अमेरिका में 2 लाख विदेशियों के वीजा रद्द होंगे:इतिहास में पहली बार एक साथ इतने वीजा कैंसिल होंगे, अधिकारी बोले- घूमने आते हैं, फिर शरण मांगते

अमेरिकी सरकार 2 लाख तक विदेशी नागरिकों के बिजनेस और टूरिस्ट वीजा रद्द करने की तैयारी कर रही है। यह कदम लागू हुआ तो यह अमेरिकी इतिहास में एक साथ सबसे बड़ी संख्या में वीजा रद्द करने की कार्रवाई होगी। अमेरिकी विदेश विभाग आने वाले हफ्तों में B1 और B2 वीजा रद्द करने की घोषणा कर सकता है। ये वीजा 2016 से 2026 के बीच जारी किए गए थे और उन लोगों पर कार्रवाई होगी जिन्होंने अमेरिका में शरण के लिए आवेदन किया है या कर रहे हैं। विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि ऐसे लोग अमेरिका में कम समय के लिए आने वाले पर्यटक या कारोबारी के तौर पर दाखिल हुए थे, लेकिन बाद में स्थायी रूप से रहने के लिए शरण का आवेदन कर दिया।

वीजा रद्द होने का मतलब यह नहीं कि तुरंत अमेरिका से निकाल दिया जाएगा अमेरिकी विदेश विभाग ने वीजा रद्द होने वाले लोगों की संख्या बताने से इनकार किया है। अधिकारियों के मुताबिक यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से चलेगी, इसलिए संख्या बदल सकती है। वीजा रद्द होने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति को तुरंत अमेरिका से निर्वासित कर दिया जाएगा। जिन लोगों के शरण (Asylum) के मामले लंबित हैं, उनकी स्थिति बदली जा सकती है, लेकिन उनका बिजनेस या टूरिस्ट यात्री का दर्जा खत्म हो जाएगा। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका में वीजा नियम कड़े ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका ने वीजा नियम पहले ही कड़े कर दिए हैं। आवेदकों से सोशल मीडिया की जानकारी मांगी जा रही है, महंगे वीजा बॉन्ड की व्यवस्था की गई है और कुछ देशों के नागरिकों को वीजा देने पर रोक लगाई गई है। अमेरिकी उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडो ने कहा कि कुछ लोग टूरिस्ट या बिजनेस वीजा लेकर अमेरिका आते हैं और फिर वहां रहने के लिए asylum का आवेदन करते हैं। उन्होंने कहा कि asylum का इस्तेमाल इमिग्रेशन कानून से बचने के रास्ते के तौर पर नहीं होना चाहिए। पिछले 18 महीनों में 1.75 लाख वीजा रद्द हो चुके B1 वीजा आमतौर पर बिजनेस यात्रा के लिए, जबकि B2 वीजा पर्यटन, परिवार से मिलने या मेडिकल इलाज के लिए जारी किया जाता है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इन वीजा धारकों में कितने लोग asylum मांग चुके हैं या मांग रहे हैं और कितने लोग प्रस्तावित कार्रवाई से प्रभावित होंगे। पिछले 18 महीनों में अमेरिकी विदेश विभाग करीब 1.75 लाख वीजा रद्द कर चुका है। इनमें अपराध के आरोपी या दोषी लोग और अमेरिकी नीतियों के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बोलने वाले कुछ लोग भी शामिल हैं। ——————————–

अमेरिका में 2 लाख विदेशियों के वीजा रद्द होंगे:इतिहास में पहली बार एक साथ इतने वीजा कैंसिल होंगे, अधिकारी बोले- घूमने आते हैं, फिर शरण मांगते

