भाजपा का बड़ा फैसला: तरुण चुघ बने गुजरात भाजपा के नए प्रभारी

भाजपा का बड़ा फैसला: तरुण चुघ बने गुजरात भाजपा के नए प्रभारी

tarun chugh gujarat state incharge

भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व और राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को देशभर में अधिक सक्रिय और मजबूत बनाने के उद्देश्य से विभिन्न राज्यों के नए प्रभारियों और सह-प्रभारियों की आधिकारिक घोषणा की गई है। गुजरात, उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में संगठन की जिम्मेदारी नए अनुभवी नेताओं को सौंपी गई है। राष्‍ट्रीय कार्यालय प्रभारी तरुण चुघ को गुजरात का प्रभारी बनाया गया है।

 

तरुण चुघ को सौंपी गई अहम जिम्मेदारी

इन नई नियुक्तियों के तहत गुजरात भाजपा के नए प्रभारी के रूप में तरुण चुघ को चुना गया है। राज्य में भाजपा संगठन को नई दिशा देने, पार्टी और सरकार के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने तथा कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरने के उद्देश्य से उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई है। केंद्रीय हाईकमान का मुख्य मकसद बूथ स्तर तक पार्टी की पकड़ को और मजबूत करना और संगठनात्मक गतिविधियों को गति देकर राज्य में भाजपा का वर्चस्व बरकरार रखना है।

 

उत्तर प्रदेश और पंजाब में भी संगठनात्मक बदलाव

गुजरात के साथ-साथ देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश और पंजाब सहित अन्य महत्वपूर्ण राज्यों के लिए भी नए प्रभारियों की घोषणा की गई है। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के अनुसार, राज्यों में स्थानीय स्तर पर संगठन अधिक मजबूती से काम करे और केंद्र सरकार की योजनाएं व पार्टी की नीतियां जन-जन तक पहुंचें, इसके लिए यह नई रणनीतिक व्यवस्था की गई है। इन बदलावों से आने वाले समय में राज्यों में भाजपा के संगठनात्मक कार्यों में नई ऊर्जा देखने को मिलेगी।

 

कौन हैं तरुण चुघ?

गुजरात के नए प्रभारी बने तरुण चुघ भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद हैं। मूल रूप से अमृतसर (पंजाब) के निवासी तरुण चुघ लंबे समय से पार्टी के संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय और निष्ठावान कार्यकर्ता के रूप में उभरे हैं। पार्टी ने उन पर हमेशा बड़े राज्यों की जिम्मेदारी सौंपकर विश्वास व्यक्त किया है।

इससे पहले वे तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों के प्रभारी के रूप में सफलतापूर्वक कार्य कर चुके हैं। संगठन को मजबूत करने के उनके इसी व्यापक अनुभव को देखते हुए भाजपा हाईकमान ने अब उन्हें गुजरात जैसे महत्वपूर्ण राज्य के प्रभारी की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।

दक्षेश्वर महादेव मंदिर: सावन में क्यों खास है कनखल का यह शिव धाम?

दक्षेश्वर महादेव मंदिर: सावन में क्यों खास है कनखल का यह शिव धाम?

Daksheshwar Mahadev Temple Kankhal

हरिद्वार के कनखल स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर का संबंध राजा दक्ष, माता सती और भगवान शिव की पौराणिक कथा से है। सीएम पुष्कर धामी ने भी मंगलवार को हरिद्वारा आने वाले श्रद्धालुओं से दक्षेश्वर महादेव के दर्शन करने की अपील की। जानिए सावन में इस प्राचीन शिव मंदिर का महत्व, इतिहास और मान्यताएं। ALSO READ: रुद्रनाथ मंदिर क्यों है खास? भगवान शिव की मुखाकृति के दर्शन और मंदिर से जुड़ी अद्भुत मान्यताएं

 

सीएम धामी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, हरिद्वार के कनखल में स्थित पावन दक्षेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था और श्रद्धा का दिव्य केंद्र है। राजा दक्ष प्रजापति से जुड़ा यह प्राचीन तीर्थ सावन में शिवभक्तों के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। यदि आप हरिद्वार की यात्रा पर हैं, तो दक्षेश्वर महादेव के दर्शन कर भगवान शिव का आशीर्वाद अवश्य प्राप्त करें।

हरिद्वार से लगभग 3.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कनखल हरिद्वार की उपनगरी के रूप में जाना जाता है। यह हरिद्वार का सबसे ज्यादा घनी आबादी वाला क्षेत्र है।


