मेक्सिको में 7.4 तीव्रता का भूकंप, सुनामी का खतरा बढ़ा:10 लाख लोगों के लिए अलर्ट जारी, पड़ोसी देशों में भी महसूस हुए झटके

मेक्सिको के दक्षिणी राज्य चियापास के तट पर शुक्रवार को 7.4 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। इसके बाद करीब 10 लाख लोगों के लिए सुनामी का अलर्ट जारी किया गया है। अमेरिकी एजेंसी USGS के मुताबिक, भूकंप का केंद्र मेक्सिको के प्यूर्टो मडेरो शहर के पास था। यह 10 किलोमीटर की गहराई पर आया, जिससे आसपास के इलाकों में तेज झटकों की आशंका बढ़ गई है। US सुनामी वार्निंग सिस्टम ने इस क्षेत्र के लिए सुनामी का अलर्ट जारी किया है। 7.4 तीव्रता के भूकंप को ‘मेजर’ कैटेगरी में रखा जाता है, जो बड़े पैमाने पर तबाही मचा सकते हैं। भूकंप के झटके मेक्सिको के पड़ोसी देश ग्वाटेमाला और अल साल्वाडोर में भी महसूस किए गए। फिलहाल किसी के हताहत होने या बड़े नुकसान की कोई रिपोर्ट नहीं है। सोशल मीडिया पर भूकंप से जुड़ा यह वीडियो वायरल है… पिछले 30 दिनों में 22 भूकंप दर्ज भूकंप ‘पैसिफिक रिंग ऑफ फायर’ में आया, जो प्रशांत महासागर के चारों ओर फैला करीब 40 हजार किलोमीटर लंबा घोड़े की नाल के आकार का इलाका है। यह दुनिया का सबसे एक्टिव भूकंपीय क्षेत्र माना जाता है। यहां दुनिया के करीब 75% सक्रिय और निष्क्रिय ज्वालामुखी हैं और लगभग 90% भूकंप इसी क्षेत्र में आते हैं। पिछले 30 दिनों में इस इलाके में 22 भूकंप दर्ज किए गए हैं। इनमें शुक्रवार का 7.4 तीव्रता वाला भूकंप सबसे शक्तिशाली बताया जा रहा है। भूकंप के तुरंत बाद अधिकारियों ने कहा कि समुद्र में उठने वाली ऊंची और खतरनाक लहरें तटीय इलाकों में बाढ़ ला सकती हैं। लोगों से संभावित बाढ़, तेज समुद्री धाराओं और ऊंची लहरों को देखते हुए सतर्क रहने की अपील की गई है। हालांकि, अमेरिका के नेशनल सुनामी वार्निंग सेंटर ने साफ किया है कि अमेरिका के पश्चिमी तट, ब्रिटिश कोलंबिया और अलास्का के लिए सुनामी का कोई खतरा नहीं है। भूकंप क्यों आते हैं
हमारी धरती की सतह मुख्य तौर पर 7 बड़ी और कई छोटी-छोटी टेक्टोनिक प्लेट्स से मिलकर बनी है। ये प्लेट्स लगातार तैरती रहती हैं और कई बार आपस में टकरा जाती हैं।

टकराने से कई बार प्लेट्स के कोने मुड़ जाते हैं और ज्‍यादा दबाव पड़ने पर ये प्‍लेट्स टूटने लगती हैं। ऐसे में नीचे से निकली ऊर्जा बाहर की ओर निकलने का रास्‍ता खोजती है और इस डिस्‍टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।

बादलों के बीच उड़ने का लेना हो मजा, तो इन 7 पैराग्लाइडिंग स्पॉट्स को जरूर करें एक्सप्लोर!

पैराग्लाइडिंग के लिए दुनिया की इन शानदार जगहों पर उड़ान भरना किसी सपने से कम नहीं है। यहां आसमान से दिखने वाले पहाड़, समुद्र, झीलें और खूबसूरत घाटियां आपको नेचर का एक अनोखा नजारा दिखाती हैं। अगर आप भी एडवेंचर के साथ घूमने और नई जगहों को अलग अंदाज में एक्सप्लोर करना चाहते हैं, तो इन डेस्टिनेशन के बारे में जरूर जानें:

1. गुदौरी, जॉर्जिया

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जॉर्जिया का गुदौरी कॉकस पर्वतों के बीच स्थित एक खूबसूरत पैराग्लाइडिंग डेस्टिनेशन है। यहां उड़ान भरते समय बर्फ से ढके पहाड़ों, हरी घाटियों और प्राकृतिक नजारों का शानदार एक्सपीरियंस मिलता है। पैराग्लाइडिंग के अलावा यहां रूस-जॉर्जिया फ्रेंडशिप मॉन्यूमेंट, काज़बेगी और गेर्गेती ट्रिनिटी चर्च जैसी जगहें घूम सकते हैं। गुदौरी घूमने के लिए 3 से 4 दिन का समय मिलता है। यहां पहुंचने के लिए राजधानी टिब्लिसी से टैक्सी, बस या टूर पैकेज लिया जा सकता है। खाने में जॉर्जियन खाचापुरी, खिंकाली, लोबियो और स्थानीय वाइन जरूर ट्राई करनी चाहिए।

