केंद्र सरकार ने देश के बुजुर्गों की देखभाल से जुड़े 755 प्रोजेक्ट्स के लिए ₹77.98 करोड़ की ग्रांट-इन-एड जारी की है। ये रकम 30 सितंबर 2026 को खत्म हुई तिमाही के लिए दी गई है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने बुधवार को ये जानकारी दी। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, ये पैसा इंटीग्रेटेड प्रोग्राम फॉर सीनियर सिटिजंस यानी IPSrC के तहत जारी हुआ है, जो अटल वयो अभ्युदय योजना (AVYAY) का एक हिस्सा है। रकम बड़ी है, प्रोजेक्ट्स की गिनती भी बड़ी है। लेकिन इस खबर का असली मतलब तब समझ आता है, जब हम ये देखते हैं कि ये पैसा जाता कहां है और किसके काम आता है।
755 प्रोजेक्ट्स, ₹77.98 करोड़ और एक तिमाही का हिसाब
ये ग्रांट वित्त वर्ष 2026-27 के लिए IPSrC के तहत जारी की गई है। IPSrC का काम है बुजुर्गों को संस्थागत देखभाल देना, यानी ऐसी जगहों पर सहारा देना जहां उनकी देखरेख एक व्यवस्था के तहत हो सके। इसके साथ ही उनसे जुड़ी दूसरी भलाई की सुविधाओं को भी यही प्रोग्राम सपोर्ट करता है।
अब इसे जरा गहराई से देखिए। एक ही तिमाही में 755 अलग-अलग प्रोजेक्ट्स तक पैसा पहुंचा है। हर प्रोजेक्ट के पीछे कोई न कोई ऐसी जगह है, जहां बुजुर्गों को रहने, खाने या देखभाल का सहारा मिलता है। यानी ये सिर्फ सरकारी फाइल में दर्ज एक आंकड़ा नहीं है। ये उन लोगों की रोज की जिंदगी से जुड़ा पैसा है, जो उम्र के उस पड़ाव पर हैं जहां सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। ग्रांट-इन-एड का सीधा मतलब है सरकार की तरफ से दी जाने वाली मदद की रकम। ये पैसा उन प्रोजेक्ट्स को चलाने में लगता है, जो बुजुर्गों के लिए काम कर रहे हैं।
ये भी पढ़ें: DA Hike: चपरासी, टीचर से लेकर अधिकारी तक… 3% DA Hike से किसकी कितनी बढ़ेगी सैलरी? देखें पूरा कैलकुलेशन
क्या है अटल वयो अभ्युदय योजना?
अटल वयो अभ्युदय योजना की शुरुआत 2021 में हुई थी। ये सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की फ्लैगशिप योजना है, यानी मंत्रालय की सबसे अहम योजनाओं में से एक। इस योजना के पीछे दो बड़े विचार हैं, जिन्हें मंत्रालय “एजिंग विद डिग्निटी” और “एजिंग इन प्लेस” कहता है।
इस योजना की खास बात ये है कि ये बुजुर्गों की कई जरूरतों को एक ही छतरी के नीचे ले आती है। इसमें रहने की जगह, खाना, इलाज, मनोरंजन की सुविधाएं और समुदाय की तरफ से मिलने वाला सहारा, सब कुछ शामिल है। एक तरह से देखें तो ये योजना बुजुर्ग की पूरी दिनचर्या को ध्यान में रखकर बनाई गई है। सुबह की दवा से लेकर शाम को किसी से बात करने की जरूरत तक, हर पहलू इसके दायरे में आता है।
योजना सिर्फ सीधी मदद तक सीमित नहीं है। ये उन लोगों और संस्थाओं को भी मजबूत करना चाहती है, जो बुजुर्गों के लिए काम करते हैं। इसमें सरकारी एजेंसियां, गैर-सरकारी संगठन यानी NGO, स्थानीय निकाय और समुदाय शामिल हैं। मतलब ये कि बुजुर्गों की देखभाल के लिए एक पूरा नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश है, ताकि मदद किसी एक जगह पर अटककर न रह जाए।
राष्ट्रीय वयोश्री योजना
संस्थागत देखभाल के अलावा भी सरकार की कुछ ऐसी योजनाएं हैं, जिनका फायदा बुजुर्ग उठा सकते हैं। इनमें सबसे काम की है राष्ट्रीय वयोश्री योजना, जिसे RVY भी कहा जाता है।
