
Pakistani beauty creams mercury toxicity: महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों से स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। गोरा होने की चाहत में संदिग्ध और अवैध रूप से बिक रही ब्यूटी क्रीमों का इस्तेमाल करने से 100 से अधिक लोग गंभीर पारा विषाक्तता (Mercury Toxicity) का शिकार हो चुके हैं।
अकोला, नासिक, संभाजीनगर, नागपुर और पुणे जैसे जिलों में तंत्रिका रोग विशेषज्ञों (Neurologists) के पास ऐसे कई युवा मरीज पहुंचे हैं, जो अनिद्रा, पैरों में तेज जलन, मांसपेशियों में दर्द, झटके, याददाश्त में कमी और गुर्दे (Kidney) की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। जांच में पाया गया कि मरीजों के रक्त में पारे (Mercury) का स्तर सामान्य सीमा से 10 से 40 गुना तक अधिक था।
मामला क्या है? अकोला और नासिक से शुरू हुआ सिलसिला
यह पूरा मामला तब सामने आया जब अकोला जिले के मूर्तिजापुर स्थित गोरेगांव के ऋषिकेश धोरे और कुछ अन्य ग्रामीण गंभीर लक्षणों के साथ अकोला शहर के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. नितिन वीरवानी के पास पहुंचे। मरीजों की शिकायत थी कि उन्हें रात में नींद नहीं आ रही, चिड़चिड़ापन रहता है और पैरों में तेज जलन के साथ झनझनाहट महसूस होती है।
डॉ. वीरवानी द्वारा की गई पूछताछ में पता चला कि इन सभी मरीजों ने हाल ही में स्थानीय दुकानों से त्वचा को निखारने का दावा करने वाली क्रीम खरीदी थी। इसी तरह अकोला की एक 30 वर्षीय महिला के मामले में, जब उसने क्रीम लगाना शुरू किया तो शुरुआती दिनों में चेहरा साफ हुआ, लेकिन कुछ ही हफ्तों बाद चेहरे पर खुजली, त्वचा का सूखना और पैरों में झुनझुनी होने लगी। रक्त परीक्षण में महिला के शरीर में पारे का स्तर सामान्य से 10 गुना अधिक निकला और उसमें CASPR-2 प्रतिरक्षी (Antibodies) पाए गए।
नासिक के डॉ. राहुल बाविस्कर और संभाजीनगर के डॉ. आनंद सोनी ने भी पाया कि कई मरीजों में पारे के कारण शरीर का इम्युनिटी सिस्टम भ्रमित हो गया, जिससे तंत्रिका कोशिकाओं (Nerve cells) पर हमला होने लगा और कुछ मरीजों के गुर्दे भी प्रभावित हुए।
पाकिस्तानी कनेक्शन या भारत में फर्जी मैन्युफैक्चरिंग?
जांच में जिन क्रीमों के नाम मुख्य रूप से सामने आए हैं, उनमें कथित रूप से पाकिस्तान निर्मित 'गोरी कॉस्मेटिक्स' (Goree Cosmetics), 'गोल्डन स्टार कॉस्मेटिक्स' और 'शाहीन कॉस्मेटिक्स की फेस फ्रेश गोल्ड प्लस' शामिल हैं।
- एफडीए (FDA) की सख्त कार्रवाई: महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने इन क्रीमों को असुरक्षित घोषित कर पूरे राज्य में छापेमारी शुरू की है। संभाजीनगर में जब्त सैंपलों की लैब जांच में पारे का स्तर तय सीमा से 18 से 40 गुना अधिक पाया गया।
- ATS जांच की मांग: क्रीमों के पैकेट पर कोई बैच नंबर, मैन्युफैक्चरिंग या एक्सपायरी डेट दर्ज नहीं थी। चूंकि यह संदिग्ध उत्पाद अवैध रूप से सीमाओं के पार से आ रहा है या भारत में ही इसका फर्जी निर्माण हो रहा है, इसलिए एफडीए ने मामले की गहन जांच के लिए आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) से भी संपर्क किया है।
- ग्रे मार्केट का जाल: छापेमारी में 70 लाख रुपये से अधिक का माल जब्त किया गया है। हालांकि, दुकानदारों के पास मुंबई के क्रॉफर्ड मार्केट जैसे थोक बाजारों से खरीद के कोई बिल या दस्तावेज नहीं मिले, जिससे इसके मुख्य वितरकों (Suppliers) तक पहुंचना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
क्रीम में पारा क्यों मिलाया जाता है और यह कितना खतरनाक है?
भारत के 'औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन कानून' (Drugs and Cosmetics Act) के तहत कॉस्मेटिक्स में पारे की अधिकतम अनुमत सीमा 1 ppm (Part Per Million) है। लेकिन सस्ते और तात्कालिक नतीजे देने के लिए अवैध निर्माता इसमें पारे की अत्यधिक मात्रा मिला देते हैं।

खुद को और अपनों को कैसे सुरक्षित रखें?
- अज्ञात और बिना लेबल वाले उत्पादों से बचें: जिस क्रीम पर निर्माता का नाम, बैच नंबर, एक्सपायरी डेट या सामग्री (Ingredients) की सूची न हो, उसे भूलकर भी न खरीदें।
- इंस्टेंट फेयरनेस के दावों से सावधान रहें: जो क्रीम 7 से 10 दिनों में रंग गोरा करने का दावा करती है, उसमें खतरनाक केमिकल्स होने की संभावना सबसे अधिक होती है।
- लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें: यदि किसी फेयरनेस क्रीम का उपयोग करने के बाद अनिद्रा, पैरों में जलन, कंपन या त्वचा की समस्या हो, तो तुरंत क्रीम का इस्तेमाल बंद करें और न्यूरोलॉजिस्ट या फिजिशियन से जांच कराएं।
महाराष्ट्र सरकार और पुलिस प्रशासन ने अब तक मुंबई, परभणी, नासिक और संभाजीनगर सहित कई जिलों में एफआईआर दर्ज की है। जनता से अपील की गई है कि वे ऐसी अप्रमाणित क्रीमों के झांसे में न आएं और केवल अधिकृत व लाइसेंस प्राप्त विक्रेताओं से ही सौंदर्य प्रसाधन खरीदें।


