Nag Panchami 2026: नाग पंचमी के त्योहार पर बन रहा ये खास संयोग, भूल कर भी न करें ये गलतियां

Nag Panchami 2026: हर साल की तरह इस बार भी नाग पंचमी सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को होगी। 17 अगस्त 2026 दिन सोमवार को नाग पंचमी मनाई जाएगी। यह और भी खास हो गई है, क्योंकि इसी दिन सावन का तीसरा सोमवार पड़ रहा है। ऐसे शुभ दिन पर नाग पंचमी और सावन सोमवार का यह संयोग पर्व के महत्व और ज्यादा बढ़ा देता है। माना जाता है कि इस विशेष संयोग में शुभ मुहूर्त पर नाग देवता की विधि-विधान से पूजा करने से भक्तों को 4 गुना ज्यादा फल मिलता है। पूजा मन लगाकर विधि विधान से करनी चाहिए।

पूजा विधि

इस साल नाग पंचमी 17 अगस्त को मनाई जाने वाली है। ज्योतिष के मुताबिक नाग पंचमी श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को होती है। इस दिन नाग देवताओं की पूजा होती है, जिससे सर्प दंश (काटने) का भय न हो, जीवन में सुख शांति समृद्धि बनी रहे, और प्रकृति तथा जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान करने का भी ये एक जरिया है। इस दिन यदि आप सावन सोमवार का व्रत कर रहे हैं, तो आपको नागव्रत का संकल्प नहीं कर सकते हैं। एक बार में एक व्रत किया जा सकता है। इसके बाद शिव जी की विधि विधान से पूजा करनी चाहिए। फिर नाग देवता की पूजा करनी चाहिए। जल अर्पित कर तिलक, चावल, फूल, भोग चढ़ाएं। वस्त्र अर्पित करें। वहीं दूध और खीर चढ़ाना न भूलें।

ये काम करने से बचें

1-सांपों का बिल जमीन के अंदर होता है। इसलिए नाग पंचमी के दिन गलती से भी जमीन, खेत वगैरह की खुदाई न करें। ऐसा करने से सांपों को चोट पहुंच सकती है, जो अशुभ होगा।

2-नाग पंचमी वाले दिन लोहे के बर्तनों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।

3-इस दिन नुकीलीं चीजें जैसे चाकू, सुई आदि का यूज करने से बचें।

4-नाग पंचमी वाले दिन भूलकर भी किसी जीव जंतु खासकर सापों को नुकसान न पहुंचाए।

5-इस दिन मदिरा और तामसिक भोजन करने से भी बचना चाहिए।

कथा

सबसे फेमस कथा के मुताबिक एक खेत जोतता किसान था। हल चलाते समय गलती से उसने नागिन के बच्चों को मार दिया ता। दुखी और क्रोधित नागिन ने किसान के पूरे परिवार को डंस लिया था। बाद में किसान की बेटी ने श्रद्धा से नाग देवता की पूजा की और उनसे क्षमा याचना की थी।

उसकी भक्ति को देख नागिन ने प्रसन्न होकर पूरे परिवार को जीवनदान दे दिया था। तभी से नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा करने की परंपरा की शुरुआत हो गई। मान्यता है कि इस दिन नाग देवता की पूजा करने से परिवार सुरक्षित रहता है और जीवन में आने वाले संकट कटते हैं।

क्या राहु-केतु परेशानी पैदा कर रहे हैं? नाग पंचमी पर अपनी राशि के अनुसार करें ये उपाय

हिंदू परंपरा में नाग पंचमी का खास महत्व है। इस दिन भक्त नाग देवता की पूजा करते हैं और भगवान शिव का आशीर्वाद मांगते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह दिन उन लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है, जो राहु और केतु के बुरे प्रभावों को कम करना चाहते हैं।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जन्म कुंडली में राहु या केतु की खराब स्थिति जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उलझन, अचानक आने वाली रुकावटों, अस्थिरता और परेशानियों का कारण बन सकती है। वैदिक ज्योतिष में राहु और केतु का संबंध ‘काल सर्प दोष’ से भी माना जाता है।