इस योजना के तहत उम्र से जुड़ी दिव्यांगता या कमजोरी झेल रहे बुजुर्गों को सहायक उपकरण मुफ्त दिए जाते हैं। एक ऐसे बुजुर्ग के बारे में सोचिए, जिसे चलने में दिक्कत होती है, या जो ठीक से सुन नहीं पाते, या जिनकी आंखें अब अखबार के अक्षर साफ नहीं पढ़ पातीं। ऐसे में एक छड़ी, एक व्हीलचेयर, सुनने की मशीन या एक चश्मा उनकी जिंदगी को काफी हद तक आसान बना सकता है। RVY के तहत यही उपकरण दिए जाते हैं। कौन सा उपकरण मिलेगा, ये हर व्यक्ति की अपनी जरूरत पर तय होता है।
अब सवाल ये कि इसका फायदा किसे मिलेगा। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के मुताबिक, वो बुजुर्ग इसके दायरे में आते हैं जिनकी मासिक आय ₹15,000 तक है और जो योजना की बाकी लागू शर्तें भी पूरी करते हैं। यानी आय की सीमा पहली शर्त है, लेकिन अकेली शर्त नहीं है। इस योजना को जमीन पर उतारने का काम आर्टिफिशियल लिम्ब्स मैन्युफैक्चरिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी ALIMCO करता है। उपकरण बुजुर्गों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी इसी के पास है।
एक कॉल पर मदद
कई बार बुजुर्गों को किसी उपकरण या पैसे से ज्यादा जरूरत होती है एक ऐसे इंसान की, जो उनकी बात सुने और सही रास्ता बताए। इसी जरूरत के लिए है एल्डरलाइन। ये नेशनल टोल-फ्री हेल्पलाइन है, जिसका नंबर है 14567।
इस नंबर पर बुजुर्ग किसी भी तरह की जानकारी ले सकते हैं, सलाह ले सकते हैं और भावनात्मक सहारा भी पा सकते हैं। सोचिए, घर में अकेले बैठे किसी बुजुर्ग के मन में कोई सवाल है या कोई परेशानी है, तो उसे बस यही 5 अंक डायल करने हैं।
एल्डरलाइन का काम सिर्फ फोन पर बात करने तक नहीं रुकता। अगर किसी बुजुर्ग के साथ दुर्व्यवहार हो रहा है, या कोई ऐसी स्थिति है जहां उसे मदद चाहिए, तो ये सर्विस मौके पर जाकर दखल देने की सुविधा भी देती है। यानी जरूरत पड़ने पर मदद सीधे जमीन तक पहुंच सकती है। ये हेल्पलाइन अक्टूबर 2021 में शुरू की गई थी।
ये भी पढ़ें: LPG से लेकर ITR तक…1 नवंबर से बदल जाएंगे ये 5 बड़े फाइनेंशियल नियम! आपकी जेब पर पड़ेगा सीधा असर!
2036 तक 23 करोड़ बुजुर्ग
इन योजनाओं की अहमियत तब और बढ़ जाती है, जब हम देश में बुजुर्गों की बढ़ती आबादी को देखते हैं। PTI की रिपोर्ट में दी गई जानकारी के मुताबिक, 2036 तक भारत में बुजुर्गों की आबादी 23 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है।
अब जरा पीछे चलते हैं। 2011 की जनगणना में देश में 60 साल और उससे ज्यादा उम्र के 10.38 करोड़ लोग दर्ज किए गए थे। इनमें 5.11 करोड़ पुरुष और 5.27 करोड़ महिलाएं थीं। यानी उस वक्त भी बुजुर्ग महिलाओं की संख्या बुजुर्ग पुरुषों से ज्यादा थी। और 2036 का अनुमान 2011 की गिनती के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है।
PTI की रिपोर्ट में लॉन्गिट्यूडिनल एजिंग स्टडी इन इंडिया यानी LASI के नतीजों का भी जिक्र है। ये स्टडी बुजुर्गों में कामकाज से जुड़ी सीमाओं पर रोशनी डालती है, यानी वो दिक्कतें जो उम्र के साथ रोज के काम करने में आने लगती हैं। इसके नतीजे बताते हैं कि बुजुर्गों के लिए भरोसेमंद देखभाल, हेल्थकेयर सर्विस और समुदाय के स्तर पर सहारे की कितनी जरूरत है।
यही वजह है कि 755 प्रोजेक्ट्स के लिए जारी ₹77.98 करोड़ की ये ग्रांट सिर्फ एक तिमाही का हिसाब नहीं, बल्कि उस बड़ी जरूरत की तरफ एक कदम है, जो आने वाले सालों में और गहरी होने वाली है।

