इंदौर के गोराकुंड में फूटी पानी की पाइपलाइन, 40 करोड़ में बनी स्मार्ट सड़क धंसी, भ्रष्टाचार का लीकेज आया सामने

इंदौर के गोराकुंड में फूटी पानी की पाइपलाइन, 40 करोड़ में बनी स्मार्ट सड़क धंसी, भ्रष्टाचार का लीकेज आया सामने

इंदौर के गोराकुंड क्षेत्र में मुख्य पेयजल पाइपलाइन फटने से बड़ा हादसा टल गया। अगर वाहन चालक ऐनवक्‍त पर न रुकते तो हादसे का शिकार हो सकते थे। हालांकि पाइपलाइन फटने से इंदौर की सड़क और पेजयल सप्‍लाय में भ्रष्टाचार का लीकेज सामने आ गया।

इस घटना के बाद स्‍मार्ट सिटी इंदौर के विकास को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। लोग कह रहे हैं स्‍वच्‍छता का तमगा लेकर प्रशासन भूल गया कि असली विकास पन्‍नी और मामूली कचरा साफ करना नहीं, बल्‍कि आम लोगों की सुरक्षा का ख्‍याल रखना है। आए दिन खराब सडकों की वजह से लोग हादसों का शिकार हो रहे हैं।

धंस गई 40 करोड़ रुपए की सड़क : पानी की पाइपलाइन में अचानक हुए भारी रिसाव के कारण लगभग 40 करोड़ रुपए की लागत से हाल ही में तैयार की गई स्मार्ट सिटी सड़क अचानक धंस गई। सड़क धंसने से मार्ग पर गहरा गड्ढा हो गया, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है और क्षेत्र में जलजमाव की स्थिति निर्मित हो गई है। स्थानीय प्रशासन और स्मार्ट सिटी परियोजना की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं, वहीं मेंटेनेंस टीम मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभालने में जुटी हुई है।

सीसीटीवी में दिखा भ्रष्‍टाचार का लीकेज : इंदौर के गोराकुंड में नई पाइपलाइन टेस्टिंग के दौरान 40 करोड़ की लागत से बनी स्मार्ट सिटी सड़क धंस गई। घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।

क्‍या है पूरा मामला : यहां गोराकुंड चौराहे के बेहद नज़दीक अचानक सड़क का एक बड़ा हिस्सा ज़मीन में धंस गया। यह घटना उस समय हुई जब क्षेत्र में बिछाई गई नई पानी की लाइन की टेस्टिंग का काम चल रहा था। टेस्टिंग के दौरान पानी के भारी दबाव के कारण सड़क के नीचे से अचानक पानी फूट पड़ा। इस घटना का एक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें सड़क धंसने का भयावह दृश्य साफ तौर पर देखा जा सकता है।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के निर्माण पर उठे गंभीर सवाल
गौरतलब है कि यह सड़क कोई आम सड़क नहीं है, बल्कि इसे इंदौर 'स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट' के तहत बनाया गया था। इस पूरी सड़क के निर्माण पर करीब 40 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि खर्च की गई थी। इतने बड़े बजट और आधुनिक दावों के बावजूद महज पानी की टेस्टिंग के दौरान सड़क का इस तरह धंस जाना निर्माण की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े करता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इतने बड़े बजट से बनी स्मार्ट सिटी की सड़कों की पहली ही जाँच में हवा निकल गई है।

CCTV में कैद हुआ हादसे का खौफनाक मंजर
घटना के दौरान पास में लगे एक सीसीटीवी कैमरे में पूरी वारदात रिकॉर्ड हो गई। फुटेज में देखा जा सकता है कि पानी की नई लाइन की टेस्टिंग के दौरान जैसे ही पानी का दबाव बढ़ा, सड़क के निचले हिस्से की मिट्टी कट गई। देखते ही देखते सड़क का एक बड़ा हिस्सा ताश के पत्तों की तरह ढह गया और ज़मीन के अंदर समा गया। शुक्र इस बात का रहा कि हादसे के वक्त उस स्थान से कोई राहगीर या वाहन नहीं गुजर रहा था, वरना कोई बड़ा हादसा हो सकता था।

भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण सामग्री के आरोप
40 करोड़ रुपए की लागत से बनी सड़क के इस तरह धंसने के बाद स्थानीय प्रशासन और ठेकेदारों की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठने लगी हैं। नागरिकों का आरोप है कि सड़क निर्माण में घटिया सामग्री और लापरवाही बरती गई है। नई पानी की लाइन डालते समय सही तरीके से बेस तैयार नहीं किया गया था। फिलहाल पानी की सप्लाई को रोककर मामले की जाँच के आदेश दिए गए हैं, लेकिन इस घटना ने स्मार्ट सिटी के दावों की पोल खोलकर रख दी है।

सड़कों के गड्ढे भरने में 50 करोड़ का बजट, रोजाना 14 लाख का खर्च, आखिर खुदे हुए इंदौर का खुदा कौन?

सड़कों के गड्ढे भरने में 50 करोड़ का बजट, रोजाना 14 लाख का खर्च, आखिर खुदे हुए इंदौर का खुदा कौन?

