5 चक्रव्यूह में फंसा मानसून, बारिश को तरसते 7 राज्यों में पारा 40°C के पार, जानें आपके शहर का हाल

Weather Update: क्या आपके शहर में भी मानसून आकर अचानक गायब हो गया है? 15 दिनों में 19 राज्यों को कवर करने वाला मानसून आखिर 8 जून से तेलंगाना में क्यों अटका हुआ है? जानिए आसमान में बने उन 5 'विलेन' सिस्टम के बारे में जिन्होंने रोक रखी है आपकी बारिश!

 

देशभर में जहां एक तरफ जून की शुरुआत में मानसून की रफ्तार ने उम्मीदें जगाई थीं, वहीं पिछले 11 दिनों से मानसून में आई सुस्ती ने कई राज्यों को झुलसने पर मजबूर कर दिया है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान समेत देश के 7 बड़े राज्य इस समय बूंद-बूंद बारिश के लिए तरस रहे हैं। हालत यह है कि इन राज्यों के कई शहरों में पारा 40°C के पार पहुंच चुका है और सामान्य से 60% तक कम बारिश दर्ज की गई है। ALSO READ: मानसून की रफ्तार पर ब्रेक! 15 जून तक 64% कम बारिश, MP-गुजरात समेत कई राज्यों में बढ़ी बेचैनी

बांदा में पारा 43.2°C पार : देश के इन शहरों में भीषण गर्मी का प्रकोप

मौसम विभाग (IMD) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को देश में सबसे ज्यादा तापमान उत्तर प्रदेश के बांदा में 43.2°C रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा अन्य राज्यों के प्रमुख शहरों में भी गर्मी ने लोगों को बेहाल कर रखा है:

  • ओडिशा (बौध) : 42.8°C
  • महाराष्ट्र (ब्रह्मपुरी) : 42.3°C
  • झारखंड (डाल्टनगंज) : 42°C
  • छत्तीसगढ़ (बिलासपुर) : 41.6°C
  • बिहार (छपरा) : 41.6°C
  • मध्य प्रदेश (खजुराहो) : 41.4°C

क्यों अटका है मानसून? ये हैं वो 5 सिस्टम जिन्होंने बढ़ाई चिंता (Scientific Analysis)

मौसम वैज्ञानिकों (Expertise) के अनुसार, मानसून पिछले 11 दिनों से तेलंगाना में अटका हुआ है और आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इसकी मुख्य वजह एक ही समय पर 5 अलग-अलग मौसमी प्रणालियों (Systems) का एक्टिव होना है, जो मानसून को आगे बढ़ने से रोक रहे हैं:

  • अरब सागर से नमी का न आना : इस समय अरब सागर से उठने वाली तेज नमी वाली हवाएं मैदानी इलाकों तक नहीं पहुंच पा रही हैं।
  • बादलों का ठप होना : दक्षिण भारत से मानसून के बादलों का उत्तर की ओर बढ़ने का सिलसिला पूरी तरह से रुक गया है।
  • कमजोर ट्रेड विंड्स (व्यापारिक पवनें) : मानसूनी हवाओं को धक्का देने वाली हवाएं इस समय कमजोर पड़ चुकी हैं।
  • एंटी-साइक्लोनिक सर्कुलेशन : मध्य भारत के ऊपर बने एक विपरीत चक्रवातीय सिस्टम के कारण हवाएं नीचे बैठ रही हैं, जिससे बादल नहीं बन पा रहे हैं।
  • स्थानीय हीट लो (Heat Low) का कमजोर होना : उत्तर भारत में मानसून को खींचने के लिए जिस मजबूत 'लो प्रेशर एरिया' की जरूरत होती है, वह सही तरीके से डेवलप नहीं हो पाया है। ALSO READ: मानसून पर 'अल नीनो' का साया! भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में बड़ी हलचल, IMD ने दी चेतावनी

1 से 18 जून के आंकड़े : महाराष्ट्र और गुजरात में सूखे जैसे हालात

मौसम विभाग के आधिकारिक डेटा (Authoritativeness) के मुताबिक, 1 से 18 जून के बीच पूरे देश में सामान्य से 38% कम बारिश दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार सबसे खराब स्थिति पश्चिमी भारत की रही है:

  • गुजरात : यहां सामान्य से सबसे ज्यादा 79% कम वर्षा दर्ज की गई है।
  • महाराष्ट्र : इस राज्य में भी हालात बेहद चिंताजनक हैं, जहां सामान्य से 78% कम बारिश हुई है।

किसानों के लिए कृषि विशेषज्ञों की सलाह

खरीफ की फसलों और धान की नर्सरी तैयार कर रहे किसानों के लिए पूसा कृषि विज्ञान संस्थान के विशेषज्ञों ने विशेष गाइडलाइंस जारी की हैं:

  • सिंचाई का प्रबंधन : जिन किसानों ने धान की नर्सरी डाल दी है, वे केवल शाम के समय ही हल्की सिंचाई करें ताकि तेज धूप के कारण पानी उबलकर पौधों को नष्ट न करे।
  • बुआई में जल्दबाजी न करें : जब तक आपके क्षेत्र में कम से कम 50 से 60 mm बारिश न हो जाए, तब तक मुख्य खेतों में धान की रोपाई या अन्य फसलों की सीधी बुआई करने से बचें।
  • नमी संरक्षण : खेतों में जैविक मल्चिंग (जैसे पुआल या सूखी घास) का उपयोग करें ताकि मिट्टी की बची-खुची नमी धूप के कारण जल्दी न उड़े।

कब आगे बढ़ेगा मानसून?

मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले 3 से 4 दिनों में बंगाल की खाड़ी में एक नया चक्रवातीय सिस्टम सक्रिय हो सकता है, जिससे तेलंगाना में अटका मानसून एक बार फिर रफ्तार पकड़ेगा। उम्मीद है कि 22 जून के बाद मध्य प्रदेश, यूपी और बिहार के लोगों को राहत देने वाली बौछारें देखने को मिल सकती हैं।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

Cold Blob क्या है, क्या एल नीनो के बीच नया खतरा, क्यों बदल सकता है भारत के मानसून का मिजाज

indian mansoon

भारत में मानसून की बदलती प्रकृति को लेकर वैज्ञानिकों ने एक नया और महत्वपूर्ण खुलासा किया है। अब तक भारतीय मानसून पर एल नीनो (El Niño) के प्रभाव को सबसे अहम माना जाता था, लेकिन एक नए अध्ययन में पाया गया है कि उत्तर अटलांटिक महासागर में मौजूद एक विशाल ठंडा समुद्री क्षेत्र, जिसे ‘कोल्ड ब्लॉब’ (Cold Blob) कहा जाता है, भी भारतीय मानसून को प्रभावित करने में बड़ी भूमिका निभा रहा है।

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एक्सपर्ट्‍स के मुताबिक पिछले दो दशकों में भारतीय मानसून के पैटर्न में आए बदलावों के पीछे केवल प्रशांत महासागर की घटनाएं ही नहीं, बल्कि हजारों किलोमीटर दूर स्थित अटलांटिक महासागर की गतिविधियां भी जिम्मेदार हो सकती हैं।

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क्या है ‘कोल्ड ब्लॉब’?

