बालकनी, छत या गमलों में उगाएं अपनी पसंदीदा सब्जियां, मानसून में मिलेगा शानदार रिजल्ट

मानसून का मौसम किचन गार्डन शुरू करने के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है क्योंकि इस दौरान नमी और ठंडक पौधों की ग्रोथ को तेजी से बढ़ाते हैं। अच्छी बात यह है कि इसके लिए बड़े बगीचे या आंगन की जरूरत नहीं होती, बल्कि बालकनी, छत या छोटे गमलों में भी आसानी से सब्जियां उगाई जा सकती हैं। थोड़ी सी सही देखभाल, उपयुक्त मिट्टी और नियमित पानी देने से कई तरह की हरी सब्जियां और हर्ब्स घर पर ही तैयार हो सकते हैं।

यह न सिर्फ ताजा और ऑर्गेनिक खाने का विकल्प देता है, बल्कि बाजार पर निर्भरता भी कम करता है। कुछ ही हफ्तों में पौधे तैयार होकर उपज देने लगते हैं, जिससे रसोई में ताजी सब्जियों की उपलब्धता बनी रहती है और सेहत भी बेहतर रहती है।

करेला

मानसून की नमी करेले की बेल को तेजी से बढ़ने में मदद करती है। इसे सहारा देने के लिए जाली या ट्रेलिस जरूरी होता है। गर्म और उमस भरा मौसम इसकी ग्रोथ के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।

हरी मिर्च

हरी मिर्च मानसून में आसानी से उगने वाली सब्जियों में से एक है। बस ध्यान रखें कि मिट्टी में पानी जमा न हो। रोज कुछ घंटे धूप मिल जाए तो पौधा ज्यादा फल देता है।

लौकी

लौकी की बेल बारिश में तेजी से फैलती है और ज्यादा मेहनत नहीं मांगती। इसे गमले या छत पर आसानी से उगाया जा सकता है। बेहतर ग्रोथ के लिए इसे सपोर्ट यानी जाली देना जरूरी है।

तोरई

तोरई मानसून में बहुत अच्छी तरह बढ़ती है। नियमित पानी और धूप मिलने पर यह भरपूर उत्पादन देती है। सही जगह और थोड़ी देखभाल से यह पौधा जल्दी तैयार हो जाता है।

पालक

अगर आपके पास कम जगह है तो पालक सबसे अच्छा विकल्प है। यह जल्दी तैयार हो जाता है और पोषक तत्वों से भरपूर होता है। गमलों में इसे आसानी से उगाया जा सकता है।

मेथी

मेथी मानसून में बोई जाती है और बाद में ताजी पत्तियों का अच्छा उत्पादन देती है। नियमित कटाई से इसकी ग्रोथ और बेहतर हो जाती है।

धनिया

धनिया बहुत तेजी से बढ़ने वाला पौधा है और बार-बार काटकर इस्तेमाल किया जा सकता है। मिट्टी में नमी बनाए रखना इसकी सबसे बड़ी जरूरत है।

बैंगन

बैंगन मानसून में अच्छा उत्पादन देता है लेकिन कीड़ों से बचाव जरूरी होता है। सही धूप, खाद और पानी के संतुलन से यह लंबे समय तक फल देता है।

अगर पर्सनल लोन एप्लिकेशन रिजेक्ट हो जाए तो क्या करें?

पर्सनल लोन रिजेक्ट होने से किसी को भी बड़ा झटका लग सकता है, खासकर तब जब पैसों की तुरंत जरूरत हो. बैंक या लेंडर कई वजहों से लोन एप्लिकेशन रिजेक्ट कर सकते हैं. लेकिन अच्छी बात यह है कि इनमें से ज्यादातर वजहें सुधारी जा सकती हैं. चाहे मामला CIBIL स्कोर का हो, पुराने लोन का हो या अधूरे डॉक्युमेंट का, आपके पास हमेशा यह मौका रहता है कि अगली बार पर्सनल लोन अप्रूवल की संभावना बेहतर बनाई जा सके.

पर्सनल लोन रिजेक्ट क्यों होता है?

लेंडर कई वजहों से पर्सनल लोन रिजेक्ट कर सकते हैं. सबसे आम वजहें इस प्रकार हैं:

  • कम CIBIL स्कोर: खराब क्रेडिट हिस्ट्री या कम CIBIL स्कोर (750 से कम) पर्सनल लोन रिजेक्शन का सबसे बड़ा कारण है.
  • हाई डेट-टू-इनकम रेशियो: अगर आपका मौजूदा लोन आपकी इनकम के मुकाबले ज्यादा है, तो बैंक आपको नया लोन देने में हिचकिचा सकते हैं.
  • अनस्टेबल जॉब या कम इनकम: कम इनकम या हाई-रिस्क इंडस्ट्री में काम करने वालों की एप्लिकेशन रिजेक्ट हो सकती हैं.
  • बार-बार लोन अप्लाई करना: कम समय में कई बार लोन के लिए अप्लाई करने से आप क्रेडिट के लिए उतावले लग सकते हैं, जिससे लेंडर सतर्क हो जाते हैं.
  • अधूरे डॉक्युमेंट: ID प्रूफ, सैलरी स्लिप या बैंक स्टेटमेंट जैसे जरूरी डॉक्युमेंट न देने पर भी एप्लिकेशन रिजेक्ट हो सकती है.

अगर आप भी बिना झंझट के पर्सनल लोन लेना चाहते हैं, तो मनीकंट्रोल का ऑनलाइन लेंडिंग प्लेटफॉर्म जरूर एक्स्प्लोर करें.

अपना CIBIL स्कोर चेक करें

अगर आपका लोन CIBIL स्कोर की वजह से रिजेक्ट होता है, तो आपको तुरंत स्कोर चेक करना चाहिए. मनीकंट्रोल की वेबसाइट पर आप इसे फ्री में चेक कर सकते हैं.

अगर आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में कोई गलती दिखे तो CIBIL से संपर्क करके उसे ठीक करवाएं. इसके अलावा, अगर स्कोर कम है, तो उसे सुधारने के लिए समय लें और फिर दोबारा अप्लाई करें.

CIBIL स्कोर सुधारने के तरीके

कम CIBIL स्कोर होना लोन रिजेक्शन की एक आम वजह है. इसे सुधारने के लिए ये कदम उठाएं:

  • EMI और क्रेडिट कार्ड बिल समय पर चुकाएं – देरी से पेमेंट करने पर स्कोर तेजी से गिरता है.
  • क्रेडिट यूज लिमिट कम रखें – कोशिश करें कि क्रेडिट कार्ड लिमिट का 50% से ज्यादा इस्तेमाल न करें.
  • बार-बार लोन अप्लाई करने से बचें – हर एप्लिकेशन पर “हार्ड इंक्वायरी” होती है, जो स्कोर को घटा देती है.
  • पुराना लोन निपटाएं – आउटस्टैंडिंग लोन चुकाने से आपकी क्रेडिटवर्थिनेस बढ़ती है.

