महसूस हो रही है। उन्होंने कहा, “अब मैं सुकून से सो सकता हूं और अपने घर में बिना किसी चिंता के सुबह उठ सकता हूं। अब यह सोचने की जरूरत नहीं रहती कि आगे क्या होगा या शाम तक क्या स्थिति बनेगी। मन में अब कोई घबराहट नहीं है।” उन्होंने आंदोलन का साथ देने वाले सभी समर्थकों का धन्यवाद किया। दिपके ने कहा कि कई लोगों ने आलोचनाओं के बावजूद संगठन पर भरोसा बनाए रखा और हर कदम पर उनका साथ दिया। साथ ही, उन्होंने उन लोगों का भी आभार जताया जिन्होंने आंदोलन और उसके अभियान पर सवाल उठाए। उनके मुताबिक, ऐसी आलोचना और सवालों से संगठन को अपनी कमियों को समझने और खुद को पहले से बेहतर बनाने में मदद मिली।

‘जंतर-मंतर प्रोटेस्ट हैंडल करने में RAF से भारी गलती हुई…’ पैलेट गन और इलेक्ट्रिक शॉक के इस्तेमाल पर लगी रोक

RAF Bans Pellet Guns In Delhi: दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान अपनी कार्रवाई की आंतरिक समीक्षा के बाद रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने कड़ा रुख अपनाया है। आरएएफ ने अपनी कार्यशैली में गंभीर कमियां पाई हैं और राष्ट्रीय राजधानी में अपनी तैनाती के दौरान प्रोजेक्टाइल अटैक गन (PAG), एंटी-रायट गन (ARG), इलेक्ट्रिक शॉक वेपन्स और इलेक्ट्रिक शील्ड्स के इस्तेमाल पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

22 जुलाई को इंस्पेक्टर जनरल (IG) सीमा धुंडिया की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में यह फैसला लिया गया। समीक्षा के दौरान भीड़ नियंत्रण, अनुशासन और जवाबदेही को बेहतर बनाने के उद्देश्य से 26 सुधारात्मक कदमों को मंजूरी दी गई है।

बॉडी वार्न कैमरा अनिवार्य, अब हर एक्शन की होगी रिकॉर्डिंग

आंतरिक समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान कुछ ऐसे वीडियो सामने आए थे जिनमें बल प्रयोग की गंभीर कमियां दिखीं। वीडियो में सुरक्षाकर्मियों को उन लोगों पर भी बल प्रयोग करते देखा गया जो पहले ही तितर-बितर हो चुके थे। लोगों को जमीन पर पटकने और बैरिकेड्स के बाहर खड़े प्रदर्शनकारियों पर लाठियां बरसाने की घटनाएं भी दर्ज की गईं।

इन गलतियों से सबक लेते हुए RAF ने अब सभी ऑपरेशन्स के लिए बॉडी वार्न कैमरा पहनना अनिवार्य कर दिया है। इसके अलावा प्रमुख घटनाओं की समर्पित फोटोग्राफी/वीडियो-रिकॉर्डिंग और निगरानी को भी बढ़ाया जाएगा।

क्यों हुआ था 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर उग्र प्रदर्शन?

जंतर-मंतर पर 20 जुलाई का प्रदर्शन युवा संचालित ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में हुआ था, जिसमें हजारों छात्र और युवा एकत्र हुए थे। छात्र NEET-UG पेपर लीक विवाद और बार-बार हो रही परीक्षा धांधलियों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।

संसद के मानसून सत्र के कारण लागू निषेधाज्ञा (Section 144) का हवाला देते हुए पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को संसद की ओर बढ़ने से रोका, जिससे दोनों पक्षों में तीखी झड़प हो गई। भीड़ को खदेड़ने के लिए आंसू गैस, लाठीचार्ज और शारीरिक बल का इस्तेमाल किया गया, जिसमें पुलिसकर्मियों समेत करीब 180 लोग घायल हुए थे।

IG सीमा धुंडिया ने अधिकारियों की लगाई क्लास

आईजी सीमा धुंडिया ने जंतर-मंतर प्रदर्शन से निपटने के आरएएफ के तरीके पर ‘गंभीर असंतोष’ व्यक्त किया। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि कई जवान बिना किसी ब्रीफिंग के सीधे मौके पर पहुंच गए थे, जिससे तैनाती के दौरान भ्रम की स्थिति पैदा हुई। कमान अधिकारियों को हिदायत दी गई कि ऑपरेशन से पहले विस्तृत ब्रीफिंग और बाद में समीक्षा करना उनकी सीधी जिम्मेदारी है।

केवल ट्रेंड जवानों को ही मिलेगी भीड़ नियंत्रण की कमान

RAF ने अपनी प्रक्रियाओं में सुधार करते हुए यह नियम तय किया है कि अब से केवल वही जवान लॉ एंड ऑर्डर या क्राउड-कंट्रोल की ड्यूटी पर तैनात किए जाएंगे, जिन्होंने आरएएफ कंवर्जन ट्रेनिंग पूरी की है। मैनपावर की कमी के कारण अगर अन्य कर्मियों को तैनात किया जाता है, तो उन्हें ड्यूटी पर भेजने से पहले विशेष सेंसिटाइजेशन ट्रेनिंग दी जाएगी।

क्या अब जंतर-मंतर पर नहीं दिखेंगे अभिजीत दिपके? अस्पताल से बोलें- ‘सुबह-शाम चढ़ रही है आईवी ड्रिप, फिर भी धर्मेंद्र प्रधान…’

NEET प्रोटेस्ट में महिला पुलिसकर्मी के पेट में बच्चे ने तोड़ा दम? दिल्ली पुलिस ने बताया पूरा सच

दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उस खबर को “पूरी तरह से गलत और गुमराह करने वाला” बताया, जिसमें दावा किया गया था कि जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान घायल होने के बाद एक गर्भवती महिला पुलिसकर्मी का गर्भपात हो गया।

यह दावा तब फैलना शुरू हुआ, जब घायल महिला पुलिस अधिकारी की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुईं। कई पोस्ट में दावा किया गया कि महिला अधिकारी चार महीने की गर्भवती थी और प्रदर्शन स्थल पर हुई हिंसा के दौरान उनका गर्भपात हो गया।

हालांकि, पुलिस अधिकारी ने इस मामले में आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करते हुए बताया कि ये तस्वीरें उस समय की हैं, जब प्रदर्शन के दौरान भगदड़ जैसी स्थिति में महिला अधिकारी घायल हो गई थीं।

ऑनलाइन फैल रहे दावों को खारिज करते हुए पुलिस ने कहा, “संबंधित महिला न तो शादीशुदा हैं और न ही गर्भवती हैं। फिलहाल उनका इलाज चल रहा है और वह मेडिकल निगरानी में हैं।”

इस दौरान दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे बिना पुष्टि वाली जानकारी को सोशल मीडिया पर पोस्ट और शेयर न करें।

छात्र क्यों कर रहे प्रदर्शन?

बता दें कि पिछले कुछ दिनों से देश में NEET पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर पर छात्रों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। साथ ही देश के शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की भी मांग की जा रही है।

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