दुनिया के 16 नेताओं से छोटे हैं ट्रम्प:91% नेताओं से ज्यादा उम्रदराज, उनसे 10 साल ज्यादा सऊदी किंग की उम्र

डोनाल्ड ट्रम्प इस हफ्ते 14 जून को 80 साल के हो गए। राष्ट्रपति पद पर रहते हुए 80 साल की उम्र देखने वाले वे अमेरिका के दूसरे राष्ट्रपति हैं। उनसे पहले राष्ट्रपति जो बाइडेन ने नवंबर 2022 में अपना 80वां जन्मदिन मनाया था। ट्रम्प दुनिया के सबसे उम्रदराज नेताओं में जरूर शामिल हो गए हैं, लेकिन वे दुनिया के सबसे बुजुर्ग शासक नहीं हैं। प्यू रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र के 186 देशों के नेताओं में 16 नेता ऐसे हैं जो ट्रम्प से भी ज्यादा उम्र के हैं। रिपोर्ट के अनुसार ट्रम्प दुनिया के लगभग 91% राष्ट्रीय नेताओं से बड़े हैं। वहीं दुनिया के राष्ट्रीय नेताओं की औसत उम्र 63 साल है। दुनिया के सबसे उम्रदराज मौजूदा राष्ट्रीय नेता कैमरून के राष्ट्रपति पॉल बिया हैं। उनकी उम्र 93 साल है और वे 1982 से सत्ता में बने हुए हैं। उनके बाद सऊदी अरब के राजा सलमान बिन अब्दुलअजीज अल सऊद आते है, जिनकी उम्र 90 साल है और वे 2015 से देश के शासक हैं। अफ्रीकी देशों के नेताओं की सबसे ज्यादा उम्र रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि दुनिया के सबसे ज्यादा उम्र वाले नेताओं में बड़ी संख्या अफ्रीकी देशों की है। इनमें युगांडा, इक्वेटोरियल गिनी, मलावी, आइवरी कोस्ट, जिम्बाब्वे और रिपब्लिक ऑफ कांगो के नेता शामिल हैं। युगांडा के राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी की उम्र अब 82 साल है और वे करीब 40 साल से सत्ता में बने हुए हैं। वहीं इक्वेटोरियल गिनी के राष्ट्रपति तेओदोरो ओबियांग न्गुएमा म्बासोगो भी दुनिया के सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले नेताओं में गिने जाते हैं। वे 1979 से देश पर शासन कर रहे हैं। 10 सबसे उम्रदराज नेताओं में 7 गैर-स्वतंत्र देशों के प्रमुख दुनिया के दस सबसे उम्रदराज नेताओं में से 7 ऐसे देशों का नेतृत्व कर रहे हैं जिन्हें फ्रीडम हाउस ने नॉट फ्री यानी स्वतंत्र नहीं की श्रेणी में रखा है। दूसरे शब्दों में कहें तो इन देशों में लोकतांत्रिक स्वतंत्रता और राजनीतिक अधिकार सीमित माने जाते हैं। ट्रम्प से ज्यादा उम्र वाले 16 नेताओं में से लगभग आधे ऐसे देशों का नेतृत्व कर रहे हैं जिन्हें इसी श्रेणी में रखा गया है। इस वजह से फिर से यह सवाल उठने लगा है कि क्या लंबे समय तक सत्ता में बने रहना लोकतांत्रिक जवाबदेही को प्रभावित करता है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने जन्मदिन पर व्हाइट हाउस में UFC फाइट कराई:अब तक का सबसे महंगा शो, ₹567 करोड़ खर्च; जीत के बाद विजेता राष्ट्रपति से मिला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में अल्टीमेट फाइटिंग चैम्पियनशिप यानी UFC मुकाबलों के साथ अपना 80वां जन्मदिन मनाया। UFC ने इस आयोजन पर करीब 6 करोड़ डॉलर (567 करोड़ रुपए) खर्च किए। ये अब तक का सबसे महंगा UFC आयोजन माना जा रहा है। पूरी खबर पढ़ें

अमर स्वाभिमान का प्रतीक हल्दीघाटी युद्ध के 450 वर्ष

A depiction of Maharana Pratap during the Battle of Haldighati- an immortal date in Indian history and the historic day of June 18, of which the site stands as a silent witness

 

Haldighati Warrior: 18 जून भारतीय इतिहास की वह अमर तिथि है, जो केवल एक युद्ध का स्मरण नहीं कराती बल्कि त्याग, स्वाभिमान, साहस और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण की गाथा सुनाती है। यह वह दिन है जब मेवाड़ की धरती पर एक ऐसा संघर्ष हुआ, जिसने इतिहास के पन्नों में वीरता की अमिट छाप छोड़ दी। वर्ष 1576 में 'हल्दी घाटी' के रूप में लड़ा गया यह युद्ध केवल तलवारों की टकराहट नहीं था, बल्कि स्वतंत्रता और अधीनता, स्वाभिमान और सत्ता के बीच का निर्णायक संघर्ष था।'ALSO READ: Maharana Pratap Wishes 2026: महाराणा प्रताप की जयंती पर अपनों को भेजें ये 10 वीरताभरे प्रेरक शुभकामना संदेश

 

राजस्थान की अरावली पर्वतमालाओं के बीच स्थित हल्दीघाटी' आज भी उस ऐतिहासिक दिन की मौन साक्षी है। इसकी पीली मिट्टी मानो आज भी उन वीरों के रक्त से रंजित गौरवपूर्ण स्मृतियों को अपने भीतर संजोए हुए है, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता और आत्मसम्मान का मूल्य समझाया। 

