Ram Mandir: राम मंदिर चंदा चोरी में मामले में सामने आए ये दो नाम, SIT जांच में अबतक हुआ ये खुलासा

राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस महीने की शुरुआत में अयोध्या राम मंदिर के दानपात्र से नकदी और अन्य वस्तुओं के गायब होने के आरोप लगे हैं। इस मामले पर योगी सरकार ने जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। हीं इस मामले में जांच कर रही एसआईटी की टीम लगातार छापेमारी कर रही है। राम मंदिर के ट्रस्ट पदाधिकारी अनिल मिश्रा, महासचिव चंपत राय और उनके ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव तथा गोपाल राव से पूछताछ की गई।

जांच में सामने आए ये नाम

वहीं अब तक सामने आई जानकारी के मुताबिक, एसआईटी की पूछताछ में टिन्नू यादव ने गिनती प्रक्रिया में अनिल मिश्रा और गोपाल राव का नाम लिया है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि दान में मिले बहुमूल्य आभूषणों के प्रबंधन और रिकॉर्ड में भी अनियमितताएं हो सकती हैं। सूत्रों के अनुसार, जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि दान और चढ़ावे से जुड़े काम में तय नियमों का सही तरीके से पालन हुआ था या नहीं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कहीं निगरानी व्यवस्था में कोई कमी तो नहीं रही। जांचकर्ता इस काम में लगे कर्मचारियों की पृष्ठभूमि, उनकी जिम्मेदारियों और नियुक्ति से जुड़ी जानकारी भी जुटा रहे हैं।

SIT की टीम कर रही हैं जांच

मंदिर के चढ़ावे में कथित वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप सामने आने के बाद यह जांच शुरू की गई थी। मंदिर के पूर्व लेखाकार महिपाल सिंह ने चढ़ावे के पैसे के प्रबंधन में अनियमितताओं की जांच की मांग की थी। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया। जांच के शुरुआती दौर में एसआईटी ने राम मंदिर परिसर का निरीक्षण किया। इस दौरान दान पेटियों, चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया और नकदी रखने की व्यवस्था की जांच की गई। सूत्रों का कहना है कि टीम को शुरुआती जांच में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां और साक्ष्य मिले हैं, जिनकी अब विस्तार से पड़ताल की जा रही है। हालांकि, अधिकारियों ने अभी तक किसी गड़बड़ी की पुष्टि नहीं की है और न ही मिले साक्ष्यों के बारे में सार्वजनिक रूप से कोई जानकारी दी है।

बता दें कि, राम मंदिर चढ़ावे में गड़बड़ियों की जांच करने के लिए SIT गठित की गई है। इसमें लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत (IAS), किरन एस. (IPS, आईजी रेंज) और नीलरतन (विशेष सचिव, वित्त) को शामिल किया गया है।

टेलीग्राम पर अस्थायी बैन बरकरार, दिल्ली हाईकोर्ट ने सही ठहराया सरकार का फैसला

नीट री-एग्जाम से पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने टेलीग्राम ऐप प्लेटफॉर्म पर सरकार के अस्थायी बैन के फैसले को सही ठहराया है। शुक्रवार को हाईकोर्ट ने अस्थायी बैन के खिलाफ दायर टेलीग्राम की याचिका को भी खारिज कर दिया।

दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस तेजस कारिया की सिंगल बेंच ने शुक्रवार को टेलीग्राम की याचिका पर अपना फैसला दिया। जस्टिस तेजस करिया ने कहा सरकार का आदेश सही है। आईटी एक्ट के सेक्शन 69ए के तहत किसी प्लेटफॉर्म पर बैन लगाया जा सकता है।

सरकार ने परीक्षा में पेपर लीक और संगठित नकल गिरोहों से जुड़े मामलों की आशंका के चलते टेलीग्राम पर 22 जून तक अस्थायी बैन लगाया है। चिंताएं थीं कि नीट-यूजी विवाद में शामिल संगठित नकल करने वाले नेटवर्क इसका इस्तेमाल कर रहे थे। बड़े पैमाने पर पेपर लीक और गड़बड़ियों के आरोपों के बाद मूल नीट परीक्षा रद्द होने के बाद सरकार ने इस पर बैन का फैसला लिया। साथ ही, 30 जून तक पहले से भेजे गए संदेशों को एडिट करने की सुविधा भी बंद करने का आदेश दिया गया।