2. माउई, USA

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अमेरिका के हवाई आइलैंड में माउई समुद्र, पहाड़ और ज्वालामुखी लैंडस्केप के कारण पैराग्लाइडिंग के लिए बेहद खास जगह है। यहां पैराग्लाइडिंग करते समय प्रशांत महासागर और खूबसूरत तटीय इलाकों का शानदार नजारा दिखाई देता है। माउई में हालेआकाला नेशनल पार्क, रोड टू हाना, वैलिया बीच और मोलोकिनी क्रेटर जैसी जगहें घूमने लायक हैं। खाने में हवाईयन पोके बाउल, कलुआ पोर्क, ताजा सी-फूड और हवाईयन कॉफी काफी पॉपुलर हैं।इस जगह को अच्छी तरह देखने के लिए 5 से 7 दिन का समय रखें। यहां घूमने के लिए कार किराए पर लेना सबसे माउंटेन रहता है।

3. बीर बिलिंग, भारत

पैराग्लाइडिंग के लिए हिमाचल के बीड़ बिलिंग से बढ़िया नहीं है कोई जगह, यहां के बारे में सबकुछ जानें - Bir Billing Is The Best Paragliding Place Of India At Himachal Pradesh -

हिमाचल प्रदेश का बीर बिलिंग भारत की सबसे फेमस पैराग्लाइडिंग जगहों में से एक है और इसे भारत की पैराग्लाइडिंग राजधानी भी कहा जाता है। यहां धौलाधार मलौण्टाइन रेंज, हरी घाटियां और छोटे गांवों का खूबसूरत नजारा देखने को मिलता है। पैराग्लाइडिंग के अलावा यहां बीर मोनेस्ट्री, चोकलिंग मोनेस्ट्री, पालपुंग शेराब्लिंग मठ और बरोट वैली घूम सकते हैं। यहां घूमने के लिए 3 से 5 दिन काफी हैं। दिल्ली या चंडीगढ़ से बस, ट्रेन और टैक्सी के जरिए पहुंचा जा सकता है। यहां तिब्बती मोमोज, थुकपा, हिमाचली धाम, मैगी और स्थानीय चाय जरूर चखें।

4. पोखरा, नेपाल

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नेपाल का पोखरा हिमालय, झीलों और पहाड़ों के खूबसूरत मेल के कारण दुनिया की लोकप्रिय पैराग्लाइडिंग जगहों में शामिल है। यहां सारंगकोट से पैराग्लाइडिंग करते समय अन्नपूर्णा माउंटेन और फेवा झील का शानदार व्यू दिखाई देता है। खाने में नेपाली थाली, मोमो, थुकपा और सेल रोटी काफी फेमस हैं। पोखरा में फेवा झील, डेविस फॉल, वर्ल्ड पीस पैगोडा और इंटरनेशनल माउंटेन म्यूजियम घूम सकते हैं। यहां के लिए 4 से 5 दिन का समय अच्छा रहता है। काठमांडू से बस या फ्लाइट द्वारा पहुंच सकते हैं और शहर में टैक्सी, बाइक या पैदल घूम सकते हैं।

5. शैमोनिक्स, फ्रांस

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फ्रांस का शैमोनिक्स आल्प्स पर्वतों के बीच बसा एक शानदार एडवेंचर डेस्टिनेशन है। यहां पैराग्लाइडिंग करते समय मों ब्लांक पर्वत, ग्लेशियर और बर्फीली चोटियों का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। यहां मों ब्लांक, ऐगुई दु मिदी केबल कार और मेर दे ग्लास ग्लेशियर जैसी जगहें घूम सकते हैं। इस क्षेत्र को देखने के लिए 4 से 6 दिन का समय रखें। जिनेवा से ट्रेन या बस द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है। खाने में फ्रेंच चीज, फोंड्यू, रैकलेट, क्रेप्स और फ्रेंच पेस्ट्री का स्वाद जरूर लें।

6. ओलुडेनिज़, तुर्की

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तुर्की का ओलुडेनिज़ समुद्र के ऊपर पैराग्लाइडिंग के लिए दुनिया भर में पॉपुलर है। यहां बाबादाग पर्वत से पैराग्लाइडिंग करते समय नीले समुद्र, सफेद समुद्र तट और खूबसूरत खाड़ी का नजारा देखने को मिलता है। यहां ब्लू लगून, बटरफ्लाई वैली, कयाकॉय गांव और बाबादाग पर्वत घूम सकते हैं। इस जगह को देखने के लिए 3 से 5 दिन ठीक हैं। दलामान एयरपोर्ट से टैक्सी या बस द्वारा पहुंच सकते हैं। यहां तुर्किश कबाब, बकलावा, गोजलेमे, मेजे प्लेटर और तुर्किश चाय काफी पॉपुलर हैं।