 

एक ओर उस समय के सबसे शक्तिशाली शासकों में गिने जाने वाले मुगल सम्राट अकबर का विशाल साम्राज्य था, तो दूसरी ओर मेवाड़ के स्वाभिमानी शासक वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जी। अकबर की शक्ति अपार थी, उसके पास विशाल सेना, संसाधन और साम्राज्य था। किंतु महाराणा प्रताप के पास वह था जो किसी भी साम्राज्य से अधिक शक्तिशाली होता है अपनी मातृभूमि के प्रति अटूट प्रेम और स्वतंत्रता की रक्षा का दृढ संकल्प। 

 

जब अधिकांश राजपूत रियासतें मुगल सत्ता के अधीन हो चुकी थीं, तब महाराणा प्रताप ने अपने स्वाभिमान को किसी भी कीमत पर न झुकाने का निर्णय लिया। उन्होंने वैभव, सुविधा और राजनीतिक लाभ के सभी प्रस्ताव ठुकरा दिए। उनके लिए राजसिंहासन से अधिक महत्वपूर्ण था मेवाड़ का गौरव और उसकी स्वतंत्रता। यही कारण है कि उनका संघर्ष केवल एक राजा का संघर्ष नहीं, बल्कि आत्मसम्मान की रक्षा का राष्ट्रीय प्रतीक बन गया। 

 

हल्दीघाटी के युद्ध में संख्या बल निश्चित रूप से महाराणा प्रताप जी के पक्ष में नहीं था। उनके सामने कहीं अधिक विशाल और संगठित सेना थी, लेकिन इतिहास केवल सेना की संख्या नहीं देखता, वह उन हृदयों की शक्ति भी देखता है जो किसी महान उद्देश्य के लिए धड़कते हैं। मेवाड़ के रणबांकुरों ने युद्धभूमि में जिस साहस और शौर्य का परिचय दिया, वह आज भी प्रेरणा का स्रोत है। 

 

इस युद्ध की चर्चा चेतक के बिना अधूरी है। महाराणा प्रताप का प्रिय अश्व चेतक भारतीय इतिहास में निष्ठा और समर्पण का जीवंत प्रतीक बन चुका है। कहा जाता है कि युद्ध के दौरान गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद चेतक ने अपने स्वामी को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया अपने अंतिम क्षणों तक वह अपने कर्तव्य पर अडिग रहा। चेतक का बलिदान केवल एक घोड़े की मृत्यु नहीं था, बल्कि अपने स्वामी के प्रति समर्पण की ऐसी मिसाल था, जो सदियों बाद भी लोगों की आंखें नम कर देती है। 

 

हल्दीघाटी का युद्ध भले ही तत्कालीन सैन्य दृष्टि से निर्णायक विजय में परिवर्तित नहीं हुआ, लेकिन इसका नैतिक और ऐतिहासिक महत्व किसी भी विजय से कहीं अधिक बड़ा है। मुगल सेना युद्धभूमि पर नियंत्रण स्थापित कर सकी, किंतु वह महाराणा प्रताप के आत्मबल को पराजित नहीं कर सकी। वह उन्हें बंदी नहीं बना सकी, न ही उनके स्वाभिमान को झुका सकी। यही इस युद्ध की सबसे बड़ी उपलब्धि थी। युद्ध के बाद भी महाराणा प्रताप ने हार स्वीकार नहीं की। ALSO READ: Maharana Pratap:जयंती विशेष : मेवाड़ का शेर- महाराणा प्रताप के वो 10 सच, जो आपके रोंगटे खड़े कर देंगे

 

उन्होंने जंगलों, पहाड़ों और दुर्गम घाटियों में रहकर संघर्ष जारी रखा। घोर अभावों का सामना किया, परिवार सहित कठिन जीवन व्यतीत किया, लेकिन अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। इतिहास में ऐसे उदाहरण बहुत कम मिलते हैं, जहां एक शासक ने राजमहलों की सुख-सुविधाओं को त्यागकर स्वतंत्रता की रक्षा के लिए वर्षों तक कठिन जीवन जिया हो।

 

आज जब हम हल्दीघाटी को स्मरण करते हैं, तो हमें यह समझना चाहिए कि इसकी सबसे बड़ी विरासत केवल युद्ध नहीं, बल्कि वह विचार है जिसके लिए यह युद्ध लड़ा गया था।यह हमें सिखाता है कि स्वतंत्रता का मूल्य केवल वही समझ सकता है जो उसके लिए संघर्ष करता है। यह हमें बताता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों, यदि संकल्प दृढ़ हो तो संघर्ष कभी व्यर्थ नहीं जाता।

वर्तमान समय में, जब भौतिक सफलता को ही अक्सर उपलब्धि का मानक मान लिया जाता है, तब महाराणा प्रताप का जीवन हमें चरित्र, स्वाभिमान और कर्तव्य की वास्तविक परिभाषा सिखाता है। वे बताते हैं कि मनुष्य की महानता उसकी संपत्ति या शक्ति में नहीं, बल्कि उसके सिद्धांतों के प्रति उसकी निष्ठा में होती है। हल्दीघाटी का युद्ध इसलिए अमर नहीं है कि वहां कितनी तलवारें चलीं या कितने सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए।

 