अमेरिकी सरकार 2 लाख तक विदेशी नागरिकों के बिजनेस और टूरिस्ट वीजा रद्द करने की तैयारी कर रही है। यह कदम लागू हुआ तो यह अमेरिकी इतिहास में एक साथ सबसे बड़ी संख्या में वीजा रद्द करने की कार्रवाई होगी। अमेरिकी विदेश विभाग आने वाले हफ्तों में B1 और B2 वीजा रद्द करने की घोषणा कर सकता है। ये वीजा 2016 से 2026 के बीच जारी किए गए थे और उन लोगों पर कार्रवाई होगी जिन्होंने अमेरिका में शरण के लिए आवेदन किया है या कर रहे हैं। विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि ऐसे लोग अमेरिका में कम समय के लिए आने वाले पर्यटक या कारोबारी के तौर पर दाखिल हुए थे, लेकिन बाद में स्थायी रूप से रहने के लिए शरण का आवेदन कर दिया।

वीजा रद्द होने का मतलब यह नहीं कि तुरंत अमेरिका से निकाल दिया जाएगा अमेरिकी विदेश विभाग ने वीजा रद्द होने वाले लोगों की संख्या बताने से इनकार किया है। अधिकारियों के मुताबिक यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से चलेगी, इसलिए संख्या बदल सकती है। वीजा रद्द होने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति को तुरंत अमेरिका से निर्वासित कर दिया जाएगा। जिन लोगों के शरण (Asylum) के मामले लंबित हैं, उनकी स्थिति बदली जा सकती है, लेकिन उनका बिजनेस या टूरिस्ट यात्री का दर्जा खत्म हो जाएगा। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका में वीजा नियम कड़े ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका ने वीजा नियम पहले ही कड़े कर दिए हैं। आवेदकों से सोशल मीडिया की जानकारी मांगी जा रही है, महंगे वीजा बॉन्ड की व्यवस्था की गई है और कुछ देशों के नागरिकों को वीजा देने पर रोक लगाई गई है। अमेरिकी उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडो ने कहा कि कुछ लोग टूरिस्ट या बिजनेस वीजा लेकर अमेरिका आते हैं और फिर वहां रहने के लिए asylum का आवेदन करते हैं। उन्होंने कहा कि asylum का इस्तेमाल इमिग्रेशन कानून से बचने के रास्ते के तौर पर नहीं होना चाहिए। पिछले 18 महीनों में 1.75 लाख वीजा रद्द हो चुके B1 वीजा आमतौर पर बिजनेस यात्रा के लिए, जबकि B2 वीजा पर्यटन, परिवार से मिलने या मेडिकल इलाज के लिए जारी किया जाता है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इन वीजा धारकों में कितने लोग asylum मांग चुके हैं या मांग रहे हैं और कितने लोग प्रस्तावित कार्रवाई से प्रभावित होंगे। पिछले 18 महीनों में अमेरिकी विदेश विभाग करीब 1.75 लाख वीजा रद्द कर चुका है। इनमें अपराध के आरोपी या दोषी लोग और अमेरिकी नीतियों के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बोलने वाले कुछ लोग भी शामिल हैं। ——————————–

नेतन्याहू बोले- ईरान ने बेटे की हत्या की कोशिश की:हमें मिली सिक्योरिटी एशोआराम के लिए नहीं, विपक्ष ने सवाल उठाए थे

