Stocks to Buy: ये 10 स्टॉक्स दे सकते हैं 51% तक रिटर्न, एक्सपर्ट्स ने दी खरीदने की सलाह

Stocks to Buy: शेयर बाजार में गिरावट के बीच कई दिग्गज ब्रोकरेज हाउस चुनिंदा शेयरों पर बुलिश बने हुए हैं। Goldman Sachs, Jefferies, Citi, Motilal Oswal, JM Financial और CD Research ने 10 कंपनियों के शेयर खरीदने की सलाह दी है। इन स्टॉक्स में मौजूदा स्तर से 51% तक की तेजी की संभावना जताई गई है। आइए जानते हैं किन शेयरों पर एक्सपर्ट्स सबसे ज्यादा भरोसा जता रहे हैं।

Cohance Lifesciences

Goldman Sachs ने Cohance Lifesciences पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है और ₹500 का टारगेट दिया है। मौजूदा भाव से इसमें करीब 10% की तेजी की संभावना है। हालांकि, CDMO कारोबार की रफ्तार उम्मीद से धीमी रहने के चलते ब्रोकरेज ने FY27-29 के अनुमान घटाए हैं।

TCS

Motilal Oswal ने TCS पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखते हुए ₹2,350 का टारगेट दिया है। यह मौजूदा स्तर से करीब 15% का संभावित रिटर्न दिखाता है। ब्रोकरेज का मानना है कि दूसरी तिमाही पहली से बेहतर रह सकती है, लेकिन मांग में बड़ी तेजी के संकेत अभी साफ नहीं हैं।

Vedanta Aluminium

Motilal Oswal ने पहली बार Vedanta Aluminium पर कवरेज शुरू करते हुए ‘Buy’ रेटिंग और ₹540 का टारगेट दिया है। इससे शेयर में करीब 20% की तेजी की उम्मीद है। ब्रोकरेज का कहना है कि डीमर्जर के बाद कंपनी भारत की सबसे बड़ी प्योर-प्ले एल्युमिनियम कंपनी बन गई है।

PN Gadgil Jewellers

Motilal Oswal ने PN Gadgil Jewellers पर ‘Buy’ रेटिंग के साथ ₹700 का टारगेट दिया है। यह मौजूदा भाव से करीब 22% की बढ़त का संकेत देता है। पहली तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 41% बढ़ा, जबकि रिटेल कारोबार 56% उछला।

PB Fintech

Jefferies ने PB Fintech पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखते हुए ₹1,950 का टारगेट दिया है। इससे शेयर में करीब 23% की तेजी की संभावना है। ब्रोकरेज का मानना है कि हाल की गिरावट के बाद शेयर अपने मजबूत कमाई के अनुमान के मुकाबले सस्ता नजर आ रहा है।

Dr. Reddy’s Laboratories

JM Financial ने Dr. Reddy’s Laboratories पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है और ₹1,561 का टारगेट दिया है। यह मौजूदा स्तर से करीब 25% का संभावित तेजी दिखाता है। ब्रोकरेज का मानना है कि आने वाले वर्षों में नए प्रोडक्ट कंपनी की ग्रोथ को सहारा देंगे, हालांकि सेमाग्लूटाइड की सप्लाई में देरी हुई है।

Piramal Pharma

Goldman Sachs ने Piramal Pharma पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखते हुए ₹225 का टारगेट दिया है। इससे शेयर में करीब 27% की तेजी की उम्मीद है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी का टर्नअराउंड जारी है और आने वाले वर्षों में मुनाफे में अच्छी बढ़ोतरी हो सकती है।

Eternal

Motilal Oswal ने Eternal पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखते हुए ₹380 का टारगेट दिया है। मौजूदा भाव ₹290 के मुकाबले इसमें करीब 31% की तेजी की संभावना है। ब्रोकरेज का मानना है कि फूड डिलीवरी कारोबार में रिकवरी, क्विक कॉमर्स की तेज ग्रोथ और डिस्ट्रिक्ट बिजनेस के विस्तार से कंपनी की कमाई आने वाले समय में मजबूत रह सकती है।

