Varmora IPO Listing: जीरो GMP के बाद 4% का लिस्टिंग गेन, ढहते मार्केट में चमका ₹148 का टाइल शेयर

Varmora Granito IPO Listing: प्रीमियम टाइल कंपनी वरमोरा ग्रेनिटो के शेयरों की आज घरेलू मार्केट में प्रीमियम एंट्री हुई। इसके आईपीओ को निवेशकों का मिला-जुला रिस्पांस मिला था और हर कैटेगरी के लिए आरक्षित हिस्सा पूरा भर नहीं पाया था। आईपीओ के तहत ₹148 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE पर इसकी ₹152.00 और NSE पर ₹155.00 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 4% से अधिक तक का लिस्टिंग गेन (Varmora Listing Gain) मिला। लिस्टिंग के बाद शेयर और ऊपर चढ़े। उछलकर BSE पर यह ₹159.35 (Varmora Share Price) के अपर सर्किट पर पहुंच गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 7.67% मुनाफे में हैं। मार्केट में माहौल की बात करें तो शुरुआती कारोबार में आज हाहाकार मच गया और सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) आधे-आधे फीसदी से अधिक टूट गए।

Varmora Granito IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

वरमोरा ग्रेनिटो का ₹708 करोड़ का आईपीओ 22-24 सितंबर तक खुला था। इसे निवेशकों का मिला-जुला रिस्पांस मिला और ओवरऑल यह 1.60 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 3.10 गुना, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 0.94 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 1.02 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹320 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा ₹2 की फेस वैल्यू वाले ₹388 करोड़ के 2,62,17,634 शेयरों की ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिक्री हुई है। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिला है। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹245.00 करोड़ कंपनी और इसकी सब्सिडियरीज का कर्ज हल्का करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

Varmora Granito के बारे में

वरमोरा ग्रेनिटो सेरामिक और विट्रीफाइड टाइल बनाती है। इसके प्रोडक्ट्स में ग्लेज्ड विट्रीफाइड टाइल्स (GVT), पॉलिश्ड विट्रीफाइड टाइल्स (PVT) और सेरामिक टाइल्स हैं। इसका फोकस प्रीमियम, टेक-ड्रिवेन टाइल्स पर बढ़ा है और वित्त वर्ष 2026 के रेवेन्यू में जीवीटी और टेक्निकल टाइल्स की हिस्सेदारी लगभग 84% थी।

कंपनी सिर्फ बाहर से टाइल्स खरीदकर नहीं बेच रही है बल्कि इसका बड़ा हिस्सा खुद यह बनाती है। इसके पास आठ मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज हैं, जिसकी वित्त वर्ष 2026 के रेवेन्यू में 81.72% हिस्सेदारी है। कंपनी ने इनोवेटिव और प्रीमियम टाइल्स को लेकर इटली की SACMI के साथ तकनीकी साझेदारी की है और IST (इंटीग्रेटेड स्टोन टेक्नोलॉजी) को अपनाया है। इसके डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क में 305 एक्स्लूसिव ब्रांड आउटलेट्स और 2758 मल्टी-ब्रांड आउटलेट्स हैं। यह भारत के साथ-साथ विदेशी में भी बिक्री करती है और बिल्डर्स, कॉन्ट्रैक्टर्स और डेवलपर्स को बी2बी सेल्स करती है। साथ ही यह सरकारी संस्थाओं को भी अपने माल बेचती है।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो वित्त वर्ष 2024 में ₹44.94 करोड़ और वित्त वर्ष 2025 में ₹30.77 करोड़ से इसका शुद्ध मुनाफा वित्त वर्ष 2026 में ₹55.09 करोड़ पर पहुंच गया। हालांकि इस दौरान कंपनी की टोटल इनकम लगातार बढ़ी और सालाना 3% की रफ्तार यानी सीएजीआर से बढ़कर ₹1,562.53 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹357.95 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹765.70 करोड़ पड़े थे।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SRIT India IPO: 25% के पार पहुंचा GMP, 28 सितंबर को खुलेगा इश्यू; जानिए हर एक डिटेल

SRIT India IPO: डिजिटल सॉल्यूशन देने वाली SRIT India का आईपीओ 28 सितंबर से खुलने वाला है। कंपनी का इश्यू से ₹218.40 जुटाने का प्लान है। इसका ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी GMP बढ़कर 25% के पार पहुंच गया है।

IPO कब खुलेगा?