कनखल और दक्षेश्वर मंदिर का इतिहास

कनखल हरिद्वार की प्राचीन धरोहर है। यह राजा दक्ष की के राज्य की राजधानी थी। कनखल हरिद्वार का सबसे प्राचीन स्थान है। इसका उल्लेख पुराणों में मिलता है। कनखल का इतिहास महाभारत और भगवान शिव से जुड़ा हुआ है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कनखल ही वो जगह है जहां राजा दक्ष ने प्रसिद्ध यज्ञ किया था और सती ने अपने पिता द्वारा भगवान शिव का अपमान करने पर उस यज्ञ में खुद को दाह कर लिया था। माता सती के अग्निदाह के बाद शिव के गण वीरभद्र ने राजा दक्ष की वध कर दिया था बाद में शिवजी ने उनके धड़ को वश्व के सिर से जोड़ दिया था। इसी घटना की याद में यहां पर दक्षेश्वर मंदिर बना हुआ है। इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1810 ईस्वी में रानी धनकौर ने करवाया था और 1962 में इसका पुनर्निर्माण किया गया। ALSO READ: सावन में उत्तराखंड के नीलकंठ महादेव के दर्शन क्यों हैं खास? जानें समुद्र मंथन और भगवान शिव से जुड़ी पौराणिक मान्यता

 

क्या है मंदिर का पौराणिक महत्व?

कहा जाता है कि देवशयनी एकादशी को भगवान विष्णु चार महीनों के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस दौरान सृष्टि के संचालन और देखभाल की पूरी जिम्मेदारी भगवान शिव संभालते हैं।
 

मान्यता है कि सृष्टि का कार्यभार देखने के लिए भगवान शिव माता पार्वती, गणेशजी, कार्तिकेय और नंदी आदि गणों के साथ अपनी ससुराल कनखल आकर रहते हैं। जन प्रचलित मान्यता के अनुसार वे हरिद्वार के पास कनखल में राजा दक्ष के मंदिर में आकर रहते हैं।

LIVE: स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस का दावा

LIVE: स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस का दावा

delhi police on student protest

Latest News Today Live Updates in Hindi : छात्रों के संसद मार्च पर दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देते हुए कहा कि छात्र बगैर अनुमति आगे बढ़ें, जो कि गलत था। पल पल की जानकारी…

ट्रंप ने कहा कि भारत में करोड़ों लोगों ने मतदान किया और मतदाताओं के लिए पहचान पत्र जरूरी था। उन्होंने कहा कि भारत में हर मतदाता की पहचान फिर अमेरिका में क्यों नहीं। उन्होंने इसी आधार पर सेव अमेरिका एक्ट पारित करने की मांग की। ALSO READ: भारत से सीख ले अमेरिका! ट्रंप ने की वोटर ID अनिवार्य करने की मांग, CEC ज्ञानेश कुमार का लिया नाम

 

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात के लिए नए राज्य प्रभारी और सह-प्रभारी नियुक्त किए हैं। विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश, सतीश पूनिया को पंजाब और तरुण चुघ को पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया गया। ALSO READ: BJP में बड़ा फेरबदल: विनोद तावड़े को UP, सतीश पूनिया को पंजाब और तरुण चुघ को गुजरात की जिम्मेदारीछात्रों के संसद मार्च पर दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देते हुए कहा कि छात्र बगैर अनुमति आगे बढ़ें, जो कि गलत था। पुलिस ने दावा किया कि छात्रों पर न्यूनतम बल प्रयोग किया गया।

BJP में बड़ा फेरबदल: विनोद तावड़े को UP, सतीश पूनिया को पंजाब और तरुण चुघ को गुजरात की जिम्मेदारी

BJP में बड़ा फेरबदल: विनोद तावड़े को UP, सतीश पूनिया को पंजाब और तरुण चुघ को गुजरात की जिम्मेदारी

vinod tawde, satish poonia, tarun chugh

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने नई टीम का गठन करने के एक दिन बाद मंगलवार को उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात के लिए नए राज्य प्रभारी और सह-प्रभारी की नियुक्त किए हैं। विनोद तावड़े, सतीश पूनिया और तरुण चुघ को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। ALSO READ: नितिन नवीन की टीम में 2 मुस्लिम, जानिए कौन हैं तारिक मंसूर और कुंवर बासित अली?

