Top News 30 July: सुप्रीम कोर्ट में पैलेट गन पर सुनवाई, 3 राज्यों में उपचुनाव की वोटिंग, कांवड़ यात्रा शुरू

top news 30 july

Top News 30 July : पैलेट गन पर रोक के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई। बांकीपुर, दतिया और मांजलपुर में विधानसभा उपचुनावों के लिए मतदान जारी है। श्रावण मास की शुरुआत के साथ ही आज से देशभर में कांवड़ यात्रा भी शुरू हो गई। US फेड ने ब्याज दरें नहीं बदलीं। पल पल की जानकारी…

 

पैलेट गन मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

पैलेट गन पर रोक के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई। 20 जुलाई के प्रदर्शन में घायल 3 लोगों ने याचिका लगाकर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक की मांग की। उन्होंने कहा कि बिना वजह जवानों ने फायरिंग की।

 

बांकीपुर, दतिया और मांजलपुर में मतदान

बिहार के बांकीपुर, मध्य प्रदेश के दतिया और गुजरात के मांजलपुर में विधानसभा उपचुनावों के लिए मतदान जारी है। तीनों ही सीटों पर शाम 6 बजे तक वोट डाले जाएंगे। 3 अगस्त को मतगणना कर परिणाम घोषित किए जाएंगे। तीनों ही सीटों पर भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है।

 

सावन मास और कांवड़ यात्रा की शुरुआत

सावन (श्रावण) मास की शुरुआत के साथ ही आज से देशभर में कांवड़ यात्रा भी शुरू हो गई। शिव जी की पूजा और उपासना के लिए शिव मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों में कांवड़ यात्रा को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। ALSO READ: सावन का पहला सोमवार कब है? जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और 5 खास उपाय

 

US फेड ने ब्याज दरें नहीं बदलीं

फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरें 3.50% से 3.75% के दायरे में स्थिर रखने का फैसला लिया है। बैठक के दौरान मौजूदा मुद्रास्फीति पर चिंता भी जताई गई। फेड अध्यक्ष नियुक्त किए गए केविन वॉर्श ट्रंप के विश्वासपात्र माने जाते हैं। 

 

नितेश तिवारी की रामायण का ट्रेलर रिलीज

30 जुलाई की सुबह ‘रामायण’ का ट्रेलर लॉन्च कर दिया। लगभग 4 मिनट के इस ट्रेलर में यश, रणबीर कपूर, साई पल्लवी, रवि दुबे, अरुण गोविल, लारा दत्ता, रकुल प्रीत सिंह और विवेक ओबेरॉय समेत अधिकतर कलाकार नजर आए।

Sawan 2026 Special: शुरू होने वाला है महादेव का प्रिय माह, जानें त्रिशूल से लेकर चांद और गंगा नदी तक शिव के हर चिह्न के हैं गहरे आध्यात्मिक अर्थ

Sawan 2026 Special: हिंदू कैलेंडर का पांचवां महीना सावन अब कुछ ही दिन दूर है। इस माह को देवाधिदेव महादेव का प्रिय मास माना जाता है। दुनियाभर के लाखों-करोड़ों शिवभक्त इस पूरे माह में शिवभक्ति में लीन रहते हैं। शिव की पूजा, उपवास के साथ-साथ भजन-कीर्तन भी करते हैं। शिव के प्रति अपनी अनन्य आस्था प्रकट करने के लिए बहुत से श्रद्धालु उनके प्रतीक चिह्न भी अपने साथ रखते हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि महादेव से जुड़े हर चिह्न सिर्फ उनके रूप का हिस्सा नहीं हैं, ये ज्ञान, संतुलन, साहस और भक्ति जैसे जरूरी जीवन के सबक दिखाते हैं। त्रिशूल और डमरू से लेकर चांद और गंगा नदी तक, हर प्रतीक के गहरे आध्यात्मिक अर्थ है।

त्रिशूल: त्रिशूल भगवान शिव का दिव्य अस्त्र है। माना जाता है कि इसके तीन कांटे बनाने, बचाने और नष्ट करने को दिखाते हैं। ये भूत, वर्तमान और भविष्य को भी दिखाते हैं। यह भक्तों को याद दिलाते हैं कि शिव समय से परे हैं।

डमरू : डमरू उस आवाज को दिखाता है जिससे माना जाता है कि सृष्टि की शुरुआत हुई है। यह बनाने, लय और जीवन के लगातार चलने वाले चक्र को दिखाता है, जो हमें याद दिलाता है कि बदलाव जीवन का एक स्वाभाविक हिस्सा है।

