फिर बंद कर दिया होर्मुज? ईरान ने बताई पूरी सच्चाई, लेबनान पर इजरायल के हमले से बढ़ा तनाव!

ईरान ने शुक्रवार को उन खबरों का खंडन किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया गया है। ईरान ने कहा कि 18 जून को अमेरिका के साथ हुए युद्धविराम समझौते के तहत इस अहम जलमार्ग से कमर्शियल शिपिंग जारी है। सरकारी ब्रॉडकास्टर ‘प्रेस टीवी’ से बात करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने इन दावों को “बेबुनियाद” और गलत बताया।

बघाई ने स्ट्रेट के बंद होने की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि MoU पर हस्ताक्षर के बाद, तेहरान ने सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही “फिलहाल सामान्य रूप से चल रही है”।

दरअसल कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ये दावा किया गया था कि ईरान की नौसेना ने अचानक एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला ऐलान कर दिया। ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को दोबारा पूरी तरह बंद कर दिया है।

रिपोर्ट में कहा गया कि ईरान ने साफ कहा है कि जब तक इजरायल लेबनान से अपनी सेना नहीं हटाता और अमेरिका इस इलाके को खाली नहीं करता, तब तक यह रास्ता बंद रहेगा।

दावा- ईरान ने दी थी खुली धमकी!

इसमें बताया गया कि समुद्री रेडियो चैनलों पर ईरान के सबसे खतरनाक सैन्य संगठन इरेक्ट (IRGC – इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) ने एक बयान जारी कर अमेरिका पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। ईरान का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के बीच बुधवार को जो समझौता हुआ था, अमेरिका उसका पालन नहीं कर रहा है।

ईरानी सेना ने सख्त लहजे में चेतावनी दी, “क्योंकि लेबनान से इजरायल की वापसी, समुद्री नाकाबंदी को पूरी तरह हटाना और अमेरिकी आतंकवादी ताकतों का फारस की खाड़ी से बाहर निकलना हमारी मुख्य शर्तें थीं, इसलिए जब तक ये शर्तें पूरी नहीं होतीं, ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ बंद रहेगा। सभी जहाजों से अनुरोध है कि वे अपनी सुरक्षा के लिए इस रास्ते के पास न आएं। अगर किसी भी जहाज ने इस आदेश को मानने से इनकार किया, तो उसे सीधे निशाना बनाया जाएगा (यानी उड़ा दिया जाएगा)।”

आपको बता दें कि दुनिया का लगभग 20% (पांचवां हिस्सा) तेल और गैस का व्यापार इसी रास्ते से होता है। इसी साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद भी इसे बंद कर दिया गया था, जिससे दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम आसमान पर पहुंच गए थे।

लेबनान पर इजरायल के हमले से नाराज हुआ ईरान!

बताया गया कि ईरान के इस गुस्से के पीछे इजरायल का लेबनान पर किया गया ताजा हमला है। अमेरिका-ईरान डील के तहत यह माना जा रहा था कि इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच भी जंग रुक जाएगी। लेकिन कल आधी रात से इजरायल ने लेबनान के 11 शहरों पर भीषण हवाई हमले किए, जिसमें कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई और 33 घायल हो गए।

इस बीच, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कह दिया है कि उनकी सेना “जब तक जरूरी होगा” लेबनान में ही रहेगी। वहीं, इजरायल के धुर दक्षिणपंथी मंत्री इतामार बेन ग्विर ने सोशल मीडिया पर लिख दिया कि “पूरे लेबनान को जल जाना चाहिए।” इस पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह किसी मामूली पागल का बयान नहीं है, बल्कि इजरायली सरकार के सुरक्षा मंत्री की सोच है। तेल अवीव (इजरायल) में बैठी यह सरकार पूरी मानवता के लिए खतरा है और इसका मकसद सिर्फ स्थायी युद्ध (Permanent War) करना है।”

अमेरिका का दावा: “हमने तो रास्ता खोल दिया था”