 

विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश की कमान सौंपी गई है तो जगदीश ईश्वरभाई पटेल को प्रदेश का सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है। राजस्थान के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे सतीश पूनिया को पंजाब का प्रभारी बनाया गया है। मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद तरुण चुघ को गुजरात के प्रभारी होंगे।

 

bjp state incharge list

गौरतलब है कि भाजपा के राष्‍ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने सोमवार को अपनी नई टीम का एलान कर दिया। पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और वसुंधरा राजे की भी राष्‍ट्रीय राजनीति में वापसी हुई है। उन्हें पार्टी का महासचिव बनाया गया है। पीयूष गोयल को पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया गया। ALSO READ: BJP की नई टीम का ऐलान: स्मृति ईरानी-वसुंधरा राजे की वापसी, पीयूष गोयल बने कोषाध्यक्ष

 

नितिन नवीन ने तरुण चुघ को राष्‍ट्रीय कार्यालय प्रभारी बनाया है जबकि विनोद तावड़े और सतीश पुनिया को राष्‍ट्रीय महामंत्री नियुक्त किया गया है। बीएल संतोष को राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) के पद पर बरकरार रखा गया है। ALSO READ: नितिन नवीन की नई टीम में मध्यप्रदेश के 6 चेहरों को जगह, गजेंद्र पटेल महामंत्री, कविता पाटीदार मंत्री, बंशीलाल गुर्जर बनें किसान मोर्चा अध्यक्ष

 

भारत से सीख ले अमेरिका! ट्रंप ने की वोटर ID अनिवार्य करने की मांग, CEC ज्ञानेश कुमार का लिया नाम

भारत से सीख ले अमेरिका! ट्रंप ने की वोटर ID अनिवार्य करने की मांग, CEC ज्ञानेश कुमार का लिया नाम

donald trump on india election system

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के चुनावी सिस्टम की जमकर सराहना करते हुए अमेरिका में वोटिंग के नियम कड़े करने और 'सेव अमेरिका एक्ट' लागू करने की मांग की। उन्होंने इस दौरान भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का भी जिक्र किया। ALSO READ: बड़बोले ट्रंप की घटिया बेशर्मी, अंकारा में नहीं था Trump को कोई खतरा

 

ट्रंप ने कहा कि भारत में करोड़ों लोगों ने मतदान किया और मतदाताओं के लिए पहचान पत्र जरूरी था। उन्होंने कहा कि भारत में हर मतदाता की पहचान फिर अमेरिका में क्यों नहीं। उन्होंने इसी आधार पर सेव अमेरिका एक्ट पारित करने की मांग की।

 

भारत को चुनावों पर क्या बोले ट्रंप?

डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि इस महीने की शुरुआत में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने हमारे प्रशासन से पूछा था-आप अमेरिका में वैध फोटो पहचान पत्र के बिना चुनाव कैसे करा सकते हैं? भारत के पिछले चुनाव में 64.6 करोड़ मतदाता थे। इनमें से 1% से भी कम लोगों ने डाक से वोट किया और हर मतदाता के पास एक वैध फोटो पहचान पत्र होना जरूरी था। हमें अब सेव अमेरिका एक्ट पास करना होगा।

केवल 11 देशों में सामूहिक डाक मतदान की अनुमति

एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा कि दुनिया भर के 83% देश मतदाता धोखाधड़ी के उच्च जोखिम के कारण अपने चुनावों में सामूहिक डाक द्वारा मतदान (मास मेल बैलेट) पर प्रतिबंध लगाते हैं। कुल मिलाकर केवल 11 देश सामूहिक डाक मतदान की अनुमति देते हैं, और कोविड के बाद से, अब आप इसमें अमेरिका को भी शामिल कर सकते हैं, जिसका श्रेय बेईमान डेमोक्रेट्स को जाता है।

 

क्या है सेव अमेरिका एक्ट?

सेव अमेरिका एक्ट का पूरा नाम सेफगार्ड अमेरिकन वोटर एलिजीबिलिटी एक्ट है। प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिका में मतदान के लिए पंजीकरण कराने वाले लोगों को अपनी नागरिकता का प्रमाण देना होगा। इसके तहत देशभर में मतदाता पहचान पत्र की व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव है। कानून डाक से मतदान की सुविधा पर भी कड़े प्रतिबंध लगाने की तैयारी है।

E20 पेट्रोल पर CEA नागेश्वरन ने उठाए सवाल, E-10 पर लौटने की दी सलाह

E20 पेट्रोल पर CEA नागेश्वरन ने उठाए सवाल, E-10 पर लौटने की दी सलाह

CEA on E-20 petrol

E20 पेट्रोल पर जारी घमासान के बीच भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण के फायदे असीमित नहीं हैं। इंडियन एक्सप्रेस में लिखे एक संपादकीय में नागेश्वरन ने कहा है कि 20 प्रतिशत से अधिक इथेनॉल मिश्रण से तिलहन किसानों को नुकसान हो सकता है। उन्होंने E-10 पेट्रोल वापस लाने की सलाह दी। ALSO READ: झारखंड सरकार ने छात्रों की बात मानी, JSSC-CGL परीक्षा रद्द, 2014 से हुई सभी गड़बड़ियों की होगी जांच

