अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026: जानिए इस बार की थीम, उद्देश्य और खास कार्यक्रम

12th International yoga Day theme

21 जून 2026 को भारत सहित पूरे विश्व में 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (IDY 2026) बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। आयुष मंत्रालय द्वारा इस बार के योग दिवस को लेकर थीम और विशेष कार्यक्रमों की घोषणा कर दी गई है। चलिए जानते हैं इस बार के योगा डे की खास बातें।

 

1. अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 की थीम

  • इस वर्ष (2026) के अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की आधिकारिक थीम है:
  • “स्वस्थ और सक्रिय वृद्धावस्था के लिए योग” (Yoga for Healthy Ageing)
  • थीम का महत्व: केंद्रीय आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह थीम आधुनिक युग की एक बड़ी चुनौती को संबोधित करती है। इसका मुख्य उद्देश्य बढ़ती उम्र के साथ लोगों को शारीरिक रूप से स्वस्थ, मानसिक रूप से जागरूक, आत्मनिर्भर और सक्रिय जीवन जीने के लिए योग को अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
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2. मुख्य कार्यक्रम (Main Event)

कोलकाता में मुख्य आयोजन: इस साल राष्ट्रीय स्तर का मुख्य कार्यक्रम कोलकाता के ऐतिहासिक 'रेड रोड' (Red Road) पर आयोजित किया जाएगा।

पीएम मोदी करेंगे नेतृत्व: इस भव्य आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद मौजूद रहेंगे और देश-विदेश के लाखों लोगों के साथ योग सत्र का नेतृत्व करेंगे।

International yoga Day theme

3. इस बार के विशेष कार्यक्रम और आकर्षण

100 ऐतिहासिक धरोहरों पर योग: देश की सांस्कृतिक विरासत को योग से जोड़ने के लिए भारत के 100 प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक स्थलों (Iconic Heritage Sites) पर विशेष योग सत्र आयोजित किए जाएंगे।

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गंगा तट योग यात्रा (Gangotri to Gangasagar): 13 जून से 20 जून तक 'गंगोत्री से गंगासागर' तक एक विशेष योग यात्रा का आयोजन किया गया है। यह यात्रा गंगा नदी के किनारे प्रमुख स्थानों से गुजरते हुए लोगों में पर्यावरण जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा दे रही है।
 

कोलकाता में विशेष प्रस्तुतियां: मुख्य आयोजन से पहले, 19 जून को शारीरिक और मानसिक तंदुरुस्ती को बढ़ावा देने के लिए “दौड़ से ध्यान” (Daud se Dhyan) और 20 जून को देशभक्ति व योग के संगम को दर्शाने वाला “वंदे योगम” (Vande Yogam) कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
 

वैश्विक स्तर पर आयोजन: इस बार विदेशों में भी योग दिवस को लेकर अभूतपूर्व उत्साह है। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) के समन्वय से दुनिया भर के 210 से अधिक देशों में, लगभग 2,500 स्थानों पर योग दिवस के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
 

नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड: इस योग दिवस की तैयारियों (काउंटडाउन) के तहत 14 जून को आयोजित एक राष्ट्रव्यापी लाइव योग सत्र में 4 लाख से अधिक लोगों ने एक साथ भाग लिया, जिसने एक नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित किया है।
 

डिजिटल पहल: आम जनता की भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार ने 'योग संगम पोर्टल' (Yoga Sangam Portal) को फिर से लॉन्च किया है, जहाँ लोग ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं, साथ ही MyGov प्लेटफॉर्म पर फोटोग्राफी, क्विज़ और रील्स मेकिंग जैसी कई प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जा रही हैं।

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FIFA World Cup में अब फ्रांस के एम्बाप्पे के मेस्सी और पेले से ज्यादा गोल

फ्रांस की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के कप्तान और स्ट्राइकर किलियन एम्बाप्पे ने फीफा विश्व कप में गोल की संख्या के मामले में ब्राजील के पेले और अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी को पीछे छोड़ दिया है।कप्तान किलियन एमबाप्पे दो शानदार गोलों की बदौलत फ्रांस ने यहां खेले गये ग्रुप मुकाबले में सेनेगल पर 3-1 की जीत के साथ विश्वकप 2026 में अपने अभियान की शुरुआत की।

