karnataka MLC Election Results 2026: बेंगलुरु से इस वक्त की सबसे बड़ी राजनीतिक खबर! काउंटिंग रूम से निकलते ही भाजपा के पैरों तले जमीन खिसक गई। अपनों ने ही दिया धोखा—जानिए कैसे भाजपा-JDS के 11 विधायकों ने गुपचुप कांग्रेस को जिता दिया।
कर्नाटक की राजनीति में गुरुवार, 18 जून को एक ऐसा भूचाल आया जिसने विपक्षी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को हिलाकर रख दिया है। कर्नाटक विधान परिषद (MLC) की 7 सीटों पर हुए द्विवार्षिक चुनाव के नतीजों ने सबको चौंका दिया है। राज्य के मुख्यमंत्री और कांग्रेस के कद्दावर रणनीतिकार डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) के बिछाए राजनीतिक चक्रव्यूह में भाजपा और जेडीएस इस कदर फंसे कि उनके अपने ही विधायकों ने कांग्रेस के पक्ष में भारी 'क्रॉस वोटिंग' (Cross Voting) कर दी।
इस चुनावी उलटफेर के बाद कांग्रेस ने 7 में से 5 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है, जबकि भाजपा के खाते में सिर्फ 2 सीटें आईं और जेडीएस (JDS) के इकलौते उम्मीदवार को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा।
चुनावी अंकगणित : कहां गायब हुए NDA के 12 वोट?
विधानसभा के आधिकारिक आंकड़ों और चुनाव अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस के पास अपने 135 विधायक हैं। इसके अलावा उन्हें 2 निर्दलीय, 1 सर्वोदय कर्नाटक पक्ष और भाजपा से निष्कासित 2 विधायकों (एसटी सोमशेखर और शिवराम हेब्बार) का समर्थन मिलाकर कुल 140 वोट मिलने तय थे।
लेकिन, जब पहली वरीयता के वोटों की गिनती खत्म हुई, तो कांग्रेस के हिस्से में उम्मीद से 11 वोट अधिक यानी कुल 151 वोट आए। वही दूसरी ओर, एनडीए (NDA) खेमे का गणित पूरी तरह बिगड़ गया:
- भाजपा का नुकसान : 64 विधायकों वाली भाजपा के दोनों उम्मीदवारों को मिलाकर कुल 56 वोट ही मिले, जो उनकी तय ताकत से 8 वोट कम थे। भाजपा के लिंगराज पाटिल को 30 की जगह केवल 27 वोट मिले।
- जेडीएस की करारी हार : 18 विधायकों वाली जेडीएस के उम्मीदवार एन. गोविंदराजू को केवल 14 वोट मिले।
एनडीए के समझौते के तहत भाजपा ने अपने 3 अतिरिक्त विधायक जेडीएस को ट्रांसफर किए थे, जिससे गोविंदराजू को 21 वोट मिलने चाहिए थे, लेकिन वे अपनी पार्टी के विधायकों के वोट भी नहीं बचा पाए।
विपक्ष के नेता का कबूलनामा: भाजपा के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने हार स्वीकार करते हुए कहा कि हमारे कुछ विधायकों ने पार्टी लाइन को पार किया है। हमारी पार्टी में क्रॉस वोटिंग हुई है, हम उन विधायकों की पहचान कर रहे हैं और उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
शिवकुमार का 'मॉक पोल' चक्रव्यूह और कांग्रेस की रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों (Expertise) के अनुसार, इस चुनाव में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अपनी कुशल संगठनात्मक क्षमता का परिचय दिया। चुनाव से पहले ही कांग्रेस ने अपने विधायकों की एकजुटता बनाए रखने के लिए बेंगलुरु के एक रिसॉर्ट में तीन बार 'मॉक वोटिंग' (प्रशिक्षण मतदान) कराया था, ताकि पहली बार के विधायकों का एक भी वोट अमान्य (Invalid) न हो।
जीत के बाद मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने बेहद सधे हुए अंदाज में प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हमें विपक्षी विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग की कोई पूर्व जानकारी नहीं थी। यह हमारी सरकार की 5 गारंटी योजनाओं और जन कल्याणकारी नीतियों पर अन्य दलों के विधायकों का 'अंतरात्मा की आवाज पर दिया गया वोट' (Conscience Vote) है।”
कर्नाटक MLC चुनाव परिणाम 2026 : एक नजर में
इस उलटफेर का राज्यसभा और कर्नाटक की राजनीति पर क्या होगा असर?
इस प्रचंड जीत के बाद कर्नाटक विधान परिषद (75 सदस्यीय उच्च सदन) में कांग्रेस ने इतिहास में पहली बार पूर्ण बहुमत (39 सीटें) हासिल कर लिया है।
- सदन में बिल पास कराना आसान : अब सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की सरकार को किसी भी नए कानून या संशोधन बिल को पास कराने के लिए विपक्ष के सामने नहीं झुकना पड़ेगा।
- राज्यसभा सीटों पर संकट : इस क्रॉस वोटिंग ने भाजपा-जेडीएस गठबंधन की अंदरूनी गुटबाजी और कलह को उजागर कर दिया है। इसका सीधा असर आगामी राज्यसभा चुनावों पर पड़ेगा, जहां भाजपा के लिए अपनी सीटें बचाना अब एक बड़ी चुनौती बन गया है।

