वैभव सूर्यवंशी हुए फ्लॉप, श्रीलंका के खिलाफ 265 रनों पर सिमटी भारतीय पारी

INDvsSL भारत ए के दौरे पर अब तक बेअसर रहे वैभव सूर्यवंशी ने श्रीलंका के खिलाफ सोमवार को हुए मुकाबले में भी कुछ खास हासिल नहीं किया। वह आज सिर्फ 14 गेंदों में 21 रन बना पाए। उनके साथ ही बड़े आईपीएल सितारे जैसे ऋतुराज गायकवाड़, तिलक वर्मा और प्रभसिमरन सिंह भी फ्लॉप रहे।

हालांकि 143 रनों पर 7 विकेट खो चुकी भारतीय टीम को गैर नामचीन आईपीएल स्टार्स ने बचाया। सनराइजर्स के साथ खेलने वाले सूर्यांश शेगड़े (72 रन) और दिल्ली के साथ खेलने वाले विपराज निगम (51 रन) ने टीम इंडिया को 250 पार लगाया। हालांकि टीम अंतिम ओवर में 265 रनों तक ही पहुंच पाई।

श्रीलंका ए ने टॉस जीतकर भारत ए को पहले बल्लेबाजी करने का न्योता दिया। बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम श्रीलंकाई गेंदबाजी आक्रमण के आगे शुरु से ही लड़खड़ाती नजर आयी। 39 रन के स्कोर पर उसने दोनों सलामी बल्लेबाजों प्रभसिमरन सिंह (11) और वैभव सूर्यवंशी (21) के विकेट गंवा दिये। इसके बाद ऋतुराज गायकवाड़ और कप्तान तिलक वर्मा ने पारी को संभलाने का प्रयास किया।

दोनों बल्लेबाजों के बीच तीसरे विकेट के लिए 52 रन जोड़े। तिलक वर्मा (23) और ऋतुराज गायकवाड़ (37) रन बनाकर आउट हुये। आयुष बडोनी (15), निशांत सिंधु (छह) और अनुकूल राॅय (आठ) रन के विकेट में जल्द गिर गये। ऐसे संकट के समय सूर्यांश शेडगे और विप्रज निगम ने पारी को संभाला। दोनों बल्लेबाजो ने आठवें विकेट के लिए 104 रन जोड़कर टीम को सम्मानजक स्कोर तक पहुंचाया।

इस दौरान दोनों बल्लेबाजों ने अपने-अपने अर्धशतक पूरे किये। 48वें ओवर में विप्रज निगम (51) के रन आउट होने पर यह साझेदारी टूटी। इसी ओवर की पांचवीं गेंद पर अरशद खान (दो) रन नौवें विकेट के रूप में आउट हुये। 50वें ओवर की दूसरी गेंद पर मोहम्मद शीराज ने सूर्यांश शेडगे को आउट कर 265 रनों के स्कोर पर भारतीय पारी का अंत किया। सूर्यांश शेडगे ने 66 गेंदों में तीन चौके और दो छक्के लगाते हुए (72) रनों की पारी खेली।

श्रीलंका ए के लिए विजयकांत वियसकांत और मोहम्मद शीराज को तीन- तीन विकेट मिले। सहान अराछिगे, कुगादास मतुलन और वनुजा सहन ने एक-एक बल्लेबाज को आउट किया।

बांग्लादेश ने भारतीय राजनयिक को तलब किया:PM के सलाहकार को दिल्ली एयरपोर्ट पर रोके जाने से नाराज, पूछताछ हुई तो लौटे गए थे