Indore roads

देश के सबसे स्वच्छ और नंबर-1 शहर इंदौर में स्वच्छता के चमकते मॉल्‍स के सामने सड़कों की खस्ताहाली एक बड़ा और कड़वा सच बन चुकी है। स्थिति यह है कि स्वच्छता का तमगा पहने इस महानगर के लगभग हर इलाके में मुख्य मार्गों से लेकर अंदरूनी कॉलोनियों तक सड़कें खुदी पड़ी हैं।

सबसे हैरान करने की बात यह है कि सड़कों के गड्ढे भरने के नाम पर सालाना 50 करोड़ रुपए का भारी-भरकम बजट है। इनमें से 12 करोड़ रुपए खर्च करने का दावा भी किया जा रहा है। इस काम के लिए रोजाना लगभग 14 लाख रुपए झोंकने का दावा किया जाता है, इसके बावजूद शहरवासियों के हिस्से केवल धूल, कीचड़ और दर्दनाक सफर आ रहा है। हाल ही में एक शख्‍स की सडक से फिसलकर गिरने से मौत हो गई। जिस तरफ जाओ, लोग खुदी हुई सड़कों से परेशान है। कहीं जाम लगता है तो कहीं लोग कीचड़ में से निकलने के लिए मजबूर हैं।

मरम्‍मत पर हर साल 50 करोड़ का बजट
इंदौर नगर निगम द्वारा शहर की सड़कों के रखरखाव और पैचवर्क के लिए हर साल 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसके तहत प्रतिदिन औसतन 14 लाख रुपए खर्च होने का हिसाब दिया जाता है। बावजूद इसके, शहर के कई प्रमुख इलाकों—विजय नगर, एलआईजी, पालदा, राऊ, और शहर के कई अंदरूनी हिस्सों में सड़कों की चाल और हाल दोनों बिगड़े हुए हैं। भमोरी और जेल रोड पर भी सडकें खोद रखी है। भमोरी में नई सडक बन रही है तो जेल रोड पर कई दिनों से खुदाई का काम चालू है, जिससे नॉवेल्‍टी वाला पूरा इलाका बदहाल हो चुका है।

Indore roads

पैचवर्क पर सवाल, आखिर कहां जा रहा है पैसा?
शहर का एक बड़ा हिस्सा सीमेंटीकृत होने के बावजूद बार-बार डामर के पैचवर्क पर लाखों रुपये बहाए जा रहे हैं, जो पहली ही बारिश में उखड़कर जस के तस हो जाते हैं। रोजमर्रा की परेशानी: इन खुदी और गड्ढयुक्त सड़कों के कारण दोपहिया वाहन चालकों की कमर टूट रही है। आए दिन होने वाले हादसों में लोग चोटिल हो रहे हैं, वाहन खराब हो रहे हैं और ट्रैफिक जाम आम बात हो गई है।

50 में से 12 करोड़ रुपए खर्च
इंदौर में सड़कों के गड्ढों को भरने के लिए नगर निगम हर दिन करीब 14 लाख रुपए खर्च कर रहा है, लेकिन इसके बावजूद शहरवासियों को गड्ढों से राहत नहीं मिल पा रही है। सड़क मरम्मत के लिए सालाना करीब 50 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है और इसमें से करीब 12 करोड़ रुपए खर्च भी हो चुके हैं। इसके बाद भी कई इलाकों में सड़कें बदहाल नजर आ रही हैं।

गड्ढे भरने के लिए 50 करोड़ रुपये का बजट
बता दें कि इंदौर नगर निगम ने सड़कों के गड्ढे भरने और पेचवर्क के लिए सालाना करीब 50 करोड़ रुपए का बजट रखा है। सड़क निर्माण पर होने वाला खर्च इससे अलग है। इतनी बड़ी राशि निर्धारित होने के बावजूद शहर की कई सड़कों पर गड्ढों की स्थिति बनी हुई है।

कहां जा रहा पेचवर्क का बजट?
नगर निगम सड़कों के गड्ढे भरने पर रोजाना करीब 14 लाख रुपये खर्च करता है। आरक्षित राशि में से करीब 12 करोड़ रुपये खर्च भी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद शहरवासियों को कई जगह गड्ढों वाली सड़कों से गुजरना पड़ रहा है। पेचवर्क का काम कहां चल रहा है, इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

70 प्रतिशत सड़कें सीमेंट की, फिर डामर से पेचवर्क क्यों?
बता दें कि शहर में लगभग 70 प्रतिशत सड़कों का पूरी तरह सीमेंटीकरण हो चुका है। इसके बावजूद पेचवर्क के नाम पर डामर का काम कराया जाता है। यही वजह है कि पेचवर्क के तरीके और उस पर खर्च होने वाली राशि को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। आम लोगों के सवाल है कि यह कैसा पेचवर्क है कि सीमेंट की सडकों पर डामर का पेचवर्क किया जा रहा है। बारिश के दौरान डामर हट जाता है और कुछ समय बाद सड़कों पर दोबारा गड्ढे दिखाई देने लगते हैं। इससे पेचवर्क के बाद भी समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो पा रही है।

Indore roads

खजराना ब्रिज से लेकर श्रीनगर तक सब बदहाल
खजराना ब्रिज से श्रीनगर की ओर जाने वाले मार्ग पर भी गड्ढों की स्थिति बनी हुई है। यहां सड़क पर गड्ढे ही गड्ढे नजर आने की बात सामने आई है। भारी खर्च के बावजूद सड़क की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिखने से व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

नगर निगम ने कहा- लगातार कर रहे पेचवर्क
नगर निगम के जनकार्य प्रभारी राजेंद्र राठौर के अनुसार पेचवर्क का काम लगातार चलता रहता है। बारिश से पहले पूरे शहर में पैचवर्क कर सड़कों के गड्ढे भरवाए गए थे। ठेकेदारों को एक साल तक इन सड़कों का रखरखाव भी करना है। उन्होंने बताया कि फिलहाल बारिश की वजह से काम रुका हुआ है। बारिश थमने के बाद ठेकेदार बिना किसी अतिरिक्त राशि के दोबारा पेचवर्क करेंगे। इस संबंध में सभी ठेकेदारों को निर्देश जारी किए गए हैं।

बारिश में ही क्‍यों याद आती है मरम्‍मत?
दुखद बात है कि नगर निगम को बारिश में ही सड़कों की मरम्‍मत की याद आती है। एक तरफ बारिश,दूसरी तरफ कीचड़  और उस पर ट्रैफिक का दवाब। ऐसे में सड़कों को खोदकर निगम लोगों को बेहाल कर देता है। आखिर मानसून के पहले ही यह तैयारी क्‍यों नहीं की जाती है। बाजारों में खुदी सड़कों की वजह से कई तरह के व्‍यापारियों का धंधा चौपट हो रहा है। वहीं जाम आम वाहन चालक परेशान हो रहे वो अलग।

जमीन पर दिखती क्‍यों नहीं मरम्‍मत?
जनता के मन में अब यही सवाल सुलग रहा है कि जब मेंटेनेंस और रिपेयरिंग पर रोजाना लाखों खर्च हो रहे हैं, तो ज़मीन पर सुधार क्यों नहीं दिखता? विकास के इस दौर में सड़कों की इस बदहाली का जिम्मेदार आखिर किसे माना जाए—प्रशासनिक अमला या लापरवाह ठेकेदार?