वह इसलिए अमर है क्योंकि वहां एक ऐसे योद्धा ने इतिहास रचा, जिसने संसार को यह संदेश दिया कि पराजय परिस्थितियों से नहीं, आत्मसमर्पण से होती है। जब तक आत्मसम्मान जीवित है, तब तक संघर्ष भी जीवित है और विजय की संभावना भी आज हल्दीघाटी की 450वीं पुण्य स्मृति पर राष्ट्र उन सभी वीरों को श्रद्धापूर्वक नमन करता है, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया।ALSO READ: Maharana Pratap: महाराणा प्रताप के जन्म के 5 रोचक किस्से

विशेष रूप से वीर शिरोमणि श्री महाराणा प्रताप जी का जीवन हमें सदैव प्रेरित करता रहेगा कि सत्ता की शक्ति से कहीं अधिक शक्तिशाली होता है स्वाभिमान का संकल्प।

हल्दीघाटी की पीली मिट्टी आज भी मानो यही कहती है—

'सिर कट सकता है, लेकिन स्वाभिमान कभी नहीं झुक सकता।'

(इस लेख में व्यक्त विचार/विश्लेषण लेखक के निजी हैं। 'वेबदुनिया' इसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेती है।)

Edited BY: Raajshri Kasliwal

रोहित की जगह जायसवाल को मौका, क्या संजय मांजरेकर की बात मानेंगे कोच (Video)

संजय मांजरेकर ने अपने स्वभाव के विपरीत रोहित शर्मा की फॉर्म और फिटनेस को संदेह के घेरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने एक पॉडकास्ट में कहा कि ना ही रोहित शर्मा के पास फॉर्म है और ना ही फिटनेस ऐसे में वनडे विश्वकप के लिए उनकी जगह 24 वर्षीय यशस्वी जायसवाल  को मौका देना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि अगर ऐसा नहीं होता है तो चयनकर्ताओं को यशस्वी जायसवाल से फोन लगाकर माफी मांगनी चाहिए। एक पॉडकास्ट में पूर्व क्रिकेटर और कमेंटेटर का बयान तब आया है जब भारत को दूसरा एकदिवसीय मैच अफगानिस्तान के खिलाफ खेलना है और मीडिया सूत्रों के मुताबिक गौतम गंभीर रोहित शर्मा से खुश नहीं है।

एकदिवसीय क्रिकेट की बात करें तो रोहित शर्मा ने 282 मैच खेले हैं। वह अब तक 48 की औसत से 11577 रन बना चुके हैं।इसमें 33 शतक और 51 अर्धशतक शामिल है। इस प्रारुप में उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 264 रन है जो श्रीलंका के खिलाफ आया था। यह रिकॉर्ड अब तक उनके नाम है।

हालांकि फॉर्म उनके पास नहीं है, अफगानिस्तान के खिलाफ पहले एकदिवसीय मैच में भी वह 16 रन बनाकर रन आउट हो गए थे। इससे पहले न्यूजीलैंड के खिलाफ पहली एकदिवसीय सीरीज में रोहित शर्मा फ्लॉप रहे और टीम को शुरुआत में बड़ा स्कोर नहीं दे सके। रोहित शर्मा 3 मैचों में 20 की औसत से 61 रन बना पाए। पूरी सीरीज में उन्होंने 9 चौके और 2 छक्के लगाए।पहले मैच में उन्होंने 29 गेंदो पर 26 रन, दूसरे मैच में उन्होंने 38 गेंदो में 24 रन और तीसरे मैच में 13 गेंदो में 11 रन बनाए।

भारतीय टीम प्रबंधन अगले साल होने वाले वनडे विश्व कप को ध्यान में रखते हुए विभिन्न संयोजनों को आजमाना चाहता है और इसलिए अफगानिस्तान के खिलाफ बुधवार को  होने वाले दूसरे एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में कुलदीप यादव और यशस्वी जायसवाल को खेलने का मौका मिल सकता है।

विराट कोहली के मांसपेशियों में खिंचाव के कारण श्रृंखला से बाहर होने के बाद तीसरे नंबर का स्थान खाली पड़ा है। पहले मैच में इस नंबर पर ईशान किशन को प्राथमिकता दी गई थी, लेकिन बाएं हाथ के बल्लेबाज जायसवाल ने भी पिछले कुछ महीनों में अच्छा प्रदर्शन किया है और टीम प्रबंधन उन्हें मौका दे सकता है।

पहले मैच में सस्ते में रन आउट होने वाले अनुभवी रोहित शर्मा अगर उनके लिए स्थान खाली करेंगे तो यह घटना सुर्खियों में रहने वाली है।

Maharana Pratap: महाराणा प्रताप के जन्म के 5 रोचक किस्से

A portrait of the brave Mewar warrior Maharana Pratap, with a message marking Maharana Pratap Jayanti in the image caption

Maharana Prataps birth anniversary: भारत के इतिहास में महाराणा प्रताप का नाम वीरता, स्वाभिमान और मातृभूमि के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है। उनका जन्म केवल एक राजकुमार के रूप में नहीं, बल्कि उस योद्धा के रूप में हुआ जिसने मुगल साम्राज्य के सामने कभी आत्मसमर्पण नहीं किया। महाराणा प्रताप के जन्म और बचपन से जुड़े कई रोचक प्रसंग आज भी लोककथाओं और इतिहास में सुनाए जाते हैं।ALSO READ: Maharana Pratap:जयंती विशेष : मेवाड़ का शेर- महाराणा प्रताप के वो 10 सच, जो आपके रोंगटे खड़े कर देंगे

 

आइए जानते हैं महाराणा प्रताप के जन्म और उनके शुरुआती जीवन से जुड़े 5 रोचक किस्से:

 