अध्ययन के अनुसार, ग्रीनलैंड के दक्षिण में उत्तर अटलांटिक महासागर का एक बड़ा हिस्सा सामान्य से अधिक ठंडा बना हुआ है, जिसे वैज्ञानिक  कोल्ड ब्लॉब कहते हैं। यह समुद्री क्षेत्र वैश्विक जलवायु प्रणाली को प्रभावित करता है और इसके असर दूरदराज के क्षेत्रों तक महसूस किए जा सकते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह ठंडा क्षेत्र भारतीय मानसून की तीव्रता और उसके व्यवहार को प्रभावित कर सकता है।

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मानसून के पूर्वानुमान में बढ़ सकती है सटीकता

यह अध्ययन प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका AGU Advances में प्रकाशित हुआ है। इसमें बताया गया है कि जब वैज्ञानिकों ने जलवायु मॉडल में कोल्ड ब्लॉब के प्रभाव को शामिल किया, तो भारतीय मानसून के पूर्वानुमान पहले की तुलना में अधिक सटीक पाए गए। अध्ययन के मुताबिक मानसून को प्रभावित करने वाली यह प्रक्रिया वातावरण और महासागर के बीच जटिल अंतःक्रियाओं से जुड़ी है।

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‘बारोट्रॉपिक गवर्नर मैकेनिज्म’ की भूमिका

 

वैज्ञानिकों ने इस प्रक्रिया को “बारोट्रॉपिक गवर्नर मैकेनिज्म” नाम दिया है। सरल शब्दों में कहें तो यह एक ऐसी जलवायु प्रणाली है, जो समुद्र की सतह के तापमान और वायुमंडलीय परिसंचरण के बीच संबंध स्थापित कर मौसम के पैटर्न को प्रभावित करती है।

भारत ही नहीं, दुनिया के अन्य क्षेत्रों पर भी असर

शोधकर्ताओं का मानना है कि इस खोज का महत्व केवल भारतीय मानसून तक सीमित नहीं है। इससे दुनिया के अन्य क्षेत्रों में मौसम और वर्षा के पूर्वानुमान को बेहतर बनाने में भी मदद मिल सकती है।

 

एक अरब से अधिक लोगों पर पड़ता है मानसून का असर

 

दक्षिण एशिया में एक अरब से अधिक लोगों की आजीविका और आर्थिक गतिविधियां मानसून पर निर्भर हैं। ऐसे में मानसून के पूर्वानुमान को अधिक सटीक बनाना कृषि, जल प्रबंधन और आपदा तैयारी के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि भविष्य के जलवायु मॉडल अटलांटिक महासागर के इस “कोल्ड ब्लॉब” और भारतीय मानसून के बीच संबंध को बेहतर ढंग से समझ सकें, तो मानसून की भविष्यवाणी पहले से कहीं अधिक विश्वसनीय हो सकती है।

 

IMD ने बताया कहा हो सकती है बारिश  

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 लगातार आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में मानसून की उत्तरी सीमा  से होकर गुजर रही है। मौसम विभाग ने बताया कि आगामी दिनों में मानसून के और आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। अनुमान है कि 23 जून 2026 के आसपास दक्षिण-पश्चिम मानसून महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के कुछ और हिस्सों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के कुछ क्षेत्रों में भी आगे बढ़ सकता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून की इस प्रगति से इन राज्यों में बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिससे किसानों को राहत मिलेगी और खरीफ फसलों की बुवाई को गति मिल सकती है।

7 राज्यों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार

देश के कई हिस्सों में लोग भीषण गर्मी से परेशान हैं। ऐसे में मानसून की आगे बढ़त से तापमान में गिरावट और मौसम में राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। IMD लगातार मानसून की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और समय-समय पर अपडेट जारी कर रहा है।  मानसून में देरी के बीच मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान, महाराष्ट्र और ओडिशा के कई शहरों में बुधवार को पारा 40°C से ज्यादा रहा। देश में सबसे ज्यादा पारा उत्तर प्रदेश के बांदा में 43.2°C दर्ज किया गया। महाराष्ट्र के ब्रह्मपुरी में 42.3°C, ओडिशा के बौध में 42.8°C, छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में 41.6°C, झारखंड के डाल्टनगंज में 42°C, बिहार के छपरा में 41.6°C और मध्यप्रदेश के खजुराहो 41.4°C रहा। Edited by : Sudhir Sharma

योगी सरकार में हाईटेक हुईं 50 हजार ग्रामीण महिलाएं, डेयरी का डिजिटल कर रहीं संचालन

50000 rural women became tech savvy under Yogi government

– वाराणसी, चंदौली, मिर्जापुर, गाजीपुर, सोनभद्र, बलिया और भदोही की महिलाएं रोज कर रहीं दो लाख लीटर दूध का कारोबार

– मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर बिचौलियों को खत्म कर महिलाओं को दी गई कमान, 12 हजार महिलाएं बनीं 'लखपति दीदी'

– कारोबार में आई पारदर्शिता, फैट जांच, भुगतान और दैनिक रिकॉर्ड की हर जानकारी ऑनलाइन

– गांव की महिलाएं मोबाइल ऐप से संभाल रहीं दूध संग्रह, बिक्री, जांच और रिकॉर्ड प्रबंधन का काम

Uttar Pradesh news : पूर्वांचल के गांवों की महिलाएं अब डिजिटल तौर-तरीके से डेयरी कारोबार का संचालन कर रहीं हैं। वाराणसी, चंदौली, मिर्जापुर, गाजीपुर, सोनभद्र, बलिया और भदोही की करीब 50 हजार महिलाएं मोबाइल एप के जरिए दूध संग्रह, गुणवत्ता जांच, भुगतान और रिकॉर्ड प्रबंधन का काम संभाल रहीं हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर विकसित इस मॉडल ने न केवल डेयरी कारोबार को पारदर्शी बनाया है, बल्कि हजारों महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त भी किया है।

