रास्ता न दिला पाएं तो लेखपाल, कानूनगो, तहसीलदार सबको सस्पेंड करो

रास्ता न दिला पाएं तो लेखपाल, कानूनगो, तहसीलदार सबको सस्पेंड करो

Yogi Adityanath Janta Darshan Gorakhpur: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भूमि संबंधी प्रकरणों में उदासीनता या लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को कड़ा संदेश दिया है। जनता दर्शन के दौरान एक महिला ने जब यह पीड़ा सुनाई कि दबंग यह धमकी देते हुए रास्ता नहीं दे रहे हैं कि चाहे जहां शिकायत कर लो तो मुख्यमंत्री की भृकुटि तन गई। उन्होंने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया कि महिला को रास्ता दिलवाया जाए। यदि रास्ता दिलवाने में लेखपाल, कानूनगो, तहसीलदार खुद को लाचार मानते हों तो उन सबको सस्पेंड किया जाए।

 

सीएम ने वरिष्ठ अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि जहां भी भूमि संबंधी मामलों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर हीलाहवाली मिले तो वहां संबंधित कार्मिक या अधिकारी के विरुद्ध सख्त एक्शन लिया जाए। प्रकरण की गंभीरता के अनुसार संबंधित के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाए। सीएम ने कहा कि किसी भी स्तर पर शिथिलता या लापरवाही कतई क्षम्य नहीं है।

करीब 200 लोगों की समस्याएं सुनीं सीएम ने

सोमवार को गोरखपुर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन में लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के बाहर आयोजित जनता दर्शन के दौरान सीएम योगी करीब 200 लोगों से मिले। उनके पास जाकर समस्याएं सुनीं। उनके प्रार्थना पत्र अपने हाथ में लेकर उसका अवलोकन कर समस्या, शिकायत का संज्ञान लिया। 

 

मुख्यमंत्री ने लोगों से कहा कि वे परेशान न हों, सरकार हर जरूरतमंद के साथ खड़ी है। हर पीड़ित की समस्या का निस्तारण प्रतिबद्धता के साथ कराया जाएगा। एक महिला की शिकायत पर मुख्यमंत्री ने कहा, ‘रास्ता न दिलाने पर लेखपाल, कानूनगो, तहसीलदार सबको सस्पेंड करो।’ जनता दर्शन में कुछ अन्य लोगों ने भी जमीन से जुड़े मामलों में राजस्व कर्मियों की तरफ से लापरवाही किए जाने की शिकायत की, जिस पर सीएम ने संबंधित जिलाधिकारियों को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।

इलाज के लिए मदद का भरोसा

जनता दर्शन में इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लेकर पहुंचे लोगों से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार इलाज में पूरी मदद करेगी। इसके लिए जरूरतमंद लोगों का आयुष्मान कार्ड बनवाया जाएगा और इसके बाद भी जरूरत पड़ी तो विवेकाधीन कोष से सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री ने पास में मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर जरूरतमंद, पात्र व्यक्ति का आयुष्मान कार्ड बनवाना सुनिश्चित किया जाए ताकि उन्हें इलाज के लिए परेशान न होना पड़े।

फांसी का फंदा या इंजेक्शन? मौत की सजा पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

फांसी का फंदा या इंजेक्शन? मौत की सजा पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा पाए दोषियों को फांसी देने की मौजूदा व्यवस्था को खत्म करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। याचिका में फांसी की जगह इंट्रावेनस लेथल इंजेक्शन (घातक इंजेक्शन) जैसे कम पीड़ादायक तरीकों को अपनाने की मांग की गई थी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने यह स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार मौजूदा फांसी की प्रक्रिया की समीक्षा के लिए विशेषज्ञों की समिति गठित कर सकती है।

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क्या थी सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका?

 

यह जनहित याचिका (PIL) वरिष्ठ अधिवक्ता ऋषि मल्होत्रा ने वर्ष 2017 में दायर की थी। याचिका में दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 354(5) को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई थी।

 

याचिका में तर्क दिया गया था कि फांसी देने की मौजूदा व्यवस्था भेदभावपूर्ण है, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करती है और संविधान पीठ के Gian Kaur मामले में दिए गए फैसले के अनुरूप नहीं है।

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फांसी की जगह क्या विकल्प सुझाए गए थे?

 

याचिकाकर्ता ने मौत की सजा को लागू करने के लिए फांसी के अलावा कई विकल्पों का सुझाव दिया था। इनमें घातक इंजेक्शन, गोली मारकर मौत की सजा, इलेक्ट्रिक चेयर और गैस चैंबर जैसे तरीके शामिल थे।

 

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता ऋषि मल्होत्रा ने दलील दी थी कि कम से कम मौत की सजा पाए व्यक्ति को फांसी और घातक इंजेक्शन जैसे विकल्पों में से किसी एक को चुनने का अधिकार दिया जाना चाहिए।

 

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

 

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि अदालत विधायिका को मौत की सजा लागू करने का कोई विशेष तरीका अपनाने का निर्देश नहीं दे सकती। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका फैसला केंद्र सरकार को मौजूदा फांसी की प्रक्रिया की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने से नहीं रोकता।

 

ऐसी समिति यह अध्ययन कर सकती है कि क्या मौत की सजा लागू करने का कोई वैकल्पिक तरीका संविधान की उस आवश्यकता के अधिक अनुरूप होगा, जिसके तहत पीड़ा को कम करने और मानव गरिमा को बनाए रखने पर जोर दिया गया है।

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2023 में भी सुप्रीम कोर्ट ने मांगा था बेहतर डेटा

 

मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह इस बात की जांच के लिए विशेषज्ञों की समिति गठित करने पर विचार कर सकता है कि मौत की सजा पाए दोषियों को फांसी देना अनुपातिक और कम पीड़ादायक तरीका है या नहीं।उस समय अदालत ने केंद्र से मौत की सजा लागू करने के तरीके से जुड़े मुद्दों पर 'बेहतर डेटा' उपलब्ध कराने को कहा था।

 

केंद्र ने फांसी को बताया था 'त्वरित और सरल'

 

वर्ष 2018 में केंद्र सरकार ने फांसी की मौजूदा कानूनी व्यवस्था का जोरदार समर्थन किया था। केंद्र ने अदालत को बताया था कि मौत की सजा पाए दोषी को फांसी देना ही निर्धारित तरीका है और घातक इंजेक्शन या गोली मारने जैसे अन्य तरीके जरूरी नहीं कि कम पीड़ादायक हों।

 

गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव की ओर से दाखिल जवाब में कहा गया था कि फांसी 'त्वरित और सरल' है और इसमें ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं है जो कैदी की पीड़ा को अनावश्यक रूप से बढ़ाए।

क्या अब फांसी की जगह घातक इंजेक्शन आएगा?