1. जन्म स्थान को लेकर दो ऐतिहासिक मत

महाराणा प्रताप के जन्म स्थान को लेकर इतिहासकारों में दो अलग-अलग धारणाएं हैं, जो इस प्रकार हैं:

 

कुंभलगढ़ दुर्ग (कटारगढ़): अधिकांश इतिहासकारों का मानना है कि प्रताप का जन्म कुंभलगढ़ किले के भीतर बने 'कटारगढ़' के बादल महल में हुआ था। उनके पिता महाराणा उदयसिंह और माता रानी जयवंता बाई उस समय यहीं निवास कर रहे थे।

 

पाली महल: एक अन्य मान्यता के अनुसार, प्रताप का जन्म उनकी ननिहाल यानी पाली के महलों में हुआ था। उनकी माता जयवंता बाई पाली के सोनगरा चौहान अखैराज की बेटी थीं। आज भी पाली में उस स्थान पर स्मारक बना हुआ है।

 

2. बचपन का नाम 'कीका' और भील समुदाय का प्रेम

महाराणा प्रताप का जन्म मेवाड़ की अरावली पहाड़ियों के बीच हुआ था। बचपन में उन्हें मेवाड़ के आदिवासी भील समुदाय के लोग 'कीका' कहकर पुकारते थे। स्थानीय भीली भाषा में 'कीका' का अर्थ होता है- छोटा बच्चा' या 'बेटा'।

 

प्रताप ने अपना बचपन इन भील योद्धाओं के साथ जंगलों में घूमते हुए, खेल-खेल में युद्ध कला सीखते हुए बिताया था। यही वजह थी कि भील समुदाय उनके प्रति जान न्योछावर करने को तैयार रहता था और उन्होंने अकबर के खिलाफ युद्ध में प्रताप का बढ़-चढ़कर साथ दिया।

 

3. माता जयवंता बाई की परछाई और वीरता के संस्कार

प्रताप की माता, रानी जयवंता बाई, केवल एक रानी नहीं बल्कि एक बेहद साहसी, धार्मिक और कूटनीतिज्ञ महिला थीं। प्रताप के जन्म के बाद से ही उन्होंने उन्हें महलों के ऐशो-आराम से दूर रखकर एक कुशल योद्धा की तरह पाला।

वे बचपन में प्रताप को सोते समय लोरी की जगह मेवाड़ के पूर्वजों के बलिदान, भगवान राम और कृष्ण की वीरता की कहानियां सुनाती थीं। प्रताप के भीतर मातृभूमि के लिए कभी न झुकने का जो जज्बा था, उसकी असली सूत्रधार उनकी माता ही थीं।

 

4. जन्म के समय मेवाड़ के कठिन हालात

जब प्रताप का जन्म हुआ, तब मेवाड़ इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा था। उनके पिता महाराणा उदयसिंह को अपने ही सौतेले भाई बनवीर से जान का खतरा था। दासी पुत्र बनवीर ने उदयसिंह को मारने की कोशिश की थी, लेकिन पन्नाधाय के बलिदान (अपने बेटे चंदन का बलिदान देकर उदयसिंह को बचाना) की वजह से उदयसिंह सुरक्षित रहे।
 

इस उथल-पुथल के बीच जब प्रताप का जन्म हुआ, तो उन्हें विरासत में गद्दी के साथ-साथ संघर्ष और चुनौतियां भी मिलीं, जिसने उन्हें बचपन से ही बेहद परिपक्व और मजबूत बना दिया।

 

5. असाधारण शारीरिक बनावट की शुरुआत

कहा जाता है कि महाराणा प्रताप बचपन से ही अपनी उम्र के अन्य बच्चों की तुलना में काफी लंबे-चौड़े और फुर्तीले थे। इतिहास में दर्ज आंकड़ों के अनुसार, बड़े होने पर उनका कद 7 फीट 5 इंच और वजन लगभग 110 किलो से अधिक था।

 

उनके जन्म के समय ज्योतिषियों ने उनकी कुंडली देखकर भविष्यवाणी की थी कि यह बालक आगे चलकर एक ऐसा महाप्रतापी राजा बनेगा, जिसकी कीर्ति को दुनिया का कोई भी सम्राट कभी मिटा नहीं पाएगा। उनका भाला 81 किलो का और छाती का कवच 72 किलो का था, जिसकी ट्रेनिंग उन्होंने किशोरावस्था से ही शुरू कर दी थी।

 

क्या आप जानते हैं? महाराणा प्रताप का जन्मदिन साल में दो बार मनाया जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार उनका जन्म 9 मई को हुआ था, लेकिन राजस्थान और देश के कई हिस्सों में लोग इसे हिंदू तिथि के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया को धूमधाम से मनाते हैं।

 

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टीम इंडिया में शामिल हुआ एक और गुजरात टाइटंस का तेज गेंदबाज

तेज गेंदबाज अशोक शर्मा को श्रीलंका में चल रही त्रिकोणीय श्रृंखला के लिए चोटिल युद्धवीर सिंह की जगह भारतीय टीम में शामिल किया गया है।अशोक ने आईपीएल में गुजरात टाइटन्स की तरफ से खेलते हुए अपनी तेज गति से सभी को प्रभावित किया था।

भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) ने बयान में कहा, ‘‘युद्धवीर सिंह ने 13 जून को गेंदबाजी करते समय दाहिने कंधे में तकलीफ की शिकायत की थी और 11 जून को अभ्यास सत्र के दौरान भी उन्हें इसी तरह का दर्द महसूस हुआ था।’’