Balaji Amines

CD Research ने Balaji Amines पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखते हुए ₹3,327 का टारगेट दिया है। मौजूदा भाव ₹2,409 के मुकाबले इसमें करीब 38% की तेजी की संभावना है। ब्रोकरेज का कहना है कि स्पेशियलिटी केमिकल्स की मांग, नए प्रोजेक्ट्स के शुरू होने और बेहतर मार्जिन से आने वाले समय में कंपनी की ग्रोथ मजबूत रह सकती है।

Kalyan Jewellers

Citi ने Kalyan Jewellers पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखते हुए ₹725 का टारगेट दिया है। यह मौजूदा भाव से करीब 51% का संभावित रिटर्न दिखाता है। पहली तिमाही में कंपनी की बिक्री 38% बढ़ी और नए स्टोर्स के विस्तार की रफ्तार भी बनी रही।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Metal Stocks : मेटल स्टॉक्स में गिरावट का डर, राकेश अरोड़ा बोले- अब तेजी आते ही करें मुनाफावसूली

Metal Stocks : अगर हाल के दिनों में मेटल शेयरों में तेजी देखकर आप खरीदारी का प्लान बना रहे हैं, तो थोड़ा रुक जाइए। GoIndiaStocks.com के फाउंडर राकेश अरोड़ा का मानना है कि मेटल स्टॉक्स के अच्छे दिन खत्म होने की कगार पर हैं। उनका कहना है कि फिलहाल मेटल शेयरों में नई खरीदारी करने के बजाय मुनाफा वसूलने पर विचार करना चाहिए।

उनके मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही (Q1FY27) के नतीजे मेटल कंपनियों के लिए अच्छे रह सकते हैं। लेकिन बाजार पहले ही इसकी उम्मीद लगा चुका है। यानी अच्छी खबर का असर काफी हद तक शेयरों की कीमतों में दिख चुका है। आने वाले महीनों में कमोडिटी की कीमतें नरम पड़ सकती हैं। ऐसे में कंपनियों की कमाई के अनुमान भी घटाए जा सकते हैं।

Q1 नतीजों से पहले आ सकती है थोड़ी तेजी

राकेश अरोड़ा का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में मेटल शेयर 20% से 30% तक टूटे थे। इसलिए मजबूत जून तिमाही नतीजों से पहले इनमें थोड़ी तेजी या रिकवरी देखने को मिल सकती है। हालांकि, उन्हें नहीं लगता कि ये शेयर इतनी जल्दी अपने पुराने हाई पर पहुंच जाएंगे।

एल्युमिनियम कंपनियों को लेकर सबसे ज्यादा चिंता

राकेश अरोड़ा की सबसे बड़ी चिंता एल्युमिनियम सेक्टर को लेकर है। उनका कहना है कि कई ब्रोकरेज और एनालिस्ट अब भी अपने अनुमान में एल्युमिनियम का भाव करीब 3,200 डॉलर प्रति टन मान रहे हैं। लेकिन उनकी राय इससे अलग है।

उन्हें लगता है कि मिडिल ईस्ट और इंडोनेशिया से नई सप्लाई आने वाली है। इससे बाजार में एल्युमिनियम की उपलब्धता बढ़ेगी। ऐसे में कीमत घटकर करीब 2,600 डॉलर प्रति टन तक आ सकती है। अगर ऐसा हुआ, तो एल्युमिनियम कंपनियों की कमाई के अनुमान घटाने पड़ेंगे। इसका सीधा असर शेयरों पर भी दिख सकता है।