दूसरी तरफ, अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने गुरुवार को ही ऐलान किया था कि उसने पिछले दो महीनों से ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई अपनी नाकाबंदी को आधिकारिक रूप से हटा लिया है। ऐसे में अमेरिका के लिए यह समझना मुश्किल हो रहा है कि ईरान किस अधूरी नाकाबंदी की बात कर रहा है।

यहां तक कि समुद्री जहाजों पर नजर रखने वाली एजेंसी ‘AXSMarine’ के मुताबिक, इस समझौते के तुरंत बाद गुरुवार को रिकॉर्ड 25 कमर्शियल जहाज इस रास्ते से सुरक्षित गुजरे थे, जो पिछले दो महीनों में सबसे बड़ी संख्या थी। लेकिन अब ईरान के इस नए कदम ने पूरी दुनिया को एक बार फिर महायुद्ध और भयंकर आर्थिक संकट के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।

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पीएम मोदी को बड़े ग्लोबल लीडर के तौर पर क्यों पसंद करते हैं ट्रंप? खुद कही ये बात

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दुनिया के उन नेताओं में शामिल बताया है, जिनकी वह सबसे ज्यादा सराहना करते हैं। नेतृत्व क्षमता और वैश्विक प्रभाव पर बात करते हुए ट्रंप ने मोदी का नाम चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ लिया। फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के बाद समाचार वेबसाइट Axios को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने दुनिया के प्रमुख नेताओं के साथ अपने संबंधों और वैश्विक राजनीति को लेकर अपने विचार साझा किए। इंटरव्यू के दौरान जब उनसे पूछा गया कि वे किन विश्व नेताओं की सबसे अधिक प्रशंसा करते हैं, तो ट्रंप ने भारत और चीन का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग का नाम लिया।

शी जिनपिंग और पीएम मोदी का लिया नाम

Axios की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उन विश्व नेताओं में शामिल बताया, जिनकी वह सबसे अधिक प्रशंसा करते हैं। ट्रंप ने शी जिनपिंग को पूरी तरह काम पर केंद्रित नेता बताया, जबकि नरेंद्र मोदी को बेहद मजबूत और सख्त नेतृत्व वाला नेता कहा। हाल के दिनों में ट्रंप की ओर से पीएम मोदी के बारे में की गई सकारात्मक टिप्पणियों में यह एक और महत्वपूर्ण बयान माना जा रहा है। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब G7 शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप और मोदी की 16 महीने से अधिक समय बाद पहली आमने-सामने मुलाकात हुई थी।

भारत और अमेरिका के मजबूत संबंधों पर जोर

बातचीत के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और अमेरिका के मजबूत संबंधों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हाल के समय में व्यापार, प्रतिबंधों और ओमान के तट के पास अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत जैसे मुद्दों पर कुछ मतभेद जरूर रहे हैं, लेकिन इससे दोनों देशों के रिश्तों की मजबूती पर कोई असर नहीं पड़ा है। मुलाकात के दौरान ट्रंप ने कहा, “हमारे संबंध बेहद अच्छे हैं। इससे ज्यादा करीबी रिश्ते शायद ही हो सकते हैं। हमारे देशों के बीच मजबूत साझेदारी है और इसकी शुरुआत हम दोनों नेताओं से होती है।” ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक सख्त और कुशल वार्ताकार भी बताया। उन्होंने अपनी पहले की टिप्पणी दोहराते हुए कहा कि मोदी बातचीत के दौरान मजबूती से अपनी बात रखते हैं। साथ ही ट्रंप ने संकेत दिया कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।

ट्रेड डील पर कही ये बात

G7 शिखर सम्मेलन के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील होने के काफी करीब है। उन्होंने इस मौके पर एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बातचीत और नेतृत्व क्षमता की सराहना की। ट्रंप ने कहा कि मोदी का व्यक्तित्व बेहद प्रभावशाली है और वह देखने में बहुत शांत और सौम्य लगते हैं। हालांकि, बातचीत और फैसलों के मामले में वह काफी मजबूत और सख्त नेता हैं। ट्रंप के अनुसार, मोदी अपनी बात मजबूती से रखते हैं और सामने वाले को अपने नेतृत्व शैली से प्रभावित कर देते हैं। उन्होंने कहा कि मोदी का शांत स्वभाव और दृढ़ नेतृत्व उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाता है।