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फिलहाल नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की मौजूदा व्यवस्था को खत्म करने का आदेश नहीं दिया है और न ही घातक इंजेक्शन को इसके विकल्प के तौर पर लागू करने का निर्देश दिया है। हालांकि, अदालत के फैसले से केंद्र के लिए विशेषज्ञ समिति के जरिए मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा का रास्ता खुला हुआ है। भविष्य में ऐसी किसी समिति की सिफारिशों के आधार पर मौत की सजा लागू करने के तरीकों पर बहस आगे बढ़ सकती है।

CJP आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, पुलिस बलप्रयोग की जांच के लिए हाईलेवल कमेटी, उधर सरकारी स्कूल में बदली तस्वीर

CJP आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, पुलिस बलप्रयोग की जांच के लिए हाईलेवल कमेटी, उधर सरकारी स्कूल में बदली तस्वीर

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कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से 20 जुलाई को दिल्ली में आयोजित 'संसद चलो मार्च' के दौरान प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस बलप्रयोग का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस की कथित ज्यादती के आरोपों की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने की बात कही है। हालांकि, CJP ने समिति के गठन को लेकर अपनी कुछ शर्तें रखी हैं। पार्टी का कहना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट समिति गठित करता है तो उसके सभी सदस्य पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष होने चाहिए।

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सुप्रीम कोर्ट बनाएगा हाई लेवल कमेटी

 

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस की कथित ज्यादती की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जाएगा। इसमें रिटायर्ड जज, पूर्व डीजीपी, सीबीआई के पूर्व निदेशक समेत अन्य सदस्य शामिल हो सकते हैं। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा वी. मोहना की पीठ ने कहा कि समिति में शामिल किए जाने वाले अन्य सदस्यों को लेकर अलग-अलग पक्षों से सुझाव लिए जाएंगे। इसके बाद समिति के गठन का आदेश बुधवार को जारी किया जाएगा।

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CJP ने कहा- समिति स्वतंत्र होनी चाहिए

 

सुप्रीम कोर्ट के बाहर CJP के सह संयोजक सौरभ दास ने कहा कि यदि अदालत को लगता है कि प्रदर्शनकारियों को न्याय दिलाने के लिए उच्चस्तरीय समिति जरूरी है तो पार्टी अदालत के फैसले का सम्मान करेगी। हालांकि, उन्होंने समिति के सदस्यों के चयन को लेकर स्पष्ट शर्त रखी। दास के मुताबिक, समिति के सदस्य ऐसे होने चाहिए जिनकी निष्पक्षता और स्वतंत्रता पर कोई सवाल न उठे। उन्होंने कहा कि समिति में ऐसे लोगों को शामिल नहीं किया जाना चाहिए जिनका पिछला रिकॉर्ड पहले से सवालों के घेरे में रहा हो। उन्होंने कहा कि यह सरकार की समिति नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट की समिति होगी और देश के युवा इस पूरी प्रक्रिया पर नजर रख रहे हैं।

 

CJP ने अपने सदस्यों को समिति में शामिल करने की मांग की

 

CJP की लीगल मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से उन्हें भरोसा दिया गया था कि प्रदर्शन से जुड़े सभी एफआईआर रद्द किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी प्रदर्शन खत्म होने के एक सप्ताह के भीतर इस आश्वासन पर कार्रवाई चाहती थी। रत्ना सिंह ने कहा कि अगर जांच समिति बनाई जा रही है तो वह पूरी तरह स्वतंत्र होनी चाहिए और उसके सभी सदस्यों के नाम सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

 

उन्होंने यह भी मांग की कि CJP के सदस्यों को समिति में शामिल किया जाए, ताकि समिति के सामने रखी जाने वाली सूचनाओं का सत्यापन किया जा सके। उनका कहना है कि व्यक्तिगत रूप से पार्टी उच्चस्तरीय समिति नहीं चाहती, बल्कि वह सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन को पूरा किए जाने की मांग कर रही है। 

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क्या है पूरा मामला?

20 जुलाई : दिल्ली में 'संसद चलो मार्च' के दौरान पुलिस बलप्रयोग के आरोप।

सुप्रीम कोर्ट : प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस ज्यादती की जांच के लिए हाई लेवल कमेटी बनाने की घोषणा।

प्रस्तावित समिति : रिटायर्ड जज, पूर्व डीजीपी, पूर्व सीबीआई निदेशक समेत अन्य सदस्य।

CJP की मांग : समिति पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष हो।

दूसरी मांग : समिति के सदस्यों के नाम सार्वजनिक किए जाएं।

CJP की अतिरिक्त मांग : पार्टी के सदस्यों को भी समिति में शामिल किया जाए।


 जंतर-मंतर आंदोलन के बाद 'स्कूल ठीक करो' अभियान

संसद मार्च और सुप्रीम कोर्ट में जांच समिति की मांग के बीच CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके अब सरकारी स्कूलों की बदहाल व्यवस्था को लेकर अभियान चला रहे हैं। उनके अभियान का असर उनके पैतृक गांव महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के संतुक पिंपरी में भी दिखाई देने लगा है।

 

दीपके ने 15 अगस्त को अपने पैतृक गांव के जिला परिषद स्कूल का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की कमी और टूटी खिड़कियों समेत कई समस्याओं को सामने रखा था। इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने स्कूल में मरम्मत कार्य शुरू करा दिया।

मिलीं नई बेंच-डेस्क और कंप्यूटर

अभिजीत दीपके ने मंगलवार, 18 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर स्कूल की तस्वीरें साझा कीं। उन्होंने बताया कि उनके गांव के स्कूल के बच्चों को अब नई बेंच-डेस्क मिल गई हैं। उन्होंने गांव के लोगों और स्कूल स्टाफ का आभार जताते हुए इसे अपने जीवन के सबसे खुशी भरे पलों में से एक बताया। एक अन्य वीडियो में उन्होंने बताया कि स्कूल में अब कंप्यूटर भी लगाए गए हैं। दीपके ने कहा कि जब सरकारें विफल होती हैं तो आम लोग मदद के लिए आगे आते हैं।