रिजेक्शन की वजह समझें

अगर रिजेक्शन की वजह साफ न हो, तो लेंडर से इसकी जानकारी लें. वजह जानने के बाद आप उस पर सुधार कर सकते हैं.

उदाहरण के तौर पर, अगर आपकी इनकम कम है, तो छोटे लोन अमाउंट के लिए अप्लाई करें. इसके अलावा, अगर जॉब हिस्ट्री अनस्टेबल है, तो स्टेबल जॉब मिलने के बाद दोबारा अप्लाई करें.

छोटे लोन अमाउंट के लिए अप्लाई करें

जब आप बड़े लोन अमाउंट के लिए अप्लाई करते हैं, तो बैंक जोखिम के कारण एप्लिकेशन रिजेक्ट कर सकते हैं. इसलिए, अपनी रीपेमेंट क्षमता के अनुसार कम अमाउंट के लिए अप्लाई करें.

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को-एप्लिकेंट या गारंटर जोड़ें

अगर कम इनकम या खराब CIBIL स्कोर के कारण रिजेक्शन हुआ है, तो एक मजबूत क्रेडिट प्रोफाइल वाले को-एप्लिकेंट या गारंटर को जोड़कर अप्रूवल की संभावना बेहतर बनाई जा सकती है.

दूसरे लेंडर एक्सप्लोर करें

आम बैंकों की एलिजिबिलिटी शर्तें सख्त होती हैं, लेकिन NBFCs और फिनटेक लेंडर ज्यादा फ्लेक्सिबल होते हैं. कई बार वे कम CIBIL स्कोर पर भी लोन अप्रूव कर देते हैं.

सिक्योर्ड लोन लें

अगर अनसिक्योर्ड पर्सनल लोन रिजेक्ट हो गया है, तो सिक्योर्ड लोन के लिए अप्लाई करें. गोल्ड, FD या प्रॉपर्टी जैसे एसेट गिरवी रखकर लोन लेना आसान हो जाता है और ब्याज दर भी सस्ती मिल सकती है.

इंतजार करें और फिर दोबारा अप्लाई करें

अगर आपका लोन CIBIL स्कोर की वजह से रिजेक्ट हुआ था और अब आपने उसे सुधार लिया है, तो कुछ महीने रुककर दोबारा अप्लाई करें. धीरे-धीरे अपनी फाइनेंशियल आदतें सुधारते रहेंगे तो लोन अप्रूवल की संभावना अपने आप बढ़ जाएगी.

कुल मिलाकर, पर्सनल लोन रिजेक्ट होना निराशाजनक हो सकता है, लेकिन आप सुधार लाकर वापसी भी कर सकते हैं. रिजेक्शन की वजह समझकर, CIBIL स्कोर सुधारकर और बेहतर फाइनेंशियल मैनेजमेंट से आप अगली बार आसानी से अप्रूवल पा सकते हैं.

अगर आप भी बिना झंझट के पर्सनल लोन लेना चाहते हैं, तो मनीकंट्रोल का ऑनलाइन लेंडिंग प्लेटफॉर्म जरूर एक्स्प्लोर करें. यहां आप लेंडर से 50 लाख रुपए तक का पर्सनल लोन ले सकते हैं, जिस पर ब्याज दर सिर्फ 9.99% सालाना से शुरू होती है. इसका पूरा प्रोसेस 100% डिजिटल है, यानी आप घर बैठे भी अप्लाई कर सकते हैं.

इन बाजारों में नहीं गए तो क्या घुमा, जानिए कश्मीर से कन्याकुमारी तक शॉपिंग वाली यात्रा!

भारत के हर राज्य की लोकल मार्केट वहां की संस्कृति और परंपराओं की पहचान होती है। इन बाजारों में अलग-अलग तरह के हस्तशिल्प, कपड़े, ज्वेलरी और स्थानीय चीजें मिलती हैं। हर जगह की अपनी खास कारीगरी और स्टाइल होता है जो उसे अलग बनाता है। ये मार्केट न सिर्फ खरीदारी के लिए, बल्कि वहां की लाइफस्टाइल समझने के लिए भी बहुत खास होती हैं। चलिए जानते हैं भारत के विभिन्न राज्यों की उन मशहूर मार्केट्स के बारे में, जहां हर कोना अपने आप में एक अलग कहानी बयां करता है:

1. राजस्थान – जौहरी बाजार, बापू बाजार, नेहरू बाजार, त्रिपोलिया बाजार, चौड़ा रास्ता (जयपुर)

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जयपुर के ये बाजार अपने शाही हस्तशिल्प और रंगीन संस्कृति के लिए प्रसिद्ध हैं। जौहरी बाजार में कुंदन और मीनाकारी ज्वेलरी मिलती है जो रॉयल राजस्थानी स्टाइल को दिखाती है। बापू बाजार में जयपुरी जूतियां, ब्लॉक प्रिंट कपड़े और लाख की चूड़ियां मिलती हैं। नेहरू और त्रिपोलिया बाजार कपड़ों, हैंडीक्राफ्ट और पारंपरिक वस्तुओं के लिए जाने जाते हैं। चौड़ा रास्ता लोकल शॉपिंग और बजट खरीदारी के लिए फेमस है। यहां की चीजों की खासियत हाथ से बनी कारीगरी और रंग-बिरंगा डिज़ाइन है।जयपुरी जूतियों की कीमत लगभग ₹400 से ₹1,500 तक होती है, जबकि लाख की चूड़ियां ₹50 से ₹500 तक मिल सकती हैं। ब्लॉक प्रिंटेड बेडशीट और कपड़ों की कीमत ₹500 से ₹3,000 तक रहती है। इन बाजारों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां की ज्यादातर वस्तुएं हाथ से तैयार की जाती हैं और इनमें राजस्थान की पारंपरिक कला की झलक दिखाई देती है।

2. जम्मू-कश्मीर – लाल चौक, पोलो व्यू मार्केट, बटामालू मार्केट, रेनावारी बाजार, डलगेट मार्केट (श्रीनगर)

