Jyeshtha Purnima 2026 Upay: आज ज्येष्ठ पूर्णिमा पर आज सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए जरूर करें ये उपाय, जानें इनके बारे में

Jyeshtha Purnima 2026 Upay: आज ज्येष्ठ माह का अंतिम दिन है। आज ज्येष्ठ पूर्णिमा के साथ 59 दिनों तक चला हिंदू कैलेंडर का तीसरा महीना समाप्त हो जाएगा। इसके बाद कल से आषाढ़ माह शुरू होगा और कल कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि होगी। इसलिए आज के दिन का विशेष महत्व है। हिंदू धर्म में ज्येष्ठ पूर्णिमा का अहम स्थान है। इस दिन गंगा आदि पवित्र नदियों में स्नान, उपवास, पूजा और दान-पुण्य किया जाता है। पूर्णिमा तिथि माता लक्ष्मी को समर्पित होती है। इस दिन सत्यनारायण भगवान और चंद्र देव की भी पूजा की जाती है। इसके अलावा, ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार आज के दिन कुछ खास उपाया करने से जीवन में मां लक्ष्मी की कृपा से सुख-समृद्धि आती है।

ज्येष्ठ पूर्णिमा के विशेष उपाय

अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने या घर की नकारात्मकता को दूर करने के लिए इस दिन कुछ सरल और अचूक उपाय कर सकते हैं:

मां लक्ष्मी की कृपा और धन लाभ के उपाय

ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करते समय उन्हें 11 पीली कौड़ियां अर्पित करें। पूजा संपन्न होने के बाद इन कौड़ियों को एक लाल कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रख दें। इससे घर में बरकत बनी रहती है।

मां लक्ष्मी को सफेद रंग की वस्तुएं अति प्रिय हैं। इस दिन चावल और मखाने की खीर बनाकर मां लक्ष्मी को भोग लगाएं और फिर उसे परिवार के सभी सदस्यों में प्रसाद के रूप में बांटें।

मानसिक शांति और चंद्र दोष से मुक्ति

पूर्णिमा की रात को चंद्र देव को जल में दूध, गंगाजल और अक्षत (चावल) मिलाकर अर्घ्य दें। इससे कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है।

अर्घ्य देते समय या रात के समय `ॐ सों सोमाय नमः` मंत्र का जाप करना बेहद शुभ माना जाता है।

घर की नकारात्मकता दूर करने के लिए

पूर्णिमा की शाम को घर के मुख्य द्वार पर घी का एक दीपक जरूर जलाएं। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है और दरिद्रता दूर होती है।

पूर्णिमा के दिन पीपल के पेड़ में जल अर्पित करें और वहां घी का दीपक जलाएं। माना जाता है कि पीपल के पेड़ में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का वास होता है।

विवाह बाधा दूर करने के विशेष उपाय

परिवार में किसी विवाह योग्य व्यक्ति के विवाह में बार-बार रुकावटें आ रही हों या बात बनते-बनते बिगड़ जाती हो, तो ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन सफेद वस्त्र धारण करके भगवान शिव का पूरे विधि-विधान से अभिषेक और पूजन करें। मान्यता है कि इससे विवाह के मार्ग में आने वाली सभी अड़चनें तुरंत दूर हो जाती हैं।

दान-पुण्य का महत्व

इस पवित्र तिथि पर सामर्थ्य अनुसार जरूरतमंदों को सफेद वस्तुएं चावल, दूध, चीनी, सफेद कपड़े या मिठाई आदि का दान करें। पूर्णिमा के दिन किया गया दान अक्षय फल प्रदान करता है।

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Awarapan 2 Teaser X Reactions: ‘अक्खा बॉलीवुड एक तरफ, इमरान हाशमी एक तरफ’, आवारापन 2′ का टीजर देख यूजर्स ने दिया मजेदार रिएक्शन

