Alpha Box Office Collection Day 1: आलिया भट्ट की स्पाई थ्रिलर फिल्म फीकी शुरुआत, ओपनिंग डे में 9 करोड़ की कमाई की

Alpha Box Office Collection Day 1: रिलीज से पहले काफी चर्चा बटोरने के बाद, ‘ऐल्फा’ आखिरकार बड़े पर्दे पर आ गई है। इस फिल्म के साथ कई खास बातें जुड़ी थीं – जैसे YRF स्पाई यूनिवर्स की पहली महिला-प्रधान कहानी होना और आलिया भट्ट व शरवरी को एक्शन-पैक्ड अवतार में एक साथ लाना। लेकिन बॉक्स ऑफ़िस पर इसका पहला दिन उम्मीद से ज्यादा ठंडा रहा।

3 जुलाई को रिलीज़ हुई ‘ऐल्फा’ को क्रिटिक्स और दर्शकों से मिले-जुले से लेकर नेगेटिव रिव्यूज मिले। शुरुआती रिस्पॉन्स का असर इसके बॉक्स ऑफिस परफ़ॉर्मेंस पर भी साफ दिखा है। ट्रेड वेबसाइट Sacnilk के अनुसार, ‘अल्फा’ ने भारत में अपनी ओपनिंग वाले दिन ₹9 करोड़ की नेट कमाई की। यह फिल्म देश भर में 7,534 शो में रिलीज हुई, जिससे इसे सिनेमाघरों में अच्छी-खासी पहुंच मिली।

हालांकि इसकी ओपनिंग हाल ही में रिलीज हुई कुछ बॉलीवुड फिल्मों से बेहतर है, लेकिन YRF स्पाई यूनिवर्स की किसी भी फ़िल्म के लिए यह पहले दिन की सबसे कम कमाई है। इस फ्रैंचाइजी की पिछली फिल्म ‘वॉर 2’ (जिसमें ऋतिक रोशन और जूनियर NTR थे) ने खराब रिव्यू के बावजूद 52 करोड़ की नेट ओपनिंग की थी और इसे 19,455 शो में रिलीज किया गया था। शाहरुख खान की ‘पठान’ के नाम अभी भी इस फ्रैंचाइजी में सबसे बड़ी ओपनिंग का रिकॉर्ड है, जिसने पहले दिन ₹57 करोड़ की नेट कमाई की थी।

हालांकि, आलिया भट्ट के लिए एक अच्छी खबर है। ‘ऐल्फा’ ने उनकी पिछली थिएटर में रिलीज़ हुई फिल्म ‘जिगरा’ के ओपनिंग-डे कलेक्शन को आसानी से पीछे छोड़ दिया है। 2024 की फिल्म ‘जिगरा’ ने अपने पहले दिन 5,779 शो से ₹4.55 करोड़ (नेट) कमाए थे, जिससे ‘ऐल्फा’ दोनों में से बेहतर ओपनिंग करने वाली फिल्म बन गई है।

शिव रवैल के डायरेक्शन में बनी ‘ऐल्फा’ में आलिया भट्ट और शरवरी मुख्य भूमिकाओं में हैं, जबकि बॉबी देओल और अनिल कपूर अहम रोल निभा रहे हैं। ऋतिक रोशन भी कबीर के तौर पर एक स्पेशल अपीयरेंस दे रहे हैं और बड़े पर्दे पर अपने मशहूर ‘वॉर’ वाले किरदार को वापस ला रहे हैं।

यह फिल्म शरवरी के लिए भी खास है, जिनकी दो फिल्में अभी एक साथ थिएटर में चल रही हैं। उनकी पिछली रिलीज़, इम्तियाज अली की ‘मैं वापस आऊंगा’, अभी भी सिनेमाघरों में चल रही है, जिससे ‘अल्फा’ एक महीने के अंदर उनकी दूसरी थिएटर रिलीज बन गई है।

रिलीज से पहले, सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ फ़िल्म सर्टिफिकेशन ने 29 जून, 2026 को इंग्लिश सबटाइटल के साथ फिल्म के हिंदी वर्शन को मंज़ूरी दी थी। NDTV की एक रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म को UA 16+ सर्टिफ़िकेट मिला है और इसका रनटाइम 2 घंटे, 20 मिनट और 48 सेकंड है।

Alpha Alia Bhatt Movie Review: मिसफिट आलिया भट्ट….तो स्पाई फिल्म में ग्लैमर डॉल बनकर रह गईं शरवरी वाघ, बॉबी देओल ने बचा ली थोड़ी इज्जत

फिल्म- ऐल्फा

निर्देशक- शिव रवैल

कलाकार- आलिया भट्ट, शरवरी, अनिल कपूर, बॉबी देओल

रेटिंग-2/5

Alpha Alia Bhatt Movie Review: जब यशराज ने फिल्म ऐल्फा का ऐलान किया था तो फैंस का एक्साइटमेंट और उम्मीदें काफी बढ़ी थीं। इसके बाद फिल्म की स्टार कास्ट का ऐलान हुआ तो आलिया भट्ट, शरवरी वाघ, बॉबी देओल और अनिल कपूर का नाम सुनकर हर किसी की उम्मीदें और ज्यादा बढ़ गई थीं। लेकिन फिल्म देखकर आप ठगा हुआ सा महसूस करने वाले हैं।

कहानी

शिव रावेल की डायरेक्ट की गई फिल्म ऐल्फा में आलिया का किरदार ‘सीता’ आपको फुल एक्शन में नजर आती हैं। वह अजेय है, उससे कोई गलती नहीं होती, वह मौत को कई बार टक से छूकर वापस आती हैं। वहीं हवा में उछलकर ऐसे दुश्मनों को ढेर कर देती हैं जैसे ग्रेवटी से उनका लेना देना ही न हो। उसे ‘टेस्ट सब्जेक्ट’ के तौर पर बढ़ा किया जाता है। घर-परिवार प्यार से कोसों दूर होती है।