एम्बाप्पे ने दो गोल किए पहला 66वें मिनट में और दूसरा एक्स्ट्रा टाइम (90 6) के छठे मिनट में। इस तरह 27 वर्षीय फॉरवर्ड ने अपने विश्व कप गोल की संख्या बढ़ाकर 14 कर ली और जर्मनी के गर्ड मुलर (14) की बराबरी कर ली। पेले के नाम 12, जबकि अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी और फ्रांस के जस्ट फोंटेन के नाम 13-13 वर्ल्ड कप गोल हैं। टूर्नामेंट में केवल ब्राजील के रोनाल्डो (15) और जर्मनी के मिरोस्लाव क्लोज (16) ने ही उनसे ज़्यादा गोल किए हैं।

एम्बाप्पे और पेले इतिहास के ऐसे दो ही किशोर खिलाड़ी हैं जिन्होंने विश्व कप फाइनल मैचों में गोल किए हैं। एम्बाप्पे 99 मैचों में 58 गोल के साथ फ्रांस के टॉप इंटरनेशनल स्कोरर भी बन गए हैं। उन्होंने ओलिवियर गिरौड को पीछे छोड़ा, जिन्होंने 137 मैचों में 57 गोल किए थे और 2024 में राष्ट्रीय टीम से संन्यास ले लिया था।

सेनेगल ने फ्रांस को चौंकाया पर एमबाप्पे से नहीं पा पाए पार

मेटलाइफ स्टेडियम में बुधवार को खेले गये मुकाबले में कप्तान किलियन एमबाप्पे ने दो गोल किए, जिसमें स्टॉपेज-टाइम में किया गया एक शानदार गोल भी शामिल था। 80,545 दर्शकों के समर्थन के बावजूद, फ्रांस को अनुशासित सेनेगल टीम से कड़ी टक्कर मिली, जिसने लंबे समय तक उन्हें बराबरी पर रखा और जवाबी हमले से खतरा पैदा किया।

सेनेगल ने पहले हाफ के बीच में पूर्व वर्ल्ड चैंपियन को लगभग चौंका ही दिया था, जब निकोलस जैक्सन ने तेज हमले के बाद 25वें मिनट में गोल की ओर दौड़ते हुए पोस्ट पर शॉट मारा। अफ्रीकी टीम खतरनाक दिखती रही, और सादियो माने ने दूर से शॉट मारकर गोलकीपर माइक मैगनन को शानदार बचाव करने पर मजबूर किया।

इसके बाद फ्रांस ने धीरे-धीरे गेंद पर अपना नियंत्रण बनाया और माइकल ओलिस, उस्मान डेम्बेले और युवा खिलाड़ी डेसिरे डौए के जरिए कई मौके बनाए, लेकिन सेनेगल के गोलकीपर एडुआर्ड मेंडी ने बार-बार उन्हें रोका, जिससे हाफ-टाइम तक स्कोर गोल राहित रहा।

हाफ-टाइम के बाद फ्रांस अधिक इरादे के साथ उतरा और कई बार गोल के करीब पहुंचा, आखिरकार 66वें मिनट में उन्होंने गतिरोध तोड़ा। ओलिस ने पेनल्टी एरिया में सटीक पास दिया और एमबाप्पे ने शांति से गोल करके फ्रांस की टीम को बढ़त दिलाई। इस गोल ने मैच का रुख पूरी तरह से फ्रांस के पक्ष में कर दिया।

मेंडी ने एमबाप्पे और ओलिस के शॉट्स को बचाकर सेनेगल को मुकाबले में बनाए रखा, लेकिन आखिरकार दबाव का असर दिखा। सब्स्टीट्यूट ब्रैडली बारकोला ने 82वें मिनट में बढ़त को दोगुना कर दिया। उन्होंने एड्रियन रैबियोट से मिले पास के बाद तेज काउंटर-अटैक को गोल में बदला।

सेनेगल ने हार नहीं मानी और स्टॉपेज-टाइम के पांचवें मिनट में उन्हें उम्मीद की किरण दिखी, जब सब्स्टीट्यूट इब्राहिम एमबाये ने सब्स्टीट्यूट इलिमन नडियाये के नेतृत्व में तेज हमले के बाद शानदार फिनिश किया।