'अब रुकना नहीं है, स्कूल ठीक करके ही रहेंगे'

 

दीपके ने इससे पहले एक वीडियो में कहा था कि हिंगोली जिले के लिंबाला गांव के लोगों की यह पहली बड़ी जीत है। उन्होंने बताया कि स्कूल के प्रिंसिपल को निलंबित किया गया है। उन्होंने इस जीत को अब्दुल और उसके पिता को समर्पित करते हुए कहा कि अब स्कूल सुधार का अभियान रुकना नहीं चाहिए।

 

15 अगस्त से शुरू किया 'स्कूल ठीक करो' अभियान

 

अभिजीत दीपके ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 'स्कूल ठीक करो' अभियान की शुरुआत अपने पैतृक गांव के स्कूल से की थी। ध्वजारोहण समारोह में शामिल होने के बाद उन्होंने स्कूल परिसर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कक्षाओं की टूटी खिड़कियों, खराब सीसीटीवी कैमरों और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी को उजागर किया। दीपके के दौरे के बाद स्थानीय ग्राम पंचायत ने स्कूल की समस्याओं को दूर करने के लिए काम शुरू कराया।

 

खिड़कियां बदली जा रहीं, नए CCTV कैमरे लगाए जा रहे

 

संतुक पिंपरी के सरपंच विजय पुरी ने बताया कि दीपके ने स्कूल में उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया था और जिन कमियों की ओर ध्यान दिलाया गया, उन्हें दूर करने का काम शुरू कर दिया गया है। स्कूल की क्षतिग्रस्त खिड़कियों को बदला जा रहा है और खराब सीसीटीवी कैमरों की जगह नए कैमरे लगाए जा रहे हैं।

इसके अलावा शौचालयों में पानी की समस्या को भी दूर किया गया है और चौबीसों घंटे पानी की आपूर्ति की व्यवस्था की गई है। राज्य के शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी स्कूल प्रबंधन को बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मरम्मत कार्य जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

सरकारी स्कूलों को लेकर दीपके का बड़ा सवाल

अभिजीत दीपके ने सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को लेकर सरकार और शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि अगर मंत्री, शिक्षा विभाग के अधिकारी, प्रिंसिपल, शिक्षक और दूसरे कर्मचारी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाएं तो इन स्कूलों की स्थिति में तेजी से सुधार हो सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकारी अधिकारी अपने बच्चों को निजी स्कूलों में क्यों पढ़ाते हैं? क्या उन्हें अपने ही सरकारी स्कूलों की व्यवस्था पर भरोसा नहीं है? दीपके का कहना है कि सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति में सुधार के लिए केवल घोषणाओं की नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और जवाबदेही की जरूरत है।

पाकिस्तानी ब्यूटी क्रीम में पारे का ज़हर? महाराष्ट्र के गांवों में चेहरे की चमक बनी आफत, 100 से ज्यादा लोग गंभीर बीमार

पाकिस्तानी ब्यूटी क्रीम में पारे का ज़हर? महाराष्ट्र के गांवों में चेहरे की चमक बनी आफत, 100 से ज्यादा लोग गंभीर बीमार

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Pakistani beauty creams mercury toxicity: महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों से स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। गोरा होने की चाहत में संदिग्ध और अवैध रूप से बिक रही ब्यूटी क्रीमों का इस्तेमाल करने से 100 से अधिक लोग गंभीर पारा विषाक्तता (Mercury Toxicity) का शिकार हो चुके हैं।

अकोला, नासिक, संभाजीनगर, नागपुर और पुणे जैसे जिलों में तंत्रिका रोग विशेषज्ञों (Neurologists) के पास ऐसे कई युवा मरीज पहुंचे हैं, जो अनिद्रा, पैरों में तेज जलन, मांसपेशियों में दर्द, झटके, याददाश्त में कमी और गुर्दे (Kidney) की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। जांच में पाया गया कि मरीजों के रक्त में पारे (Mercury) का स्तर सामान्य सीमा से 10 से 40 गुना तक अधिक था।

मामला क्या है? अकोला और नासिक से शुरू हुआ सिलसिला
यह पूरा मामला तब सामने आया जब अकोला जिले के मूर्तिजापुर स्थित गोरेगांव के ऋषिकेश धोरे और कुछ अन्य ग्रामीण गंभीर लक्षणों के साथ अकोला शहर के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. नितिन वीरवानी के पास पहुंचे। मरीजों की शिकायत थी कि उन्हें रात में नींद नहीं आ रही, चिड़चिड़ापन रहता है और पैरों में तेज जलन के साथ झनझनाहट महसूस होती है।

डॉ. वीरवानी द्वारा की गई पूछताछ में पता चला कि इन सभी मरीजों ने हाल ही में स्थानीय दुकानों से त्वचा को निखारने का दावा करने वाली क्रीम खरीदी थी। इसी तरह अकोला की एक 30 वर्षीय महिला के मामले में, जब उसने क्रीम लगाना शुरू किया तो शुरुआती दिनों में चेहरा साफ हुआ, लेकिन कुछ ही हफ्तों बाद चेहरे पर खुजली, त्वचा का सूखना और पैरों में झुनझुनी होने लगी। रक्त परीक्षण में महिला के शरीर में पारे का स्तर सामान्य से 10 गुना अधिक निकला और उसमें CASPR-2 प्रतिरक्षी (Antibodies) पाए गए।

नासिक के डॉ. राहुल बाविस्कर और संभाजीनगर के डॉ. आनंद सोनी ने भी पाया कि कई मरीजों में पारे के कारण शरीर का इम्युनिटी सिस्टम भ्रमित हो गया, जिससे तंत्रिका कोशिकाओं (Nerve cells) पर हमला होने लगा और कुछ मरीजों के गुर्दे भी प्रभावित हुए।

पाकिस्तानी कनेक्शन या भारत में फर्जी मैन्युफैक्चरिंग?