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को कहा कि ईरान ने उनके परिवार को निशाना बनाया और उनके दो बेटों में से एक की हत्या की कोशिश की। उन्होंने यह बात सरकार समर्थक चैनल 14 को फोन पर दिए इंटरव्यू में कही। नेतन्याहू चुनाव से पहले अपने परिवार और दूसरे राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था पर बात कर रहे थे। नेतन्याहू के दो बेटे याइर और अनवर हैं। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि उनके दोनों बेटों में से किसे निशाना बनाया गया था। हत्या की कोशिश कब और कैसे की गई। नेतन्याहू बोले- सुरक्षा कोई ऐशोआराम नहीं है दरअसल इजराइल में कई महीनों से नेतन्याहू के परिवार के सदस्यों और राजनीतिक नेताओं को दी जा रही सुरक्षा पर सवाल उठ रहे थे। इसके बाद इजराइल की सुरक्षा एजेंसी शिन बेट ने नेतन्याहू की पत्नी सारा और उनके दोनों बेटों के लिए सुरक्षा बढ़ाने को मंजूरी दी है। नेतन्याहू ने कहा, उन्हें दी जा रही सुरक्षा कोई ऐशोआराम नहीं है। यह सुरक्षा उन्हें नेतन्याहू के आगामी चुनाव हारने की स्थिति में भी मिलेगी। अवनेर इजराइल में रहते हैं, जबकि याइर पिछले कुछ सालों से ज्यादातर मियामी में रह रहे हैं। याइर दक्षिणपंथी विचारों वाली अपनी टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कथित हत्या की साजिश की जानकारी इजराइल के सुरक्षा अधिकारियों को कई महीनों से थी। हालांकि, सैन्य सेंसर ने इसके प्रकाशन पर रोक लगा दी थी। खबर लगातार अपडेट की जा रही है।

नेतन्याहू बोले- ईरान ने बेटे की हत्या की कोशिश की:हमें मिली सिक्योरिटी एशोआराम के लिए नहीं, विपक्ष ने सवाल उठाए थे

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को कहा कि ईरान ने उनके परिवार को निशाना बनाया और उनके दो बेटों में से एक की हत्या की कोशिश की। उन्होंने यह बात सरकार समर्थक चैनल 14 को फोन पर दिए इंटरव्यू में कही। नेतन्याहू चुनाव से पहले अपने परिवार और दूसरे राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था पर बात कर रहे थे। नेतन्याहू ने कहा, उन्हें दी जा रही सुरक्षा कोई ऐशोआराम नहीं है। नेतन्याहू के दो बेटे याइर और अवनर हैं। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि उनके दोनों बेटों में से किसे निशाना बनाया गया था। हत्या की कोशिश कब और कैसे की गई। नेतन्याहू अगला चुनाव हारे, तब भी मिलेगी सुरक्षा दरअसल इजराइल में कई महीनों से नेतन्याहू के परिवार के सदस्यों और राजनीतिक नेताओं को दी जा रही सुरक्षा पर सवाल उठ रहे थे। इसके बाद इजराइल की सुरक्षा एजेंसी शिन बेट ने नेतन्याहू की पत्नी सारा और उनके दोनों बेटों के लिए सुरक्षा बढ़ाने को मंजूरी दी है। यह सुरक्षा उन्हें नेतन्याहू के आगामी चुनाव हारने की स्थिति में भी मिलेगी। अगला चुनाव दो महीने में है। अवनर इजराइल में रहते हैं, जबकि याइर पिछले कुछ सालों से ज्यादातर मियामी में रह रहे हैं। याइर दक्षिणपंथी विचारों वाली अपनी टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कथित हत्या की साजिश की जानकारी इजराइल के सुरक्षा अधिकारियों को कई महीनों से थी। हालांकि, सैन्य सेंसर ने इसके प्रकाशन पर रोक लगा दी थी। नेतन्याहू परिवार की सुरक्षा पर विवाद क्या है इजरायल में प्रधानमंत्री और उनके परिवार को सुरक्षा मिलती है। विवाद तब बढ़ा, जब सारा नेतन्याहू और उनके दोनों वयस्क बेटों याएर व अवनर की सुरक्षा लंबे समय तक जारी रखने का फैसला हुआ। जुलाई 2026 में एक मंत्रीस्तरीय समिति ने नेतन्याहू और सारा को जीवनभर, जबकि दोनों बेटों को कम से कम 5 साल सुरक्षा देने का फैसला किया। आलोचकों का कहना है कि सुरक्षा की अवधि पहले से तय करने के बजाय वास्तविक खतरे के आधार पर समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए। बड़ा विवाद याइर नेतन्याहू की विदेश में सुरक्षा को लेकर है। वह अमेरिका के मियामी में रहते हैं, फिर भी उन्हें शिन बेट के सुरक्षाकर्मी मिलते हैं। 2018-2023 के बीच याएर, अवनर और सारा की सुरक्षा पर करीब 32 मिलियन शेकेल खर्च होने की जानकारी सामने आई थी। याइर को विदेश में निजी छुट्टियों के दौरान भी सुरक्षा मिलने पर सवाल उठे। आलोचकों का कहना है कि दोनों बेटे वयस्क हैं और विदेश में रहने वाले बेटे की महंगी सुरक्षा का खर्च इजरायली करदाताओं पर पड़ रहा है। ——————————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका का ईरान की कमाई के 5 रास्तों पर बैन: कहा- जो देश बिजनेस करेंगे, उन पर भी कार्रवाई अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था के 5 महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। जिनका इस्तेमाल ईरान दूसरे देशों में अपनी आर्थिक गतिविधियों के लिए करता है। इनमें डिजिटल एसेट्स (जैसे क्रिप्टोकरेंसी), टेक्नोलॉजी, सोना, एविएशन और शिपिंग के क्षेत्र शामिल हैं। अमेरिका इन क्षेत्रों के जरिए ईरान की कमाई और अंतरराष्ट्रीय कारोबार को रोकना चाहता है। पूरी खबर पढ़ें…