तीसरा नेत्र : भगवान शिव की तीसरी आंख ज्ञान, समझ और ऊंची चेतना का प्रतीक है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब शिव अपनी तीसरी आंख खोलते हैं, तो यह बुराई, अज्ञानता और नेगेटिविटी को खत्म कर देता है।

आधा चांद : शिव के सिर पर आधा चांद समय, शांति और भावनात्मक संतुलन का प्रतीक है। यह भक्तों को याद दिलाता है कि जैसे चांद अलग-अलग चरणों से गुजरता है, वैसे ही जिंदगी भी लगातार बदलती रहती है।

गंगा नदी : शिव की जटाओं से बहने वाली पवित्र गंगा नदी पवित्रता, जीवन और दया को दिखाती है। कहानी के अनुसार, शिव ने धरती पर पहुंचने से पहले इस शक्तिशाली नदी का ज़ोर कम करने के लिए इसे अपनी जटाओं में पकड़ लिया था।

गले में सांप : भगवान शिव के गले में कोबरा निडरता और डर और इच्छा पर काबू पाने का प्रतीक है। यह मुश्किल हालात में सजगता और शांत रहने की क्षमता को भी दिखाता है।

नीलकंठ : भगवान शिव का नीला कंठ समुद्र मंथन की कहानी से आया है, जब उन्होंने दुनिया को बचाने के लिए हलाहल विष पिया था। यह आत्म-बलिदान, हिम्मत और दूसरों की रक्षा करने का प्रतीक है।

विभूति : शिव के शरीर पर लगाई गई पवित्र राख भक्तों को याद दिलाती है कि दुनिया की हर चीज कुछ समय के लिए है। यह विनम्रता, वैराग्य और आध्यात्मिक विकास पर ध्यान देने के लिए बढ़ावा देती है।

बाघ की खाल : भगवान शिव को अक्सर बाघ की खाल पर बैठे हुए दिखाया जाता है, जो घमंड और बेकाबू इच्छाओं पर जीत का प्रतीक है। यह आत्म संतुलन से मिलने वाली ताकत को भी दिखाता है।

रुद्राक्ष की माला : माना जाता है कि रुद्राक्ष की माला भगवान शिव के आंसुओं से निकली है। ये शांति, भक्ति, सुरक्षा और आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक हैं और भक्त इन्हें पूजा के दौरान बड़े पैमाने पर पहनते हैं।

नंदी : नंदी, भगवान शिव का वाहन, विश्वास, वफादारी, धैर्य और नेकी का प्रतीक है। यह ज्यादातर शिव मंदिरों में, नंदी शिवलिंग की ओर मुंह करके खड़े होते हैं, जो महादेव के प्रति अटूट भक्ति का प्रतीक है।

शिवलिंग : शिवलिंग भगवान शिव का सबसे पवित्र प्रतीक है। यह भगवान के अनंत और निराकार स्वरूप के साथ-साथ सृष्टि के अनंत चक्र और कॉस्मिक एनर्जी के मिलन को भी दिखाता है।

Aashadh 2026 Pradosh Vrat: आषाढ़ का अंतिम प्रदोष व्रत आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और प्रदोष काल पूजा विधि

Aashadh 2026 Pradosh Vrat: आषाढ़ का अंतिम प्रदोष व्रत आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और प्रदोष काल पूजा विधि

Aashadh 2026 Pradosh Vrat: हिंदू धर्म प्रदोष व्रत को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत हर हिंदू माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। इस दिन प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय भगवान शिव कैलाशधाम में प्रसन्न मुद्रा में विराजमान होते है। इसलिए इस समय महादेव की पूजा सर्वाधिक फलदायी मानी जाती है।

आज 26 जुलाई 2026 को आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ने वाला प्रदोष व्रत किया जा रहा है। रविवार का दिन होने के कारण इसे रवि प्रदोष व्रत या भानु प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ सूर्य देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रवि प्रदोष व्रत रखने से स्वास्थ्य लाभ, आरोग्य, मान-सम्मान और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। साथ ही कुंडली में सूर्य ग्रह की स्थिति मजबूत होती है और जीवन के संकट दूर होते हैं।