बेंगलुरु की IT सॉल्यूशन कंपनी SRIT India का IPO 28 सितंबर को खुलेगा। निवेशकों के पास 30 सितंबर तक आवेदन करने का मौका रहेगा। प्राइस बैंड 123 से 130 रुपये प्रति शेयर रखा गया है। इसकी 6 अक्टूबर को बाजार में लिस्टिंग हो सकती है।

IPO के बाद कंपनी में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी घट जाएगी। अभी प्रमोटर्स के पास 84.74% हिस्सेदारी है। IPO के बाद यह 62.59% रह जाएगी।

GMP से कितने मुनाफे का संकेत?

Investorgain के मुताबिक, SRIT India का GMP 33 रुपये है। यह अपर प्राइस बैंड 130 रुपये से करीब 25.38% ज्यादा है। हालांकि, GMP ग्रे मार्केट का संकेत है। यह लिस्टिंग पर मिलने वाले रिटर्न की गारंटी नहीं है।

कंपनी क्या करती है?

SRIT India डिजिटल सॉल्यूशन और सिस्टम ऑटोमेशन का काम करती है। कंपनी कस्टम एप्लीकेशन बनाती है। साथ ही अलग-अलग सिस्टम को इंटीग्रेट करने की सर्विस भी देती है।

कंपनी सरकारी संस्थाओं और एंटरप्राइज के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करती है। इसका कारोबार भारत के अलावा कुछ विदेशी बाजारों में भी है।

AI पर भी फोकस

SRIT India अपने मुख्य बिजनेस में AI बेस्ड सॉल्यूशन जोड़ रही है। इसका मकसद AI से जुड़ी अपनी क्षमता बढ़ाना है।

SRIT India ने बड़े और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट भी लागू किए हैं। कंपनी डिजिटल प्लेटफॉर्म को डिजाइन करने से लेकर उसे चलाने तक का काम करती है।

IPO के पैसे का क्या होगा?

IPO से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल कई कामों में किया जाएगा। कंपनी मौजूदा प्रोडक्ट्स को आधुनिक बनाने और उनके दोबारा विकास पर पैसा लगाएगी।

इसके अलावा वर्किंग कैपिटल की जरूरत पूरी की जाएगी। कंपनी अधिग्रहण के जरिए कारोबार बढ़ाने और दूसरी रणनीतिक योजनाओं पर भी पैसा खर्च करेगी। कुछ रकम सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों के लिए रखी जाएगी।

सरकारी कारोबार से सबसे ज्यादा रेवेन्यू

SRIT India के कारोबार में सरकारी सेगमेंट की बड़ी हिस्सेदारी है। मार्च 2026 को खत्म वित्त वर्ष में कंपनी का रेवेन्यू 450 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले यह 389.3 करोड़ रुपये था। यानी रेवेन्यू में 15.6% की बढ़ोतरी हुई।

कंपनी के कुल रेवेन्यू में सरकारी कारोबार की हिस्सेदारी 89.41% रही। वहीं एंटरप्राइज सेगमेंट से 10.59% रेवेन्यू आया।

किन कंपनियों से मुकाबला?

SRIT India की तुलना Allied Digital Services, Aurionpro Solutions, Mastek और Protean eGov Technologies जैसी लिस्टेड कंपनियों से की जाती है।

इस IPO के बुक रनिंग लीड मैनेजर Choice Capital Advisors Private Limited हैं। KFin Technologies Limited इश्यू की रजिस्ट्रार है।

लंबी और मध्यम अवधि के लिहाज से यह शेयरों में निवेश का शानदार मौका, एक्सपर्ट ने बताई इसकी खास वजह

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

UPI के चार्जेज पर NSE के सीईओ का बड़ा बयान, ब्रोकर और उनके क्लाइंट्स के बीच का मामला

NSE on UPI Charges: देश के सबसे बड़े एक्सचेंज एनएसई के एमडी और सीईओ आशीष चौहान का कहना है कि यूपीआई पेमेंट्स पर नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर सरकार से कोई बातचीत नहीं हुई है। उनका कहना है कि यह मामला ब्रोकर्स और उनके क्लाइंट्स के बीच का है और इस बात की संभावना है कि वे इसका हल निकाल लेंगे। उन्होंने ये बातें एनएसई की बीएसई पर लिस्टिंग के एक दिन बाद पत्रकारों से बातचीत में कही। एनएसई के ₹1785 के शेयर ₹22,562 करोड़ के आईपीओ को 5 गुना से अधिक सब्सक्रिप्शन मिलने के बाद 24 सितंबर को 1% से कम प्रीमियम पर लिस्ट हुए थे।

UPI MDR पर क्या कहा NSE के सीईओ ने?

