₹1 करोड़ सालाना की नौकरी छोड़कर खेती की राह चुनी, Uber India की पूर्व CMO ने बताया सफल होने का तरीका

कभी करोड़ों रुपये की कॉर्पोरेट दुनिया का हिस्सा रहीं अवनी गुप्ता ने आज अपनी जिंदगी का रास्ता पूरी तरह बदल लिया है। बड़े ब्रांड्स में ऊंचे पदों पर काम करने के बाद अब वह पंचकूला के पास एक पर्माकल्चर फार्म में प्रकृति के बीच रह रही हैं। यहां न चमकदार ऑफिस है, न मीटिंग्स का दबाव और न ही शहर जैसी भागदौड़। चारों तरफ हजारों पेड़, अलग-अलग तरह की फसलें और मिट्टी से बना उनका साधारण घर है। खास बात यह है कि उन्होंने यह बदलाव अचानक नौकरी छोड़कर नहीं किया। इस नई जिंदगी की तैयारी करीब 12 साल पहले शुरू हो गई थी।

कॉर्पोरेट करियर के दौरान ही उन्होंने और उनके पति ने जमीन खरीदी और धीरे-धीरे फार्म लाइफ को समझना शुरू किया। मुंबई से गुरुग्राम और फिर पंचकूला तक का सफर तय करने के बाद उन्होंने आखिरकार शहर की नौकरी वाली जिंदगी को पीछे छोड़कर फार्म को अपना स्थायी ठिकाना बना लिया।

20 हजार रुपये से शुरू हुआ सफर

गुप्ता ने 1997 में यूनिलीवर से अपने करियर की शुरुआत की थी। उस समय उनकी मासिक कमाई करीब 20 हजार रुपये थी। आगे चलकर उन्होंने Colgate-Palmolive, Axis Bank, Clix Capital और Uber जैसी कंपनियों में बड़े पद संभाले। Uber छोड़ने तक उनकी सालाना कमाई करीब 1 करोड़ रुपये पहुंच चुकी थी।

इसके बावजूद उन्होंने कॉर्पोरेट दुनिया से दूरी बनाने का फैसला किया। उनका कहना है कि नौकरी छोड़ते समय उन्हें ऐसा नहीं लगा कि वह पैसा छोड़ रही हैं, क्योंकि मानसिक रूप से वह पहले ही उस जीवन से आगे बढ़ चुकी थीं।

नौकरी छोड़ने से पहले जमीन पर शुरू कर दी थी तैयारी

गुप्ता और उनके पति ने 2010 में हरियाणा में जमीन खरीदी। उस वक्त दोनों अपने करियर के अच्छे दौर में थे। उन्होंने तुरंत शहर छोड़ने के बजाय धीरे-धीरे फार्म पर समय बिताना शुरू किया। पहले मुंबई से गुरुग्राम आए, फिर पंचकूला में दो साल रहे और आखिरकार फार्म को अपना स्थायी घर बना लिया। इस दौरान उन्हें यह समझने का मौका मिला कि ग्रामीण जीवन वास्तव में उनके लिए सही है या नहीं।

खेती को सिर्फ कमाई का जरिया समझना बड़ी भूल

गुप्ता का कहना है कि सिर्फ खेती करके कॉर्पोरेट सैलरी जैसी कमाई की उम्मीद करना सही नहीं है। उदाहरण के तौर पर, ऑर्गेनिक पालक का एक बंडल सीधे ग्राहक को करीब 40 रुपये में बिक सकता है, लेकिन थोक बाजार में इसकी कीमत काफी कम हो सकती है। इसीलिए उन्होंने फार्म की कमाई को एक ही स्रोत पर निर्भर नहीं रखा। बीजों की ऑनलाइन बिक्री, फार्म स्टे, टूर, ट्रेनिंग, कंसल्टेंसी, यूट्यूब और अतिरिक्त उपज बेचने समेत कई माध्यमों से आमदनी होती है।

यहां Blinkit-Zomato नहीं, मौसम तय करता है तनाव

फार्म लाइफ बाहर से जितनी खूबसूरत दिखती है, उतनी आसान नहीं है। यहां तुरंत डिलीवरी, आसान कचरा प्रबंधन और शहर जैसी सुविधाएं नहीं हैं। सामाजिक मेल-जोल भी कम हो सकता है। गुप्ता के मुताबिक, कॉर्पोरेट जीवन का तनाव अब मौसम और फसलों से जुड़ गया है। तेज बारिश से बाढ़ की चिंता होती है और बारिश कम हो तो खेती प्रभावित होने का डर रहता है।

उनका मंत्र- पहले आजमाएं, फिर नौकरी छोड़ें

गुप्ता का सबसे अहम संदेश उन लोगों के लिए है जो कॉर्पोरेट जिंदगी छोड़कर गांव या फार्म पर बसने का सपना देखते हैं। उनका कहना है कि इसे अचानक फैसला बनाने के बजाय नौकरी के साथ-साथ धीरे-धीरे तैयार करना चाहिए। उनके मुताबिक, ग्रामीण जीवन को सोशल मीडिया की खूबसूरत तस्वीरों से नहीं, उसकी वास्तविक चुनौतियों के साथ समझना जरूरी है। तभी यह बदलाव किसी पलायन के बजाय सोच-समझकर चुनी गई नई जिंदगी बन सकता है।

