मोकामा विधायक अनंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका: रद्द हुई जमानत, 1 दिसंबर तक करना होगा सरेंडर

मोकामा विधायक अनंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका: रद्द हुई जमानत, 1 दिसंबर तक करना होगा सरेंडर

supreme court big jolt to anant singh

बिहार के मोकामा से बाहुबली विधायक अनंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। अदालत ने चर्चित दुलारचंद यादव हत्याकांड मामले में पटना हाई कोर्ट द्वारा अनंत सिंह को दी गई जमानत को रद्द कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि विधायक को 1 दिसंबर 2026 तक या उससे पहले संबंधित अधिकारियों के सामने सरेंडर करना होगा। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने इस पूरे मामले की जांच चार महीने के भीतर पूरी करने का भी आदेश दिया है। ALSO READ: ‘मैं राजनीति का कर्ज सूद समेत वापस करूंगा…’: चुनाव जीतते ही किस पर भड़के JDU MLC नीरज कुमार?

 

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों पलटा हाई कोर्ट का फैसला?

जस्टिस एम.एम. सुंदेश और जस्टिस पी.वी. वराले की बेंच ने सुनवाई करते हुए माना कि पटना हाई कोर्ट का अनंत सिंह को जमानत देने का फैसला गलत था। कोर्ट ने टिप्पणी की कि जमानत देते समय हाई कोर्ट ने अपराध की गंभीर प्रकृति और अनंत सिंह के लंबे आपराधिक इतिहास को नजरअंदाज किया था। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी जिससे विधायक को राहत मिली थी।

 

मृतक के पोते ने दायर की थी याचिका

अनंत सिंह की रिहाई को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती मृतक दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने दी थी। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया था कि जमानत हासिल करने के लिए दायर हलफनामे में अनंत सिंह ने अपने खिलाफ दर्ज 67 आपराधिक मामलों की पूरी और सही जानकारी छिपाई थी। आपराधिक इतिहास का पूरा खुलासा न किए जाने के इस बिंदु को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लिया और हाई कोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया। ALSO READ: आजम खान और अब्दुल्ला आजम को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत, 2 पैन कार्ड मामले में सजा निलंबित

कौन थे दुलारचंद यादव

बाढ़ में रहने वाले दुलारचंद यादव का जन्म मोकामा के तारतर गांव में हुआ था। इसी गांव में उनकी हत्या हुई। 90 के दशक में वो राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के संपर्क में आए और मोकामा विधानसभा से चुनाव भी लड़ा था। हालांकि इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। वे बाहुबली अनंतसिंह के भी करीबी रहे हैं लेकिन 2025 चुनाव में पीयूष प्रियदर्शी का समर्थन कर रहे थे। बताया जा रहा है कि इसी वजह से अनंतसिंह उनसे नाराज चल रहे थे।

 

विधानसभा चुनाव से पहले हुई थी हत्या

गौरतलब है कि दुलारचंद यादव की हत्या अक्टूबर 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान हुई थी। मोकामा के टाल इलाके में चुनाव प्रचार के दौरान बाहुबली विधायक अनंत सिंह और जन सुराज पार्टी के समर्थकों (जिनके साथ दुलारचंद यादव प्रचार कर रहे थे) के काफिले आमने-सामने आ गए थे। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच उपजे विवाद और हिंसा में 75 वर्षीय दुलारचंद यादव की गोली लगने और गाड़ी से कुचलकर मौत हो गई थी। इसके बाद अनंत सिंह इस मामले में आरोपी बनाए गए थे। जेल में रहते हुए उन्हें चुनाव में जीत मिली थी।

जनता दल यू की चिंता बढ़ी

बिहार में विधान परिषद चुनावों ने नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यू के लिए चिंता बढ़ा दी है। सीटों के लिहाज से देखेंगे तो चिंता समझ में नहीं आएगी। पार्टी के नेता कह भी रहे हैं कि पिछले चुनाव में यानी 2020 में भी इन आठ सीटों में से जदयू को सिर्फ एक सीट मिली थी। पटना स्नातक सीट पर उसके उम्मीदवार नीरज कुमार जीते थे और इस बार भी नीरज कुमार इस सीट से जीत गए हैं। यानी जदयू ने अपनी सीट बरकरार रखी है। हां, यह जरूर है कि पार्टी अतिरिक्त सीट नहीं जीत पाई। उनका कहना है कि विधानसभा चुनाव में इतना शानदार प्रदर्शन करने और सारी स्थितियां अनुकूल रहने के बावजूद जदयू एक से ज्यादा सीट नहीं जीत पाई यह सोचने वाली बात है लेकिन चिंता की बात नहीं है। हालांकि जब नतीजे की बारीकी में जाएंगे तो जदयू के लिए चिंता की बात दिखेगी। यह साफ दिख रहा है कि उसका कोर वोट आधार टूट रहा है।