प्रदोष व्रत तारीख और शुभ मुहूर्त

त्रयोदशी तिथि प्रारंभ : 26 जुलाई 2026 को दोपहर 01:58 बजे

त्रयोदशी तिथि समाप्त : 27 जुलाई 2026 को शाम 04:15 बजे

प्रदोष काल पूजा का शुभ मुहूर्त : 26 जुलाई शाम 07:16 बजे से रात 09:21 बजे तक** (अवधि: 2 घंटे 5 मिनट)

रवि प्रदोष व्रत 2026 पूजा विधि

  • सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र (सफेद या हल्के रंग के) धारण करें और भगवान शिव तथा सूर्य देव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  • दिनभर सात्विक रहते हुए उपवास रखें और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते रहें।
  • शाम को प्रदोष काल (सूर्यास्त के आसपास का समय) से पहले स्नान कर पूजा स्थान को पवित्र करें।
  • शिवलिंग पर गंगाजल, शुद्ध जल और पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से अभिषेक करें।
  • शिवलिंग पर चंदन का लेप लगाएं। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी के पत्ते, अक्षत और सफेद फूल अर्पित करें।
  • रवि प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें। इसके बाद धूप-दीप जलाकर भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें।
  • अगले दिन (27 जुलाई) सुबह स्नान-ध्यान के बाद सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत का पारण करें।

Chaturmaas 2026 Upay: चतुर्मास में तुलसी के ये 5 उपाय बढ़ाएंगे जीवन में धन-धान्य, जानें कब और कैसे करें पूजा

Devshayani Ekadashi 2026: आज योग निद्रा में जाएंगे भगवान विष्णु, भद्रा से बचकर इस समय पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से करें श्रीहरि की पूजा

Devshayani Ekadashi 2026: देवशयनी एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में विशेष स्थान रखता है। यह व्रत हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत के साथ भगवान विष्णु का शयन काल प्रारंभ होता है और चतुर्मास लग जाता है। चतुर्मास यानी सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक के चार महीनों की अवधि। आषाढ़ शुक्ल एकादशी को भगवान विष्णु पाताल लोक में योग निद्रा में चले जाते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी को देवउठनी एकादशी के दिन जागते हैं।

इन चार महीनों के दौरान हिंदू धर्म में कोई मांगलिक कार्य नहीं होते हैं। सृष्टि के संचालन का काम भगवान शिव संभालते हैं। इस साल देवशयनी एकादशी का व्रत आज, 25 जुलाई 2026 को किया जा रहा है। माना जाता है कि आज के दिन भगवान विष्णु की पूरे विधि-विधान से पूजा और उपवास करने से श्री हरि प्रसन्न होते हैं। आज देवशयनी एकादशी के दिन भद्रा लग रही है। इसलिए आइए जानें, आज पूजा के लिए भद्रा रहित मुहूर्त क्या होगा और अन्य शुभ मुहूर्त क्या हैं ?

देवशयनी एकादशी पर भद्रा

इस साल पंचांग के अनुसार, देवशयनी एकादशी पर भद्रा सुबह 05:27 बजे से सुबह 11:34 बजे तक रहेगी। इस दिन चंद्रमा वृश्चिक राशि में रहेंगे। ऐसे में देवशयनी एकादशी पर पृथ्वी पर भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा।

देवशयनी एकादशी कब से कब तक?

एकादशी तिथि प्रारम्भ – जुलाई 24, 2026 को सुबह 09:12 बजे

एकादशी तिथि समाप्त – जुलाई 25, 2026 को सुबह 11:34 बजे

देवशयनी एकादशी पर पूजा कब करना चाहिए?

ब्रह्म मुहूर्त : सुबह में 04:03 बजे से 04:45 बजे तक

अभिजित मुहूर्त : सुबह में 11:46 बजे से दोपहर 12:40 बजे

विजय मुहूर्त : दोपहर 02:28 बजे से दोपहर 03:22 बजे

गोधूलि मुहूर्त : शाम 06:58 पी एम से शाम 07:19 बजे

अमृत काल : रात 09:41 बजे से रात 11:29 बजे

निशिता मुहूर्त : रात 11:52 बजे से रात 12:34 बजे, जुलाई 26

देवशयनी एकादशी व्रत का पारण कब होगा?

पारण समय : 26 जुलाई को सुबह 05:28 बजे से 08:10 बजे

देवशयनी एकादशी पर क्या करें?

