भारत ने UNSC में पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद ने दोनों देशों के बीच सहयोग का आधार खत्म कर दिया है। भारत ने स्पष्ट किया कि आपसी विश्वास और सद्भावना के बिना सिंधु जल संधि के तहत सहयोग की उम्मीद नहीं की जा सकती। प्राकृतिक संसाधन शासन पर UNSC की हाई-लेवल ओपन डिबेट में पाकिस्तान के बयान का जवाब देते हुए राजदूत हरीश पारवतननेनी ने कहा कि पाकिस्तान ने इस मंच का इस्तेमाल “झूठा नैरेटिव” फैलाने के लिए किया। उन्होंने कहा कि भारत का सिंधु जल संधि पर रुख स्पष्ट और लगातार एक जैसा रहा है। सीमा पार आतंकवाद को राज्य की नीति के साधन के रूप में इस्तेमाल किए जाने के बीच आपसी विश्वास और सद्भावना के आधार पर सहयोग की उम्मीद नहीं की जा सकती। भारत ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और रहेगा। राजदूत ने कहा कि पाकिस्तान इस संवैधानिक और कानूनी वास्तविकता को जानबूझकर नजरअंदाज करता है। भारत ने यह भी कहा कि वह मानवीय आधार पर पाकिस्तान को बाढ़ की चेतावनी देता रहेगा और अपने हिस्से के जल संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के लिए जलविद्युत परियोजनाओं को तेज करेगा। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… फ्रांस में 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन: ऐसा करने वाला पहला EU देश फ्रांस की संसद ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने वाला बिल पास कर दिया है। इसके साथ ही फ्रांस ऐसा कानून बनाने वाला EU का पहला देश बन गया है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बिल का समर्थन किया है और इसे सितंबर से लागू करने की तैयारी है। कानून लागू कराने की जिम्मेदारी डिजिटल रेगुलेटर Arcom की होगी। हालांकि, बच्चों की उम्र की जांच कैसे होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। फ्रांस के बाद ब्रिटेन, स्पेन, ग्रीस और डेनमार्क भी सोशल मीडिया के लिए न्यूनतम उम्र तय करने की तैयारी में हैं। फ्रांस के कई माता-पिता ने फैसले का स्वागत किया है, जबकि कुछ किशोरों को एजुकेशनल कंटेंट और दोस्तों से संपर्क प्रभावित होने की चिंता है। शिक्षा मंत्री और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी कहा है कि सिर्फ बैन काफी नहीं होगा, बच्चों को डिजिटल दुनिया के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में शिक्षित करना भी जरूरी है। चीन का ताइवान स्ट्रेट में 2 दिन का लाइव-फायर ड्रिल: फुजियान के पास समुद्री इलाके में सैन्य अभ्यास
चीन ने गुरुवार से ताइवान स्ट्रेट के कुछ हिस्सों में 2 दिन का लाइव-फायर सैन्य अभ्यास शुरू किया। यह ड्रिल दक्षिण-पूर्वी प्रांत फुजियान के तट के पास हो रही है। समुद्री अधिकारियों के नोटिस के मुताबिक, अभ्यास दोनों दिन सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक डोंगशान द्वीप के आसपास होगा। यह इलाका गुआंगदोंग प्रांत की सीमा के पास है। यह ड्रिल अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई बातचीत के एक दिन बाद शुरू हुई है। दोनों नेताओं के बीच ताइवान समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई थी। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान की सरकार चीन के इस दावे को खारिज करती है। इससे पहले दिसंबर में चीन ने ताइवान को चारों ओर से घेरकर अब तक का सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास किया था। यह अभ्यास अमेरिका की ओर से ताइवान के लिए 11.1 अरब डॉलर के रिकॉर्ड हथियार पैकेज की घोषणा के बाद हुआ था। उस समय चीन की ईस्टर्न थिएटर कमांड ने 10 घंटे के लाइव-फायर अभ्यास के दौरान ताइवान के उत्तर और दक्षिण में समुद्री इलाकों में रॉकेट दागे थे। अफ्रीका में बढ़ती गर्मी से ‘रेगिस्तान के जहाज’ भी बेहाल: हीट स्ट्रेस, पानी की कमी और बीमारियों से बढ़ रही मौतें