उसकी सबसे पहली चिंता तो यह होनी चाहिए कि जब एनडीए के लिए अनुकूल माहौल है, जिसमें भाजपा अपने कोटे की चार में से तीन सीटें जीत जाती है तो जदयू सिर्फ एक ही सीट क्यों जीत पाई? गौरतलब है कि भाजपा ने सिर्फ एक सीट पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की गंवाई है। उसके लिए भी यह चिंता की बात है क्योंकि यह सीट उसके पास पिछले 30 साल से थी। इस सीट पर उसके सबसे कोर वोट यानी भूमिहारों ने उसका साथ छोड़ दिया और राजद के भूमिहार उम्मीदवार को जीता दिया। फिर भी उसने तीन सीटें जीती हैं। तिरहुत शिक्षक, दरभंगा स्नातक और कोशी शिक्षक क्षेत्र से उसे जीत मिली है। जबकि जनता दल यू का उम्मीदवार सिर्फ पटना स्नातक में जीता। सारण शिक्षक, तिरहुत स्नातक और दरभंगा शिक्षक में उसे हार मिली। दरभंगा शिक्षक सीट पर तो जनता दल यू का उम्मीदवार चौथे स्थान पर चला गया। यह इसलिए चिंता की बात है क्योंकि विधानसभा चुनाव के बाद दूसरी बार विधान परिषद चुनाव में जदयू ने खराब प्रदर्शन किया है। इससे पहले भोजपुर में स्थानीय निकाय वाले निर्वाचन क्षेत्र में जदयू ने अपनी सीट उपचुनाव में गंवा दी थी।

बहरहाल, जदयू के लिए इससे बड़ी चिंता की बात पटना स्नातक में कुर्मी वोट टूटने का है। पटना स्नातक में जदयू ने नीरज कुमार को टिकट दिया था। वे जीत गए हैं। लेकिन पटना और नालंदा के कुर्मी मतदाताओं ने तेजस्वी यादव की राजद के उम्मीदवार दिलीप पटेल को वोट किया। तभी दिलीप पटेल दूसरे स्थान पर रहे और कांटे की टक्कर दी। सोचें, नीतीश कुमार ने नीरज को टिकट दिया और निशांत कुमार नामांकन कराने व वोट मांगने गए, फिर भी कुर्मी मतदाताओं ने उम्मीदवार की जाति देख कर वोट किया। उनको राजद के साथ जाने में भी परहेज नहीं रहा। नालंदा और पटना में सामाजिक स्तर पर भी कुर्मी बनाम यादव का तनाव रहता है। फिर भी दिलीप पटेल को जम कर वोट पड़े। उनको यादव और मुस्लिम का एकतरफा वोट मिला। जदयू के लिए चिंता की बात यह भी है कि पटना स्नातक सीट के कारण ही पार्टी में विवाद हुआ। मोकामा के विधायक अनंत सिंह ने जनसुराज का समर्थन किया, जिसकी वजह से उनको पार्टी से निकाला गया। इससे मगध के क्षेत्र में भूमिहार और कोईरी, कुर्मी का आपसी समीकरण प्रभावित होगा। बिहार के दूसरे क्षेत्रों में भी अनंत सिंह के कारण भूमिहारों ने जदयू को छोड़ा। सारण सीट पर जदयू को हराने के लिए भूमिहार निर्दलीय राहुल राज के साथ चले गए तो दरभंगा शिक्षक में उन्होंने जनसुराज के सुरेश राय को वोट किया।