 

काशी दुग्ध उत्पादक संस्था के डिजिटल डेयरी नेटवर्क से जुड़ी ये महिलाएं प्रतिदिन औसतन दो लाख लीटर से अधिक दूध का संग्रह और कारोबार कर रही हैं। गांवों में स्थापित दुग्ध संग्रह केंद्रों पर दूध की मात्रा और फैट की जांच डिजिटल मशीनों से की जाती है, जबकि पूरी जानकारी मोबाइल एप (काशी ई-डेयरी) पर उपलब्ध रहती है। इससे दूध खरीद और भुगतान की प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक पारदर्शी हुई है।

 

हर 10 दिन पर डीबीटी के माध्यम से राशि भेजी जाती है

इस व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पशुपालकों को भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में किया जाता है। हर 10 दिन के अंतराल पर डीबीटी के माध्यम से राशि भेजी जाती है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है। महिलाओं को मोबाइल एप पर दूध बिक्री, फैट प्रतिशत, भुगतान की स्थिति और दैनिक कारोबार का पूरा ब्यौरा रियल टाइम में मिलता है।

 

तकनीक आधारित कारोबार संचालन में महिलाओं की सक्रिय भूमिका 

डिजिटल डेयरी मॉडल का असर ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति पर भी साफ दिखाई दे रहा है। संस्था से जुड़ी करीब 12 हजार महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। नियमित आय के साथ महिलाओं की गांवों में सामाजिक और आर्थिक भागीदारी भी बढ़ी है। वे अब सिर्फ पशुपालन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि तकनीक आधारित कारोबार संचालन में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

 

गांवों में रोजगार तथा आय के नए अवसर भी सृजित हुए

पूर्वांचल में विकसित यह मॉडल महिला सशक्तीकरण, डिजिटल साक्षरता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का सफल उदाहरण बनकर उभरा है। इससे डेयरी क्षेत्र में आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ा है और गांवों में रोजगार तथा आय के नए अवसर भी सृजित हुए हैं।

 

यह है डिजिटल डेयरी नेटवर्क

दुग्ध संग्रह केंद्रों को मोबाइल एप और डिजिटल उपकरणों से जोड़ा गया है। दूध की मात्रा, गुणवत्ता, भुगतान और दैनिक कारोबार की पूरी जानकारी इसमें ऑनलाइन दर्ज होती है। इससे किसानों और पशुपालकों को पारदर्शी व्यवस्था का लाभ मिल रहा है।
Edited By : Chetan Gour

आदिवासी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं द्रौपदी मुर्मु

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 20 जून को अपना 68वां जन्मदिन मनाएंगी। आदिवासी समाज के साथ ही पूरे देश के लिए द्रौपदी मुर्मु प्रेरणास्रोत हैं। हालांकि, जीवन यात्रा के दौरान दो जवान बेटे उनकी आंखों के सामने दुनिया को छोड़कर चले गए। बाद में जीवनसाथी की भी मौत हो गई। समय बार-बार उनका इम्तिहान ले रहा था। यह गम ऐसा था, जो किसी को भी अंदर से तोड़ सकता था लेकिन उन्होंने आत्मविश्वास और हौसलों के साथ इन हालातों का सामना किया और खुद को मजबूत किया। अध्यात्म के सहारे खुद को इतना सबल बनाया कि मुश्किलें उनके सामने सिर झुकाने लगीं। देश की प्रथम नागरिक और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के जीवन की कहानी सच में प्रेरणादायक है।

ओडिशा के एक छोटे से आदिवासी गांव से निकलकर देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचना किसी के लिए भी आसान नहीं था। खासकर सीमित संसाधन, सामाजिक चुनौतियां और कठिन हालात में उन्होंने जिस तरह शिक्षा को अपना हथियार बनाया और आगे बढ़ती रहीं, वह उनकी मजबूत  इच्छाशक्ति का उदाहरण है। अपने गांव से कॉलेज जाने वाली पहली छात्रा से लेकर राष्ट्रपति बनने तक उनका सफर भी लोकतंत्र की ताकत को दिखाता है।

द्रौपदी मुर्मु का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा के दूरस्थ मयूरभंज जिले के उपरबेड़ा गांव में एक संथाल आदिवासी परिवार में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा उपरबेड़ा प्राथमिक विद्यालय में हुई। अपने दृढ़ संकल्प के माध्यम से और शिक्षा प्राप्त करने के उद्देश्य से वे 8वीं कक्षा से आगे की पढ़ाई के लिए भुवनेश्वर गईं। वह मैट्रिक की परीक्षा पास करने और कला स्नातक की उपाधि प्राप्त करने वाली अपने गांव की पहली बालिका बनीं। उन्होंने साल 1979 में भुवनेश्वर के रमादेवी महिला महाविद्यालय से राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र में कला स्नातक की उपाधि प्राप्त की। 1980 में उनकी शादी श्यामचरण मुर्मु से हुई, जो एक बैंक अधिकारी थे।

उनके प्रारंभिक जीवन को संघर्ष, धैर्य और उनके परिवार से मिले मजबूत नैतिक मूल्यों से आकार मिला। उन्होंने अनेक सामाजिक और वित्तीय कठिनाइयों का सफलतापूर्वक सामना किया और वे आदिवासी समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनीं। इन प्रारंभिक संघर्ष भरे वर्षों में उनकी सार्वजनिक सेवा और नेतृत्वशीलता से प्राप्त उपलब्धियों की नींव रखी गई।

एक समय ऐसा आया जब 2009 में द्रौपदी मुर्मु डिप्रेशन में चली गई थीं। 25 साल की उम्र में उनके बेटे की असमय मौत हो गई थी, जिससे उन्हें गहरा सदमा लगा था और वे डिप्रेशन में जा चुकी थीं। खुद को हिम्मत देने के लिए उन्होंने आध्यात्म का रास्ता चुना और वे ब्रह्माकुमारी संस्था के साथ जुड़ गईं। वह धीरे-धीरे डिप्रेशन से बाहर आ ही रही थीं लेकिन समय ने उनकी एक और परीक्षा ले ली। दुख का पहाड़ ऐसा टूटा था कि सिर्फ चार साल के बाद 2013 में एक अन्य दुर्घटना में द्रौपदी मुर्मु के दूसरे बेटे का भी निधन हो गया था।