अफ्रीका में बढ़ते तापमान का असर अब रेगिस्तान के जहाज कहे जाने वाले ऊंटों पर भी पड़ रहा है। उत्तर-पूर्वी इथियोपिया के अफार क्षेत्र में ऊंट पालक अली उमेर के मुताबिक, तेज गर्मी से ऊंटों के पैरों में छाले पड़ रहे हैं, आंखों से पानी आ रहा है और गर्म रेत से उनकी चमड़ी और बाल प्रभावित हो रहे हैं। पिछले एक महीने में उन्होंने गर्मी के कारण ऊंट के 8 बच्चों को खो दिया। वैज्ञानिकों और पशु चिकित्सकों के मुताबिक, अत्यधिक गर्मी से ऊंटों में हीट स्ट्रेस, थकान, डिहाइड्रेशन और बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। पानी और वनस्पति की कमी के साथ छाया का घटता क्षेत्र भी स्थिति को गंभीर बना रहा है। पड़ोसी देश सोमालिया में सूखे के कारण ऊंटों की मौत का संकट गंभीर है। जून में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, करीब 46% ऊंट पालने वाले परिवारों में सूखे से ऊंटों की मौत हुई। उत्तरी सोमालिया के सूल क्षेत्र में यह दर करीब 73% तक पहुंच गई। उत्तर-पूर्वी केन्या में भी पशु चिकित्सकों ने ऊंटों में अत्यधिक गर्मी से होने वाली बीमारियों और मौतों में बढ़ोतरी दर्ज की है। एक पशु चिकित्सा अधिकारी के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में क्षेत्र में गर्मी के कारण ऊंटों की मौत 15% से ज्यादा बढ़ी है। गर्मी के तनाव से ऊंटों में दूध उत्पादन और प्रजनन क्षमता भी प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऊंट सामान्य तौर पर करीब 40 डिग्री सेल्सियस तक की गर्मी को शरीर के तापमान में बदलाव, कम पसीना और पानी की कम खपत जैसे तरीकों से सहन कर सकते हैं। लेकिन सहारा के कई हिस्सों में गर्मियों का तापमान अब अक्सर 50 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच रहा है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को धमकी दी कि अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में किसी जहाज पर हमला करता है, तो अमेरिका हर बार ईरान के किसी पुल या पावर प्लांट को निशाना बनाएगा। इसमें राजधानी तेहरान में मौजूद ठिकाने भी शामिल हो सकते हैं।
ट्रंप ने यह धमकी अपने ‘ट्रुथ सोशल’ पोस्ट के जरिए दी। इससे अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है, जो पहले से ही संघर्ष विराम टूटने और हाल ही में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद बढ़ा हुआ था। बता दें कि ट्रंप को बुधवार को ही इन सैनिकों के शव मिलने वाले थे।
ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा था, “अब से, जब भी ईरान ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में किसी जहाज पर मिसाइल, रॉकेट, ड्रोन या किसी अन्य हथियार से हमला करेगा, तो अमेरिका उसके एक पुल या पावर प्लांट पर बम गिराकर उसे नष्ट कर देगा।”
— Rapid Response 47 (@RapidResponse47) July 22, 2026
ट्रंप ने साफ तौर पर कहा कि इन लक्ष्यों में “तेहरान शहर के पास या उसके अंदर मौजूद ठिकाने” भी शामिल हैं।
गौरतलब है कि ट्रंप पहले भी ईरान के बिजली संयंत्रों, पानी की सुविधाओं और दूसरे बुनियादी ढांचों पर हमला करने की धमकी दे चुके हैं। जानकारों ने चेतावनी दी है कि ऐसे हमले अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकते हैं।
इससे पहले बुधवार को, सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो ने ईरान पर आरोप लगाया कि वह अमेरिका के साथ समझौता करने को लेकर “गंभीर” नहीं है, साथ ही उन्होंने दोहराया कि वॉशिंगटन मध्य पूर्व में “कूटनीति के लिए प्रतिबद्ध” है।