बांग्लादेश ने प्रधानमंत्री के सूचना सलाहकार डॉ. जाहेद उर रहमान को दिल्ली एयरपोर्ट पर रोके जाने के मामले में भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त पवन बाधे को तलब किया है। ढाका ने इस घटना पर असंतोष जताते हुए भारत से जवाब मांगा है। डॉ. जाहेद उर रहमान इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन (IORA) की बैठक में हिस्सा लेने दिल्ली पहुंचे थे। एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने उन्हें करीब दो घंटे तक रोके रखा और पूछताछ की। बाद में उन्हें भारत में प्रवेश की अनुमति दे दी गई थी, लेकिन उन्होंने अपना पासपोर्ट वापस मांगा और भारत में आने से इनकार कर दिया। इसके बाद वह कोलंबो के रास्ते सोमवार को ढाका लौट गए। उच्चायुक्त ने यात्रा की जानकारी पहले ही दी थी बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि शुक्रवार को ही नई दिल्ली स्थित बांग्लादेश उच्चायोग ने भारत के विदेश मंत्रालय को आधिकारिक रूप से सूचित कर दिया था कि डॉ. जाहेद IORA बैठक में बांग्लादेशी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। बांग्लादेश के उच्चायुक्त एम. रियाज हमीदुल्लाह ने भी भारतीय अधिकारियों से इस यात्रा को लेकर बात की थी। इसी वजह से ढाका में कई वरिष्ठ अधिकारी इस पूरे घटनाक्रम को रहस्यमय बता रहे हैं। उनका कहना है कि पहले से आधिकारिक जानकारी देने के बावजूद एयरपोर्ट पर ऐसी स्थिति कैसे बनी, यह समझ से बाहर है। दावा- जाहेद का नाम सुरक्षा एजेंसियों की वॉचलिस्ट में था डॉ. जाहेद के करीबी लोगों का दावा है कि उनका नाम भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की एक निगरानी सूची (वॉचलिस्ट) में था, जिसके कारण उनकी अतिरिक्त जांच की गई। उनका आरोप है कि भारत विरोधी सामग्री बनाने या प्रसारित करने के आरोपों की वजह से उनका नाम इस सूची में डाला गया था। हालांकि भारतीय अधिकारियों ने इन दावों की न पुष्टि की है और न ही खंडन किया है। जानकारी के मुताबिक डॉ. जाहेद राजनयिक पासपोर्ट पर नहीं बल्कि सामान्य बांग्लादेशी पासपोर्ट और सार्क वीजा पर यात्रा कर रहे थे। उनके पास इस यात्रा के लिए कोई सरकारी अनुरोध पत्र भी नहीं था। दिल्ली स्थित बांग्लादेश उच्चायोग के अधिकारियों ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। हालांकि एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि मिशन के सभी विभागों को इस घटना की जानकारी नहीं थी। अधिकारी बोले- जाहेद के साथ कोई अभद्र व्यवहार नहीं किया वहीं कई सूत्रों ने यह भी कहा कि भारतीय अधिकारियों ने डॉ. जाहेद के साथ कोई अभद्र व्यवहार नहीं किया। उनका मानना है कि यात्रा से जुड़ी समन्वय और संचार की कमी इस स्थिति की एक वजह हो सकती है। हालांकि अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। ढाका में सरकारी सूत्रों का कहना है कि पूरे मामले की समीक्षा की जा रही है और तथ्य सामने आने के बाद आगे का फैसला किया जाएगा। फिलहाल नई दिल्ली की ओर से आधिकारिक सफाई का इंतजार है। ————————————— बांग्लादेश से जुड़ी ये खबर भी पढ़े बांग्लादेश में कट्टरपंथियों के दबाव में राम-प्रतिमा का प्रोजेक्ट रुका:फंडिंग की जांच व अधूरा निर्माण गिराने की मांग, 2025 में शुरू हुआ था प्रोजेक्ट बांग्लादेश के गैबांधा जिले में 82 फीट ऊंची राम प्रतिमा का प्रोजेक्ट कट्टरपंथी दबाव के बाद रोक दिया गया है। यह प्रतिमा श्री श्री राधा गोबिंद और काली मंदिर परिसर में बन रही थी। मंदिर समिति ने इसे सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए अस्थायी रोक बताया है, लेकिन इसकी असली वजह कट्टरपंथी संगठनों का दबाव बताया जा रहा है। पूरी खबर पढ़ें

सास को गला दबाकर ईंट से मारा, भागकर बचाई जान; CCTV में कैद बहू की बेरहमी

इटावा के कांधनी गांव में बहू द्वारा बुजुर्ग सास की पिटाई का वीडियो वायरल हुआ है। वीडियो में बहू सास को गिराकर मारपीट और ईंट से हमला करती दिख रही है। बेटे की शिकायत पर मामला थाने पहुंचा, लेकिन पुलिस कार्रवाई से पहले दोनों पक्षों में समझौता हो गया।