इस सवाल से किया इनकार

Axios का यह इंटरव्यू मुख्य रूप से अमेरिका-ईरान शांति प्रयासों के बाद डोनाल्ड ट्रंप की नेतृत्व क्षमता और वैश्विक प्रभाव पर केंद्रित था। बातचीत के दौरान ट्रंप ने दुनिया के कई नेताओं के साथ अपने संबंधों और अनुभवों पर भी चर्चा की। हालांकि, जब उनसे उन नेताओं के बारे में पूछा गया जिन्हें वह कमजोर मानते हैं, तो उन्होंने किसी का नाम लेने से इनकार कर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने इस बात पर भी खेद जताया कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन G7 समूह का हिस्सा नहीं थे। इसके अलावा उन्होंने फ्रांस में आयोजित शिखर सम्मेलन के दौरान फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की ओर से वर्साय पैलेस में दिए गए स्पेशल स्टेट डिनर का भी जिक्र किया।

“मुझसे फोटो के लिए गिड़गिड़ाई थीं मेलोनी”… ट्रंप के दावे पर भड़कीं इटली की पीएम, कहा- ‘हम कभी भी भीख नहीं मांगते’

अभी कुछ ही दिन पहले फ्रांस के एवियान (Evian) में हुए G7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit) (15 से 17 जून) में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच गर्मजोशी भरी मुलाकात की तस्वीरें सामने आई थीं। लेकिन अब इस दोस्ती में बहुत बड़ा धमाका हो गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में दावा कर दिया कि जॉर्जिया मेलोनी ने उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए बकायदा “भीख मांगी थी” (Begged)। इस दावे के बाद मेलोनी काफी ज्यादा भड़क गई हैं और उन्होंने ट्रंप को करारा जवाब दिया है।

ट्रंप का विवादित दावा: “तरस खाकर खिंचवाई फोटो”

इटली के एक न्यूज चैनल ‘La7 TV’ को दिए फोन इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी ही धुन में मेलोनी का मजाक उड़ाते हुए कहा, “वह शायद खुश होंगी कि मैंने उनसे बात की, जबकि मुझे उनसे बात करने की कोई जरूरत नहीं थी। उन्होंने मेरे साथ एक तस्वीर खिंचवाने के लिए मुझसे भीख मांगी थी। वह मेरे साथ फोटो खिंचवाने के लिए इतनी बेताब थीं कि पूछिए मत। मैं तो फोटो नहीं खिंचवाता, लेकिन मुझे उन पर तरस आ गया, इसलिए मैं मान गया।”

मेलोनी का पलटवार: “ईश्वर गवाह है, इटली कभी भीख नहीं मांगता!”

ट्रंप के इस बयान के बाद जॉर्जिया मेलोनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो जारी कर ट्रंप के दावों की धज्जियां उड़ा दीं।

मेलोनी ने वीडियो में साफ-साफ कहा, “डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान पूरी तरह मनगढ़ंत और झूठा है। मैं सच में उनके इस व्यवहार से हैरान हूं। मुझे नहीं पता कि अमेरिकी राष्ट्रपति अपने ही सहयोगियों के साथ ऐसा बर्ताव क्यों करते हैं; वैसे यह कोई पहली बार नहीं है।”

मेलोनी यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने ट्रंप की दुखती रग पर हाथ रखते हुए आगे कहा, “बड़े दुख की बात है कि ट्रंप अपनी यह आक्रामकता और तेवर पश्चिमी देशों या अमेरिका के असली दुश्मनों के खिलाफ नहीं दिखाते, बल्कि उनके सामने तो वह बेहद नरम पड़ जाते हैं। खैर, उन्हें एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए: मैं और मेरा देश इटली, कभी किसी के आगे भीख नहीं मांगते।”