एमबाप्पे ने 96वें मिनट में शानदार खेल दिखाया और बॉक्स के बाहर से दाएं पैर से ज़ोरदार शॉट मारकर टॉप कॉर्नर में गोल किया, जिससे फ्रांस की दो गोल की बढ़त बहाल हो गई और उन्होंने अपने दो गोल पूरे किए। इस नतीजे से फ्रांस को ग्रुप स्टेज में शानदार शुरुआत मिली है और उनकी आक्रामक क्षमता का पता चलता है, वहीं सेनेगल हार के बावजूद अपने जोश भरे खेल से हौसला बढ़ा सकता है।

ज्वैलरी शॉप में काम देने के बहाने सर्राफ ने किशोरी से किया रेप, फॉर्म हाउस में न्यूड हालत में रखा

कानपुर में ज्वैलरी शॉप में काम करने वाली एक किशोरी ने दुकानदार पर रेप का आरोप लगाया। किशोरी के मुताबिक आरोपित फॉर्म हाउस पर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। यहां तक कि बंद कमरे में दिन-दिन भर न्यूड हालत में रखा। विरोध करने पर चोरी का आरोप और जान से मारने की धमकी भी दी।

अफगानिस्तान ने टॉस जीतकर भारत को लखनऊ में थमाया बल्ला (Video)

AFGvsIND लखनऊ के इकाना स्टेडियम में अफगानिस्तान ने भारत के खिलाफ टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का निर्णय लिया है। पहले वनडे में भारत 7 विकेटों से जीता था। अफगानिस्तान की टीम ने दो बदलाव किए हैं। अफगानिस्तान के लिए नबी और उमरजई बीमार है और उनकी जगह बिलाल सामी और ड्वारिश रसूली खेलेंगे।

वहीं भारत की ओर से रोहित शर्मा का साथ देने यशस्वी जायसवाल ओपनिंग पर उतरेंगे। वहीं गेंदबाजी में हर्ष दुबे की जगह प्रिंस यादव एकदिवसीय पदार्पण करेंगे। इसके अलावा कुलदीप यादव को भी मौका मिला है।

भारत: शुभमन गिल (कप्तान), यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल, कुलदीप यादव, श्रेयस अय्यर, रोहित शर्मा,  वॉशिंगटन सुंदर, इशान किशन, अर्शदीप सिंह, गुरनूर बराड़, प्रिंस यादव।

अफगानिस्तान: हशमतुल्लाह शाहिदी (कप्तान), सेदिकुल्लाह अटल, रहमानुल्लाह गुरबाज़ (विकेटकीपर), इकराम अलिखिल (विकेटकीपर), बिलाल सामी, नांगेयालिया खरोती, एएम ग़ज़नफ़र, राशिद खान, दरविश रसूली, इब्राहिम जादरान, जिया उर रहमान शरीफी

नज़्म: बरसात का मौसम

Urdu poem on rainy season

गर्मियों का मौसम भी

बिल्कुल 

ज़िन्दगी के मौसम-सा लगता है…

भटकते बंजारे-से

दहकते आवारा दिन 

और

विरह में तड़पती जोगन-सी 

सुलगती लंबी रातें…

काश!

कभी ज़िन्दगी के आंगन में 

आकर ठहर जाए

बरसात का मौसम… 

 

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अमेरिका ने सबसे बड़े सैन्य कमांड से ‘इंडो’ शब्द हटाया:चीन के खिलाफ भारत को अहमियत देने के लिए ट्रम्प ने ही नाम बदला था