Awarapan 2 Teaser X Reactions: ‘आवारापन 2’ के टीज़र ने फ़ैन्स के दिलों को छू लिया है। वे X (पहले ट्विटर) पर इमरान हाशमी के 19 साल बाद मशहूर किरदार ‘शिवम पंडित’ के तौर पर वापसी का जश्न मना रहे हैं। पुरानी यादें ताज़ा करने वाले पलों, ज़बरदस्त एक्शन और मशहूर गाने ‘तो फिर आओ’ के नए वर्शन से भरपूर इस टीज़र ने दर्शकों को प्रभावित किया है।

कई लोगों ने इसकी पहली झलक को “शुरू से आखिर तक रोंगटे खड़े कर देने वाला” बताया, जबकि दूसरों ने फ़िल्म के इमोशनल अंदाज़, विज़ुअल्स और इमरान की स्क्रीन प्रेज़ेंस की तारीफ़ की। जैसे-जैसे ऑनलाइन उत्साह बढ़ रहा है, ‘आवारापन 2’  इस साल के सबसे चर्चित टीज़र रिलीज़ में से एक बन गया है।

X पर फ़ैन्स इमरान हाशमी की दमदार स्क्रीन प्रेज़ेंस से काफ़ी प्रभावित हुए और कई लोगों ने उन्हें टीज़र की सबसे बड़ी खासियत बताया। कई लोगों ने उनके ज़बरदस्त बॉडी ट्रांसफ़ॉर्मेशन की तारीफ़ करते हुए कहा कि वे “टॉप फ़ॉर्म” में हैं, जबकि दूसरों ने उनके असरदार डायलॉग डिलीवरी और ‘तो फिर आओ’ गाने की वापसी की सराहना की और कहा कि इसे सुनकर उनके “रोंगटे खड़े हो गए”।

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एक फ़ैन ने लिखा, “अक्खा बॉलीवुड एक तरफ़, इमरान हाशमी एक तरफ़,” जिसका मतलब था कि सिर्फ़ इस एक्टर की वजह से ही ‘आवारापन 2’ देखी जा सकती है। जो लोग नहीं जानते, उन्हें बता दें कि ‘द बैडज़ ऑफ़ बॉलीवुड’ में राघव जुयाल का ‘अक्खा’ वाला डायलॉग सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हो गया है।

एक और व्यक्ति ने टीज़र को “बहुत बढ़िया” बताया और कास्ट में शबाना आज़मी और सुविंदर विक्की के शामिल होने की तारीफ़ करते हुए कहा कि इस जोड़ी ने सीक्वल में ज़बरदस्त एक्टिंग का हुनर ​​दिखाया है। कुल मिलाकर, टीज़र ने फ़ैन्स को “बेहद उत्साहित” कर दिया है और कई लोग इसे इस पसंदीदा कल्ट क्लासिक की शानदार वापसी मान रहे हैं।

‘आवारापन 2’ का टीज़र सिर्फ़ पुरानी यादों पर निर्भर रहने के बजाय, शिवम पंडित के इमोशनल सफ़र को फिर से दिखाता है और साथ ही नए एक्शन और किरदारों को भी पेश करता है। शुरुआत का वॉइसओवर माहौल बनाता है, जो दर्शकों को याद दिलाता है कि शिवम आज भी त्याग और किस्मत के बोझ तले दबा हुआ इंसान है। इमरान हाशमी आसानी से इस किरदार में वापस आ जाते हैं। उनका रफ़ लुक, दमदार स्क्रीन प्रेज़ेंस और साफ़ तौर पर दिखता फ़िज़िकल बदलाव यह साबित करता है कि किरदार में बदलाव तो आया है, लेकिन वह अपने अतीत से पूरी तरह निकल नहीं पाया है।