7. इंटरलाकेन, स्विट्ज़रलैंड

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स्विट्ज़रलैंड का इंटरलाकेन झीलों और आल्प्स पर्वतों के बीच बसा एक खूबसूरत शहर है। यहां पैराग्लाइडिंग के दौरान बर्फ से ढकी चोटियां, हरी घाटियां और नीली झीलों का शानदार व्यू मिलता है। यहां जुंगफ्राउयोख, लेक थून, लेक ब्रीएंज, हार्डर कुल्म और ग्रिंडेलवाल्ड घूमने लायक जगहें हैं। इंटरलाकेन के लिए 4 से 6 दिन का समय अच्छा रहेगा। स्विट्ज़रलैंड की ट्रेन व्यवस्था से यहां घूमना आसान है। खाने में स्विस फोंड्यू, रैकलेट, रोस्ती और स्विस चॉकलेट जरूर खाएं।

8. क्वीन्सटाउन, न्यूज़ीलैंड

Tandem Paragliding Experience in Interlaken - Klook

 

न्यूज़ीलैंड का क्वीन्सटाउन एडवेंचर लवर के लिए दुनिया की बेहतरीन जगहों में से एक है। यहां पैराग्लाइडिंग के दौरान पहाड़ों, झीलों और खूबसूरत घाटियों का शानदार नजारा दिखाई देता है। यहां लेक वाकाटिपु, बॉब्स पीक, मिलफोर्ड साउंड और ग्लेनॉर्की घूम सकते हैं। यहां खाने में न्यूजीलैंड लैम्ब, मीट पाई, सी-फूड और लोकल हनी काफी पॉपुलर हैं। क्वीन्सटाउन को अच्छे से देखने के लिए 5 से 7 दिन रखें। यहां कार किराए पर लेकर घूमना सबसे अच्छा ऑप्शन है।

9. वैले डे ब्रावो, मेक्सिको

Valle Tours — Cloudsurf Paragliding

मेक्सिको का वैले डे ब्रावो पहाड़ियों, जंगलों और झील से घिरा हुआ खूबसूरत पैराग्लाइडिंग डेस्टिनेशन है। यहां पैराग्लाइडिंग के दौरान झील और हरियाली का शानदार दृश्य देखने को मिलता है। यहां लेक एवांडारो, मॉनार्क बटरफ्लाई रिजर्व और पुराने शहर की गलियां घूम सकते हैं। यहां घूमने के लिए 2 से 4 दिन पर्याप्त हैं। मेक्सिको सिटी से बस या कार द्वारा पहुंचा जा सकता है। आप जब भी यहां जाये खाने में टैकोस, तमालेस, एनचिलाडास और मैक्सिकन कॉफी जरूर ट्राई करें।

10. मिराफ्लोरेस, पेरू

पैराग्लाइडर पायलटों के लिए वैले डे ब्रावो | क्रॉस कंट्री मैगज़ीन

पेरू के लीमा शहर का मिराफ्लोरेस समुद्र किनारे पैराग्लाइडिंग के लिए पॉपुलर है। यहां पहाड़ों की जगह समुद्र के ऊपर उड़ने का अनोखा एक्सपीरियंस मिलता है, जहां प्रशांत महासागर और शहर का खूबसूरत नजारा दिखाई देता है। यहां मालेकॉन बोर्डवॉक, लव पार्क, लार्को म्यूजियम और पार्के केनेडी घूम सकते हैं। इस जगह के लिए 2 से 3 दिन काफी हैं। यहां जाने का जब भी आपको मौका मिले खाने में पेरूवियन सेविचे, लोमो साल्टाडो, एंटीचूकोस और पिस्को सॉर जरूर चखें।

इन सभी पैराग्लाइडिंग डेस्टिनेशन पर रोमांच के साथ-साथ प्राकृतिक सुंदरता, लोकल संस्कृति और स्वादिष्ट खाने का एक्सपीरियंस मिलता है। अगर आप पहली बार पैराग्लाइडिंग करना चाहते या फिर एक्सपेरिएंस्ड एडवेंचर लवर हो सभी के लिए जगहें शानदार एक्सपीरियंस देती हैं।

एक दिन देर से ही सही पूरे देश में छा तो गया मानसून पर बारिश के ये 3 आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले, IMD का बिग अपडेट

Monsoon Rain Update: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने गुरुवार को एक बड़ा अपडेट शेयर किया है। इसके मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून ने राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के बचे हुए हिस्सों में आगे बढ़ते हुए पूरे देश को कवर कर लिया है। पूरे देश में मानसून के छाने में सामान्य तिथि (8 जुलाई) के मुकाबले इस बार महज एक दिन की देरी हुई है। भले ही मानसून पूरे भारत में पहुंच चुका है लेकिन मौसम विभाग द्वारा जारी किए गए बारिश के तीन आंकड़े देश के लिए चिंता बढ़ाने वाले हैं। देश में इस समय कुल मिलाकर बारिश की कमी बनी हुई है। भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल नीनो स्थितियों का उभरना इसके पीछे का एक मुख्य कारण माना जा रहा है। अल नीनो की स्थिति भारत में कम बारिश की वजह बनती है। आइए जानते हैं मौसम विभाग के वे 3 आंकड़े जो चिंता बढ़ा रहे हैं:

चिंता बढ़ाने वाले बारिश के 3 बड़े आंकड़े

IMD के डेटा के मुताबिक मानसूनी सीजन की शुरुआत से लेकर अब तक बारिश के आंकड़ों में गंभीर गिरावट दर्ज की गई है। इसे नीचे बिंदुवार समझा जा सकता है-

1- जून महीने में 40% की भारी कमी

भारत में इस साल जून के महीने में करीब 40 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई थी। इसमें सबसे बुरी मार मध्य भारत पर पड़ी। यहां जून में 50.4 प्रतिशत की भारी कमी देखी गई। इतना ही नहीं देश में इस साल जून के दौरान साल 1901 के बाद से अब तक की पांचवीं सबसे कम (99.5 मिमी) बारिश दर्ज की गई है।

2- ओवरऑल सीजनल डेफिसिट अभी भी 14% पर

भले ही जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश दिख रही है लेकिन IMD के आंकड़ों के मुताबिक 1 जून से 9 जुलाई की अवधि के लिए देश में कुल मिलाकर बारिश की कमी अभी भी 14 प्रतिशत पर बनी हुई है।

3- जुलाई महीने का सूखा अनुमान (94% LPA)

मौसम विभाग ने 30 जून को जारी अपने मासिक पूर्वानुमान में बताया था कि जुलाई के पहले 7 से 10 दिनों में देश भर में बारिश होगी (जो वर्तमान में दिख भी रही है) लेकिन इसके साथ ही विभाग ने आगाह किया है कि पूरा जुलाई महीना सामान्य से अधिक सूखा रहेगा। जुलाई में देश भर में होने वाली बारिश दीर्घावधि औसत (LPA) का महज 94 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई गई है।

क्या होता है LPA?

एलपीए (Long-Period Average) का मतलब किसी दिए गए समय (जैसे एक महीना या सीजन) के दौरान किसी विशेष क्षेत्र में दर्ज की गई बारिश के उस औसत से होता है जो आम तौर पर 30 से 50 वर्षों की एक लंबी अवधि का निकाला जाता है। वर्ष 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर पूरे देश में मौसमी बारिश का एलपीए (LPA) 87 सेमी है।

जुलाई के शुरुआती 9 दिनों में रहा बड़ा सरप्लस

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक अगर सिर्फ जुलाई महीने के शुरुआती आंकड़ों को देखें तो भारत ने अब तक बारिश का एक बड़ा सरप्लस (अधिकता) देखा है। जहां जुलाई के पहले 9 दिनों में सामान्य बारिश का आंकड़ा 73.8 मिमी होता है, वहीं देश में इस अवधि में अब तक 101.9 मिमी बारिश दर्ज की जा चुकी है।

इस साल सामान्य से कम रह सकती है कुल मानसूनी बारिश

केरल में इस साल मानसून की शुरुआत 4 जून को हुई थी जिसने देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन (जून से सितंबर) की शुरुआत की थी। आमतौर पर केरल में मानसून 1 जून को दस्तक देता है। मौसम विभाग के कुल पूर्वानुमान के मुताबिक इस साल पूरे मानसून सीजन में होने वाली कुल बारिश दीर्घावधि औसत (LPA) की सिर्फ 90 प्रतिशत होने की संभावना है। इसमें 4 प्रतिशत का मॉडल एरर शामिल है। अल नीनो की स्थिति के चलते इस कमी को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।

पीएम मोदी के इंडोनेशिया दौरे का आज तीसरा दिन:सबसे बड़े हिंदू मंदिर प्रम्बानन जाएंगे, शाम को ऑस्ट्रेलिया के तीसरे दौरे पर होंगे रवाना