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दोनों बेटों का निधन उनके लिए किसी बड़ी त्रासदी से कम नहीं था लेकिन दुखों का यह दौर यहीं समाप्त नहीं हुआ। दूसरे बेटे की मृत्यु के कुछ दिनों बाद ही उनकी मां और उनके भाई का निधन हो गया था। वे इस गम को भुला पातीं, उसके पहले 2014 में पति श्यामचरण मुर्मु भी दुनिया को छोड़कर चले गए। इस तरह कुछ वर्षों में ही धीरे-धीरे परिवार के कई सदस्य उनको छोड़कर चले गए। हालांकि, उन्होंने आध्यात्म के साथ योग शुरू किया, ताकि खुद डिप्रेशन से बाहर आ सकें। उन्होंने इसके खिलाफ तब तक लड़ाई लड़ी जब तक उन्होंने उसे हरा नहीं दिया।

अपने कष्टसाध्य व्यक्तिगत जीवन के बावजूद द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्र निर्माण के प्रति गहरे समर्पण से कार्य किया है, जिससे उनकी समय के अनुसार ढल जाने की असाधारण क्षमता का पता चलता है। उनकी दृढ़ता और उद्देश्यपूर्ण यात्रा से ऐसे समावेशी और सशक्त भारत बनाने की प्रेरणा मिलती रहेगी जहां हर व्यक्ति की गरिमा का सम्मान हो और सबको आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध हों।

द्रौपदी मुर्मु जमीनी स्तर पर लोकतंत्र से गहराई से जुड़ी रही हैं। उन्होंने समावेश, प्रतिसंवेदना और हाशिए पर पड़े लोगों के उत्थान के प्रति दृढ़ संकल्प रखते हुए शासन के तीनों स्तरों पर अपनी सेवाएं दी हैं।

मुर्मू ने 1997 में रायरंगपुर नगर पंचायत में पार्षद के तौर पर अपना राजनीतिक करियर शुरू किया। 2000 में, वह ओडिशा में भाजपा-बीजेडी गठबंधन सरकार के दौरान मंत्री बनीं। उन्हें 2007 में ओडिशा विधानसभा की ओर से सर्वश्रेष्ठ विधायक के लिए पंडित ‘नीलकंठ दास-सर्वश्रेष्ठ विधायक’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

वह ओडिशा के रायरंगपुर से भाजपा के टिकट पर दो बार (2000 और 2009) विधायक रहीं। 2009 के चुनावों में जब बीजेडी ने भाजपा से गठबंधन तोड़ लिया और सीएम नवीन पटनायक ने बड़ी जीत हासिल की, तब भी उन्होंने अपनी सीट बरकरार रखी।

द्रौपदी मुर्मु ने ओडिशा सरकार के परिवहन, वाणिज्य, मत्स्य पालन और पशुपालन मंत्रालयों का कामकाज संभाला। वह ओडिशा में भाजपा के अनुसूचित जनजाति मोर्चा की उपाध्यक्ष और बाद में अध्यक्ष रहीं। मुर्मू को 2010 में भाजपा की मयूरभंज (पश्चिम) इकाई का जिला अध्यक्ष चुना गया और 2013 में वह फिर से चुनी गईं। उसी साल उन्हें भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी (एसटी मोर्चा) का सदस्य भी बनाया गया। 2015 में उन्हें झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया और वे इस पद पर पहुंचने वाली पहली आदिवासी नेता बनीं।

Pic Credit : ANI

योगी सरकार में ओबीसी परिवारों के लिए संबल बनी सामूहिक विवाह योजना

Mass marriage scheme becomes source of support for OBC families under Yogi government

– सरकार की योजनाएं समाज के हर वर्ग तक समान रूप से पहुंच रही हैं और पात्र लोगों को उनका अधिकार मिल रहा

– वित्तीय वर्ष 2025-26 में 26,286 ओबीसी जोड़े हुए लाभान्वित, समाज कल्याण विभाग निभा रहा अहम भूमिका

– अन्य पिछड़ा वर्ग के 1.80 लाख से अधिक जोड़ों को मिला मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का सहारा

Uttar Pradesh news : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ किसी भेदभाव के बिना समाज के सभी वर्गों तक पहुंच रहा है। योगी सरकार की प्राथमिकता है कि पात्रता के आधार पर प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचे। इसी सोच का परिणाम है कि समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, सामान्य वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय के गरीब परिवारों के लिए सहारा बनी है।

 

अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के परिवारों की बात करें तो योगी सरकार के नौ वर्षों में 1,80,017 जोड़ों का विवाह इस योजना के माध्यम से संपन्न कराया गया है। वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में 26,286 ओबीसी जोड़े योजना से लाभान्वित हुए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार की योजनाएं समाज के हर वर्ग तक समान रूप से पहुंच रही हैं और पात्र लोगों को उनका अधिकार मिल रहा है। 

 

पात्रता के आधार पर मिल रहा योजनाओं का लाभ

योगी सरकार ने योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दी है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना इसका प्रमुख उदाहरण है, जहां किसी वर्ग विशेष के बजाय सभी पात्र परिवारों को लाभ दिया जा रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के सम्मानजनक विवाह के उद्देश्य से शुरू की गई यह योजना लाखों परिवारों के जीवन में खुशियां लेकर आई है।

 

समाज कल्याण विभाग निभा रहा सक्रिय भूमिका

समाज कल्याण विभाग योजना के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विभाग की ओर से लाभार्थियों का सत्यापन कर सामूहिक विवाह समारोह आयोजित किए जाते हैं। विवाह की संपूर्ण व्यवस्था प्रशासनिक स्तर पर सुनिश्चित की जाती है। समारोह में खान-पान, पंडाल, सजावट सहित अन्य व्यवस्थाएं की जाती हैं, ताकि लाभार्थी परिवारों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

 

आर्थिक सहायता से मिल रहा सामाजिक संबल

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत प्रत्येक जोड़े को एक लाख रुपए की सहायता प्रदान की जा रही है। इसमें 60 हजार रुपए वधू के बैंक खाते में सीधे हस्तांतरित किए जाते हैं, 25 हजार रुपए के उपहार एवं गृहस्थी के सामान दिए जाते हैं, जबकि 15 हजार रुपए विवाह आयोजन पर खर्च किए जाते हैं। इससे गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ कम होता है और बेटियों का विवाह सम्मानपूर्वक संपन्न हो पाता है।