टीज़र ‘तो फिर आओ’ गाने के नए वर्शन के ज़रिए फ़ैन्स के ओरिजिनल फ़िल्म से जुड़े इमोशनल लगाव को भी समझदारी से भुनाता है। यह मशहूर गाना सिर्फ़ पुरानी यादें ताज़ा करने का ज़रिया नहीं है, बल्कि यह उदासी भरे माहौल को और गहरा करता है और इशारा देता है कि दुख और प्यार ही शिवम की कहानी को आगे बढ़ाएंगे। आलिया की कब्र पर उसका जाना इस बात को और पक्का करता है कि यह सीक्वल 2007 की कल्ट क्लासिक फ़िल्म की इमोशनल विरासत से सीधे जुड़ा है, न कि यह कोई अलग-थलग एक्शन फ़िल्म है।

फ़िल्म का आखिरी डायलॉग – “इस बार या तो ये आवारापन खत्म होगा या मैं” – यह संकेत देकर कहानी का रोमांच और बढ़ा देता है कि शिवम का सफ़र अब अपने आखिरी पड़ाव पर है। ‘आवारापन 2’ 14 अगस्त, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी।

खेत बेचने पर कितना लगता है टैक्स? ITR में कहां और कैसे दिखाएं यह कमाई, जानिए टैक्स विभाग के जरूरी नियम

Tax on Agricultural Land Sale: भारत में कृषि भूमि यानी खेत बेचने को लेकर आम तौर पर यही माना जाता है कि इस पर कोई टैक्स नहीं लगता है। लेकिन टैक्स नियमों के मुताबिक यह पूरी तरह सच नहीं है। कृषि भूमि बेचने पर टैक्स लगेगा या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह जमीन ‘ग्रामीण’ इलाके में आती है या ‘शहरी’ इलाके में।

कई बार टैक्स न लगने के बावजूद, ITR में इस कमाई की जानकारी न देना या गलत जगह दिखाना आपको मुश्किल में डाल सकता है और इनकम टैक्स विभाग का नोटिस आ सकता है। आइए आपको बताते हैं कि कृषि भूमि की बिक्री पर टैक्स का क्या नियम है और इसे रिटर्न में कैसे दर्ज करें।

ग्रामीण कृषि भूमि: यहां नहीं लगता कोई कैपिटल गेन्स टैक्स

इनकम टैक्स एक्ट की धारा 2(14) के तहत, ‘ग्रामीण कृषि भूमि’ को कैपिटल एसेट यानी पूंजीगत संपत्ति नहीं माना जाता है।

टैक्स छूट: चूंकि यह कैपिटल एसेट नहीं है, इसलिए इसे बेचने पर होने वाले मुनाफे पर कोई ‘कैपिटल गेन्स टैक्स’ नहीं लगता है।

ITR में कहां दिखाएं: चूंकि यह कमाई पूरी तरह टैक्स-फ्री है, इसलिए इसे आईटीआर के Schedule EI यानी टैक्स-फ्री आमदनी वाले कॉलम में दिखाना चाहिए। कई लोग इसे गलती से Schedule CG में दिखा देते हैं, जिससे सिस्टम ऑटोमैटिक टैक्स कैलकुलेट कर लेता है और बेवजह परेशानी खड़ी होती है।

शहरी कृषि भूमि: देना होगा टैक्स, लेकिन यहां मिलेगी राहत

अगर आपकी कृषि भूमि ‘शहरी’ दायरे में आती है, तो इसकी बिक्री से होने वाला मुनाफा पूरी तरह टैक्स के दायरे में आएगा। हालांकि, टैक्सपेयर्स को राहत देने के लिए इनकम टैक्स एक्ट की धारा 54B बनाई गई है। इसके तहत अगर आप जमीन बेचने से मिले पैसों से कोई दूसरी कृषि भूमि खरीद लेते हैं, तो आप टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं।

कैसे तय होता है कि जमीन ‘ग्रामीण’ है या ‘शहरी’?