जर्मनी से 1-7 से हारने वाले क्युरासाओ ने कभी भारत को 3-1 से हराया था

आज जर्मनी ने क्युरासाओ को फीफा विश्वकप 2026 में 7-1 से करारी मात दी। लेकिन इस ही क्युरासाओ ने एक दफा भारतीय फुटबॉल टीम को 3-1 से हराया था। यह मैच थाईलैंड के किंग कप टूर्नामेंट के दौरान खेला गया था। इसमें भारत का एकमात्र गोल पूर्व कप्तान सुनील छेत्री ने बनाया था।

इस मैच का स्कोरकार्ड जर्मनी बनाम क्युरासाओ के मैच के बाद वायरल हो रहा है।क्युरासाओ ने भले ही विश्वकप का पहला मैच खेला हो लेकिन उसके इस प्रदर्शन से भारतीय फुटबॉल प्रेमियों को अपने देश के फुटबॉल का हाल शीशे में दिख गया।

जर्मनी ने पहली बार खेल रही क्युरासाओ टीम को 7-1 से रौंदा

रविवार को वर्ल्ड कप के अपने पहले मैच में जर्मनी ने क्युरासाओ को 7-1 से करारी शिकस्त दी। फेलिक्स नमेचा ने टूर्नामेंट का अब तक का सबसे तेज़ गोल किया और फिर पहले हाफ के स्टॉपेज टाइम में पेनल्टी हासिल की, जिसे काई हावर्ट्ज़ ने गोल में बदलकर बढ़त को और बढ़ा दिया।

चार बार की चैंपियन टीम ने ग्रुप ई के इस मैच में शुरुआत से ही दबदबा बनाए रखा। यह मैच वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई करने वाले सबसे छोटे देश के खिलाफ था। छठे मिनट में फ्लोरियन विर्ट्ज़ के साथ शानदार ‘वन-टू’ पासिंग के बाद नमेचा ने एक बेहतरीन शॉट लगाकर गेंद को कोने में पहुँचाया और टीम को बढ़त दिलाई।

क्युरासाओ के लिए लिवानो कोमेनेंसिया ने 21वें मिनट में बराबरी का गोल किया; यह उनका वर्ल्ड कप में पहला गोल भी था। इसके बाद 38वें मिनट में जर्मनी को कॉर्नर मिला, जिस पर निको श्लोटरबेक ने शानदार हेडर लगाकर स्कोर 2-1 कर दिया। हाफ-टाइम से ठीक पहले विपक्षी टीम के एरिया में नमेचा को फाउल किया गया और काई हावर्ट्ज़ ने पेनल्टी को गोल में बदलकर स्कोर 3-1 कर दिया।

फिर, हाफ-टाइम के ठीक बाद किमिच के पास पर जमाल मुसियाला ने बॉक्स के अंदर से गोलकीपर को छकाते हुए जर्मनी के लिए चौथा गोल किया। मुसियाला की जगह आए उंडाव ने 68वें मिनट में नथानिएल ब्राउन को गोल करने में मदद की, जिससे जर्मनी 5-1 से आगे हो गया। 78वें मिनट में उंडाव ने जर्मनी के लिए छठा गोल किया। 88वें मिनट में हावर्ट्ज़ ने अपना दूसरा गोल पूरा किया।

मंडे फोटो स्टोरी:5000 नर्तकों के भरतनाट्यम का गिनीज रिकॉर्ड, मकसद- भारत-श्रीलंका रिश्ते मजबूत करना

श्रीलंका के कोलंबो स्थित गॉल फेस प्रोमेनेड में अद्भुत सांस्कृतिक नजारा देखने को मिला। यहां 5,000 से अधिक नर्तकों ने एक साथ नृत्य कर ‘दुनिया के सबसे बड़े भरतनाट्यम डांस लेसन’ का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम किया। यह आयोजन भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपरा को जीवंत रखने और भारत-श्रीलंका के सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया था। इस भव्य कार्यक्रम में भारतीय उच्चायुक्त संतोष झा ने आधिकारिक गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स का सर्टिफिकेट प्राप्त किया। इन 5,000 से ज्यादा नर्तकों ने अपने थिरकते कदमों से पुराने रिकॉर्ड को एक विशाल अंतर से तोड़ दिया है। इससे पहले यह विश्व रिकॉर्ड भारत के ही नाम था, जिसे 2 फरवरी 2020 को चेन्नई में ‘त्यागय्या चैरिटेबल ट्रस्ट’ ने 416 प्रतिभागियों के साथ स्थापित किया था। इस शानदार प्रस्तुति ने प्रतिष्ठित समुद्र तटीय स्थल को परंपरा, अनुशासन और सांस्कृतिक उत्कृष्टता के जीवंत प्रदर्शन में बदल दिया। यह आयोजन शास्त्रीय नृत्य के लिए एक ऐतिहासिक क्षण साबित हुआ और भारत और श्रीलंका के बीच अटूट सांस्कृतिक संबंधों को गौरवपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