अमेरिका बोला-ईरान को फंड देने वाले सभी रास्ते बंद होंगे:पड़ोसी देश आर्थिक संबंध न रखें, नहीं तो अमेरिकी कार्रवाई का सामना करना होगा

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने सोमवार को ईरान के साथ आर्थिक संबंध रखने वाले देशों को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ऐसे देशों को अमेरिकी डॉलर की वित्तीय व्यवस्था से बाहर करने पर विचार कर सकता है। बेसेंट के मुताबिक, अमेरिका का लक्ष्य ईरान के लिए राजस्व के सभी संभावित स्रोतों को रोकना है। उन्होंने पड़ोंसी देशों से ईरान के साथ आर्थिक संबंध खत्म करने को कहा है। ऐसा नहीं करने पर उन्हें अमेरिकी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। अमेरिका ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि किन देशों पर सेकेंडरी प्रतिबंध लगाए जाएंगे। हालांकि, चीन, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदार हैं। खबर लगातार अपडेट की जा रही है।

शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत आ सकते हैं:चीनी राष्ट्रपति के साथ 400 अधिकारी होंगे; BRICS समिट में शामिल होने की उम्मीद

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अगले महीने नई दिल्ली में होने वाले BRICS समिट में शामिल हो सकते हैं। यह उनका 7 साल बाद भारत का पहला दौरा होगा। भारत 12-13 सितंबर को BRICS सम्मेलन की मेजबानी करेगा। रॉयटर्स के मुताबिक, जिनपिंग के साथ करीब 400 अधिकारियों का बड़ा प्रतिनिधिमंडल आ सकता है। जिनपिंग आखिरी बार 2019 में भारत आए थे। तब उनके साथ 200 से कम अधिकारी थे। जिनपिंग से बातचीत में सीमा विवाद सबसे अहम मुद्दा जिनपिंग के भारत दौरे की तैयारियों में LAC पर शांति और सीमा विवाद सबसे अहम मुद्दों में है। दोनों देश सीमा पर ऐसी व्यवस्था बनाने पर बात कर रहे हैं, जिससे किसी सैन्य घटना या तनाव का असर द्विपक्षीय रिश्तों पर न पड़े। व्यापार और जरूरी सामान की सप्लाई भी एजेंडे में भारत और चीन के बीच सिर्फ सीमा विवाद ही नहीं, बल्कि व्यापार और आर्थिक रिश्ते भी बातचीत का हिस्सा हैं। भारत चीन के साथ अपने बड़े व्यापार घाटे को कम करना चाहता है। इसके अलावा रेयर अर्थ मैगनेट और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट जैसे जरूरी सामान की सप्लाई को लेकर भी भारत अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। BRICS समिट की अध्यक्षता कर रहा है भारत इस साल BRICS की कमान भारत के पास है। BRICS दुनिया की बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। इसमें भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के साथ मिस्र, ईरान, इथियोपिया, UAE और इंडोनेशिया भी शामिल हैं। भारत की अध्यक्षता में पूरे साल अलग-अलग शहरों में बैठकें, मंत्रीस्तरीय सम्मेलन और कई स्तर की चर्चाएं हो रही हैं। भारत का फोकस ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने, आर्थिक सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल तकनीक, आतंकवाद से निपटने और सप्लाई चेन मजबूत करने पर है। यानी BRICS को सिर्फ राजनीतिक मंच नहीं, बल्कि व्यापार, निवेश और विकास के बड़े मंच के तौर पर आगे बढ़ाने की कोशिश है। ———————— ये खबर भी पढ़ें… रूसी राष्ट्रपति पुतिन सितंबर में भारत आ सकते हैं: बोले- मोदी से मुलाकात जल्द रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS समिट में शामिल हो सकते हैं। मॉस्को में सोमवार को भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात के दौरान पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जल्द मुलाकात की उम्मीद जताई। पूरी खबर पढ़ें…