जांच में जिन क्रीमों के नाम मुख्य रूप से सामने आए हैं, उनमें कथित रूप से पाकिस्तान निर्मित 'गोरी कॉस्मेटिक्स' (Goree Cosmetics), 'गोल्डन स्टार कॉस्मेटिक्स' और 'शाहीन कॉस्मेटिक्स की फेस फ्रेश गोल्ड प्लस' शामिल हैं।

  1. एफडीए (FDA) की सख्त कार्रवाई: महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने इन क्रीमों को असुरक्षित घोषित कर पूरे राज्य में छापेमारी शुरू की है। संभाजीनगर में जब्त सैंपलों की लैब जांच में पारे का स्तर तय सीमा से 18 से 40 गुना अधिक पाया गया।
  2. ATS जांच की मांग: क्रीमों के पैकेट पर कोई बैच नंबर, मैन्युफैक्चरिंग या एक्सपायरी डेट दर्ज नहीं थी। चूंकि यह संदिग्ध उत्पाद अवैध रूप से सीमाओं के पार से आ रहा है या भारत में ही इसका फर्जी निर्माण हो रहा है, इसलिए एफडीए ने मामले की गहन जांच के लिए आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) से भी संपर्क किया है।
  3. ग्रे मार्केट का जाल: छापेमारी में 70 लाख रुपये से अधिक का माल जब्त किया गया है। हालांकि, दुकानदारों के पास मुंबई के क्रॉफर्ड मार्केट जैसे थोक बाजारों से खरीद के कोई बिल या दस्तावेज नहीं मिले, जिससे इसके मुख्य वितरकों (Suppliers) तक पहुंचना बड़ी चुनौती बना हुआ है।

क्रीम में पारा क्यों मिलाया जाता है और यह कितना खतरनाक है?

भारत के 'औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन कानून' (Drugs and Cosmetics Act) के तहत कॉस्मेटिक्स में पारे की अधिकतम अनुमत सीमा 1 ppm (Part Per Million) है। लेकिन सस्ते और तात्कालिक नतीजे देने के लिए अवैध निर्माता इसमें पारे की अत्यधिक मात्रा मिला देते हैं।

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खुद को और अपनों को कैसे सुरक्षित रखें?

  • अज्ञात और बिना लेबल वाले उत्पादों से बचें: जिस क्रीम पर निर्माता का नाम, बैच नंबर, एक्सपायरी डेट या सामग्री (Ingredients) की सूची न हो, उसे भूलकर भी न खरीदें।
  • इंस्टेंट फेयरनेस के दावों से सावधान रहें: जो क्रीम 7 से 10 दिनों में रंग गोरा करने का दावा करती है, उसमें खतरनाक केमिकल्स होने की संभावना सबसे अधिक होती है।
  • लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें: यदि किसी फेयरनेस क्रीम का उपयोग करने के बाद अनिद्रा, पैरों में जलन, कंपन या त्वचा की समस्या हो, तो तुरंत क्रीम का इस्तेमाल बंद करें और न्यूरोलॉजिस्ट या फिजिशियन से जांच कराएं।

महाराष्ट्र सरकार और पुलिस प्रशासन ने अब तक मुंबई, परभणी, नासिक और संभाजीनगर सहित कई जिलों में एफआईआर दर्ज की है। जनता से अपील की गई है कि वे ऐसी अप्रमाणित क्रीमों के झांसे में न आएं और केवल अधिकृत व लाइसेंस प्राप्त विक्रेताओं से ही सौंदर्य प्रसाधन खरीदें।

झारखंड में JSSC CGL परीक्षा रद्द : छात्रों की जीत के बाद क्यों राहुल गांधी के नारों से गूंजा रांची, बैकफुट पर आई हेमंत सरकार, बीजेपी क्यों रह गई पीछे?

झारखंड में JSSC CGL परीक्षा रद्द : छात्रों की जीत के बाद क्यों राहुल गांधी के नारों से गूंजा रांची, बैकफुट पर आई हेमंत सरकार, बीजेपी क्यों रह गई पीछे?

Rahul Gandhi Jharkhand Protest

Jharkhand Student Protest: झारखंड की राजनीति और युवा आंदोलन के इतिहास में 17 अगस्त का दिन एक बड़े मोड़ के रूप में दर्ज हो गया। पिछले कई हफ्तों से अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल और सड़कों पर आंदोलन कर रहे युवाओं की आखिरकार बड़ी जीत हुई। झारखंड कैबिनेट ने एक बड़ा फैसला लेते हुए JSSC CGL (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग – कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल) की परीक्षा और नतीजों को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। इसके साथ ही धांधली के घेरे में आई आउटसोर्सिंग एजेंसी (TDPL) द्वारा 2014 से आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। 

 

फैसले की खबर आते ही रांची की सड़कों पर आंदोलनकारी छात्रों का जश्न फूट पड़ा। तिरंगा लहराते और ढोल-नगाड़ों की थाप पर थिरकते युवाओं के बीच सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात यह थी कि आंदोलन के मंच से “राहुल गांधी जिंदाबाद” और “छात्र एकता जिंदाबाद” के गगनभेदी नारे लग रहे थे। ALSO READ: हेमंत सोरेन के फैसले के बाद झारखंड में छात्र आंदोलन खत्म, लेकिन CBI जांच की मांग पर अड़े छात्र

 

आखिर इस पूरे घटनाक्रम के पीछे का राजनीतिक ताना-बाना क्या है? कैसे लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस पूरी लड़ाई के केंद्र में आ गए और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) इस बड़े मुद्दे पर क्यों मूकदर्शक बनकर रह गई?