17 अगस्त 2026 को नाग पंचमी मनाई जाएगी। इस दिन श्रद्धालु अपनी राशि के अनुसार कुछ खास पूजा-पाठ और उपाय कर सकते हैं। यहां बताया गया है कि पारंपरिक रूप से हर राशि के लोगों को क्या करना चाहिए।

मेष– मेष राशि के लोग पानी में लाल फूल और लाल चंदन मिलाकर शिवलिंग का जलाभिषेक कर सकते हैं। माना जाता है कि इस उपाय से भगवान शिव का आशीर्वाद मिलता है और राहु-केतु के बुरे प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है।

वृषभ– वृषभ राशि के लोग भगवान शिव को सफेद फूल चढ़ा सकते हैं। वे पानी में थोड़ा कच्चा दूध मिलाकर उससे शिवलिंग का जलाभिषेक भी कर सकते हैं।

मिथुन– मिथुन राशि के लोग भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं और फिर भगवान गणेश को दूर्वा घास चढ़ा सकते हैं। परंपरा के अनुसार हरे कपड़े, हरे फल या मूंग की दाल दान करने की भी सलाह दी जाती है। भक्त “ॐ रां राहवे नमः” मंत्र का जाप भी कर सकते हैं।

कर्क– कर्क राशि के लोग नाग पंचमी पर रुद्राभिषेक कर सकते हैं या करवा सकते हैं। परंपरा के अनुसार, वे पूजा के हिस्से के तौर पर चांदी के सांपों के प्रतीकात्मक जोड़े की पूजा भी कर सकते हैं। बाद में विसर्जन या निपटान के लिए, प्राकृतिक जल स्रोतों में धातु की चीजें डालने के बजाय स्थानीय मंदिर के निर्देशों और पर्यावरण के अनुकूल तरीकों का पालन करना बेहतर है।

सिंह– सिंह राशि के लोग भगवान शिव की पूजा करने से पहले सूर्य देव को जल चढ़ाकर दिन की शुरुआत कर सकते हैं। एक और पारंपरिक उपाय है तांबे के बर्तन में गेहूं भरकर किसी जरूरतमंद को दान करना।

कन्या– कन्या राशि वालों को सलाह दी जाती है कि वे जलाभिषेक करें और जानवरों व पक्षियों की देखभाल करें या उन्हें खाना खिलाएं। कुछ परंपराओं में बहते पानी में कच्चा कोयला विसर्जित करने की भी सलाह दी जाती है; हालाँकि, नदियों में सामग्री डालने के बजाय, भक्त पर्यावरण के लिए सुरक्षित कोई प्रतीकात्मक विकल्प चुन सकते हैं या किसी स्थानीय पुजारी से सलाह ले सकते हैं।

तुला– तुला राशि वाले नाग पंचमी पर शिव मंदिर जा सकते हैं और महादेव की पूजा कर सकते हैं। अपनी क्षमता के अनुसार ज़रूरतमंदों को अनाज दान करना या भोजन कराना भी इस दिन से जुड़ा एक उपाय है।

वृश्चिक– वृश्चिक राशि वाले भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं और सुंदरकांड का पाठ कर सकते हैं। पारंपरिक ज्योतिष में माना जाता है कि पूजा और पाठ का यह मेल राहु और केतु से जुड़ी परेशानियों को कम करने में मदद करता है।

धनु– धनु राशि वाले भगवान शिव और उनके परिवार की पूजा कर सकते हैं और इस मौके पर पीले कपड़े पहन सकते हैं। पारंपरिक रूप से विष्णु मंदिर में हल्दी और चने की दाल दान करने की भी सलाह दी जाती है।

मकर– मकर राशि वाले नाग पंचमी पर कुत्ते को रोटी और गुड़ खिला सकते हैं। शाम को, वे पीपल के पेड़ के पास सरसों के तेल का दीपक जला सकते हैं, बशर्ते ऐसा करना सुरक्षित और अनुमत हो।

कुंभ– कुंभ राशि के लोग ज़रूरतमंदों को कंबल या स्टील के बर्तन जैसी उपयोगी चीज़ें दान कर सकते हैं। भगवान शिव के सामने बैठकर महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना भी इस राशि से जुड़ा एक पारंपरिक उपाय है।