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की है कि US इंडो-पैसिफिक कमांड (USINDOPACOM) का नाम बदलकर फिर से US पैसिफिक कमांड (USPACOM) कर दिया गया है। अब इस कमांड से ‘इंडो’ शब्द हटा दिया गया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने 2018 में कमांड के नाम में बदलाव किया था। उस समय अमेरिका ने कहा था कि हिंद महासागर (इंडियन ओशियन) क्षेत्र का रणनीतिक महत्व बढ़ रहा है और यह क्षेत्र प्रशांत महासागर (पैसिफिक ओशियन) की सुरक्षा व्यवस्था से पहले की तुलना में ज्यादा जुड़ गया है। इसलिए कमांड के नाम में इंडो (हिंद महासागर) को भी शामिल किया गया था। यूएस-पैसिफिक कमांड क्या है? अमेरिकी सेना पूरी दुनिया को अलग-अलग क्षेत्रों में बांटकर चलती है। इनके लिए 11 कमांड हैं। इनमें से 6 स्ट्रैटेजिक और 5 फंक्शनल कमांड हैं। यूएस पैसिफिक स्ट्रैटेजिक कमांड का हिस्सा है। यह अमेरिका की सबसे बड़ी और सबसे अहम सैन्य कमांडों में से एक है। यह कमांड एशिया और प्रशांत महासागर इलाके में एक्टिव है।
अब नाम बदलने पर चर्चा क्यों है? अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यूएस पैसिफिक कमांड नाम बहुत पुराना और ऐतिहासिक है। इसे वापस लाने से सैनिकों को अपनी विरासत पर गर्व महसूस होगा। यह नाम कई बड़े युद्धों और महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़ा रहा है, इसलिए इसे फिर से अपनाया गया है। पेंटागन ने यह भी कहा कि कमांड का सिर्फ नाम बदला है, रणनीति और जिम्मेदारियों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। लेकिन कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि इंडो शब्द हटने से यह मैसेज जा सकता है कि अमेरिका हिंद महासागर और भारत को पहले जितना प्रमुख महत्व नहीं दिखाना चाहता। अपने पहले कार्यकाल में ट्रम्प चीन को सबसे बड़ा खतरा मानते थे। तब वे दिखाना चाहते थे कि भारत उसकी एशिया रणनीति का अहम हिस्सा है और चीन को काउंटर करने में भारत की अहम भूमिका है। उन्होंने यह भी जताने की कोशिश की थी कि हिंद महासागर और प्रशांत महासागर को एक ही रणनीतिक क्षेत्र हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक अब शायद ट्रम्प की प्राथमिकताएं बदल गई हैं। थरूर ने क्वाड के भविष्य पर जताई चिंता कमांड का नाम फिर से बदले जाने पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अमेरिकी आदेश की फोटो सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए लिखा, क्या यह क्वाड के ताबूत में एक और कील है? ————————- ये खबर भी पढ़ें… दुनिया के 16 नेताओं से छोटे हैं ट्रम्प:91% नेताओं से ज्यादा उम्रदराज, उनसे 10 साल ज्यादा सऊदी किंग की उम्र डोनाल्ड ट्रम्प इस हफ्ते 14 जून को 80 साल के हो गए। राष्ट्रपति पद पर रहते हुए 80 साल की उम्र देखने वाले वे अमेरिका के दूसरे राष्ट्रपति हैं। उनसे पहले राष्ट्रपति जो बाइडेन ने नवंबर 2022 में अपना 80वां जन्मदिन मनाया था। ट्रम्प दुनिया के सबसे उम्रदराज नेताओं में जरूर शामिल हो गए हैं, लेकिन वे दुनिया के सबसे बुजुर्ग शासक नहीं हैं। प्यू रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र के 186 देशों के नेताओं में 16 नेता ऐसे हैं जो ट्रम्प से भी ज्यादा उम्र के हैं। पूरी खबर पढ़ें

38 की उम्र में Messi की Hat-trick, बताया क्यों रो पड़े थे पहले गोल के बाद, Miroslav Klose के रिकॉर्ड की बराबरी

FIFA World Cup 2026 में Argentina के कप्तान Lionel Messi ने 38 की उम्र में एक ऐसा प्रदर्शन दिया जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। Algeria के खिलाफ Group J मुकाबले में Messi ने हैट्रिक (Hat-trick)  लगाकर न सिर्फ Argentina को 3-0 से जीत दिलाई, बल्कि कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी अपने नाम किए। लेकिन इस शानदार रात के बीच एक पल ऐसा भी आया जहां Messi की आंखों में आंसू दिखाई दिए।

 क्यों रोए Lionel Messi? 

 

मैच के दौरान जब Messi ने अपना पहला गोल किया, तो वह भावुक होकर रो पड़े। शुरुआत में माना गया कि यह सिर्फ बड़े मैच का इमोशन है, लेकिन बाद में Messi ने साफ किया कि इसका फुटबॉल से कोई लेना-देना नहीं था।

 

Messi ने बताया:

“मैं कुछ मुश्किल दिनों से गुजर रहा था, यह पूरी तरह फुटबॉल से अलग निजी कारण थे।”

उन्होंने यह भी कहा कि वह इन कठिन समय में अपने teammates और team staff के सपोर्ट के लिए बेहद आभारी हैं। हालांकि उन्होंने अपनी परेशानी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी, लेकिन यह साफ था कि वह मानसिक रूप से कुछ personal struggles से गुजर रहे थे।

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Algeria के खिलाफ Messi का ऐतिहासिक प्रदर्शन

 

मैच में Lionel Messi ने एक के बाद एक तीन शानदार गोल दागे और अपने करियर का पहला World Cup hat-trick पूरा किया।

 

  • पहला गोल: 17वें मिनट में शानदार left-footed strike
  • दूसरा गोल: 60वें मिनट में rebound पर आसान finish
  • तीसरा गोल: 76वें मिनट में long-range clinical shot

 

इस प्रदर्शन के साथ Messi ने World Cup में 16 goals पूरे कर लिए और Germany के legend Miroslav Klose की बराबरी कर ली, जो अब तक सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी थे

 

इस मैच में Messi का यह भी रिकॉर्ड बना कि वह 6 अलग-अलग World Cup editions में खेलने वाले पहले खिलाड़ी बन गए।

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Argentina की जीत और Messi का नया इतिहास

 

Messi के शानदार प्रदर्शन की बदौलत Argentina ने Algeria को 3-0 से हराकर अपने World Cup title defense की मजबूत शुरुआत की।

 

इस मैच की खास बातें:

 

Messi का 200वां international match

World Cup में पहला hat-trick

Klose के all-time record की बराबरी

Match के बाद standing ovation

 

Argentina के coach Lionel Scaloni ने भी Messi की तारीफ करते हुए कहा कि वह “incredible” हैं और टीम के लिए सबसे बड़ा Difference Maker हैं।

 

Messi की विरासत और आगे का सफर

 

इस मैच ने एक बार फिर साबित कर दिया कि Lionel Messi सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं बल्कि football history का एक living legend हैं। 38 साल की उम्र में भी उनका performance दुनिया के युवा खिलाड़ियों जैसे Kylian Mbappe और Erling Haaland को टक्कर दे रहा है।

 

Argentina अब अगले मुकाबलों की तैयारी कर रही है, लेकिन इस रात को हमेशा याद रखा जाएगा एक ऐसे कप्तान की रात, जिसने दर्द, इमोशन और greatness को एक साथ मैदान पर उतार दिया।

 

Yoga and Stress: योग से तनाव और चिंता कैसे कम होती है?

Yoga offers a simple way to reduce stress and anxiety

Yoga and Mental Wellness: भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव (Stress) और चिंता (Anxiety) हमारे जीवन का अवांछित हिस्सा बन चुके हैं। जब हम तनाव में होते हैं, तो हमारा शरीर 'फाइट या फ्लाइट' (Fight or Flight) मोड में चला जाता है, जिससे कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे स्ट्रेस हार्मोन्स का स्तर बढ़ जाता है। योग कोई जादुई छड़ी नहीं है, बल्कि एक शुद्ध विज्ञान है जो हमारे तंत्रिका तंत्र (Nesting of Nervous System) पर सीधे काम करता है।ALSO READ: बहुत ज्यादा सोचते हैं (Overthinking)? दिमाग को शांत और खुश रखने के लिए रोज करें ये 7 आसान योगासन

 

यदि प्रतिदिन 20 से 30 मिनट योग के लिए निकाले जाएं, तो मानसिक स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार देखा जा सकता है। यही कारण है कि आज योग को स्वस्थ और तनावमुक्त जीवन की कुंजी माना जाता है।

 

आइए वैज्ञानिक और व्यावहारिक तरीके से समझते हैं कि योग इसे कैसे शांत करता है:

 

1. पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय करना

जब हम चिंता में होते हैं, तो हमारा सिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम (Sympathetic Nervous System) एक्टिव रहता है, जिससे दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर बढ़ जाते हैं।

 

योग का असर: योग के धीमे आसन और गहरी सांसें हमारे पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम (Parasympathetic Nervous System) को सक्रिय कर देती हैं। इसे वैज्ञानिक भाषा में 'रेस्ट एंड डाइजेस्ट' (Rest and Digest) मोड कहते हैं। यह मोड एक्टिव होते ही दिल की धड़कन सामान्य होती है, मांसपेशियां ढीली पड़ती हैं और दिमाग को संदेश मिलता है कि—”सब कुछ सुरक्षित है, शांत हो जाओ।”

 

2. हैप्पी हार्मोन्स का स्राव (Brain Chemistry)

चिंता हमारे दिमाग में न्यूरोट्रांसमीटर के असंतुलन के कारण भी होती है। नियमित योग करने से मस्तिष्क के रसायनों में सकारात्मक बदलाव आता है:

 

GABA का बढ़ना: अध्ययनों से पता चला है कि योग करने से दिमाग में GABA (गामा-अमीनोब्यूटीरिक एसिड) नामक रसायन का स्तर बढ़ता है। यह रसायन दिमाग की अत्यधिक सक्रियता या घबराहट को शांत करने का काम करता है।

 

कोर्टिसोल में कमी: योग स्ट्रेस हार्मोन 'कोर्टिसोल' के स्तर को तेजी से घटाता है और 'एंडोर्फिन' व 'सेरोटोनिन' जैसे हैप्पी हार्मोन्स को बढ़ाता है, जो मूड को तुरंत बेहतर करते हैं।

 

3. प्राणायाम: सांसों पर नियंत्रण से विचारों पर नियंत्रण

हमारा दिमाग और हमारी सांसें आपस में गहराई से जुड़े हैं। जब आप डरे या चिंतित होते हैं, तो आपकी सांसें उथली और तेज हो जाती हैं।

 

अनुलोम-विलोम और भ्रामरी जैसे प्राणायामों के जरिए जब हम जानबूझकर अपनी सांसों को धीमा और गहरा करते हैं, तो यह सीधे हमारे वेगस नर्व (Vagus Nerve) को उत्तेजित करता है। वेगस नर्व दिमाग को तुरंत शांत होने का सिग्नल भेजती है, जिससे विचारों का तूफान थम जाता है।

 

4. 'माइंडफुलनेस' और वर्तमान में जीना

चिंता का सीधा सा मतलब है- भविष्य की उन बातों को लेकर डरना जो अभी तक हुई ही नहीं हैं।

 

योग का अभ्यास करते समय आपका पूरा ध्यान इस बात पर होता है कि आपका शरीर इस वक्त किस मुद्रा में है या आप सांस कैसे ले रहे हैं। यह अभ्यास आपको अतीत के पछतावे और भविष्य की चिंता से खींचकर 'वर्तमान क्षण' यानी Present Moment में ले आता है। जब आप वर्तमान में होते हैं, तो चिंता अपने आप गायब हो जाती है।

 

तनाव दूर करने के लिए 3 सबसे प्रभावी योगासन

यदि आप मानसिक रूप से बहुत थका हुआ या चिंतित महसूस कर रहे हैं, तो ये तीन आसन तुरंत राहत देते हैं:

 

शवासन (Corpse Pose): पीठ के बल सीधे लेटकर शरीर को पूरी तरह ढीला छोड़ देना। यह मानसिक थकान को मिटाने का सबसे बेहतरीन आसन है।

 

बालासन (Childs Pose): घुटनों के बल बैठकर आगे की ओर झुकना। यह रीढ़ की हड्डी के तनाव को दूर करता है और दिमाग को शांत करता है।

 

उत्तानासन (Forward Bend): खड़े होकर आगे की ओर झुकना। इससे सिर की तरफ ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है, जिससे मानसिक स्पष्टता आती है।

 

एक छोटा सा सुझाव: जब भी अगली बार आपको एंग्जायटी या पैनिक महसूस हो, तो बस एक शांत जगह पर बैठ जाएं और 5 सेकंड के लिए सांस अंदर लें, 5 सेकंड रोकें और 5 सेकंड में बाहर छोड़ें (Box Breathing)। आप पाएंगे कि योग का यह छोटा सा हिस्सा आपके दिमाग को कितनी जल्दी रीसेट कर देता है।

 

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जसपाल राणा के बाद उनकी मां श्यामा देवी का निधन, खेल जगत में शोक

भारतीय निशानेबाज़ी जगत में लगातार दो बड़ी दुखद घटनाओं ने सभी को झकझोर दिया है। दिग्गज शूटर और कोच जसपाल राणा के निधन के कुछ ही दिनों बाद उनकी माता श्यामा देवी राणा (78) का भी दिल्ली के आर्मी अस्पताल में निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार थीं और उनकी हालत गंभीर (critical condition) बताई जा रही थी।

 

परिवार के अनुसार, बेटे के अचानक निधन के बाद श्यामा देवी पूरी तरह टूट गई थीं। 12 जून को जसपाल राणा के निधन के बाद से ही उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई और आखिरकार 16 जून को उन्होंने अंतिम सांस ली।

 

