तुलसी का बड़ा धमाका, US की पूर्व इंटेलिजेंस चीफ गबार्ड ने सार्वजनिक किए गुप्त दस्तावेज, Corona पर खुलासे से पूरी दुनिया में हड़कंप

Tulsi Gabbard Fauci Leak

Tulsi Gabbard Fauci Leak: अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस चीफ तुलसी गबार्ड (अब पूर्व) ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिन एक ऐसा 'परमाणु बम' फोड़ा है, जिसने न सिर्फ अमेरिकी राजनीति बल्कि पूरी दुनिया में भूचाल ला दिया है। गबार्ड ने उन अति-गोपनीय (Top Secret) दस्तावेजों को सार्वजनिक कर दिया है, जो सीधे तौर पर पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के मुख्य चिकित्सा सलाहकार डॉ. एंथनी फाउची को कोरोना महामारी के असली गुनहगार के रूप में कटघरे में खड़ा करते हैं।

 

इन लीक दस्तावेजों के अनुसार, डॉ. फाउची ने अमेरिकी टैक्सपेयर्स के लाखों डॉलर चीन की उसी वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (WIV) को ट्रांसफर किए थे, जिसे कोविड-19 वायरस का जन्मदाता माना जाता है। ALSO READ: तुलसी गबार्ड ने अमेरिकी खुफिया विभाग के चीफ पद से दिया इस्तीफा, बताया यह कारण

चमगादड़ों पर 'खतरनाक रिसर्च' के लिए दिया गया पैसा

गबार्ड द्वारा जारी किए गए सबूत चौंकाने वाले हैं। दस्तावेजों से साफ हुआ है कि फाउची ने वुहान की लैब में चमगादड़ कोरोना वायरस पर 'गेन-ऑफ़-फ़ंक्शन' (Gain-of-Function) जैसी बेहद खतरनाक और प्रतिबंधित रिसर्च के लिए अमेरिकी फंड का इस्तेमाल होने दिया। आरोप है कि जब 2020 में यह वायरस लीक हुआ, तो फाउची ने 'डीप स्टेट' और इंटेलिजेंस कम्युनिटी के बड़े अधिकारियों के साथ मिलकर इस सच को दबा दिया और दुनिया के सामने झूठ परोसा कि यह वायरस प्राकृतिक रूप से फैला है।

डॉ. फाउची ने संसद में बोला 'सफेद झूठ'

तुलसी गबार्ड के ऑफिस द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि डॉ. फाउची ने 2024 में अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के सामने शपथ लेकर झूठ बोला था। उन्होंने इंटेलिजेंस अधिकारियों के साथ अपनी मिलीभगत को छिपाया। यही नहीं, जिन वैज्ञानिकों या व्हिसलब्लोअर्स ने इस सच्चाई को सामने लाने की कोशिश की, उन्हें डराया-धमकाया गया और उनके करियर तबाह कर दिए गए। 85 वर्षीय फाउची, जिन्होंने करीब 38 सालों तक अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी (NIAID) पर एकछत्र राज किया, उन पर आरोप है कि उन्होंने अपनी चमड़ी बचाने के लिए निर्वाचित राष्ट्रपति तक से देश की सुरक्षा से जुड़े इन महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर रखा। ALSO READ: Pakistan अमेरिका के लिए सबसे बड़ा परमाणु खतरा': तुलसी गबार्ड की इस चेतावनी ने पूरी दुनिया में मचाया हड़कंप!

यह खुलासा कब हुआ?

यह सनसनीखेज खुलासा गुरुवार, 18 जून 2026 को हुआ। यह तुलसी गबार्ड का बतौर नेशनल इंटेलिजेंस चीफ कार्यकाल का आखिरी दिन था। अपने पद से हटते-हटते उन्होंने इन फाइलों को डीक्लासिफाई (सार्वजनिक) करके पूरी दुनिया के सामने सच रख दिया।

अमेरिका पर इसका क्या असर हो सकता है?

तुलसी गबार्ड के इस खुलासे के बाद अमेरिका में एक बड़ा राजनीतिक और कानूनी संकट खड़ा होना तय है। अमेरिकी संसद के सामने शपथ लेकर झूठ बोलना एक गंभीर संघीय अपराध है। इन पुख्ता दस्तावेजों के आधार पर डॉ. फाउची के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चल सकता है और उन्हें जेल भी हो सकती है। चूंकि फाउची बाइडन के सबसे भरोसेमंद मेडिकल एडवाइजर थे और बाइडन सरकार ने उनकी हर नीति को आंख मूंदकर लागू किया था, इस खुलासे से विपक्षी खेमे को वर्तमान और पूर्व डेमोक्रेटिक नेतृत्व को घेरने का बहुत बड़ा हथियार मिल गया है।

 

अमेरिका में लंबे समय से आरोप लगते रहे हैं कि कुछ अन-इलेक्टेड (गैर-निर्वाचित) अधिकारी और खुफिया एजेंसियां मिलकर सरकार चलाती हैं, जिसे 'डीप स्टेट' कहा जाता है। इस खुलासे से अमेरिकी जनता का अपनी ही खुफिया एजेंसियों और हेल्थ सिस्टम पर से भरोसा पूरी तरह उठ सकता है। यह दस्तावेज आधिकारिक तौर पर साबित करता है कि वुहान लैब में कुछ तो ऐसा चल रहा था जिसे छिपाने के लिए अमेरिका और चीन के कुछ धड़े एक साथ काम कर रहे थे। इससे अमेरिकी संसद में चीन के खिलाफ और सख्त कार्रवाई की मांग उठेगी।

तुलसी पर खुलासे का क्या असर होगा?

तुलसी गबार्ड (जो पहले डेमोक्रेटिक पार्टी में थीं और बाद में रिपब्लिकन बनीं) का यह कदम उन्हें अमेरिकी कंजर्वेटिव और 'एंटी-डीप स्टेट' जनता के बीच एक 'नेशनल हीरो' बना देगा। इस खुलासे के बाद ट्रंप समर्थक खेमे और रिपब्लिकन पार्टी में उनकी लोकप्रियता चरम पर पहुंच जाएगी। भविष्य में उनके लिए अमेरिकी सीनेट (Senate) का चुनाव लड़ने या 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में एक मजबूत दावेदार के रूप में उभरने का रास्ता साफ हो सकता है।

 

गबार्ड ने सीधे तौर पर अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और स्वास्थ्य विभाग के गठजोड़ पर हमला किया है। वाशिंगटन का जो पुराना प्रशासनिक ढांचा (जिसे अक्सर 'डीप स्टेट' या एस्टेब्लिशमेंट कहा जाता है) है, वह उनका कड़ा विरोधी बन जाएगा। डॉ. फाउची और कोविड ओरिजिन से जुड़े मामलों में इतने बड़े राज खोलने के बाद तुलसी गबार्ड को निजी सुरक्षा (Personal Security) के मोर्चे पर बड़े खतरों का सामना करना पड़ सकता है। उन पर कानूनी शिकंजा कसने की कोशिशें भी की जा सकती हैं।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala