
विधान परिषद के चुनाव में सबसे बड़ा झटका किसी पार्टी को लगा है तो वह जनसुराज पार्टी है। चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव में जीतने के बाद बिहार में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में लगे थे। इस लिहाज से उनके लिए इस बार विधान परिषद का चुनाव बड़ा मौका था। उन्होंने इस मौके का लाभ उठाने के लिए पूरा प्रयास भी किया। उन्होंने वह सब किया, जो दूसरी पार्टियां करती हैं। फिर भी कामयाबी नहीं मिली। उन्होंने पटना स्नातक सीट पर अपने उम्मीदवार के लिए बाहुबली अनंत सिंह का समर्थन भी स्वीकार किया। लेकिन उसका भी कोई फायदा नहीं मिला। दरभंगा शिक्षक क्षेत्र से उनकी पार्टी के सुरेश राय चुनाव जीत गए हैं। लेकिन यह जीत प्रशांत किशोर या जनसुराज की नहीं है। सुरेश राय पहले भाजपा से लड़ते थे। इस बार सीट जदयू को गई तो वे जनसुराज में चले गए औऱ अपने वोट से चुनाव जीत गए।
इसके अलावा सातों सीटों पर जनसुराज को कुछ हासिल नहीं हुआ है। एकाध सीट छोड़ दें तो वह मुख्य मुकाबले से बाहर रही है। पिछली बार उन्होंने सारण शिक्षक सीट पर समर्थन देकर निर्दलीय आफाक अहमद की जीत में मदद की थी। इस बार वे जनसुराज से लड़े थे। लेकिन सीटिंग एमएलसी होने के बावजूद तीसरे स्थान पर चले गए। उन्होंने अनंत सिंह के समर्थन से पटना स्नातक सीट पर अनुज सिंह को लड़ाया। लेकिन वे भी तीसरे स्थान पर रहे। पटना शिक्षक सीट पर भी उनकी प्रत्याशी दिव्या ज्योति बहुत दूर तीसरे स्थान पर रही। तिरहुत स्नातक सीट पर उनकी उम्मीदवार रश्मि विनायक भी तीसरे स्थान पर रही हैं। उन्होंने आठ में से चार सीटों पर भूमिहार उम्मीदवार दिए थे और दो मुस्लिम उम्मीदवार भी उतारे थे। लेकिन उसका भी कोई फायदा नहीं मिला।