अमेरिका H-1B वीजा पर ₹98 लाख वसूलेगा:ट्रम्प सरकार ने प्रस्ताव जारी किया; साल के आखिर तक नया नियम लागू हो सकता है

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प सरकार ने सोमवार को H-1B वीजा के लिए नया प्रस्ताव जारी किया है। इस प्रस्ताव के मुताबिक H-1B वीजा पर विदेशी कर्मचारियों को हर वीजा के लिए 1,03,265 डॉलर (करीब 98 लाख रुपए) की एक्सट्रा फीस देनी होगी। H-1B एक गैर-अप्रवासी वीजा है, जिसके जरिए अमेरिकी कंपनियां कुछ समय के लिए विदेशों से हाई स्किल वाले पेशेवरों को नौकरी पर रख सकती हैं। इस फीस से H-1B वीजा लेना पहले के मुकाबले बहुत महंगा हो जाएगा। पहले H-1B वीजा लेने में आमतौर पर करीब 2,000 से 5,000 डॉलर (करीब 1.9 लाख से 4.7 लाख रुपए ) तक फीस लगती थी। यह रकम अलग-अलग मामलों में अलग हो सकती थी। रॉयटर्स के मुताबिक, यह नया नियम साल के आखिर तक लागू किया जा सकता है।अगर यह लागू हो जाता है तो इसका सीधा असर भारतीयों पर पड़ेगा, क्योंकि इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल भारतीय IT और टेक प्रोफेशनल्स करते हैं। कोर्ट ने जून में फीस को गैरकानूनी बताया था पिछले साल ट्रम्प ने एक अस्थायी आदेश के जरिए यह फीस लागू की थी। लेकिन जून में अमेरिकी फेडरल कोर्ट ने इसे गैरकानूनी बताते हुए अमेरिकी सरकार को फीस वसूलने से रोक दिया था। अब बोस्टन की एक अपीलीय अदालत इस फैसले की समीक्षा कर रही है। वहीं, वॉशिंगटन डीसी की एक दूसरी अदालत इस मामले में एक बड़े कारोबारी संगठन की याचिका पर फैसला देख रही है। नए प्रस्ताव में अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) को फीस को स्थायी बनाने के लिए नियम बनाने का निर्देश दिया गया है। यानी सरकार अब इसे हमेशा के लिए कानून बनाने की कोशिश कर रही है। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

पुतिन बोले- रूस-भारत के बीच इस साल कारोबार बढ़ा:दोनों देशों के दशकों से रिश्ते मजबूत; भारत के विदेश मंत्री जयशंकर से मॉस्को में मुलाकात की