  • इस दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें और पीले या हल्के रंग के कपड़े पहनें।
  • पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें।
  • पूजा में चंदन, पीले पुष्प, धूप, दीप और तुलसी दल अवश्य अर्पित करें, क्योंकि तुलसी के बिना श्रीहरि की पूजा अधूरी मानी जाती है।
  • पूजा के दौरान ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • यथाशक्ति उपवास रखें और सात्विक विचारों का पालन करें।
  • जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, जल या दक्षिणा का दान करें।
  • शाम के समय भगवान विष्णु की आरती कर खीर, माखन-मिश्री, फल या अन्य सात्विक प्रसाद का भोग लगाएं।
  • एकादशी के व्रत का पारण द्वादशी तिथि में किया जाता है।

देवशयनी एकादशी पर क्या ना करें?

  • देवशयनी एकादशी के दिन तामसिक भोजन, मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज और नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • व्रत ना भी रखने वालों को इस दिन चावल का सेवन करने से बचना चाहिए।
  • क्रोध, झूठ, कटु वचन, विवाद और किसी का अपमान करने से बचें।
  • पेड़-पौधों को अनावश्यक नुकसान न पहुंचाएं और किसी भी जीव को कष्ट ना दें।
  • एकादशी के दिन तुलसी को स्पर्श और उसके पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए।

Hariyali Teej 2026 Date: सावन में कब मनाई जाएगी हरियाली तीज? जानें तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त

Hariyali Teej 2026 Date: सावन में कब मनाई जाएगी हरियाली तीज? जानें तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त

Hariyali Teej 2026 Date: सावन का महीना हरियाली और भगवान शिव की आराधना के लिए जाना जाता है। लेकिन इस माह की एक विशेषता भी है। ये महीना माता पार्वती के तप, त्याग और समर्पण की याद दिलाता है, जब महिलाएं और अविवाहित कन्याएं अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य के लिए हरियाली तीज का पर्व मनाती हैं। हरियाली तीज का पूरे साल में आने वाले प्रमुख तीज पर्व में अहम स्थान है। यह व्रत हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन माता पार्वती ने वर्षों की कठोर तपस्या के बाद भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त किया था। माना जाता है कि माता पार्वती के इस समर्पण और प्रेम से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में अपनाया था। यही कारण है कि इस दिन सुहागिन महिलाएं माता गौरी की पूजा कर उनसे अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मांगती हैं। वहीं, कुंवारी कन्याएं भी अच्छे वर की कामना के लिए इस व्रत का पालन करती हैं।

हरियाली तीज 2026: सही तारीख

सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का प्रारंभ 14 अगस्त को शाम 06:48 बजे से होकर 15 अगस्त को शाम 05:30 बजे तक रहेगा। उदयातिथि के अनुसार यह व्रत 15 अगस्त को ही मनाया जाएगा।

पूजा और व्रत के दौरान ध्यान रखने योग्य विशेष नियम

हरियाली तीज का व्रत पति की लंबी उम्र, सुखी शादीशुदा जिंदगी और मनचाहा वर पाने के लिए रखा जाता है। इस दिन पूजा-अर्चना करते समय इन बातों का विशेष ध्यान रखें :

हरा रंग और सोलह श्रृंगार : पूजा के समय हरे रंग के वस्त्र (जैसे साड़ी/सूट) पहनें, हाथों में हरी चूड़ियां पहनें और मेहंदी लगाएं। हरा रंग प्रकृति, सावन और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।

सिंधारा की परंपरा : इस दिन मायके से आए सिंधारे का प्रयोग करें और सास या किसी वरिष्ठ महिला का आशीर्वाद लें। सिंधारे में वस्त्र, श्रृंगार सामग्री, घेवर व मिठाइयां होती हैं।

व्रत संकल्प व व्रत कथा : सुबह स्नान के बाद सच्चे मन से व्रत का संकल्प लें और शाम को भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा करते समय हरियाली तीज की व्रत कथा अवश्य सुनें।

माता पार्वती को सुहाग सामग्री देना : पूजा के दौरान देवी पार्वती को लाल चुनरी और श्रृंगार का सामान (सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां आदि) अर्पित करें।

हरियाली तीज में ये वर्जित है

  • पूजा या व्रत के दौरान काले या सफेद रंग के कपड़े पहनने से बचें। लाल, हरा या अन्य शुभ रंग पहनना उत्तम होता है।
  • इस दिन किसी से झगड़ा या कटु वचन न बोलें और मन में किसी के प्रति नकारात्मक विचार न लाएं।
  • घर में सात्विक माहौल रखें और लहसुन-प्याज या तामसिक चीजों का सेवन बिल्कुल न करें।
  • परंपरा अनुसार यदि आपने निर्जला व्रत का संकल्प लिया है, तो पूजा और कथा पूर्ण होने से पहले व्रत न खोलें।