इटली में भारी गुस्सा: डिप्टी पीएम ने रद्द किया अमेरिका दौरा

ट्रंप की इस टिप्पणी से पूरे इटली के नेताओं में गुस्सा उबल पड़ा है। इसे पूरे देश का अपमान माना जा रहा है।

इटली के डिप्टी पीएम एंटोनियो तायानी ने गुस्से में अपना 21 और 22 जून का अमेरिका दौरा रद्द कर दिया है। उन्होंने कहा, “ट्रंप के ये शब्द पूरे इटली का अपमान हैं, इसलिए मैं अमेरिका नहीं जा रहा।”

इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने कहा, “मैं तो बंदूक की नोक पर भी मेलोनी को किसी से फोटो के लिए भीख मांगते नहीं देख सकता। मेलोनी ने इटली और यूरोप के भले के लिए ट्रंप की पुरानी कड़वी बातों को भुलाकर उनसे मुलाकात की थी, लेकिन ट्रंप ने फिर से अपनी खराब तहज़ीब (Lapse in style) दिखा दी।”

कभी पक्के दोस्त थे, अब क्यों आई इतनी कड़वाहट?

आपको बता दें कि जॉर्जिया मेलोनी कभी डोनाल्ड ट्रंप की बहुत बड़ी समर्थक हुआ करती थीं। यहां तक कि साल 2025 में जब ट्रंप ने दोबारा राष्ट्रपति पद की शपथ ली, तो मेलोनी उस समारोह में शामिल होने वाली अकेली यूरोपीय नेता थीं।

लेकिन फिर रिश्ते क्यों बिगड़े?

दरअसल ट्रंप ने ईसाई धर्मगुरु पोप लियो (Pope Leo) पर कुछ विवादित टिप्पणियां की थीं, जिससे मेलोनी नाराज हो गईं। इस साल शुरू हुए ईरान युद्ध को लेकर दोनों के विचार बिल्कुल अलग हो गए और मेलोनी ने ट्रंप से दूरी बना ली।

हालांकि, इस G7 समिट में दोनों ने पैच-अप (रिश्ते सुधारने) की कोशिश की थी, लेकिन ट्रंप के इस एक बयान ने दोनों देशों के बीच एक नया ‘विवाद’ खड़ा कर दिया है।

मोजतबा खामेनेई का बड़ा दावा, ईरान डील के लिए ‘बेताब’ ट्रंप ने हर तरह के हथकंडे अपनाए

 

दुनिया के सामने मजाक बन गए डोनाल्ड ट्रंप! सम्मान समारोह में ऐसा क्या हुआ कि वायरल हो गया वीडियो

वाइट हाउस में हुए एक कार्यक्रम का वीडियो इंटरनेट पर खूब वायरल हो रहा है। इसकी वजह हैं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। असल में वाइट हाउस में एक पूर्व अमेरिकी मेजर निकोलस डॉकरी का सम्मान समारोह चल रहा था।

अमेरिका-ईरान ‘डील साइन’

नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच निर्धारित समय से एक दिन पहले 18 जून को ही युद्धविराम समझौते पर दस्तखत हो गए। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के वर्साय पैलेस में समझौते पर दस्तखत करने के बाद बाहर निकल कर मीडिया के सामने चिल्ला कर कहा ‘डील साइन’। ईरान की तरफ से राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने समझौते पर दस्तखत किया। पिछले करीब 50 साल में पहली बार अमेरिका और ईरान ने किसी समझौते पर दस्तखत किया है।