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि इस साल रूस और भारत के बीच कारोबार बढ़ा है। उन्होंने यह बात रूसी राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन में सोमवार को भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात के दौरान कही। पुतिन ने कहा कि रूस और भारत के बीच दशकों से मजबूत रिश्ते बने हुए हैं। दोनों देश व्यावहारिक तौर पर लगभग सभी क्षेत्रों में अपना सहयोग जारी रखे हुए हैं। उन्होंने कहा, मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि इस साल हमारा कारोबार बढ़ा है। पिछले साल इसमें थोड़ी कमी आई थी, लेकिन इस साल यह बढ़ रहा है। जयशंकर बोले- BRICS समिट के लिए राष्ट्रपति पुतिन का स्वागत है विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी SCO समिट में उनसे मिलने का इंतजार कर रहे हैं। जयशंकर ने कहा कि इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी BRICS समिट के लिए पुतिन का भारत में स्वागत करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों नेताओं की सालाना बैठक भी आपसी सुविधा के मुताबिक जल्द होगी। जयशंकर रविवार को मॉस्को पहुंचे थे। वह रूस के अपने दो दिन के दौरे पर हैं। उनका यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS समिट में शामिल होने की उम्मीद है। जयशंकर रूसी उपप्रधानमंत्री से भी मिले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को मॉस्को में रूस के उपप्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत-रूस के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को और बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। इस दौरान दोनों देशों के बीच साझेदारी बढ़ाने पर भी बात हुई। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

ईरान की करेंसी रियाल 20 लाख प्रति डॉलर पर पहुंची:यह अब तक का सबसे निचला स्तर, अमेरिकी प्रतिबंधों से बिगड़ी अर्थव्यवस्था

ईरानी करेंसी रियाल डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचल स्तर पर पहुंच गई है। इसकी वजह अमेरिका के साथ बीते करीब 6 महीने से जारी जंग और उसपर लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंध है। सवालों के जवाब में समझें पूरा मामला…. सवाल 1: ईरानी करेंसी को लेकर ताज़ा अपडेट क्या है? जवाब: ईरान की करेंसी रियाल अनरेगुलेटेड मार्केट में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। करेंसी ट्रैकिंग वेबसाइट बॉनबास्ट के आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार को 1 अमेरिकी डॉलर की कीमत 20 लाख ईरानी रियाल हो गई। सवाल 2: रियाल में अचानक इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई? जवाब: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पिछले हफ्ते ईरान के खिलाफ एक बड़ी आर्थिक कार्रवाई का ऐलान किया था। इस घोषणा के बाद से रियाल में करीब 4.5% की गिरावट दर्ज की गई है। सवाल 3: अमेरिका ईरान के खिलाफ क्या कदम उठा रहा है? जवाब : अमेरिका का मकसद ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करना है। इसके लिए अमेरिका ईरान के बचे हुए चुनिंदा कारोबारी पार्टनर्स को चेतावनी दे रहा है, फारस की खाड़ी में उसके मुख्य बंदरगाहों की नाकाबंदी कर रहा है और विदेशी मुद्रा का मुख्य जरिया माने जाने वाले तेल निर्यात पर पूरी तरह रोक लगाने की कोशिश कर रहा है। सवाल 4: ईरान के तेल कारोबार और बैंकिंग पर इसका क्या असर हुआ है? जवाब : ईरान के सेंट्रल बैंक के गवर्नर अब्दोलनासर हेम्मती के मुताबिक, देश का कच्चा तेल निर्यात “लगभग पूरी तरह बंद” हो गया है। इसके अलावा, ईरान के सबसे बड़े कारोबारी पार्टनर्स में शामिल संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी अगले आदेश तक ईरान के साथ सभी वित्तीय लेन-देन रोक दिए हैं। सवाल 5: अमेरिकी प्रशासन ने इस कार्रवाई पर क्या बयान दिया है? जवाब : अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने फाइनेंशियल टाइम्स में लिखा, “हमारा मकसद उन सभी आर्थिक लाइफलाइनों को काटना है जो इस व्यवस्था को चला रही हैं, ताकि तेहरान पूरी तरह अलग-थलग पड़ जाए।” उन्होंने चेतावनी दी कि आर्थिक मोर्चे पर ‘D-Day’ की शुरुआत हो चुकी है। सवाल 6: ईरान की घरेलू मीडिया और विश्लेषकों का इस गिरावट पर क्या कहना है? जवाब : ईरान के प्रमुख बिजनेस अखबार ‘दोनिया-ए एकतेसाद’ के अनुसार, विदेशी मुद्रा ट्रांसफर में आ रही रुकावटों और गिरते निर्यात के कारण यह संकट गहराया है। इसके साथ ही देश में आयात की बढ़ती मांग और महंगाई की आशंकाओं ने मिलकर करेंसी को कमजोर किया है। सवाल 7: चीन का इस पूरे मामले पर क्या रुख है? जवाब: ईरान से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाले देश चीन ने कहा है कि अमेरिका का आर्थिक दबाव काम नहीं करेगा। चीन ने युद्ध का कूटनीतिक समाधान निकालने की अपील की है। सवाल 8: अमेरिकी दबाव का मुकाबला करने के लिए ईरान की क्या योजना है? जवाब: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि उनका देश अमेरिकी दबाव का मुकाबला करने के लिए चीन समर्थक साझेदार देशों के साथ व्यापार को दोगुना करेगा। सवाल 9: रियाल के टूटने से आम जनता पर क्या असर होगा? जवाब: डॉलर के मुकाबले किसी भी करेंसी के कमजोर होने से रोजमर्रा की जरूरी चीजों जैसी दवाइयां, खाना तेजी से महंगा होता हैं। इससे हाइपरइन्फ्लेशन का खतरा खड़ा हो जाता है।