जसपाल राणा का निधन दिल्ली के मैक्स अस्पताल में कार्डियक जटिलताओं के कारण हुआ था। वे हाल ही में जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित ISSF वर्ल्ड कप से लौटे थे, जहां वे भारतीय पिस्टल टीम के हाई परफॉर्मेंस कोच के रूप में काम कर रहे थे। भारत की टीम ने उनके मार्गदर्शन में शानदार प्रदर्शन करते हुए 4 मेडल (2 गोल्ड और 2 सिल्वर) जीते थे।

 

खिलाड़ी के रूप में जसपाल राणा भारत के सबसे सफल निशानेबाज़ों में गिने जाते हैं। उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में 1994 से 2006 के बीच 15 पदक जीते, जिनमें 9 स्वर्ण पदक शामिल थे। इसके अलावा उन्होंने एशियन गेम्स में भी भारत के लिए 8 पदक जीते और देश के सबसे सफल शूटरों में अपनी पहचान बनाई।

 

कोच के रूप में भी उनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने कई युवा खिलाड़ियों को निखारा, जिनमें ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर भी शामिल हैं।

 

उनके निधन के बाद पूरे देश के खेल जगत में शोक की लहर फैल गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई खेल हस्तियों और नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

 

राणा परिवार, जिसमें उनकी पत्नी रीना राणा, बेटी देवांधी, बेटा युवराज और अन्य सदस्य शामिल हैं, पहले ही इस बड़ी क्षति से उबर नहीं पाया था कि अब माता के निधन ने दुख को और गहरा कर दिया है। पूरे शूटिंग समुदाय में शोक का माहौल है।

कॉमनवेल्थ गेम्स में जसपाल राणा ने अपने करियर का सबसे शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 1994, 1998, 2002 और 2006 में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए कुल 15 पदक अपने नाम किए, जिनमें 9 स्वर्ण, 4 रजत और 2 कांस्य पदक शामिल रहे।

 

एशियन गेम्स में भी उनका प्रदर्शन बेहतरीन रहा। 1994, 1998 और 2006 संस्करणों में उन्होंने भारत के लिए कुल 8 पदक जीते। अपनी इन उपलब्धियों के दम पर वह भारत के सबसे सफल और सम्मानित निशानेबाज़ों में शामिल हुए।

Maharaja Chhatrasal: महाराजा छत्रसाल: एक महान राष्ट्रनिर्माता की कहानी

The image depicts a scene from the heroic saga of Maharaja Chhatrasal, the great freedom fighter of Bundelkhand

Maharaja Chhatrasal History: भारत के इतिहास में अनेक ऐसे वीर योद्धा हुए जिन्होंने अपने साहस, पराक्रम और दूरदर्शिता से राष्ट्र की रक्षा की तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने। उन्हीं महान विभूतियों में एक नाम है महाराजा छत्रसाल का। वे केवल एक पराक्रमी योद्धा ही नहीं थे, बल्कि एक कुशल प्रशासक, दूरदर्शी नेता और राष्ट्रनिर्माता भी थे। उन्होंने बुंदेलखंड की धरती को विदेशी अत्याचारों से मुक्त कर स्वतंत्र राज्य की स्थापना की और जनकल्याण को अपने शासन का आधार बनाया।ALSO READ: अजेय प्रताप : क्यों 'हल्दीघाटी और घास की रोटी' से कहीं बड़ा है महाराणा प्रताप का इतिहास?

 

1. पृष्ठभूमि और प्रारंभिक संघर्ष

2. संत प्राणनाथ का आशीर्वाद और प्रेरणा

3. राष्ट्रनिर्माता के रूप में योगदान, बुंदेलखंड का उदय

4. महत्वपूर्ण उपलब्धियां

5. बाजीराव पेशवा के साथ मित्रता

 

यहां उनके जीवन और संघर्ष की गौरवगाथा सुधि पाठकों के लिए प्रस्तुत हैं…

 

1. पृष्ठभूमि और प्रारंभिक संघर्ष

छत्रसाल का जन्म 4 मई 1649 को मऊ सहानिया (बुंदेलखंड क्षेत्र) में हुआ था। उनके पिता चंपत राय बुंदेला एक वीर योद्धा थे, जिन्होंने मुगल सत्ता के विरुद्ध संघर्ष किया था। छत्रसाल ने बहुत कम उम्र में अपने माता-पिता को खो दिया, लेकिन उनकी रगों में स्वाभिमान का रक्त दौड़ रहा था। उन्होंने छोटी उम्र से ही मुगल दमनकारी नीतियों को करीब से देखा और भारत माता को मुक्त कराने का संकल्प लिया।