सुबह 4 बजे MLA कुलदीप कुमार को घर से ले गई दिल्ली पुलिस? AAP का बड़ा दावा

सुबह 4 बजे MLA कुलदीप कुमार को घर से ले गई दिल्ली पुलिस? AAP का बड़ा दावा

AAP MLA Kuldeep kumar

आम आदमी पार्टी ने मंगलवार को दावा किया कि दिल्ली पुलिस के 20 जवान सुबह 4 बजे आप विधायक कुलदीप कुमार को घर से उठा ले गए। तब से वे लापता है। पार्टी का दावा है कि पुलिस ने विधायक को उस वक्त हिरासत में लिया, जब वह मारे गए सफाई कर्मचारी के परिवार के लिए न्याय और 1 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। ALSO READ: कीलों वाली लाठी से लेकर FRT तक… जंतर-मंतर प्रदर्शन पर दिल्ली पुलिस के हलफनामे की 5 बड़ी बातें

 

क्या है सौरभ भारद्वाज का दावा?

आप नेता सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर पोस्ट कर कहा कि आज सुबह 4 बजे, सादे कपड़ों में करीब 20 पुलिसकर्मी आए और AAP विधायक कुलदीप कुमार को अगवा कर ले गए। वह परिवार के लिए मुआवज़े की मांग करते हुए सफाई कर्मचारियों की आवाज उठा रहे थे। उन्होंने मांग की थी कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता परिवार से मिलें, लेकिन प्रदर्शनकारियों से मिलने के बजाय, वे विधायक कुलदीप कुमार को किसी अज्ञात जगह ले गए हैं।

 

भारद्वाज ने एक अन्य पोस्ट में आरोप लगाया कि पुलिस जबरदस्ती मृत सफाई कर्मचारी का दाह संस्कार करवाना चाह रही है। ​मृत सफाई कर्मचारी के परिवार के सदस्य चाहते हैं कि उन्हें न्याय मिले। ​मृत सफाई कर्मचारी दलित समाज से हैं और गरीब हैं, इसलिए दिल्ली पुलिस उस परिवार पर दबाव बनाकर जबरदस्ती अंतिम संस्कार करवाना चाह रही है। ALSO READ: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला, SIT जांच रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट

क्या बोले केजरीवाल?

आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, प्रधानमंत्री मोदी जी, हमारे विधायक कुलदीप कुमार कहां हैं? सुबह 4 बजे आपकी दिल्ली पुलिस कुलदीप कुमार को उनके घर से उठा ले गई, CCTV तोड़ दिए और DVR साथ ले गई। आपकी पुलिस कुछ नहीं बता रही। अगर एक विधायक को बिना किसी जानकारी के बिना किसी कारण इस तरह पुलिस घर से उठा कर ले जा सकती है तो इस देश में आम आदमी बेचारा कहां जाए। ये देश आपकी ऐसी गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं करेगा।

गौरतलब है कि सोमवार को दिल्ली भर के सैकड़ों सफाई कर्मचारियों और ऑटो-टिपर ड्राइवरों ने लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में विरोध प्रदर्शन किया। यह विरोध कल्याणपुरी में ड्यूटी पर तैनात सफाई कर्मचारी अनिल की हत्या के खिलाफ था। कर्मचारी मृतक के परिजनों को 1 करोड़ का मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं।

क्या भारत को घेरने की तैयारी है? पाकिस्तान-तुर्की के ‘मक्का पैक्ट’ से बांग्लादेश का जुड़ना भारत के लिए कितना बड़ा खतरा?

क्या भारत को घेरने की तैयारी है? पाकिस्तान-तुर्की के ‘मक्का पैक्ट’ से बांग्लादेश का जुड़ना भारत के लिए कितना बड़ा खतरा?

Islamic NATO

दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व के राजनीतिक क्षितिज पर एक बड़ा कूटनीतिक भूचाल आया है। पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब ने मिलकर 'मक्का रक्षा समझौते' (Mecca Joint Defense Agreement) पर हस्ताक्षर किए हैं। रक्षा विशेषज्ञों द्वारा इसे व्यापक रूप से 'इस्लामिक नाटो' (Islamic NATO) के रूप में देखा जा रहा है। इस समझौते के तहत प्रावधान किया गया है कि किसी भी एक सदस्य देश पर हुआ हमला सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा।

पाकिस्तान का मुख्य दांव न केवल मध्य पूर्व के रक्षा ढांचे में खुद को स्थापित करना है, बल्कि भारत के पड़ोसी देशों—विशेष रूप से बांग्लादेश—को भी इस बहुपक्षीय प्रभाव क्षेत्र में आकर्षित कर भारत को पूर्व और पश्चिम दोनों तरफ से कूटनीतिक रूप से घेरना है। ALSO READ: 'इस्लामिक नाटो' का आगाज! जानिए कैसे पाकिस्तान समेत तीन मुल्कों की डील ने बढ़ाई भारत की टेंशन

