भारतीय निशानेबाज़ी जगत में लगातार दो बड़ी दुखद घटनाओं ने सभी को झकझोर दिया है। दिग्गज शूटर और कोच जसपाल राणा के निधन के कुछ ही दिनों बाद उनकी माता श्यामा देवी राणा (78) का भी दिल्ली के आर्मी अस्पताल में निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार थीं और उनकी हालत गंभीर (critical condition) बताई जा रही थी।
परिवार के अनुसार, बेटे के अचानक निधन के बाद श्यामा देवी पूरी तरह टूट गई थीं। 12 जून को जसपाल राणा के निधन के बाद से ही उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई और आखिरकार 16 जून को उन्होंने अंतिम सांस ली।
जसपाल राणा का निधन दिल्ली के मैक्स अस्पताल में कार्डियक जटिलताओं के कारण हुआ था। वे हाल ही में जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित ISSF वर्ल्ड कप से लौटे थे, जहां वे भारतीय पिस्टल टीम के हाई परफॉर्मेंस कोच के रूप में काम कर रहे थे। भारत की टीम ने उनके मार्गदर्शन में शानदार प्रदर्शन करते हुए 4 मेडल (2 गोल्ड और 2 सिल्वर) जीते थे।
खिलाड़ी के रूप में जसपाल राणा भारत के सबसे सफल निशानेबाज़ों में गिने जाते हैं। उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में 1994 से 2006 के बीच 15 पदक जीते, जिनमें 9 स्वर्ण पदक शामिल थे। इसके अलावा उन्होंने एशियन गेम्स में भी भारत के लिए 8 पदक जीते और देश के सबसे सफल शूटरों में अपनी पहचान बनाई।
कोच के रूप में भी उनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने कई युवा खिलाड़ियों को निखारा, जिनमें ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर भी शामिल हैं।
उनके निधन के बाद पूरे देश के खेल जगत में शोक की लहर फैल गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई खेल हस्तियों और नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
राणा परिवार, जिसमें उनकी पत्नी रीना राणा, बेटी देवांधी, बेटा युवराज और अन्य सदस्य शामिल हैं, पहले ही इस बड़ी क्षति से उबर नहीं पाया था कि अब माता के निधन ने दुख को और गहरा कर दिया है। पूरे शूटिंग समुदाय में शोक का माहौल है।
कॉमनवेल्थ गेम्स में जसपाल राणा ने अपने करियर का सबसे शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 1994, 1998, 2002 और 2006 में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए कुल 15 पदक अपने नाम किए, जिनमें 9 स्वर्ण, 4 रजत और 2 कांस्य पदक शामिल रहे।
एशियन गेम्स में भी उनका प्रदर्शन बेहतरीन रहा। 1994, 1998 और 2006 संस्करणों में उन्होंने भारत के लिए कुल 8 पदक जीते। अपनी इन उपलब्धियों के दम पर वह भारत के सबसे सफल और सम्मानित निशानेबाज़ों में शामिल हुए।