एनएसई के सीईओ आशीष चौहान ने कहा कि यूपीआई से जुड़े एमडीआर पर सरकार के साथ कोई चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने आगे कहा कि यह NPCI (नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) का फैसला है और अब हमें इंतजार करना होगा और देखना होगा। उन्होंने आगे कहा कि यह ब्रोकर और क्लाइंट के बीच का मामला लगता है और जो भी दिक्कत होगी, वे उसका कोई न कोई समाधान निकाल लेंगे।

बता दें कि एनपीसीआई ने यूपीआई ट्रांजैक्शन के लिए एक नया एमडीआर फ्रेमवर्क पेश किया है। इसके तहत कैपिटल-मार्केट ट्रांजैक्शन यानी कि स्टॉकब्रोकर, सिक्योरिटीज और म्यूचुअल फंड से जुड़े पेमेंट पर 0.02% का MDR लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति ट्रांजैक्शन ₹300 तय की गई है। नए चार्ज 15 अक्टूबर से लागू होंगे।

ब्रोडर लेवल पर बात करें तो यूपीआई फ्रेमवर्क में ₹2000 से अधिक के खास P2M (पर्सन-टू-मर्चेंट) ट्रांजैक्शन पर 0.4% एमडीआर का प्रावधान है, जबकि ₹2,000 तक के मर्चेंट यूपीआई पेमेंट और छोटे कारोबारियों के लिए जीरो-एमडीआर फ्रेमवर्क के तहत आने वाले ट्रांजैक्शन पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। वित्त मंत्रालय का कहना है कि लगभग 96% P2M ट्राजैक्शन पर कोई असर नहीं पड़ेगा और ग्राहकों से एमडीआर हीं लिया जाएगा।

NSE IPO Listing: कैसा था स्टॉक मार्केट में शेयरों का पहला दिन

एनएसई की लिस्टिंग का लंबे समय से इंतजार हो रहा था और अब जाकर यह 24 सितंबर को लिस्ट हुआ। इसका इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल का था और 5 गुना से अधिक भरने के बाद शेयरों ने आईपीओ निवेशकों को 1% से कम लिस्टिंग गेन दिया। हालांकि फिर इसने उड़ना भरने की कोशिश की। इसका ₹1785 का शेयर बीएसई पर ₹1800 के भाव पर लिस्ट होने के बाद ₹1878 की ऊंचाई तक पहुंचे थे यानी कि आईपीओ निवेशक 5% से अधिक मुनाफे तक पहुंचे थे।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Kheria Autocomp IPO Listing: 3% का लिस्टिंग गेन, कंपनी बनाती है टाटा वेंडर पार्क में ऑटो पार्ट्स

Kheria Autocomp IPO Listing: तेल से चलने वाली और इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए प्लास्टिक पार्ट्स बनाने वाली खेरिया ऑटोकॉम्प शेयरों की आज NSE SME पर प्रीमियम एंट्री हुई। इसके आईपीओ को ओवरऑल करीब ढाई गुना बोली मिली थी। इसके आईपीओ के तहत ₹101 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज NSE SME पर इसकी ₹104.90 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 3.86% का लिस्टिंग गेन (Kheria Autocomp Listing Gain) मिला। हालांकि आईपीओ निवेशकों की खुशी थोड़ी ही देर में हल्की फीकी हो गई जब शेयर टूट गए। टूटकर यह ₹104.50 (Kheria Autocomp Share Price) पर आ गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 3.47% मुनाफे में हैं।

Kheria Autocomp IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

खेरिया ऑटोकॉम्प का ₹46 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 17-21 सितंबर तक खुला था। यह आईपीओ ओवरऑल 2.48 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 1.05 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 2.97 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 3.08 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 45,98,400 नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹39.96 करोड़ नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी लगाने, ₹1.43 करोड़ आम कॉरपोरेट उद्देश्यों और ₹5.06 करोड़ आईपीओ से जुड़े एक्सपेंसेज पर खर्च होंगे।

Kheria Autocomp के बारे में

खेरिया ऑटोकॉम्प गाड़ियों के पार्ट्स बनाती है। यह प्लास्टिक इंजेक्शन मोल्डिंग तकनीक के जरिए प्लास्टिक को ऑटोमोबाइल पार्ट्स बनाती है। हालांकि यह सीधे पैसेंजर गाड़ियां बनाने वाली कंपनियों को माल नहीं बेचती है यानी कि यह टियर-2 सप्लायर है। इसके प्रोडक्ट्स की बात करें तो यह केबिन ट्रिम, कार के बाहर इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक के पार्ट्स, बोनट के नीचे इंजन कंपार्टमेंट में लगने वाले कंपोनेंट्स, एसी और वेंटिलेशन सिस्टम के लिए प्लास्टिक डक्ट्स बनाती है तो अलग-अलग कंपोनेंट्स जोड़कर एक एसेंबली बनाती है। इसकी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी गुजरात में टाटा वेंडर पार्क में है। इस फैसिलिटी में 30 इंजेक्शन मोल्डिंग मशीन हैं, जिसकी क्षमता 120-1700 टन है।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना करीब 86% की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹11.42 करोड़ और टोटल इनकम करीब 39% के सीएजीआर से ₹120.30 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹35.03 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹28.27 करोड़ पड़े थे।