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श्रीनगर के ये बाजार कश्मीरी संस्कृति का दिल माने जाते हैं। लाल चौक सबसे प्रसिद्ध है जहां पश्मीना शॉल, केसर और पेपर माशे कला मिलती है। पोलो व्यू और डलगेट मार्केट में लकड़ी की नक्काशी और ऊनी कपड़े मिलते हैं। बटामालू और रेनावारी लोकल लाइफस्टाइल और पारंपरिक सामान के लिए जाने जाते हैं। यहां की सबसे बड़ी खासियत प्रीमियम क्वालिटी और पारंपरिक कश्मीरी हैंडीक्राफ्ट है।  असली पश्मीना शॉल की कीमत ₹10,000 से शुरू होकर ₹60,000 या उससे अधिक तक जा सकती है। केसर ₹300 से ₹600 प्रति ग्राम तक बिकता है। अखरोट की लकड़ी से बने सजावटी सामान ₹1,000 से ₹15,000 तक मिलते हैं। इस बाजार की सबसे बड़ी खासियत इसकी सदियों पुरानी कारीगरी और वर्ल्ड फेमस पश्मीना प्रोडक्ट हैं।

3. उत्तर प्रदेश – चौक बाजार, गोला गंज, हजरतगंज मार्केट, लहुराबीर, नयागंज (लखनऊ/वाराणसी/कानपुर)

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लखनऊ और वाराणसी के ये बाजार पारंपरिक भारतीय कला का बड़ा केंद्र हैं। चौक बाजार और गोला गंज में बनारसी साड़ी और जरी वर्क मिलता है। हजरतगंज मार्केट आधुनिक और ब्रांडेड शॉपिंग के लिए फेमस है। लहुराबीर और नयागंज में कपड़े, ज्वेलरी और लोकल सामान मिलता है। यहां की खासियत शाही डिजाइन और पारंपरिक बुनाई कला है।  साधारण बनारसी साड़ी ₹3,000 से शुरू होती है जबकि विशेष डिजाइन वाली साड़ियां ₹1 लाख से भी अधिक कीमत में बिकती हैं। इसके अलावा पीतल के बर्तन और सजावटी सामान ₹500 से ₹10,000 तक उपलब्ध रहते हैं। बनारसी साड़ियों की खासियत उनका शानदार डिज़ाइन, महीन बुनाई और शाही लुक है।

4. दिल्ली – सरोजिनी नगर, दिल्ली हाट, चांदनी चौक, करोल बाग, लाजपत नगर

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नई दिल्ली के ये बाजार शॉपिंग का हब हैं। सरोजिनी नगर सस्ते फैशन कपड़ों के लिए फेमस है, जबकि चांदनी चौक ट्रेडिशनल वेडिंग शॉपिंग के लिए जाना जाता है। दिल्ली हाट पूरे भारत की कला को एक जगह दिखाता है। करोल बाग और लाजपत नगर ब्रांडेड और लोकल दोनों तरह की शॉपिंग के लिए लोकप्रिय हैं। यहां की खासियत वैरायटी और बजट फ्रेंडली शॉपिंग है।  हैंडलूम कपड़ों की कीमत ₹300 से ₹2,000 तक होती है, जबकि हस्तनिर्मित ज्वेलरी ₹100 से ₹1,500 तक मिल जाती है। दिल्ली हाट की खासियत यह है कि यहां सीधे कारीगर अपने उत्पाद बेचते हैं, जिससे ग्राहकों को असली और गुणवत्तापूर्ण सामान मिलता है।

5. पश्चिम बंगाल – गरियाहाट, न्यू मार्केट, बड़ाबाजार, साउथ सिटी मार्केट, एस्प्लेनेड मार्केट (कोलकाता)

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कोलकाता के ये बाजार बंगाली संस्कृति की पहचान हैं। गरियाहाट और न्यू मार्केट में तांत और कांथा साड़ियां मिलती हैं। बड़ाबाजार थोक खरीदारी के लिए फेमस है। साउथ सिटी और एस्प्लेनेड मॉडर्न शॉपिंग के लिए जाने जाते हैं। यहां की खासियत हल्की, आरामदायक और खूबसूरत बंगाली साड़ियां हैं। तांत साड़ियों की कीमत ₹800 से ₹8,000 तक और कांथा साड़ियों की कीमत ₹1,500 से ₹20,000 तक हो सकती है। टेराकोटा ज्वेलरी ₹100 से ₹2,000 तक मिल जाती है। इस बाजार की खासियत हल्की, आरामदायक और खूबसूरत कॉटन साड़ियां हैं जिन्हें गर्म मौसम के लिए आइडियल माना जाता है।

6. तमिलनाडु – टी. नगर, पोंडी बाजार, पारिस कॉर्नर, माउंट रोड, कांचीपुरम मार्केट

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चेन्नई और कांचीपुरम के ये बाजार सिल्क और ट्रेडिशनल प्रोडक्ट्स के लिए प्रसिद्ध हैं। टी. नगर और पोंडी बाजार कपड़ों और ज्वेलरी के लिए बड़े हब हैं। पारिस कॉर्नर पुराने स्टाइल की लोकल शॉपिंग के लिए जाना जाता है। माउंट रोड मॉडर्न मार्केट है। कांचीपुरम मार्केट सिल्क साड़ियों के लिए वर्ल्ड फेमस है।  यहां मिलने वाली कांचीपुरम सिल्क साड़ियां शुद्ध रेशम और असली जरी से बनाई जाती हैं। इनकी कीमत ₹5,000 से शुरू होकर ₹2 लाख या उससे ज्यादा तक जा सकती है। इसके अलावा कांस्य मूर्तियां और मंदिर कला से जुड़ी वस्तुएं भी यहां लोकप्रिय हैं। कांचीपुरम सिल्क की विशेषता इसकी मजबूती, चमक और पारंपरिक दक्षिण भारतीय डिजाइनों में है।

7. गुजरात – लॉ गार्डन, रिंग रोड टेक्सटाइल मार्केट, मणेक चौक, मणिनगर मार्केट, राजकोट मार्केट

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सूरत और अहमदाबाद के ये बाजार टेक्सटाइल और स्ट्रीट शॉपिंग के लिए जाने जाते हैं। लॉ गार्डन हैंडीक्राफ्ट और ज्वेलरी के लिए फेमस है। रिंग रोड मार्केट भारत का सबसे बड़ा टेक्सटाइल हब है। मणेक चौक रात के खाने और ज्वेलरी दोनों के लिए प्रसिद्ध है। यहां की खासियत बंधनी और ड्रेस मटेरियल की बड़ी वैरायटी है। सूरत का रिंग रोड टेक्सटाइल मार्केट भारत के सबसे बड़े कपड़ा बाजारों में गिना जाता है। यहां बंधनी साड़ियां, ड्रेस मटेरियल, डिजाइनर कपड़े और एम्ब्रॉयडरी वाले वस्त्र बड़ी मात्रा में मिलते हैं। साड़ियों की कीमत ₹300 से ₹20,000 तक और ड्रेस मटेरियल ₹200 से ₹10,000 तक हो सकता है। इस बाजार की खासियत यह है कि यहां पूरे देश के व्यापारी कपड़ा खरीदने आते हैं।