पीएम मोदी के इंडोनेशिया दौरे का आज तीसरा दिन है। पीएम बुधवार को यहां के सबसे बड़े हिंदू मंदिर प्रम्बानन जाएंगे। यह मंदिर 1000 साल से ज्यादा पुराना है। इससे पहले मंगलवार को जकार्ता में भारत-इंडोनेशिया के बीच 20 समझौते हुए। भारत इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल की अतिरिक्त यूनिट देगा। इसी के साथ फिलीपींस, वियतनाम के बाद इंडोनेशिया ब्रह्मोस खरीदने वाला तीसरा देश बन गया है। 8 से 10 जुलाई तक ऑस्ट्रेलिया दौरे पर रहेंगे पीएम इंडोनेशिया के बाद, पीएम 8 से 10 जुलाई तक ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न का दौरा करेंगे। पीएम मोदी का यह तीसरा ऑस्ट्रेलिया दौरा है। यह यात्रा ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के निमंत्रण पर हो रही है। दोनों के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी। पीएम मोदी ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर-जनरल सैम मोस्टिन से भी मुलाकात करेंगे। इसके बाद भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम में हिस्सा लेंगे और दोनों देशों के प्रमुख कारोबारियों को संबोधित करेंगे। साथ ही, भारतीय समुदाय के एक बड़े कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। मोदी को इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान मोदी की इंडोनेशिया दौरे से जुड़ी 4 तस्वीरें… इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन को लेकर चिंता क्यों है? इंडो-पैसिफिक क्षेत्र (हिंद महासागर से लेकर प्रशांत महासागर तक) में चीन पिछले कुछ सालों से अपनी सैन्य और समुद्री मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है। इसी वजह से भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, फिलीपींस, वियतनाम और कई अन्य देशों की चिंता बढ़ी है। चीन लगभग 90% दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है। जबकि फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान भी इसके कुछ हिस्सों पर दावा करते हैं। चीन ने समुद्र में कृत्रिम द्वीप बनाकर वहां हवाई पट्टियां, रडार और मिसाइल सिस्टम तैनात किए हैं। फिलीपींस और वियतनाम के जहाजों के साथ चीनी कोस्ट गार्ड की कई बार झड़प हो चुकी है। पीएम मोदी बोले- दुनिया के 50% डिजिटल ट्रांजैक्शन भारत में होते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘दुनिया के करीब 50% डिजिटल ट्रांजैक्शन भारत में होते हैं। देश में हर महीने 75 करोड़ से ज्यादा डिजिटल पेमेंट किए जाते हैं। हालात ऐसे हैं कि लोग अब अपने डेबिट कार्ड और एटीएम का पासवर्ड तक भूलने लगे हैं। ग्लोबल रैंकिंग में भारतीय यूनिवर्सिटी की संख्या 12 से बढ़कर 50 से ज्यादा हो गई है। एनर्जी से लेकर कनेक्टिविटी और चिप मैन्युफैक्चरिंग तक भारत लगातार आगे बढ़ रहा है। भारत ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र के साथ आगे बढ़ रहा है। PM मोदी बोले- भारत नए सी रूट बना रहा, इंडोनेशिया हमारा फेवरेट फ्रेंड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत के ग्रेट निकोबार द्वीप से इंडोनेशिया के आगे की दूरी करीब 150 किलोमीटर है। इसलिए इंडोनेशिया आने वाले हर भारतीय को यहां अपनापन महसूस होता है।
ट्रेड, ट्रेडिशन और टूरिज्म के जरिए दोनों देश वर्षों से अपने रिश्तों को आगे बढ़ा रहे हैं। आज भारत नए पोर्ट्स, नए शिप्स और नए सी रूट बना रहा है। ऐसे समय में इंडोनेशिया हमारे लिए फेवरेट फ्रेंड बनकर हमारे साथ खड़ा है।
भारत और इंडोनेशिया दोनों ही विकास के लिए अधीर हैं। हमारे पास न रुकने का मौका है और न थमने का। यहां रहने वाले कुछ भारतीयों ने भी मुझे इंडोनेशिया के विकास के बारे में बताया है। ———————– पीएम मोदी के इंडोनेशिया दौरे से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… मोदी ने कहा- भारत-इंडोनेशिया में कुछ-कुछ होता है: इंडोनेशियाई राष्ट्रपति बोले- मैं मोदी का करियर कॉपी करता हूं पीएम मोदी ने मंगलवार शाम को जकार्ता में भारतीय लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यहां भारत का गाना ‘कुछ-कुछ होता है’ बहुत लोकप्रिय है। जब भारत-इंडोनेशिया साथ मिलकर चलते हैं तो कुछ-कुछ से भी आगे बढ़कर बहुत कुछ होता है। पीएम बोले- राष्ट्रपति प्रबोवो ने कहा था कि उनके अंदर भारत का DNA है। पूरी खबर पढ़ें…

चीन का नया ‘मिसाइल मैसेज’:परमाणु पनडुब्बी से बैलिस्टिक मिसाइल दागी, हिंद-प्रशांत में बढ़ा तनाव, भारत के लिए क्या मायने