बयान में कहा गया है, ‘‘बीसीसीआई की मेडिकल टीम ने एक विशेषज्ञ से परामर्श करने के बाद सिफारिश की है कि युद्धवीर को चोट से पूरी तरह से उबरने के लिए BCCI Centre of Excellence (COE) में रिहैबिलिटेशन से गुजरना चाहिए।’’

भारत ए को त्रिकोणीय श्रृंखला में अभी तक 3 मैचों में से दो मैच में हार का सामना करना पड़ा है।भारत को पहले मैच में श्रीलंका के खिलाफ पहले मैच में चमत्कारिक रूप से 7 रनों से जीत मिली थी।

त्रिकोणीय श्रृंखला के लिए भारत ए टीम: तिलक वर्मा (कप्तान), रुतुराज गायकवाड़ (उप-कप्तान), प्रियांश आर्य, वैभव सूर्यवंशी, आयुष बडोनी, निशांत सिंधु, सूर्यांश शेडगे, प्रभसिमरन सिंह (विकेटकीपर), कुमार कुशाग्र (विकेटकीपर), विप्रज निगम, यश ठाकुर, अंशुल कंबोज, अरशद खान, अनुकूल रॉय, अशोक शर्मा।

Visa के कारण मां नहीं थीं साथ, रो पड़ा 40 साल का गोलकीपर, 90 मिनट में 50 हजार से 50 लाख पहुंचे Followers

Vozinha Cape Verde : FIFA World Cup 2026 में बड़े उलटफेर और रोमांचक मुकाबले तो देखने को मिल रहे हैं, लेकिन केप वर्डे (Cape Verde) के गोलकीपर वोजिन्हा (Vozinha) की कहानी ने दुनियाभर के फुटबॉल फैंस का दिल छू लिया है। Spain जैसी दिग्गज टीम के खिलाफ 0-0 का ऐतिहासिक ड्रॉ कराने वाले 40 वर्षीय गोलकीपर रातोंरात इंटरनेट सेंसेशन बन गए। मैच शुरू होने से पहले जिन्हें मुश्किल से कुछ हजार लोग जानते थे, वही खिलाड़ी कुछ घंटों के अंदर दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया।

 

 स्पेन के 27 हमले, लेकिन नहीं टूटी वोजिन्हा की दीवार

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अटलांटा में खेले गए मुकाबले में स्पेन ने लगातार आक्रमण किए। बॉल पजेशन से लेकर गोल पर शॉट्स तक लगभग हर आंकड़े में स्पेन आगे था। स्टार खिलाड़ियों से भरी टीम बार-बार गोल करने के करीब पहुंची, लेकिन हर बार सामने वोजिन्हा खड़े थे। उन्होंने पूरे मैच में 7 शानदार सेव किए और स्पेन को गोल करने का एक भी मौका नहीं दिया। युवा स्टार Lamine Yamal के मैदान पर आने के बाद भी केप वर्डे का गोलपोस्ट सुरक्षित रहा। आखिरकार मुकाबला 0-0 पर समाप्त हुआ और यह नतीजा वर्ल्ड कप इतिहास की सबसे बड़ी Underdog कहानियों में शामिल हो गया।

 मैच के बाद छलक पड़े आंसू, मां स्टेडियम तक नहीं पहुंच सकीं

 

जैसे ही अंतिम सीटी बजी, वोजिन्हा भावुक हो गए। मैदान पर ही उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े और साथी खिलाड़ियों ने उन्हें गले लगा लिया। दरअसल, यह सिर्फ एक शानदार प्रदर्शन नहीं था, बल्कि एक ऐसा सपना था जिसका इंतजार उन्होंने करीब चार दशक तक किया था।

मैच के बाद बातचीत में वोजिन्हा ने बताया कि वह चाहते थे कि उनकी मां इस ऐतिहासिक पल की गवाह बनें, लेकिन VISA और आर्थिक कारणों की वजह से वह अमेरिका नहीं पहुंच सकीं। टिकट बुक थे, तैयारी भी पूरी थी, लेकिन समय पर वीज़ा नहीं मिल पाया। यही बात उन्हें सबसे ज्यादा भावुक कर रही थी।

 

दादी-दादा ने पाला, वहीं से मिला 'वोजिन्हा' नाम

 

बहुत कम लोग जानते हैं कि वोजिन्हा उनका असली नाम नहीं है। उनका पूरा नाम जोसिमार जोसे एवोरा डायस (Josimar José Évora Dias) है। बचपन में उनके पिता सेना में थे और मां काम में व्यस्त रहती थीं, इसलिए उनकी परवरिश मुख्य रूप से दादा-दादी ने की।

 

'वोजिन्हा' पुर्तगाली भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ होता है “छोटी दादी” या “दादी मां”। बचपन में साथी बच्चे उन्हें चिढ़ाते थे कि हारने या रोने के बाद वह अपने दादा-दादी के पास शिकायत करने चले जाते हैं। इसी वजह से उन्हें 'वोजिन्हा' कहकर बुलाया जाने लगा। शुरुआत में उन्हें यह नाम पसंद नहीं था, लेकिन बाद में उन्होंने इसे अपनी पहचान बना लिया। आज यही नाम दुनिया भर में उनकी पहचान बन चुका है।

 

25 साल की उम्र में बने प्रोफेशनल, 40 में मिला वर्ल्ड कप का मंच

 