प्यार और हमदर्दी क्या होती है उसे नहीं पता है। उसे अपने इमोशंस भी जाहिर करने में भी काफी मुश्किल होती है। इसीलिए, जब वह अपनी अलग हो चुकी जुड़वां बहन दुर्गा के साथ कुछ प्यार भरे पल बिताती है, तो खुश होती है नया एहसास करती है। लेकिन आलिया पर उनका ये किरदार उतना जच नहीं रहा है। ‘अल्फा’ की कहानी 1999 के कारगिल युद्ध पर बेस्ड है, जिसमें दोनों तरफ काफी नुकसान हुआ था। बढ़ते खतरों के बीच भारत को अजेय बनाने के पक्के इरादे के साथ, कर्नल फतेह सिंह लखावत वैज्ञानिक डॉ. वर्गीज की मदद से एक खास टास्क फोर्स बनाने के लिए एक ‘बेहतरीन और एडवांस्ड प्रोग्राम’ तैयार करते हैं। जल्द ही, कुछ युवा पुरुषों को ‘अल्फा’ नाम का सीरम दिया जाता है, जिसे सुपरह्यूमन बनाने के लिए खास तौर पर तैयार किया गया था।

यह सीरम देखने की क्षमता, रिफ्लेक्स, फेफड़ों की क्षमता और इंद्रियों की शक्ति को बढ़ाता है। इससे सुनने की क्षमता तेज हो जाती है और पानी के अंदर आठ मिनट तक सांस रोके रखने की काबिलियत मिलती है। लेकिन जल्द ही, सीरम के खतरनाक साइड इफेक्ट्स दिखने लगते हैं। इस बात से अनजान, लेफ्टिनेंट कर्नल विक्रांत कौल अपनी पत्नी जानकी को यह सीरम दे देते हैं, जब प्रेग्नेंसी के दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ने का खतरा होता है।

नतीजा? एक बच्ची को जन्म देने के बाद जानकी की ऑपरेशन टेबल पर ही मौत हो जाती है। उस बच्ची को फतेह सिंह चुपके से बदल देते हैं और उसे एक ‘ऐल्फा’ सोल्जर के तौर पर पालते-पोसते हैं। दुनिया से दूर, राजस्थान की एक फैसिलिटी में कैद और किसी एक्सपेरिमेंट की तरह लगातार निगरानी में पली-बढ़ी सीता एक हथियार बन जाती है। लेकिन फतेह सिंह असल में वो नहीं हैं जो होने का दावा करते हैं। और इसी उतार-चढ़ाव भरे माहौल में एंट्री होती है उसकी जुड़वां बहन दुर्गा की, जो उससे अलग हो गई थी।

डायरेक्शन

बात अगर डायरेक्टर शिव रवैल की करें, जिन्होंने ऐल्फा को निर्देशित किया है। एक तरह से कहा जा सकता है कि शिव ने स्पाई थ्रिलर को स्टाइलिश थिलर बना दिया है। फिल्म को देखकर आपको बोरियत होने लगती है। एक सीन भी आपके अंदर एक्साइटमेंट नहीं जगाता है। फिल्म के कई सीन अधूरेपन का शिकार है। वहीं कई जगह आप को एक्शन देख ऐसा लगेगा कि ये आखिर क्यों हो रहा है?

एक्टिंग

फिल्म ऐल्फा का लीड किरदार आलिया भट्ट हैं। बाकी पूरी कास्ट को यशराज ने सपोर्टिंग रोल में रखा है। फिल्म की कहानी आलिया के ईर्द-गिर्द ही घूमती हैं। फिल्म देख आपको बस एक ही सवाल खाए जाता है कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी, जो आलिया ने इस फिल्म को हां कहा। जिगरा के बाद आलिया के करियर में एक और बुरी फिल्म एड हो गई है ‘ऐल्फा’। आलिया भट्ट जैसी दमदार एक्ट्रेस की फिल्म से हर किसी को काफी उम्मीदें रहती हैं। उन्होंने हाईवे, गंगूबाई बाई जैसी शानदार फिल्में दी हैं।

अब बात करते हैं शरवरी वाघ की। यशराज ने शरवरी को फिल्मी दुनिया में लॉन्च किया है। यशराज के अलावा वे और भी फिल्मों में शानदार काम के साथ नजर आई हैं। हाल में रिलीज हुई उनकी मैं वापस आउंगा हो या फिर महाराज दोनों ही फिल्मों में एक्ट्रेस का इतना शानदार है कि उनसे भी काफी उम्मीदें रहती हैं। लेकिन अफसोस निर्देशक एक्ट्रेस के टैलेंट का यूज न कर सके। फिल्म ऐल्फा में शरवरी को बहुत कम स्क्रीन टाइम दिया गया है। वहीं उनका रोल फिल्म के लिए जरूरी भी नहीं लगता है। अगर वह फिल्म में न होती तो भी कोई फर्क नहीं पड़ने वाला था।

फिल्म की इज्जत थोड़ी बहुत बॉबी देओल ने अपनी दमदार एक्टिंग से बचा ली है। लेकिन बेतुक कमजोर कहानी ने उनका काम भी खराब किया है। वहीं अनिल कपूर भी अपने रोल के हिसाब से फिट हैं। फिल्म में ऋतिक के कबीर वाले कौमियो ने फिल्म को थोड़ी बहुत हाईप दिलाई है।

फिल्म को देखें या नहीं

फिल्म को न देखना कहना जायज नहीं होता है। एक फिल्म बनाने में कई लोगों की मेहनत होती है। लेकिन कुछ फिल्में ऐसी होती हैं, जिन्हें किसी भी हाल में टॉलरेट करना मुश्किल होता है। ऐल्फा के साथ भी कुछ ऐसा ही है। अगर आप लीड कास्ट के जबरा फैन हैं…यानी उनकी शक्ल देख चेन मिल जाता है, तो आप इसे देख सकते हैं। बाकि फिल्म में देखने लायक कुछ भी नहीं।