NSE IPO Listing: ₹1800 पर लिस्ट एनएसई का ₹1785 का शेयर, 1% से कम लिस्टिंग गेन

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

NSE IPO Listing: ₹1800 पर लिस्ट एनएसई का ₹1140 का शेयर, 1% से कम लिस्टिंग गेन

NSE IPO Listing: देश के सबसे बड़े एक्सचेंज एनएसई के शेयरों की आज BSE पर 1% से कम प्रीमियम पर एंट्री हुई। इसके आईपीओ को ओवरऑल 5 गुना से अधिक बोली मिली थी। आईपीओ के तहत ₹1140 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE पर इसकी ₹1800.00 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को महज 0.84% का लिस्टिंग गेन (Krystal Integrated Services Listing Gain) मिला। लिस्टिंग के बाद शेयर और ऊपर चढ़े। उछलकर यह ₹1827.95 (NSE Share Price) पर पहुंच गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 2.41% मुनाफे में हैं। एंप्लॉयीज अधिक फायदे में हैं क्योंकि उन्हें हर शेयर ₹108 के डिस्काउंट पर मिला है।

कैसा रिस्पांस मिला था NSE IPO को

एनएसई का ₹22,562 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 17-21 सितंबर तक खुला था। यह आईपीओ ओवरऑल 5.71 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 12.68 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 6.55 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 1.39 गुना और एंप्लॉयीज का हिस्सा 2.40 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत कोई नया शेयर नहीं जारी हुआ है बल्कि ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत ₹1 की फेस वैल्यू वाले 12,64,36,650 शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिके हैं। चूंकि कोई नया शेयर नहीं जारी हुआ है तो कंपनी को आईपीओ का पैसा नहीं मिला है बल्कि शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिला है।

NSE के बारे में

एनएसई देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है और दुनिया के सबसे बड़े मल्टी-एसेट एक्सचेंज प्लेटफॉर्म्स में शुमार है। इसकी शुरुआत साल 1992 में हुई थी। यह इक्विटी, डेरिवेटिव्स, करेंसी डेरिवेटिव्स, कमोडिटीज, डेट सिक्योरिटीज और म्यूचुअल फंड्स जैसे एसेट क्वास में ट्रेडिंग, क्लियरिंग, सेटलमेंट, लिस्टिंग, मार्केट डेटा, इंडेक्स सर्विसेज और रेगुलेटरी ओवरसाइट को लेकर एक इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम मुहैया कराती है।

एनएसई ने देश में लगातार कैश मार्केट टर्नओवर, इक्विटी डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग और करेंसी डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग में अपनी बादशाहत बरकरार रखी है। जून 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक इस पर 26.13 करोड़ से अधिक निवेशक रजिस्टर्ड हैं तो 12.9 करोड़ यूनिक इंवेस्टर्स और 1328 ट्रे़डिंग मेंबर्स हैं। इसके अलावा एनएसई पर 3005 कंपनियां लिस्टेड हैं जिनका जून 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक मार्केट कैप करीब ₹474 लाख करोड़ है। इसके अलावा मार्च 2026 के आखिरी में कैश मार्केट में टर्नओवर के हिसाब से एनएसई की हिस्सेदारी 99.79%, इक्विटी फ्यूचर्स में 74.71%, इक्विटी ऑप्शंस में 99.48% और एक्सचेंज-ट्रेडेड करेंसी ऑप्शंस में 100% हिस्सेदारी है। इसके अलावा एनएसई क्लियरिंग लिमिटेड की भी वित्त वर्ष 2026 में कैश मार्केट में 88.42%, इक्विटी डेरिवेटिव्स में 91.04% और एक्सचेंज-ट्रेडेड डेरिवेटिव्स में 74.09% हिस्सेदारी है।

एक्सचेंज के वित्तीय सेहत की बात करें तो वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 11% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹10,302.06 करोड़ पर पहुंच गया। हालांकि इस दौरान टोटल इनकम में उठा-पटक दिखी और वित्त वर्ष 2024 में ₹16,352.06 करोड़ और वित्त वर्ष 2025 में ₹19,176.83 करोड़ से यह वित्त वर्ष 2026 में ₹18,713.37 करोड़ पर आ गया। चालू वित्त वर्ष 2027 की बात करें तो जून 2026 तिमाही में इसे ₹3,120.08 करोड़ का शुद्ध मुनाफा और ₹5,252.17 करोड़ का टोटल इनकम हासिल हुआ था। जून 2026 तिमाही के आखिरी में एक्सचेंज के रिजर्व और सरप्लस में ₹34,996.73 करोड़ पड़े थे।

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Hero Motors Share Price: कमजोर लिस्टिंग के बाद रॉकेट बने शेयर, खरीदें, बेचें या होल्ड करें?