8. महाराष्ट्र – कोलाबा कॉजवे, क्रॉफर्ड मार्केट, लिंकिंग रोड, ज़वेरी बाजार, दादर मार्केट (मुंबई)

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मुंबई के ये बाजार फैशन और ट्रेडिशन का मिश्रण हैं। कोलाबा कॉजवे स्ट्रीट शॉपिंग के लिए फेमस है। क्रॉफर्ड मार्केट ग्रोसरी और घरेलू सामान के लिए जाना जाता है। लिंकिंग रोड फैशनेबल कपड़ों के लिए लोकप्रिय है। ज़वेरी बाजार ज्वेलरी का बड़ा हब है। यहां की खासियत ट्रेंडी और बजट शॉपिंग है।  हाथ से बनी कोल्हापुरी चप्पलें ₹500 से ₹5,000 तक मिलती हैं जबकि पैठणी साड़ियों की कीमत ₹10,000 से ₹2 लाख तक हो सकती है। इन उत्पादों की विशेषता उनकी टिकाऊ गुणवत्ता और पारंपरिक मराठी कला है।

9. पंजाब – हॉल बाजार, लहौरी गेट, कपूरथला मार्केट, जालंधर मॉडल टाउन मार्केट, पटियाला बाजार

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अमृतसर के ये बाजार पंजाबी संस्कृति की झलक दिखाते हैं। हॉल बाजार फुलकारी और जुत्तियों के लिए फेमस है। लहौरी गेट ट्रेडिशनल सूट और कपड़ों के लिए जाना जाता है। मॉडल टाउन मॉडर्न शॉपिंग के लिए है। यहां की खासियत रंगीन कढ़ाई और पंजाबी स्टाइल फैशन है।  यहां फुलकारी कढ़ाई वाले दुपट्टे, पंजाबी जुत्तियां और पारंपरिक सूट खूब बिकते हैं। फुलकारी दुपट्टों की कीमत ₹500 से ₹10,000 तक और जुत्तियां ₹300 से ₹3,000 तक मिलती हैं। इन वस्तुओं की खासियत उनकी रंगीन कढ़ाई और अट्रैक्टिव डिज़ाइन हैं।

10. केरल – ब्रॉडवे मार्केट, मट्टनचेरी, कोझिकोड SM स्ट्रीट, त्रिवेंद्रम चाला मार्केट, एर्नाकुलम मार्केट

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कोच्चि के ये बाजार मसालों और ट्रेडिशनल प्रोडक्ट्स के लिए फेमस हैं। ब्रॉडवे और मट्टनचेरी मसालों के लिए जाने जाते हैं। SM स्ट्रीट और चाला मार्केट लोकल शॉपिंग के लिए प्रसिद्ध हैं। यहां नारियल उत्पाद और आयुर्वेदिक सामान भी मिलता है। इसकी खासियत प्राकृतिक और हाई क्वालिटी प्रोडक्ट्स हैं। यहां इलायची, काली मिर्च, दालचीनी, नारियल तेल और आयुर्वेदिक औषधियां बड़ी मात्रा में मिलती हैं। इलायची ₹1,500 से ₹3,500 प्रति किलो और काली मिर्च ₹400 से ₹900 प्रति किलो तक बिकती है। इस बाजार की खासियत इसकी हाई क्वालिटी वाले मसाले हैं जिनकी मांग इंटरनेशनल लेवल पर भी रहती है।

11. असम – फैंसी बाजार, पान बाजार, उलूबाड़ी मार्केट, जोरहाट मार्केट, डिब्रूगढ़ मार्केट

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गुवाहाटी के ये बाजार नॉर्थ-ईस्ट की संस्कृति का बड़ा केंद्र हैं। फैंसी बाजार सबसे प्रसिद्ध है जहां मूगा सिल्क, बांस से बने प्रोडक्ट और असम चाय मिलती है। पान बाजार और उलूबाड़ी लोकल शॉपिंग और दैनिक जरूरतों के लिए जाने जाते हैं। जोरहाट और डिब्रूगढ़ मार्केट चाय बागानों और ट्रेडिशनल हैंडीक्राफ्ट के लिए फेमस हैं। यहां की खासियत ऑर्गेनिक प्रोडक्ट और यूनिक नॉर्थ-ईस्ट हैंडीक्राफ्ट है।  मूगा सिल्क साड़ियों की कीमत ₹5,000 से ₹50,000 तक और असम चाय ₹200 से ₹2,000 तक मिलती है। मूगा सिल्क की खासियत यह है कि यह दुनिया में केवल असम में ही नेचुरल तरीके से तैयार होता है।

12. ओडिशा – एकाम्रा हाट, यूनिट-1 मार्केट, भुवनेश्वर मार्केट, कटक चौक, संबलपुर मार्केट

Pipli and Raghurajpur Handicraft Villages of Odisha – So Many Travel Tales

भुवनेश्वर के ये बाजार कला और संस्कृति का सुंदर संगम हैं। एकाम्रा हाट पत्ताचित्र पेंटिंग और इकट साड़ियों के लिए प्रसिद्ध है। यूनिट-1 और भुवनेश्वर मार्केट लोकल कपड़े और रोजमर्रा की शॉपिंग के लिए हैं। कटक और संबलपुर मार्केट सिल्वर फिलिग्री और हैंडीक्राफ्ट के लिए जाने जाते हैं। यहां की खासियत पारंपरिक ओडिशी कला और हस्तनिर्मित प्रोडक्ट हैं। पत्ताचित्र पेंटिंग ₹500 से ₹50,000 तक और इकट साड़ियां ₹1,500 से ₹30,000 तक मिलती हैं। यह बाजार ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है।

13. मध्य प्रदेश – न्यू मार्केट, बिट्टन मार्केट, मृगनयनी, इंदौर सराफा बाजार, ग्वालियर महाराज बाजार

फ़ूड स्ट्रीट्स से फ़ाइन डाइनिंग तक: वास्तुकला किस प्रकार खाद्य संस्कृति को प्रभावित करती है - आरटीएफ | भविष्य पर पुनर्विचार