1. राहुल गांधी का 'मास्टरस्ट्रोक' और हेमंत सोरेन सरकार का फैसला

झारखंड में JMM-कांग्रेस गठबंधन की सरकार है। आंदोलन कर रहे युवाओं ने कई बार आरोप लगाया था कि राज्य सरकार उनकी आवाज नहीं सुन रही है। इस गतिरोध के बीच राहुल गांधी ने 14 अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक व्यक्तिगत पत्र लिखा। 
 

17 अगस्त को कांग्रेस ने राहुल गांधी की इस चिट्ठी को सार्वजनिक किया। पत्र में राहुल गांधी ने साफ शब्दों में लिखा था कि “देश का शिक्षा तंत्र युवाओं के शोषण का जरिया बन गया है। झारखंड के छात्रों का आंदोलन शांतिपूर्ण है और उनकी मांगें पूरी तरह से जायज हैं। मुख्यमंत्री को खुद छात्रों से मिलकर उनकी समस्याएं सुननी चाहिए।” ALSO READ: झारखंड सरकार ने छात्रों की बात मानी, JSSC-CGL परीक्षा रद्द, 2014 से हुई सभी गड़बड़ियों की होगी जांच

 

राहुल गांधी के इस सार्वजनिक रुख के बाद गठबंधन सरकार पर नैतिक और राजनीतिक दबाव अभूतपूर्व रूप से बढ़ गया। इसी दबाव का परिणाम था कि 17 अगस्त की शाम मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आपात कैबिनेट बैठक बुलाई और JSSC CGL परीक्षा समेत TDPL से जुड़ी सभी गतिविधियों को रद्द करने का ऐलान कर दिया। 

 

यही वजह रही कि जीत के बाद छात्रों ने खुलकर माना कि जब राज्य सरकार सुन नहीं रही थी, तब राहुल गांधी के हस्तक्षेप और समर्थन ने उनकी लड़ाई को राष्ट्रीय स्तर पर ताकत दी।

2. छात्रों के आंदोलन पर बीजेपी क्यों रह गई पीछे?

आमतौर पर जब भी कोई छात्र या किसान आंदोलन होता है, तो मुख्य विपक्षी दल उसका नेतृत्व संभालकर सरकार को घेरता है। लेकिन झारखंड के इस मामले में बीजेपी पूरी तरह से पिछड़ती हुई नजर आई।

  • नेताओं के खोखले दावे : बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने दावा किया था कि यदि 13 अगस्त तक छात्रों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे खुद अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठेंगे। हालांकि, 13, 14 और 15 अगस्त बीत जाने के बाद भी वे आंदोलन स्थल पर नजर नहीं आए, जिससे छात्रों में निराशा और अविश्वास पैदा हुआ।
  • सहानुभूति की कमी : बीजेपी के केंद्रीय और प्रांतीय नेताओं ने सरकार पर आरोप-प्रत्यारोप तो लगाए, लेकिन छात्रों के साथ धरातल पर ऐसा कोई भावनात्मक या भरोसेमंद जुड़ाव नहीं बना सके जो युवाओं को आकर्षित कर पाता।
  • विपक्ष की भूमिका में नाकामी : जिस मुद्दे पर बीजेपी हेमंत सरकार को बड़े राजनीतिक संकट में धकेल सकती थी, उस मुद्दे की कमान राहुल गांधी और कांग्रेस के कूटनीतिक दबाव ने अपने हाथ में ले ली।

3. 'कहीं खुशी, कहीं गम': परीक्षा रद्द होने का दर्दनाक पहलू

JSSC CGL परीक्षा रद्द होने का फैसला केवल एक जश्न की कहानी नहीं है, बल्कि यह भारतीय परीक्षा प्रणाली की उस कड़वी सच्चाई को भी उजागर करता है जहां “गेहूं के साथ घुन भी पिसता है।”

 

जिन युवाओं ने सालों की मेहनत, माता-पिता की गाढ़ी कमाई और दिन-रात एक करके ईमानदारी से परीक्षा पास की थी, वे अब सड़कों पर उतरकर रो रहे हैं। उनका सवाल वाजिब है—”अगर 100 में से 20 लोगों ने बेईमानी की है, तो 80 ईमानदार छात्रों का भविष्य क्यों बर्बाद किया जा रहा है? दोबारा परीक्षा देने पर क्या गारंटी है कि वे फिर से पास हो जाएंगे?”

 

4. आगे की राह और सीबीआई जांच की मांग

हालांकि, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में 'परीक्षा सुधार समिति' का गठन किया है, लेकिन छात्रों का एक बड़ा गुट अभी भी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। छात्र नेताओं का कहना है कि परीक्षा रद्द होना एक पड़ाव है, लेकिन जब तक पूरे मामले की जांच सीबीआई (CBI) को नहीं सौंपी जाती, तब तक पेपर लीक कराने वाले भू-माफिया और भ्रष्ट तंत्र का पर्दाफाश नहीं हो पाएगा। 

 

झारखंड का यह घटनाक्रम देश की सभी राज्य सरकारों के लिए एक चेतावनी है। पेपर लीक और प्रशासनिक लापरवाही सिर्फ एक परीक्षा का रद्द होना भर नहीं है, बल्कि यह लाखों युवाओं के सपनों और मानसिक स्थिति के साथ खिलवाड़ है। राजनीतिक दृष्टिकोण से, राहुल गांधी ने समय पर सही हस्तक्षेप करके छात्रों के बीच अपनी साख मजबूत की, जबकि बीजेपी इस बड़े मौके को भुनाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई।

किसान परिवारों का सहारा बनी मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना

किसान परिवारों का सहारा बनी मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना

Mukhyamantri Krishak Durghatna Kalyan Yojana: किसान और खेती प्रदेश की अर्थव्यवस्था की आधारशिला हैं। ऐसे में खेती-किसानी से जुड़े परिवारों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा देना योगी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना इसी संवेदनशील सोच का प्रभावी उदाहरण बनकर सामने आई है।

दुर्घटना की स्थिति में किसान और उसके परिवार को आर्थिक संकट से बचाने के लिए शुरू की गई इस योजना को सरकार ने लगातार मजबूत बजटीय आधार दिया है। करोड़ों रुपये के प्रावधान के साथ बड़ी संख्या में आश्रित परिवारों को इसका लाभ मिलना योजना के व्यापक प्रभाव को दर्शा रहा है। इसके तहत पिछले वित्तीय वर्ष से अब तक 38 हजार से अधिक आश्रितों को लाभान्वित किया जा चुका है।

 

मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना 14 सितंबर 2019 से लागू है। योजना के तहत दुर्घटना के कारण मृत्यु या दिव्यांगता की स्थिति में अधिकतम पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने का प्रावधान है। योजना का दायरा भी व्यापक रखा गया है, ताकि कृषि कार्य से जुड़े पात्र परिवारों को कठिन समय में सरकारी सहायता मिल सके। खतौनी में दर्ज खातेदार और सहखातेदार के साथ ऐसे कमाऊ पारिवारिक सदस्य भी इसके दायरे में आते हैं, जिनकी आजीविका का मुख्य स्रोत खातेदार या सहखातेदार के नाम दर्ज भूमि से होने वाली कृषि आय है। पट्टे या बटाई की भूमि पर खेती करने वाले पात्र भूमिहीन कृषक भी योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