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने लगातार 11वीं रात ईरानी ठिकानों पर हमले किए हैं। अमेरिका का कहना है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से सुरक्षित और खुला करने की कोशिश कर रहा है। यह रास्ता वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और युद्ध के दौरान ईरान के लिए दबाव बनाने का एक बड़ा साधन बन गया है।
CENTCOM ने बताया कि उसने मिलिट्री ऑपरेशन सेंटर, ड्रोन स्टोर करने की जगहों और मिलिट्री लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले किए।
फिलीपींस में आसियान (ASEAN) विदेश मंत्रियों की बैठक में बोलते हुए, रुबियो ने कहा कि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच एक मुख्य विवाद यह है कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में ट्रैफिक को नियंत्रित करने का “अधिकार मांगता है”, जबकि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उसे यह अधिकार नहीं है।
रुबियो ने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर हम मध्य पूर्व में एक ऐसी मिसाल कायम करते हैं, जहां कोई राष्ट्र किसी अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर नियंत्रण करने, शुल्क वसूलने और भुगतान न करने पर आपके जहाजों को उड़ाने का फैसला कर सकता है, तो हमने एक बहुत ही खतरनाक मिसाल कायम कर दी है, जो दुनिया के अन्य हिस्सों में, इस क्षेत्र सहित, दोहराई जाएगी।”
रुबियो ने अप्रत्यक्ष रूप से चीन की ओर इशारा करते हुए कहा कि “दुनिया के सभी क्षेत्रों में से, यह वह क्षेत्र है जहां मुझे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में नौवहन की स्वतंत्रता के महत्व के बारे में सिखाने की आवश्यकता नहीं है।”
बाद में दिन में दिए गए अलग-अलग बयानों में, रुबियो ने कहा कि वाशिंगटन युद्ध को समाप्त करने के लिए बातचीत करने को तैयार है।
उन्होंने कहा, “अमेरिका कूटनीतिक समझौते तक पहुंचना चाहता है। अगर ईरान के साथ ऐसा कोई समझौता संभव हो, जिसमें वह कहे कि हम अब आतंकवाद को समर्थन नहीं देंगे और परमाणु हथियार या उसे बनाने के लिए जरूरी चीजों को आगे नहीं बढ़ाएंगे, तो अमेरिका इसके लिए तैयार है।”
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि “फिलहाल वे डील करने को लेकर गंभीर नहीं लगते।” उन्होंने आगे कहा कि तेहरान ने पिछले महीने हुए समझौते (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) में कुछ वादे किए थे, “और दो हफ्ते के अंदर ही उन्हें तोड़ दिया।”
अमेरिकी नौसेना ने पहले भी साउथ चाइना सी में विवादित द्वीपों के आस-पास “फ्रीडम ऑफ नेविगेशन” (आजादी से आवाजाही) ऑपरेशन चलाए हैं। इन द्वीपों पर चीन के साथ-साथ कई दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के भी दावे हैं, जबकि चीन अपनी “नाइन-डैश लाइन” के जरिए लगभग पूरे समुद्र पर अपना अधिकार बताता है।
यह सब ‘परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन’ के 2016 के उस फैसले के बावजूद हो रहा है, जिसमें कहा गया था कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत चीन के दावों का कोई आधार नहीं है। हालांकि, चीन ने इस फैसले को मानने से इनकार कर दिया है।
तेल की कीमतों में उछाल
बुधवार सुबह कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स (सितंबर डिलीवरी) 3.7% बढ़कर 94.33 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) फ्यूचर्स (सितंबर डिलीवरी) में 3.5% की तेजी आई और यह 87.28 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
बता दें कि अमेरिका और ईरान ने 17 जून को एक अंतरिम समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें सैन्य अभियानों को रोकने, होर्मुज को फिर से खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी शर्तों सहित एक स्थायी समझौते पर बातचीत के लिए 60 दिन का समय तय करने की बात कही गई थी। लेकिन इस दस्तावेज में होर्मुज के भविष्य के प्रबंधन का मुद्दा अनसुलझा ही रह गया।