अंतरिम समझौते पर दस्तखत के समय दोनों देशों के राष्ट्रपति आमने सामने नहीं बैठे थे, बल्कि डिजिटल तरीके से जुड़े थे। राष्ट्रपति ट्रंप ने बुधवार की रात को फ्रांस के वर्साय पैलेस में युद्धविराम से जुड़े समझौता ज्ञापन पर दस्तखत किए। इस दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मौजूद थे। समझौते के दस्तावेज पर दस्तखत करने के बाद ट्रम्प वर्साय पैलेस से बाहर आए। इस दौरान किसी रिपोर्टर ने उनसे पीस डील को लेकर पूछा, तो उन्होंने चिल्लाते हुए कहा, ‘डील साइन हो गई है’। गौरतलब है कि वर्साय में पहले विश्वयुद्ध के बाद जर्मनी के साथ ऐतिहासिक समझौता हुआ था।

राष्ट्रपति ट्रंप के बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी ईरान से डिजिटल तरीके से दस्तखत किए। समझौते का ऐलान भारतीय समय के मुताबिक गुरुवार सुबह साढ़े पांच बजे किया गया। यह तत्काल प्रभाव से लागू हो गया। इस समझौते के तहत ईरान और लेबनान में सैन्य अभियान खत्म किया जाएगा। साथ ही होर्मुज की खाड़ी को दोबारा खोला जाएगा और अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी खत्म की जाएगी।

गौरतलब है कि इस समझौते पर 19 जून को स्विटजरलैंड में जेनेवा के पास लूसर्न शहर में दस्तखत होने थे, लेकिन निर्धारित कार्यक्रम से एक दिन पहले ही इस पर दस्तखत कर दिए गए। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अमेरिका के साथ हुए समझौते को ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हुए कहा कि यह दुनिया के लिए एक मजबूत ईरान का संदेश है। पेजेशकियान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि ईरान वैश्विक शांति, अपनी गरिमा और स्वतंत्रता बनाए रखने के साथ साथ विकास और क्षेत्रीय सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है।

इस बीच खबर है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर दस्तखत होने के बाद होर्मुज की खाड़ी में जहाजों की आवाजाही तेज हो गई है। सऊदी अरब के झंडे वाले तीन बड़े तेल टैंकर होर्मुज की खाड़ी से गुजरे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इन सुपर टैंकरों में करीब 60 लाख बैरल कच्चा तेल भरा हुआ था। दूसरी ओर यह भी खबर है कि इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अगले 60 दिन में अमेरिका औरर ईरान के अंतिम समझौते को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। ‘इजराइल टाइम्स’ के मुताबिक, नेतन्याहू दक्षिणपंथी मीडिया हस्तियों और इजराइल समर्थक अमेरिकी सांसदों के जरिए राष्ट्रपति ट्रंप पर दबाव बनाना चाहते हैं।

गिफ्ट निफ्टी दे रहा भारतीय बाजार के कमजोर खुलने के संकेत, 24000 पर कर रहा ट्रेड, जानें आज बाजार पर किन खबरों का दिखेगा असर

ग्लोबल मार्केट के पॉजिटिव संकेतों के बावजूद, शुक्रवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के तेजी से नीचे खुलने की संभावना है, क्योंकि निवेशक पांच सेशन की मजबूत रैली के बाद प्रॉफिट लॉक करने के लिए तैयार दिख रहे हैं, जिसने निफ्टी को 24,150 से ऊपर और सेंसेक्स को 77,400 के पार पहुंचा दिया है। विदेशी फंड की लगातार बिकवाली और ज़रूरी टेक्निकल लेवल के पास रुकावट से भी सेंटिमेंट सतर्क रह सकता है।

GIFT निफ्टी सुबह करीब 8 बजे 24,000 पर ट्रेड कर रहा था, जो 192 पॉइंट यानी 0.8 प्रतिशत नीचे था, जो घरेलू इक्विटी के लिए गैप-डाउन शुरुआत का संकेत देता है। यह संकेत एशियाई मार्केट और वॉल स्ट्रीट में मोटे तौर पर पॉजिटिव ट्रेंड के उलट है, जिससे पता चलता है कि घरेलू ट्रेडर हालिया रैली के बाद प्रॉफिट बुक कर सकते हैं।