पिछले वित्तीय वर्ष में 21 हजार से ज्यादा परिवारों को मिला लाभ

इसके बजट में लगातार बढ़ोतरी सरकार की प्राथमिकता को भी दर्शा रही है। राजस्व विभाग के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2025-26 में मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के लिए 1050 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। जनपदों की मांग के अनुसार पूरी धनराशि का आवंटन किया गया और इससे करीब 21,659 आश्रित परिवार लाभान्वित हुए। यह योजना जरूरत के समय किसान परिवारों तक आर्थिक सहायता पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन रही है।

 

चालू वित्तीय वर्ष में 17 हजार से ज्यादा आश्रित लाभान्वित

वित्तीय वर्ष 2026-27 में सरकार ने योजना के लिए बजट को और बढ़ाते हुए 1150 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यानी पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में बजट में 100 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की गई है। इसके सापेक्ष प्रथम और द्वितीय किस्त के रूप में 862.50 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। जनपदों की मांग के अनुसार 813.81 करोड़ रुपये का आवंटन भी किया जा चुका है। इसके माध्यम से अब तक करीब 17,152 आश्रित परिवार लाभान्वित हुए हैं। वित्तीय वर्ष अभी जारी होने के कारण यह आंकड़ा आगे और बढ़ सकता है।

 

योजना की प्रगति के लिए हो रही निगरानी

राजस्व विभाग इसके सुचारु और पारदर्शी संचालन पर भी लगातार जोर दे रहा है। योजना की खासियत केवल बजट बढ़ाने तक सीमित नहीं है। जिलाधिकारियों को समय-समय पर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं। योजना के लिए विकसित पोर्टल को सीएम डैशबोर्ड से इंटीग्रेट किया गया है, जिससे योजना की प्रगति की निगरानी और क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल रही है।

 

Panoramic Sunroof वाली सस्ती SUVs, फीचर्स भी हैं कमाल

Panoramic Sunroof वाली सस्ती SUVs, फीचर्स भी हैं कमाल

cars

अब Panoramic Sunroof सिर्फ महंगी और लग्जरी SUVs तक सीमित नहीं रह गया है। भारतीय बाजार में कई ऐसी किफायती कारें मौजूद हैं, जिनमें 15 लाख रुपए से कम कीमत में यह प्रीमियम फीचर मिलता है। खास बात यह है कि इस लिस्ट में कॉम्पैक्ट SUV के साथ CNG कार भी शामिल है।

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Tata Nexon

Tata Nexon इस समय भारत में Panoramic Sunroof देने वाली सबसे किफायती कारों में शामिल है। इसके Pure Plus PS Turbo-Petrol Manual वेरिएंट की एक्स-शोरूम कीमत 9.35 लाख रुपये है। Nexon की खासियत यह है कि इसमें CNG वेरिएंट के साथ भी Panoramic Sunroof मिलता है। इसके CNG वेरिएंट की कीमत 10.39 लाख रुपये से शुरू होती है। कार में 10.25-इंच टचस्क्रीन और 6-स्पीकर ऑडियो सिस्टम भी मिलता है।

 

Kia Syros

 

Kia Syros में HTK Plus वेरिएंट से Panoramic Sunroof दिया गया है। यह इसे इस फीचर वाली किफायती मिड-साइज कारों में शामिल करता है। Syros में शानदार रियर सीट स्पेस और फीचर-लोडेड केबिन मिलता है। इसमें 1.0-लीटर टर्बो-पेट्रोल और 1.5-लीटर टर्बो-डीजल इंजन के विकल्प दिए गए हैं।

 

Mahindra XUV 3XO

 

Mahindra XUV 3XO में RevX ट्रिम से Panoramic Sunroof मिलता है। इसकी कीमत 11.17 लाख रुपये एक्स-शोरूम से शुरू होती है। RevX A वेरिएंट में 1.2-लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन मिलता है, जो 131 hp की पावर और 230 Nm का टॉर्क जनरेट करता है। इंजन के साथ 6-स्पीड मैनुअल और ऑटोमैटिक गियरबॉक्स का विकल्प मिलता है।

 

MG Astor

 

MG Astor में Shine ट्रिम से Panoramic Sunroof उपलब्ध है। इसकी कीमत 11.34 लाख रुपये एक्स-शोरूम से शुरू होती है। इस फीचर के साथ यह भारत की किफायती मिड-साइज SUVs में से एक है। Astor में 1.5-लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन मिलता है, जो 110 hp की पावर देता है। इसमें 5-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स स्टैंडर्ड है, जबकि ऊंचे वेरिएंट में CVT ऑटोमैटिक का विकल्प मिलता है।

Tata Curvv

Tata Curvv में Pure+ S ट्रिम से Panoramic Sunroof मिलता है। इसमें 1.2-लीटर 3-सिलेंडर टर्बो-पेट्रोल इंजन दिया गया है, जो 120 hp की पावर और 170 Nm का टॉर्क पैदा करता है। इंजन को 6-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स से जोड़ा गया है। इस लिस्ट में Curvv एकमात्र Coupe-SUV है और इसकी स्लोपिंग रूफलाइन के कारण केबिन के अंदर Panoramic Glass Roof का अनुभव और भी खास हो जाता है।

 

15 लाख से कम में Sunroof वाली कारों के विकल्प

 

अगर आपका बजट 15 लाख रुपये तक है और आप कार में Panoramic Sunroof चाहते हैं, तो Tata Nexon, Kia Syros, Mahindra XUV 3XO, MG Astor और Tata Curvv प्रमुख विकल्प हो सकते हैं। इनमें Tata Nexon खास तौर पर इसलिए अलग है क्योंकि Panoramic Sunroof का विकल्प CNG वेरिएंट में भी उपलब्ध है।

इंदौर में सनसनीखेज वारदात, पत्नी की हत्या के बाद दो बच्चों को तालाब में फेंका, बेटी की मौत

इंदौर में सनसनीखेज वारदात, पत्नी की हत्या के बाद दो बच्चों को तालाब में फेंका, बेटी की मौत

murder

इंदौर के कनाड़िया थाना क्षेत्र के झलारिया गांव में देर रात एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, चरित्र शंका के चलते सुनील चौहान नामक व्यक्ति ने कथित तौर पर अपनी पत्नी अनीता की चाकू से हमला कर हत्या कर दी। इसके बाद आरोपी ने अपने दो बच्चों को हिंगोनिया तालाब में फेंक दिया। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई।