भोपाल और इंदौर के ये बाजार हैंडीक्राफ्ट और फूड दोनों के लिए प्रसिद्ध हैं। न्यू मार्केट और बिट्टन मार्केट मॉडर्न शॉपिंग के लिए जाने जाते हैं। मृगनयनी साड़ी और हैंडलूम का बड़ा केंद्र है। इंदौर सराफा बाजार रात की फूड स्ट्रीट के लिए फेमस है। यहां की खासियत चंदेरी, महेश्वरी साड़ी और स्ट्रीट फूड है। चंदेरी साड़ी ₹2,000 से ₹30,000 तक तथा महेश्वरी साड़ी ₹1,500 से ₹25,000 तक मिलती है। यहां गोंड कला की पेंटिंग्स भी काफी पॉपुलर हैं। इस बाजार की खासियत पारंपरिक हस्तकरघा उत्पाद हैं।

14. झारखंड – रातू रोड, पलाश मार्ट, सर्कुलर रोड मार्केट, हटिया मार्केट, धनबाद बैंक मोड़ मार्केट

Rashmi Marble & Handicraft in Shastri Nagar, Jodhpur - Best Handicraft Item Exporters in Jodhpur - Justdial

रांची के ये बाजार आदिवासी संस्कृति की पहचान हैं। पलाश मार्ट सबसे प्रसिद्ध है जहां बांस के प्रोडक्ट और हैंडीक्राफ्ट मिलते हैं। रातू रोड और सर्कुलर रोड कपड़े और लोकल शॉपिंग के लिए जाने जाते हैं। हटिया और धनबाद मार्केट दैनिक जरूरतों के लिए फेमस हैं। यहां की खासियत आदिवासी कला और सस्टेनेबल हैंडीक्राफ्ट है। यहां बांस की सजावटी वस्तुएं ₹100 से ₹5,000 तक और हस्तनिर्मित राखियां ₹150 से ₹1,200 तक मिलती हैं। यह बाजार स्थानीय महिला समूहों और कारीगरों को बढ़ावा देता है।

15. हिमाचल प्रदेश – मॉल रोड, लक्कड़ बाजार, मैनाली मार्केट, भूटान मार्केट, सदर बाजार, अखाड़ा बाजार

थाईलैंड के एक मंदिर की दीवार पर रामायण महाकाव्य की लकड़ी की नक्काशी तस्वीर और मुफ्त डाउनलोड के लिए चित्र - Pngtree

शिमला और कुल्लू–मनाली के ये बाजार पहाड़ी संस्कृति की झलक दिखाते हैं। मॉल रोड और लक्कड़ बाजार ऊनी कपड़ों, शॉल और हिमाचली टोपी के लिए फेमस हैं। मनाली और धर्मशाला मार्केट टूरिस्ट शॉपिंग और तिब्बती हैंडीक्राफ्ट के लिए जाने जाते हैं। कुल्लू का सदर और अखाड़ा बाजार पारंपरिक शॉल और लकड़ी की कारीगरी के लिए प्रसिद्ध हैं। यहां की खासियत ठंडी जलवायु के हिसाब से बने ऊनी और हस्तनिर्मित प्रोडक्ट हैं। हिमाचली शॉल ₹500 से ₹10,000 तक और लकड़ी के हस्तशिल्प ₹300 से ₹15,000 तक मिलते हैं। इस बाजार की सबसे बड़ी खासियत हिमालयी संस्कृति और स्थानीय हस्तकला का अनूठा संगम है।

इन बाजारों में खरीदारी करते समय बिल लेना, GI टैग या सर्टिफिकेट देखना और लोकल कारीगरों से खरीदना बेहतर माना जाता है, क्योंकि इससे असली प्रोडक्ट मिलने की संभावना बढ़ जाती है। इन 15 राज्यों की लोकल मार्केटें केवल खरीदारी का सेंटर नहीं हैं, बल्कि वे अपने-अपने क्षेत्र की संस्कृति, इतिहास, कला और परंपराओं की पहचान भी हैं

Mallikarjun Kharge: “चुप रहो, बैठ जाओ!” कांग्रेस कार्यक्रम में ‘डीके-डीके’ नारे लगाने पर भड़के खड़गे, कार्यकर्ताओं को लगाई फटकार

Mallikarjun Kharge: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने रविवार को पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान हंगामा करने वाले कार्यकर्ताओं को जमकर फटकार लगाई। दरअसल, कार्यक्रम के बीच कुछ कार्यकर्ता कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के समर्थन में “डीके-डीके” के नारे लगाने लगे, जिससे खड़गे नाराज हो गए। उन्होंने कार्यकर्ताओं को डांटते हुए कहा कि यह कांग्रेस का कार्यक्रम है, किसी एक नेता का नहीं। उन्होंने गुस्से में कहा, “चुप रहो! बैठ जाओ। ऐसा लग रहा है जैसे पूरा देश तुम्हारे हाथ में आ गया हो। बेकार लोग!”

खड़गे ने चिल्लाते हुए कहा, “यह कांग्रेस पार्टी की बैठक है। यह किसी एक व्यक्ति के लिए आयोजित कार्यक्रम नहीं है। हम सभी लोग यहां पार्टी को मजबूत और एकजुट करने के लिए इकट्ठा हुए हैं। अगर एक व्यक्ति एक नाम का नारा लगाता है और दूसरा किसी और नाम का, तो क्या बाकी लोग यहां सिर्फ कचरा साफ करने आए हैं?”

खड़गे ने कार्यकर्ताओं को दी चेतावनी

राजनीति में अपने 58 साल के लंबे करियर का जिक्र करते हुए, उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि पार्टी ही उनकी पहचान का आधार है और उन्हें चेतावनी दी कि उनके अनुशासनहीन व्यवहार पर कार्रवाई जरूर होगी। उन्होंने कहा, “याद रखिए… पार्टी के लिए अनुशासन हमेशा जरूरी है। जो भी यहां शोर मचा रहा है, उसका फुटेज होगा। फुटेज देखने के बाद मैं अनुशासनात्मक कार्रवाई करूंगा।”

वहीं, मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा कार्यकर्ताओं को फटकार लगाने पर बीजेपी नेता गौरव वल्लभ ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि इस घटना से कांग्रेस के भीतर सत्ता के लिए चल रही खींचतान उजागर हो गई है। वल्लभ ने आरोप लगाया कि खड़गे खुद मुख्यमंत्री बनना चाहते थे।

इसके अलावा, बीजेपी नेता ने कांग्रेस के नेतृत्व पर भी तंज कसते हुए कहा कि पार्टी तीन “होल्डिंग कंपनियों” द्वारा नियंत्रित है – सोनिया गांधी के लिए “कांग्रेस M”, प्रियंका गांधी के लिए “कांग्रेस P” और राहुल गांधी के लिए “कांग्रेस R”, जबकि खड़गे वाली “कांग्रेस K” केवल उनकी सहायक कंपनी के रूप में काम करती है।