मक्का रक्षा समझौता और बांग्लादेश का संभावित समीकरण

सऊदी अरब की आर्थिक ताकत, तुर्की की आधुनिक रक्षा तकनीक और पाकिस्तान की सैन्य व परमाणु क्षमता के इस त्रिकोण के बाद अब पूर्वी मोर्चे पर बांग्लादेश के इस घटनाक्रम में शामिल होने के कयास लगाए जा रहे हैं:

  • बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन और विदेश नीति का बदलाव: बांग्लादेश के बदलते राजनीतिक माहौल में ढाका की विदेश नीति पाकिस्तान और तुर्की की तरफ झुकाव दिखा रही है।
  • तुर्की-बांग्लादेश रक्षा साझेदारी: तुर्की लंबे समय से बांग्लादेश के साथ रक्षा सहयोग और सैन्य उपकरण आपूर्ति (जैसे ड्रोन और बख्तरबंद वाहन) को मजबूत कर रहा है। पाकिस्तान और तुर्की का लक्ष्य बांग्लादेश को इस विस्तृत सुरक्षा/आर्थिक ब्लॉक से जोड़ना है।
  • टू-फ्रंट कूटनीतिक दबाव: यदि बांग्लादेश इस तरह के सुरक्षा या आर्थिक ब्लॉक का हिस्सा बनता है, तो भारत के पूर्वी हिस्से (चिकन नेक कॉरिडोर) के पास एक नया सुरक्षा समीकरण बन सकता है, जिससे भारत पर रणनीतिक दबाव बढ़ेगा।

islamic nato mecca accord


भारत की कूटनीतिक प्रतिक्रिया और काउंटर-रणनीति

भारत इस क्षेत्रीय गुटबंदी और बांग्लादेश के बदलते रुख पर पैनी नजर बनाए हुए है। भारत ने इसे संतुलित करने के लिए बहुस्तरीय रणनीति अपनाई है:

  1. आर्मेनिया और ग्रीस के साथ रक्षा गठबंधन: तुर्की-पाकिस्तान अक्ष को काटने के लिए भारत ने ग्रीस, साइप्रस और आर्मेनिया के साथ अपने सामरिक और रक्षा संबंधों को अभूतपूर्व ऊंचाई पर पहुंचाया है।
  2. सऊदी अरब व यूएई के साथ मजबूत द्विपक्षीय व्यापार: हालांकि सऊदी अरब इस मक्का समझौते का हिस्सा है, लेकिन भारत के साथ उसके भारी-भरकम आर्थिक व ऊर्जा संबंध बने हुए हैं, जिससे यह समझौता पूरी तरह भारत-विरोधी रुख में तब्दील होना आसान नहीं है।
  3. बांग्लादेश के साथ व्यावहारिक जुड़ाव: ढाका में राजनीतिक बदलाव के बावजूद, भारत अपनी “नेबरहुड फर्स्ट” नीति के तहत बांग्लादेश के साथ आर्थिक, बिजली आपूर्ति और व्यापारिक निर्भरता के जरिए संबंध सामान्य बनाए रखने का प्रयास कर रहा है।

पाकिस्तान द्वारा 'मक्का समझौते' के माध्यम से 'इस्लामिक नाटो' को आकार देना और उसमें बांग्लादेश जैसे दक्षिण एशियाई पड़ोसियों को आकर्षित करने की कोशिश भारत के लिए एक नई विदेश नीति चुनौती है। हालांकि, अरब देशों और पश्चिमी शक्तियों के अपने-अपने विरोधाभास इस ब्लॉक की वास्तविक सैन्य प्रभावकारिता को सीमित कर सकते हैं। भारत को अपनी समुद्री सुरक्षा, पूर्वोत्तर सीमा और बहुपक्षीय कूटनीति को पहले से अधिक सतर्क और मजबूत रखना होगा।

मोदी की टिप्पणी के बाद ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ इंस्टाग्राम पर 4 लाख से अधिक फॉलोअर्स के साथ हुई लोकप्रिय

मोदी की टिप्पणी के बाद 'दिमागी नक्सल पार्टी' इंस्टाग्राम पर 4 लाख से अधिक फॉलोअर्स के साथ हुई लोकप्रिय

Dimagi naxal Party

dimagi naxal party: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में इस्तेमाल किया गया शब्द 'दिमागी नक्सल' सोशल मीडिया पर एक बड़े राजनीतिक व्यंग्य में बदल गया है। पीएम के भाषण के ठीक एक दिन बाद इंस्टाग्राम पर 'दिमागी नक्सल पार्टी' नाम से बना एक पेज महज कुछ घंटों में 4,00,000 से अधिक फॉलोअर्स के साथ इंटरनेट पर छा गया है।

एक शब्द से खड़ा हुआ नया ऑनलाइन मूवमेंट

सोशल मीडिया की दुनिया में कब क्या ट्रेंड कर जाए, कोई नहीं जानता! स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी ने जैसे ही 'दिमागी नक्सल' शब्द का जिक्र किया, इंटरनेट पर एक नया डिजिटल आंदोलन खड़ा हो गया। 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) की तर्ज पर शुरू हुआ यह व्यंग्यात्मक इंस्टाग्राम पेज युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

अपने ही नेता से असहमत होना पहली शर्त

इस व्यंग्यात्मक पेज ने अपनी कार्यशैली और सदस्यता के नियमों को काफी अनोखे अंदाज में पेश किया है। इस पेज पर पहली शर्त रखी गई है कि कि “आप हमारी पार्टी में तभी शामिल हो सकते हैं जब आप अपने ही नेताओं से असहमत होने की हिम्मत रखते हों।” बायो में इस ग्रुप ने लिखा— “हम सोचते हैं। हम शोध करते हैं। हम विरोध करते हैं।”

भगत सिंह से प्रेरणा

इस पेज के संचालकों का दावा है कि वे शहीद-ए-आजम भगत सिंह की सोच पर चलते हैं। उन्होंने लिखा कि अगर उन्हें देश विरोधी बताया गया या उनका अकाउंट बंद किया गया, तो यह भगत सिंह की विचारधारा का अनादर होगा।

ऑरवेल के '1984' और 'थॉट क्राइम' से तुलना

पेज पर कई ऐसे पोस्ट शेयर किए गए हैं जिनमें पीएम मोदी की टिप्पणी की तुलना जॉर्ज ऑरवेल के प्रसिद्ध उपन्यास 1984 की 'थॉट क्राइम' (सोच से जुड़े अपराध) की अवधारणा से की गई है। पेज ने 'दिमागी नक्सल' की परिभाषा देते हुए लिखा— “एक ऐसा दिमाग जो दमनकारी शासनों के व्यवस्थित पैटर्न को पहचान सकता है।”

साइबर हमला या बैन का डर?