Alpha Movie: ‘ऐल्फा’ में आलिया भट्ट-शरवरी वाघ के बिकनी सीन को यूजर्स ने बताया निरमा ऐड, बोले- धुरंधर बनने चले थे…

Alpha Movie: बॉलीवुड एक्ट्रेस आलिया भट्ट और शरवरी की स्पाई-एक्शन थ्रिलर फिल्म ‘ऐल्फा’ आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फिल्म को दर्शकों और क्रिटिक्स से मिले-जुले से लेकर नेगेटिव रिव्यूज मिले हैं। फिल्म के कई सीन ऑनलाइन लीक हो गए हैं, जिनमें से एक में आलिया और शरवरी का बिकिनी सीन भी शामिल है। हालांकि, इंटरनेट पर इसे लेकर कोई खास उत्साह नहीं दिख रहा है।

‘ऐल्फा’ फिल्म का एक सीन X पर सामने आया है, जिसमें आलिया और शरवरी बिकिनी पहने हुए पानी से बाहर निकलती हुई दिख रही हैं। इस सीन में दोनों एक्ट्रेस बिकिनी में अपनी कर्वी बॉडी दिखाती नजर आ रही हैं। हालांकि, इस सीन ने कई दर्शकों को निराश किया है। लोगों ने YRF की इस बात के लिए आलोचना की है कि एक्शन थ्रिलर फिल्म होने के बावजूद, वे फीमेल एक्ट्रेस के लिए बिकिनी वाले सीन जरूर रखते हैं। कई यूजर्स ने इस सीन की तुलना निर्मा (Nirma) के विज्ञापन से भी की है।

एक ट्वीट में लिखा था, “उन्होंने YRF की ‘Alpha’ फिल्म में निरमा का ऐड क्यों डाल दिया?” एक और ट्वीट में कहा गया, “YRF वही कर रहा है जो वह हमेशा करता है – जासूसी फिल्म में बिकिनी सीन ज़बरदस्ती डालना।” एक और यूज़र ने कमेंट किया, “क्या जासूसी फिल्म ऐसी दिखनी चाहिए? यह तो बिकिनी पहनकर हनीमून मना रहे लेस्बियन कपल की फ़िल्म जैसी लग रही है। YRF को बिकिनी का इतना जुनून क्यों है…?”

एक और व्यक्ति ने लिखा, “मुझे पता था!! YRF जासूसी फ़िल्म बनाए और उसमें बिकिनी सीन न हो? नामुमकिन। उन्होंने इस बार दर्शकों को बेवकूफ़ बनाने के लिए टीजर और ट्रेलर में इसे नहीं दिखाया।” एक और ट्वीट में लिखा था, “बड़ा घोटाला, बिकिनी में भारतीय महिला एजेंट?????? मिस्टर चोपड़ा, आप ऐसा कैसे कर सकते हैं? आपको भारतीय RAW एजेंटों को बिकिनी क्वीन की तरह दिखाने का अधिकार किसने दिया?”

यह पहली बार नहीं है जब YRF स्पाई यूनिवर्स को अपनी महिला जासूसों की स्टाइलिंग को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ा है। ‘वॉर 2’ में कियारा आडवाणी के बिकिनी सीन पर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ दर्शकों ने जासूस को इतने ग्लैमरस अवतार में दिखाए जाने पर सवाल उठाए। इससे पहले, ‘पठान’ फिल्म के गाने ‘बेशर्म रंग’ में दीपिका पादुकोण की ऑरेंज बिकिनी को लेकर बड़ा विवाद हुआ था। कॉस्ट्यूम के रंग को लेकर फिल्म के बहिष्कार की मांग उठी थी और राजनीतिक विरोध भी हुआ था।

शिव रवैल की डायरेक्ट की हुई ‘ऐल्फा’, YRF स्पाई यूनिवर्स की सातवीं फिल्म है। इस फिल्म में आलिया भट्ट और शरवरी मुख्य भूमिकाओं में हैं, साथ ही अनिल कपूर और बॉबी देओल भी हैं। यह फ़िल्म एक ऐसी ट्रेंड मर्डरर की कहानी है जिसे सुपर-सोल्जर सीरम दिया गया है, और उसे अपने ही मेंटर के खिलाफ लड़ना पड़ता है। यश राज फिल्म्स के बैनर तले आदित्य चोपड़ा द्वारा प्रोड्यूस की गई ‘अल्फा’ की कहानी उदय चोपड़ा ने लिखी है, और इसका स्क्रीनप्ले सौमिल शुक्ला, श्रीधर राघवन और इशिता मोइत्रा ने तैयार किया है। यह YRF स्पाई यूनिवर्स की पहली महिला-प्रधान स्पाई एक्शन फिल्म है, इससे पहले इस यूनिवर्स की फिल्मों में ऋतिक रोशन, सलमान खान और शाहरुख खान जैसे पुरुषमेल सुपरस्टार्स मुख्य भूमिकाओं में रहे हैं।

Nagabandham-The Secret Treasure Review: मंदिरों के रहस्य, रायल सीन्स और रोंगटे खड़े कर देने वाली मैथोलॉजिकल एक्शन फिल्म है ‘नागबंधम’

फिल्म- ‘नागबंधम – द सीक्रेट ट्रेजर’

कलाकार- विराट कर्णा, नभा नतेश, महेश मांजरेकर, जगपति बाबू, मुरली शर्मा, रामचंद्र राजू, अनसूया भारद्वाज, सरन्या पोनवन्नन, ऋषभ साहनी, दक्षा नागरकर