 

भारत के आर्थिक मामलों के विभाग के सलाहकार आकाश पुजारी के साथ मिलकर लिखे गए इस लेख में कहा गया है कि पेट्रोल पंपों पर कम मिश्रण वाला ईंधन, मसलन E10, फिर से उपलब्ध कराया जाना चाहिए और साथ ही ई-20 खरीदने का विकल्प भी दिया जाना चाहिए। इससे जनता की अधिकांश चिंताएं दूर होंगी, इथेनॉल की कुल खपत बढ़ने के बजाय कम होगी और पुराने वाहनों के मौजूदा बेड़े को तब तक सुरक्षा मिलेगी, जब तक उन्हें नए ईंधन के अनुकूल बनाने का कार्यक्रम पूरा नहीं हो जाता।

 

हालांकि दोनों ने ई-20 ईंधन की वजह से इंजन को नुकसान होने के दावों का नकार दिया है। इसमें लिखा है कि इथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में लगभग दो-तिहाई ऊर्जा होती है, इसलिए एक लीटर ई-20 से आप थोड़ी कम दूरी तय कर पाएंगे, लेकिन यह नुकसान मामूली है और किसी खराबी का संकेत नहीं देता है। 

 

लेख में कहा गया है कि भारत में अभी भी लगभग 7.5 से 8 करोड़ पुराने दोपहिया वाहन सड़क पर दौड़ रहे हैं, जो बीएस-IV मानकों से पहले के हैं और जिनमें कार्ब्यूरेटर तकनीक का इस्तेमाल होता है। उनका मानना है कि ई-20 ईंधन से ईंधन दक्षता में लगभग 6 प्रतिशत की मामूली कमी आती है, लेकिन अगर वाहन ई-20 इस्तेमाल करने के लिए तैयार किए गए हैं तो इससे वाहनों को कोई नुकसान नहीं होता। लेकिन वे वाहन मालिकों की इस मांग का समर्थन करते हैं कि 10 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित ईंधन का विकल्प होना चाहिए। ALSO READ: WhatsApp Scam Alert : अब AI पकड़ेगा ठगी के मैसेज, यूजर्स को पहले ही मिलेगा अलर्ट

 

उन्होंने कहा कि मूल योजना में इसकी आशंका जताई गई थी और यह अनुरोध किया गया था कि इन वाहनों के लिए कम इथेनॉल मिश्रण वाला ईंधन बिक्री के लिए उपलब्ध रहे लेकिन वह ईंधन पंपों से गायब हो गया और उसे वापस लाने की जरूरत है।

 

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय मंत्री गडकरी ने ई-20 यानी 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से इंजन के प्रदर्शन और वाहनों को होने वाले संभावित नुकसान को लेकर वाहन मालिकों की चिंताओं को बार-बार खारिज किया है।

तारिक रहमान के गले की फांस बनता शेख हसीना का मुद्दा

तारिक रहमान के गले की फांस बनता शेख हसीना का मुद्दा

sheikh hasina

प्रभाकर मणि तिवारी

'अनुकूल माहौल' बनाने की शर्त के कारण बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान का प्रस्तावित भारत दौरा अनिश्चित हो गया है। ये सवाल भी उठने लगा है कि क्या शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा तारिक के गले की फांस बन गया है? ALSO READ: स्पेन के सेउता पहुंचना चाहते थे प्रवासी, मोरक्को ने रोका

 

बीते सप्ताह राजधानी ढाका में राजनयिक सूत्रों ने इस बात के ठोस संकेत दिए थे कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान अगस्त के तीसरे सप्ताह में भारत के पहले बहुप्रतीक्षित दौरे पर जाएंगे। दिल्ली में केंद्रीय विदेश मंत्रालयों के सूत्रों ने भी यही बात कही थी। लेकिन रविवार को बांग्लादेश ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की अर्जी पर शीघ्र फैसला करने और कुछ दूसरे भगोड़े अपराधियों को सौंपने की मांग रख दी। ढाका ने इन मांगों को आगामी दौरे के लिए 'अनुकूल माहौल' तैयार करने की शर्त बताया।

 

बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एकेएम शहीदुल करीम ने राजधानी ढाका में पत्रकारों से कहा, “पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का प्रत्यर्पण और उस्मान हादी की हत्या के अभियुक्त को सौंपना दोनों देशों के बीच सबसे अहम मुद्दे हैं।”

 