मीन– मीन राशि के लोग पानी में थोड़ी सी केसर मिलाकर उससे भगवान शिव का जलाभिषेक कर सकते हैं। कुछ परंपराओं में बहते पानी में नारियल प्रवाहित करने की भी बात कही गई है, लेकिन प्राकृतिक जल स्रोतों को प्रदूषित होने से बचाने के लिए पर्यावरण के अनुकूल चीज़ें चढ़ाना या मंदिर द्वारा स्वीकृत विकल्प चुनना बेहतर है।

उपाय

राशि के अनुसार किए जाने वाले उपायों के अलावा, जो लोग राहु और केतु के बुरे असर का अनुभव कर रहे हैं, वे नाग पंचमी के दिन भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं और उन पर जल चढ़ा सकते हैं (जलाभिषेक कर सकते हैं)। कुछ ज्योतिष परंपराओं में राहु काल के दौरान शिव की पूजा करने की खास सलाह दी जाती है।

यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि ये उपाय वैज्ञानिक रूप से साबित तरीकों के बजाय धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें सेहत, पैसे, रिश्तों या ज़िंदगी की दूसरी समस्याओं के पक्के समाधान के तौर पर नहीं, बल्कि आस्था और आध्यात्मिक अभ्यास के तौर पर देखा जाना चाहिए।

कोबरा से लड़ गया कुत्ता, घर के बाहर ही खदेड़ा, मालिक के लिए कुर्बान कर दी अपनी जान

बलिया में कुत्ते ने वफादारी की मिसाल पेश करते हुए अपने मालिक के लिए जान कुर्बान कर दी। घर में घुस रहे सांप को कुत्ते ने मार डाला। काफी देर तक हुई दोनों के बीच लड़ाई में कुत्ता और सांप दोनों की मौत हो गई। 

मालिक को बचाने के लिए खतरनाक कोबरा से भिड़ गया टॉमी, जान देकर निभाई वफादारी, देखें VIDEO

वफादारी की मिसाल अक्सर कुत्तों से दी जाती है, लेकिन उत्तर प्रदेश के बलिया से सामने आई एक घटना ने इस कहावत को सच साबित कर दिया। यहां एक पालतू लैब्राडोर कुत्ते 'टॉमी' ने अपने मालिक के परिवार को जहरीले कोबरा से बचाने के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी। करीब एक घंटे तक चली इस खतरनाक लड़ाई में टॉमी ने कोबरा को तो मार गिराया, लेकिन खुद भी जहर के असर से जिंदगी की जंग हार गया।

 

रात 2 बजे घर के बाहर दिखा कोबरा

 

यह घटना बेल्थरा रोड क्षेत्र के उभांव गांव की है। ईंट भट्ठा व्यवसायी दानिश अपने परिवार के साथ यहां रहते हैं। रविवार देर रात करीब दो बजे एक जहरीला कोबरा उनके घर की ओर बढ़ रहा था। सबसे पहले परिवार के नौ साल पुराने पालतू लैब्राडोर टॉमी की नजर उस पर पड़ी।

 

टॉमी ने लगातार भौंककर परिवार को खतरे का एहसास कराया। इससे पहले कि सांप घर के अंदर पहुंचता, वह बिना अपनी जान की परवाह किए सीधे कोबरा से भिड़ गया।

 

एक घंटे तक चली जिंदगी और मौत की लड़ाई

 

परिवार के मुताबिक, टॉमी और कोबरा के बीच करीब एक घंटे तक जबरदस्त संघर्ष हुआ। इस दौरान कोबरा ने कई बार टॉमी को डसा, लेकिन उसने सांप को छोड़ने से इनकार कर दिया। आखिरकार टॉमी ने कोबरा को मार गिराया और परिवार को संभावित बड़े हादसे से बचा लिया।

 

हालांकि, इस बहादुरी की कीमत उसे अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। सांप के जहर का असर धीरे-धीरे उसके शरीर में फैलता गया और करीब आधे घंटे बाद उसकी हालत गंभीर हो गई। उसे इलाज के लिए ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर भी उसे नहीं बचा सके।


परिवार के लिए सिर्फ पालतू नहीं, सदस्य था टॉमी

 