निर्देशक- अभिषेक नामा

रेटिंग- 3/5

Nagabandham-The Secret Treasure Review: भारतीय सिनेमा में जब भी पौराणिक रहस्य, प्राचीन मंदिरों की अनकही कहानियां और बड़े स्तर पर रचे गए रोमांच की बात होती है, दर्शकों की उम्मीदें अपने आप बढ़ जाती हैं। ‘नागबंधम – द सीक्रेट ट्रेजर’ ऐसी ही एक फिल्म है जो दर्शकों को एक ऐसे संसार में लेकर जाती है जहां रहस्य, इतिहास, सनातन परंपराएं और छिपी हुई शक्तियां एक साथ जीवंत होती नजर आती हैं।

यह फिल्म सिर्फ खजाने की तलाश की कहानी नहीं है, बल्कि सनातन परंपराओं से जुड़े उन रहस्यों की यात्रा है, जिनके बारे में अक्सर केवल कथाएं सुनने को मिलती हैं।यह कहानियां अब तक फिल्मों में नजर नहीं आती थी।

फिल्म की कहानी

फिल्म की कहानी रहस्य के साथ शुरू होती है और धीरे-धीरे अपने बड़े कैनवास को दर्शकों के सामने खोलती है। एक तरफ अतीत में छिपे ऐसे रहस्य हैं, जो वर्षों से दुनिया से दूर हैं, तो दूसरी ओर वर्तमान में कुछ ऐसे लोग हैं जिनकी जिंदगी इन रहस्यों से अनजाने में जुड़ जाती है। रुद्र की जिंदगी अचानक एक दर्दनाक मोड़ लेती है, जहां परिवार पर हुए हमले के बाद उसके सामने ऐसे सवाल खड़े हो जाते हैं, जिनके जवाब सामान्य दुनिया में नहीं बल्कि सदियों पुराने इतिहास में छिपे हैं। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, नागबंधम, ब्रह्मकमल और प्राचीन मंदिरों के रहस्य धीरे-धीरे खुलते जाते हैं। फिल्म की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह सिर्फ एक खजाने की खोज तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उसे धार्मिक मान्यताओं, इतिहास और रहस्यमयी घटनाओं से जोड़कर एक बड़े अनुभव में बदल देती है।

निर्देशन

निर्देशक अभिषेक नामा ने फिल्म को केवल कहानी के स्तर पर नहीं बल्कि विजुअल स्केल पर भी बड़ा बनाने का प्रयास किया है। फिल्म के कई दृश्य ऐसे हैं जो थिएटर के बड़े पर्दे पर प्रभाव छोड़ते हैं। खास तौर से विशाल मंदिर, राजसी महलों जैसे सेट्स, गुफाओं की रहस्यमयी दुनिया और ऐतिहासिक वातावरण फिल्म को एक अलग पहचान देते हैं। सेट डिज़ाइन और आर्ट डायरेक्शन उल्लेखनीय है फिल्म की सिनेमैटोग्राफी इसकी बड़ी ताकत बनकर सामने आती है। कैमरा कई दृश्यों को भव्यता के साथ प्रस्तुत करता है। एक्शन दृश्यों को बड़े स्तर पर डिजाइन किया गया है और कई सीक्वेंस दर्शकों को चौंकाने की क्षमता रखते हैं। खासकर युद्ध और संघर्ष वाले दृश्य काफी प्रभावी बन पड़े हैं।

परफॉर्मेंस

रुद्र के किरदार में विराट कर्णा पूरी फिल्म का मजबूत केंद्र दिखाई देते हैं। एक्शन दृश्यों में उनका आत्मविश्वास और भावनात्मक दृश्यों में उनकी संवेदनशीलता दोनों प्रभाव छोड़ती हैं। विशेष रूप से उनके नागा रूप वाले दृश्य आकर्षक लगते हैं। पार्वती के रूप में नभा नतेश अपने किरदार में सहज दिखाई देती हैं और स्क्रीन पर अच्छा प्रभाव छोड़ती हैं। जगपति बाबू अपने अनुभव के साथ किरदार में गंभीरता लेकर आते हैं और उनकी स्क्रीन प्रेजेंस हमेशा की तरह मजबूत है। महेश मांजरेकर अपने सीमित दृश्यों में भी प्रभाव पैदा करने में सफल रहते हैं। मुरली शर्मा एक बार फिर अपने संतुलित और स्वाभाविक अभिनय से किरदार को मजबूती देते हैं। रामचंद्र राजू अपने नकारात्मक किरदार में प्रभावी दिखाई देते हैं और कहानी में खतरे का एहसास बनाए रखते हैं।

ऋषभ साहनी फिल्म में एक सरप्राइज पैकेज साबित होते हैं। उनकी बॉडी लैंग्वेज, आक्रामकता और स्क्रीन प्रेजेंस विरोधी किरदार को दमदार बनाती है। अनसूया भारद्वाज, सरन्या पोनवन्नन और दक्षा नागरकर भी अपने-अपने हिस्से में अच्छा योगदान देती हैं।

‘नागबंधम – द सीक्रेट ट्रेजर’ सिर्फ एक एडवेंचर फिल्म नहीं बल्कि रहस्य, इतिहास, सनातन परंपराओं और बड़े पैमाने पर प्रस्तुत किए गए सीन संसार का मिक्चर है। फिल्म की भव्यता, विशाल सेट्स, रहस्य से भरी कहानी, हैरतअंगेज एक्शन और कलाकारों का प्रभावी अभिनय इसे एक अलग अनुभव बनाते हैं। यदि आपको प्राचीन मंदिरों के रहस्य, छिपे खजानों की कहानियां और बड़े कैनवास पर बनी विजुअली शानदार फिल्में पसंद हैं, तो ‘नागबंधम’ थिएटर में देखनी चाहिए।

Maatrubhumi: सलमान खान की ‘मातृभूमि’ पर मंडराया खतरा, टाइटल बदलने के बावजूद सेंसर बोर्ड ने रिलीज पर लगाई रोक