 

 

योगी सरकार में पात्र परिवारों को मिल रहा योजनाओं का लाभ

समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में समाज के प्रत्येक पात्र परिवार तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत बीते 9 वर्षों में अन्य पिछड़ा वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिली है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में 4,957 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ, जो 2018-19 में बढ़कर 13,866 और 2019-20 में 15,417 तक पहुंच गया।

वर्ष 2020-21 में 6,901, 2021-22 में 15,256, 2022-23 में 31,903, 2023-24 में 33,913 तथा 2024-25 में 31,518 जोड़ों का विवाह कराया गया। वहीं, वर्ष 2025-26 में 26,286 जोड़े इस योजना से लाभान्वित हुए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में आर्थिक संबल के साथ सामाजिक समरसता और सबका साथ, सबका विकास की अवधारणा को मजबूत करते हुए कुल 5,54,202 जोड़ों की शादियां हुई हैं।
Edited By : Chetan Gour

अमरनाथ यात्रा को क्षति पहुंचाने की साजिश, सुरक्षाबलों ने किया आतंकी षड्यंत्र का भंडाफोड़, लापता 3 युवकों समेत 5 गिरफ्तार

Security forces achieved big success in Shopian and Kishtwar districts

सुरक्षाबलों ने अमरनाथ यात्रा को क्षति पहुंचाने के एक आतंकी षड्यंत्र का भंडाफोड़ करने का दावा किया है। यह खतरा कितना बड़ा था अंदाजा इसी से लगाया जा सकता था कि पकड़े गए 3 ओजीडब्ल्यू से प्लास्टिक विस्फोटक पीईके बरामद किया गया है जो किसी भी स्कैनर की पकड़ में नहीं आता है। इस बीच किश्तवाड़ में भी 2 आतंकी मददगार पकड़े गए हैं।

अधिकारियों ने बताया कि शोपियां जिले में सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है। जम्मू कश्मीर पुलिस ने शुक्रवार को पुडसू इलाके में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान तीन ओवर ग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) को गिरफ्तार किया है।
 

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, खुफिया सूचना के आधार पर शोपियां पुलिस ने पुडसू क्षेत्र में तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान तीन संदिग्ध ओजीडब्ल्यू को पकड़ा गया। तलाशी में उनके कब्जे से दो हैंड ग्रेनेड, करीब 2.5 किलोग्राम प्लास्टिक विस्फोटक सामग्री पीईके, चार मोबाइल फोन और प्रतिबंधित आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े चार पोस्टर बरामद किए गए हैं।

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सूत्रों ने बताया कि गिरफ्तार किए गए तीनों युवक 31 मई 2026 से अपने घरों से लापता थे। आशंका जताई जा रही है कि ये तीनों आतंकी संगठन में शामिल हो गए थे। फिलहाल पुलिस ने गिरफ्तार ओजीडब्ल्यू की पहचान और मामले के अन्य विवरण को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी साझा नहीं की है।

मामले की जांच जारी है। जबकि सूत्रों का दावा था कि प्रारंभिक पूछताछ में यह सामने आया है कि तीनों इस विस्फोटक सामग्री का इस्तेमाल अमरनाथ यात्रा को क्षति पहुंचाने के लिए करना चाहते थे। फिलहाल इसकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

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इस बीच पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि किश्तवाड़ जिले में आतंकवादियों को मदद पहुंचाने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें वन विभाग का एक कर्मचारी भी शामिल है। एक अधिकारी ने बताया कि ये गिरफ्तारियां किश्तवाड़ पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम और शस्त्र अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज एक मामले की जांच के दौरान की गईं।
 

आरोपियों की पहचान वन विभाग के सरकारी कर्मचारी तारिक अहमद गिनू और मोहम्मद इकबाल के तौर पर हुई है, ये दोनों किश्तवाड़ जिले के डच्चन इलाके के टंडर के रहने वाले हैं। पुलिस ने बताया कि ये दोनों स्थानीय आतंकवादियों की मदद करने और उन्हें सहयोग देने में शामिल थे। इससे पहले, इसी मामले के सिलसिले में छात्रू इलाके के दो अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया था।

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किश्तवाड़ के सीनियर सुपरिटेंडेंट आफ पुलिस नरेश सिंह ने कहा कि ये गिरफ्तारियां विस्तृत जांच के बाद की गईं और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने की कोशिशें जारी हैं।
Edited By : Chetan Gour

लगातार दूसरे दिन सोने की चमक पड़ी फीकी, चांदी में भी छाई सुस्ती

Gold Rate

सोने और चांदी की कीमत में शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट देखने को मिली। इससे सोने का दाम 1.45 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी का दाम 2.32 लाख रुपए प्रति किलो से नीचे आ गया है। 

इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम 3,123 रुपए कम होकर 1,44,970 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,48,093 रुपए प्रति 10 ग्राम था।

22 कैरेट सोने का दाम 1,35,653 रुपए प्रति 10 ग्राम से कम होकर 1,32,793 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है। 18 कैरेट सोने की कीमत कम होकर 1,08,728 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है, जो कि पहले 1,11,070 रुपए प्रति 10 ग्राम थी।

सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है।

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चांदी का दाम 8,218 रुपए कम होकर 2,31,93 रुपए प्रति किलो हो गया है, जो कि पहले 2,40,191 रुपए प्रति किलो था।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। कॉमेक्स पर सोना 1.68 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 4,174.47 डॉलर प्रति औंस और चांदी 2.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ 64.91 डॉलर प्रति औंस पर थी।

एलकेपी सिक्योरिटीज के जतिन त्रिवेदी ने कहा कि फेडरल रिजर्व की ओर से 2026 में ब्याज दरें एक बार बढ़ाने के संकेत के बाद सोने की कीमतों पर दबाव देखने को मिल रहा है। इससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ और सोने जैसी बिना रिटर्न वाली संपत्तियों का आकर्षण कम हो गया। फेड के सख्त रुख के कारण बुलियन बाजारों में बड़े पैमाने पर प्रॉफिट बुकिंग देखी गई।

उन्होंने आगे कहा कि फेड की पॉलिसी के ऐलान के बाद पिछले कुछ सेशन में कॉमेक्स गोल्ड की कीमत लगभग 4375 डॉलर प्रति औंस से गिरकर 4150 डॉलर प्रति औंस हो गई है, जबकि एमसीएक्स गोल्ड का दाम लगभग 1,54,000 रुपए से घटकर 1,47,200 रुपए पर आ गया। डॉलर के मजबूत होने की संभावना और ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदों का असर मार्केट सेंटीमेंट पर पड़ रहा है।