तीसरे वनडे में बांग्लादेश से वाइटवॉश से बाल बाल बची ऑस्ट्रेलिया (Video)

AUSvsBAN सलामी बल्लेबाज कूपर कॉनली (149) के बेहतरीन शतक से ऑस्ट्रेलिया ने बांग्लादेश को तीसरे वनडे में रविवार को तीन गेंद शेष रहते एक विकेट से हराकर अपना सम्मान बचा लिया। बांग्लादेश ने यह मैच हारने के बावजूद तीन मैचों की सीरीज 2-1 से जीती।जीत के लिए अंतिम 9 रन पाने के पड़ाव पर खड़ी ऑस्ट्रेलिया के 5 विकेट बाकी थे लेकिन 4 विकेट गंवाकर ऑस्ट्रेलिया तीसरा वनडे भी हार जाती लेकिन अंतिम ओवर में एडम जैम्पा के चौके ने विश्व विजेता को शर्मसार होने से बचा लिया।

बांग्लादेश ने 50 ओवर में पांच विकेट पर 274 रन बनाये जबकि ऑस्ट्रेलिया ने 49.3 ओवर में नौ विकेट पर 277 रन बनाकर रोमांचक जीत हासिल की। प्लेयर ऑफ द मैच कूपर कॉनली ने एकतरफा मुकाबला करते हुए 134 गेंदों पर 13 चौकों और छह छक्कों की मदद से शानदार 149 रन बनाये।ऑस्ट्रेलिया ने जीत के साथ वनडे सीरीज़ खत्म की और बांग्लादेश को क्लीन स्वीप करने से रोक दिया, जबकि मेज़बान टीम ने बारिश से प्रभावित शुरुआती दो मैच जीते थे।

लक्ष्य का पीछा करते हुए ऑस्ट्रेलिया के ओपनर्स ने तेज़ शुरुआत की, लेकिन साझेदारी टूटने के बाद पारी की रफ़्तार थोड़ी धीमी पड़ गई। जोश इंगलिस और मैथ्यू रेनशॉ जल्दी-जल्दी आउट हो गए, जबकि एलेक्स कैरी कोई खास योगदान नहीं दे पाए। कूपर कॉनली और मार्नस लाबुशेन के बीच अहम साझेदारी से टीम को संभलने में मदद मिली, जिससे लक्ष्य का पीछा करने की गति स्थिर हुई; इसके बाद कैमरन ग्रीन ने भी अच्छा साथ दिया।

दूसरे छोर पर विकेट गिरते रहे, लेकिन कॉनली बिना घबराए खेलते रहे, लगातार बाउंड्री लगाते रहे और ऑस्ट्रेलिया को जीत की राह पर बनाए रखा। वह 49वें ओवर में आउट हुए, लेकिन ज़म्पा ने शानदार कवर ड्राइव लगाकर ऑस्ट्रेलिया को जीत दिलाई। शोरिफुल इस्लाम की शानदार गेंदबाज़ी और लगातार कोशिशों के बावजूद, कोनोली का बेहतरीन शतक निर्णायक साबित हुआ और उनके प्रदर्शन पर भारी पड़ा। शोरिफ़ुल इस्लाम ने 48 रन देकर छह विकेट लिए।

