Prabhjeet Singh: कौन हैं OpenAI के India MD प्रभजीत सिंह, कंधों पर ChatGPT मेकर की ग्रोथ को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी

ChatGPT मेकर OpenAI ने प्रभजीत सिंह को भारत के लिए अपना मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया है। वह सितंबर 2026 से कंपनी के साथ जुड़ेंगे और भारत में OpenAI के सबसे सीनियर एग्जीक्यूटिव होंगे। प्रभजीत सिंह अभी तक उबर इंडिया एंड साउथ एशिया प्रेसिडेंट थे। कंपनी में एक दशक से ज्यादा समय बिताने के बाद उन्होंने उबर का साथ छोड़ दिया है। उबर में उनकी जगह कौन लेगा, इसकी घोषणा अभी नहीं हुई है।

OpenAI में वह एशिया पैसिफिक (APAC) के मैनेजिंग डायरेक्टर किरण मणि को रिपोर्ट करेंगे और देश में कंज्यूमर ग्रोथ, एंटरप्राइज अडॉप्शन, स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप, रेगुलेटरी मामलों और बिजनेस ऑपरेशन्स जैसे कामकाज संभालेंगे। OpenAI में भारत के लिए मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर सिंह के कंधों पर कंज्यूमर और एंटरप्राइज दोनों सेगमेंट में OpenAI की ग्रोथ को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। OpenAI का कहना है कि सिंह ज्यादा कंज्यूमर्स, एंटरप्राइज, शैक्षणिक संस्थानों और पब्लिक सेक्टर संगठनों को AI टेक्नोलॉजी अपनाने में मदद करने पर ध्यान देंगे।

IIT खड़गपुर और IIM-अहमदाबाद के रह चुके हैं छात्र

प्रभजीत सिंह IIT खड़गपुर और IIM-अहमदाबाद के छात्र रह चुके हैं। वह अगस्त 2015 में मैकिन्से एंड कंपनी से उबर में शामिल हुए थे। जुलाई 2020 में उन्हें भारत और साउथ एशिया के लिए कंपनी का प्रेसिडेंट नियुक्त किया गया। सिंह को कॉर्पोरेट लीडरशिप में उनकी शानदार उपलब्धियों के लिए IIM-अहमदाबाद से ‘यंग एलुमनाई अचीवर्स अवार्ड 2022’ मिला था।

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उबर में क्या देखते थे

उबर इंडिया एंड साउथ एशिया प्रेसिडेंट की भूमिका में प्रभजीत सिंह पर भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका में Uber के मोबिलिटी बिजनेस की जिम्मेदारी थी। उन्होंने इस क्षेत्र में Uber के विकास और विस्तार के अगले चरण का नेतृत्व किया।

OpenAI के लिए भारत क्यों अहम

यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब OpenAI भारत में अपना निवेश बढ़ा रही है। भारत ChatGPT के लिए सबसे बड़े और तेजी से बढ़ने वाले बाजारों में से एक बन गया है, जिसे कंज्यूमर्स, स्टार्टअप्स, एंटरप्राइज, डेवलपर्स और शैक्षणिक संस्थानों में बड़े पैमाने पर अपनाया जा रहा है। कंपनी ने नवंबर 2025 में नई दिल्ली में अपना पहला ऑफिस खोला था और देश भर में तेजी से पार्टनरशिप कर रही है।

गौतम अदाणी ने लॉन्च किया ‘वंदे भारतम’, होनहार आंत्रप्रेन्योर्स और इनोवेटर्स को आगे बढ़ने का मौका देगा यह प्लेटफॉर्म

अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने 25 जून को ‘वंदे भारतम’ की शुरुआत की। यह आंत्रप्रेन्योर्स, इनोवेटर्स और जमीनी स्तर पर बुनियादी बदलाव लाने वाले लोगों की तलाश करने वाला एक देशव्यापी प्लेटफॉर्म है। इसकी पहुंच देश के हर कोने तक होगी। अदाणी ने अपने 64वें जन्मदिन के मौके पर इस प्रोग्राम का ऐलान किया।

