एक लाख का क्रेडिट कार्ड बिल हर महीने मिनिमम पेमेंट करने के एक साल बाद भी ₹78,000 बाकी, यहां समझें पूरा कैलकुलेशन

क्या आप हमेशा क्रेडिट कार्ड के बिल का मिनिमम अमाउंट करते हैं? अगर हां तो इस कैलकुलेशन को समझना जरूरी है। दरअसल, हर महीने मिनिमम पेमेंट करने के बावजूद बिल ज्यादा कम नहीं होता है। इसकी बड़ी वजह यह है कि मिनिमम पेमेंट का बड़ा हिस्सा फाइनेंस चार्ज और जीएसटी पेमेंट पर खर्च हो जाता है। इस वजह से आपके बिल में सिर्फ मामूली कमी आती है।

मिनिमम बिल पेमेंट आपको सिर्फ लेट पेमेंट फीस से बचाता है

बिलकट के को-फाउंडर, सीईओ और सीटीओ तनीश शर्मा ने कहा, “मिनिमम बिल आपसे यह कहता है कि आप इस महीने आप लेट पेमेंट फीस से बच जाएंगे। यह कभी यह नहीं कहता कि आपका बिल कितना घट जाएगा।” इसका सीधा मतलब है कि मिनिमम पेमेंट सिर्फ एक अपवाद है। अगर 10 बार आप पूरा बिल चुकाते हैं और किसी वजह से आप एक बार नहीं पूरा चुका सकते तो आप मिनिमम पेमेंट कर सकते हैं। लेकिन, 10 बार आप मिनिमम पेमेंट नहीं कर सकते।

क्रेडिट कार्ड कंपनी हर महीने 3.75 फीसदी फाइनेंस चार्ज वसूलती है

मान लीजिए आपके क्रेडिट कार्ड का बिल एक लाख रुपये का है। आप कोई नई खरीदारी नहीं करते हैं और कोई अतिरिक्त फीस भी नहीं चुकाते हैं। बैंक आपके हर महीने 3.75 फीसदी का फाइनेंस चार्ज लेता है। आपके मिनिमम पेमेंट का बड़ा हिस्सा फाइनेंस चार्ज, जीएसटी और बाकी बिल के 2 फीसदी के पेमेंट पर खर्च हो जाता है।

मिनिमम पेमेंट से कुल बिल अमाउंट में हल्की कमी

एसबीआई कार्ड हर महीने 3.75 फीसदी फाइनेंस चार्ज वसूलती है। यह सालाना 45 फीसदी बैठता है। मान लीजिए कोई ग्राहक एक लाख के बिल पर हर महीने सिर्फ मिनिमम बिल चुकाता है तो वह 12 महीने में करीब 69,160 रुपये चुकाता है। इसमें से करीब 47,630 रुपये फाइनेंस चार्ज और जीएसटी में चला जाता है। सिर्फ 21,530 रुपये उसके बिल में से कम होते हैं।

एक लाख के बिल में 69000 चुकाने के बाद भी 78000 रुपये बकाया 

शर्मा बताते हैं कि ग्राहक के एक साल में करीब 69,000 रुपये चुकाने के बाद भी उसका बिल 78,470 रुपये बचा रह जाता है। हालांकि, अलग-अलग बैंकों के फाइनेंस चार्ज में फर्क हो सकता है। लेकिन, एक बात तय है कि सिर्फ मिनिमम पेमेंट करने से बिल का बड़ा हिस्सा बचा रह जाता है। हालांकि, क्रेडिट कार्ड कंपनियां ग्राहक को इस बारे में बताती हैं।

इंटरेस्ट फ्री पीरियड का फायदा भी नहीं मिलता है

मिनिमम बिल चुकाने का दूसरा नुकसान यह है कि इससे ग्राहक को इंटरेस्ट-फ्री पीरियड का फायदा नहीं मिलता है। यह फायदा तभी मिलता है जब आपने पिछला बिल पूरा चुका दिया होता है। जब आप बिल के एक हिस्से का पेमेंट करते हैं और बाकी को कैरी-फॉरवर्ड करते हैं तो यह बेनेफिट खत्म हो जाता है। इसका मतलब है कि क्रेडिट कार्ड से हर नए पेमेंट से आपका आउटस्टैंडिंग बढ़ता जाता है।

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नई खरीदीरी जारी रखने पर बिल चुकाने की क्षमता से ज्यादा होता है

बार-बार मिनिमम पेमेंट करने और कार्ड से नई खरीदारी जारी रखने पर एक समय ऐसा आता है जब आपका बिल आपके चुकाने की क्षमता से बाहर हो जाता है। इससे ग्राहक बड़ी मुसीबत में फंस जाता है। लेकिन, क्रेडिट कार्ड इश्यू करने वाली कंपनी की फाइनेंस चार्ज से कमाई बढ़ती जाती है। इसलिए त्योहारों के मौसम में आपको क्रेडिट कार्ड से शॉपिंग करने में यह ध्यान में रखने की जरूरत है कि बिल आपके चुकाने की क्षमता से बाहर नहीं जाना चाहिए।