Pic Credit : ANI

तुलसी का बड़ा धमाका, US की पूर्व इंटेलिजेंस चीफ गबार्ड ने सार्वजनिक किए गुप्त दस्तावेज, Corona पर खुलासे से पूरी दुनिया में हड़कंप

Tulsi Gabbard Fauci Leak

Tulsi Gabbard Fauci Leak: अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस चीफ तुलसी गबार्ड (अब पूर्व) ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिन एक ऐसा 'परमाणु बम' फोड़ा है, जिसने न सिर्फ अमेरिकी राजनीति बल्कि पूरी दुनिया में भूचाल ला दिया है। गबार्ड ने उन अति-गोपनीय (Top Secret) दस्तावेजों को सार्वजनिक कर दिया है, जो सीधे तौर पर पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के मुख्य चिकित्सा सलाहकार डॉ. एंथनी फाउची को कोरोना महामारी के असली गुनहगार के रूप में कटघरे में खड़ा करते हैं।

 

इन लीक दस्तावेजों के अनुसार, डॉ. फाउची ने अमेरिकी टैक्सपेयर्स के लाखों डॉलर चीन की उसी वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (WIV) को ट्रांसफर किए थे, जिसे कोविड-19 वायरस का जन्मदाता माना जाता है। ALSO READ: तुलसी गबार्ड ने अमेरिकी खुफिया विभाग के चीफ पद से दिया इस्तीफा, बताया यह कारण

चमगादड़ों पर 'खतरनाक रिसर्च' के लिए दिया गया पैसा

गबार्ड द्वारा जारी किए गए सबूत चौंकाने वाले हैं। दस्तावेजों से साफ हुआ है कि फाउची ने वुहान की लैब में चमगादड़ कोरोना वायरस पर 'गेन-ऑफ़-फ़ंक्शन' (Gain-of-Function) जैसी बेहद खतरनाक और प्रतिबंधित रिसर्च के लिए अमेरिकी फंड का इस्तेमाल होने दिया। आरोप है कि जब 2020 में यह वायरस लीक हुआ, तो फाउची ने 'डीप स्टेट' और इंटेलिजेंस कम्युनिटी के बड़े अधिकारियों के साथ मिलकर इस सच को दबा दिया और दुनिया के सामने झूठ परोसा कि यह वायरस प्राकृतिक रूप से फैला है।

डॉ. फाउची ने संसद में बोला 'सफेद झूठ'

तुलसी गबार्ड के ऑफिस द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि डॉ. फाउची ने 2024 में अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के सामने शपथ लेकर झूठ बोला था। उन्होंने इंटेलिजेंस अधिकारियों के साथ अपनी मिलीभगत को छिपाया। यही नहीं, जिन वैज्ञानिकों या व्हिसलब्लोअर्स ने इस सच्चाई को सामने लाने की कोशिश की, उन्हें डराया-धमकाया गया और उनके करियर तबाह कर दिए गए। 85 वर्षीय फाउची, जिन्होंने करीब 38 सालों तक अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी (NIAID) पर एकछत्र राज किया, उन पर आरोप है कि उन्होंने अपनी चमड़ी बचाने के लिए निर्वाचित राष्ट्रपति तक से देश की सुरक्षा से जुड़े इन महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर रखा। ALSO READ: Pakistan अमेरिका के लिए सबसे बड़ा परमाणु खतरा': तुलसी गबार्ड की इस चेतावनी ने पूरी दुनिया में मचाया हड़कंप!

यह खुलासा कब हुआ?

यह सनसनीखेज खुलासा गुरुवार, 18 जून 2026 को हुआ। यह तुलसी गबार्ड का बतौर नेशनल इंटेलिजेंस चीफ कार्यकाल का आखिरी दिन था। अपने पद से हटते-हटते उन्होंने इन फाइलों को डीक्लासिफाई (सार्वजनिक) करके पूरी दुनिया के सामने सच रख दिया।

अमेरिका पर इसका क्या असर हो सकता है?

तुलसी गबार्ड के इस खुलासे के बाद अमेरिका में एक बड़ा राजनीतिक और कानूनी संकट खड़ा होना तय है। अमेरिकी संसद के सामने शपथ लेकर झूठ बोलना एक गंभीर संघीय अपराध है। इन पुख्ता दस्तावेजों के आधार पर डॉ. फाउची के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चल सकता है और उन्हें जेल भी हो सकती है। चूंकि फाउची बाइडन के सबसे भरोसेमंद मेडिकल एडवाइजर थे और बाइडन सरकार ने उनकी हर नीति को आंख मूंदकर लागू किया था, इस खुलासे से विपक्षी खेमे को वर्तमान और पूर्व डेमोक्रेटिक नेतृत्व को घेरने का बहुत बड़ा हथियार मिल गया है।

 

अमेरिका में लंबे समय से आरोप लगते रहे हैं कि कुछ अन-इलेक्टेड (गैर-निर्वाचित) अधिकारी और खुफिया एजेंसियां मिलकर सरकार चलाती हैं, जिसे 'डीप स्टेट' कहा जाता है। इस खुलासे से अमेरिकी जनता का अपनी ही खुफिया एजेंसियों और हेल्थ सिस्टम पर से भरोसा पूरी तरह उठ सकता है। यह दस्तावेज आधिकारिक तौर पर साबित करता है कि वुहान लैब में कुछ तो ऐसा चल रहा था जिसे छिपाने के लिए अमेरिका और चीन के कुछ धड़े एक साथ काम कर रहे थे। इससे अमेरिकी संसद में चीन के खिलाफ और सख्त कार्रवाई की मांग उठेगी।

तुलसी पर खुलासे का क्या असर होगा?