उनका कहना था कि दोनों देशों के बीच प्रधानमंत्री के भारत दौरे के मुद्दे पर बातचीत चल रही थी। लेकिन भारत में शेख हसीना की वर्चुअल प्रेस कांफ्रेंस ने इस मुद्दे में रुकावट पैदा कर दी। करीम ने कहा, हमने हसीना के मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। ALSO READ: जलवायु परिवर्तन से बचने के लिए जर्मन शहर ने उठाए कदम

 

बांग्लादेश में भारत विरोधी भावनाएं

बांग्लादेश में वर्ष 2024 में होने वाले विरोध प्रदर्शन का चेहरा रहे छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की बीते साल 12 दिसंबर को ढाका में गोली मार दी गई थी। एक सप्ताह बाद सिंगापुर के एक अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी। उसकी मौत के बाद देश भर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और दंगे हुए थे। पुलिस ने दावा किया था कि अभियुक्तों के संबंध शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी की छात्र शाखा से हैं। हमलावरों के कथित रूप से सीमा पार कर भारत में शरण लेने के दावों के बीच कुछ संगठनों ने इस हत्या में भारत का हाथ होने के आरोप लगाए थे। इसके बाद देश में भारत-विरोधी भावनाएं और भड़क उठी थीं।

 

जहां तक शेख हसीना का सवाल है उन्होंने अपनी सरकार के तख्तापलट के बाद पांच अगस्त, 2024 से ही भारत में शरण ले रखी है। बांग्लादेश की सरकार औपचारिक रूप से उनके प्रत्यर्पण की मांग कर चुकी है। इस महीने हसीना ने दिल्ली में ऑनलाइन एक कार्यक्रम को संबोधित किया था। उससे बांग्लादेश की नाराजगी बढ़ी और प्रधानमंत्री तारिक रहमान का दौरा खटाई में पड़ गया।

 

दूसरी ओर, भारत सरकार की दलील है कि शेख हसीना के प्रत्यर्पण के लिए बांग्लादेश के अनुरोध पर तय कानूनी प्रक्रियाओं के तहत विचार किया जा रहा है। उसका कहना है कि फिलहाल शरीफ उस्मान हादी हत्याकांड के अभियुक्तों के भारत में होने के दावों की जांच चल रही है।

 

इसके साथ ही अब सवाल उठने लगा है कि क्या शेख हसीना के प्रत्यर्पण का सवाल प्रधानमंत्री तारिक रहमान और उनकी सरकार के गले की फांस बन गया है? रहमान पर शेख हसीना के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने का भारी दबाव है। खासकर कट्टर राजनीतिक दलों को यह बात कभी मंजूर नहीं होगी कि हसीना के प्रत्यर्पण की अर्जी पर कोई फैसला हुए बिना रहमान भारत दौरे पर जाएं।

 

विश्लेषकों का सवाल है कि क्या घरेलू राजनीति के दबाव में रहमान अपने मजबूत पड़ोसी देश के साथ आपसी संबंधों को भी दांव पर लगाने को तैयार हैं। हसीना सरकार के सत्ता से हटने के बाद यह रिश्ते पहले से ही सबसे निचले स्तर पर हैं। तारिक रहमान सरकार के सत्ता संभालने के बाद इसमें बेहतरी की उम्मीद जगी थी। लेकिन अब तक सुधार के लक्षण नहीं नजर आ रहे हैं।

 

राजनीतिक विश्लेषक विश्वनाथ चक्रवर्ती डीडब्ल्यू से कहते हैं, “हसीना के मामले में सख्त रुख अपनाकर रहमान यह दिखा सकते हैं कि उनकी सरकार पिछली यानी हसीना सरकार से एकदम अलग रास्ते पर चल रही है।”

 

उनका कहना था कि रहमान को जमात-ए-इस्लामी समेत कई कट्टरपंथी राजनीतिक ताकतों और सरकार में अपने दूसरे सहयोगियों के दबाव का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे तमाम संगठन हसीना सरकार से जुड़े लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। ALSO READ: मानसून का बदलता पैटर्न बढ़ा रहा भारत का जलवायु संकट

 

बांग्लादेश की विदेश नीति पर घरेलू राजनीति का असर

कोलकाता के एक कालेज में राजनीति विज्ञान पढ़ाने वाली प्रोफेसर मालविका चक्रवर्ती डीडब्ल्यू से कहती हैं, “रहमान के लिए मौजूदा राजनीतिक समीकरण बेहद मुश्किल है। हसीना के प्रत्यर्पण की मांग से पीछे हटने पर उनको देश में भारी आलोचना का सामना करना पड़ सकता है। दूसरी ओर, इस मांग पर अड़े रहने से दोनों देशों के आपसी संबंधों को सुधारने की कोशिश खटाई में पड़ सकती है।”