ईरान ने इस बात का मतलब यह भी निकाला कि होर्मुज (स्ट्रेट) से गुजरने वाले ट्रैफिक को मैनेज करने में तेहरान की भूमिका है और शुरुआती 60 दिनों के बाद समुद्री सेवाओं के लिए शुल्क भी लिया जा सकता है, लेकिन अमेरिका का कहना था कि यह जलमार्ग बिना किसी अनिवार्य ईरानी शुल्क या प्रतिबंध के खुला रहना चाहिए।
ईरान और ओमान – जिनकी सीमाएं भी होर्मुज जलडमरूमध्य से लगती हैं – ने 23 जून को एक संयुक्त बयान में कहा कि “होर्मुज से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं में जलडमरूमध्य के दोनों तटीय देशों की संप्रभुता और संप्रभु अधिकारों का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए।”
France Social Media Ban: फ्रांस यूरोपीय संघ (EU) का पहला देश बन गया है, जिसने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन को मंजूरी दे दी है। इस कानून के तहत बच्चों को सोशल मीडिया इस्तेमाल करने के लिए माता-पिता की अनुमति जरूरी होगी। यह नियम इस साल सितंबर से चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा और जनवरी 2027 से पूरी तरह प्रभावी हो जाएगा।
दुनियाभर में सोशल मीडिया इस्तेमाल करने की उम्र सीमा क्या है? News18 की पूरी जानकारी
फ्रांस में सोशल मीडिया बैन
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के समर्थन से लागू किए जा रहे इस नियम के तहत, फ्रांस ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाने की तैयारी की है। इसे युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए डिजिटल दुनिया में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
इस बैन की खास संरचनात्मक, कानूनी और ऑपरेशनल डिटेल्स इस प्रकार हैं:
सितंबर 2026 (पहला चरण): सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को 15 साल से कम उम्र के बच्चों के नए अकाउंट बनाने पर रोक लगानी होगी। सभी नए रजिस्ट्रेशन पर अनिवार्य रूप से उम्र की पुष्टि (age-verification) करने वाले कंट्रोल लागू होंगे।
जनवरी 2027 (दूसरा चरण): यह पाबंदी पहले से मौजूद सभी अकाउंट्स पर भी लागू होगी। सोशल मीडिया कंपनियों को 15 साल से कम उम्र के यूजर्स के सभी एक्टिव अकाउंट्स को हटाना या पूरी तरह से सस्पेंड करना होगा।
TikTok, Instagram, Snapchat और YouTube पर सख्ती
TikTok, Instagram, Snapchat और YouTube जैसे प्लेटफॉर्म को उम्र की पुष्टि करने के लिए सख्त नियम लागू करने होंगे। इन टूल्स की जांच और मंजूरी फ्रांस के प्राइवेसी और डेटा रेगुलेटर द्वारा की जाएगी।
बता दें कि फ्रांस के डिजिटल मामलों का मंत्रालय उन कमर्शियल सोशल नेटवर्किंग सेवाओं की एक खास सूची बना रहा है जिन पर प्रतिबंध लागू होगा। इसमें ऐसे प्लेटफॉर्म पर ध्यान दिया जा रहा है जिनके एल्गोरिदम बहुत ज्यादा लत लगाने वाले हैं।
हालांकि, इस प्रतिबंध में साफ तौर पर नॉन-कमर्शियल डिजिटल रिसोर्स को शामिल नहीं किया गया है। 15 साल से कम उम्र के बच्चे अभी भी ऑनलाइन इनसाइक्लोपीडिया (जैसे Wikipedia), एजुकेशनल टूल्स और साइंटिफिक डायरेक्टरी का पूरा इस्तेमाल कर सकेंगे।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इन नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं, इसकी निगरानी और जांच की जिम्मेदारी फ्रांस के ऑडियोविजुअल और डिजिटल कम्युनिकेशन रेगुलेटर Arcom को दी जाएगी।
इस डिजिटल बैन के साथ-साथ, नए कानून में एक और बड़ा फैसला शामिल किया गया है। इसके तहत फ्रांस के सभी हाई स्कूलों में स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने की नीति तुरंत लागू की जाएगी।
क्यों लाया गया सोशल मीडिया बैन कानून?