LIC Jeevan Utsav: एलआईसी की इस पॉलिसी में सिर्फ 5 साल तक प्रीमियम चुकाए और पूरी जिंदगी इनकम पाएं

अगर आप रिटायरमेंट के बाद के खर्चों के लिए पैसे का इंतजाम करना चाहते हैं तो आप एलआईसी की जीवन उत्सव पॉलिसी के बारे में सोच सकते हैं। इस प्लान में पॉलिसीहोल्डर्स के लिए कई तरह के विकल्प उपलब्ध हैं। यह एक नॉन-लिंक्ड और नॉन-पार्टिसिपेटिंग इंडिविजुअल लाइफ इंश्योरेंस प्लान है। इसका मतलब है कि इसके बेनेफिट्स स्टॉक्स मार्केट्स के रिटर्न पर निर्भर नहीं हैं।

5 साल से 16 साल प्रीमियम चुकाने का विकल्प

LIC Jeevan Utsav में पॉलिसीहोल्डर्स को 5 साल से 16 साल तक प्रीमियम चुकाना है। मिनिमम बेसिक सम-अश्योर्ड 5 लाख रुपये है। मान लीजिए 30 साल का कोई व्यक्ति 5 लाख रुपये का बेसिक सम अश्योर्ड चाहता है और वह 5 साल के लिए प्रीमियम चुकाने के ऑप्शन को सेलेक्ट करता है। पांच साल के विकल्प में सालाना प्रीमियम 1,10,150 रुपये होगा। अगर वह 8 साल के विकल्प को सेलेक्ट करता है तो यह 72,600 रुपये, 12 साल के विकल्प में सालाना प्रीमियम 44,275 रुपये और 16 साल के विकल्प में 30,025 रुपये होगा।

5 लाख रुपये का बेसिक समय अश्योर्ड

इस प्लान के रेगुलर इनकम बेनेफिट ऑप्शन के तहत पॉलिसीहोल्डर की सालाना इनकम सम अश्योर्ड के 10 फीसदी होगी। 5 लाख रुपये के बेसिक सम अश्योर्ड पर यह सालाना 50,000 रुपये होगी। प्रीमियम चुकाने की अवधि 5 साल होने पर इनकम पॉलिसी के 11वें साल से शुरू हो जाती है। यह पॉलिसीहोल्डर को जीवनभर मिलती रहती है। सालाना इनकम बेसिक सम अश्योर्ड का 10 फीसदी होने का मतलब यह नहीं है कि पॉलिसी में निवेश पर 10 फीसदी का रिटर्न मिलता है। एक्चुअल रिटर्न कुल चुकाए गए प्रीमियम पर निर्भर करता है।

पॉलिसी चुकाने के दौरान गारंटीड एडिशंस

एलआईसी जीवन उत्सव में पॉलिसी की शर्तों के मुताबिक, प्रीमियम चुकाने की अवधि के दौरान गारंटीड एडिशंस मिलता है। पॉलिसी के हर एलिजिबल ईयर में बेसिक सम अश्योर्ड के हर 1000 रुपये पर 40 रुपये का एडिशंस जुड़ जाता है। 5 लाख रुपये का बेसिक सम अश्योर्ड होने पर हर एलिबिजल ईयर में गारंटीड एडिसंस का अमाउंट 20,000 तक पहुंच जाता है।

इनकम को बाद के लिए टालने का विकल्प

इस प्लान में फ्लेक्सी इनकम बेनेफिट ऑप्शन भी है। यह पॉलिसीहोल्डर को इनकम को बाद के लिए टालने की इजाजत देता है। डेफर्ड अमाउंट पर पॉलिसी में तय रेट के हिसाब से इंटरेस्ट मिलता रहेगा। अभी यह रेट सालाना 5.5 फीसदी है। यह ऑप्शन उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जिन्हें तुरंत इनकम की जरूरत नहीं है।

पॉलिसीहोल्डर की मौत पर नॉमिनि को डेथ बेनेफिट्स

अगर पॉलिसी जारी रहने के दौरान पॉलिसीहोल्डर की मौत हो जाती है तो नॉमिनी को पॉलिसी की शर्त के लिहाज से डेथ बेनेफिट्स मिलते हैं। एलआईसी तय रूल्स के आधार पर इस बेनेफिट का कैलकुलेशन करता है। इसमें मौत के समय अप्लिकेपल सम अश्योर्ड और गारंटीड एडिशंस शामिल हैं। इस बारे एलआईसी के वेबसाइट से डिटेल हासिल की जा सकती है।

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इस प्लान में लोन की भी सुविधा उपलब्ध

इस पॉलिसी में पॉलिसीहोल्डर के लिए लोन की सुविधा है। लोन का अमाउंट, इंटरेस्ट रेट और पेमेंट की अवधि पॉलिसी की शर्तों पर निर्भर होगी। पॉलिसीहोल्डर इस प्लान में अतिरिक्त इंश्योरेंस प्रोटेक्शन के लिए ऑप्शनल राइडर्स ले सकते हैं। इस पॉलिसी में चुकाए गए प्रीमियम पर सेक्शन 80सी और 10(10डी) के तहत टैक्स बेनेफिट्स भी उपलब्ध हैं।