प्रशांत किशोर को भी झटका लगा

विधान परिषद के चुनाव में सबसे बड़ा झटका किसी पार्टी को लगा है तो वह जनसुराज पार्टी है। चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव में जीतने के बाद बिहार में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में लगे थे। इस लिहाज से उनके लिए इस बार विधान परिषद का चुनाव बड़ा मौका था। उन्होंने इस मौके का लाभ उठाने के लिए पूरा प्रयास भी किया। उन्होंने वह सब किया, जो दूसरी पार्टियां करती हैं। फिर भी कामयाबी नहीं मिली। उन्होंने पटना स्नातक सीट पर अपने उम्मीदवार के लिए बाहुबली अनंत सिंह का समर्थन भी स्वीकार किया। लेकिन उसका भी कोई फायदा नहीं मिला। दरभंगा शिक्षक क्षेत्र से उनकी पार्टी के सुरेश राय चुनाव जीत गए हैं। लेकिन यह जीत प्रशांत किशोर या जनसुराज की नहीं है। सुरेश राय पहले भाजपा से लड़ते थे। इस बार सीट जदयू को गई तो वे जनसुराज में चले गए औऱ अपने वोट से चुनाव जीत गए।

इसके अलावा सातों सीटों पर जनसुराज को कुछ हासिल नहीं हुआ है। एकाध सीट छोड़ दें तो वह मुख्य मुकाबले से बाहर रही है। पिछली बार उन्होंने सारण शिक्षक सीट पर समर्थन देकर निर्दलीय आफाक अहमद की जीत में मदद की थी। इस बार वे जनसुराज से लड़े थे। लेकिन सीटिंग एमएलसी होने के बावजूद तीसरे स्थान पर चले गए। उन्होंने अनंत सिंह के समर्थन से पटना स्नातक सीट पर अनुज सिंह को लड़ाया। लेकिन वे भी तीसरे स्थान पर रहे। पटना शिक्षक सीट पर भी उनकी प्रत्याशी दिव्या ज्योति बहुत दूर तीसरे स्थान पर रही। तिरहुत स्नातक सीट पर उनकी उम्मीदवार रश्मि विनायक भी तीसरे स्थान पर रही हैं। उन्होंने आठ में से चार सीटों पर भूमिहार उम्मीदवार दिए थे और दो मुस्लिम उम्मीदवार भी उतारे थे। लेकिन उसका भी कोई फायदा नहीं मिला।

Anant Singh: ‘मैं अपनी पार्टी बनाऊंगा…’; JDU से निकाले जाने पर मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह का बड़ा ऐलान

Anant Singh News: जनता दल यूनाइटेड (JDU) से निकाले जाने के बाद बिहार के मोकामा से बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने रविवार (25 अक्टूबर) को पार्टी नेतृत्व पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि JDU खत्म हो चुकी है। सिंह ने कहा कि भविष्य के चुनावों में उसे 10 सीटें भी मिलना मुश्किल होगा। साथ ही, उन्होंने अपनी खुद की राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा भी कर दी है। पार्टी द्वारा की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विधायक ने मौजूदा पार्टी नेतृत्व के अधिकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह पार्टी मूल रूप से बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की थी। लेकिन जिन नेताओं ने उन्हें पार्टी से बाहर निकाला है, उनके नेतृत्व में पार्टी ने अपना राजनीतिक वजूद खो दिया है।

पटना में पत्रकारों से बात करते हुए सिंह ने कहा कि पार्टी नेतृत्व द्वारा उनके खिलाफ की गई कार्रवाई को लेकर उन्हें कोई मलाल नहीं है। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, पटना में 6 साल के लिए JDU पार्टी से निकाले जाने पर अनंत सिंह ने कहा, “जनता मालिक है। जो कार्रवाई हुई है अच्छी हुई है। मुझे कोई दिक्कत नहीं है। पार्टी नीतीश कुमार की थी वे नहीं हैं तो पार्टी में कौन है? मैं कह रहा हूं कि निकाल दें। अब नीतीश कुमार नहीं हैं तो पार्टी खत्म हो गई। इनको 10 सीट आने में भी आफत होगी…मैं अपनी पार्टी बनाऊंगा…मैं पार्टी के पास टिकट मांगने नहीं गया था पार्टी ने बुलाकर मुझे टिकट दिया। जदयू का भविष्य खत्म है। मेरी नीतीश कुमार से कोई दूरी नहीं है। वे बीमार रहते हैं।”

नीतीश कुमार के प्रति आज भी सम्मान

सिंह ने कहा कि मुझे कोई पछतावा नहीं है। जो भी कार्रवाई की गई है, ठीक है। मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं है। विधायक ने दावा किया कि आने वाले चुनाव पार्टी की जमीनी हकीकत सबके सामने ला देंगे। उन्होंने आगे कहा, “JDU खत्म हो चुकी है। जब चुनाव होंगे, तो सब कुछ साफ हो जाएगा।” अपने खिलाफ कार्रवाई करने वाले पार्टी नेताओं की कड़ी आलोचना करने के बावजूद सिंह ने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ उनके निजी संबंध अभी भी कायम हैं।

सिंह ने कहा, “नीतीश जी और मेरे बीच कोई दूरी नहीं है। हमारे संबंध अच्छे हैं। मैं कभी उनसे मिलने जाऊंगा। इसमें कोई दिक्कत नहीं है। वे अपनी पार्टी अपने पास रखें। वैसे भी इसका कोई खास मतलब नहीं रह गया है।” इससे पहले, शनिवार को जनता दल (यूनाइटेड) ने मोकामा के विधायक अनंत कुमार सिंह और पूर्व विधायक नीलम देवी (पति-पत्नी) को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया। पार्टी ने उनकी प्राथमिक सदस्यता भी रद्द कर दी है। इसके अलावा भारत के संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत बिहार विधानसभा में अनंत सिंह की सदस्यता रद्द करने की सिफारिश की है।

अनंत सिंह पर क्यों हुई कार्रवाई?

बिहार JDU के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा द्वारा जारी एक आदेश के अनुसार, अनंत सिंह की प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई है। उन पर पार्टी के निर्देशों की अनदेखी करने, पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ अनुचित और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने, और हाल ही में हुए विधान परिषद चुनावों के दौरान पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ काम करने का आरोप है। आदेश में कहा गया है कि चुनावों के दौरान सिंह ने किसी दूसरी पार्टी के उम्मीदवार के लिए प्रचार किया था, जिसके चलते पार्टी ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है।

पार्टी की बिहार इकाई के अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा की ओर से जारी बयान में कहा गया कि अनंत सिंह की प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है। इसमें कहा गया है कि पार्टी के निर्देशों की अवहेलना करने, शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने और हाल में हुए विधान परिषद चुनाव में प्रतिद्वंद्वी दल के उम्मीदवार के लिए प्रचार करने के आरोपों में अनंत सिंह के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है।

जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार को किया समर्थन

अनंत सिंह ने बिहार विधान परिषद चुनाव में जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज सिंह के लिए प्रचार शुरू करके JDU के खिलाफ कथित तौर पर बगावत का रुख अपना लिया था। उन्होंने अनुज सिंह का समर्थन और उनके पक्ष में प्रचार करके विधान परिषद चुनाव में JDU के विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार को हराने का संकल्प लिया था।

JDU ने बिहार विधानसभा अध्यक्ष से संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की सिफारिश भी की। बयान में कहा गया कि पार्टी की पूर्व विधायक नीलम देवी (सिंह की पत्नी) की प्राथमिक सदस्यता भी कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के कारण तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है।

इससे पहले दिन में अनंत सिंह ने अनुज सिंह की जीत का भरोसा जताया। यहां उनके आवास पर 27 अक्टूबर को विधान परिषद चुनाव के नतीजे घोषित होने से कुछ दिन पहले ही मिठाइयां और अन्य पकवान तैयार किए जा रहे थे। सिंह के प्रभाव वाला मोकामा विधानसभा क्षेत्र 1990 से उनके परिवार के पास रहा है। हालांकि, इस दौरान कुछ समय के लिए एक प्रतिद्वंद्वी बाहुबली ने इस सीट पर कब्जा कर लिया था।

‘छोटे सरकार’ के नाम से फेमस हैं अनंत सिंह

मोकामा में ‘छोटे सरकार’ के नाम से पहचाने जाने वाले सिंह ने 2022 में अपनी पत्नी नीलम देवी को राजनीतिक विरासत सौंपी थी। उस समय UAPA के एक मामले में दोषी ठहराए जाने के कारण उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई थी। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने 2020 में उन्हें और दो साल बाद हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी को टिकट दिया था। हालांकि, नीलम देवी 2024 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल हो गईं। बताया जाता है कि उन्होंने यह कदम कथित तौर पर अपने पति की सहमति से उठाया था।

ये भी पढ़ें- जन्म लेते ही नवजात की घनी मूंछें और दाढ़ी देखकर लोग हैरान! AI का है कमाल या सच वायरल वीडियो? जानें पूरा मामला