इससे पहले मो. तौहीद हृदोय (83), मोसद्दक हुसैन (नाबाद 56) और लिटन कुमार दास ( नाबाद 58) की शानदार पारियों के दम पर बांग्लादेश ने पांच विकेट पर 274 रनों का सम्मानजनक स्कोर खड़ा किया।बांग्लादेश ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का किया फैसला किया। बल्लेबाजी करने उतरी बांग्लादेश की शुरुआत अच्छी नहीं हुई और उसने 61 रन के स्कोर तक अपने तीन विकेट गंवा दिये। सौम्य सरकार (दो), तंजिद हसन (19) और कप्तान नजमुल शांतो (24) रन बनाकर आउट हुये।

इसके बाद मो. तौहीद हृदोय और लिटन कुमार दास चौथे विकेट के लिए 92 रन जोड़कर बड़े स्कोर की नींव रखी। लिटन कुमार दास (48) रन बनाकर रिटायर्ड हर्ट हुए। उन्होंने अपनी पारी में चार चौके और एक छक्का लगाया। शतक की ओर बढ़ रहे मो. तौहीद हृदोय को 46वें ओवर में बेन ड्वारश्विस ने आउट कर पवेलियन भेज दिया। मो. तौहीद हृदोय ने 88 गेंदों में आठ चौकों की मदद से (83) रन बनाये।

49वें ओवर में मेहदी हसन (तीन) रन पांचवें विकेट के रूप में आउट हुये। इसके बाद लिटन कुमार दास फिर से बल्लेबाजी के लिए उतरे और (नाबाद 58) रन बनाये। मोसद्दक हुसैन ने 51 गेंदों में पांच चौके और एक छक्के की मदद से (नाबाद 56) रनों की पारी खेली। बांग्लादेश की टीम ने निर्धारित 50 ओवरों में पांच विकेट पर 274 रनों का स्कोर बनाया। ऑस्ट्रेलिया के लिए मैट शॉ और जेवियर बार्टलेट को दो-दो विकेट मिले।

यूपी में नदी में डूबने से 5 बच्चों की मौत, मंदिर दर्शन के बाद 3 भाई-बहन डूबे, दोस्त को बचाने में गई 2 की जान

यूपी के बांदा में मंदिर दर्शन के बाद चंद्रावल नदी में नहाने उतरे तीन भाई-बहन डूब गए। वहीं दूसरी ओर कानपुर देहात में यमुना नदी में डूब रही सहेली को बचाने की कोशिश में किशोरी और एक अन्य युवक की जान चली गई। दोनों घटनाओं के बाद परिवारों में कोहराम मचा गया।

ऑस्ट्रेलिया की टर्की पर 2 गोलों की जीत के जश्न का वीडियो हुआ वायरल

क्रिकेट की सबसे सफलतम टीमों में से एक जाने वाली ऑस्ट्रेलिया ने तुर्की को 2 गोलों से हरा दिया। हालांकि ऑस्ट्रेलिया और तुर्की की फीफा रैंकिंग में बहुत फासला नहीं है। लेकिन 27वीं रैंक की ऑस्ट्रेलिया ने 22वीं रैंक की तुर्की को आक्रमण और रक्षण दोनों पहलू पर मात दी। ऑस्ट्रेलिया की इस जीत का जश्न मेलबर्न शहर में काफी वायरल हुआ।  

नेस्टोरी इरंकुंडा और कॉनर मेटकाफ के गोल की मदद से ऑस्ट्रेलिया ने 2-0 से जीत दर्ज करके तुर्किए को बेबस साबित कर दिया।इरंकुंडा ने तीन डिफेंडरों से घिरे होने के बावजूद 27वें मिनट में निचले शॉट से गोल करके ऑस्ट्रेलिया को बढ़त दिला दी।इरंकुंडा ने ऑस्ट्रेलियाई फुटबॉल के दिग्गज टिम कहिल के इस खेल में योगदान को याद करने के लिए कॉर्नर फ्लैग पर मुक्का मारकर जश्न मनाया। वाटफोर्ड के लिए खेलने वाले 20 वर्षीय इरंकुंडा ऑस्ट्रेलिया की तरफ से विश्व कप में सबसे कम उम्र के गोल स्कोरर बन गए हैं।

इसके कुछ मिनट बाद बीच ने अब्दुलकरीम बरदाकसी के जोरदार शॉट को रोककर शानदार बचाव किया। ऑस्ट्रेलिया के कोच टोनी पोपोविच ने अनुभवी गोलकीपर मैथ्यू रयान की जगह बीच को शुरुआती एकादश में रखने का चौंकाने वाला फैसला किया जो सही साबित हुआ।