कोई भी खेती की जमीन सिर्फ इसलिए ग्रामीण नहीं हो जाती क्योंकि वहां खेती हो रही है। टैक्स नियमों के अनुसार, नजदीकी नगर पालिका की आबादी और वहां से हवाई दूरी के आधार पर इसका फैसला होता है:

स्थानीय निकाय की आबादीनगर पालिका सीमा से जरूरी  न्यूनतम दूरी जमीन का वर्गीकरण
10,000 से 1 लाख के बीच2 किलोमीटर से ज्यादा दूर होना जरूरीग्रामीण (Tax-Free)
1 लाख से 10 लाख के बीच6 किलोमीटर से ज्यादा दूर होना जरूरीग्रामीण (Tax-Free)
10 लाख से अधिक 8 किलोमीटर से ज्यादा दूर होना जरूरीग्रामीण (Tax-Free)

अगर जमीन इन तय सीमाओं के भीतर आती है, तो उसे ‘शहरी कृषि भूमि’ माना जाएगा और उस पर टैक्स लगेगा।

इनकम टैक्स नोटिस से बचना है, तो पास रखें ये 4 दस्तावेज

टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर भविष्य में इनकम टैक्स विभाग आपसे इस टैक्स छूट को लेकर स्पष्टीकरण मांगता है, तो आपके पास ये दस्तावेज होने चाहिए:

तहसीलदार का सर्टिफिकेट: स्थानीय राजस्व प्राधिकारी से मिला एक आधिकारिक प्रमाण पत्र, जो नजदीकी नगर पालिका से जमीन की सटीक हवाई दूरी और वहां की आबादी की पुष्टि करता हो।

राज्य के राजस्व रिकॉर्ड: जमीन के आधिकारिक दस्तावेज जैसे 7/12 एक्सट्रैक्ट, RTC, या जमाबंदी, जो यह साबित करें कि जमीन आधिकारिक तौर पर कृषि भूमि ही है।

खेती करने का सबूत: बीज, खाद के बिल, सिंचाई के रिकॉर्ड या मंडी की रसीदें, जिससे यह साबित हो सके कि जमीन पर वास्तव में खेती की जा रही थी।

बैंक ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड: रजिस्टर्ड सेल डीड और बैंक स्टेटमेंट, जो यह साबित करें कि पूरा लेनदेन वैध तरीके से हुआ है और कोई अवैध नकद लेनदेन नहीं हुआ है।

अक्सर होने वाली गलतियां जो लाती हैं टैक्स नोटिस

पूरी तरह छिपा लेना: कई लोग सोचते हैं कि टैक्स नहीं लगना है तो आईटीआर में क्यों बताएं? यह सबसे बड़ी गलती है। सब-रजिस्ट्रार ऑफिस जमीन की रजिस्ट्री की जानकारी टैक्स विभाग को देता है, जो आपके एआईएस (AIS) में दिखती है। अगर आप इसे ITR में नहीं दिखाएंगे, तो डेटा मिसमैच का नोटिस आ सकता है।

खेती न होने पर भी छूट का दावा: अगर कोई जमीन कृषि भूमि के रूप में दर्ज है लेकिन सालों से वहां कोई खेती नहीं हुई है, तो विभाग आपकी छूट को खारिज कर सकता है। इसलिए कृषि आय या ऑपरेशन्स का सबूत रखना बेहद जरूरी है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

India drafts cybersecurity rules for connected vehicles

Mercedes Drive Pilot

The Ministry of Road Transport and Highways (MoRTH) has published draft rules that would, for the first time, make cybersecurity and software-update management mandatory for certain categories of motor vehicles in India. The proposed regulations introduce two new provisions under the Central Motor Vehicles Rules, 1989, and are open for public comments for 30 days before being finalized.