इस प्रोग्राम के तहत देश के 800 जिलें आएंगे

वंदे भारतम प्रोग्राम के तहत देश के 36 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के 800 से ज्यादा जिले आएंगे। कई भारतीय भाषाओं के जरिए पार्टिसिपेंट्स इस प्रोग्राम का हिस्सा बन सकते हैं। इसका मकसद देश में आंत्रप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देना है। यह देश में पहले से मौजूद स्टार्टअप हब के अलावा काम करेगा।

भारत में टैलेंट की कमी नहीं, लेकिन मौकों की कमी

वंदे भारतम की लॉन्चिंग के मौके पर अदाणी ने अपने खुद के सफर के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल उनकी इस सोच से प्रेरित है कि टैलेंट पूरे देश में मौजूद है, लेकिन उसे बढ़ने के लिए एकसमान मौके उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा, “मैंने बहुत छोटे स्तर से शुरुआत की थी। मैंने जो कुछ हासिल किया है, उसकी वजह वे मौके हैं, जो इस देश ने हमें दिया है।”

सिर्फ कुछ बड़े शहरों से निकल रहे आंत्रप्रेन्योर्स 

उन्होंने कहा कि भारत टैलेंट के मामले में समृद्ध है। लेकिन, कई योग्य लोगों को अपने आइडिया के बारे में बताने का प्लेटफॉर्म नहीं मिल पाता है। उन्होंने कहा कि इंडिया दुनिया के सबसे स्टार्टअप ईकोसिस्टम के रूप में उभरा है, लेकिन आंत्रप्रेन्योर्स की सफलता सिर्फ कुछ बड़े शहरों तक सीमित है।

देश के हर व्यक्ति के लिए खुला है यह प्रोग्राम 

अदाणी ने कहा कि वंदे भारतम के जरिए अदाणी ग्रुप को उम्मीद है कि वह ऐसे होनहार इनोवेटर्स की पहचान कर सकेगा, जिनके आइडिया का इस्तेमाल सही सपोर्ट ईकोसिस्टम के साथ बड़े उद्यम बनाने के लिए किया जा सकेगा। यह प्रोग्राम हर व्यक्ति के लिए खुला है। किसी भी बैकग्राउंड का व्यक्ति इसका हिस्सा बन सकता है। उम्र, शिक्षा, प्रोफेशन या बिजनेस से जुड़ी किसी तरह की शर्त नहीं रखी गई है।

अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोग भेज सकते हैं आवेदन

आवेदक अपने शुरुआती आइडिया या मौजूदा बिजनेसेज के प्रोटोटाइप सब्मिट कर सकते हैं। आवेदन करने के लिए रजिस्टर्ड स्टार्टअप जरूरी नहीं है। कंपनी ने बताया कि अलग-अलग क्षेत्रों से अप्लिकेंशन स्वीकार किए जाएंगे। इनमें टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग, एग्रीकल्चर, सस्टेनेबिलिटी, ट्रेडिशनल क्राफ्ट्स और कम्युनिटी आधारित इनोवेशंस शामिल हैं।

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प्रोग्राम के अंतिम दौर में 75 लोगों का चयन होगा

स्टेट और रीजनल राउंड्स के बाद इनटेंसिव मेंटॉरशिप प्रोग्राम के लिए 75 लोगों का अंतिम रूप से चयन किया जाएगा। अहमदाबाद में होने वाले इस मेंटॉरशिप प्रोग्राम के तहत चुने गए लोगों को इनवेस्टर्स, बिजनेस लीडर्स और इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स के साथ बातचीत करने का मौका मिलेगा। कार्यक्रम के आखिर में आयोजित फाइनल मौके पर चुने गए लोगों को नकद पुरस्कार और कैटेगरी से संबंधित सम्मान प्रदान किया जाएगा। इस प्रतियोगिता का समापन स्वतंत्रता दिवस के करीब होगा।

