गौतम गंभीर की आलोचना की श्रीसंथ ने, कहा विराट रोहित खेलें वनडे विश्वकप (Video)

Image Source : Instagram

एक प्रसिद्ध डिजिटल मीडिया संस्थान को दिए गए इंटरव्यू में श्रीसंथ ने कहा है कि गौतम गंभीर भारतीय टीम के लिए सही कोच साबित नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि ड्रेसिंग रूम में गौतम गंभीर बुत बनकर बैठे रहते हैं। इससे अच्छा गुजरात टाइटंस के कोच आशीष नेहरा को कोच बना देते।

इसके अलावा एक सवाल के जवाब पर उन्होंने कहा कि विराट कोहली और रोहित शर्मा के भविष्य का फैसला उनको खुद लेना चाहिए। दरअसल पत्रकार ने सवाल किया था कि क्या इन दोनों दिग्गज बल्लेबाजों को संन्यास ले लेना चाहिए तो उन्होंने कहा कि दोनों के कितने रन है।

गौतम गंभीर के खुद 10 से 12 हजार रन है वहीं विराट कोहली के कुल अंतरराष्ट्रीय रन 30 हजार से ज्यादा है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि ऐसे में जब कोच के कुल रन ही दोनों खिलाड़ियों से कम हैं तो वह इन दोनों को कैसे बोल सकते हैं संन्यास पर सोचने का।

श्रीसंथ को एक बार गंभीर ने कहा था फिक्सर, साथ खेले विश्वकप

3 साल पहले गौतम गंभीर ने श्रीसंथ को लीजेंड्स लीग क्रिकेट के मैच के दौरान ‘Fixer’ कहा था। इंडियन कैपिटल्स और गुजरात जायंट्स के बीच एलिमिनेटर मैच के दौरान श्रीसंथ और उनके पूर्व साथी गंभीर के बीच तीखी बहस हो गयी थी। इसके बाद विश्व कप विजेता खिलाड़ियों को अलग करने के लिए अंपायर को हस्तक्षेप करना पड़ा था।

श्रीसंथ ने वर्ष 2005 और 2011 के बीच सभी प्रारूपों में भारत के लिए 90 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले और उनमें से 49 खेलों में गंभीर एकादश में उनके टीम-साथी थे। वे 2007 टी-20 विश्वकप और 2011 एकदिवसीय विश्वकप में भारत की खिताब जीतने वाली टीमों का हिस्सा थे।गौतम गंभीर ने जहां टी-20 विश्वकप फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ एक निर्णायक पारी खेली थी तो श्रीसंथ ने अंत में मिस्बाह का कैच लेकर जीत की मुहर लगाई थी। जब साल 2011 आया तो गौतम गंभीर श्रीसंथ से काफी आगे निकल चुके थे। श्रीसंथ सिर्फ पहले और आखिरी मैच में अंतिम एकादश में शामिल हुए थे और गौतम गंभीर ने 97 रनों की शानदार पारी खेलकर टीम को एकदिवसीय विश्वकप के करीब लाए थे।

फीक्सिंग में फंसे थे श्रीसंथ

श्रीसंत पर इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2013 में स्पॉट फिक्सिंग प्रकरण में उनकी कथित लिप्तता के कारण बीसीसीआई (भारतीय क्रिकेट बोर्ड) की अनुशासनात्मक समिति ने आजीवन प्रतिबंध लगाया था।लेकिन उच्चतम न्यायालय ने 2019 में इस प्रतिबंध को घटाकर सात साल का कर दिया था।