तुर्किए को 57वें मिनट में फ्री किक मिली, लेकिन बीच ने बड़ी खूबसूरती से अर्दा गुलेर के शॉट को बचा दिया। रियाल मैड्रिड के लिए खेलने वाले 21 वर्षीय मिडफील्डर गुलेर का जन्म उस समय नहीं हुआ था जब तुर्किए इससे पहले आखिरी बार विश्व कप में खेला था।कॉनर मेटकाफ ने 75वें मिनट में इस्माइल युकसेक की गलती का फायदा उठाते हुए ऑस्ट्रेलिया की बढ़त को दोगुना कर दिया।

भारत के खिलाफ मैन ऑफ द सीरीज पाने वाला यह बल्लेबाज लेगा केन विलियमसन की जगह

न्यूजीलैंड टेस्ट क्रिकेट की रीढ़ बनने का सुनहरा अवरस विल यंग को मिला है जो भारतीय जमीन पर न्यूजीलैंड के लिए 3-0 की टेस्ट सीरीज जीत में मैन ऑफ द सीरीज का अवार्ड अर्जित कर चुके हैं।इंग्लैंड के खिलाफ़ सीरीज़ के बीच में केन विलियमसन के रिटायरमेंट के बाद विल यंग को  बाकी बचे दो टेस्ट मैचों के लिए न्यूज़ीलैंड की टीम में शामिल किया गया है।सिर्फ लाल गेंद ही नहीं कीवी टीम के लिए वह एकदिवसीय योजना में भी शामिल है।

यंग 14 जून को यूके पहुँचे और सोमवार से टीम के साथ ट्रेनिंग शुरू कर दी। इसके बाद ओवल में दूसरा टेस्ट मैच होगा, जो 17 जून से शुरू होगा। 33 साल के यंग ने आखिरी बार दिसंबर 2025 में टेस्ट मैच खेला था, लेकिन इंग्लैंड दौरे के लिए उन्हें टीम में नहीं चुना गया था। दिसंबर 2020 में डेब्यू करने के बाद से यंग ने सिर्फ़ 23 टेस्ट मैच खेले हैं। टीम में उन्हें कभी भी लगातार खेलने का मौका नहीं मिला, फिर भी टॉप-3 में बैटिंग करते हुए उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया है।

उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक 2024 में भारत में न्यूज़ीलैंड की ऐतिहासिक 3-0 से जीत थी। केन विलियमसन की गैर-मौजूदगी में नंबर 3 पर बैटिंग करते हुए, उन्होंने छह पारियों में 244 रन बनाए और ‘प्लेयर ऑफ़ द सीरीज़’ चुने गए। उन्होंने मुश्किल पिचों पर भारतीय स्पिनरों का बहुत आसानी से सामना किया था। विलियमसन ने कहा कि टीम से अलग होने से पहले वह कुछ समय तक टीम के साथ बने रहेंगे।

विलियमसन ने अपनी रिटायरमेंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, “मैं कुछ समय तक टीम के साथ रहूँगा, लेकिन हाँ, टीम को थोड़ा स्पेस भी दूँगा।यह एक संवेदनशील मामला है। टीम में कुछ लोगों के लिए यह नई खबर है और कई लोगों के लिए भी, और यह एक बदलाव है, इसलिए हम आने वाले कुछ दिनों में इस स्थिति को संभालेंगे।” “इसमें आगे बढ़ने का मौका भी है; मैं काफी समय से टीम का अहम हिस्सा रहा हूँ और उस ग्रुप में कई लीडर हैं। मुझे वह दिन याद है जब हमारी टीम के दूसरे लीडर चले गए थे और आगे बढ़ने के लिए कदम उठाने पड़ते हैं, और मुझे लगता है कि मेरे हटने से भी ऐसा करने का मौका मिलेगा।”

Global Wind Day 2026: विश्व पवन दिवस क्या है, क्यों मनाया जाता है?