JDU ने बाहुबली विधायक अनंत सिंह को पार्टी ने निकाला, पत्नी नीलम देवी पर भी नीतीश कुमार की बड़ी कार्रवाई

Anant Singh News: जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर शनिवार (24 अक्टूबर) को मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह और पूर्व विधायक एवं उनकी पत्नी नीलम देवी को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया। पार्टी की बिहार इकाई के अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा की ओर से जारी बयान में कहा गया कि अनंत सिंह की प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है। बयान में कहा गया है कि पार्टी के निर्देशों की अवहेलना करने, शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने और हाल में हुए विधान परिषद चुनाव में प्रतिद्वंद्वी दल के उम्मीदवार के लिए प्रचार करने के आरोपों में अनंत सिंह के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है।

क्यों हुई कार्रवाई?

अनंत सिंह ने बिहार विधान परिषद चुनाव में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज सिंह के लिए प्रचार शुरू करके JDU के खिलाफ कथित तौर पर बगावत का रुख अपना लिया था। उन्होंने अनुज सिंह का समर्थन और उनके पक्ष में प्रचार करके विधान परिषद चुनाव में JDU के विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार को हराने का संकल्प लिया था।

JDU ने बिहार विधानसभा अध्यक्ष से संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की सिफारिश भी की। आधिकारिक बयान में कहा गया कि पार्टी की पूर्व विधायक नीलम देवी की प्राथमिक सदस्यता भी कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के कारण तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है।

बिहार JDU अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा द्वारा जारी एक आदेश में पार्टी ने अनंत सिंह पर आरोप लगाया कि उन्होंने बार-बार पार्टी के निर्देशों की अवहेलना की और शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ अनुचित व अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। इसमें आगे कहा गया कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार और कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा के संदेशों के बावजूद, अनंत सिंह ने नीरज कुमार के खिलाफ अपना प्रचार जारी रखा।

ललन सिंह ने की थी नीतीश कुमार से मुलाकात

इस निष्कासन की घोषणा से कुछ समय पहले ही केंद्रीय मंत्री एवं सीनियर JDU नेता ललन सिंह ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पार्टी प्रमुख नीतीश कुमार से मुलाकात की थी। अनंत सिंह ने पहले ही कह दिया था कि वे किसी भी कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार हैं। अनंत सिंह ने कहा, “नीरज ने हमेशा नीतीश कुमार के नाम पर चुनाव लड़ा है। उनकी अपनी कोई साख नहीं है। उन्होंने पार्टी के लिए क्या योगदान दिया है? पार्टी अब उनका समर्थन कर रही है, लेकिन जब उन्होंने पिछले चुनावों में मेरा विरोध किया था, तब पार्टी चुप थी। मैं पार्टी की किसी भी कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार हूं।”

नीरज कुमार Vs अनंत सिंह

गुरुवार को नीतीश कुमार की नीरज कुमार से मुलाकात के बाद अनंत सिंह ने कहा कि JDU प्रमुख वहां चले जाते हैं, जहां उन्हें ले जाया जाता है। इस प्रचार अभियान के दौरान एक-दूसरे पर निजी हमले भी किए गए। मतदान से तीन दिन पहले जब नीरज कुमार को अस्पताल में भर्ती कराया गया, तो अनंत सिंह ने इसे नौटंकी करार दिया। 2015 से चली आ रही प्रतिद्वंद्विता यह विवाद 2015 के मोकामा विधानसभा चुनाव से शुरू हुआ था, जब अनंत सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा। उस समय JDU के उम्मीदवार रहे नीरज कुमार को हरा दिया था।

ये भी पढ़ें- Farooq Abdullah: ‘पाकिस्तान कश्मीरियों की रक्षा कर रहा है, वरना भारत के इरादे ठीक नहीं’; फारुक अब्दुल्ला के विवादित बयान पर बवाल, BJP भड़की

तब से उनके बीच मतभेद कई बार सामने आए हैं। बताया जाता है कि परिषद चुनावों से पहले पार्टी नेताओं ने उनके बीच सुलह कराने की कोशिश की थी। लेकिन ये कोशिशें नाकाम रहीं। शुक्रवार को मतदान के दौरान यह विवाद और बढ़ गया, जब मोकामा में अनुज सिंह और नीरज कुमार के समर्थक आपस में भिड़ गए। पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया। अनंत सिंह के करीबी सहयोगी छोटू सिंह को भी पटना में शांति भंग करने के आरोप में हिरासत में लिया गया।

