राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला, SIT जांच रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला, SIT जांच रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट

Clean chit for Champat Rai and Anil Mishra

Clean chit for Champat Rai and Anil Mishra: अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि मंदिर के दान व चढ़ावे में हुई कथित गड़बड़ी और चोरी के मामले में विशेष जांच टीम (SIT) ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा को बड़ी राहत दी है। एसआईटी द्वारा उत्तर प्रदेश शासन को सौंपी गई अंतिम जांच रिपोर्ट में दोनों प्रमुख पदाधिकारियों को क्लीन चिट मिल गई है और रिपोर्ट में किसी भी अनियमितता में उनकी संलिप्तता का कोई जिक्र नहीं है।

SIT की अंतिम रिपोर्ट में राय और मिश्रा को राहत

अयोध्या के बहुचर्चित राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। राज्य गृह विभाग द्वारा इस रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद इसे अग्रिम कार्रवाई के लिए 'श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' को भेज दिया गया है। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर चोरी के 81 लाख कैसे बरामद हुए? चंपत राय की चिट्‍ठी से खुला बड़ा राज

 

इस रिपोर्ट के सामने आते ही स्पष्ट हो गया है कि पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा के खिलाफ कोई आरोप तय नहीं हुए हैं और उन्हें इस मामले में क्लीन चिट दे दी गई है।

 

विवाद और पदों से इस्तीफा

जून माह में मंदिर के दान प्रबंधन और कैश काउंटिंग रूम से चढ़ावे की चोरी के आरोप सामने आए थे, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में जमकर बयानबाजी शुरू हो गई थी। विवाद गहराने और निष्पक्ष जांच की मांग के बीच चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा ने 27 जून को ट्रस्ट के अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। पूछताछ के दौरान चंपत राय ने स्पष्ट किया था कि उन्होंने स्वयं गड़बड़ी का पता चलते ही कार्रवाई की पहल की थी और शिकायत दर्ज कराई थी। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर में बड़ा बदलाव, ऑनलाइन दान करते ही तुरंत मिलेगी डिजिटल रसीद

क्या है पूरा मामला? 

एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट में कुल 8 आरोपियों के नाम शामिल हैं (अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव, करुणेश पांडे और राम शंकर यादव)। इन सभी को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। शुरुआती जांच में पाया गया था कि गिनती कक्ष में कर्मचारियों द्वारा नकदी छिपाने की घटनाएं हुई थीं। इसके साथ ही एसआईटी ने ट्रस्ट और बैंक के मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के क्रियान्वयन में कमियों की ओर भी इशारा किया था। राज्य सरकार ने 13 जून को लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में इस तीन सदस्यीय SIT का गठन किया था। 

 

उत्तर प्रदेश शासन की SIT द्वारा दी गई क्लीन चिट से चंपत राय और अनिल मिश्रा के समर्थकों ने राहत की सांस ली है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत गठित दूसरी एसआईटी की निगरानी प्रक्रिया भी समानांतर रूप से जारी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार की एसआईटी रिपोर्ट के बाद ट्रस्ट में दोनों दिग्गजों की भूमिका को लेकर क्या नया फैसला लिया जाता है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या अंतिम रिपोर्ट के बाद दोनों को फिर से ट्रस्ट में शामिल किया जाएगा?