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Blue Cloud Softech share: एलॉन मस्क की स्पेसएक्स से संभावित एग्रीमेंट की बातचीत से ब्लू क्लाउड सॉफ्टेक के शेयर बने रॉकेट

Blue Cloud Softech share: ब्लू क्लाउड सॉफ्टेक सॉल्यूशंस के शेयरों में 22 जून को तूफानी तेजी दिखी। 20 फीसदी चढ़ने के बाद शेयर में अपर सर्किट लग गया। इसकी वजह कंपनी का एक बड़ा ऐलान है। कंपनी ने कहा है कि वह स्पेसएक्स इंटरनेशनल के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में शुरुआती कारोबारी मौकों का पता लगा रही है। स्पेसएक्स इंटरनेशनल अमेरिकी बिजनेसमैन एलॉन मस्क की स्पेसएक्स ईकोसिस्टम का हिस्सा है।

इंफॉर्मेशन एक्सचेंज के लिए बनाया फ्रेमवर्क

Blue Cloud Softech ने इस बारे में स्टॉक एक्सचेंजों को बताया है। उसने कहा है कि वह स्पेशएक्स इंटरनेशनल के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े नॉन-बाइंडिंग अपॉर्चुनिटीज का पता लगा रही है। उसने कहा है कि दोनों पक्षों ने इस बारे में जानकारियों के आदान-प्रदान के लिए एक फ्रेमवर्क बनाया है। दोनों कंपनियां बातचीत के जरिए एआई से जुड़े ,संभावित क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं का पता लगाएंगी।

AI और क्लाउड कंप्यूटिंग में कंपनी की दिलचस्पी

कंपनी ने कहा है कि उसका यह कदम डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में मौकों की तलाश करने की रणनीति का हिस्सा है। कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसी उभरती टेक्नोलॉजी में मौकों का इस्तेमाल करना चाहती है। हालांकि, उसने यह स्पष्ट किया है कि अभी बातचीत शुरुआती अवस्था में है और नॉन-बाइंडिंग है। बातचीत की वजह से किसी पक्ष पर ट्रांजेक्शन, ज्वाइंट वेंचर, इनवेस्टमेंट, पार्टनरशिप या किसी तरह का निश्चित एग्रीमेंट करने का दबाव नहीं होगा।

इस साल की शुरुआत में इम्पैक्स के अधिग्रहण को मंजूरी

ब्लू क्लाउड ने कहा है कि दोनों कंपनियों के बीच किसी तरह के सहयोग से पहले ड्यू डिलिजेंस, म्यूचुअल एग्रीमेंट, रेगुलेटरी एप्रूवल्स जरूरी होंगे। इस साल की शुरुआत में ब्लू क्लाउड ने अमेरिकी एनर्जी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म ग्लोबल इमपैक्स इंक के अधिग्रहण को मजूरी दी थी। इस ट्रांजेक्शन की वैल्यू करीब 372.8 करोड़ रुपये थी।

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बीते एक साल में 26 फीसदी गिरा है शेयर 

Global Impx के अधिग्रहण के जरिए ब्लू क्लाउड का मकसद एनर्जी-बैक्ड डेटा सेंटर्स और एआई कंप्यूट ईकोसिस्टम्स में क्षमता विकसित करना है। इस ट्रांजेक्शन में एक 197 एकड़ का डेटा सेंटर ओडिशा में बनाने का भी प्लान है। कई चरणों में इसकी कपैसिटी बढ़ाकर 5 मेगावॉट से 100 मेगावॉट की जा सकती है। ब्लू क्लाउड का शेयर बीते एक साल में 26 फीसदी गिरा है।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

SSC CGL Vacancy last date 2026: 12,000 से ज्यादा पदों पर भर्ती के लिए आवेदन का आखिरी मौका आज, जानें कब है परीक्षा और पेपर पैटर्न

SSC CGL Vacancy last date 2026: कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (CGL) परीक्षा 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन की आज, 22 जून 2026 को आखिरी तारीख। इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए योग्य स्नातक उम्मीदवारों की केंद्र सरकार के अलग-अलग विभागों और मंत्रालयों में में 12,256 ग्रुप B और ग्रुप C पदों पर नियुक्ति की जानी है। इनके लिए अप्लाई करने का आखिरी मौका है।

जो उम्मीदवार अप्लाई करना चाहते हैं, उन्हें आज रात 11 बजे से पहले ऑफिशियल एसएससी वेबसाइट के जरिए अपना आवेदन जमा करना होगा। फीस पेमेंट की आखिरी तारीख 23 जून, 2026 है। जनरल कैटेगरी के कैंडिडेट्स के लिए आवेदन शुल्क 100 रुपये है, जबकि महिलाएं और SC, ST, PwBD, और एक्स-सर्विसमैन कैटेगरी के उम्मीदवारों को इससे छूट दी गई है।

कमीशन 29 जून से 1 जुलाई, 2026 तक एक करेक्शन विंडो खोलेगा, जिससे उम्मीदवार अपने जमा किए गए आवेदन में गलतियां ठीक कर सकेंगे। खास बात यह है कि अभ्यर्थियों को इस विंडो के दौरान अपने आवेदन में बदलाव करने के दो मौके मिलेंगे। पहली बार बदलाव के लिए 200 रुपये और दूसरी बार बदलाव के लिए 500 रुपये का सुधार शुल्क लगेगा।

जरूरी तारीखें और परीक्षा कार्यक्रम

21 मई, 2026 को जारी ऑफिशियल नोटिफिकेशन के मुताबिक, एसएससी सीजीएल 2026 रिक्रूटमेंट प्रोसेस इस टाइमलाइन पर होगा:

आवेदन शुरू होने की तारीख : 21 मई, 2026

आवेदन करने की आखिरी तारीख : 22 जून, 2026 (रात 11 बजे)

शल्क भुगतान की आखिरी तारीख : 23 जून, 2026 (रात 11 बजे)

आवेदन सुधार विंडो : 29 जून से 1 जुलाई, 2026

टियर-I परीक्षा : अगस्त-सितंबर 2026 (टेंटेटिव)

टियर-II परीक्षा : दिसंबर 2026 (टेंटेटिव)

योग्यता नियम

शैक्षिक योग्यता : जूनियर स्टैटिस्टिकल ऑफिसर (JSO) और स्टैटिस्टिकल इन्वेस्टिगेटर ग्रेड-II को छोड़कर सभी पोस्ट के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास किसी भी विषय में किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से स्नातक डिग्री होनी चाहिए।