  1. New rules introduce mandatory cybersecurity and software-update standards
  2. New standards to remain in force until BIS issues its own norms
  3. India aligns with vehicle regulations followed in the EU, Japan and South Korea

New cybersecurity and software-update rules proposed

The draft notification proposes adding Rules 125-T and 125-U to the Central Motor Vehicles Rules, 1989. Rule 125-T covers vehicle cybersecurity and requires eligible vehicles to comply with AIS-189, India’s cybersecurity standard, while Rule 125-U mandates compliance with AIS-190 for software updates. Both standards will remain in force until the Bureau of Indian Standards (BIS) issues its own specifications, at which point those will take over.

The cybersecurity rules will apply to passenger vehicles, commercial vehicles and tractors equipped with at least one electronic control unit (ECU), as well as quadricycles with Level 3 or higher automated driving capability. The software-update requirements will cover a wider range of vehicles, including passenger vehicles, commercial vehicles, trailers and semi-trailers.

Rollout to be phased until 2029

Rather than applying the rules to all vehicles at once, MoRTH has proposed a phased rollout based on risk exposure. Vehicles with Level 3 or higher automated driving systems will be the first to comply, with deadlines beginning in October 2026 for new models and April 2027 for existing ones. Vehicles capable of receiving over-the-air (OTA) software updates will follow between April and October 2028, while all other vehicles with software-update capability will come under the rules from October 2029.

India moves closer to global regulations

According to the draft notification, the proposed rules align India with the United Nations regulatory framework already adopted in markets such as the European Union, Japan and South Korea, where cybersecurity and software-update management are mandatory requirements for vehicle type approval.

3 साल बाद कोई T-20I सीरीज हारा भारत, कोच और कप्तान के नाम शर्मनाक दर्ज हुए रिकॉर्ड्स

भारतीय टीम करीब 3 साल यानि कि 36 महीने या फिर 1050 दिन बाद कोई टी-20 सीरीज हारा है। इस दौरान भारत ने दो बार टी-20 विश्वकप पर कब्जा जमाया। यह रिकॉर्ड इतना शानदार इसलिए रहा क्योंकि सूर्यकुमार यादव ने ज्यादातर मौकों पर भारत की  कप्तानी की थी।

अंतिम बार भारत कोई टी-20 सीरीज हारा था तो भारत के कप्तान हार्दिक पांड्या थे। अगस्त 2023 में भारत वेस्टइंडीज से 2-3 से सीरीज हार बैठा था। लेकिन अब कोच गौतम गंभीर और श्रेयस अय्यर के नाम कुछ अनचाहे रिकॉर्ड्स बन गए हैं।

श्रेयस अय्यर बतौर कप्तान लगातार दो पहले टी-20 मैच हारने वाले दूसरे भारतीय कप्तान बन गए हैं। श्रेयस अय्यर और गौतम गंभीर पहली बार आयरलैंड से सीरीज हारने वाले पहले कप्तान और कोच बन गए हैं। भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने पिच को बखूबी भांपने और रणनीति पर सटीक अमल करने के लिये आयरलैंड की तारीफ की जिसने भारत पर टी20 श्रृंखला में 2 . 0 से ऐतिहासिक जीत दर्ज की।

पहले मैच में 34 रन से जीत के बाद आयरलैंड ने रविवार को दूसरा मैच एक रन से जीता।नये कप्तान अय्यर ने मैच के बाद कहा ,‘‘ अच्छी श्रृंखला नहीं रही लेकिन आयरलैंड की तारीफ करनी होगी। उन्हें पता था कि विकेट कैसा होगा और उन्होंने रणनीति पर बखूबी अमल किया।’’

भारत के सहायक कोच रयान टेन डोएशे ने स्वीकार किया कि उन्हें विश्वास नहीं हो रहा है कि टी20 में विश्व चैंपियन टीम आयरलैंड के खिलाफ दोनों मैच में हार गई और कहा कि उनके खिलाड़ी परिस्थितियों के अनुकूल ढलने में नाकाम रहे।आयरलैंड ने पहला मैच 34 रन से जीता और इसके बाद श्रेयस अय्यर की अगुवाई वाली भारतीय टीम को दूसरे मैच में एक रन से हराकर इतिहास रच दिया।