सतर्क शुरुआत का संकेत गुरुवार को भारतीय इक्विटी के लगातार पांचवें सेशन में ऊपर बंद होने के बाद आया है। सेंसेक्स 254.36 पॉइंट्स या 0.33 परसेंट बढ़कर 77,409.98 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 82.30 पॉइंट्स या 0.34 परसेंट बढ़कर 24,168 पर बंद हुआ।

ग्लोबल संकेत सपोर्टिव बने हुए हैं। होर्मुज स्ट्रेट के फिर से खुलने और महंगाई की चिंताओं में कमी से रिस्क लेने की क्षमता बढ़ने से शुक्रवार को एशियाई इक्विटीज नए रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गए। MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स लगातार छठे दिन 0.1 परसेंट बढ़ा, जबकि साउथ कोरिया का कोस्पी 2.5 परसेंट से ज़्यादा चढ़ा। जापान का निक्केई फ्यूचर्स भी ऊपर गया।

टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर स्टॉक्स में रैली की वजह से वॉल स्ट्रीट रात भर मजबूती के साथ ऊपर बंद हुआ। नैस्डैक कंपोजिट 1.91 परसेंट, S&P 500 1.08 परसेंट और डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.14 परसेंट बढ़ा। US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के यह कहने के बाद कि Apple, Intel के साथ मिलकर यूनाइटेड स्टेट्स में चिप्स डिज़ाइन और मैन्युफैक्चर करेगा, सेमीकंडक्टर स्टॉक्स ने तेज़ी से अच्छा परफॉर्म किया, जिससे फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स 6.4 परसेंट बढ़ गया।

इस बीच, US-ईरान अंतरिम शांति समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग एक्टिविटी धीरे-धीरे फिर से शुरू होने पर क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट जारी रही। ब्रेंट क्रूड $79 प्रति बैरल से नीचे आ गया, जबकि US क्रूड $76 प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा था। एनालिस्ट्स को उम्मीद है कि तेल का फ्लो ठीक होने से महंगाई और एनर्जी सप्लाई में रुकावटों की चिंता कम होगी। क्रूड की कीमतों में तेज़ गिरावट दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल इंपोर्टर भारत के लिए एक बड़ी पॉजिटिव बात बनी हुई है।

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर के मुताबिक, शॉर्ट-टर्म प्रॉफिट बुकिंग की संभावना के बावजूद, बड़ा बैकग्राउंड कंस्ट्रक्टिव बना हुआ है। उन्होंने कहा, “अमेरिका के होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की घोषणा के बाद निवेशकों का रुझान मजबूत हुआ है। इन घटनाओं ने अमेरिका-ईरान शांति प्रक्रिया को लेकर उम्मीद को और मजबूत किया है, जिससे ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में रुकावटों की चिंता कम हुई है और अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में ज़्यादा स्थिरता की उम्मीदों को सहारा मिला है।”

संस्थागत निवेश मिला-जुला रहा। 18 जून को विदेशी संस्थागत निवेशक नेट सेलर थे, उन्होंने 1,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा के शेयर बेचे। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बिकवाली के दबाव को झेलते हुए 3,516 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

तकनीकी मोर्चे पर, पोनमुडी ने कहा कि निफ्टी की तुरंत की रुकावट 24,200 का स्तर बनी हुई है। उस ज़ोन से ऊपर लगातार ब्रेकआउट 24,400 की ओर बढ़ने का रास्ता खोल सकता है। नीचे की ओर, 24,000 का निशान एक ज़रूरी सपोर्ट एरिया बना हुआ है, जिसके टूटने पर 23,900-23,800 ज़ोन की ओर प्रॉफ़िट बुकिंग शुरू हो सकती है।

बैंक निफ्टी के लिए 58,000 का लेवल मुख्य रेजिस्टेंस बना हुआ है, जबकि तुरंत सपोर्ट 57,800 पर है। सपोर्ट लेवल से ऊपर लगातार मजबूती से बड़े पैमाने पर रिकवरी का ट्रेंड बना रहने की उम्मीद है।