सोमवार को जब फॉलोअर्स का आंकड़ा 2 लाख पार कर गया, तो यह पेज अचानक कुछ समय के लिए दिखना बंद हो गया। इसके संचालकों ने 'एक्स' (ट्विटर) पर दावा किया कि उन्हें साइबर हमलों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बाद इंटरनेट यूजर्स ने “हटाए जाने से पहले फॉलो करें” की अपील के साथ इस पेज को तेजी से रीपोस्ट करना शुरू कर दिया।

पीएम मोदी ने भाषण में क्या कहा था?

दरअसल, 15 अगस्त के भाषण में प्रधानमंत्री ने कहा था कि सरकार ने सशस्त्र माओवादी उग्रवाद पर तो लगभग काबू पा लिया है, लेकिन अब इस विचारधारा ने अपना रूप बदल लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि माओवादी सोच वाले लोग लंबे समय से व्यवस्था के भीतर, सरकारी समितियों और सलाहकार मंडलों में बैठकर नीतियों को प्रभावित करते रहे हैं।

 

पीएम मोदी की इसी टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर एक तरफ राजनीतिक बहस छिड़ गई है, तो दूसरी तरफ 'दिमागी नक्सल पार्टी' के रूप में इंटरनेट का नया 'मीम कल्चर' भी देखने को मिल रहा है।

कीलों वाली लाठी से लेकर FRT तक… जंतर-मंतर प्रदर्शन पर दिल्ली पुलिस के हलफनामे की 5 बड़ी बातें

कीलों वाली लाठी से लेकर FRT तक... जंतर-मंतर प्रदर्शन पर दिल्ली पुलिस के हलफनामे की 5 बड़ी बातें

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दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस ज्यादती के आरोपों पर दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अपना विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल किया है। पुलिस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए केवल निर्धारित और अनुमत तरीकों से ही बल प्रयोग किया गया था। पुलिस के अनुसार, जब भीड़ ने बैरिकेड की कई परतें तोड़कर संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की और हिंसा शुरू हुई, तब प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं रह गया था। ALSO READ: मोदी के मंत्री ने की अभिजीत दीपके की तारीफ, कहा- अपना ही लड़का है, लेकिन…

 

डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस सचिन शर्मा की ओर से दाखिल हलफनामे में उन सभी परिस्थितियों का विस्तार से जिक्र किया गया है, जिसके चलते पुलिस को 'ग्रेडेड' (चरणबद्ध) कार्रवाई करनी पड़ी।
 

सुप्रीम कोर्ट में दिए गए जवाब की मुख्य बातें: 

भीड़ और पुलिसकर्मियों का अनुपात: दिल्ली पुलिस ने बताया कि लगभग 3 किलोमीटर के क्षेत्र में फैले 30 हज़ार से अधिक प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए मौके पर करीब 5 हज़ार पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। 
 

हिंसा और घायलों का आंकड़ा: स्थिति बेकाबू होने के बाद हुई झड़पों में 240 से अधिक पुलिसकर्मी और लगभग 200 आम लोग व प्रदर्शनकारी घायल हुए। अधिकारियों को भीड़ ने घेरा, उनका सुरक्षा कवच खींचा और उन पर पथराव किया। 


संसद मार्च गैरकानूनी: हलफनामे में स्पष्ट किया गया है कि छात्रों के संसद मार्च के लिए पुलिस की ओर से कोई अनुमति नहीं दी गई थी। इसलिए संसद की ओर बढ़ने का प्रयास एक गैरकानूनी सभा द्वारा किया गया कृत्य था। 


कील लगी लाठियां और सादी वर्दी का सच: पुलिस ने याचिकाओं में इस्तेमाल तस्वीरों और वीडियो को 'चुनिंदा और अधूरे' बताया है। कीलों वाली लाठी के आरोप पर पुलिस ने कहा कि वीडियो में दिख रहा डंडा पुलिस का नहीं, बल्कि एक प्रदर्शनकारी का था, जिस पर राष्ट्रीय ध्वज लगा हुआ था। वहीं, सादे कपड़ों में लाठी लिए पुलिसकर्मियों (स्पॉटर्स) की तैनाती को क्राइम ब्रांच और स्पेशल सेल की एक सामान्य और कानूनी सुरक्षा प्रक्रिया बताया गया है। 


आपराधिक तत्वों की मौजूदगी: पुलिस के अनुसार, इस प्रदर्शन में 2,873 ऐसे लोग शामिल थे, जिन पर हत्या, डकैती, दुष्कर्म और पॉक्सो (POCSO) जैसे गंभीर मामले पहले से दर्ज हैं। इनकी भूमिका की जांच के लिए दिल्ली पुलिस कमिश्नर द्वारा एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है।
 

फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी (FRT) का इस्तेमाल: प्रदर्शन स्थल पर चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक के उपयोग का भी पुलिस ने बचाव किया है। पुलिस ने हलफनामे में कहा कि यह तकनीक शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की निगरानी या निजी जानकारी जुटाने के लिए नहीं थी। इसका उपयोग केवल गंभीर अपराधों के पुराने रिकॉर्ड वाले लोगों की पहचान करने के लिए एक संतुलित उपाय के तौर पर किया गया। ALSO READ: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला, SIT जांच रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट

 

पुलिस ने अपने जवाब में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि अदालत बल प्रयोग के आरोपों की जांच के लिए किसी समिति का गठन करती है, तो दिल्ली पुलिस उसमें पूरा सहयोग करेगी। 

रील्स देखकर 1.5 करोड़ के लालच में किशोर की नृशंस हत्या, गुप्तांग काट तीन दिन तक पॉलीथिन में लेकर खरीदार ढूंढते रहे कातिल

रील्स देखकर 1.5 करोड़ के लालच में किशोर की नृशंस हत्या, गुप्तांग काट तीन दिन तक पॉलीथिन में लेकर खरीदार ढूंढते रहे कातिल

Bhopal Crime News

Bhopal crime News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (यूट्यूब और इंस्टाग्राम) पर रील्स देखकर रातों-रात करोड़पति बनने के अंधविश्वास में 17 साल के एक निर्दोष किशोर की बेरहमी से हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस जघन्य हत्याकांड का पर्दाफाश करते हुए मास्टरमाइंड सहित दो बालिग और तीन नाबालिग आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

अंधविश्वास और लालच का खतरनाक जाल

हत्या की मुख्य साजिश श्यामला हिल्स निवासी मुख्य आरोपी जोहेब खान (20 वर्ष) ने रची थी। जोहेब ने सोशल मीडिया पर कुछ फर्जी वीडियो और रील्स देखी थीं, जिनमें दावा किया गया था कि मानव शरीर का एक विशेष अंग (अंडकोष) अंतरराष्ट्रीय बाजार में 1.20 से 1.5 करोड़ रुपए में बिकता है। इस भ्रामक और झूठी खबर को सच मानकर जोहेब ने अपने साथी आमिर कुरैशी (18 वर्ष) और तीन अन्य नाबालिगों के साथ मिलकर हत्या का पूरा प्लान तैयार किया।

मदद के बहाने बुलाया और दिया वारदात को अंजाम

शाहजहांनाबाद निवासी पीड़ित किशोर 6 अगस्त को इकबाल मैदान के पास से संदिग्ध परिस्थितियों में गायब हो गया था। आरोपियों ने उसे 100 रुपए का लालच देकर और एक पुराने झगड़े में मदद करने के बहाने बुलाया। इसके बाद वे उसे धोबीघाट (छोटे तालाब) के पास एक सुनसान जगह पर ले गए। वहां आरोपियों ने चाकू और धारदार ब्लेड से किशोर पर ताबड़तोड़ हमला कर उसकी हत्या कर दी और शरीर से गुप्तांग को काटकर अलग कर दिया।

पॉलीथिन में कटे अंग को लेकर तीन दिन भटकते रहे आरोपी

वारदात को अंजाम देने के बाद जोहेब और उसके साथी कटे हुए अंग को एक पॉलीथिन में भरकर तीन दिनों तक भोपाल के अलग-अलग इलाकों में घूमते रहे और अंधविश्वास के तहत उसके खरीदार की तलाश करते रहे। जब तीन दिनों तक कोई खरीदार नहीं मिला और अंग खराब होने लगा, तो उन्होंने उसे पानी में फेंक दिया। 10-11 अगस्त को पुलिस ने छोटे तालाब से पीड़ित का शव बरामद किया, जिसके बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।

पुलिस की सख्त कार्रवाई और जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए भोपाल पुलिस (श्यामला हिल्स और तलैया थाना) ने विशेष टीम गठित की। सीसीटीवी फुटेज और साइबर सर्विलांस की मदद से पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मास्टरमाइंड जोहेब खान, आमिर कुरैशी और तीन नाबालिगों को हिरासत में ले लिया। पुलिस अब इस पहलू की भी गहराई से जांच कर रही है कि क्या इस खौफनाक अफवाह के पीछे कोई संगठित अंग-तस्करी गिरोह काम कर रहा है या यह पूरी तरह सोशल मीडिया के अंधविश्वास का परिणाम था।

मोदी के मंत्री ने की अभिजीत दीपके की तारीफ, कहा- अपना ही लड़का है, लेकिन…

मोदी के मंत्री ने की अभिजीत दीपके की तारीफ, कहा- अपना ही लड़का है, लेकिन...

Abhijit Dipke Cockroach Janata Party

Kiren Rijiju on Abhijit Deepke: संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने हाल ही में चर्चा में आए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके पर बड़ा बयान दिया है। रिजिजू ने दीपके को 'अपना ही लड़का' बताते हुए उनकी छात्र पहचान पर सवाल खड़े कर दिए और आरोप लगाया कि इस पूरे जेन-जी आंदोलन को राजनीतिक दलों ने हाईजैक कर लिया।

किरेन रिजिजू का राजनीतिक 'ट्विस्ट'

राजनीति में कब कौन 'अपना' हो जाए और कब 'पराया', यह कहना मुश्किल है! कुछ ऐसा ही नजारा तब देखने को मिला जब केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एएनआई से बातचीत के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और युवाओं के बीच तेजी से उभरते चेहरे अभिजीत दीपके पर खुलकर अपनी राय रखी। ALSO READ: CJP कार्यकर्ता के पिता की पीट-पीटकर जान ली, बंगाल में सरकारी स्कूल की बदहाली दिखाना पड़ा भारी, दीपके ने साधा निशाना

 

रिजिजू से जेन-जी आंदोलन और छात्रों की शिक्षा सुधार संबंधी मांगों पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बड़े ही दिलचस्प अंदाज में जवाब दिया। रिजिजू ने कहा कि यह जो अभिजीत दीपके है, वह हमारे अपने ही लड़के हैं, महाराष्ट्र से बौद्ध हैं…' लेकिन रिजिजू का यह प्यार यहीं नहीं रुका, उन्होंने तुरंत ही इस पर एक राजनीतिक 'ट्विस्ट' दे दिया।

वो स्टूडेंट कैसे हो गया?