डोएशे ने मैच के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘बहुत से लोगों के साथ हमें भी विश्वास नहीं हो रहा है। हमने अभी-अभी विश्व कप जीता है लेकिन हमें ऐसी टीम ने हराया जिसने ‘बेसिक्स’ (बुनियादी बातों) पर पूरा ध्यान दिया।’’डोएशे ने कहा, ‘‘मुझे लगता है की परिस्थितियों ने अहम भूमिका निभाई। यह हमारी हार का मुख्य कारण रहा। हमने इसका अच्छी तरह से समाधान नहीं किया। सबसे बड़ी समस्या हवा थी, लेकिन हार के लिए कोई बहाना नहीं चलेगा। हमें अलग-अलग चुनौतियों का अच्छी तरह से सामना करने का तरीका ढूंढना होगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आयरलैंड ने बेसिक्स पर अच्छी तरह से काम किया और हम इस मामले में उनका मुकाबला नहीं कर पाए। हमें आक्रामक बल्लेबाजी करना पसंद है लेकिन इस तरह की परिस्थितियों में हमें अधिक समझदारी से काम लेना होगा।’’

मध्यप्रदेश कांग्रेस में दिग्विजय सिंह बनाम जीतू पटवारी की सियासी जंग, जमीन पर खुलकर आई गुटबाजी

भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस में एक बार फिर बड़े नेताओं के बीच की गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है। इस बार विवाद वीर भारत न्यास को लेकर है, जहां प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा लगाए गए आरोपों को पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने खुलकर गलत ठहरा दिया। पार्टी के दो सीनियर नेताओं के आमने-सामने आने का मामला अब पार्टी हाईकमान तक पहुंच गया है और अब इसका रिएक्शन भी देखने को मिलना शुरु हो गया है। कांग्रेस महासचिव और मीडिया विभाग के चेयरपर्सन जयराम रमेश ने सोमवार को पीसीसी चीफ जीत पटवारी के एक्स पर किए गए पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा कि कांग्रेस मुख्यमंत्री के इस्तीफे तक अपना संघर्ष लगातार जारी रखेगी। 

 

क्या है पूरा मामला?- प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पिछले दिनों दिल्ली में हुई प्रेस कॉफ्रेस में आरोप लगाया था  कि उज्जैन में लगभग 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन वीर भारत न्यास को मात्र एक रुपये की टोकन राशि पर दे दी गई। उन्होंने इसे बड़ा भूमि घोटाला बताया और राज्य सरकार को घेरा था।  जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए  थे।

वहीं जीत पटवारी के इन आरोपों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने उज्जैन में मीडिया से  बात करते हुए ट्रस्ट से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक किए और कहा कि जीतू पटवारी के आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। दिग्विजय सिंह ने कहा कि कि वह बिना रिसर्च के कोई बात नहीं करते और सांस्कृतिक संस्था वीर भारत न्यास को जमीन नियमानुसार ही आवंटित की गई है। उन्होंने कहा कि सामाजिक और सांस्कृतिक धरोहरों के लिए एक रुपये की टोकन राशि पर जमीन देना हमेशा से एक तय और सही प्रक्रिया रही है। वीर भारत न्यास निजी नहीं बल्कि सरकारी ट्रस्ट है। उनका कहना था कि वीर भारत न्यास एक पंजीकृत सार्वजनिक न्यास है और इसके पदेन अध्यक्ष राज्य के मुख्यमंत्री होते हैं। इतना ही नहीं दिग्विजय सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि  देश में दलालों की कमी नहीं है। दलालों का काम ही छोटे आरोप लगाना और इसके माध्यम से रुपये वसूली होता है। यह सब खेल दलालों का है। 

 