The image depicts a scene illustrating how wind turbines generate electricity and reduce pollution, in observance of Global Wind Day

Global Wind Day: हर वर्ष 15 जून को पूरी दुनिया में विश्व पवन दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य लोगों को पवन ऊर्जा (Wind Energy) के महत्व, इसके लाभों और स्वच्छ ऊर्जा के प्रति जागरूक करना है। बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच पवन ऊर्जा को भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण और पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा स्रोतों में से एक माना जाता है।

 

  • विश्व पवन दिवस क्या है?
  • यह दिन क्यों मनाया जाता है? जानें उद्देश्य
  • इसकी शुरुआत कब हुई? (इतिहास)
  • यह कैसे काम करता है?
  • पवन ऊर्जा के मामले में भारत की स्थिति

 

आइए जानते हैं कि यह क्या है, क्यों मनाया जाता है और इसका क्या महत्व है:

 

विश्व पवन दिवस क्या है?

विश्व पवन दिवस एक वैश्विक आयोजन है, जिसे दुनिया भर में पवन ऊर्जा के फायदों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए मनाया जाता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हवा सिर्फ मौसम बदलने का जरिया नहीं है, बल्कि यह बिजली पैदा करने और प्रदूषण कम करने का एक बेहद शक्तिशाली और कभी न खत्म होने वाला अक्षय स्रोत है।

 

इस दिन को मुख्य रूप से यूरोपियन विंड एनर्जी एसोसिएशन (WindEurope) और ग्लोबल विंड एनर्जी काउंसिल (GWEC) द्वारा मिलकर आयोजित किया जाता है।

 

यह दिन क्यों मनाया जाता है? जानें उद्देश्य

इस दिवस को मनाने के पीछे कुछ बेहद महत्वपूर्ण कारण हैं:

 

स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना: कोयला, डीजल और पेट्रोल जैसे जीवाश्म ईंधनों (Fossil Fuels) से बड़े पैमाने पर प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग होती है। पवन ऊर्जा इसका एक पूरी तरह से स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प है।

 

अर्थव्यवस्था और रोजगार की संभावनाएं: पवन ऊर्जा क्षेत्र दुनिया भर में लाखों लोगों को रोजगार दे रहा है। पवन चक्कियों (Wind Turbines) के निर्माण, रखरखाव और रिसर्च में रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं, जिसके प्रति सरकारों और निवेशकों का ध्यान आकर्षित करना इसका उद्देश्य है।

 

जागरूकता फैलाना: आम जनता और नीति निर्माताओं को यह समझाना कि कैसे पवन ऊर्जा की मदद से बिजली की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सकता है और कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emission) को कम किया जा सकता है।

 

इसकी शुरुआत कब हुई? (इतिहास)

साल 2007: पहली बार इसकी शुरुआत यूरोप में हुई थी, तब इसे 'विंड डे' (Wind Day) के रूप में मनाया गया था। इसे यूरोपियन विंड एनर्जी एसोसिएशन (EWEA) ने आयोजित किया था।

 

साल 2009: इसकी सफलता और महत्व को देखते हुए ईडब्ल्यूईए (EWEA) और जीडब्ल्यूईसी (GWEC) ने हाथ मिलाया और इसे वैश्विक स्तर पर मनाने का फैसला किया। तब से इसे 'विश्व पवन दिवस' (Global Wind Day) का नाम मिला।

 

यह कैसे काम करता है?

पवन ऊर्जा बनाने के लिए बड़े-बड़े मैदानों या समुद्र के तटीय इलाकों में ऊंची पवन चक्कियां (Wind Turbines) लगाई जाती हैं।

 

जब तेज हवा चलती है, तो इन चक्कियों के ब्लेड घूमने लगते हैं। यह घुमावदार गति (Kinetic Energy) टरबाइन के अंदर लगे जनरेटर को चलाती है, जिससे यांत्रिक ऊर्जा (Mechanical Energy) बिजली (Electrical Energy) में बदल जाती है। इसके बाद इस बिजली को ग्रिड के जरिए हमारे घरों और फैक्ट्रियों तक पहुंचाया जाता है।

 

पवन ऊर्जा के मामले में भारत की स्थिति

भारत पवन ऊर्जा के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में से एक है। भारत में तमिलनाडु, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे राज्यों में पवन ऊर्जा का उत्पादन बहुत बड़े पैमाने पर होता है। भारत सरकार ने रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) के उत्पादन के लिए बड़े लक्ष्य रखे हैं, जिसमें पवन ऊर्जा की हिस्सेदारी बहुत महत्वपूर्ण है।

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।