नरम रुख दिखाने के तुरंत बाद रिजिजू ने दीपके की स्वतंत्र छात्र पहचान पर सीधा सवाल दाग दिया। उन्होंने कहा कि लेकिन वो तो आम आदमी पार्टी का कार्यकर्ता है, वो तो आप भी जानते हैं, सब जानते हैं… वो स्टूडेंट कैसे हो गया? रिजिजू ने आरोप लगाया कि चुनाव हारने के बाद विपक्षी पार्टियां छात्रों के पीछे छिपकर अपनी 'राजनीतिक रोटियां' सेकने में जुट जाती हैं। ALSO READ: 20 जुलाई को कहां थे भागवत? RSS के Gen-Z संवाद पर CJP प्रमुख दीपके का हमला, बोले- अब बहुत देर हो गई!

 

केन्द्रीय मंत्री रिजिजू ने कहा कि जंतर-मंतर पर हुए इतने बड़े प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने पूरी तरह शांति बनाए रखी और किसी को खरोंच तक नहीं आने दी, फिर भी सरकार पर दमन का झूठा नैरेटिव बनाया जा रहा है। हालांकि रिजिजू ने माना की छात्रों की चिंता जायज है। 

कौन हैं अभिजीत दीपके और क्यों मचा है बवाल?

अभिजीत दीपके 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर जेन-जी (Gen-Z) के बीच जबरदस्त पैठ बनाई है। CJP के जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद इसका तगड़ा सियासी असर देखने को मिला था। तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपना इस्तीफा तक देना पड़ा था। यह मूवमेंट NEET-UG 2026 पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा नीति जैसे गंभीर मुद्दों पर बेहद मुखर रहा है। 15 अगस्त 2026 से दीपके ने ग्रामीण सरकारी स्कूलों की बदहाली को उजागर करने के लिए देशभर में 'सोशल ऑडिट' अभियान शुरू किया है।

NDA से भी मिल चुका है न्योता!

दिलचस्प बात यह है कि रिजिजू से पहले केंद्रीय मंत्री और RPI (A) प्रमुख रामदास आठवले भी अभिजीत दीपके को अपनी पार्टी में आने का न्योता दे चुके हैं। आठवले ने कहा था कि बाबासाहेब आंबेडकर के सपनों को पूरा करने और समाज को मजबूत करने के लिए दीपके को RPI (A) यानी NDA के कुनबे में शामिल हो जाना चाहिए। अब देखना यह होगा कि 'अपना लड़का' कहे जाने और आप (AAP) का कार्यकर्ता बताए जाने के इस सियासी घेराबंदी पर अभिजीत दीपके और उनकी 'कॉकरोच जनता पार्टी' क्या रुख अपनाती है?

नितिन नवीन की नई टीम के चार चेहरे जो भाजपा की बदलते सियासी राजनीति की नई तस्वीर

नितिन नवीन की नई टीम के चार चेहरे जो भाजपा की बदलते सियासी राजनीति की नई तस्वीर

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम में एक ओर जहां सीनियर चेहरों को जगह दी गई वहीं कई नए चेहरों के जरिए एक 'नवीन' भाजपा की राजनीति संदेश भी दिया गया है। इस नई टीम के जरिए पार्टी ने आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के साथ संगठन में नए चेहरों को आगे करने और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बीच समन्वय को साधने का एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेला है। 

 

नितिन नबीन की इस 'नवीन' टीम ने एक तरफ जहां अमित मालवीय जैसे चेहरों को बाहर का रास्ता दिखाकर सोशल मीडिया और आईटी सेल में बड़े बदलाव का संकेत दिया है, वहीं दूसरी तरफ अनुभवी दिग्गजों स्मृति ईरानी, पीयूष गोयल और राममाधव जैसे पुराने दिग्गजों को वापस लाकर एक संतुलन बनाया गया है। भाजपा की नई टीम के गठन और फेरबदल का मूल संदेश स्पष्ट है भाजपा अब केवल तात्कालिक चुनावी जीत नहीं, बल्कि 2029 के आम चुनाव तक के लिए अपने सांगठनिक ढांचे को अभेद्य किला बना रही है।

 

स्मृति ईरानी उत्तर प्रदेश चुनाव में बनेगी चेहरा- 2024 लोकसभा चुनाव में अमेठी से हार के बाद पार्टी में हाशिए पर चल रही स्मृति ईरानी की दमदार वापसी हुई है,उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाकर पार्टी ने अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव मे महिला वोटर्स को साधने की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल से बाहर रहीं स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव जैसी बड़ी जिम्मेदारी देकर भाजपा ने साफ कर दिया है कि वे पार्टी की कोर लीडरशिप का हिस्सा बनी रहेंगी। स्मृति ईरानी के आक्रामक तेवर और गांधी परिवार पर सीधा अटैक करने के कारण पार्टी मुख्य रूप से 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में करेगी। वह संगठन और जनता के बीच एक पुल का काम करेंगी।

 

पीयूष गोयल सत्ता से अब संगठन की ओर- केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को पार्टी का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया है। वे 2014 में भी इस जिम्मेदारी को संभाल चुके हैं। गोयल के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनने के बाद अब वह मोदी कैबिनेट से बाहर हो सकते है। सियासी गलियारों में अटकलें हैं कि वे 'एक व्यक्ति, एक पद' की परंपरा के तहत पीयूष गोयल अपने पद से इस्तीफा देकर संगठन में पूरी तरह सक्रिय हो सकते है।

 