14 साल की उम्र में बुर्ज खलीफा के 141वें फ्लोर पर ऑफिस! AI स्टार्टअप Mengo Engine बनाकर इस लड़के ने कर दिया कमाल

भारत के एक 14 साल के एंटरप्रेन्योर ने बहुत कम उम्र में AI स्टार्टअप शुरू करके सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है। जहां उनकी उम्र के ज़्यादातर टीनएजर्स स्कूल, शौक या मनोरंजन पर ध्यान देते हैं, वहीं उन्होंने बिजनेस और टेक्नोलॉजी की दुनिया में कदम रख दिया है।

जैनम जैन ने ‘मेंगो इंजन’ (Mengo Engine) नाम की एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी शुरू की और दुबई के बुर्ज खलीफा में अपना ऑफिस भी खोला, जो दुनिया की सबसे ऊंची इमारतों में से एक है। उनका स्टार्टअप ऐसे AI टूल्स पर काम करता है जो बिज़नेस को मार्केटिंग बेहतर करने, ज़्यादा ग्राहकों तक पहुँचने और आगे बढ़ने में मदद करते हैं।

जैनम का कहना है कि बिज़नेस में उनकी दिलचस्पी बहुत कम उम्र में ही शुरू हो गई थी। उन्होंने बताया कि जब वे सिर्फ़ छह साल के थे, तभी उन्हें असली बिज़नेस मीटिंग्स में शामिल होने का मौका मिला, जिससे उन्हें यह समझने में मदद मिली कि कंपनियाँ कैसे काम करती हैं।

‘कर्ली टेल्स मिडिल ईस्ट’ के साथ एक इंटरव्यू में, उन्होंने अपने सफ़र के बारे में बात की और बताया कि कैसे उन्होंने असल ज़िंदगी के अनुभवों से धीरे-धीरे एंटरप्रेन्योरशिप की समझ बनाई। उन्होंने कहा, “मैं सिर्फ़ छह साल का था जब मेरे पिता मुझे अपनी पहली बिज़नेस मीटिंग में ले गए थे। हाल ही में, मैंने 13 साल की उम्र में 105 दिनों में 10वीं की परीक्षा पास करने की चुनौती ली।”

उन्होंने कहा कि क्लासरूम के बाहर सीखने से उनकी सोच को आकार देने में बड़ी भूमिका निभाई और उन्हें अपना कुछ बनाने में ज़्यादा दिलचस्पी लेने में मदद की। बाद में जैनम ने ‘मेंगो इंजन’ (Mengo Engine) की शुरुआत की, जिसका मकसद व्यवसायों को आसान और उपयोगी तरीकों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करने में मदद करना था। उनकी कंपनी ऐसे टूल्स पर ध्यान देती है जो AI-बेस्ड सॉल्यूशंस का इस्तेमाल करके मार्केटिंग रणनीतियों, कस्टमर तक पहुंच और बिज़नेस की ग्रोथ को बेहतर बनाते हैं।

समय के साथ, उन्होंने सिर्फ़ एक प्रोजेक्ट से आगे बढ़कर अपनी सीख को बढ़ाने पर भी काम किया। अपने स्टार्टअप को विकसित करते हुए उन्होंने टेक्नोलॉजी और बिज़नेस के अलग-अलग क्षेत्रों को भी समझा।

स्टार्टअप चलाने के साथ-साथ, जैनम ने कई उपलब्धियां भी हासिल की हैं। उनके नाम दो पेटेंट हैं और कुछ और पर काम चल रहा है। उन्होंने TEDx इवेंट्स में भी बात की है, एक किताब लिखी है और एक YouTube चैनल भी चलाते हैं जिसके 145,000 से ज़्यादा सब्सक्राइबर हैं।