 Hero Motors Share Price: हीरो मोटर्स के शेयर 23 सितंबर को कमजोरी के साथ लिस्ट हुए। उसके बाद शेयर में जबर्दस्त तेजी दिखी। 11:45 बजे शेयर का प्राइस एनएसई पर 17.14 फीसदी चढ़कर 98.40 रुपये पर चल रहा था। कंपनी ने आईपीओ में इनवेस्टर्स को प्रति शेयर 84 रुपये की कीमत पर शेयर इश्यू किए थे। लेकिन, शेयर की लिस्टिंग 2.38 फीसदी डिस्काउंट के साथ 82 रुपये पर हुई।

लिस्टिंग जीएमपी के संकेतों के मुताबिक

23 सितंबर को Hero Motors के शेयर की लिस्टिंग जीएमपी के संकेतों के मुताबिक रही। जीएमपी से इस शेयर के इश्यू प्राइस से कम कीमत पर लिस्टिंग के संकेत मिल रहे थे। कंपनी के आईपीओ में इनवेस्टर्स ने अच्छी दिलचस्पी दिखाई थी। कंपनी ने 79-84 रुपये प्राइस बैंड तय किया था। 1000 करोड़ रुपये के आईपीओ में ऑफर फॉर सेल (OFS) भी शामिल था।

शेयर में रॉकेट जैसी तेजी से इनवेस्टर्स दुविधा में

लिस्टिंग के बाद हीरो मोटर्स के शेयरों में आई तेजी ने इनवेस्टर्स को दुविधा में डाल दिया है। सवाल है कि क्या नए निवेशकों को यह शेयर सेकेंडरी मार्केट से खरीदना चाहिए, जिन निवेशकों को शेयर एलॉट हुए हैं, उन्हें इसे रखना चाहिए या प्रॉफिट बुक कर लेना चाहिए?

कंपनी का पावरट्रेन पोर्टफोलियो काफी डायवर्सिफायड

कांतिलाल छगनलाल सिक्योरिटीज के महेश एम ओझा का कहना है कि हीरो मोटर्स का पावरट्रेन पोर्टफोलियो काफी डायवर्सिफायड है। कंपनी टेक्नोलॉजी के मामले में भी स्ट्रॉन्ग है। इस वजह से ऑटोमोटिव सेक्टर में इसकी स्थिति काफी मजबूत है। उन्होंने कहा कि इन-हाउस इंजीनियरिंग कपैसिटी अच्छी है। दुनिया की कई बड़ी कंपनियां इसकी क्लाइंट्स हैं।

ज्यादा वैल्यूएशन चिंता की बड़ी वजह 

उन्होंने कहा कि कंपनी की मौजूदगी सीवीटी हब, ईवी ट्रांसमिशंस, इलेक्ट्रिक मोटर्स जैसे सेगमेंट्स में है। इस वजह से कंपनी की स्थिति काफी स्ट्रॉन्ग है। खासकर प्रीमियम आईसीई और ई-बाइक पावरट्रेन मार्केट्स में यह काफी मजबूत स्थिति में है। लेकिन, वैल्यूएशन चिंता की वजह है। आईपीओ से पहले शेयर की वैल्यूएशन FY26 की अर्निंग्स की करीब 74 गुना थी। इस सेगमेंट की दूसरी कंपनियों का औसत पीई करीब 50.2 गुना है। इससे कंपनी के शेयर में ज्यादा तेजी की उम्मीद नहीं दिखती।

इनवेस्टर्स शेयर में प्रॉफिट बुक सकते हैं

ओझा का मानना है कि क्लाइंट्स के मामले में कंसंट्रेशन रिस्क दिख रहा है। कंपनी की कुल रेवेन्यू में टॉप 10 क्लाइंट्स की करीब 73-78 फीसदी हिस्सेदारी है। उन्होंने कहा कि जिन इनवेस्टर्स को आईपीओ में शेयर इश्यू हुए हैं, वे प्रॉफिट बुक कर सकते हैं। नए निवेशकों को इस शेयर में निवेश करने के लिए प्राइस कसे मामले में सही एंट्री लेवल का इंतजार करना चाहिए।