 

राजनीतिक विश्लेषक शिखा मुखर्जी डीडब्ल्यू से कहती हैं, “रहमान के लिए एक ओर कुआं और दूसरी ओर खाई वाली स्थिति है। हसीना के खिलाफ कड़ा रुख अपना कर वो देश में राजनीतिक संगठनों का समर्थन तो मजबूत कर सकते हैं। लेकिन इससे भारत के साथ कामकाजी संबंध बहाल करना मुश्किल हो सकता है।”

 

विश्लेषकों का कहना है कि अब गेंद बांग्लादेश सरकार के पाले में है। रहमान को यह तय करना होगा कि वो हसीना के प्रत्यर्पण की मांग में किस हद तक जा सकते हैं और क्या इस मुद्दे पर वो भारत के साथ राजनयिक संबंधों को दांव पर लगाने के लिए भी तैयार हैं?

 

Top News 18 August: JSSC-CGL रद्द, छात्र आंदोलन खत्म, मस्क को सरकार की दो टूक

Top News 18 August: JSSC-CGL रद्द, छात्र आंदोलन खत्म, मस्क को सरकार की दो टूक

top news 18 august

Top News 18 August : JSSC-CGL परीक्षा रद्द होने के बाद झारखंड में छात्र आंदोलन समाप्त हो गया। IMD ने मध्य और पूर्व भारत में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान वार्ता में बाधा डालने पर ओमान को धमकाया तो सरकार ने मस्क से कहा कि भारत में लागू कानूनों का पालन करना ही होगा। 18 अगस्त की बड़ी खबरें :

 

झारखंड में JSSC-CGL परीक्षा रद्द

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को कहा कि राज्य कैबिनेट ने JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया है। झारखंड में काफी समय से प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांगों को सरकार ने मान लिया है जिसके बाद प्रदर्शनकारी छात्र जश्न मनाते नजर आए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 से अब तक हुई छोटी-बड़ी सभी तरह की गड़बड़ियों की व्यापक जांच कराई जाएगी। ALSO READ: झारखंड सरकार ने छात्रों की बात मानी, JSSC-CGL परीक्षा रद्द, 2014 से हुई सभी गड़बड़ियों की होगी जांच

 

झारखंड में छात्र आंदोलन समाप्त

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बातचीत और JSSC-CGL परीक्षा रद्द किए जाने की घोषणा के बाद आंदोलनकारी देवेंद्र महतो ने अनशन समाप्त कर दिया। झारखंड सरकार में मंत्री इरफान अंसारी ने खुद देर रात जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम जाकर युवाओं का अनशन खत्म कराया। हालांकि छात्र अभी भी सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं।

 

मध्य और पूर्वी भारत में IMD का अलर्ट

भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी हिस्से और पश्चिम बंगाल-उत्तरी ओडिशा तटों पर बने डिप्रेशन के प्रभाव से मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय है। इससे मध्य भारत और पूर्वी भारत के कई राज्यों में भारी से भी ज्यादा भारी बारिश होने की संभावना है।

 

ट्रंप की ओमान को धमकी

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के सहयोगी देश ओमान को धमकी दी है कि अगर वह ईरान के साथ उनके प्रशासन की वार्ता में बाधा डालता है तो उस पर बमबारी की जाएगी। फॉक्स न्यूज की एक खबर के अनुसार, अमेरिका का इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के साथ सीधा गुप्त संपर्क है। हालांकि IRGC ने इसका खंडन किया है।

 

सरकार की मस्क को चेतावनी

एलन मस्क के स्वामित्व वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स ने सरकारी स्तर से की जाने वाली कंटेंट कार्रवाई को यूजर्स के लिए अधिक स्पष्ट करने की तैयारी की है। उनका कहना है कि सरकारों की ओर से मांगी जाने वाली किसी भी सेंसरशिप को अब साफ तौर पर देखा जा सकेगा। इसके बाद केंद्र सरकार ने भी अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि एक्स को भारत में लागू कानूनों का पालन करना ही होगा।

बड़बोले ट्रंप की घटिया बेशर्मी, अंकारा में नहीं था Trump को कोई खतरा

बड़बोले ट्रंप की घटिया बेशर्मी, अंकारा में नहीं था Trump को कोई खतरा

Donald Trump

US President Donald Trump: डॉनल्ड ट्रंप दुनिया के एक सबसे धनी और शक्तिशाली देश अमेरिका के राष्ट्रपति अवश्य हैं, पर बोलचाल और व्यवहार में इतने निर्लज्ज और घटिया हैं, कि सामने वाले का सिर शर्म से भले ही झुक जाए, उन्हें कोई फ़र्क नहीं पड़ता। उनके बड़बोलेपन और तुच्छतापूर्ण व्यवहार के उदाहरणों की कोई कमी नहीं है; पर अब एक ऐसा किस्सा सामने आया है, जो बेमिसाल है।