Devshayani Ekadashi 2026 Katha: कल किया जाएगा देवशयनी एकादशी का व्रत, भगवान विष्णु की पूजा में जरूर सुनें मोक्ष प्रदान करने वाली ये कथा

Devshayani Ekadashi 2026: हरिशयनी एकादशी से चार माह के लिए लग जाएगी मांगलिक कार्यों पर रोक, इस विधि से कराएं भगवान विष्णु को शयन

Devshayani Ekadashi 2026: हिंदू धर्म एकादशी तिथि को अत्यंत महत्वपर्णू माना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित है और माना जाता है कि यह व्रत करने वाले भक्तों पर सदैव श्री हरि की कृपा बनी रहती है। हिंदी महीनों के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को यह व्रत किया जाता है। आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी के बाद अब शुक्ल पक्ष का देवशयनी या हरिशयनी एकादशी व्रत आने वाला है। इस तिथि को हिंदू धर्म में बहुत खास माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु इस दिन से चार माह की योग निद्रा में चले जाते हैं। इसके बाद से चतुर्मास शुरू हो जाता है और मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। इसे हम आषाढ़ी एकादशी, देवशयनी एकादशी, हरिशयनी या पद्मनाभा एकादशी के नाम से जानते हैं।

हरिशयनी एकादशी 2026: तिथि, मुहूर्त और पारण का समय

एकादशी तिथि का आरंभ: 24 जुलाई 2026 को सुबह 09:12 बजे से

एकादशी तिथि का समापन: 25 जुलाई 2026 को सुबह 11:34 बजे तक।

अभिजीत मुहूर्त (पूजा का श्रेष्ठ समय): दोपहर 12:19 बजे से दोपहर 01:11 बजे तक।

गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:17 बजे से शाम 07:39 बजे तक।

व्रत पारण का समय: 26 जुलाई 2026 को सुबह 06:13 बजे से सुबह 08:50 बजे के बीच।

देवशयनी एकादशी पर इस विधि से कराएं श्री हरि को शयन

चूंकि इस दिन के बाद भगवान चार महीनों के लिए विश्राम करने जाते हैं, इसलिए उनका शयन प्रारंभ होने से ठीक पहले पूरे विधि-विधान से विदाई-पूजन करने का बड़ा महत्व है।

  • देवशयनी एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं।
  • इसके बाद अपने घर के मंदिर की साफ-सफाई करें।
  • एक पवित्र चौकी पर भगवान विष्णु की सुंदर प्रतिमा या तस्वीर को आसन देकर विराजमान करें।
  • भगवान नारायण को पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें।
  • उन्हें पीला चंदन लगाएं, पीले फूल चढ़ाएं और तुलसी दल (जो एक दिन पहले तोड़ा गया हो) अर्पित करें।
  • भगवान के हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म सुशोभित करें।
  • इसके बाद प्रभु को पान और सुपारी भेंट करें।
  • धूप-दीप जलाकर श्रद्धा भाव से भगवान विष्णु की आरती उतारें।
  • सामर्थ अनुसार ब्राह्मणों को भोजन कराएं या दान-दक्षिणा दें।
  • इसके बाद ही स्वयं फलाहार या व्रत का सात्विक भोजन ग्रहण करें।
  • देवशयनी एकादशी की रात को भगवान के भजनों और स्तुति का कीर्तन करना चाहिए।
  • अंत में, स्वयं के सोने से पहले प्रभु को प्रतीकात्मक रूप से विश्राम (शयन) कराएं।

पूजा में करें इस मंत्र का जाप

पूजा में भगवान को शयन कराने के लिए इस विशेष मंत्र का जाप करें।

‘सुप्ते त्वयि जगन्नाथ जमत्सुप्तं भवेदिदम्।

विबुद्धे त्वयि बुद्धं च जगत्सर्व चराचरम्।।’

मंत्र का अर्थ: हे संपूर्ण जगत के स्वामी! आपके सो जाने पर यह पूरा संसार सो जाता है और आपके जाग जाने पर ही यह संपूर्ण सृष्टि तथा समस्त चराचर जीव जाग उठते हैं।

Sawan Putrada Ekadashi Vrat 2026: सावन में आएगी श्रावण पुत्रदा एकादशी, संतान प्राप्ति के लिए इस विधि से करें पूजा और जानें जरूरी नियम