जहां अधिकांश फुटबॉल खिलाड़ी किशोरावस्था में ही प्रोफेशनल फुटबॉल खेलने लगते हैं, वहीं वोजिन्हा ने 25 साल की उम्र में अपना प्रोफेशनल करियर शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने अंगोला, मोल्दोवा, साइप्रस, स्लोवाकिया और पुर्तगाल के क्लबों में खेलते हुए अपना सफर जारी रखा। 2012 में राष्ट्रीय टीम से जुड़े और कई बार रिटायरमेंट का भी विचार आया, लेकिन वर्ल्ड कप खेलने का सपना उन्हें आगे बढ़ाता रहा।

 

40 साल की उम्र में उन्होंने आखिरकार वर्ल्ड कप में डेब्यू किया और इतिहास रच दिया। वह टूर्नामेंट में डेब्यू करने वाले सबसे उम्रदराज गोलकीपरों में शामिल हो गए।

 

 कुछ घंटों में 50 हजार से पहुंच गए 50 लाख followers

 

स्पेन के खिलाफ मैच से पहले वोजिन्हा के Instagram पर करीब 50 हजार फॉलोअर्स थे। लेकिन जैसे-जैसे दुनिया ने उनकी शानदार गोलकीपिंग देखी, सोशल मीडिया पर उन्हें फॉलो करने वालों की बाढ़ आ गई। कुछ ही घंटों में उनकी फॉलोअर संख्या लाखों में पहुंच गई और बाद में 50 लाख के करीब जा पहुंची।

 

फुटबॉल स्टार्स, Experts और फैंस ने उनकी जमकर तारीफ की। सोशल मीडिया पर लोग उन्हें “केप वर्डे की चट्टान” और “वर्ल्ड कप का नया हीरो” कहने लगे।

 

 सपने पूरे होने में देर हो सकती है, लेकिन नामुमकिन नहीं

 

वोजिन्हा की कहानी सिर्फ फुटबॉल की नहीं, बल्कि धैर्य, संघर्ष और सपनों की भी कहानी है। जिस खिलाड़ी ने 40 साल की उम्र में पहली बार वर्ल्ड कप खेला, उसने दुनिया की सबसे मजबूत टीमों में से एक को रोककर साबित कर दिया कि उम्र सिर्फ एक संख्या है। शायद यही वजह है कि स्पेन के खिलाफ मिला यह ड्रॉ केप वर्डे के लिए किसी जीत से कम नहीं माना जा रहा।

छोटी टीमों ने बड़ी टीमों को जीतने से रोका, 1 दिन में 4 मुकाबले हुए ड्रॉ

FIFA World Cup

ऐसा कम ही देखने को मिलता है कि फीफा विश्वकप 2026  में एक ही दिन में 4 ड्रॉ मुकाबले खेले जाएं। लेकिन सोमवार को ऐसा हुआ गोलरहित ड्रॉ से लेकर 2-2 की बराबरी वाले मैच भी देखने को मिले। इन मुकाबले में खास बात यह रही कि बड़ी टीमें छोटी टीमों के खिलाफ निर्णायक जीत अर्जित करने में विफल रही।

विश्वकप डेब्यू पर केप वर्डे ने विश्वविजेता स्पेन को गोलरहित ड्रॉ पर रोका

खिलाड़ियों के शानदार रक्षात्मक प्रदर्शन की बदौलत अफ्रीकी देश केप वर्डे ने मौजूदा यूरोपीय चैंपियन और 2026 विश्व कप के प्रबल दावेदार स्पेन के खिलाफ मुकाबला गोल रहित ड्रॉ खेला।

मुकाबले की शुरुआत से ही की मजबूत रणनीति अपनाते हुए अफ्रीकी देश केप वर्डे ने लामिन-यामल के बिना खेल रही स्पेन को इस हद तक बेअसर कर दिया कि स्पेन के सेंटर फॉरवर्ड मिकेल ओयार्ज़ाबल को शुरुआती आधे घंटे तक गेंद को छूने का भी मौका नहीं मिला। यह एक रिकार्ड है (1966 विश्व कप के बाद से जब से ये रिकॉर्ड रखे जा रहे हैं, तब से किसी भी खिलाड़ी के बिना गेंद को छुए रहने का यह सबसे लंबा समय है)।

दूसरे हाफ में जब यामल मैदान में आए, तो स्पेन थोड़ा अधिक दृढ़ और आक्रामक नजर आया, लेकिन 40 वर्षीय गोलकीपर वोजिन्हा और उनकी रक्षात्मक पंक्ति को भेदना नामुमकिन था। स्पेन के पास 74 प्रतिशत गेंद का कब्ज़ा था, उसने उल्लेखनीय रूप से 27 शॉट लगाए लेकिन केप वर्डे के किले को नहीं भेद पाये। अंतत: मुकाबला गोल राहित ड्रा पर समाप्त हुआ।

मिस्र बनाम बेल्जियम मुकाबला 1-1 से रहा ड्रॉ

फीफा विश्वकप 2026 के ग्रुप जी में मिस्र और बेल्जियम के बीच खेला गया रोमांचक मुकाबला 1-1 से ड्रॉ पर समाप्त हुआ और दोनों टीमों ने अंक बांटे।सिएटल स्टेडियम में खेले गये मुकाबले में मिस्र ने मैच की शुरुआत में ही बेहतर प्रदर्शन किया और मोहम्मद सलाह के पास पर इमाम अशूर ने बॉक्स के बाहर से जोरदार शॉट लगाकर थिबाउट कर्टोइस को पछाड़ते हुए बढ़त बना ली। यह एक शानदार गोल था। अशूर की लगातार आक्रामक दौड़ और सलाह की चतुराई, जिन्होंने सेंटर में नंबर 10 की भूमिका निभाते हुए बेल्जियम के डिफेंस के खिलाफ लगातार खाली जगह का फायदा उठाया, जो उन्हें रोकने के लिए संघर्ष कर रहा था।