उन्होंने कम उम्र से ही कई सेल्फ-चैलेंज (खुद को चुनौती देने वाले काम) भी पूरे किए हैं। 10 साल की उम्र से ही वे 50-दिन के लक्ष्य पूरे करते आ रहे हैं, जैसे किताबें पढ़ना, नेटवर्किंग इवेंट्स में शामिल होना और लोगों से मिलने और उनसे सीखने के लिए पूरे भारत की यात्रा करना।

न IIT, न MIT… फिर भी 19 साल में करोड़ों की कमाई! जानिए आयुष सिंह की पूरी कहानी

आयुष सिंह मात्र 19 वर्ष की उम्र में ही चर्चा में आ गए हैं, क्योंकि बताया जा रहा है कि वे हर महीने करीब ₹1 करोड़ की आय अर्जित कर रहे हैं। उनकी यात्रा बेहद साधारण परिस्थितियों से शुरू हुई, जब 13 साल की उम्र में COVID-19 महामारी के दौरान उनके परिवार को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। सीमित संसाधनों और चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और खुद से मशीन लर्निंग जैसी उन्नत तकनीक सीखनी शुरू की। धीरे-धीरे उनकी रुचि और मेहनत ने उन्हें टेक्नोलॉजी की दुनिया में आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया।

शुरुआती दौर में ही उन्होंने स्टार्टअप्स के साथ काम करना शुरू कर दिया, जिससे उनका अनुभव बढ़ता गया। कम उम्र में ही उनकी पहचान एक उभरते हुए टैलेंट के रूप में बनने लगी, और उनकी कहानी आज युवाओं के बीच प्रेरणा और चर्चा दोनों का विषय बनी हुई है।

टीनएज में ही स्टार्टअप्स की दुनिया में एंट्री

कुछ ही महीनों की मेहनत के बाद आयुष स्टार्टअप्स के साथ काम करने लगे। 14 साल की उम्र में ही उनके काम को MIT से भी सराहना मिली, जो इतनी कम उम्र में बेहद दुर्लभ माना जाता है। इसके बाद उन्होंने NLP सिस्टम पर काम किया और अमेरिका की एक कंपनी में योगदान दिया।

AI इंजीनियर से उद्यमी बनने तक का सफर

आयुष ने धीरे-धीरे खुद को डेटा साइंटिस्ट और MLOps इंजीनियर के रूप में स्थापित किया। इसके बाद उन्होंने Antern नाम की कंपनी की शुरुआत की और Second Brain Labs की सह-स्थापना की, जहां AI इनोवेशन पर काम किया जाता है।

सीखने के साथ ‘सेलिंग स्किल’ ने बदली किस्मत

एक X पोस्ट के अनुसार, असली टर्निंग पॉइंट तब आया जब उन्हें अपनी स्किल्स को सही तरीके से पेश करना और बेचना सीखने को मिला। इसी रणनीति ने उनकी ग्रोथ को तेज कर दिया और उन्होंने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए शिक्षा देना शुरू किया।

ऑनलाइन टीचिंग से बना बड़ा नेटवर्क

आयुष ने अपने सरल तरीके से AI जैसे कठिन विषयों को इंजीनियरों के लिए आसान बना दिया। इससे हजारों छात्रों ने उनसे सीखकर नौकरी पाई और उनका नेटवर्क तेजी से बढ़ता गया।

आज ₹1 करोड़ महीना और लगातार बढ़ती चर्चा

आज आयुष सिंह Topmate जैसे प्लेटफॉर्म से करीब ₹1 करोड़ महीना कमाते हैं। वे युवाओं को AI सिखाकर ग्लोबल लेवल पर प्रभाव बना रहे हैं। उनकी कहानी को लेकर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।

सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं

कुछ लोगों ने उनकी मेहनत और सालों की सीख को सराहा, तो कुछ ने कोर्स बेचने की रणनीति पर सवाल उठाए। वहीं कई यूजर्स ने अपनी तुलना करते हुए हैरानी और मज़ाकिया प्रतिक्रियाएं भी दीं, जिससे यह कहानी और चर्चा में आ गई।

Google की नौकरी छोड़ने वाली 23 साल की इंजीनियर का बड़ा खुलासा, जानिए क्यों लिया ये फैसला

नौकरी की सुरक्षा और अच्छे वेतन को छोड़कर अपने सपनों के पीछे भागना हर किसी के बस की बात नहीं होती। खासकर तब, जब नौकरी दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक Google में हो। लेकिन 23 वर्षीय आशना दोशी ने वही रास्ता चुना, जिसे ज्यादातर लोग जोखिम भरा मानते हैं। उनके लिए सबसे बड़ी चिंता नौकरी छोड़ना नहीं थी, बल्कि ये थी कि अगर उन्होंने अपने विचारों को मौका ही नहीं दिया, तो शायद जिंदगी भर इसका अफसोस रहेगा। यही सोच उन्हें एक नए सफर की ओर ले गई। आज आशना अपनी पसंद के काम पर ध्यान दे रही हैं और कुछ नया बनाने की कोशिश कर रही हैं।

उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सुरक्षित करियर और अपने सपनों के बीच फैसला लेने की दुविधा में रहते हैं। कभी-कभी बड़ा कदम उठाने के लिए हिम्मत की जरूरत होती है, और आशना ने वही हिम्मत दिखाई।

ग्रेजुएशन से पहले मिला था Google का ऑफर

आशना को Georgia Tech में पढ़ाई के दौरान ही फरवरी 2024 में Google से फुल-टाइम नौकरी का ऑफर मिल गया था। हालांकि यह नौकरी कैलिफोर्निया में थी, जबकि वो न्यूयॉर्क में रहकर करियर शुरू करना चाहती थीं।

उस समय नए ग्रेजुएट्स के लिए नौकरी पाना आसान नहीं था, फिर भी उन्होंने ये ऑफर ठुकरा दिया। कुछ महीनों बाद उन्हें Google में ही न्यूयॉर्क स्थित एक दूसरी भूमिका मिल गई, जो उनकी योजना के मुताबिक थी।

Google में सब अच्छा था, लेकिन मन कहीं और था

Google में काम करते हुए आशना ने बेहतरीन तकनीकी अनुभव हासिल किया और प्रतिभाशाली लोगों के साथ काम किया। लेकिन धीरे-धीरे उन्हें महसूस होने लगा कि उनकी रुचि सिर्फ कोडिंग तक सीमित नहीं रही।

उन्हें लोगों की कहानियां सुनना, नए विचारों पर चर्चा करना और कुछ अपना बनाने का सपना ज्यादा आकर्षित करने लगा।

साइड प्रोजेक्ट से शुरू हुआ नया सफर

साल 2025 की शुरुआत में उन्होंने एक अन्य टेक इंजीनियर के साथ मिलकर “0 to 1” नाम का पॉडकास्ट शुरू किया। इस शो में उद्यमियों, इंजीनियरों और बिजनेस लीडर्स की सफलता और संघर्ष की कहानियां साझा की जाती थीं। शुरुआत छोटे स्तर पर हुई, लेकिन धीरे-धीरे पॉडकास्ट लोगों को पसंद आने लगा। एक साल के अंदर इसके यूट्यूब पर 1 लाख से ज्यादा व्यूज हो गए। इसी दौरान उनकी मुलाकात Amazon और Microsoft जैसी बड़ी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों से भी हुई।

AI की दुनिया में दिखा बड़ा मौका

पॉडकास्ट की सफलता के साथ आशना के मन में खुद का बिजनेस शुरू करने का विचार और मजबूत होता गया। उनका मानना था कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) नए उद्यमियों के लिए कई बड़े अवसर लेकर आया है। उन्हें लगा कि यही सही समय है जब जोखिम उठाकर कुछ नया बनाया जाए।