Maatrubhumi: सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ फ़िल्म सर्टिफ़िकेशन (CBFC) ने सलमान खान की फ़िल्म ‘मातृभूमि’ (जिसका पहले नाम ‘बैटल ऑफ़ गलवान’ था) के लिए क्लीयरेंस सर्टिफ़िकेट को अगले आदेश तक रोक दिया है। भारतीय सेना और चीनी सैनिकों के बीच 2020 में हुई गलवान घाटी की झड़प पर आधारित यह फ़िल्म पहले ईद से ठीक पहले 17 अप्रैल को रिलीज़ होने वाली थी। हालांकि, रिलीज़ की तारीख़ को आगे बढ़ा दिया गया था और इसके अगस्त में रिलीज़ होने की उम्मीद थी।

NDTV के अनुसार, फ़िल्म अगस्त की तारीख़ पर रिलीज नहीं हो पाएगी। ‘मातृभूमि’ का निर्देशन अपूर्व लाखिया ने किया है और इसे सलमान खान फ़िल्म्स बैनर के तहत सलमा खान ने प्रोड्यूस किया है। इसमें चित्रांगदा सिंह भी हैं। फिल्म रिलीज होने से पहले ही चीन में कुछ वर्गों ने इसकी आलोचना की है।

टीजर ऑनलाइन प्रसारित होने के बाद, चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो पर कई उपयोगकर्ताओं ने फिल्म पर गलवान घाटी संघर्ष से संबंधित घटनाओं को गलत तरीके से प्रस्तुत करने का आरोप लगाया। जनवरी में, विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत में फिल्म निर्माण से संबंधित मामलों का निपटारा “संबंधित अधिकारियों” द्वारा किया जाता है, और विदेश मंत्रालय की इस या इसी तरह की परियोजनाओं में “कोई भूमिका नहीं” है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से उन खबरों पर टिप्पणी करने को कहा गया, जिनमें दावा किया गया था कि मंत्रालय ने छह साल पहले गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प पर आधारित फिल्म पर “आपत्ति जताई” है। उन्होंने कहा, “हमें पता है कि इस तरह की फिल्म बनाने की योजना है। जैसा कि आप जानते हैं, भारत में फिल्म निर्माण से जुड़े मामलों को संबंधित अधिकारी देखते हैं। और जहां तक ​​हमारी बात है, विदेश मंत्रालय की ऐसी फिल्मों या प्रोजेक्ट्स में कोई भूमिका नहीं होती है।”

सूत्रों ने बताया, “हाल ही में फिल्म का टाइटल ‘बैटल ऑफ गलवान’ से बदलकर ‘मातृभूमि’ कर दिया गया है। उसी के अनुसार बदलाव किए जा रहे हैं। संभावना है कि फिल्म की रिलीज में और देरी हो सकती है। इसे अगस्त में स्वतंत्रता दिवस के आसपास रिलीज किए जाने की उम्मीद है।”

फिल्म के निर्माताओं ने सलमान खान के 60वें जन्मदिन के मौके पर 27 दिसंबर, 2025 को फिल्म का टीज़र जारी किया था। इस फ़िल्म में सलमान खान 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफ़िसर कर्नल संतोष बाबू का किरदार निभा रहे हैं। उन्होंने बॉर्डर पर डिसइंगेजमेंट एग्रीमेंट लागू करते समय हुई झड़प के दौरान भारतीय सैनिकों का नेतृत्व किया था।

‘मातृभूमि’ में अभिलाष चौधरी और अंकुर भाटिया भी अहम भूमिकाओं में नज़र आएंगे। इस फ़िल्म का संगीत हिमेश रेशमिया ने दिया है। सलमान खान को आख़िरी बार ए.आर. मुरुगाडोस की फ़िल्म ‘सिकंदर’ में देखा गया था, जिसमें रश्मिका मंदाना भी हैं।

Diljit Dosanjh: CJP प्रोटेस्ट पर दिलजीत दोसांझ का कमेंट सौरव दास को नहीं आया रास, बोले- ‘उन्हें युवाओं को प्रोत्साहित करना चाहिए न कि…’

Diljit Dosanjh: दिलजीत दोसांझ के ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के विरोध-प्रदर्शनों से खुद को अलग करने के एक दिन बाद, पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने निराशा जताई है। जब दास से हाल ही में पंजाबी सिंगर-एक्टर के कमेंट के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वे इससे “नाराज़” हैं। उन्होंने दोसांझ से यह भी अपील की कि वे आगे आएं और भारत के युवाओं के मुद्दों पर बात करें।

दास ने कहा, “यह बहुत दुखद है। मुझे लगता है कि उन्हें कुछ कहना चाहिए। उन्हें युवाओं का हौसला बढ़ाना चाहिए। वे अपने संगीत के जरिए ऐसा करते हैं। इस आंदोलन के बारे में अपनी बात रखकर या युवाओं की समस्याओं पर बात करके भी वे ऐसा कर सकते हैं। उन्हें कुछ तो कहना चाहिए।”

हाल ही में एक इंस्टाग्राम लाइव सेशन के दौरान, दिलजीत दोसांझ से ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) की अगुवाई में जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बारे में पूछा गया। दिलजीत ने साफ कर दिया कि वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि अपने बिजी ‘ऑरा टूर’ (Aura Tour) शेड्यूल की वजह से उन्हें इस स्थिति के बारे में जानकारी नहीं थी। उन्होंने लोगों से यह भी गुजारिश की कि उन्हें विरोध प्रदर्शनों से दूर रखा जाए, क्योंकि वह कोई राजनेता नहीं हैं और एक एंटरटेनर के तौर पर अपने काम पर ही ध्यान देना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, “भाई, मुझे विरोध प्रदर्शनों और ऐसी चीज़ों से दूर रखो। मैं एक आर्टिस्ट हूं। मैं कोई राजनेता नहीं हूं।” दुनिया भर में मशहूर इस सिंगर ने आगे कहा कि दुनिया में हर चीज का एकदम सही या पूरी तरह से ठीक होना नामुमकिन है। उन्होंने कहा, “हर चीज़ कभी भी सही नहीं हो सकती। इस दुनिया में हर चीज़ कभी भी सही नहीं हो सकती।”