जूनियर स्टैटिस्टिकल ऑफिसर (JSO) : कैंडिडेट के पास किसी भी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से बैचलर डिग्री होनी चाहिए, जिसमें 12वीं कक्षा में गणित में कम से कम 60% मार्क्स हों।

स्टैटिस्टिकल इन्वेस्टिगेटर ग्रेड-II : कैंडिडेट के पास इकोनॉमिक्स, स्टैटिस्टिक्स, या मैथेमेटिक्स को जरूरी या इलेक्टिव सब्जेक्ट के तौर पर लेकर बैचलर डिग्री होनी चाहिए।

उम्र सीमा : उम्र सीमा पदों के हिसाब से अलग-अलग है, आम तौर पर यह 18 से 32 साल है। सीएसएस, रेल मंत्रालय, MEA, AFHQ, और सब इंस्पेक्टर (CBI) पोस्ट में एएसओ के लिए अप्लाई करने वाले कैंडिडेट की उम्र 20 से 30 साल के बीच होनी चाहिए।

उम्र 1 अगस्त, 2026 के हिसाब से निर्धारित की जाएगी। सरकारी नियमों के हिसाब से आरक्षित श्रेणी के लिए ऊपरी उम्र की लिमिट में छूट दी जाएगी।

एसएससी सीजीएल 2026 परीक्षा पैटर्न

टियर-I एग्जाम पैटर्न

टियर-I एग्जाम एक कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) होगा जो एक घंटे का होगा, जिसमें 200 अंकों के 100 सवाल होंगे। 2026 के लिए खास बदलावों में हर सब्जेक्ट के लिए 15 मिनट का सेक्शनल टाइमर शामिल है, जिसके बाद सेक्शन अपने आप बंद हो जाएगा।

परीक्षा में चार हिस्से होंगे :

जनरल इंटेलिजेंस और रीजनिंग : 25 सवाल (50 मार्क्स)

जनरल अवेयरनेस : 25 सवाल (50 मार्क्स)

क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड : 25 सवाल (50 मार्क्स)

इंग्लिश कॉम्प्रिहेंशन : 25 सवाल (50 मार्क्स)

हर गलत जवाब के लिए 0.50 मार्क्स की नेगेटिव मार्किंग काटी जाएगी।

टियर-II एग्जाम पैटर्न

टियर-II एग्जाम में तीन पेपर होंगे, जिसमें पेपर I सभी पोस्ट के लिए ज़रूरी होगा। पेपर II खास तौर पर जूनियर स्टैटिस्टिकल ऑफिसर (JSO) पोस्ट के लिए अप्लाई करने वाले कैंडिडेट्स के लिए है।

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रात के बचे चावल से बनाएं ऐसे मजेदार और हेल्दी नाश्ते के आइडियाज, जो बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आएंगे

बचे हुए चावल अक्सर घरों में बच तो जाते हैं, लेकिन सही इस्तेमाल न होने पर फेंक भी दिए जाते हैं। जबकि इन्हीं चावलों को थोड़ी सी समझदारी से एक स्वादिष्ट और झटपट बनने वाले व्यंजन में बदला जा सकता है। वेज फ्राइड राइस इसी का सबसे आसान और लोकप्रिय तरीका है, जिसे कम समय में तैयार किया जा सकता है। इसमें अलग-अलग सब्जियों और हल्के मसालों का इस्तेमाल करके स्वाद को और भी बेहतर बनाया जाता है।

यह न सिर्फ बची हुई चीजों का सही उपयोग करता है, बल्कि बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आने वाला एक टेस्टी ब्रेकफास्ट या स्नैक बन जाता है। घर में मौजूद साधारण सामग्री से बनने वाली यह डिश रोजमर्रा की कुकिंग को भी आसान और मजेदार बना देती है।

चावल का चीला

बेसन या सूजी के चीले तो आपने खाए होंगे, लेकिन राइस चीला भी उतना ही स्वादिष्ट होता है। चावल को पीसकर उसमें हरी मिर्च, प्याज, धनिया और मसाले मिलाएं और तवे पर कुरकुरा सेंक लें। इसे टोमैटो सॉस या किसी चटनी के साथ परोसा जा सकता है।

चावल के पॉप्स

चावल में उबली सब्जियां, मसाले और थोड़ा चीज मिलाकर छोटे-छोटे बॉल्स बनाएं। इन्हें ब्रेड क्रंब्स में लपेटकर सुनहरा होने तक फ्राई करें। बाहर से क्रिस्पी और अंदर से सॉफ्ट ये स्नैक बच्चों को खूब पसंद आता है।

चावल के पकौड़े

बचे हुए चावल से बनने वाले पकौड़े शाम के स्नैक के लिए बेहतरीन विकल्प हैं। इसमें उबले आलू, प्याज, हरी मिर्च और मसाले मिलाकर पकौड़े तैयार करें और गरमा-गरम चाय के साथ सर्व करें।

लेमन राइस

अगर आपको हल्का और चटपटा स्वाद पसंद है तो लेमन राइस एक शानदार विकल्प है। सरसों के दाने, करी पत्ते, मूंगफली और नींबू के रस के साथ बना यह डिश खुशबू और स्वाद दोनों में बेहतरीन होता है।

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Viral Video: ब्रश से रंगे जा रहे समोसे? वायरल क्लिप ने लोगों को कर दिया हैरान

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसने लोगों के बीच काफी हैरानी और चर्चा पैदा कर दी है। वीडियो में पहली नजर में ऐसा लगता है जैसे कोई व्यक्ति समोसों जैसे दिखने वाले खाद्य पदार्थों को ब्रश की मदद से रंग रहा है। यह अनोखा दृश्य देखने के बाद यूजर्स के बीच तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। कुछ लोगों ने इसे खाने की चीजों में मिलावट से जोड़कर चिंता जताई, जबकि कुछ ने इसे पूरी तरह गलत समझ बताया। वहीं कई यूजर्स का कहना है कि ये समोसे असली खाने के लिए नहीं बल्कि किसी तरह की सजावटी या आर्टवर्क से जुड़ी चीजें हो सकती हैं।

इस पूरे मामले ने इंटरनेट पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जहां लोग वीडियो की सच्चाई को लेकर अलग-अलग दावे कर रहे हैं और असल सच अब भी रहस्य बना हुआ है।

 “क्या समोसे में भी मिलावट?”

यह वीडियो X (ट्विटर) पर शेयर किया गया, जिसके साथ दावा किया गया कि समोसों पर रंग लगाया जा रहा है। यूजर ने लिखा कि समोसे तो शुद्ध होने चाहिए, लेकिन यहां भी मिलावट दिखाई दे रही है। यह बात फैलते ही लोगों में नाराजगी और सवाल दोनों बढ़ने लगे।

वीडियो में आखिर दिख क्या रहा है?