 

तुर्की की राजधानी अंकारा में 7 से 8 जुलाई तक चले नाटो सैन्य संगठन वाले देशों का जो शिखर सम्मेलन हुआ, उसके अंत के तुरंत बाद, ट्रंप को जिस आपा-धापी में वहाँ से छिपते-छिपाते भागना पड़ा, अपने विमान बदलने पड़े, उनमें से एक विमान उन्होंने क़तर के शाही अल थानी परिवार से “उपहार” में माँगा था!

शाही परिवार पड़ा धर्मसंकट में

अमेरिकी गुप्तचर सेवा CIA के एक जासूस रह चुके जॉन किरियाकोउ ने, अपने एक पॉडकास्ट में दावा किया है कि उन्हें डॉनाल्ड ट्रंप को कथित तौर पर “उपहार” में मिले नए “प्रेसिडेंशियल एयरक्राफ्ट” बोइंग 747 के पीछे के असली तथ्यों की सीधी जानकारी है। किरियाकोउ का कहना है कि ट्रंप को यह आलीशान विमान मिला नहीं है, उन्होंने इसे क़तर से माँगा था। उनकी माँग ने क़तर के शाही परिवार को वास्तव में बड़े धर्मसंकट में डाल दिया था।

 

अपने पॉडकास्ट “ब्रीफिंग रूम” के दसवें एपिसोड में, CIA के इस पूर्व एजेंट ने मई 2025 में ही, क़तर के शाही परिवार की ओर से ट्रंप को मिलने वाले इस नए “प्रेसिडेंशियल एयरक्राफ्ट” की पृष्ठभूमि से जुड़ी जानकारी उजागर कर दी थी। उसका कहना है कि फारस की खाड़ी वाले क्षेत्र के छह शाही परिवारों में से पांच के साथ उसके बहुत अच्छे संबंध हैं। उसे भली भाँति मालूम है कि क़तर के शाही परिवार ने ट्रंप को बोइंग 747 कथित “उपहार” में कैसे दिया।

क्या वे बोइंग 747 मुफ़्त में देंगे?

किरियाकोउ के अनुसार, ट्रंप ने क़तर के अल थानी परिवार से खुलकर पूछा था कि क्या वे उन्हें अपना बोइंग 747 मुफ़्त में देंगे? परिवार के एक सदस्य ने किरियाकोउ को बताया कि वे लोग इस मांग से कतई ख़ुश नहीं थे। अरब संस्कृति में, सत्कार के अधिकारी किसी अतिथि के अनुरोध को अस्वीकार करना असभ्य माना जाता है; इसलिए “उनके अनुरोध को ठुकराना तो संभव ही नहीं था।” अतः शाही परिवार ने बाद में घोषणा की कि उसका यह विमान “अमेरिकी जनता के लिए उपहार है”, ताकि यह प्रदर्शित किया जा सके कि वह ट्रम्प को व्यक्तिगत रूप से दिय़ा जा रहा उपहार नहीं है।

 

हालांकि, खबरों के अनुसार, ट्रम्प ने क़तर के अल थानी परिवार को बताया कि वर्तमान कार्यकाल पूरा हो जाने पर अपना पद छोड़ने के बाद वे इस विमान को “अपने पास” ही रखेंगे। 2029 में जब उनका कार्यकाल पूरा हो जाएगा और वे अपना पद छोड़ देंगे, तो उस के बाद, उन्हें मिला विमान उनके फाउंडेशन — डोनाल्ड जे. ट्रम्प प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी — को सौंप दिया जाएगा और सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए रखा जाएगा।

दस महीनों में रिकॉर्ड-तोड़ बदलाव

राष्ट्रपति ट्रंप के “प्रेसिडेंशियल एयरलिफ़्ट ग्रुप” ने 19 जून को ही जॉइंट बेस एंड्रयूज़ में अल थानी परिवार के विमान की डिलीवरी ले ली। यह विमान बोइंग 747-8I है, पूरी तरह से नया नहीं है, बल्कि नवंबर 2023 तक क़तर के सरकारी बेड़े का हिस्सा रहा है। उसमें आवश्यक बदलाव आदि करने में 10 महीने लगे। यह काम जल्द से जल्द पूरा करने के लिए तीन-शिफ्टों में चौबीसों घंटे काम हुआ। कहा जाता है कि विमान में शुरुआती बदलावों पर ही लगभग 40 करोड़ डॉलर का ख़र्च आया था। ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति हैं। ठीक इस समय — यानी 2026 में — स्वयं भी 5 अरब 50 करोड़ डॉलर के बराबर संपत्तियों के मालिक हैं, पर क़तर के अल थानी परिवार के सामने हाथ पसारने में उन्हें रत्ती भर भी शर्म नहीं आई!