अपने बयान पर अड़े जीतू पटवारी- वहीं दिग्विजय सिंह के बयान के बाद भी पीसीसी चीफ जीतू पटवारी अपने आरोपों पर अड़े हुए है। दिग्विजय सिंह के बयान पर जीतू पटवारी ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष के नाते वह मुख्यमंत्री से आरोपों पर जवब मांग रहे है और सरकार  को सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए वहीं जीतू ने कहा कि  दिग्विजय सिंह पार्टी के वरिष्ठ नेता है और उन्होंने जो कहा वहीं यह बता पाएंगे कि उन्होंने क्यों  कहा।

 

पहले भी आमने-सामने आ चुके हैं दोनों नेता-यह पहला मौका नहीं है जब दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी के बीच मतभेद सामने आ है। जीतू पटवारी के पीसीसी चीफ बनने के बाद बैठकों की जानकारी नहीं देने पर भी दिग्विजय सिंह ने पटवारी की कार्यशैली पर सवालिया निशान उठाए थे। वहीं दिग्विजय सिंह के विधायक बेटे जयवर्धन सिंह को जब जिला कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया था तब भी राघौगढ़ में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जीतू पटवारी का पुतला फूंका था। इसके साथ ही पटवारी के नेतृत्व, संगठन की कार्यशैली पर भी दिग्विजय सिंह कई बार सार्वजनिक मंचों पर सवाल उठा चुके है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतने बड़े मुद्दें पर प्रदेश कांग्रेस के दो बड़े नेताओं के आमने-समाने आने से पार्टी एकजुटता पर सवाल खड़े होते हैं और भाजपा को कांग्रेस पर निशाना साधने का अवसर मिलता है।

Kanpur News : 35 किलो राशन का नियम बदलेगा! अंत्योदय कार्डधारकों के लिए नई व्यवस्था की तैयारी

Antyodaya Card Holders : अंत्योदय राशन कार्डधारकों के लिए राशन वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने की तैयारी चल रही है। प्रस्तावित नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब अंत्योदय कार्ड पर भी प्रति कार्ड के बजाय प्रति यूनिट के हिसाब से राशन दिया जाएगा। इससे कानपुर जिले के करीब 63 हजार अंत्योदय कार्डधारक परिवार प्रभावित होंगे। हालांकि, फिलहाल इस नई व्यवस्था को लागू करने का आदेश जारी नहीं हुआ है। लेकिन आदेश को लेकर बाजार में चर्चा जोर पर है।

चढ़ावा चोरी के आरोपियों को झटका, अयोध्या का कोई वकील नहीं करेगा पैरवी

Ayodhya Ram Mandir Donation Theft

Ayodhya Ram Mandir theft: राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की चोरी मामले में एक बड़ा और अभूतपूर्व मोड़ आया है। अयोध्या बार एसोसिएशन ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि राम मंदिर से जुड़े इस चोरी के मामले में पकड़े गए आरोपियों की पैरवी अयोध्या का कोई भी वकील नहीं करेगा। बार एसोसिएशन के इस कड़े रुख के बाद आरोपियों को कानूनी प्रतिनिधित्व मिलना मुश्किल हो गया है। आरोपियों की रिमांड अवधि आज खत्म हो रही है। 

क्या है पूरा मामला?

हाल ही में अयोध्या के नवनिर्मित राम मंदिर के 'दानपात्र' (चढ़ावे) से नकदी चोरी होने का एक मामला सामने आया था। मंदिर परिसर की सुरक्षा और पवित्रता के लिहाज से इसे बेहद गंभीर चूक माना गया। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए इस मामले में कुछ संदिग्धों को गिरफ्तार किया और उनके पास से चोरी की गई राशि भी बरामद करने का दावा किया। उल्लेखनीय है कि रविवार को आरोपियों के घरों पर भी छापे की कार्रवाई हुई है। 