यह कानूनी कदम फ्रांस की हेल्थ वॉचडॉग की एक विस्तृत रिपोर्ट के बाद उठाया गया है। इस रिपोर्ट में पता चला है कि 12 से 17 साल की उम्र के लगभग 90% बच्चे रोजाना स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं, और इनमें से आधे से ज्यादा बच्चे दिन में पांच घंटे तक ऑनलाइन बिताते हैं।
ऐसे में कई फ्रांसीसी परिवारों ने बड़ी टेक कंपनियों पर एल्गोरिदम के जरिए बच्चों को ज्यादा समय तक ऑनलाइन रखने, गंभीर मानसिक तनाव, डिप्रेशन और युवाओं में खुद को नुकसान पहुंचाने जैसी समस्याओं को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए मुकदम किए थे। साथ ही प्रोडक्ट की जवाबदेही को लेकर गंभीर चिंताएं भी जताई थीं। जिसके बाद संसद में इस कानून को तेजी से आगे बढ़ाया गया।
दुनियाभर में सोशल मीडिया इस्तेमाल की उम्र सीमा
ऑस्ट्रेलिया
न्यूनतम उम्र: 16 साल
दिसंबर 2024 में सख्त कानून पास किया गया। इसके तहत सोशल मीडिया कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म से 16 साल से कम उम्र के यूजर्स को हटाना होगा। नियमों का पालन नहीं करने पर कंपनियों पर 5 करोड़ ऑस्ट्रेलियन डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
यूनाइटेड किंगडम
न्यूनतम उम्र: 16 साल
देशभर में लागू होने वाला प्रतिबंध जनवरी 2027 से लागू किए जाने की योजना है।
फ्रांस
न्यूनतम उम्र: 15 साल
फ्रांस ने कानून पास कर दिया है। इसके तहत सितंबर 2026 से नए अकाउंट और जनवरी 2027 से पुराने अकाउंट भी इस नियम के दायरे में आएंगे।
स्पेन
न्यूनतम उम्र: 16 साल
16 साल से कम उम्र के लोगों की पहुंच सीमित करने के लिए सरकार ने प्रस्तावित प्रतिबंधों की घोषणा की है।
ग्रीस और डेनमार्क
न्यूनतम उम्र: 15 साल / स्थानीय नियमों के अनुसार अलग-अलग
इन देशों की सरकारों ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध जैसे नियम लागू करने की योजनाएं पेश की हैं।
यूरोपीय संघ (EU)
न्यूनतम उम्र: 13 से 16 साल
EU में सोशल मीडिया उम्र सीमा डिजिटल सर्विसेज एक्ट और GDPR जैसे नियमों के तहत तय होती है। हर देश डिजिटल उम्र की अपनी सीमा खुद तय करता है।
संयुक्त राज्य अमेरिका (USA)
न्यूनतम उम्र: 13 साल
यग COPPA (चिल्ड्रन्स ऑनलाइन प्राइवेसी प्रोटेक्शन एक्ट) कानून के तहत नियंत्रित। इसके अनुसार, 13 साल से कम उम्र के बच्चों का डेटा इकट्ठा करने के लिए माता-पिता की सहमति जरूरी है।