परिजनों का कहना है कि टॉमी पिछले नौ वर्षों से उनके परिवार का हिस्सा था। उसने हमेशा घर की रखवाली की और हर मुश्किल में परिवार के साथ खड़ा रहा। उनका मानना है कि अगर उस रात टॉमी कोबरा से नहीं भिड़ता, तो सांप घर के अंदर घुसकर किसी भी सदस्य को नुकसान पहुंचा सकता था।

 

नम आंखों से दी अंतिम विदाई

 

सोमवार को परिवार ने अपने सबसे वफादार साथी को नम आंखों से अंतिम विदाई दी। टॉमी को दफनाते समय घर का हर सदस्य भावुक हो उठा। गांव के कई लोग भी इस बहादुर कुत्ते को श्रद्धांजलि देने पहुंचे।

 

टॉमी अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी बहादुरी, वफादारी और अपने परिवार के लिए दिया गया बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा। उसकी कहानी यह याद दिलाती है कि सच्चा प्यार और निस्वार्थ रक्षा केवल इंसान ही नहीं, बल्कि बेजुबान भी निभाना जानते हैं।

मानसून में सिर्फ मच्छर ही नहीं, सांपों से भी रहें सतर्क! अपनाएं ये उपाय

मानसून के बाद सांप काटने के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हेल्थ डिपार्टमेंट के मुताबिक, पिछले दिनों में जहरीले सांप के काटने के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें कुछ लोगों की मौत भी हो चुकी है। लगातार बढ़ते मामलों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बारिश के कारण सांप अपने बिल छोड़कर रिहायशी इलाकों की ओर आ रहे हैं और कई बार घरों, भूसे के ढेर, गोहालों या झाड़ियों में छिप जाते हैं, ऐसे में आप मानसून के दौरान सांपों से बचाव के लिए यहां दिए गए आसान और जरूरी उपाय अपना सकते है:

घर के आसपास सफाई रखें (Maintain Regular Cleanliness)

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मानसून में सांप अक्सर ऐसी जगहों पर छिपते हैं जहां झाड़ियां, लंबी घास, लकड़ी, ईंट, भूसा या कबाड़ जमा हो। इसलिए घर के आसपास की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। समय-समय पर झाड़ियों की कटाई करें और बेकार सामान हटाते रहें, ताकि सांपों को छिपने की जगह न मिले।

दीवारों की दरारें बंद करें (Seal Cracks and Gaps)

अगर घर की दीवार, फर्श, आंगन या स्टोर रूम में कहीं बिल, दरार या छेद दिखाई दे, तो उसे सीमेंट, मिट्टी या मटेरियल से बंद कर दें। इससे सांपों के घर के अंदर आने की संभावना काफी कम हो जाती है। खासकर बरसात के मौसम में घर की रेगुलर इंस्पेक्शन करना जरूरी है।

रात में टॉर्च का इस्तेमाल करें (Use a Torch at Night)

बारिश के मौसम में सांप रात के समय ज्यादा एक्टिव रहते हैं। इसलिए अंधेरे में बाहर निकलते समय हमेशा टॉर्च का यूज करें। खेत, बगीचे, गोहाल या घर के आसपास कभी भी नंगे पैर न चलें। मजबूत जूते और पूरी लंबाई वाले कपड़े पहनने से सांप के काटने का खतरा कम हो सकता है।

सांप से सुरक्षित दूरी रखें (Safe Distance from Snakes)

अगर घर या आसपास सांप दिखाई दे, तो घबराएं नहीं और उसे मारने या पकड़ने की कोशिश बिल्कुल न करें। सही दूरी बनाए रखें और तुरंत वन विभाग , स्थानीय प्रशासन या प्रशिक्षित स्नेक रेस्क्यू टीम को सूचना दें। ऐसा करने से आपकी और सांप दोनों की सेफ्टी बनी रहती है।

 परिवार को जागरूक रखें (Family Awareness)

मानसून के दौरान बच्चों और परिवार के सभी मेंबर को सांपों से जुड़ी जरूरी सावधानियों के बारे में बताएं। उन्हें समझाएं कि झाड़ियों, लकड़ी या भूसे के ढेर में हाथ डालने से पहले सावधानी बरतें और सांप दिखाई देने पर उससे दूर रहें। साथ ही यह भी याद रखें कि अगर किसी को सांप काट ले, तो घरेलू नुस्खों पर भरोसा करने की बजाय तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचें, क्योंकि समय पर इलाज ही जान बचाने का सबसे सेफ तरीका है।