बेल्जियम को भी मौके मिले, जिनमें केविन डी ब्रुइन का शानदार फ्रीकिक भी शामिल था, जो पोस्ट से टकराया। लेकिन रिकॉर्ड गोल करने वाले रोमेलु लुकाकू के मैदान में आने से ही मैच का रुख बदला। मैदान में आते ही 22 सेकंड के भीतर ही यह दमदार स्ट्राइकर बॉक्स में घुस गया और उसकी मौजूदगी से मोहम्मद हानी को इतनी उलझन हुई कि थॉमस म्यूनीर के निचले क्रॉस को उन्होंने अपने ही गोल में डाल दिया। हानी के लिए यह एक दुर्भाग्यपूर्ण क्षण था।

बेल्जियम ने जीत के लिए पूरी ताकत झोक दी, लेकिन मजबूत रक्षा पंक्ति और मुस्तफा शोबेर के शानदार बचाव के दम पर मिस्र ने एक अंक हासिल कर लिया। अफ्रीकी दिग्गज टीम को अभी तक विश्व कप में एक भी जीत नहीं मिली है।

सऊदी अरब बनाम उरुग्वे मुकाबला 1-1 से रहा ड्रा

सऊदी अरब और उरुग्वे के बीच खेला गया फीफा विश्वकप 2026 ग्रुप एच का मुकाबला दोनों ओर से आक्रामक प्रदर्शन के बावजूद 1-1 से ड्रॉ पर समाप्त हुआ। इसी के साथ ग्रुप एच में सभी टीमें एक-एक अंक पर बराबरी पर आ गईं। यहां खेले गये मुकाबले अब्दुलेलह अल अमरी ने अपनी टीम के लिए पहला गोल किया जब फर्नांडो मुस्लेरा द्वारा छोड़ी गई लंबी दूरी की शॉट को रिबाउंड पर सबसे पहले पहुंचकर उन्होंने गोल दागा।

पहले हाफ में उरुग्वे 1-0 से पीछे था, लेकिन दूसरे हाफ में उसने जोरदार शुरुआत की। डार्विन नुनेज को बाहर करने के बाद, मार्सेलो बिएल्सा ने मध्यांतर में एक बड़ा संदेश दिया और उनकी टीम ने वैसा ही प्रदर्शन किया जैसा कि वह अपनी टीम के लिए प्रसिद्ध हैं।

उन्होंने अंत तक गोल पर 27 शॉट लगाए (जिनमें से 20 दूसरे हाफ में आए) और मोहम्मद अल ओवैस के शानदार बचाव की बदौलत ही वे सिर्फ एक गोल तक सीमित रह सके। वह गोल तब हुआ जब मैक्सी अरौजो ने बॉक्स के अंदर एक ढीली गेंद पर कब्जा जमाया और मुश्किल कोण से ओवैस को चकमा देते हुए गोल दाग दिया।

ईरान बनाम न्यूजीलैंड मैच 2-2 से ड्रा रहा

ईरान ने अपने 2026 फीफा विश्व कप अभियान की शुरुआत न्यूजीलैंड के खिलाफ एक रोमांचक और कांटे की टक्कर वाले मुकाबले में 2-2 ड्रॉ के साथ की, इस दौरान न्यूजीलैंड की टीम ने भी शानदार प्रदर्शन किया। लॉस एंजिल्स के सोफी स्टेडियम में खेले गये मुकाबले में एलिजा जस्ट ने दो बार न्यूजीलैंड को बढ़त दिलाई, लेकिन ईरान के खिलाड़ियों ने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए हर बार शानदार वापसी की।

रामिन रेजाइयन ने गोल किया और मोहम्मद मोहेबी को असिस्ट किया, जिससे ईरान ने लॉस एंजिल्स में जोरदार समर्थन के बीच आक्रामक खेल दिखाया। मैच के चारों गोल बेहतरीन तालमेल से बने मूव्स के दम पर आए और इस दौरान दोनों टीमों आक्रामक फुटबॉल का शानदार प्रदर्शन किया।ईरान के लिए रेजाईयन 33वें, मोहेबी ने 64वें मिनट में गोल किये। वहीं न्यूजीलैड की ओर से एलिजा जस्ट सातवें और 54 वें मिनट में गोल दागे।

पाकिस्तान में पुलिस फायरिंग में ऑस्ट्रेलियाई बच्ची की मौत:लुटेरों ने घूमने आए परिवार से गहने लूटे; पुलिस ने डकैत समझकर गोली मारी