यूक्रेन को सीक्रेट मिसाइल तकनीक देगा ब्रिटेन:कीव में बनेगी लंबी दूरी की SCALP मिसाइल; रूस में अंदर तक हमला करने में सक्षम

रूस के खिलाफ जंग में मदद के लिए ब्रिटेन यूक्रेन को अपनी सीक्रेट मिसाइल तकनीक देगा। इससे कीव में ही लंबी दूरी की SCALP क्रूज मिसाइल बनाने का रास्ता साफ होगा। ब्रिटेन में इस मिसाइल को स्टॉर्म शैडो कहा जाता है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम सोमवार को अपनी पहली विदेश यात्रा पर यूक्रेन पहुंचे। इसी दौरान मिसाइल तकनीक साझा करने का ऐलान किया गया है। वे राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से मुलाकात करेंगे। फ्रांस और यूक्रेन की योजना है कि इस साल के आखिर तक यूक्रेन में SCALP की उत्पादन लाइन शुरू की जाए। इससे यूक्रेन को मिसाइल की तकनीक समझने और उसे देश में बनाने में मदद मिलेगी। ब्रिटेन ने यूक्रेन को लंबे साथ का भरोसा दिया यूक्रेन के स्वतंत्रता दिवस के मौके ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम सोमवार को राजधानी कीव पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कहा कि उनका देश यूक्रेन के साथ लंबे समय तक खड़ा रहेगा। उन्होंने कहा कि यूक्रेन की सुरक्षा ब्रिटेन की सुरक्षा से जुड़ी है। यूक्रेन अपनी लंबी दूरी की मिसाइलों पर भी काम कर रहा है। यूक्रेनी कंपनी फायर प्वाइंट ने एफपी-5 फ्लेमिंगो क्रूज मिसाइल बनाई है, जिसकी बताई गई मारक क्षमता करीब 3,000 किमी है। वहीं, रूसी मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचाव के लिए यूक्रेन को हवाई हमले रोकने वाली मिसाइलों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिकी पैट्रियट प्रणाली के लिए जरूरी मिसाइलों की कमी भी उसकी बड़ी परेशानी है।
खबर अपडेट हो रही है….