नए निवेशकों को सही एंट्री प्वाइंट का इंतजार करना चाहिए

स्वस्तिका इनवेस्टमार्ट में हेड ऑफ वेल्थ शिवानी नयाती का भी मानना है कि शेयर की वैल्यूएशन अर्निंग्स की करीब 69-74 गुनी है, जो इस सेक्टर की दूसरी कंपनियों की वैल्यूएशन के मुकाबले काफी ज्यादा है। हालांकि, RoNW बढ़कर 8.53 फीसदी हो गया है लेकिन EBITDA मार्जिन करीब 10.2 फीसदी है, जो प्रतिद्वंद्वी कंपनियों से कम है।

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शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक हरे निशान में 

उन्होंने कहा कि नए इनवेस्टर्स इस शेयर में निवेश के लिए बेहतर प्राइस प्वाइंट का इंतजार कर सकते हैं। जिन निवेशकों को आईपीओ में Hero Motors के शेयर एलॉट हुए हैं, वे 75-77 रुपये पर स्टॉपलॉस के साथ इस शेयर को होल्ड यानी अपने पास बनाए रख सकते हैं। 23 सितंबर को शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में रिकवरी देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान में थे।

Hero Motors IPO Listing: 2% डिस्काउंट पर लिस्ट ₹84 का शेयर, हीरो मोटर्स ने आईपीओ निवेशकों को किया निराश

Hero Motors IPO Listing: ऑटो कंपोनेंट्स और एडवांस्ड मोबिलिटी मैन्युफैक्चरर हीरो मोटर्स के शेयरों की आज घरेलू मार्केट में डिस्काउंट पर एंट्री हुई। इसके आईपीओ को ओवरऑल 7 गुना बोली मिली थी। आईपीओ के तहत ₹84 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE पर इसकी ₹82.10 और NSE पर ₹82.00 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को कोई लिस्टिंग गेन नहीं मिला, बल्कि 2% से अधिक पूंजी ही घट गई। लिस्टिंग के बाद शेयरों ने रिकवरी की कोशिश की। उछलकर BSE पर यह ₹83.82 (Hero Motors Share Price) पर पहुंच गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 0.21% घाटे में हैं।

Hero Motors IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

हीरो मोटर्स का ₹1000 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 16-18 सितंबर तक खुला था। यह आईपीओ ओवरऑल 7.01 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 7.32 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 10.47 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 8.62 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹600 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा ₹10 की फेस वैल्यू वाले ₹400 करोड़ के4,76,19,047 शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिके हैं। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले प्रमोटर्स- ओपी मुंजाल होल्डिंग्स और हीरो साइकिल्स को मिला है। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹190.00 करोड़ कर्ज हल्का करने, ₹200.00 करोड़ इक्विपमेंट्स की खरीदारी, ₹171.99 करोड़ अधिग्रहण और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों और ₹60.25 करोड़ आईपीओ से जुड़े एक्सपेंसेज पर खर्च होंगे।

Hero Motors के बारे में

हीरो मोटर्स एक ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी कंपनी है। यह भारत के साथ-साथ अमेरिका, यूरोप और एशियन की गाड़ी कंपनियों के लिए पावरट्रेन सॉल्यूशंस तैयार कर मुहैया कराती है। यह दोपहिया से लेकर ई-बाइक, पैसेंजर और कमर्शियल गाड़ियां, ऑफ-रोड वेईकल्स और ईवीटोल्स के लिए सर्विसेज देती है। इसकी ग्राहक बीएमडब्ल्यू एजी, डुकाटी मोटर होल्डिंग, और हमिंगबर्डईवी जैसी दिग्गज कंपनियां हैं।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 55% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹41.17 करोड़ और टोटल इनकम 6% के सीएजीआर से ₹1,216.74 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹400.79 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹116.32 करोड़ पड़े थे।

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Vama Wovenfab IPO Listing: ₹341 का शेयर लिस्ट होते ही लोअर सर्किट पर, लेकिन सेहत हो रही रॉकेट की स्पीड से मजबूत

Vama Wovenfab IPO Listing: कंपनियों की जरूरतों के मुताबिक प्लास्टिक के बैग बनाने वाले वामा वुवनफैब के शेयरों की आज BSE SME पर फ्लैट एंट्री हुई। इसके आईपीओ को ओवरऑल ढाई गुना से अधिक बोली मिली थी। आईपीओ के तहत ₹341 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE SME पर इसकी ₹341.00 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को कोई लिस्टिंग गेन नहीं मिला। आईपीओ निवेशकों को और झटका तब लगा, जब शेयर फिसल गए। टूटकर यह ₹323.95 (Vama Wovenfab Share Price) के लोअर सर्किट पर आ गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 5.00% घाटे में हैं।