खिड़कियां और दरवाजें बंद (Secure Doors and Windows)

मानसून के दौरान रात में सांप खुले दरवाजों, खिड़कियों या नालियों के रास्ते घर में घुस सकते हैं। इसलिए दरवाजे हमेशा बंद रखें, खिड़कियों पर जाली लगवाएं और पानी निकासी वाली नालियों को भी सुरक्षित रखें। इससे सांपों के घर में आने का खतरा कम हो सकता है।

खाने-पीने की चीजें और कचरा (Keep Food and Garbage Covered)

घर के आसपास कचरा, बचा हुआ खाना या अनाज खुला रखने से चूहे आने लगते हैं, और जहां चूहे होते हैं वहां सांपों के आने की संभावना भी बढ़ जाती है। इसलिए कूड़ेदान को ढककर रखें, अनाज को बंद डिब्बों में रखें और घर के आसपास सफाई बनाए रखें, ताकि सांपों को अट्रैक्ट करने वाली कंडीशन न बनें।

सांप को जैन साध्‍वियों ने सुनाया णमोकार मंत्र, कहा— मुक्‍त हो जाओ, अब किसी को मत डसना’, फन फैलाकर बैठे रहे नागराज

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ललितपुर में रविवार सुबह से एक अनोखा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में दिगंबर जैन आर्यिका एक ब्लैक कोबरा के सामने नमोकार मंत्र का जाप करती दिख रही हैं। लगभग तीन मिनट तक नागराज भी फन फैलाकर शांत मुद्रा में उनके सामने बैठे रहे और मंत्र सुनते रहे।

साथ में मौजूद शिष्य ने अपने मोबाइल फोन में पूरे वाकिया को रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। पूरा किस्सा क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह पूरी घटना मड़ावरा तहसील क्षेत्र स्थित अतिशय क्षेत्र गिरार की है।

सड़क पर बैठे इस जहरीले सांप को देखकर जैन साध्वियों रुक गई और उसके समझाने लगी। इस दौरान साध्वियों ने कहा कि हम तुम्हें णमोकार मंत्र सुनाते हैं। इस सुनने के बाद अब किसी को डंसना नहीं। बहुत लंबी यात्रा कर लिए अब किसी को परेशान नहीं करना। इस दौरान एक साध्वी सर्प के नजदीक बैठ गई और उसे समझाने लगी।

शांति से मंत्र सुनता रहे नागराज : जैन साध्वी जब इस मंत्र को सुना रहीं थी उस दौरान सर्प फन फैलाकर पूरे मंत्र को सुनता रहा। साध्वियों का मंत्र सुनने के बाद सांप शांत हो गया। इस दौरान साध्वी ने कहा कि हम तुम्हे मार नहीं रहे हैं। बल्कि आशीर्वाद दे रहे हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है। इस वायरल वीडियो को देखकर लोग तरह-तरह की बातें कर रहे हैं।

शिष्य ने वीडियो किया रिकॉर्ड : सांप को देखने के बाद मौके पर साध्वियां वहीं रुक गईं। आर्यिका मां विदुषश्री माताजी ने शांत भाव से नमोकार मंत्र का जाप करना शुरू किया। उनके साथ में मौजूद शिष्य पंकज जैन ने पूरे घटना को अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया। रिकॉर्ड करने के बाद उसने वीडियो को सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। 

सांप काटने से होने वाली मौतों पर लगेगा ब्रेक! नई रिसर्च में मिला सांपों के अंदर छिपा एंटीवेनम का रहस्य

सांप के जहर का इलाज अब खुद सांपों से मिलने वाले समाधान से संभव हो सकता है। वैज्ञानिकों ने एक ऐसी खोज की है, जो भविष्य में एंटीवेनम बनाने के तरीके को पूरी तरह बदल सकती है। शोधकर्ताओं को जहरीले सांपों के खून में ऐसे प्राकृतिक प्रोटीन मिले हैं, जो उनके घातक विष को निष्क्रिय करने की क्षमता रखते हैं। यह खोज इसलिए खास है क्योंकि मौजूदा एंटीवेनम कई सीमाओं के साथ आते हैं और हर तरह के सांप के जहर पर समान रूप से असरदार नहीं होते। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के वैज्ञानिकों ने इस दिशा में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है।

उनका मानना है कि प्रकृति में मौजूद इस सुरक्षा प्रणाली की मदद से आने वाले समय में ज्यादा प्रभावी, सुरक्षित और किफायती एंटीवेनम तैयार किए जा सकते हैं, जिससे दुनियाभर में सांप के काटने से होने वाली मौतों को कम करने में मदद मिल सकती है।

सांप खुद अपने जहर से कैसे बचते हैं?