स्टील सेक्टर पर भी बहुत भरोसा नहीं

राकेश अरोड़ा स्टील सेक्टर को लेकर भी ज्यादा उत्साहित नहीं हैं। उनका कहना है कि अप्रैल-जून तिमाही में स्टील कंपनियों के नतीजे अच्छे आ सकते हैं। Vedanta जैसी कंपनियां भी मजबूत प्रदर्शन कर सकती हैं। लेकिन स्टील की कीमतें अब अपना पीक देख चुकी हैं।

एक तरफ चीन से स्टील का निर्यात बढ़ रहा है। दूसरी तरफ भारत की कंपनियां तेजी से उत्पादन क्षमता बढ़ा रही हैं। इससे बाजार में सप्लाई ज्यादा हो सकती है। अगर सप्लाई बढ़ी, तो कंपनियों के मार्जिन पर दबाव आएगा।

इसी वजह से उनका मानना है कि स्टील शेयरों में अभी और गिरावट आ सकती है। हालांकि, वैल्यूएशन के लिहाज से ये एल्युमिनियम कंपनियों के मुकाबले सस्ते जरूर हैं।

वेदांता के आयरन और स्टील को लेकर क्या कहा?

हाल ही में Vedanta के डीमर्जर के बाद बने Vedanta Iron & Steel के कारोबार पर भी राकेश अरोड़ा ने अपनी राय रखी। उनका कहना है कि आयरन और स्टील कारोबार में होने वाले विस्तार का फायदा शेयर पहले ही कीमत में जोड़ चुका है। इसलिए यहां बहुत ज्यादा तेजी की गुंजाइश नहीं बची है।

वहीं, ग्रुप के ऑयल एंड गैस कारोबार में उन्हें कुछ वैल्यू नजर आती है। लेकिन, रेगुलेटरी चिंताओं की वजह से यह फिलहाल हाई-रिस्क निवेश है। यह वैल्यू ट्रैप भी साबित हो सकता है।

कॉपर सेक्टर पर भी दी चेतावनी

राकेश अरोड़ा मानते हैं कि लंबे समय में कॉपर की मांग अच्छी रह सकती है। लेकिन फिलहाल उन्हें कॉपर कंपनियों के शेयर महंगे लग रहे हैं।

उनका कहना है कि बाजार रिसाइकल्ड कॉपर की बढ़ती सप्लाई को गंभीरता से नहीं ले रहा। अगर रिसाइकल्ड कॉपर की उपलब्धता बढ़ती रही, तो कॉपर की कीमतों पर दबाव आ सकता है।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

राकेश अरोड़ा की सलाह है कि अगर मजबूत जून तिमाही नतीजों की वजह से मेटल शेयरों में तेजी आती है, तो उसे नई खरीदारी का संकेत मत मानिए। उनके मुताबिक, यह तेजी मुनाफावसूली का मौका हो सकती है।

हालांकि, उन्होंने एक बात और कही। अगर अमेरिकी डॉलर लगातार कमजोर होता है, तो वैश्विक कमोडिटी कीमतों को सहारा मिल सकता है। ऐसे में बेस मेटल्स का आउटलुक बेहतर हो सकता है। यही एक बड़ा फैक्टर है, जो उनके मौजूदा नजरिए को बदल सकता है।

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अब होटल की जरूरत नहीं पड़ेगी चलता-फिरता घर है ये ट्रैवलिंग वैन, घर जैसे सफर का ले पूरा मजा!

ट्रैवलिंग वैन आज के समय में घूमने का एक बहुत ही आरामदायक और पॉपुलर तरीका बन चुकी है। इसमें सफर के साथ-साथ रहने, खाने और आराम करने की पूरी सुविधा मिलती है। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन ऑप्शन है जो रोड ट्रिप और एडवेंचर पसंद करते हैं। ट्रैवलिंग वैन को जरूरत और बजट के हिसाब से अलग-अलग तरह से डिजाइन किया जाता है। आइए जानते हैं ट्रैवलिंग वैन के बारे में, जो आज के समय में घूमने का एक बहुत ही आरामदायक और नया तरीका बन चुकी है:

ट्रैवलिंग वैन क्या होती है

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ट्रैवलिंग वैन एक ऐसी गाड़ी होती है जिसे ट्रैवल करने और उसी में रहने दोनों के लिए डिजाइन किया जाता है। इसमें आप चलते-फिरते सफर भी करते हैं और उसी में सोने, खाने और आराम करने की फैसिलिटी मिलती है, इसलिए इसे “मोबाइल होम” भी कहा जाता है। यह लंबे रोड ट्रिप, फैमिली ट्रिप और एडवेंचर ट्रैवल के लिए एक बहुत ही आरामदायक ऑप्शन माना जाता है क्योंकि इसमें होटल की जरूरत नहीं पड़ती। भारत में इसे “ट्रैवलिंग वैन” या “हाउस ऑन व्हील्स” भी कहा जाता है। यह कॉन्सेप्ट पहले यूरोप और अमेरिका में काफी पॉपुलर था, लेकिन अब भारत में भी धीरे-धीरे इसका ट्रेंड बढ़ रहा है और लोग इसे लग्जरी रोड ट्रिप के लिए पसंद करने लगे हैं।

ट्रैवलिंग वैन की जरूरत

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ट्रैवलिंग वैन अलग-अलग प्रकार की होती हैं, जो जरूरत और बजट के हिसाब से बनाई जाती हैं। इनमें बेसिक कैम्पर वैन होती है जिसमें सिर्फ जरूरी फैसिलिटी जैसे बेड और छोटा किचन होता है, जबकि लग्जरी मोटरहोम पूरी तरह एक चलता-फिरता घर होता है जिसमें बेडरूम, किचन, बाथरूम, एसी और टीवी जैसी सुविधाएँ मिलती हैं। वहीं ऑफ-रोड कैम्पर वैन पहाड़ों और खराब रास्तों के लिए बनाई जाती है, और पॉप-अप रूफ वैन में छत ऊपर उठ जाती है जिससे अंदर खड़े होकर आराम किया जा सकता है। इसके अलावा मिनी कैम्पर वैन भी होती है जो छोटी होती है और कम लोगों के लिए उपयोग की जाती है।

कैसे बनाई जाती है

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ट्रैवलिंग वैन आमतौर पर बड़ी वैन या बस को पूरी तरह मॉडिफाई करके बनाई जाती है। पहले गाड़ी के अंदर का पूरा हिस्सा खाली किया जाता है, फिर उसमें मजबूत लेकिन हल्के मटेरियल जैसे लकड़ी, फाइबर, एल्युमिनियम और प्लास्टिक पैनल्स का इस्तेमाल करके नया इंटीरियर बनाया जाता है। इसके साथ इलेक्ट्रिकल सिस्टम, बैटरी बैकअप, सोलर पैनल, पानी की पाइपलाइन और वेंटिलेशन सिस्टम भी फिट किया जाता है ताकि यह पूरी तरह एक चलता-फिरता घर बन सके।

ट्रैवलिंग वैन का डिजाइन

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इसका डिजाइन बहुत स्मार्ट तरीके से किया जाता है ताकि कम जगह में ज्यादा फैसिलिटी मिल सकें। आगे ड्राइविंग केबिन होता है, बीच में मल्टीपर्पज़ एरिया होता है जिसे सोफा या बेड में बदला जा सकता है, और पीछे किचन या स्टोरेज बनाया जाता है। दीवारों और छत में इंसुलेशन लगाया जाता है ताकि गर्मी, ठंड और बारिश का असर अंदर न आए और सफर आरामदायक बना रहे।

