दक्षेश्वर महादेव मंदिर: सावन में क्यों खास है कनखल का यह शिव धाम?

दक्षेश्वर महादेव मंदिर: सावन में क्यों खास है कनखल का यह शिव धाम?

Daksheshwar Mahadev Temple Kankhal

हरिद्वार के कनखल स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर का संबंध राजा दक्ष, माता सती और भगवान शिव की पौराणिक कथा से है। सीएम पुष्कर धामी ने भी मंगलवार को हरिद्वारा आने वाले श्रद्धालुओं से दक्षेश्वर महादेव के दर्शन करने की अपील की। जानिए सावन में इस प्राचीन शिव मंदिर का महत्व, इतिहास और मान्यताएं। ALSO READ: रुद्रनाथ मंदिर क्यों है खास? भगवान शिव की मुखाकृति के दर्शन और मंदिर से जुड़ी अद्भुत मान्यताएं

 

सीएम धामी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, हरिद्वार के कनखल में स्थित पावन दक्षेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था और श्रद्धा का दिव्य केंद्र है। राजा दक्ष प्रजापति से जुड़ा यह प्राचीन तीर्थ सावन में शिवभक्तों के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। यदि आप हरिद्वार की यात्रा पर हैं, तो दक्षेश्वर महादेव के दर्शन कर भगवान शिव का आशीर्वाद अवश्य प्राप्त करें।

हरिद्वार से लगभग 3.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कनखल हरिद्वार की उपनगरी के रूप में जाना जाता है। यह हरिद्वार का सबसे ज्यादा घनी आबादी वाला क्षेत्र है।


कनखल और दक्षेश्वर मंदिर का इतिहास

कनखल हरिद्वार की प्राचीन धरोहर है। यह राजा दक्ष की के राज्य की राजधानी थी। कनखल हरिद्वार का सबसे प्राचीन स्थान है। इसका उल्लेख पुराणों में मिलता है। कनखल का इतिहास महाभारत और भगवान शिव से जुड़ा हुआ है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कनखल ही वो जगह है जहां राजा दक्ष ने प्रसिद्ध यज्ञ किया था और सती ने अपने पिता द्वारा भगवान शिव का अपमान करने पर उस यज्ञ में खुद को दाह कर लिया था। माता सती के अग्निदाह के बाद शिव के गण वीरभद्र ने राजा दक्ष की वध कर दिया था बाद में शिवजी ने उनके धड़ को वश्व के सिर से जोड़ दिया था। इसी घटना की याद में यहां पर दक्षेश्वर मंदिर बना हुआ है। इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1810 ईस्वी में रानी धनकौर ने करवाया था और 1962 में इसका पुनर्निर्माण किया गया। ALSO READ: सावन में उत्तराखंड के नीलकंठ महादेव के दर्शन क्यों हैं खास? जानें समुद्र मंथन और भगवान शिव से जुड़ी पौराणिक मान्यता

 

क्या है मंदिर का पौराणिक महत्व?

कहा जाता है कि देवशयनी एकादशी को भगवान विष्णु चार महीनों के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस दौरान सृष्टि के संचालन और देखभाल की पूरी जिम्मेदारी भगवान शिव संभालते हैं।
 

मान्यता है कि सृष्टि का कार्यभार देखने के लिए भगवान शिव माता पार्वती, गणेशजी, कार्तिकेय और नंदी आदि गणों के साथ अपनी ससुराल कनखल आकर रहते हैं। जन प्रचलित मान्यता के अनुसार वे हरिद्वार के पास कनखल में राजा दक्ष के मंदिर में आकर रहते हैं।