दिलजीत दोसांझ हाल ही में इम्तियाज अली के निर्देशन में बनी फ़िल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ में नजर आए थे। यह फिल्म भारत-पाकिस्तान बंटवारे की पृष्ठभूमि पर आधारित एक पीरियड ड्रामा है। नसीरुद्दीन शाह, शरवरी और वेदांग रैना जैसे कलाकारों वाली यह फिल्म 2026 की अहम सफलताओं में से एक बनकर उभरी है। इसे दर्शकों से काफी तारीफ मिली है और लोगों की अच्छी प्रतिक्रिया की वजह से बॉक्स ऑफिस पर भी लगातार अच्छी कमाई हुई है।

Baby Do Die Do Review: क्राइम, सस्पेंस और इमोशन से भरपूर है ‘बी डू डाई डू’ , हुमा कुरैशी का कतिलाना अंदाज जीत लेगा दिल

फिल्म- बेबी डू डाई डू

कलाकार- हुमा कुरैशी, सिकंदर खेर, चंकी पांडे, सीमा पाहवा, विद्या मालवड़े, हिमांशु मलिक, रूपेश बाने, अरुण कुशवाह, मरुधर शेखावत, रचित सिंह

निर्देशक- नचिकेत सामंत

निर्माता- साकिब सलीम

रेटिंग- 3.5/5

Baby Do Die Do Review: क्राइम थ्रिलर फिल्मों में अक्सर बदले की कहानी देखने को मिलती है, लेकिन ‘बेबी डू डाई डू’ उसी पुराने विषय को नए अंदाज में पेश करती है। फिल्म की नायिका न सिर्फ एक कॉन्ट्रैक्ट किलर है, बल्कि वह बोल और सुन भी नहीं सकती। यही बात इस फिल्म को बाकी थ्रिलर्स से अलग बनाती है। फिल्म में सस्पेंस, एक्शन, रोमांस और डार्क ह्यूमर का बैलेंस्ड मिक्चर देखने को मिलता है।

कहानी

फिल्म की शुरुआत एक दर्दनाक हादसे से होती है। बचपन में बेबी और उसकी जुड़वा बहन एक सुनसान होटल में एक मर्डर देख लेती हैं। अपनी पहचान छिपाने के लिए अपराधी बेबी की बहन की जान ले लेता है। इस घटना के बाद बेबी का पूरा जीवन बदल जाता है।

वह धीरे-धीरे अपराध की दुनिया का हिस्सा बन जाती है और पीएम जैन के मार्गदर्शन में सुपारी किलर के रूप में काम करने लगती है। उसकी पहचान उसका अलग अंदाज है, जिसमें वह छाते को हथियार बनाकर अपने टारगेट खत्म करती है। हालांकि उसके लिए हर हत्या सिर्फ एक काम नहीं, बल्कि अपनी बहन के कातिल तक पहुंचने का रास्ता भी है। कहानी आगे बढ़ते हुए कई ट्विस्ट लेकर आती है और क्लाइमेक्स तक दर्शकों को लगातार बांधे रखती है।

अभिनय

हुमा कुरैशी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। बिना संवादों के अभिनय करना आसान नहीं होता, लेकिन उन्होंने अपने चेहरे के भाव और बॉडी लैंग्वेज के जरिए हर भावना को बखूबी दर्शाया है। बदले की आग, प्रोफेशनल किलर की ठंडक और निजी रिश्तों की संवेदनाएं- तीनों रूपों में उनका अभिनय प्रभाव छोड़ता है।

सिकंदर खेर ने अपने किरदार को गंभीरता और आत्मविश्वास के साथ निभाया है। चंकी पांडे अपने अलग अंदाज से चौंकाते हैं, जबकि सीमा पाहवा अपने अनुभव के दम पर हर दृश्य को विश्वसनीय बनाती हैं। विद्या मालवड़े, हिमांशु मलिक और बाकी कलाकार भी कहानी को मजबूती देते हैं।

निर्देशन और तकनीकी पक्ष

निर्देशक नचिकेत सामंत ने फिल्म को सिर्फ एक एक्शन थ्रिलर नहीं रहने दिया, बल्कि उसमें इमोशनल लेयर भी जोड़ी है। फिल्म का स्क्रीनप्ले तेज है और कहानी बिना भटके आगे बढ़ती है। डार्क ह्यूमर और सस्पेंस का इस्तेमाल भी संतुलित तरीके से किया गया है।

फिल्म की सिनेमैटोग्राफी मुंबई के अंडरवर्ल्ड के माहौल को प्रभावी ढंग से पेश करती है। बैकग्राउंड म्यूजिक कई दृश्यों का प्रभाव बढ़ाता है और एक्शन सीक्वेंस स्टाइलिश लगते हैं। एडिटिंग की वजह से फिल्म कहीं भी जरूरत से ज्यादा लंबी महसूस नहीं होती।

फाइनल वर्डिक्ट

‘बेबी डू डाई डू’ एक प्रयोगधर्मी और मनोरंजक क्राइम थ्रिलर है, जो अपनी कहानी, सस्पेंस और दमदार परफॉर्मेंस की वजह से अलग पहचान बनाती है। हुमा कुरैशी का अभिनय इसकी सबसे बड़ी यूएसपी है, जबकि फिल्म का अनएक्सपेक्टेड क्लाइमेक्स इसे यादगार बनाता है। अगर आप कुछ नया और रोमांच से भरपूर देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म एक अच्छा विकल्प साबित हो सकती है।

Alpha Advance Bookings: ‘ऐल्फा’ ने एडवांस बुकिंग में छापे करोड़ों, आलिया भट्ट- शरवरी का एक्शन देखने को बेकरार फैंस