किचन सेटअप

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किचन को बहुत कॉम्पैक्ट लेकिन पूरी तरह फंक्शनल बनाया जाता है। इसमें छोटा गैस स्टोव या इंडक्शन प्लेट, सिंक, मिनी फ्रिज, स्टोरेज कैबिनेट और कभी-कभी माइक्रोवेव या कॉफी मशीन भी होती है। किचन को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि सफर के दौरान भी सेफ तरीके से खाना बनाया जा सके और गैस या इलेक्ट्रिक सिस्टम से कोई खतरा न हो।

सोने और आराम की सुविधा

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ट्रैवलिंग वैन में आरामदायक बेड या कन्वर्टिबल सोफा होता है जिसे जरूरत के अनुसार बदला जा सकता है। इसके अलावा वेंटिलेशन के लिए खिड़कियां, फैन या एसी लगाया जाता है। कुछ लग्जरी वैन में टीवी, म्यूजिक सिस्टम और छोटे स्टोरेज कैबिनेट भी होते हैं ताकि सफर और भी आरामदायक बन सके।

पानी की व्यवस्था

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इसमें साफ पानी के लिए फ्रेश वाटर टैंक लगाया जाता है जो आमतौर पर गाड़ी के नीचे या पीछे फिट किया जाता है। यह पाइपलाइन के जरिए किचन, सिंक और कभी-कभी बाथरूम से जुड़ा होता है। पानी का प्रेशर बनाए रखने के लिए पंप सिस्टम भी लगाया जाता है ताकि उपयोग में कोई परेशानी न हो।

वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम

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इस्तेमाल किए गए पानी और वेस्ट के लिए ग्रे वाटर और ब्लैक वाटर टैंक लगाए जाते हैं। ये टैंक पूरी तरह सील और सेफ होते हैं और गाड़ी के नीचे फिट किए जाते हैं। इन्हें समय-समय पर खाली करना पड़ता है जो तय किए गए डिस्पोजल पॉइंट या कैंपिंग साइट पर किया जाता है, ताकि सफर साफ और इको-फ्रेंडली रहे।

खर्च कितना आता है

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ट्रैवलिंग वैन का खर्च उसकी डिजाइन, साइज और लग्जरी सुविधाओं पर निर्भर करता है। बेसिक वैन लगभग ₹5 लाख से ₹15 लाख में बन सकती है, मिड-रेंज वैन ₹15 लाख से ₹40 लाख तक जाती है, जबकि हाई-एंड लग्जरी RV का खर्च ₹50 लाख से ₹1 करोड़ या उससे भी ज्यादा हो सकता है। इसमें सोलर सिस्टम, एसी और लग्जरी इंटीरियर जोड़ने से खर्च और बढ़ जाता है।

ट्रैवलिंग वैन और टेंट लगाना

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ट्रैवलिंग वैन के साथ आप कही भी टेंट लगा सकते है, वैन के अंदर जगह सीमित होती है और बाहर खुली हवा में बैठने, खाने या आराम करने के लिए एक्स्ट्रा स्पेस मिल जाता है। यह खासकर नेचर ट्रिप, जंगल, पहाड़ या झील किनारे कैंपिंग में बहुत उपयोगी होता है। टेंट लगाने से आप दिन में आउटडोर एंजॉय कर सकते हैं और रात में जरूरत पड़ने पर उसमें सो भी सकते हैं, जिससे जर्नी और भी एडवेंचर बन जाती है।

ऐसे लगाएं टेंट

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ट्रैवलिंग वैन के साथ टेंट लगाना बहुत आसान होता है। सबसे पहले एक सेफ और सपाट जगह चुनी जाती है, फिर वैन के पीछे या साइड में टेंट खोलकर उसकी बेस शीट (ग्राउंड कवर) बिछाई जाती है। इसके बाद टेंट की रॉड्स या पोल्स को जोड़कर उसका फ्रेम बनाया जाता है। फिर रस्सियों और पेग्स की मदद से टेंट को कसकर बांधा जाता है। अंत में वैन के साथ टेंट का कनेक्शन सही तरीके से सेट किया जाता है ताकि अंदर-बाहर आसानी से आना-जाना हो सके।