Google को कहा अलविदा, स्टार्टअप पर लगाया दांव

मई में आशना ने Google की नौकरी छोड़ दी और अपने पॉडकास्ट पार्टनर के साथ मिलकर “Bounty” नाम का AI स्टार्टअप शुरू किया। यह एक AI आधारित मार्केटप्लेस है, जहां कंपनियां भर्ती, आउटरीच और लीड जनरेशन जैसे काम पोस्ट कर सकती हैं और केवल परिणाम मिलने पर भुगतान करती हैं।

कमाई घटी, लेकिन आत्मविश्वास बढ़ा

आशना मानती हैं कि नौकरी छोड़ने के बाद आर्थिक अनिश्चितता बढ़ गई है। फिलहाल उनका स्टार्टअप कमाई नहीं कर रहा है और पॉडकास्ट से भी कोई आय नहीं होती। इसके बावजूद उन्हें अपने फैसले पर कोई पछतावा नहीं है। उनका कहना है कि सुरक्षित नौकरी में रहकर हमेशा “क्या होता अगर…” सोचते रहना उनसे ज्यादा मुश्किल होता।

सबसे बड़ा डर नौकरी छोड़ना नहीं, रुक जाना था

आशना का मानना है कि जिंदगी में कुछ नया करने की कोशिश न करना सबसे बड़ा जोखिम है। उनके अनुसार, Google छोड़ना डरावना नहीं था, बल्कि वहीं रहकर हमेशा यह सोचते रहना ज्यादा डरावना था कि वह और क्या कर सकती थीं। यही सोच उन्हें आज अपने सपनों के पीछे पूरी ताकत से आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

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Stocks to Watch: 23 जून को इन 10 स्टॉक्स पर रखें नजर, मिल सकता है तगड़ी कमाई का मौका

Stocks to Watch: 23 जून के कारोबार में कई शेयर खबरों के दम पर चर्चा में रह सकते हैं। कुछ कंपनियों ने बड़े ऑर्डर हासिल किए हैं, जबकि कुछ ने फंड जुटाने, हिस्सेदारी बिक्री और रणनीतिक साझेदारी से जुड़े अहम ऐलान किए हैं। ऐसे में इन 10 शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है।

TCS

देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी TCS ने बताया है कि उसके बोर्ड की बैठक 9 जुलाई 2026 को होगी। इस बैठक में 30 जून 2026 को खत्म तिमाही के नतीजों पर चर्चा होगी और उन्हें मंजूरी दी जाएगी। टाटा ग्रुप की यह कंपनी निवेशकों के लिए डिविडेंड का ऐलान भी कर सकती है।

Hindustan Zinc

वेदांता ग्रुप की कंपनी Hindustan Zinc ने Advantek Associates LLP और Aero Eagle Automobiles Pvt Ltd के साथ एक समझौता किया है। इस साझेदारी का मकसद कंपनी के अलग-अलग ऑपरेशंस में ग्रीन हाइड्रोजन और दूसरी स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाशना है।

JSW Infrastructure

सज्जन जिंदल की JSW Infrastructure ने 22 जून से अपना QIP खोलने को मंजूरी दे दी है। कंपनी ने ₹290.35 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया है। इश्यू में अधिकतम 230 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे। वहीं, Sajjan Jindal Family Trust अधिकतम 33.25 करोड़ शेयरों की OFS लाएगी।

Craftsman Automation

Craftsman Automation के प्रमोटर शेयरहोल्डर श्रीनिवासन रवि ने ब्लॉक डील के जरिए कंपनी में 2.01% तक हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया शुरू की है। टर्म शीट के मुताबिक इस सौदे का आकार करीब ₹484 करोड़ है। शेयरों के लिए ₹925 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया गया है।