Alpha Advance Bookings: आलिया भट्ट, शरवरी, बॉबी देओल और अनिल कपूर की फ़िल्म ‘अल्फा’ की एडवांस बुकिंग आधिकारिक तौर पर बुधवार को शुरू हो गई, जो 3 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज़ होने से ठीक दो दिन पहले है। टिकटों की बिक्री शुरू होने के साथ ही, शुरुआती ट्रेड अनुमान बताते हैं कि यह एक्शन-एंटरटेनर फ़िल्म बॉक्स ऑफ़िस पर अच्छी शुरुआत करने के लिए तैयार है।

ट्रेड एनालिस्ट रमेश बाला ने NDTV को बताया कि ‘अल्फा’ ने अब तक एडवांस बुकिंग से 1.75 करोड़ रुपये कमाए हैं। उन्होंने आगे कहा, “फ़िल्म को पहले दिन 5 करोड़ रुपये से ज़्यादा की कमाई करनी चाहिए। अगर लोगों की प्रतिक्रिया अच्छी रही, तो यह अपने पहले वीकेंड में लगभग 15 करोड़ रुपये कमा सकती है।”

यह फ़िल्म हुमा कुरैशी की ‘बेबी डू डाई डू’ के साथ रिलीज़ होने वाली है। इस मुक़ाबले पर अपनी राय रखते हुए रमेश बाला ने कहा, “‘अल्फा’ को कोई समस्या नहीं होनी चाहिए,” क्योंकि दोनों फ़िल्में बहुत अलग जॉनर की हैं और अलग-अलग तरह के दर्शकों के लिए हैं।

NDTV ने जब हुमा से पूछा कि क्या वह ‘बेबी डू डाई डू’ और ‘अल्फा’ के बीच होने वाले मुकाबले को “महिलाओं को प्राथमिकता देने वाला शुक्रवार” मानती हैं, तो उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के जवाब दिया। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि यह महिला-केंद्रित कंटेंट के लिए बहुत अच्छा समय है।”

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि एक ही दिन एक से ज़्यादा फ़िल्मों के बीच मुकाबला हो सकता है और वे सभी अच्छा प्रदर्शन कर सकती हैं। ऐसा क्यों हो कि सिर्फ़ लड़कों पर केंद्रित फ़िल्मों के बीच ही मुकाबला हो?” उन्होंने आगे कहा, “इसके बावजूद, हमारी फ़िल्म बहुत छोटी है और इसे पूरी तरह से स्वतंत्र रूप से बनाया गया है, इसलिए हमें बस थोड़ी सी जगह चाहिए।”

ये दोनों फ़िल्में एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। ‘बेबी डू डाई डू’ हाल ही में शुरू हुए ‘सलीम सिब्लिंग्स’ बैनर के तहत बनी एक स्वतंत्र फ़िल्म है, जबकि ‘अल्फा’ यश राज फ़िल्म्स की फ़िल्म है और स्टूडियो के ब्लॉकबस्टर ‘YRF स्पाई यूनिवर्स’ की पहली महिला-प्रधान फ़िल्म है। आलिया भट्ट और शरवरी अभिनीत यह एक्शन-एंटरटेनर फ़िल्म इस साल स्टूडियो की सबसे बड़ी रिलीज़ में से एक है।

Rao Bahadur Trailer: लोगों का पसंद आ रहा ‘राव बहादुर’ का ट्रेलर, फिल्म के लिए बढ़ी एक्साइटमेंट

Rao Bahadur Trailer: सुपरस्टार महेश बाबू और नम्रता शिरोडकर की GMB एंटरटेनमेंट इस साल की सबसे मोस्ट-अवेडेट साइकोलॉजिकल थ्रिलर ‘राव बहादुर’ को प्रेजेंट कर रहे हैं, जिसे जाने-माने फिल्ममेकर वेंकटेश महा ने डायरेक्ट किया है और वर्सेटाइल एक्टर सत्यदेव इसमें लीड रोल निभा रहे हैं। A+S मूवीज और श्रीचक्रास एंटरटेनमेंट्स द्वारा जॉइंटली प्रोड्यूस की गई यह फिल्म 3 जुलाई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए पूरी तरह तैयार है।

सुपरस्टार महेश बाबू द्वारा प्रेजेंट की गई ‘राव बहादुर’ इस साल की सबसे मोस्ट-अवेडेट तेलुगु फिल्मों में से एक है। लीड रोल में वर्सेटाइल एक्टर सत्यदेव स्टारर इस साइकोलॉजिकल थ्रिलर ने तब से ही दर्शकों को उत्सुक कर दिया है, जब से इसके टीज़र ने अपनी रहस्यमयी दुनिया की एक झलक दिखाई थी। अब इस एक्साइटमेंट को और बढ़ाते हुए, महेश बाबू ने फिल्म का मच-अवेडेट ट्रेलर भी रिलीज कर दिया है।

​ट्रेलर की शुरुआत महेश बाबू के शानदार नरेशन से होती है, जो एक हटकर कहानी का टोन सेट करता है। वो कहते हैं कि जहाँ आमतौर पर यह माना जाता है कि ड्रामा लॉजिक को नहीं मानता, वहीं जब ड्रामा मैजिक से मिलता है, तो लॉजिक के अपने मायने ही बदल जाते हैं। यह दिलचस्प इंट्रोडक्शन एक ऐसा सिनेमाई एक्सपीरियंस देने का इशारा करता है जो पहले कभी नहीं देखा गया। जैसे-जैसे ट्रेलर आगे बढ़ता है, यह दिखाता है कि कैसे एक छोटा सा शक जिंदगियां बदल सकता है, जो दर्शकों को सस्पेंस और साइकोलॉजिकल थ्रिल की एक ग्रिपिंग (जकड़ कर रखने वाली) दुनिया में ले जाता है।