चीन ने परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी से लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का प्रशांत महासागर में परीक्षण कर अपनी रणनीतिक सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया है। अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चिंता का विषय बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ प्रशांत क्षेत्र का मामला नहीं, बल्कि हिंद-प्रशांत में चीन की बढ़ती सैन्य आक्रामकता का संकेत है, जिसका सीधा असर भारत की सुरक्षा रणनीति पर भी पड़ सकता है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार परीक्षण में संभवतः चीन की नई पीढ़ी की JL-3 पनडुब्बी आधारित बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया गया। यह मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मानी जाती है और इसकी मारक क्षमता इतनी है कि चीन के समुद्री क्षेत्र से भी हजारों किलोमीटर दूर लक्ष्य साधे जा सकते हैं। चीन इसे नियमित सैन्य अभ्यास बता रहा है, लेकिन क्षेत्रीय देशों का कहना है कि इससे हिंद-प्रशांत में सैन्य प्रतिस्पर्धा और तेज होगी। भारत के लिए चिंता भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता चीन की बढ़ती समुद्री मौजूदगी है। बीते कुछ वर्षों में चीनी नौसेना की पनडुब्बियां हिंद महासागर में कई बार देखी गई हैं। जिबूती में सैन्य अड्डा, पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह और श्रीलंका के हम्बनटोटा पोर्ट पर चीन की सक्रियता पहले से नई दिल्ली के लिए रणनीतिक चुनौती है। यदि चीन अधिक आधुनिक और कम शोर वाली परमाणु पनडुब्बियों को तैनात करता है, तो हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी सैन्य पहुंच और प्रभाव दोनों बढ़ सकते हैं। हिंद महासागर में चीन की मौजूदगी लगातार बढ़ रही अब तक चीन का फोकस दक्षिण चीन सागर और ताइवान तक माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उसकी परमाणु पनडुब्बियां हिंद महासागर में भी नियमित रूप से देखी गई हैं। चीन का जिबूती में सैन्य अड्डा, पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट तक पहुंच और श्रीलंका के हम्बनटोटा बंदरगाह पर प्रभाव भारत के लिए पहले से रणनीतिक चुनौती हैं। यदि चीन की नई पनडुब्बियां स्टेल्थ और लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस हो जाती हैं, तो वे हिंद महासागर से भी भारत के अधिकांश हिस्सों को निशाना बना सकती हैं। भारत के परमाणु प्रतिरोधक संतुलन पर असर भारत की परमाणु नीति क्रेडिबल मिनिमम डेटेरेंस और नो फर्स्ट यूज पर आधारित है। चीन यदि समुद्र आधारित परमाणु क्षमता तेजी से बढ़ाता है तो भारत को भी अधिक परमाणु पनडुब्बियां, लंबी दूरी की K-4 और K-5 मिसाइलें और समुद्री निगरानी नेटवर्क तेजी से मजबूत करना होगा। दो मोर्चों पर चुनौती भारत पहले से उत्तरी सीमा पर चीन और पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान का सामना कर रहा है। यदि चीन समुद्री मोर्चे पर भी अपनी क्षमता बढ़ाता है तो भारत को भूमि, वायु और समुद्र—तीनों मोर्चों पर सैन्य संसाधन बढ़ाने पड़ सकते हैं। अंडमान-निकोबार की रणनीतिक अहमियत बढ़ेगी भारत का अंडमान एवं निकोबार कमांड मलक्का स्ट्रेट की निगरानी करता है। चीन की पनडुब्बी गतिविधियां बढ़ने पर भारत को समुद्री निगरानी बढ़ाने के अलावा पनडुब्बी रोधी युद्ध (Anti-Submarine Warfare), ड्रोन एवं P-8I निगरानी विमान की क्षमताओं को और मजबूत करना पड़ेगा। QUAD और इंडो-पैसिफिक साझेदारी मजबूत होगी चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों से भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच QUAD सहयोग और मजबूत हो सकता है। समुद्री सुरक्षा, खुफिया जानकारी साझा करने और संयुक्त नौसैनिक अभ्यासों की आवृत्ति बढ़ सकती है। चीन लगातार क्यों बढ़ा रहा है सैन्य ताकत? विशेषज्ञों के अनुसार चीन ताइवान पर दबाव बढ़ा रहा है, अमेरिका को प्रशांत क्षेत्र में चुनौती देना चाहता है, अपनी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता मजबूत कर रहा है और हिंद-प्रशांत में सैन्य प्रभाव बढ़ाना चाहता है। इसके साथ ही चीन भविष्य में समुद्र आधारित परमाणु शक्ति के जरिए वैश्विक रणनीतिक संतुलन बदलना चाहता है। भारत क्या कर रहा है? भारत पहले से अपनी समुद्री शक्ति बढ़ाने पर काम कर रहा है। इस दिशा में भारत जो कदम उठा रहा है उनमें INS अरिहंत और अरिघात जैसी परमाणु पनडुब्बियों का विकास, K-15 और K-4 बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, P-8I समुद्री निगरानी विमान, अंडमान-निकोबार कमांड का विस्तार और QUAD के तहत अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ संयुक्त नौसैनिक अभ्यास (मालाबार) शामिल हैं।

चीन का नया ‘मिसाइल मैसेज’:परमाणु पनडुब्बी से बैलिस्टिक मिसाइल दागी, हिंद-प्रशांत में बढ़ा तनाव, भारत के लिए क्या मायने