वैज्ञानिक लंबे समय से यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि जहरीले सांप अपने ही विष से प्रभावित क्यों नहीं होते। शोधकर्ताओं के अनुसार, सांपों के शरीर में मौजूद कुछ खास प्रोटीन एक तरह की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली की तरह काम करते हैं। शोध टीम के प्रमुख सीन बी. कैरोल ने कहा कि प्रकृति ने पहले ही इस समस्या का समाधान खोज रखा है, जिसे इंसान अब समझने की कोशिश कर रहा है।

हर साल लाखों लोग होते हैं सांप के काटने का शिकार

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, जहरीले सांपों के काटने से हर साल दुनिया में करीब 80 हजार से 1.40 लाख लोगों की मौत होती है। इसके अलावा बड़ी संख्या में लोग स्थायी विकलांगता का शिकार भी हो जाते हैं। ग्रामीण इलाकों में समय पर इलाज न मिलने की वजह से यह समस्या और गंभीर बन जाती है।

मौजूदा एंटीवेनम में हैं कई सीमाएं

फिलहाल सांप के जहर का इलाज घोड़ों या भेड़ों जैसे जानवरों में जहर डालकर तैयार किए गए एंटीबॉडी से किया जाता है। हालांकि, यह प्रक्रिया महंगी होती है और अलग-अलग प्रजातियों के सांपों के जहर पर इसकी प्रभावशीलता भी सीमित हो सकती है। कई मामलों में इससे मरीजों में गंभीर एलर्जी या इम्यून रिएक्शन का खतरा भी रहता है।

FETUA-3 प्रोटीन ने दिखाई नई उम्मीद

साल 2022 में वैज्ञानिकों ने FETUA-3 नामक एक सुरक्षा प्रोटीन की पहचान की थी, जो सांप के जहर में मौजूद खतरनाक टॉक्सिन परिवार को रोक सकता है। नई रिसर्च में वैज्ञानिकों ने FETUA प्रोटीन परिवार के कई रूपों का परीक्षण किया। उन्होंने पाया कि अलग-अलग प्रोटीन को मिलाकर बनाया गया मिश्रण जहर को बेअसर करने में ज्यादा प्रभावी साबित हुआ।

पुराने एंटीवेनम से 10 गुना ज्यादा असरदार

प्रयोगशाला परीक्षणों में वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किए गए प्रोटीन मिश्रण ने मौजूदा भेड़-आधारित एंटीवेनम की तुलना में करीब 10 गुना ज्यादा प्रभावी क्षमता दिखाई। इसने न सिर्फ रैटलस्नेक के जहर को पूरी तरह निष्क्रिय किया, बल्कि कई अन्य वाइपर प्रजातियों के विष से भी सुरक्षा प्रदान की।

अब कई तरह के जहरीले टॉक्सिन पर हो रहा काम

शोधकर्ता अब इसी तकनीक का इस्तेमाल सांपों के अन्य प्रमुख विषैले टॉक्सिन समूहों पर कर रहे हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले समय में प्रकृति से प्रेरित लैब में तैयार एंटीवेनम इंसानों के इलाज के लिए उपलब्ध हो सकते हैं। सीन कैरोल के अनुसार, इस तकनीक से बड़ी मात्रा में एंटीवेनम तैयार किया जा सकता है, जिससे दुनिया भर में सांप काटने की समस्या से निपटने में मदद मिल सकती है।

पहला इस्तेमाल इंसानों से पहले जानवरों में संभव

वैज्ञानिकों का मानना है कि इस नई तकनीक का शुरुआती व्यावसायिक इस्तेमाल पशु चिकित्सा में हो सकता है। इसके बाद इसे इंसानों के इलाज के लिए विकसित किया जा सकता है। सबसे खास बात यह है कि जिस प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तलाश वैज्ञानिक दशकों से कर रहे थे, उसका जवाब खुद सांपों के शरीर में मौजूद था।