​महेश बाबू ने ‘राव बहादुर’ को एक ऐसी फिल्म के रूप में भी डिस्क्राइब किया है जो तेलुगु सिनेमा में कुछ ऐसा पेश करने का वादा करती है जो पहले कभी नहीं देखा गया। एक इंटेंस अवतार में सत्यदेव के साथ, यह ट्रेलर सस्पेंस, शानदार विजुअल्स और एक ऐसी कहानी डिलीवर करता है जो दर्शकों को आखिरी तक बांधे रखने का वादा करती है।

ट्रेलर शेयर करते हुए उन्होंने लिखा, “ये रहा… #RaoBahadurTrailer….. 3 जुलाई को, आपके नजदीकी थिएटर्स में!! ‘राव बहादुर’ एक ऐसे ताने-बाने को बुनती है जो साइकोलॉजिकल ड्रामे के साथ-साथ एक ढहते हुए शाही (राजशाही) इतिहास की परछाइयों को दिखाता है। वेंकटेश महा, जो इस फिल्म की राइटिंग, डायरेक्शन और एडिटिंग संभाल रहे हैं, एक ऐसी कहानी को शेप देते नजर आ रहे हैं जो अपनी स्थानीय संवेदनाओं से गहराई से जुड़ी हुई है और साथ ही इसमें एक ऐसी इमोशनल अपील है जो हर किसी को छू जाए।

​फिल्म के पीछे एक मजबूत टेक्निकल टीम का सपोर्ट है, जिसमें कार्तिक परमार सिनेमैटोग्राफी संभाल रहे हैं, स्मरण साई ने म्यूजिक कंपोज किया है, और रोहन सिंह ने फिल्म के खास और अलग प्रोडक्शन डिजाइन को तैयार किया है।

​शाही विजुअल्स और रहस्यमयी अंडरटोन्स (छिपे हुए अर्थ) के इस अनोखे ब्लेंड के साथ, ‘राव बहादुर’ एक ऐसी फिल्म बनती दिख रही है जो दर्शकों को एक ऐसी दुनिया में ले जाएगी जहाँ हर एक छोटी सी डिटेल के पीछे कोई गहरा मतलब छिपा हो सकता है। ‘राव बहादुर’ 3 जुलाई 2026 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है।

Exclusive: रावण के अलावा रामायण का कोई और किरदार नहीं निभाना चाहते आशुतोष राणा, वजह जान दंग रह जाएंगे आप

Exclusive: अपने नए Durlabh Darshan को लेकर आशुतोष राणा बेहद एक्साइटेड है। ये प्रोजेक्ट उन्होंने प्रोड्यूसर प्रशांत मिश्रा और फिल्म राइटर आलोक श्रीवास्तव के साथ मिलकर बनाया और लॉन्च किया। इस प्रोजेक्ट को लेकर एक्टर ने कहा कि जहां धर्म और विज्ञान दोनों मिल जाते हैं, वह दुर्लभ दर्शन है। वहीं अपने रावण के किरदार को लेकर भी उन्होंने खुलकर बात की है। बताया क्यों वह रावण का रोल करना पसंद करते हैं।

रावण का किरदार है खास

अशुतोष राणा से जब हमें पूछा कि रामायण में उन्होंने रावण के किरदार को क्यों चुना और रावण के अलावा वह किस किरदार को निभाने में दिलचस्पी रखते? इस सवाल का जवाब उन्होंने बिना देर किए दे दिया। एक्टर ने कहा कि रावण के अलावा में किसी और किरदार को नहीं निभाना चाहता हूं। रावण अपने आप में बहुत दिलचस्प किरदार है। वहीं उसके दोनों हाथ में लड्डू हैं। उन्होंने अपनी बात समझाते हुए कहा कि रावण के लिए खुद नारायण वैकुंठ से आए। वहीं वध के बाद उसे वैकुंठ मिला…और अगर वध न होता तो शिव भक्ति के चलते कैलाश में स्थान मिल जाता।

दुर्लभ दर्शन में क्या खास?

आप एक जगह बैठ कर ही देश के प्रसिद्ध मंदिरों का दर्शन एवं वहां होने वाले समस्त पूजा-अनुष्ठान देख पाएंगे, और वह भी मंदिर में अपनी प्रत्यक्ष उपस्थिति जैसे अनुभव के साथ। दुर्लभ दर्शन द्वारा तैयार की गई विशेष 6D VR टेक्नोलॉजी के जरिए यह सब अनुभव संभव हो पाएगा। दुर्लभ दर्शन, आशुतोष राणा के साथ मिल कर, विश्व के पहले 100 से अधिक 6D अनुभव वाले केंद्र खोलेगा। फिलहाल इस सुविधा का आनंद देश के ग्यारह प्रसिद्ध मंदिरों में लिया जा सकेगा। विशेष बात यह होगी कि इस वर्चुअल रियलिटी में आप 3D दृश्य के साथ-साथ मंदिर के वातावरण में मौजूद जल, वायु और सुगंध की भी हूबहू अनुभूति कर सकेंगे।

सस्ते दामों में उपलब्ध

आपको ये दुर्लभ दर्शन आसानी से 11 शहरों में मिल जाएंगे- श्री काशी विश्वनाथ, Varanasi, श्री महाकालेश्वर, उज्जैन, मां वैष्णो देवी, राजद्वार पार्क , हनुमान गढ़ी , अयोध्या, पावन धाम , हरिद्वार, मां महालक्ष्मी मंदिर, नागपुर, ISKCON मंदिर , कैलाश दिल्ली, नीलकंठ धाम , गुजरात, मां बगलामुखी नलखेड़ा, मां शारदा शक्तिपीठ मैहर, मां भद्रकाली शक्तिपीठ, कुरुक्षेत्र , ityadi। वहीं दाम की बात करें तो अयोध्या में 3D- 200 रुपए और 6D-300 रुपए में उपलब्ध है। जबकि बाकी जगह 3D- 150 रुपए और 6D-250 रुपए में उपलब्ध है।