बार एसोसिएशन का कड़ा फैसला

आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अयोध्या बार एसोसिएशन की एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई। बैठक में वकीलों ने इस कृत्य की घोर निंदा की और सामूहिक रूप से एक बड़ा प्रस्ताव पारित किया। एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्र ने स्पष्ट किया है कि इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय आम सभा की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया है। इसलिए, अयोध्या का कोई भी अधिवक्ता अदालत में आरोपियों की जमानत या पैरवी के लिए खड़ा नहीं होगा। वकीलों का कहना है कि यह केवल एक साधारण चोरी का मामला नहीं है, बल्कि करोड़ों सनातनियों की आस्था पर आघात है। ऐसे तत्वों को कानूनी मदद देना उनके नैतिक सिद्धांतों के खिलाफ है।

मामले की जांच कहां तक पहुंची? 

​इस गंभीर मामले की जांच उत्तर प्रदेश पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) कर रही है। अब तक की कार्रवाई इस प्रकार है। इस मामले में अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जा चुका है। जांच एजेंसियों ने कथित गबन की रकम से जुड़ी लगभग 79.85 रुपए लाख की राशि बरामद की है। पुलिस आरोपियों के घरों पर छापेमारी कर वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है। साथ ही, दान गणना केंद्र से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका की भी गहन पड़ताल जारी है। इस बीच आरोपियों की रिमांड अवधि सोमवार को खत्म हो रही है। 

आरोपियों के पास अब क्या विकल्प हैं?

स्थानीय वकीलों के इस बहिष्कार के बाद आरोपियों के सामने कानूनी संकट खड़ा हो गया है। भारतीय संविधान के अनुसार, हर आरोपी को कानूनी सहायता पाने का अधिकार है। ऐसी स्थिति में आरोपियों के पास निम्नलिखित विकल्प बचते हैं। आरोपी पक्ष को अपनी पैरवी के लिए अन्य जिलों (जैसे लखनऊ, सुल्तानपुर या बस्ती) से निजी वकील बुलाने पड़ सकते हैं। यदि कोई भी वकील केस नहीं लेता है, तो अदालत नियमानुसार आरोपियों को अपनी बात रखने के लिए 'एमीकस क्यूरी' (अदालत का मित्र) या सरकारी विधिक सेवा प्राधिकरण से वकील मुहैया करा सकती है।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

Bajaj Pulsar N125 discontinued in India

Bajaj Pulsar N125 headlight

Bajaj Auto has a history of discontinuing bikes that aren’t selling in good enough numbers and the Pulsar N125 is the latest example. Less than two years after it was launched in India, the bike has now been discontinued in India.

  1. First launched in October 2024
  2. Was based on an all-new platform, not shared with other Pulsars
  3. Slow sales in India have resulted in the bike being discontinued

The Pulsar N125 wasn’t just another Pulsar variant but it debuted an all new platform. This included a new engine and a brand new chassis that helped keep kerb weight down to just 125kg. The bike also debuted brand new styling which was unlike anything in the market.

Bajaj Pulsar N125 front right side static in field

While we appreciated the unusual styling direction, it appears that customers in India did not take too well to the Pulsar N125’s thin and stretched out look. This seems to have held especially true when you consider that rivals like the Hero Xtreme 125R and Honda CB125 Hornet are very popular because they look bigger and more sporty than they actually are.

The Pulsar N125’s relatively limited feature set probably didn’t do it any favours either and the bikes lacked things that you would find in some rivals, including a TFT display and ABS. While the bike continues to be displayed on Bajaj’s India website, we have learned that dispatches to dealers have ceased.

Bajaj Pulsar N125 display

However, this does not mark the complete end of the Pulsar N125 as the bike continues to be sold in multiple overseas markets. These include countries like Nepal, Peru, Colombia, Morocco and more. Whether the Pulsar N125 (or at least the platform underpinning) will make a return to India in the future with revised styling and more features remains unclear.