Vama Wovenfab IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

वामा वुवनफैब का ₹50 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 15-17 सितंबर तक खुला था। यह आईपीओ ओवरऑल 2.53 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 1.00 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 1.56 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 2.80 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 14,52,800 नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹1.36 करोड़ शेड बनाने, ₹7.25 करोड़ मशीनरी की खरीदारी, ₹26.50 करोड़ वर्किंग कैपिटल की जरूरतों, ₹7.00 करोड़ आम कॉरपोरेट उद्देश्यों और ₹7.43 करोड़ आईपीओ से जुड़े एक्सपेंसेज पर खर्च होंगे।

Vama Wovenfab के बारे में

वामा वुवनफैब मुख्य रूप से प्लास्टिक के मजबूत वुवन बैग और पैकेजिंग मैटेरियल बनाती है। यह पीपी (पॉलीप्रोपिलीन) और HDPE प्लास्टिक से बने इंडस्ट्रियल पैकेजिंग बैग बनाती है, जिनका इस्तेमाल एग्रीकल्चर, फूड प्रोसेसिंग, केमिकल्स, फर्टिलाइजर्स, शुगर और सीमेंट इंडस्ट्री में होता है। यह कंपनियों की जरूरतों के हिसाब से ये बैग तैयार करती है। इसकी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी दमन में है।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 109% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹11.55 करोड़ और टोटल इनकम 177% से अधिक के सीएजीआर से ₹214.62 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹25.44 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹ 24.96 करोड़ पड़े थे।

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

12 दिन में सिर्फ 2 दिन शेयर ग्रीन, IPO निवेशकों का पैसा हुआ आधा, इस कारण भारी दबाव

Annu Projects Share Price: टेलीकॉम सेक्टर से लेकर गैस पाइपलाइन के लिए EPC कंपनी अन्नू प्रोजेक्ट्स के शेयरों ने निवेशकों को ऐसा झटका दिया कि आईपीओ निवेशक अब भी मुनाफे के लिए तरस रहे। लिस्टिंग से लेकर अब तक महज 12 कारोबारी दिन हुए हैं और इनमें 8 कारोबारी दिन तो यह 5% के लोअर सर्किट पर बंद हुआ। सिर्फ यही नहीं रिकॉर्ड निचले स्तर से रिकवरी के बावजूद अब भी आईपीओ निवेशक 49% घाटे में हैं। लिस्टिंग के ही दिन इसने कमजोरी दिखाना शुरू कर दिया। एक अहम बात और है कि ग्रे मार्केट से इसकी कमजोर लिस्टिंग के संकेत मिल तो रहे थे लेकिन स्थिति इतनी बुरी होगी, इसका अंदाजा नहीं था।

ग्रे मार्केट में इसकी जीएमपी आईपीओ प्राइस से 7% प्रीमियम से 7% डिस्काउंट तक आई थी और मार्केट में इसकी 27% तक डिस्काउंट पर एंट्री हुई थी। इसके शेयर आईपीओ निवेशकों को ₹99 के भाव पर जारी हुए थे। अभी की बात करें तो 18 सितंबर को बीएसई पर यह 2.48% की बढ़त के साथ ₹50.48 के भाव पर बंद हुआ था। अब इसकी सर्किट लिमिट 20% है।

अब तक कैसा रहा शेयरों का सफर

अन्नू प्रोजेक्ट्स के शेयर आईपीओ निवेशकों को ₹99 के भाव पर जारी हुए थे। लिस्टिंग के दिन यानी 2 सितंबर को बीएसई पर इसकी ₹75 पर एंट्री हुई। भारी डिस्काउंट पर एंट्री के बाद शेयरों ने संभलने की कोशिश की थी और उछलकर यह ₹₹78.74 के अपर सर्किट तक पहुंचा था लेकिन फिर पहले ही दिन से मुनाफावसूली का जो दौर शुरू हुआ, उसने तीन हफ्ते से भी कम समय में आईपीओ निवेशकों की पूंजी आधी से भी कम कर दी। 17 सितंबर को बीएसई पर यह ₹46.56 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया था जोकि आईपीओ प्राइस से 52.97% डाउनसाइड है। 12 कारोबारी दिनों में यह सिर्फ दो दिन 10 सितंबर और 18 सितंबर को ग्रीन जोन में बंद हुआ तो 8 दिन लोअर सर्किट पर।

सेहत कैसी है?