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Crude Oil Price: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी, होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग धीरे-धीरे हो रही सामान्य

Crude Oil Price Today: अंतरिम US-ईरान शांति समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग सामान्य होने लगी, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई और इसमें हफ़्ते में बड़ी गिरावट आने की उम्मीद थी। ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 0.84% ​​गिरकर $79.18 प्रति बैरल हो गई, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चे तेल की कीमत 0.67% गिरकर $76.09 प्रति बैरल हो गई।

फंसे हुए तेल ले जा रहे जहाज़ गुरुवार को पानी के रास्ते से निकलने लगे, जबकि कुवैत ने कहा कि वह प्रोडक्शन बढ़ाना शुरू कर देगा। US सेंट्रल कमांड ने कहा कि उसने ईरानी पोर्ट और तटीय इलाकों से आने-जाने वाले ट्रैफिक पर लगी रोक हटा ली है, जबकि जॉइंट मैरीटाइम इन्फॉर्मेशन सेंटर, जो एक अहम नेवल इन्फॉर्मेशन बॉडी है, ने पानी के रास्ते से गुज़रने की कोशिश कर रहे जहाजों को सलाह दी कि वे ओमान के समुद्र तट के पास वाले रास्ते का इस्तेमाल करें ताकि माइन से बचा जा सके।

US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने इन डेवलपमेंट की तारीफ़ की, और ईरान के कट्टर समर्थकों, जिनमें कुछ साथी देश भी शामिल हैं, की इस आलोचना का जवाब दिया कि इस डील में तेहरान को बहुत ज़्यादा छूट दी गई है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, “मार्केट को यह पसंद आ रहा है कि तेल की कीमतें बहुत नीचे हैं और स्टॉक्स बहुत ऊपर हैं।”

क्रूड की बिकवाली का मतलब है कि फ्यूचर्स ने युद्ध से हुई लगभग सारी बढ़त गंवा दी है, जो फरवरी में तब शुरू हुई थी जब US और इज़राइल ने ईरान पर उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर हमला किया था। यह स्ट्रेट — जो फारस की खाड़ी को ग्लोबल मार्केट से जोड़ता है और आम तौर पर ग्लोबल तेल सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा ले जाता है — तेहरान और US दोनों की तरफ से डबल ब्लॉकेड का सामना कर रहा था।

वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस ने इस चिंता को कम करके आंका कि ईरान आखिरकार स्ट्रेट से होने वाले ट्रैफिक पर टोल लगा सकता है, यह एक ऐसा कदम है जो तेहरान के लिए पैसे कमाने का ज़रिया बन सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग में विवादित डिटेल्स पर काम करने के लिए 60 दिन का समय शुरू हो गया है।

हालांकि क्रूड की कीमतें गिर गई हैं, होर्मुज को पूरी तरह से फिर से खोलना एक मुश्किल और लंबा चलने वाला ऑपरेशन साबित हो सकता है। इस प्रोसेस को ठीक से चलाने के लिए, जहाज़ों को सही जगह पर रखना, कुओं को फिर से चालू करना, इंफ्रास्ट्रक्चर की मरम्मत और डी-माइनिंग ऑपरेशन पर सहमति बनाना ज़रूरी है। कुछ जहाज़ मालिक पानी के रास्ते और फ़ारस की खाड़ी के हालात को लेकर सावधान हैं।

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PM मोदी-ट्रंप बैठक का असर, अंतिम चरण में पहुंचा भारत-अमेरिका व्यापार समझौता

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भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौता (Interim Bilateral Trade Agreement) अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने गुरुवार को यह जानकारी दी। यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई मुलाकात के एक दिन बाद आया है।

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विक्रम मिस्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति हुई है और अब दोनों देश इसे अंतिम रूप देने के करीब हैं। एक्सपर्ट्‍स के मुताबिक इस समझौते के लागू होने से दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ेगा, बाजारों तक पहुंच आसान होगी और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने बताया कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर अगले सप्ताह भारत का दौरा करेंगे, जहां इस समझौते को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी।