AAP से आए संदीप पाठक पंजाब में बनेंगे रणनीतिकार-आम आदमी पार्टी से भाजपा में आए संदीप पाठक को नितिन नवीन की नई टीम राष्ट्रीय मंत्री बनाया गया है। एक समय संदीप पाठक की गिनती अरविंद केजरीवाल के अहम सहयोगी के तौर होती थी और उन्हें आम आदमी पार्टी के सबसे अहम रणनीतिकारों में गिना जाता था। 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की शानदार जीत के पीछे उनकी जमीनी रणनीति और डेटा आधारित चुनावी प्रबंधन को महत्वपूर्ण माना गया था। आम आदमी पार्टी ने 2022 में हुए पंजाब विधानसभा चुनाव में 117 में से 92 सीटों पर जीत दर्ज कर सरकार बनाई थी। इसके बाद संदीप पाठक पार्टी के संगठन और चुनावी रणनीति में लगातार सक्रिय रहे। 

 

अप्रैल 2026 में उन्होंने राघव चड्ढा,अशोक मित्तल समेत आप के छह अन्य राज्यसभा सांसदों के साथ बीजेपी का दामन थाम लिया। अरविंद केजरीवाल से मतभेद के चलते 2026 में संदीप पाठक ने बीजेपी का दामन थामा और अब वह नितिन नवीन की नई टीम के एक प्रमुख चेहरे हो गए है। संदीप पाठक के अनुभव और चुनावी रणनीति का इस्तेमाल बीजेपी अपनी रणनीति मजबूत करने के लिए करना चाह रही है। खास तौर पर बूथ स्तर पर संगठन, वोटरों के माइक्रो मैनेजमेंट और डेटा आधारित चुनावी रणनीति में पाठक की विशेषज्ञता पार्टी के लिए अहम मानी जा रही है। पंजाब विधानसभा चुनाव में संदीप पाठक पार्टी के एक प्रमुख रऩनीतिकार के तौर पर नजर आएंगे

 
संघ और भाजपा में तालमेल बनाएंगे राममाधव-
पूर्व राष्ट्रीय महासचिव राम माधव को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त करना इस पूरी टीम का सबसे बड़ा चौंकाने वाला फैसला है। वह वर्तमान में संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं। राम माधव को कश्मीर और उत्तर-पूर्व में भाजपा के विस्तार का चाणक्य माना जाता है। उनकी वापसी का साफ मतलब है कि संघ और भाजपा अब आगामी चुनौतियों के लिए पूरी तरह एक सुर में काम करना चाहते हैं। राममाधव संघ और भाजपा के बीच एक कड़ी का काम करेंगे। 2024 के लोकसभा चुनाव के समय तत्कालिक भाजपा  अध्यक्ष जेपी नड्डा और आरएसएस के बीच तो तल्खी हुई थी उसके बाद 

 

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला, SIT जांच रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला, SIT जांच रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट

Clean chit for Champat Rai and Anil Mishra

Clean chit for Champat Rai and Anil Mishra: अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि मंदिर के दान व चढ़ावे में हुई कथित गड़बड़ी और चोरी के मामले में विशेष जांच टीम (SIT) ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा को बड़ी राहत दी है। एसआईटी द्वारा उत्तर प्रदेश शासन को सौंपी गई अंतिम जांच रिपोर्ट में दोनों प्रमुख पदाधिकारियों को क्लीन चिट मिल गई है और रिपोर्ट में किसी भी अनियमितता में उनकी संलिप्तता का कोई जिक्र नहीं है।

SIT की अंतिम रिपोर्ट में राय और मिश्रा को राहत

अयोध्या के बहुचर्चित राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। राज्य गृह विभाग द्वारा इस रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद इसे अग्रिम कार्रवाई के लिए 'श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' को भेज दिया गया है। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर चोरी के 81 लाख कैसे बरामद हुए? चंपत राय की चिट्‍ठी से खुला बड़ा राज

 

इस रिपोर्ट के सामने आते ही स्पष्ट हो गया है कि पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा के खिलाफ कोई आरोप तय नहीं हुए हैं और उन्हें इस मामले में क्लीन चिट दे दी गई है।

 

विवाद और पदों से इस्तीफा

जून माह में मंदिर के दान प्रबंधन और कैश काउंटिंग रूम से चढ़ावे की चोरी के आरोप सामने आए थे, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में जमकर बयानबाजी शुरू हो गई थी। विवाद गहराने और निष्पक्ष जांच की मांग के बीच चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा ने 27 जून को ट्रस्ट के अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। पूछताछ के दौरान चंपत राय ने स्पष्ट किया था कि उन्होंने स्वयं गड़बड़ी का पता चलते ही कार्रवाई की पहल की थी और शिकायत दर्ज कराई थी। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर में बड़ा बदलाव, ऑनलाइन दान करते ही तुरंत मिलेगी डिजिटल रसीद

क्या है पूरा मामला? 

एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट में कुल 8 आरोपियों के नाम शामिल हैं (अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव, करुणेश पांडे और राम शंकर यादव)। इन सभी को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। शुरुआती जांच में पाया गया था कि गिनती कक्ष में कर्मचारियों द्वारा नकदी छिपाने की घटनाएं हुई थीं। इसके साथ ही एसआईटी ने ट्रस्ट और बैंक के मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के क्रियान्वयन में कमियों की ओर भी इशारा किया था। राज्य सरकार ने 13 जून को लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में इस तीन सदस्यीय SIT का गठन किया था। 

 

उत्तर प्रदेश शासन की SIT द्वारा दी गई क्लीन चिट से चंपत राय और अनिल मिश्रा के समर्थकों ने राहत की सांस ली है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत गठित दूसरी एसआईटी की निगरानी प्रक्रिया भी समानांतर रूप से जारी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार की एसआईटी रिपोर्ट के बाद ट्रस्ट में दोनों दिग्गजों की भूमिका को लेकर क्या नया फैसला लिया जाता है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या अंतिम रिपोर्ट के बाद दोनों को फिर से ट्रस्ट में शामिल किया जाएगा?