ट्रैवलिंग वैन का बहुत फायदा होता है, इसमें होटल बुकिंग की जरूरत नहीं होती और आप अपनी मर्जी से कहीं भी रुक सकते हैं। यह फैमिली ट्रिप, एडवेंचर रोड ट्रिप, नेचर ट्रैवल और लंबी ट्रिप के लिए एक बेहतरीन ऑप्शन है। यह सफर को सिर्फ ट्रिप नहीं बल्कि एक यादगार एक्सपीरियंस बना देती है जहां आराम, आज़ादी और रोमांच तीनों एक साथ मिलते हैं। तो आप भी अपनी अगली ट्रिप के लिए ट्रैवलिंग वैन का इस्तेमाल करके एक यादगार सफर का एक्सपीरियंस कर सकते हैं।

Adani Enterprises QIP: अदाणी एंटरप्राइजेज ने लॉन्च किया QIP, 3034 रुपये का फ्लोर प्राइस तय

Adani Enterprises QIP: अदाणी एंटरप्राइजेज ने 2 जुलाई को क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) लॉन्च करने का ऐलान किया। कंपनी ने इसके लिए 3,034.68 रुपये प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया है। यह फ्लोर प्राइस कंपनी के मौजूदा बाजार भाव 3,165 रुपये प्रति शेयर से करीब 4% कम है।

इस इश्यू के लिए SBI Capital Markets, Jefferies India, ICICI Securities और IIFL Capital Services को बुक रनिंग लीड मैनेजर (BRLM) बनाया गया है। QIP का अंतिम इश्यू प्राइस इनसे चर्चा के बाद तय होगा।

IHC करेगी $11 अरब का निवेश

इस बीच, अदाणी ग्रुप के लिए एक और बड़ी खबर आई है। अबू धाबी की International Holding Company (IHC) ओडिशा में अदाणी ग्रुप के साथ मिलकर 11.5 अरब डॉलर (करीब 98,000 करोड़ रुपये) का निवेश करेगी। राज्य सरकार के एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी।

अगर यह प्रोजेक्ट तय योजना के मुताबिक आगे बढ़ता है, तो यह भारत के मेटल सेक्टर का अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश हो सकता है।

50-50 की हिस्सेदारी वाला जॉइंट वेंचर

दोनों कंपनियों ने इस प्रोजेक्ट के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत IHC और अदाणी ग्रुप की 50-50% हिस्सेदारी होगी।

इस जॉइंट वेंचर के तहत एल्युमिना रिफाइनरी, एल्युमिनियम स्मेल्टर, कैप्टिव पावर प्लांट और डाउनस्ट्रीम एल्युमिनियम मैन्युफैक्चरिंग पार्क बनाया जाएगा। इसके साथ ओडिशा का सबसे बड़ा एल्युमिनियम कॉम्प्लेक्स भी बनेगा। इसकी उत्पादन क्षमता भी काफी ज्यादा होगी।

  • 40 लाख टन (4 MTPA) एल्युमिना
  • 20 लाख टन (2 MTPA) एल्युमिनियम
  • 10 लाख टन (1 MTPA) डाउनस्ट्रीम एल्युमिनियम प्रोडक्ट्स

53,500 लोगों को मिलेगा रोजगार

इस प्रोजेक्ट से बड़े पैमाने पर रोजगार भी पैदा होंगे। राज्य सरकार के अधिकारी के मुताबिक, कुल 53,500 लोगों को रोजगार मिलेगा। इनमें 35,000 नौकरियां निर्माण के दौरान मिलेंगी। प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद 18,500 लोगों को स्थायी रोजगार मिलेगा।

अभी एल्युमिनियम कारोबार में नहीं है अदाणी ग्रुप

अदाणी ग्रुप अभी एल्युमिनियम बनाने के कारोबार में नहीं है। हालांकि, कंपनी पहले ही ओडिशा में एल्युमिना रिफाइनरी और एल्युमिनियम प्रोजेक्ट लगाने की योजना का ऐलान कर चुकी है।