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मिस्री के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बैठक में व्यापार समझौता प्रमुख मुद्दों में शामिल रहा। दोनों नेताओं ने अधिकारियों को इस प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया है। इससे पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने भी कहा था कि भारत और अमेरिका लंबे समय से प्रतीक्षित व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को दुनिया के सबसे सख्त और कुशल वार्ताकारों में से एक बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को लेकर लगातार सकारात्मक बातचीत हो रही है।

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ट्रंप ने भारत द्वारा अमेरिका में किए जा रहे निवेश की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका में बड़े पैमाने पर निवेश को बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंध मजबूत हो रहे हैं। गौरतलब है कि भारत और अमेरिका ने फरवरी में लगभग एक वर्ष तक चली बातचीत के बाद व्यापार को लेकर अंतरिम सहमति बनाई थी। इसके बाद से दोनों देश इस समझौते को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

 

विक्रम मिस्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक होते हैं, लेकिन दोनों देशों के नेतृत्व ने हमेशा संवाद के माध्यम से चुनौतियों का समाधान निकाला है।

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15 जुलाई से लागू होगा भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता

इस बीच प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) के 15 जुलाई से लागू होने का स्वागत किया है। उन्होंने इसे दोनों देशों के संबंधों में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे व्यापार और निवेश को नई गति मिलेगी। ब्रिटेन की भारत में उच्चायुक्त लिंडी कैमरन ने पुष्टि की है कि भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 15 जुलाई से प्रभावी हो जाएगा। करीब तीन वर्षों की बातचीत के बाद जुलाई 2025 में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। Edited by : Sudhir Sharma

Gold Silver Rates Today: लगातार तीसरे दिन गिरा सोना, चांदी भी 6660 रुपये फिसली

Gold Silver Rates Today: सोने में लगातार तीसरे दिन गिरावट आई। दिल्ली सर्राफा बाजार में यह 960 रुपये गिरकर 1.53 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। चांदी भी 6660 प्रति किलोग्राम फिसल गई। शेयर बाजारों में तेजी का असर बुलियन की डिमांड पर पड़ा।

17 जून को भी गिरा था सोना

ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, 99.9 फीसदी प्योरिटी वाला सोना 960 रुपये गिरकर 1,53,440 रुपये प्रति 10 ग्राम (टैक्स सहित) पर आ गया। 17 जून को यह 1,54,400 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।

चांदी भी बिकवाली दबाव में टूटी

चांदी पर भी बिकवाली का दबाव दिखा। यह 6,660 रुपये गिरकर 2,48,740 रुपये प्रति किलोग्राम (टैक्स सहित) पर बंद हुई। 17 जून को यह 2,55,400 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।

शेयर बाजारों में मजबूती का असर

एनालिस्ट्स का कहना है कि घरेलू शेयर बाजारों में मजबूती जारी है। इससे डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती आई है। इससे इनवेस्टर्स बुलियन की जगह शेयरों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। हालांकि, विदेश में बुलियन में तेजी का रुख है।

फेड की पॉलिसी का बुलियन पर असर

अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की मॉनेटरी पॉलिसी का असर भी बुलियन पर दिखा। एलकेपी सिक्योरिटीज के वीपी जतिन त्रिवेदी ने कहा कि फेडरल रिजर्व की पॉलिसी के बाद गोल्ड में कमजोरी दिखी। फेड की पॉलिसी से यह संकेत मिलता है कि अगर अमेरिकी इकोनॉमी में मजबूती बनी रहती है तो इस साल इंटरेस्ट रेट एक बार बढ़ सकता है।

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विदेश में बुलियन में हल्की तेजी

विदेश में गोल्ड में हल्की तेजी दिखी। यह 4,266.47 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। सिल्वर भी 0.38 फीसदी के उछाल के साथ 68.17 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के राष्ट्रपति और उन्होंने यूएस-ईरान समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसका असर बुलियन की कीमतों पर पड़ा।