Info Edge

Naukri.com की पैरेंट कंपनी Info Edge ने कहा है कि उसके AI स्टार्टअप पोर्टफोलियो की वैल्यू बढ़कर ₹1,268 करोड़ पहुंच गई है। कंपनी ने अब तक 28 AI स्टार्टअप्स में कुल ₹614 करोड़ का निवेश किया है। इस निवेश पर उसे 2.1 गुना रिटर्न मिला है, जबकि अनुमानित ग्रॉस IRR करीब 31% रही है।

Bharat Electronics

सरकारी डिफेंस कंपनी Bharat Electronics (BEL) को 25 मई 2026 के बाद ₹1,081 करोड़ के नए ऑर्डर मिले हैं। कंपनी के मुताबिक इन ऑर्डर्स में कम्युनिकेशन इक्विपमेंट, रडार, CBRN सुरक्षा सिस्टम, सीकर्स, एवियोनिक्स, अपग्रेडेशन, स्पेयर्स और सर्विसेज शामिल हैं। नए ऑर्डर्स से कंपनी की ऑर्डर बुक और मजबूत होगी और आने वाले समय में रेवेन्यू को सहारा मिल सकता है।

GHV Infra Projects

GHV Infra Projects को GHV (India) Private Ltd से करीब ₹213 करोड़ का वर्क ऑर्डर मिला है। इस ऑर्डर में GST भी शामिल है। कंपनी को सिविल, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और सिग्नल एवं टेलीकॉम से जुड़े कई काम करने होंगे। यह ऑर्डर कंपनी की ऑर्डर बुक को और मजबूत करेगा।

APAR Industries

APAR Industries ने बताया कि उसकी सहायक कंपनी APAR Industries Middle East Ltd, KSA ने Saudi Aramco Base Oil Company के साथ एक समझौता किया है। यह करार कंपनी के अंतरराष्ट्रीय कारोबार को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। हालांकि दोनों कंपनियों ने समझौते की वित्तीय शर्तों का खुलासा नहीं किया है।

Birla Corporation

Birla Corporation ने कहा है कि मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में स्थित उसकी बिक्रम कोयला खदान में 22 जून 2026 से व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो गया है। कंपनी के लिए यह महत्वपूर्ण उपलब्धि है क्योंकि अब उसे अपने सीमेंट कारोबार के लिए कोयले की उपलब्धता बढ़ाने और लागत को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

MSP Steel & Power

MSP Steel & Power के प्रमोटर ग्रुप ने 16 से 18 जून 2026 के बीच खुले बाजार से कुल 64.50 लाख शेयर खरीदे हैं। कंपनी के मुताबिक, प्रमोटर ग्रुप की पांच संस्थाओं ने यह खरीदारी की है। आमतौर पर प्रमोटरों की बड़ी खरीदारी को कंपनी के भविष्य और कारोबार को लेकर उनके भरोसे के संकेत के रूप में देखा जाता है।

Railway Stocks: बंगाल में ₹1 लाख करोड़ से बनेगा रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर, इन 4 स्टॉक्स पर रखें नजर

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जुकरबर्क की Meta का CRED में ₹8550 करोड़ निवेश, फाउंडर कुणाल शाह को बनाएगी WhatsApp का नया ग्लोबल CEO

Meta Investment In CRED: फेसबुक की पैरेंट कंपनी Meta ने भारतीय फिनटेक स्टार्टअप CRED में करीब 90 करोड़ डॉलर (लगभग ₹8,550 करोड़) निवेश करने का ऐलान किया है। दोनों कंपनियों ने 22 जून को इस डील की घोषणा की। इससे पहले Moneycontrol ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि Meta, CRED में 4 अरब डॉलर के वैल्यूएशन पर निवेश को लेकर बातचीत कर रही है।

WhatsApp की कमान संभालेंगे कुणाल शाह

इस निवेश के साथ CRED के फाउंडर कुणाल शाह Meta में शामिल होंगे और वह WhatsApp के नए ग्लोबल CEO बनेंगे। कुणाल मौजूदा विल कैथकार्ट की जगह लेंगे, जिन्होंने सात साल तक WhatsApp को लीड करने के बाद पद छोड़ने का फैसला किया है।

Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि कुणाल शाह ने CRED को भारत की सबसे महत्वपूर्ण टेक कंपनियों में से एक बनाया है। उनके पास बिजनेस बनाने का अनुभव और वैश्विक नजरिया है। यह दुनिया के सबसे बड़े मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को आगे बढ़ाने में मदद करेगा।

जुकरबर्ग ने विल कैथकार्ट की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि कैथकार्ट के नेतृत्व में WhatsApp 3 अरब से ज्यादा यूजर्स तक पहुंचा और उन्होंने यूजर्स की प्राइवेसी को प्राथमिकता दी। अब वह Meta में नई भूमिका संभालेंगे और नए प्रोडक्ट्स पर काम करेंगे।

CRED की कमान किसके हाथ में होगी?

कुणाल शाह के Meta में जाने के बाद CRED के ऑपरेशनल कामकाज की जिम्मेदारी मितेन संपत संभालेंगे। वह फिलहाल कंपनी में दूसरे सबसे सीनियर एग्जीक्यूटिव हैं।

मितेन संपत ने कहा कि 1.7 करोड़ से ज्यादा भरोसेमंद भारतीय CRED का इस्तेमाल करते हैं। उनके मुताबिक कंपनी के पास मजबूत टीम, स्पष्ट विजन और लंबी अवधि की रणनीति है। उन्होंने कहा कि CRED के अगले चरण का लक्ष्य कंपनी को पब्लिक मार्केट तक ले जाना है।

कुणाल शाह ने क्या कहा?

कुणाल शाह ने कहा कि उन्होंने 2018 में CRED की शुरुआत इस भरोसे के साथ की थी कि अच्छी क्रेडिट स्कोर को सम्मान मिलना चाहिए। आठ साल से भी कम समय में कंपनी लाखों सदस्यों, लगभग ₹3,200 करोड़ रेवेन्यू, मुनाफे में कारोबार, कई लाइसेंस और मजबूत ब्रांड के साथ एक नई कैटेगरी बनाने में सफल रही है।

उन्होंने कहा कि अतिरिक्त पूंजी और प्रतिभाशाली टीम के साथ CRED आने वाले दशकों तक एक मजबूत संस्था बन सकती है। उन्होंने भरोसा जताया कि टीम भविष्य में भी नए मानक स्थापित करेगी।

भारतीय स्टार्टअप जगत का बड़ा नाम हैं कुणाल शाह

यह दूसरा स्टार्टअप है जिससे कुणाल शाह बाहर निकल रहे हैं। इससे पहले उन्होंने डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म Freecharge की स्थापना की थी, जिसे बाद में बेच दिया गया था।

वर्षों के दौरान वह भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के सबसे चर्चित चेहरों में शामिल हो गए। CRED बनाने के अलावा उन्होंने सैकड़ों शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स में निवेश किया है और देश के सबसे सक्रिय एंजेल इनवेस्टर्स में उनकी गिनती होती है।

1 अरब डॉलर जुटा चुकी है CRED

2018 में शुरू हुई CRED अब तक करीब 1 अरब डॉलर की फंडिंग जुटा चुकी है। कंपनी में Tiger Global, Ribbit Capital, Peak XV Partners, Greenoaks Capital और DST Global जैसे बड़े निवेशकों ने निवेश किया है।

Peak XV Partners के मैनेजिंग डायरेक्टर शैलेंद्र सिंह ने कहा कि CRED का सफर काफी शानदार रहा है। उनके मुताबिक कंपनी ने एक नई कैटेगरी बनाई, लाखों सक्रिय यूजर्स जोड़े और मजबूत आर्थिक मॉडल तैयार किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में CRED और मजबूत होकर उभरेगी।

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