वहीं, अदाणी एंटरप्राइजेज के पास गुजरात में दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-साइट कॉपर स्मेल्टर है। इसे बनाने में करीब 1.2 अरब डॉलर का निवेश किया गया है।

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Aluminium Prices: स्क्रैप सप्लाई बढ़ने से गिरेगी एल्युमिनियम की कीमतें, InCred का अनुमान $2,400–2,700 तक जा सकता है भाव

Aluminium Prices: ज्यादातर एनालिस्ट को उम्मीद है कि लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर एल्युमिनियम की कीमतें लगभग $3,200–3,300 प्रति टन रहेगी। लेकिन InCred रिसर्च सर्विसेज के मैनेजिंग डायरेक्टर और हेड सतीश कुमार को उम्मीद है कि कीमतें गिरकर $2,400–2,700 प्रति टन पर आ जाएंगी।

CNBC TV18 से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि हाल की तेजी ज्यादातर प्राइमरी एल्युमिनियम मार्केट की वजह से आई है, लेकिन रीसायकल किए गए मेटल या स्क्रैप की बढ़ती उपलब्धता से कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि “कुल एल्युमिनियम सप्लाई में स्क्रैप का हिस्सा लगभग 32 से 33% होता है और इसलिए यह बहुत जरूरी भूमिका निभाता है।” “जब भी एल्युमिनियम की कीमतें बढ़ेंगी, तो आप देखेंगे कि 6 महीने बाद मार्केट में स्क्रैप की बाढ़ आ जाएगी, और यह असल में एक बैलेंस बनाने वाले फैक्टर का काम करता है।”

उन्हें उम्मीद है कि रिसाइकल किया गया एल्युमीनियम, नवीन फ्लोरीन का एक बड़ा हिस्सा पूरा करेगा, जिससे नई कैपेसिटी की जरूरत कम हो जाएगी। उन्होंने बताया कि चीन ने पहले ही अपनी प्राइमरी एल्युमीनियम कैपेसिटी 45 ​​मिलियन टन पर लिमिट कर दी है, जबकि वह घरेलू रीसाइक्लिंग और इंपोर्ट के जरिए स्क्रैप का इस्तेमाल बढ़ा रहा है।

उनका अनुमान है कि अकेले प्राइमरी एल्युमीनियम का मार्केट थोड़ा कमजोर रहेगा, जिसकी डिमांड लगभग 75 मिलियन टन सप्लाई से ज्यादा होगी। लेकिन एक बार रीसायकल किया गया स्क्रैप जुड़ने के बाद दुनिया भर में एल्युमीनियम की कुल डिमांड और सप्लाई बढ़कर लगभग 105–107 मिलियन टन हो जाती है, जिससे पूरा मार्केट मेटल की कमी के बजाय मोटे तौर पर बैलेंस्ड हो जाता है।

कुमार ने कहा, “प्राइमरी मेटल ठीक लग रहा है। मार्केट में कमी है, लेकिन अगर हम स्क्रैप को भी ध्यान में रखें तो मुझे यह एक बैलेंस्ड सिनेरियो जैसा लग रहा है।”

एल्युमीनियम की कीमतों में तेज करेक्शन से प्रोड्यूसर्स की कमाई पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि कंपनियों की वैल्यूएशन अभी इस उम्मीद में की जा रही है कि एल्युमीनियम की कीमतें $3,500 प्रति टन के आसपास रहेंगी। अगर कीमतें उनके टारगेट के करीब आती हैं तो कमाई का अनुमान और वैल्यूएशन दबाव में आ सकते हैं, हालांकि उन्होंने अपनी ऑफिशियल कवरेज वाली कंपनियों पर कोई कमेंट नहीं किया।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।