विप चुनाव में बूथ कब्जा का आरोप, सपा ने दोबारा मतदान कराने की मांग की

समाजवादी पार्टी (सपा) ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) से विधान परिषद चुनाव में बूथ कब्जे की शिकायत करते हुए दोबारा मतदान कराने और प्राथमिकी दर्ज कर दोषियों को जेल भेजने की मांग की।

निर्वाचन आयोग के अनुसार, उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों (पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र) के लिए शुक्रवार को मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ और चुनाव में 55.24 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।

सपा मुख्यालय से शनिवार को जारी एक बयान के अनुसार, पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के निर्देश पर प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को संबोधित ज्ञापन सौंपकर बूथ कैप्चरिंग की शिकायत की।

पार्टी ने अमरोहा, आगरा, फतेहपुर और प्रतापगढ़ सहित अन्य जिलों में बूथ कैप्चरिंग की शिकायतों पर तत्काल संज्ञान लेने की मांग की।

सपा ने कहा कि मतदान केंद्रों की वीडियो रिकॉर्डिंग और प्रत्याशियों तथा राजनीतिक दलों की ओर से की गई शिकायतों के आधार पर संबंधित बूथों पर दोबारा मतदान कराया जाए। पार्टी ने पुलिस थानों में प्राथमिकी दर्ज कराकर बूथ कैप्चरिंग के आरोपियों को जेल भेजने की भी मांग की।

Also Read : अनंत सिंह पर जेडीयू का बड़ा एक्शन पार्टी से निष्कासित

बयान के मुताबिक, सपा ने आरोप लगाया कि कानपुर नगर, कानपुर देहात और उन्नाव को छोड़कर प्रदेश के 72 जिलों में विधान परिषद की 11 सीटों के लिए हुए मतदान के दौरान सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मंत्रियों, सांसदों और विधायकों ने मतदान को प्रभावित किया। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि उसने बड़ी संख्या में लिखित शिकायतें भारत निर्वाचन आयोग को दीं, लेकिन आयोग मूकदर्शक बना रहा।

सपा ने ज्ञापन में अमरोहा के सात, आगरा के पांच तथा फतेहपुर और प्रतापगढ़ के एक-एक मतदान केंद्र सहित बूथ कैप्चरिंग की शिकायत वाले सभी केंद्रों पर दोबारा मतदान कराने की मांग की।

बयान के अनुसार, प्रदेश सचिव के.के. श्रीवास्तव, समाजवादी पार्टी की राज्य कार्यकारिणी के सदस्य डॉ. हरिश्चन्द्र सिंह यादव और राधेश्याम सिंह ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर त्वरित कार्रवाई की मांग की।

विधान परिषद चुनाव में भाजपा और सपा के बीच मुकाबला माना जा रहा है। मतगणना 27 अक्टूबर को होगी।

Pic Credit : UNI

अनंत सिंह पर जेडीयू का बड़ा एक्शन पार्टी से निष्कासित

जनता दल (यूनाइटेड) ने कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर शनिवार को मोकामा के विधायक अनंत सिंह और पूर्व विधायक नीलम देवी को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया।

पार्टी की बिहार इकाई के अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा की ओर से जारी बयान में कहा गया कि अनंत सिंह की प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है।

इसमें कहा गया है कि पार्टी के निर्देशों की अवहेलना करने, शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने और हाल में हुए विधान परिषद चुनाव में प्रतिद्वंद्वी दल के उम्मीदवार के लिए प्रचार करने के आरोपों में अनंत सिंह के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है।

Also Read : आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा एसईएम के समक्ष पेश हुईं

अनंत सिंह ने बिहार विधान परिषद चुनाव में जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज सिंह के लिए प्रचार शुरू करके जद (यू) के खिलाफ कथित तौर पर बगावत का रुख अपना लिया था।

उन्होंने अनुज सिंह का समर्थन और उनके पक्ष में प्रचार करके विधान परिषद चुनाव में जद (यू) के विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार को ‘हराने’ का संकल्प लिया था।

जद (यू) ने बिहार विधानसभा अध्यक्ष से संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की सिफारिश भी की।

बयान में कहा गया कि पार्टी की पूर्व विधायक नीलम देवी की प्राथमिक सदस्यता भी कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के कारण तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है।

Pic Credit : UNI