पाकिस्तान में 9 साल की ऑस्ट्रेलियाई बच्ची हानिया अहमद की पुलिस की गोलीबारी में मौत हो गई। हानिया अपने परिवार के साथ पाकिस्तान घूमने आई थी। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर के केवडेल इलाके का यह परिवार पंजाब के चकवाल शहर में अपने रिश्तेदारों से मिलने आया था। बुधवार रात वे किराये की कार से सफर कर रहे थे, तभी कुछ बदमाशों ने उनके गहने लूट लिए। बताया गया है कि मोटरसाइकिल पर सवार दो लुटेरे वारदात के बाद भाग रहे थे। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी की नजर उन पर पड़ गई। लुटेरे मौके से फरार हो गए और परिवार की किराये की कार भी वहां से आगे बढ़ गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पुलिस ने गलती से परिवार की कार को लुटेरों की गाड़ी समझ लिया और उस पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। गोलियां लगने से 9 साल की बच्ची की मौत हो गई, जबकि उसके पिता और बड़े भाई गंभीर रूप से घायल हो गए। बच्ची की मां सुरक्षित है। पुलिस बोली- लुटेरों ने पहले गोली चलाई, पिता ने नकारा पंजाब पुलिस के मुताबिक, संदिग्ध लुटेरों ने एक पुलिस अधिकारी पर गोली चलाई, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई। हालांकि हानिया के पिता ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि पुलिस ने ही सबसे पहले गोली चलाई थी। इस घटना पर बयान देते हुए ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा कि इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए। जांच पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि सबसे पहले परिवार और फिर बाकी लोगों को भी सच्चाई पता चल सके। ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रालय ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि वह मृत बच्ची के परिवार और घायल ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को हर संभव कांसुलर सहायता उपलब्ध करा रहा है। मंत्रालय ने परिवार के प्रति गहरी संवेदना भी व्यक्त की। रिपोर्ट के मुताबिक, यह परिवार हाल ही में मक्का की धार्मिक यात्रा (हज/उमरा) पूरी करके पाकिस्तान पहुंचा था। पंजाब पुलिस ने अधिकारी को निलंबित किया पुलिस ने गोली चलाने वाले अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया है और उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। घटना की जांच के लिए एक संयुक्त जांच टीम (जॉइंट इन्वेस्टिगेशन टीम) भी बनाई गई है। पुलिस का कहना है कि लूटपाट में शामिल दो संदिग्ध लोगों को बाद में एक अलग मुठभेड़ में मार गिराया गया। इस घटना के बाद पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया दोनों देशों में लोगों में नाराजगी है। परिवार ऑस्ट्रेलिया में रहता था। पाकिस्तान के सीनियर पुलिस अधिकारियों ने इसे गलत पहचान की वजह से हुई एक दुखद घटना बताया है और कहा है कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के जरिए परिवार को न्याय दिलाया जाएगा। इस मामले ने पाकिस्तान में पुलिस के कामकाज पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान बल प्रयोग और आम लोगों की मौत होने पर जवाबदेही तय करने के तरीकों पर चर्चा तेज हो गई है। मानवाधिकार संगठनों ने लंबे समय से पुलिस फायरिंग, हिरासत में दुर्व्यवहार और कथित फर्जी मुठभेड़ों को लेकर चिंता जताई है। वहीं अधिकारी भी मानते रहे हैं कि पुलिस की ट्रेनिंग और लोगों का भरोसा बढ़ाने के लिए सुधारों की जरूरत है। ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह पीड़ित परिवार की हर संभव मदद कर रहा है। मंत्रालय ने बताया कि वह मृत ऑस्ट्रेलियाई बच्ची के परिवार और इस घटना में घायल हुए दो ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को काउंसुलर सहायता उपलब्ध करा रहा है। ———————– ये खबर भी पढ़ें PoK में अब तक 46 प्रदर्शनकारियों की मौत:1100 गिरफ्तार; शरणार्थी सीटें खत्म करने के लिए आंदोलन, पाकिस्तानी सेना का विरोध पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK ) में बीते 4 दिनों से चल रहे आंदोलन में अब तक 46 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, चार दिनों में 1100 से ज्यादा लोगों की भी गिरफ्तारी हुई है। पूरी खबर पढ़ें

ध्यान पर दोहे: भटके पथ से लौटकर, मन पाए विश्राम

ध्यान-योगा के जरिये मन पर कंट्रोल करने का चित्र

मन चंचल घोड़े सदिश, खींचे ध्यान लगाम।

भटके पथ से लौटकर, मन पाए विश्राम।।

 

शब्द भाव जब सब थमें, भीतर बहे प्रकाश।

ध्यान वही क्षण मौन का, आत्म बने आकाश।।

 

श्वासों की सरिता बहे, लय हो जाती मंद।

ध्यान जगा दे अंतरा, जैसे जागे छंद।।

 

जग के कोलाहल तले, दबता हृदय विधान।

ध्यान सुनाता मौन में, जीवन अंतर्गान।।

 

लोभ मोह की धूल को, धोता निर्मल ध्यान।

अंतर का दर्पण बने, उज्ज्वल हो पहचान।।

 

द्वेष घृणा मन जब रहे, क्रोधित हृदय अशांत।

ध्यान प्रकाशित मंत्र है, दूर करे सब भ्रांत।।

 

ध्यान योग आयाम है, मन होता निष्काम।

ध्यान स्वयं से है मिलन, आत्मतत्त्व का धाम।।

 

क्षण भर की एकाग्रता, दे अनंत विस्तार।

ध्यान बूंद में खोज ले, सागर भर संसार।।

 

जिसके अंतर ध्यान है, मिटे सकल अभिमान।

ध्यान झुकाता है अहम, देता दिव्य विधान।।

 

नित अभ्यासित ध्यान से, निर्मल हो व्यवहार।

भीतर अंतर्मन जगे, बाहर नव संसार।।

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‘ईरान परमाणु हथियार कभी नहीं बनाएगा’, MoU पर साइन करने के साथ ट्रंप ने किया बड़ा ऐलान, जानें तेहरान को पैसे देने की बात पर क्या कहा?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान कर दिया है कि ईरान अब कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। ईरान के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर साइन करने के साथ ही ट्रंप ने बताया कि दोनों देशों के बीच परमाणु हथियार को लेकर आपसी सहमति बन गई है। इसके साथ ही अमेरिका राष्ट्रपति ने

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