तुलसी गबार्ड (जो पहले डेमोक्रेटिक पार्टी में थीं और बाद में रिपब्लिकन बनीं) का यह कदम उन्हें अमेरिकी कंजर्वेटिव और 'एंटी-डीप स्टेट' जनता के बीच एक 'नेशनल हीरो' बना देगा। इस खुलासे के बाद ट्रंप समर्थक खेमे और रिपब्लिकन पार्टी में उनकी लोकप्रियता चरम पर पहुंच जाएगी। भविष्य में उनके लिए अमेरिकी सीनेट (Senate) का चुनाव लड़ने या 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में एक मजबूत दावेदार के रूप में उभरने का रास्ता साफ हो सकता है।

 

गबार्ड ने सीधे तौर पर अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और स्वास्थ्य विभाग के गठजोड़ पर हमला किया है। वाशिंगटन का जो पुराना प्रशासनिक ढांचा (जिसे अक्सर 'डीप स्टेट' या एस्टेब्लिशमेंट कहा जाता है) है, वह उनका कड़ा विरोधी बन जाएगा। डॉ. फाउची और कोविड ओरिजिन से जुड़े मामलों में इतने बड़े राज खोलने के बाद तुलसी गबार्ड को निजी सुरक्षा (Personal Security) के मोर्चे पर बड़े खतरों का सामना करना पड़ सकता है। उन पर कानूनी शिकंजा कसने की कोशिशें भी की जा सकती हैं।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

तुलसी का बड़ा धमाका, US की पूर्व इंटेलिजेंस चीफ गबार्ड ने सार्वजनिक किए गुप्त दस्तावेज, Corona पर खुलासे से पूरी दुनिया में हड़कंप

Tulsi Gabbard Fauci Leak

Tulsi Gabbard Fauci Leak: अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस चीफ तुलसी गबार्ड (अब पूर्व) ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिन एक ऐसा 'परमाणु बम' फोड़ा है, जिसने न सिर्फ अमेरिकी राजनीति बल्कि पूरी दुनिया में भूचाल ला दिया है। गबार्ड ने उन अति-गोपनीय (Top Secret) दस्तावेजों को सार्वजनिक कर दिया है, जो सीधे तौर पर पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के मुख्य चिकित्सा सलाहकार डॉ. एंथनी फाउची को कोरोना महामारी के असली गुनहगार के रूप में कटघरे में खड़ा करते हैं।

 

इन लीक दस्तावेजों के अनुसार, डॉ. फाउची ने अमेरिकी टैक्सपेयर्स के लाखों डॉलर चीन की उसी वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (WIV) को ट्रांसफर किए थे, जिसे कोविड-19 वायरस का जन्मदाता माना जाता है। ALSO READ: तुलसी गबार्ड ने अमेरिकी खुफिया विभाग के चीफ पद से दिया इस्तीफा, बताया यह कारण

चमगादड़ों पर 'खतरनाक रिसर्च' के लिए दिया गया पैसा

गबार्ड द्वारा जारी किए गए सबूत चौंकाने वाले हैं। दस्तावेजों से साफ हुआ है कि फाउची ने वुहान की लैब में चमगादड़ कोरोना वायरस पर 'गेन-ऑफ़-फ़ंक्शन' (Gain-of-Function) जैसी बेहद खतरनाक और प्रतिबंधित रिसर्च के लिए अमेरिकी फंड का इस्तेमाल होने दिया। आरोप है कि जब 2020 में यह वायरस लीक हुआ, तो फाउची ने 'डीप स्टेट' और इंटेलिजेंस कम्युनिटी के बड़े अधिकारियों के साथ मिलकर इस सच को दबा दिया और दुनिया के सामने झूठ परोसा कि यह वायरस प्राकृतिक रूप से फैला है।

डॉ. फाउची ने संसद में बोला 'सफेद झूठ'

तुलसी गबार्ड के ऑफिस द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि डॉ. फाउची ने 2024 में अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के सामने शपथ लेकर झूठ बोला था। उन्होंने इंटेलिजेंस अधिकारियों के साथ अपनी मिलीभगत को छिपाया। यही नहीं, जिन वैज्ञानिकों या व्हिसलब्लोअर्स ने इस सच्चाई को सामने लाने की कोशिश की, उन्हें डराया-धमकाया गया और उनके करियर तबाह कर दिए गए। 85 वर्षीय फाउची, जिन्होंने करीब 38 सालों तक अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी (NIAID) पर एकछत्र राज किया, उन पर आरोप है कि उन्होंने अपनी चमड़ी बचाने के लिए निर्वाचित राष्ट्रपति तक से देश की सुरक्षा से जुड़े इन महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर रखा। ALSO READ: Pakistan अमेरिका के लिए सबसे बड़ा परमाणु खतरा': तुलसी गबार्ड की इस चेतावनी ने पूरी दुनिया में मचाया हड़कंप!

यह खुलासा कब हुआ?

यह सनसनीखेज खुलासा गुरुवार, 18 जून 2026 को हुआ। यह तुलसी गबार्ड का बतौर नेशनल इंटेलिजेंस चीफ कार्यकाल का आखिरी दिन था। अपने पद से हटते-हटते उन्होंने इन फाइलों को डीक्लासिफाई (सार्वजनिक) करके पूरी दुनिया के सामने सच रख दिया।

अमेरिका पर इसका क्या असर हो सकता है?

तुलसी गबार्ड के इस खुलासे के बाद अमेरिका में एक बड़ा राजनीतिक और कानूनी संकट खड़ा होना तय है। अमेरिकी संसद के सामने शपथ लेकर झूठ बोलना एक गंभीर संघीय अपराध है। इन पुख्ता दस्तावेजों के आधार पर डॉ. फाउची के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चल सकता है और उन्हें जेल भी हो सकती है। चूंकि फाउची बाइडन के सबसे भरोसेमंद मेडिकल एडवाइजर थे और बाइडन सरकार ने उनकी हर नीति को आंख मूंदकर लागू किया था, इस खुलासे से विपक्षी खेमे को वर्तमान और पूर्व डेमोक्रेटिक नेतृत्व को घेरने का बहुत बड़ा हथियार मिल गया है।

 

अमेरिका में लंबे समय से आरोप लगते रहे हैं कि कुछ अन-इलेक्टेड (गैर-निर्वाचित) अधिकारी और खुफिया एजेंसियां मिलकर सरकार चलाती हैं, जिसे 'डीप स्टेट' कहा जाता है। इस खुलासे से अमेरिकी जनता का अपनी ही खुफिया एजेंसियों और हेल्थ सिस्टम पर से भरोसा पूरी तरह उठ सकता है। यह दस्तावेज आधिकारिक तौर पर साबित करता है कि वुहान लैब में कुछ तो ऐसा चल रहा था जिसे छिपाने के लिए अमेरिका और चीन के कुछ धड़े एक साथ काम कर रहे थे। इससे अमेरिकी संसद में चीन के खिलाफ और सख्त कार्रवाई की मांग उठेगी।

तुलसी पर खुलासे का क्या असर होगा?