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एक बूंद जहर ले सकता है कई लोगों की जान! जानिए कहां पाया जाता है दुनिया का सबसे जहरीला सांप

दुनियाभर में कई ऐसे जहरीले सांप हैं, जो एक बार अगल इंसान को काट लें तो कुछ ही मिनटों में उसकी मौत हो जाती है। दुनिया के सबसे जहरीले सांप का नाम सुनते ही लोगों के मन में डर पैदा हो जाता है। क्या आप जानते हैं कि दुनिया का सबसे जहरीला सांप कौन सा होता है और वो कहां पर पाया जाता है। ऑस्ट्रेलिया के दूरदराज इलाकों में रहने वाला सांप ‘इनलैंड ताइपन’ (ऑक्सीयूरेनस माइक्रोलेपिडोटस) को दुनिया का सबसे जहरीला सांप कहा जाता है। ऑस्ट्रेलिया के दूरदराज इलाकों में रहने वाला यह सांप बेहद शक्तिशाली जहर रखने के बावजूद इंसानों से दूर रहते हैं और बहुत कम दिखाई देते हैं। इसकी सबसे खास बात ये है कि मौसम बदलने पर इसका रंग भी बदल जाता है।

ये सांप बेहद गर्म रेगिस्तानी इलाकों में पाया जाता है, जहां भीषण गर्मी और लंबे समय तक सूखे जैसी कठिन परिस्थितियां रहती हैं। कम दिखाई देने वाला ये सांप अपनी ताकतवर विष के कारण पूरी दुनिया में मशहूर है और इसे सबसे खतरनाक सांपों में गिना जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसकी एक बूंद जहर कई इंसानों की जान ले सकती है।

इंसानों से दूर रहते हैं ये सांप

इनलैंड ताइपन को दुनिया का सबसे जहरीला सांप माना जाता है। अपनी खतरनाक पहचान के बावजूद ये सांप इंसानों से दूर रहना पसंद करता है और बहुत कम दिखाई देता है। यह बेहद शर्मीला और एकांत में रहने वाला सांप है, इसलिए इसके दिखने की घटनाएं भी बहुत कम होती हैं। अब तक इसके काटने से किसी इंसान की मौत की पुष्टि नहीं हुई है। इनलैंड ताइपन मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड राज्य के दूरदराज इलाकों और दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के कुछ हिस्सों में पाया जाता है। ये सांप बाढ़ वाले मैदानों और काली मिट्टी वाले क्षेत्रों में रहता है, जहां लंबे सूखे के बाद बारिश होने पर नमी बढ़ जाती है। ऐसे कठिन वातावरण में भी यह आसानी से खुद को ढाल लेता है और जीवित रहता है।

मौसम के हिसाब से बदलता है रंग

इनलैंड ताइपन भीषण गर्मी से बचने के लिए जमीन की गहरी दरारों, जानवरों के खाली बिलों और मिट्टी के नीचे बनी प्राकृतिक सुरंगों में छिपकर रहते हैं। दिन की तेज धूफ में ये सांप बाहर नहीं निकलते हैं। आमतौर पर सुबह या शाम के ठंडे समय में ही यह भोजन की तलाश में अपने ठिकाने से बाहर आते हैं। ये मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया के रेगिस्तानी इलाकों में पाए जाने वाले लंबे बालों वाले चूहों का शिकार करता है। इनलैंड ताइपन मौसम के हिसाब से अपना रंग बदलता है। सर्दियों में इसका रंग गहरा और गर्मियों में हल्का हो जाता है। ये बदलाव इसे मौसम के अनुसार खुद को ढालने में मदद करता है।

रिपोर्टों के मुताबिक, इनलैंड ताइपन का जहर बहुत तेजी से असर करता है, इसलिए यह शिकार को पकड़कर ही रखता है। इसका मुख्य भोजन लंबे बालों वाले चूहे हैं। बारिश के समय इन्हें भरपूर खाना मिल जाता है, लेकिन सूखे में चूहों की संख्या कम होने से इसे भोजन की कमी का सामना करना पड़ता है।