 

2. संत प्राणनाथ का आशीर्वाद और प्रेरणा

छत्रसाल के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब वे छत्रपति शिवाजी महाराज से मिले। शिवाजी ने उन्हें “बुंदेलखंड को मुक्त कराने” का मंत्र दिया। इसके बाद, उन्होंने संत प्राणनाथ जी के मार्गदर्शन में अपने सैन्य अभियान को दिशा दी। संत प्राणनाथ ने ही उन्हें 'महाराजा' की उपाधि दी और उनके राज्य को 'छत्रसाल' नाम से सुशोभित किया।

 

3. राष्ट्रनिर्माता के रूप में योगदान, बुंदेलखंड का उदय

महाराजा छत्रसाल ने यह सिद्ध किया कि दृढ़ संकल्प और नेतृत्व के बल पर किसी भी क्षेत्र को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाया जा सकता है। उन्होंने केवल युद्ध नहीं लड़े, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था स्थापित की जो जनता के विकास और सुरक्षा पर आधारित थी। उनके प्रयासों ने बुंदेलखंड की पहचान को नई ऊंचाई दी।

 

छत्रसाल ने अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितियों में गोरिल्ला/ छापामार युद्ध पद्धति अपनाकर मुगलों को छका दिया। उनकी सैन्य रणनीति का लोहा मुगलों ने भी माना। उन्होंने पन्ना को अपनी राजधानी बनाया और एक विशाल साम्राज्य का निर्माण किया।

 

4. महत्वपूर्ण उपलब्धियां

स्वतंत्रता का प्रतीक: औरंगजेब जैसे शक्तिशाली मुगल शासक की सेनाओं को बार-बार पराजित करना उनके साहस का प्रमाण था।

 

साहित्य और कला के संरक्षक: वे न केवल एक योद्धा थे, बल्कि विद्यानुरागी भी थे। महान कवि भूषण उनके दरबार की शोभा थे। भूषण द्वारा रचित 'छत्रसाल दशक' आज भी उनकी वीरता का जीवंत प्रमाण है।

 

जननायक: उन्होंने अपने राज्य में प्रजा के कल्याण के लिए कई कार्य किए। उन्हें एक न्यायप्रिय राजा के रूप में जाना जाता था।

 

5. बाजीराव पेशवा के साथ मित्रता

उनके जीवन का अंतिम दौर भी ऐतिहासिक है। जब मुहम्मद खान बंगश ने बुंदेलखंड पर आक्रमण किया, तब वृद्ध छत्रसाल ने मराठा शासक बाजीराव पेशवा को मदद के लिए संदेश भेजा था। बाजीराव की सहायता ने न केवल बुंदेलखंड को बचाया, बल्कि छत्रसाल ने बाजीराव को अपना तीसरा पुत्र माना और उन्हें अपने राज्य का एक बड़ा हिस्सा उपहार में दिया।

 

निम्न प्रसिद्ध पंक्तियां बुंदेलखंड के महाराजा छत्रसाल ने मराठा पेशवा बाजीराव को मदद के लिए लिखे गए ऐतिहासिक पत्र का हिस्सा हैं। 

'जो गति भई गजेन्द्र की, सो गति भई है आज।

बाजी राखो बाजीराव, राखो मेरी लाज।।'

– अर्थ: 'मेरी स्थिति आज उस गजेंद्र (हाथी) जैसी हो गई है जिसे मगरमच्छ ने अपने जबड़े में जकड़ लिया हो। बुंदेलखंड की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है, हे बाजीराव! अब आप ही मेरी लाज बचा सकते हैं।'

 

महाराजा छत्रसाल केवल एक राजा नहीं थे, बल्कि वे स्वाभिमान के प्रतीक थे। उनके शौर्य को इतिहास के पन्नों में हमेशा स्वर्ण अक्षरों में अंकित रखा जाएगा। उन्होंने बिखरे हुए बुंदेलखंड को एकजुट किया और एक ऐसी नींव रखी जिसने उत्तर भारत में मुगल साम्राज्य की जड़ों को खोखला कर दिया। उनकी वीरता और उनके द्वारा स्थापित पन्ना राज्य आज भी हमें अपनी जड़ों से जुड़ने और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देते हैं। 

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