गर्मियों का मौसम भी
बिल्कुल
ज़िन्दगी के मौसम-सा लगता है…
भटकते बंजारे-से
दहकते आवारा दिन
और
विरह में तड़पती जोगन-सी
सुलगती लंबी रातें…
काश!
कभी ज़िन्दगी के आंगन में
आकर ठहर जाए
बरसात का मौसम…
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