बताया जा रहा है कि आरोपी मजदूरी करता है। पुलिस के अनुसार पत्नी की हत्या के बाद आरोपी ने अपने 11 वर्षीय बेटी माही और 8 वर्षीय बेटे अजय को हिंगोनिया तालाब में फेंक दिया। बच्चों के तालाब में गिरने के बाद दोनों ने खुद को बचाने की कोशिश की। इस दौरान बेटे ने सूझबूझ दिखाते हुए किसी तरह अपनी जान बचा ली।

मरने का नाटक कर बचा बेटा : घटना के वक्‍त 8 वर्षीय अजय ने तालाब में डूबने का नाटक किया और मौका मिलते ही किसी तरह पानी से बाहर निकल आया। इसके बाद उसने गांव के लोगों को पूरी घटना की जानकारी दी। बच्चे से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस को मामले का पता चला और तत्काल कार्रवाई शुरू की गई।

रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन में मिला बच्‍ची का शव : सूचना मिलते ही कनाड़िया थाना पुलिस मौके पर पहुंची। घटना की गंभीरता को देखते हुए एसडीईआरएफ की टीम को भी बुलाया गया। टीम ने हिंगोनिया तालाब में कई घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। काफी तलाश के बाद 11 वर्षीय बच्ची माही का शव तालाब से बरामद कर लिया गया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का जायजा लिया। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजने की कार्रवाई शुरू की है। वहीं आरोपी पिता को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस हत्या और बच्चों को तालाब में फेंकने की घटना की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

प्रारंभिक जांच में पत्नी की हत्या के पीछे चरित्र शंका की बात सामने आई है। हालांकि पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और पूछताछ के बाद ही वारदात की वास्तविक वजह और घटनाक्रम पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल पुलिस हत्या और बच्चों को तालाब में फेंकने के आरोपों की जांच करते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।

कौशल समाधान दिवस पर ट्रेनिंग पार्टनर्स की समस्याओं पर हुआ सीधा संवाद

कौशल समाधान दिवस पर ट्रेनिंग पार्टनर्स की समस्याओं पर हुआ सीधा संवाद

CM Yogi Adityanath

UP Skill Development Mission: योगी सरकार प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण कौशल प्रशिक्षण के साथ रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने के लिए कौशल विकास व्यवस्था को लगातार अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और परिणामोन्मुख बना रही है। इसी क्रम में मंगलवार को उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन मुख्यालय में आयोजित ‘कौशल समाधान दिवस’ पर प्रशिक्षण प्रदाताओं (ट्रेनिंग पार्टनर्स) की समस्याओं को सीधे सुना गया और उनके समयबद्ध समाधान के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

 

व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल, प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम तथा मिशन निदेशक पुलकित खरे की उपस्थिति में मिशन अधिकारियों और प्रशिक्षण प्रदाताओं के बीच विस्तृत संवाद हुआ। बैठक में लंबित भुगतान, ट्रेंच भुगतान व्यवस्था, ड्रेस भुगतान, असेसमेंट एवं प्रमाण-पत्र, परफॉर्मेंस गारंटी, नामांकन, प्रशिक्षार्थियों की उपस्थिति, प्लेसमेंट, प्रशिक्षण गुणवत्ता, डिजिटल पोर्टल तथा कार्रवाई से पूर्व स्पष्टीकरण जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

कौशल विकास मिशन का उद्देश्य

मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि कौशल विकास मिशन का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रदेश के युवाओं को ऐसा वास्तविक कौशल उपलब्ध कराना है, जिससे वे रोजगार प्राप्त कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण प्रदाता सरकार की योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए उनकी वास्तविक समस्याओं को सुनना और उनका समाधान करना भी विभाग की जिम्मेदारी है।

 

उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण व्यवस्था में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही तीनों जरूरी हैं। जहां अनियमितता मिले वहां नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन गुणवत्तापूर्ण और नियमों के अनुरूप कार्य कर रहे प्रशिक्षण साझेदारों के वैध भुगतान एवं अन्य समस्याओं का समाधान भी प्राथमिकता से किया जाना चाहिए। अब हर महीने के पहले सोमवार को ट्रेनिंग पार्टनर्स के साथ संवाद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल प्रमाण-पत्र नहीं, बल्कि प्रमाण-पत्र के साथ वास्तविक कौशल, आत्मविश्वास और रोजगार की क्षमता प्रदान करना योगी सरकार की प्राथमिकता है।

समस्याओं को लेकर विभाग गंभीर

प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम ने कहा कि समस्या पुरानी हो या नई, यदि वह मिशन से संबंधित है तो विभाग उसे गंभीरता से ले रहा है। उन्होंने अधिकारियों को सभी समस्याओं की स्कीम-वाइज सूची तैयार करने के निर्देश दिए, जिसमें समस्या कितने समय से लंबित है, अब तक क्या कार्रवाई हुई है और आगे क्या किया जाना है, इसका स्पष्ट उल्लेख हो। उन्होंने कहा कि सरकारी धन का भुगतान में पारदर्शिता और नियमों का पालन अनिवार्य रूप से किया जाए। वहीं, जहां रिकॉर्ड सही हैं और सत्यापन पूरा हो चुका है, वहां वैध भुगतान को लंबित नहीं रखा जाए। अनियमितता की स्थिति में कार्रवाई के साथ संबंधित पक्ष को अपना स्पष्टीकरण और पक्ष रखने का  अवसर भी दिया जाना चाहिए।

 

मिशन निदेशक पुलकित खरे ने कहा कि प्रशिक्षण प्रदाताओं द्वारा रखी गई सभी समस्याओं का योजना-वार और प्रकरण-वार परीक्षण कर समाधान की दिशा में कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि लंबित भुगतान के मामलों में स्पष्ट किया जाएगा कि किस प्रशिक्षण साझेदार का भुगतान किस कारण से लंबित है, सत्यापन की स्थिति क्या है और आगे की प्रक्रिया क्या होगी।

 