अन्नू प्रोजेक्ट्स के शेयरों में बिकवाली का यह दबाव तो तब है, जब इसकी वित्तीय सेहत कागजों में काफी मजबूत दिख रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना करीब 38% की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹33.03 करोड़ और टोटल इनकम 25% से अधिक के सीएजीआर से ₹244.59 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹52.54 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹107.45 करोड़ पड़े थे। प्रमोटर्स के होल्डिंग की बात करें तो लिस्टिंग के बाद यह 89.11% से घटकर 65.05% पर आ गई है।

क्यों दिख रहा दबाव

अन्नू प्रोजेक्ट्स के शेयरों पर दबाव की एक वजह तो जियो-पॉलिटिकल टेंशन रही। 2 सितंबर से अब तक निफ्टी 50 करीब 3% कमजोर हुआ है और 12 कारोबारी दिनों में यह 5 ही दिन ग्रीन रहा।

अन्नू प्रोजेक्ट्स के शेयरों पर कुछ ही सेक्टर्स और ग्राहकों पर इसके कारोबार की अधिक निर्भरता ने भी दबाव डाला। कंपनी के रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 में इसका 94.17% रेवेन्यू टेलीकॉम और सीवरेज इंफ्रा से आया जबकि गैस पाइपलाइन से महज 4.03% ही रेवेन्यू आया। इसके अलावा वित्त वर्ष 2026 में 97.96% रेवेन्यू इसे टॉप-10 क्लाइंट्स से मिला।

वित्त वर्ष 2026 के आंकड़ों के हिसाब से इसके कारोबार में बिहार, गोवा और पश्चिम बंगाल की 64% से अधिक हिस्सेदारी है, जिसमें से अकेले बिहार में ही इसका 32% से अधिक कारोबार है।

एक और अहम झटका ऑपरेटिंग एक्टिविटीज से नेट कैश फ्लो का निगेटिव होना है।

वित्त वर्ष 2026 में इसके टॉप-टेन सप्लायर्स की कुल सप्लाई में हिस्सेदारी 67.92% थी।

कंपनी के सामने एक और बड़ा रिस्क ऑपरेशनल रेवेन्यू की तुलना में ट्रेड रिसीवेबल्स डेज की बढ़ती संख्या है यानी कि कंपनी को ग्राहकों से अफना पैसा वसूलने में लगने वाला समय लगातार बढ़ रहा है जोकि वित्त वर्ष 2024 में 138 दिन और वित्त वर्ष 2025 में 163 दिनों से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 237 दिनों पर पहुंच गया।

आगे किस बात पर रहेगी नजर

अन्नू प्रोजेक्ट्स के शेयरों ने आईपीओ प्राइस के मुकाबले आधे से अधिक टूटने के बाद निचले स्तर से वापसी की है। अब इसकी चाल आगे कैसी रही, यह मार्केट सेंटिमेंट के अलावा इस बात पर भी निर्भर करेगा कि जून 2026 तिमाही में इसकी कारोबारी सेहत कैसी रही। कंपनी ने 18 सितंबर को एक्सचेंज फाइलिंग में जानकारी दी कि 23 सितंबर को इसके बोर्ड की बैठक में जून तिमाही के कारोबारी नतीजे पर चर्चा होगी यानी 23 सितंबर को इसका जून 2026 तिमाही का रिजल्ट आ सकता है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Veegaland Developers IPO Listing: 10% तक बढ़त में शुरुआत, फिर आई 5% गिरावट; लगा लोअर सर्किट

रियल एस्टेट डेवलपर वीगालैंड डेवलपर्स की 18 सितंबर को शेयर बाजार में शुरुआत तो अच्छी हुई लेकिन यह बरकरार नहीं रह सकी। शेयर तुरंत ही लाल निशान में आ गया। कंपनी का शेयर BSE पर लगभग 8 प्रतिशत बढ़त के साथ 151 रुपये और NSE पर 10 प्रतिशत बढ़त के साथ 154 रुपये पर लिस्ट हुआ। उसके बाद शेयर में 5 प्रतिशत की गिरावट आई और BSE पर 143.45 रुपये और NSE पर 146.30 रुपये पर लोअर सर्किट लगा।

कंपनी का पब्लिक इश्यू 210 करोड़ रुपये का था। IPO के लिए फाइनल इश्यू प्राइस 140 रुपये था। यह 14.60 गुना भरा था। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 19.13 गुना, रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 9.95 गुना और नॉन इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 19.41 गुना सब्सक्राइब हुआ था।

वीगालैंड डेवलपर्स ‘वीगालैंड होम्स’ ब्रांड नेम के तहत काम करती है। वीगालैंड डेवलपर्स एक रियल एस्टेट डेवलपमेंट कंपनी है, जो केरल में मल्टी-स्टोरी रेजिडेंशियल अपार्टमेंट प्रोजेक्ट्स की प्लानिंग, डेवलपमेंट और बिक्री में लगी हुई है। यह मिड-प्रीमियम, प्रीमियम, अल्ट्रा-प्रीमियम, लक्जरी और अल्ट्रा-लग्जरी रेजिडेंशियल सेगमेंट को कवर करती है। यह कंपनी वी-गार्ड ग्रुप का हिस्सा है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।