क्लिप में एक व्यक्ति जमीन पर बैठा दिखता है, जिसके चारों ओर समोसे जैसे त्रिकोण आकार के टुकड़े रखे हैं। कुछ हल्के रंग के हैं तो कुछ सुनहरे तले हुए जैसे लगते हैं। वह ब्रश की मदद से उन पर रंग लगाता नजर आता है। पास में छोटे-छोटे कंटेनर और कई और टुकड़े भी रखे हुए हैं, जिससे पूरा दृश्य और भी रहस्यमय लगने लगता है।

शुरू हुई अटकलों की बौछार

जैसे-जैसे वीडियो वायरल हुआ, वैसे-वैसे प्रतिक्रियाएं भी दो हिस्सों में बंट गईं। कुछ लोगों ने इसे लेकर सवाल उठाए और इसे गलत बताया, जबकि कुछ ने कहा कि यह खाने वाली चीज नहीं बल्कि सजावट का सामान है।

कुछ यूजर्स ने इसे कला का नमूना बताया, तो कुछ ने दावा किया कि ये नकली समोसे हैं जो सिर्फ शो के लिए बनाए गए हैं। एक यूज़र ने तो यहां तक लिख दिया कि यह मिट्टी से बनी डेकोरेशन हो सकती है।

असली सच्चाई अब भी रहस्य

अब तक इस वीडियो की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि यह समोसे असली खाने के हैं या सिर्फ सजावटी आइटम। अलग-अलग दावों के बीच सच्चाई अभी भी साफ नहीं है।

फिलहाल यह क्लिप इंटरनेट पर चर्चा का विषय बनी हुई है और एक बार फिर साबित कर रही है कि सोशल मीडिया पर कोई भी साधारण सी चीज भी बड़ी बहस में बदल सकती है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सोशल मीडिया पर साझा किए गए कंटेंट पर आधारित है। वीडियो और दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।

 

Congress vs Tharoor: शशि थरूर के कश्मीर दौरे पर विवाद, कांग्रेस के भीतर आपसी झगड़े सबके सामने आए

Congress vs Tharoor: कांग्रेस नेता शशि थरूर ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से उनके सरकारी आवास पर भेंट की। तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सदस्य शशि थरूर के हालिया कश्मीर दौरे ने उनकी पार्टी कांग्रेस के साथ एक और विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस की जम्मू-कश्मीर इकाई ने इस बात के लिए उनकी आलोचना की है कि उन्होंने अपनी पार्टी के सहयोगियों से मुलाकात नहीं की, जबकि उन्होंने उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात की थी।

शशि थरूर ने रविवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर के अपने दौरे के दौरान उन्हें सकारात्मक चीजें महसूस हुईं। इस केंद्र शासित प्रदेश में हालात सामान्य होने की दिशा में उत्साहजनक प्रगति हुई है। ‘नालंदा डायलॉग्स’ के लिए श्रीनगर पहुंचे थरूर ने लोक भवन में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में ये बातें कहीं।

कांग्रेस सांसद ने कहा, “श्रीनगर में! आज लोक भवन में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के साथ एक बेहतरीन बैठक का सौभाग्य मिला। हमने राज्य के हालात और सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रही उत्साहजनक प्रगति पर चर्चा की।’’ उन्होंने कहा कि लोक भवन के दौरे पर उन्होंने सकारात्मक पहल देखी।

उन्होंने आगे कहा, “जब मैं वहां पहुंचा, तो वह (सिन्हा) कश्मीरी लेखक संघ और महिला संगठन की अध्यक्ष से बातचीत कर रहे थे, जो एक सकारात्मक पहल है, जिसका मैंने स्वागत किया। अब भी कई चुनौतियां हैं और बहुत कुछ किया जाना बाकी है, लेकिन बैठक के बाद मुझे सकारात्मकता का अहसास हुआ।”

कांग्रेस हुई आगबबूला

कांग्रेस की J&K यूनिट ने इस बात पर निराशा जताई कि थरूर ने कश्मीर के लोगों या अपनी पार्टी के साथियों से मुलाकात नहीं की। JKPCC के प्रवक्ता रविंदर शर्मा ने थरूर की X पोस्ट के जवाब में लिखा, “कश्मीर के लोग भी उम्मीद कर रहे थे कि आप उनसे मिलेंगे ताकि जमीनी हकीकत को बेहतर ढंग से समझ सकें। कम से कम आप उन पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलने के लिए थोड़ा समय तो निकाल सकते थे जो उस राज्य का दर्जा वापस पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जिसे 7 साल पहले हमसे छीन लिया गया था।”

यह घटनाक्रम थरूर और उनकी अपनी पार्टी के बीच हुई तनातनी के ठीक बाद सामने आया है। कांग्रेस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बातचीत की पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करने को लेकर शनिवार को अपने नेता शशि थरूर की आलोचना की। कांग्रेस ने कहा कि पार्टी सांसद द्वारा प्रधानमंत्री के लिए प्रशंसा अब मानो भौतिक दुनिया की सीमाओं से भी आगे निकल गई है।

पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने यह कटाक्ष भी किया कि अब वे शायद वह भी सुन सकते हैं, जो प्रधानमंत्री मोदी ने कहा ही नहीं। थरूर ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि उनका बयान भारतीय नाविकों की सुरक्षा से जुड़ा था। लेकिन इसे दलगत विवाद में बदल दिया गया।

थरूर ने क्या कहा था?

दरअसल, शशि थरूर ने एक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को भारत की चिंताओं से अवगत कराया। साथ ही इस बात को मजबूती से रखा कि युद्ध के समय कमर्शियल नाविकों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।

खेड़ा ने एक्स पर पोस्ट किया, “मेरे वरिष्ठ सहयोगी डॉ. शशि थरूर की प्रधानमंत्री मोदी के प्रति प्रशंसा अब मानो भौतिक दुनिया की सीमाओं से भी आगे निकल गई है। अब वह शायद उसे भी सुन सकते हैं, जो मोदी ने कहा ही नहीं।”

उन्होंने कहा, “जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी-ट्रंप बैठक पर भारतीय विदेश मंत्रालय की आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, ओमान की खाड़ी में अमेरिका द्वारा तीन भारतीय नाविकों की निर्मम हत्या का कोई उल्लेख नहीं है।”

खेड़ा का कहना है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद यह मोदी–ट्रंप की पहली मुलाकात थी। फिर भी कहीं यह संकेत नहीं मिलता कि प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप के उस बार-बार दोहराए गए दावे का प्रतिवाद किया कि उन्होंने भारत को व्यापार की धमकी देकर युद्धविराम कराया।

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