चीन ने परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी से लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का प्रशांत महासागर में परीक्षण कर अपनी रणनीतिक सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया है। अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चिंता का विषय बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ प्रशांत क्षेत्र का मामला नहीं, बल्कि हिंद-प्रशांत में चीन की बढ़ती सैन्य आक्रामकता का संकेत है, जिसका सीधा असर भारत की सुरक्षा रणनीति पर भी पड़ सकता है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार परीक्षण में संभवतः चीन की नई पीढ़ी की JL-3 पनडुब्बी आधारित बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया गया। यह मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मानी जाती है और इसकी मारक क्षमता इतनी है कि चीन के समुद्री क्षेत्र से भी हजारों किलोमीटर दूर लक्ष्य साधे जा सकते हैं। चीन इसे नियमित सैन्य अभ्यास बता रहा है, लेकिन क्षेत्रीय देशों का कहना है कि इससे हिंद-प्रशांत में सैन्य प्रतिस्पर्धा और तेज होगी। भारत के लिए चिंता भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता चीन की बढ़ती समुद्री मौजूदगी है। बीते कुछ वर्षों में चीनी नौसेना की पनडुब्बियां हिंद महासागर में कई बार देखी गई हैं। जिबूती में सैन्य अड्डा, पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह और श्रीलंका के हम्बनटोटा पोर्ट पर चीन की सक्रियता पहले से नई दिल्ली के लिए रणनीतिक चुनौती है। यदि चीन अधिक आधुनिक और कम शोर वाली परमाणु पनडुब्बियों को तैनात करता है, तो हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी सैन्य पहुंच और प्रभाव दोनों बढ़ सकते हैं। हिंद महासागर में चीन की मौजूदगी लगातार बढ़ रही अब तक चीन का फोकस दक्षिण चीन सागर और ताइवान तक माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उसकी परमाणु पनडुब्बियां हिंद महासागर में भी नियमित रूप से देखी गई हैं। चीन का जिबूती में सैन्य अड्डा, पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट तक पहुंच और श्रीलंका के हम्बनटोटा बंदरगाह पर प्रभाव भारत के लिए पहले से रणनीतिक चुनौती हैं। यदि चीन की नई पनडुब्बियां स्टेल्थ और लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस हो जाती हैं, तो वे हिंद महासागर से भी भारत के अधिकांश हिस्सों को निशाना बना सकती हैं। भारत के परमाणु प्रतिरोधक संतुलन पर असर भारत की परमाणु नीति क्रेडिबल मिनिमम डेटेरेंस और नो फर्स्ट यूज पर आधारित है। चीन यदि समुद्र आधारित परमाणु क्षमता तेजी से बढ़ाता है तो भारत को भी अधिक परमाणु पनडुब्बियां, लंबी दूरी की K-4 और K-5 मिसाइलें और समुद्री निगरानी नेटवर्क तेजी से मजबूत करना होगा। दो मोर्चों पर चुनौती भारत पहले से उत्तरी सीमा पर चीन और पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान का सामना कर रहा है। यदि चीन समुद्री मोर्चे पर भी अपनी क्षमता बढ़ाता है तो भारत को भूमि, वायु और समुद्र—तीनों मोर्चों पर सैन्य संसाधन बढ़ाने पड़ सकते हैं। अंडमान-निकोबार की रणनीतिक अहमियत बढ़ेगी भारत का अंडमान एवं निकोबार कमांड मलक्का स्ट्रेट की निगरानी करता है। चीन की पनडुब्बी गतिविधियां बढ़ने पर भारत को समुद्री निगरानी बढ़ाने के अलावा पनडुब्बी रोधी युद्ध (Anti-Submarine Warfare), ड्रोन एवं P-8I निगरानी विमान की क्षमताओं को और मजबूत करना पड़ेगा। QUAD और इंडो-पैसिफिक साझेदारी मजबूत होगी चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों से भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच QUAD सहयोग और मजबूत हो सकता है। समुद्री सुरक्षा, खुफिया जानकारी साझा करने और संयुक्त नौसैनिक अभ्यासों की आवृत्ति बढ़ सकती है। चीन लगातार क्यों बढ़ा रहा है सैन्य ताकत? विशेषज्ञों के अनुसार चीन ताइवान पर दबाव बढ़ा रहा है, अमेरिका को प्रशांत क्षेत्र में चुनौती देना चाहता है, अपनी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता मजबूत कर रहा है और हिंद-प्रशांत में सैन्य प्रभाव बढ़ाना चाहता है। इसके साथ ही चीन भविष्य में समुद्र आधारित परमाणु शक्ति के जरिए वैश्विक रणनीतिक संतुलन बदलना चाहता है। भारत क्या कर रहा है? भारत पहले से अपनी समुद्री शक्ति बढ़ाने पर काम कर रहा है। इस दिशा में भारत जो कदम उठा रहा है उनमें INS अरिहंत और अरिघात जैसी परमाणु पनडुब्बियों का विकास, K-15 और K-4 बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, P-8I समुद्री निगरानी विमान, अंडमान-निकोबार कमांड का विस्तार और QUAD के तहत अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ संयुक्त नौसैनिक अभ्यास (मालाबार) शामिल हैं।

वर्ल्ड अपडेट्स:चीन में भूस्खलन से 33 लोग दबे: 17 को बचाया गया, 16 की तलाश जारी

चीन के पश्चिमी गांसू प्रांत के पहाड़ी इलाके में मंगलवार को हुए भूस्खलन में 33 लोग मलबे में दब गए। सरकारी मीडिया के मुताबिक, अब तक 17 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि 16 लोग अब भी लापता हैं। राहत और बचाव अभियान जारी है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सभी प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द बचाने के लिए हरसंभव प्रयास करने के निर्देश दिए हैं। इस बीच, सेंट्रल चीन के हुबेई प्रांत में सोमवार रात आए तेज तूफान और आंधी-बारिश से कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 275 लोग घायल हुए हैं। एक व्यक्ति अब भी लापता है। मौसम विभाग के मुताबिक, कई इलाकों में 149 किमी/घंटा तक की रफ्तार से हवाएं चलीं। अगले 24 घंटे में 260 मिमी तक बारिश होने की चेतावनी जारी की गई है, जिससे भूस्खलन और बाढ़ का खतरा बना हुआ है। चीन के मौसम विभाग ने सुपर टाइफून ‘बावी’ को लेकर भी अलर्ट जारी किया है। यह तूफान 290 किमी/घंटा तक की रफ्तार वाली हवाओं के साथ प्रशांत महासागर से ताइवान की ओर बढ़ रहा है। अधिकारियों ने लोगों को सतर्क रहने और आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी है।