 

किरियाकोउ ने अपने पॉडकास्ट में अंकारा के नाटो शिखर सम्मेलन के बाद ट्रंप द्वारा विमान बदलने की आपाधापी का भी वर्णन किया है। 8 जुलाई को, ट्रंप पहले तो कैमरों के सामने अपने सरकारी विमान “एयर फ़ोर्स वन” में सवार हुए थे, लेकिन बाद में अमेरिकी सेना के एक दूसरे विमान तक जाने के लिए कैटरिंग ट्रक में छिप गए थे।

CBS न्यूज़ (जो BBC का US पार्टनर नेटवर्क है) के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों को पहले ही पता चल गया था कि ईरान की ओर से ट्रंप के विमान को मिसाइल प्रहार का निशाना बनाए जाने का विश्वसनीय ख़तरा है। किंतु, जॉन किरियाकोउ का मानना है कि राष्ट्रपति की जान को कोई असली या विश्वसनीय खतरा नहीं था। यानी, 8 जुलाई को अंकारा में जो कुछ हुआ वह एक दिखावा अधिक, वास्तविकता कम था।

अयोध्या के 100 साल पुराने राजकीय पुस्तकालय की बदलेगी सूरत, 3.23 करोड़ से बनेगी अत्याधुनिक लाइब्रेरी

अयोध्या के 100 साल पुराने राजकीय पुस्तकालय की बदलेगी सूरत, 3.23 करोड़ से बनेगी अत्याधुनिक लाइब्रेरी

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अयोध्या मे 100 वर्ष पुराने राजकीय पुस्तकालय की अब होगा अत्याधुनिक लाइब्रेरी जिसे योगी सरकार 3.23 करोड़ रुपए की लागत से निर्माण कराने जा रही है जिसका रविवार को अयोध्या के विधायक वेद प्रकाश गुप्ता ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भूमिपूजन किया। उत्तरप्रदेश की योगी सरकार प्रदेश की धरोहरों को भी सवारने का काम कर रही है। ऐसे ही अयोध्या के 100 वर्ष पुराने राजकीय पुस्तकालय की सूरत भी अब अतिशीघ्र ही बदलेगी क्योंकि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पुस्तकालय को आधुनिक पुस्तकालय बनाने के लिए 3.23 करोड़ से रुपय स्वीकृति किए है।


इसका भूमिपूजन रविवार को अयोध्या के विधायक वेद प्रकाश गुप्ता ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच किया, जिसके बाद उन्होंने बताया कि सिविल लाइन स्थित ऐतिहासिक राजकीय पुस्तकालय का गैलरी निर्माण और उच्चीकरण कार्य का भूमि पूजन किया है। जिसका निर्माण कार्य तेजी से पूरा किया जाएगा। निर्माण इकाई अयोध्या विकास प्राधिकरण 3.23 करोड़ रुपये से इस प्रोजेक्ट को पूरा कराएगा। आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने बजट दिया है, जबकि निर्माण मेसर्स प्रिज्म कंस्ट्रक्शन एजेंसी करेगी। 9 महीने में काम पूरा होना है।
 

पुस्तकालय में करीब 60 हजार किताबें

गुप्ता ने बताया कि इस पुस्तकालय में करीब 60 हजार किताबें हैं, जिसमें कई दुर्लभ किताबें भी शामिल हैं जो बाजार में नहीं मिलतीं। उन्होंने कहा कि “योगी सरकार में उपेक्षित पड़ी धरोहरों को सहेजा जा रहा है। इस नए हॉल से प्रतियोगी छात्रों को आधुनिक और शांत माहौल मिलेगा। उन्होंने कहा कि अयोध्या को अंतरराष्ट्रीय सुविधा की सिटी के तौर पर विकसित किया जा र रहा है। सड़कों का चौड़ीकरण आर ओबी व फ्लाई ओवर बड़ी संख्या में करवाए गए हैं जिससे कनेक्टिविटी में सुधार हुआ है। हाई टेक रेलवे स्टेशन और एयर पोर्ट से देश विदेश के लाखों यात्री यहां रोजाना पहुंच रहे हैं। शैक्षिक विकास में प्राचीन पुस्तकालय का भी उच्चीकरण किया जा रहा है।