असेसमेंट प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए एससीवीटी के माध्यम से व्यवस्था को सक्रिय किया जा रहा है। साथ ही राजकीय आईटीआई में कार्यरत प्रशिक्षकों का पैनल तैयार कर स्थानीय स्तर पर असेसमेंट कराने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है, जिससे प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले पात्र युवाओं को समय से प्रमाण-पत्र मिल सकें।

 

प्रशिक्षण प्रदाताओं की ओर से परफ़ॉर्मेंस गारंटी के स्थान पर अन्य वित्तीय व्यवस्था की मांग भी रखी गई। इस पर उचित सत्यापन प्रक्रिया के साथ पीजी  व्यवस्था को पुनः लागू करने पर सहमति व्यक्त की गई। वहीं, स्टार्टअप प्रशिक्षण साझेदारों के लिए गारंटी राशि को कम करने पर भी विचार किया गया, जिससे नए संस्थानों पर अनावश्यक वित्तीय भार कम हो और अधिक संस्थाएं कौशल प्रशिक्षण व्यवस्था से जुड़ सकें।

मिशन की ओर से असेसमेंट प्रक्रिया को गति देने और पात्र युवाओं को समयबद्ध प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। कंप्यूटर प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र की स्वीकार्यता तथा सीसीसी के साथ इसकी समकक्षता/प्राथमिकता से जुड़े विषय पर भी चर्चा हुई। विभाग की ओर से संबंधित स्तर पर विषय को उठाकर आवश्यक कार्रवाई करने की बात कही गई।

कागजों पर प्लेसमेंट दिखाना लक्ष्य नहीं

बैठक में प्लेसमेंट के चौथे ट्रेंच तथा रोजगार में युवाओं के टिकाव पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि लक्ष्य केवल कागजों पर प्लेसमेंट दिखाना नहीं, बल्कि युवाओं को रोजगार दिलाकर उन्हें उस रोजगार में बनाए रखना है। इसी उद्देश्य से प्लेसमेंट के बाद निर्धारित अवधि तक रोजगार में बने रहने वाले प्रशिक्षार्थियों तथा गुणवत्तापूर्ण प्लेसमेंट कराने वाले प्रशिक्षण साझेदारों के लिए प्रोत्साहन व्यवस्था विकसित करने पर भी काम किया जा रहा है।

 

योगी सरकार की कौशल विकास नीति में गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बैठक में स्पष्ट किया गया कि प्रशिक्षण साझेदारों को आवश्यक आर्थिक एवं प्रशासनिक सहयोग देने के साथ प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी जरूरी है। प्रशिक्षणार्थियों को अपने ट्रेड की व्यावहारिक जानकारी, सेक्टर की समझ, सॉफ्ट स्किल, इंटरव्यू कौशल और आत्मविश्वास के साथ रोजगार के लिए तैयार किया जाना चाहिए। अधिकारियों ने कहा कि कौशल विकास मिशन की वास्तविक पहचान केवल प्रमाण-पत्र नहीं, बल्कि प्रमाणित और रोजगारपरक कौशल होना चाहिए।

 

कौशल समाधान दिवस में यह संदेश स्पष्ट रहा कि विभाग और प्रशिक्षण प्रदाता प्रदेश के युवाओं को कौशल, रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने के साझा लक्ष्य के सहभागी हैं। नियमित संवाद से जमीनी समस्याओं की पहचान और उनके त्वरित समाधान के साथ योजनाओं एवं प्रक्रियाओं को अधिक व्यावहारिक बनाया जा सकेगा।

iPhone 18 Pro और Pro Max की एंट्री सितंबर में! Apple ला सकता है अपना पहला फोल्डेबल iPhone

iPhone 18 Pro और Pro Max की एंट्री सितंबर में! Apple ला सकता है अपना पहला फोल्डेबल iPhone

Apple सितंबर 2026 में अपनी नई iPhone 18 Pro सीरीज लॉन्च कर सकता है। कंपनी के आगामी लॉन्च इवेंट में iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max पेश किए जाने की उम्मीद है। इस बार सबसे बड़ा आकर्षण Apple का पहला फोल्डेबल iPhone हो सकता है।

 

Apple ने अभी तक लॉन्च इवेंट की आधिकारिक तारीख का ऐलान नहीं किया है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक इवेंट सितंबर की शुरुआत में आयोजित किया जा सकता है। कुछ रिपोर्ट्स में 9 सितंबर 2026 को संभावित तारीख बताया गया है, जबकि कुछ सूत्रों का कहना है कि इवेंट 8 सितंबर को भी हो सकता है। आधिकारिक निमंत्रण जारी होने के बाद ही तारीख की पुष्टि होगी।

 

सितंबर में नहीं आएगा रेगुलर iPhone 18?

 

इस साल Apple अपनी iPhone लॉन्च रणनीति में बड़ा बदलाव कर सकता है। पिछली कई पीढ़ियों की तरह रेगुलर iPhone 18 को Pro मॉडल के साथ सितंबर में लॉन्च किए जाने की उम्मीद नहीं है। सितंबर इवेंट में मुख्य रूप से iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max पर फोकस रहने की संभावना है।

 

Apple ला सकता है पहला फोल्डेबल iPhone

 

Apple के पहले फोल्डेबल iPhone को लेकर लंबे समय से अटकलें चल रही हैं। अब माना जा रहा है कि कंपनी सितंबर 2026 में इसे पहली बार पेश कर सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस डिवाइस को iPhone Ultra नाम दिया जा सकता है, हालांकि Apple ने अभी इसके नाम की पुष्टि नहीं की है।

 

फोल्डेबल iPhone का मुकाबला बाजार में मौजूद Samsung और अन्य कंपनियों के फोल्डेबल स्मार्टफोन्स से होगा। अगर Apple वास्तव में इस डिवाइस को लॉन्च करता है तो यह कंपनी की iPhone लाइनअप में हाल के वर्षों का सबसे बड़ा बदलाव हो सकता है।

 

iPhone 18 Pro से क्या उम्मीद?

 

iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max के साथ Apple नए हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर फीचर्स पेश कर सकता है। नए iPhone मॉडल iOS 27 के साथ आने की उम्मीद है। हालांकि, स्पेसिफिकेशन और फीचर्स को लेकर Apple की ओर से अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। कुल मिलाकर, सितंबर 2026 का Apple इवेंट खास रहने वाला है। iPhone 18 Pro सीरीज के साथ पहली बार फोल्डेबल iPhone की एंट्री होती है या नहीं, इस पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।