El Nino Impact in July: IMD के मंथली आउटलुक में जुलाई में भी मानसून वाली बारिश का हाल ठीक नहीं, अल नीनो का खतरा यहां तक पहुंचा

देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जुलाई 2026 के लिए अपना मासिक आउटलुक जारी कर दिया है। मौसम विभाग का यह पूर्वानुमान चिंता बढ़ाने वाला है। आईएमडी के मुताबिक जुलाई के महीने में देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून की बारिश का हाल ठीक नहीं रहने वाला है और इसके सामान्य से कम होने की पूरी संभावना है। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो को माना जा रहा है। इसका खतरा अब और बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है।

जुलाई में सामान्य से कम रहेगी बारिश: IMD का पूर्वानुमान

IMD द्वारा मल्टी-मॉडल एनसेंबल फोरकास्टिंग सिस्टम के आधार पर अपने पूर्वानुमान जारी किए गए हैं। इसके मुताबिक जुलाई के दौरान पूरे देश में मासिक औसत वर्षा सामान्य से कम (<94% of Long Period Average – LPA) रहने की सबसे अधिक संभावना है।

क्या है बारिश का सामान्य आंकड़ा (LPA)?

साल 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर जुलाई महीने के लिए पूरे देश की दीर्घकालिक औसत वर्षा लगभग 280.4 मिमी है। IMD का पूर्वानुमान है कि देश के अधिकांश हिस्सों में जुलाई में कम बारिश होगी। उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व भारत के कुछ हिस्सों, पूर्व-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में बारिश सामान्य से ऊपर या सामान्य रहने की संभावना है।

मजबूत हो रहा है अल नीनो, न्यूट्रल रहेगा आईओडी

मौसम विभाग ने मानसून की बारिश पर असर डालने वाले वजहों के बारे में भी बताया है। IMD के मुताबिक अभी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के ऊपर कमजोर अल नीनो की स्थिति बनी हुई है। लेकिन मानसून मिशन क्लाइमेट फोरकास्ट सिस्टम (MMCFS) और अन्य वैश्विक जलवायु मॉडलों के ताजा संकेत बताते हैं कि दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान यह अल नीनो स्थितियां और अधिक मजबूत हो सकती हैं।

इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) की स्थिति कैसी है?

इस समय हिंद महासागर में न्यूट्रल आईओडी की स्थिति देखी जा रही है। मॉडल के पूर्वानुमानों के अनुसार, पूरे दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान यह न्यूट्रल आईओडी स्थिति ही बनी रहने की संभावना है। इंडियन ओशन डाइपोल हिंद महासागर के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के समुद्री सतह के तापमान में अंतर को दर्शाने वाली जलवायु सिस्टम है। सामान्य तौर पर यदि IOD सकारात्मक रहता है तो यह भारतीय मानसून को मजबूत करने में मदद करता है। साथ ही अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक कम कर देता है। लेकिन इस बार IOD के तटस्थ रहने की संभावना है। इसका मतलब है कि यह मानसून को अतिरिक्त मजबूती नहीं दे पाएगा और अल नीनो का प्रभाव अधिक हावी रहेगा।

जुलाई में सताएगी गर्मी, तापमान रहेगा सामान्य से अधिक

कम बारिश के अनुमान के बीच जुलाई के महीने में देशवासियों को सामान्य से अधिक गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। जुलाई के दौरान, देश के अधिकांश हिस्सों में मासिक अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की उम्मीद है। हालांकि, पश्चिम-मध्य भारत के कुछ छिटपुट इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य या सामान्य से कम रह सकता है। रात के समय या न्यूनतम तापमान की बात करें तो देश के अधिकांश क्षेत्रों में यह भी सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है। सिर्फ मध्य और उत्तर-पूर्व भारत के कुछ अलग-अलग हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य रह सकता है।

कम बारिश से बढ़ेंगी चुनौतियां, तैयारी करने की सलाह

आईएमडी ने आगाह किया है कि जुलाई में सामान्य से कम बारिश होने के कारण कई मोर्चों पर गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। बारिश की कमी के कारण कृषि, जल संसाधन, जलविद्युत उत्पादन, पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता और पीने के पानी की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।

मौसम विभाग ने बताया कि वह नुकसान को कम करने के लिए विस्तारित अवधि के पूर्वानुमान, जिला-स्तरीय मौसम पूर्वानुमान, कृषि-मौसम विज्ञान सलाहकार सेवाएं और प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान जारी करता रहता है। ये किसान, आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों और बिजली क्षेत्र के योजनाकारों के लिए मददगार हैं।

अगला पूर्वानुमान कब?

आईएमडी द्वारा मानसून सीजन के दूसरे भाग (अगस्त + सितंबर 2026) के लिए और विशेष रूप से अगस्त महीने की बारिश का पूर्वानुमान जुलाई 2026 के अंत में जारी किया जाएगा