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Viral video: तीस्ता नदी में 4 दिन का हाथी का बच्चा बहा, 4 KM दूर जाकर डूब रहे बेबी को मछुआरों ने ऐसे बचाया, देखें वीडियो

Viral video: पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले में एक बेहद दिल छू लेने वाला रेस्क्यू ऑपरेशन सामने आया। सिर्फ 3-4 दिन का हाथी का एक बच्चा तीस्ता नदी में बहकर करीब 4 किलोमीटर दूर चला गया। स्थानीय मछुआरों और वन विभाग की टीम ने समय रहते उसे डूबने से बचा लिया। बाद में उसकी मां से दोबारा मिलवा दिया। बच्चा बह कर कई किलोमीटर दूर चला गया था। उस बच्चे की मां वहीं नदी के किनारे खोजती नजरों से उसका इंतजार करती रही। वन विभाग की टीम को जैसे ही इसकी सूचना मिली, उन्होंने तुरंत मोर्चा संभाल लिया। स्थानीय मछुआरों की मदद से नदी की लहरों के बीच से उस नवजात बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

डॉक्टरों ने तुरंत हाथी की जांच की। वन विभाग की टीम ने बच्चे को उसकी मां के पास जैसे ही पहुंचाया,तो मां का रिएक्शन देखने लायक था। हथिनी मां तुरंत अपने बच्चे को दुलारते पुचकारते हुए अपना दूध पिलाने लगी। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना शुक्रवार को उत्तरी बंगाल के मालबाजार ब्लॉक स्थित बैकुंठपुर वन प्रभाग में हुई।

नदी पार करते समय मां से बिछड़ा बच्चा

वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, शुक्रवार सुबह करीब 8:30 बजे हाथियों का एक झुंड तीस्ता नदी पार करने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान महज कुछ दिन का हाथी का बच्चा अपनी मां से अलग हो गया और तेज बहाव में बह गया। बैकुंठपुर के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) मुदित कुमार ने अखबार को बताया कि बच्चा गाजलडोबा बैराज के पास अपनी मां से अलग हुआ और करीब 4 किलोमीटर नीचे की ओर बह गया। उन्होंने बताया कि उस समय मां गाजलडोबा के पास ऊपर की ओर थी। जबकि बच्चा नदी के बहाव में काफी दूर चला गया।

मछुआरों ने नाव से किया रेस्क्यू

नदी में बहते हाथी के बच्चे को स्थानीय मछुआरों ने देखा। इसके बाद उन्होंने बिना समय गंवाए एक छोटी नाव से उसका पीछा किया। जब वे बच्चे तक पहुंचे, तब वह डूबने की स्थिति में था। मछुआरों ने उसे छोटी नाव में खींचकर सुरक्षित बाहर निकाला। फिर वन विभाग को इसकी सूचना दी। वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और बच्चे को अपने संरक्षण में ले लिया। DFO मुदित कुमार ने बताया कि उन्हें स्थानीय मछुआरों से हाथी के बच्चे के बारे में जानकारी मिली थी। टीम तुरंत मौके पर पहुंची और बच्चे को बचा लिया।

वेटरनरी जांच के बाद मां से मिलाया

रेस्क्यू के बाद वन विभाग ने हाथी के बच्चे को वापस लाकर उसकी पशु चिकित्सक से जांच कराई। राहत की बात रही कि बच्चे के शरीर पर कोई गंभीर चोट नहीं मिली। अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि बच्चे को ज्यादा देर तक इंसानी संपर्क में न रखा जाए। उन्हें डर था कि लंबे समय तक इंसानों के संपर्क में रहने से उसकी मां उसे स्वीकार करने से इनकार कर सकती है। इसलिए बचाव के बाद उसे जल्द से जल्द उसकी मां और झुंड तक पहुंचाया गया। मां ने बच्चे को स्वीकार कर लिया और उसे दूध भी पिलाया। इसके बाद बच्चा सुरक्षित रूप से अपने झुंड के साथ दोबारा जुड़ गया।

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हाथियों और वन्यजीवों के लिए अहम इलाका है बैकुंठपुर

आपको बता दें कि बैकुंठपुर वन प्रभाग सिलीगुड़ी और गाजलडोबा के पास स्थित है। इसके आसपास महानंदा और तीस्ता नदियां बहती हैं। यह इलाका एशियाई हाथियों, तेंदुओं और विभिन्न पक्षी प्रजातियों की महत्वपूर्ण आबादी के लिए जाना जाता है। चार दिन के हाथी के बच्चे को समय रहते बचाकर उसकी मां से मिलाने की यह घटना वन विभाग और स्थानीय मछुआरों के त्वरित समन्वय का उदाहरण है। फिलहाल, इस भावुक रेस्क्यू ऑपरेशन का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।