तुलसी गबार्ड (जो पहले डेमोक्रेटिक पार्टी में थीं और बाद में रिपब्लिकन बनीं) का यह कदम उन्हें अमेरिकी कंजर्वेटिव और 'एंटी-डीप स्टेट' जनता के बीच एक 'नेशनल हीरो' बना देगा। इस खुलासे के बाद ट्रंप समर्थक खेमे और रिपब्लिकन पार्टी में उनकी लोकप्रियता चरम पर पहुंच जाएगी। भविष्य में उनके लिए अमेरिकी सीनेट (Senate) का चुनाव लड़ने या 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में एक मजबूत दावेदार के रूप में उभरने का रास्ता साफ हो सकता है।

 

गबार्ड ने सीधे तौर पर अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और स्वास्थ्य विभाग के गठजोड़ पर हमला किया है। वाशिंगटन का जो पुराना प्रशासनिक ढांचा (जिसे अक्सर 'डीप स्टेट' या एस्टेब्लिशमेंट कहा जाता है) है, वह उनका कड़ा विरोधी बन जाएगा। डॉ. फाउची और कोविड ओरिजिन से जुड़े मामलों में इतने बड़े राज खोलने के बाद तुलसी गबार्ड को निजी सुरक्षा (Personal Security) के मोर्चे पर बड़े खतरों का सामना करना पड़ सकता है। उन पर कानूनी शिकंजा कसने की कोशिशें भी की जा सकती हैं।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

Operation CyHawk : 700 करोड़ की साइबर ठगी का भंडाफोड़! 916 साइबर अपराधी गिरफ्तार, 21 राज्यों में दिल्ली पुलिस की मेगा रेड

cyber frod delhi police

पूर्व प्रधानमंत्री इंदर कुमार गुजराल के बेटे और पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश गुजराल के साथ WhatsApp के जरिए ₹7.8 करोड़ की भारी साइबर ठगी का मामला सामने आया था। इस बीच देशभर में तेजी से फैल रहे साइबर अपराध के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने “ऑपरेशन साइहॉक 5.0”  (Operation CyHawk ) चलाया। इस ऑपरेशन में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए 916 साइबर ठगों और अपराधियों को गिरफ्तार किया है।

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एक्सपर्ट्‍स के मुताबिक साइबर अपराध भारत के सामने सबसे तेजी से उभरते खतरों में से एक बन चुका है। ठग अब फर्जी पहचान, सोशल इंजीनियरिंग और एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर आम लोगों से लेकर बड़ी कंपनियों तक को निशाना बना रहे हैं।

 

दिल्ली पुलिस का मानना है कि 'ऑपरेशन साइहॉक 5.0' जैसी कार्रवाई संगठित साइबर अपराध नेटवर्क को तोड़ने और करोड़ों रुपये की ठगी रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस मेगा कार्रवाई में करीब 700 करोड़ रुपए की ऑनलाइन ठगी का खुलासा हुआ है। ऑपरेशन में देशभर में फैले साइबर अपराध सिंडिकेट्स की जड़ों तक पहुंचकर बड़ा झटका दिया है।

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दिल्ली पुलिस के संयुक्त पुलिस आयुक्त (जॉइंट सीपी) रजनीश गुप्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस ऑपरेशन को लेकर पूरी जानकारी दी। 

पूर्व पीएम के बेटे के साथ ठगी का खुलासा

दिल्ली पुलिस ने पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश गुजराल से जुड़े हाई-प्रोफाइल साइबर फ्रॉड मामले का भी खुलासा किया है। जांच के मुताबिक, एक कंपनी के मालिक को एक ZIP फाइल भेजी गई थी, जिसे उन्होंने वित्त विभाग को फॉरवर्ड कर दिया। जैसे ही कर्मचारी ने फाइल खोली, कंपनी का सिस्टम हैकर्स के नियंत्रण में चला गया।

इसके बाद साइबर अपराधियों ने सिस्टम में मौजूद नरेश गुजराल के संपर्क नंबर को बदलकर अपना नंबर दर्ज कर दिया। फिर खुद को अधिकृत व्यक्ति बताकर कर्मचारियों को फोन किया और पैसे ट्रांसफर करने के निर्देश दिए। इस धोखाधड़ी में चार अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए 7.86 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए गए। हालांकि दिल्ली पुलिस ने अब तक लगभग 4 करोड़ रुपये फ्रीज कर लिए हैं और बाकी रकम की तलाश जारी है। 

715 पुलिस टीमों ने चलाया मेगा ऑपरेशन

उन्होंने बताया कि 16 और 17 जून को चलाए गए इस विशेष अभियान में 715 से अधिक पुलिस टीमें और 2,500 से ज्यादा पुलिसकर्मी शामिल हुए। सभी जिला पुलिस इकाइयों और 15 साइबर पुलिस स्टेशनों ने मिलकर समन्वित कार्रवाई की। पुलिस ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज 2,500 से अधिक शिकायतों का विश्लेषण किया, जिनमें कुल ठगी की रकम लगभग 700 करोड़ रुपये पाई गई।

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झारखंड के जामताड़ा से हरियाणा के नूंह तक फैला नेटवर्क

जांच में सामने आया कि गिरफ्तार किए गए कई आरोपी झारखंड के कुख्यात साइबर फ्रॉड हब जामताड़ा और हरियाणा के नूंह से जुड़े हुए हैं। ये नेटवर्क फिशिंग, फर्जी निवेश योजनाओं, ऑनलाइन स्कैम और डिजिटल ठगी जैसे अपराधों में सक्रिय थे। ऑपरेशन के दौरान दिल्ली पुलिस ने कई अवैध कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ किया, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी के लिए किया जा रहा था।

पुलिस ने बड़ी संख्या में लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण भी जब्त किए हैं। इन आरोपियों तक पहुंचने के लिए पुलिस टीमों ने 21 राज्यों में छापेमारी की, जिससे इस साइबर नेटवर्क की देशव्यापी पहुंच का अंदाजा लगाया जा सकता है।

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7,000 से ज्यादा लोगों से पूछताछ

कार्रवाई के दौरान लगभग 7,000 लोगों को हिरासत में लेकर सत्यापन और पूछताछ की गई। इसके अलावा करीब 600 लोगों को एहतियाती कार्रवाई के तहत पाबंद किया गया, जबकि 2,000 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि अभियान का मकसद सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, बल्कि साइबर अपराध को बढ़ावा देने वाले पूरे नेटवर्क को खत्म करना है। Edited by : Sudhir Sharma