ये पाबंदियां नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की सिफारिशों के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए के तहत जारी निर्देशों के आधार पर लगाई गई थीं।

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हालांकि, टेलीग्राम ने सरकार के फैसले का विरोध किया और इसे दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी। टेलीग्राम की ओर से अदालत में कहा गया कि कानून इस तरह के भेद का प्रावधान नहीं करता। टेलीग्राम ने केंद्र सरकार के आदेश को कानूनी खामियों से ग्रस्त बताते हुए कहा कि समिति ने सर्वसम्मति से अंतरिम निर्देश की पुष्टि करने की सिफारिश की थी।

केंद्र सरकार ने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि टेलीग्राम के आर्किटेक्चर और परीक्षा से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों में इसके बार-बार गलत इस्तेमाल के कारण अधिकारियों के पास इमरजेंसी ब्लॉकिंग शक्तियों का इस्तेमाल करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा था। एक हलफनामे में केंद्र ने कहा, “यह फैसला दूसरे सभी विकल्पों को आजमाने के बाद ही लिया गया, जिसमें गैर-कानूनी कंटेंट को खास तौर पर हटाने के बार-बार किए गए अनुरोध भी शामिल थे, जो नाकाफी पाए गए।”

दोनों पक्षों को सुनने के बाद गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले में फैसला सुरक्षित रखा था। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने फैसले को बरकरार रखा और टेलीग्राम की याचिका खारिज कर दी।

Pic Credit : ANI

घरेलू टूर्नामेंट से नाम हटाकर बुरी फंसी मनिका बत्रा, एशियन गेम्स से हुई बाहर

श्रीजा अकुला और जी. साथियान जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियाई खेल 2026 में भारतीय टेबल टेनिस की 10 सदस्यीय टीम की अगुवाई करेंगे। मनिका बत्रा को रिजर्व खिलाड़ियों में शामिल है।क्योंकि मुख्य टीम में जगह बनाने के लिए वह भारतीय टेबल टेनिस महासंघ (TTFI) द्वारा निर्धारित चयन मानदंड पर खरी नहीं उतर सकीं।

टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीटीआईएफआईI) ने गुरुवार को एशियाई खेलों 2026 के लिए रिजर्व खिलाड़ियों की सूची जारी की, जिसमें पूर्व कॉमनवेल्थ गेम्स चैंपियन मनिका बत्रा का नाम शामिल था। ओलंपियन श्रीजा अकुला और साथियान ज्ञानसेकरन आइची-नागोया 2026 में भारत की 10 सदस्यीय टेबल टेनिस टीम की अगुवाई करेंगे। भारत ने पुरुष और महिला टीमों में पांच-पांच खिलाड़ियों को शामिल किया है, साथ ही दोनों कैटेगरी में दो-दो रिज़र्व खिलाड़ी भी चुने हैं। यह टीम फेडरेशन की सिलेक्शन पॉलिसी के आधार पर चुनी गई है। इस पॉलिसी में नेशनल रैंकिंग को 50 प्रतिशत, वर्ल्ड रैंकिंग को 40 प्रतिशत और सिलेक्शन कमेटी के फ़ैसले को 10 प्रतिशत महत्व दिया जाता है।

TTFI ने कहा, ‘‘चयन प्रक्रिया ने सुनिश्चित किया कि भारत के सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग वाले और सबसे निरंतर खिलाड़ियों को एशिया की सबसे बड़ी बहु-स्पर्धा प्रतियोगिता में देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिले। ’’

हालांकि मनिका बत्रा ने पीएम और खेल मंत्री से गुजारिश की है कि वह इस मामले को देखें क्योंकि वह इस निर्णय से काफी दुखी है और चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता चाहती है।

भारत की सबसे कामयाब टेबल टेनिस खिलाड़ियों में से एक, 31 वर्षीय मनिका बत्रा मुख्य टीम में जगह नहीं बना पाईं और उन्हें रिजर्व खिलाड़ियों में रखा गया। मुख्य टीम में उनके शामिल न होने की वजह घरेलू टूर्नामेंट में उनकी गैर-मौजूदगी थी। महिला टीम की कप्तानी श्रीजा अकुला करेंगी, जो वर्ल्ड रैंकिंग में 45वें स्थान पर हैं और भारत की सबसे ऊंची रैंकिंग वाली महिला टेबल टेनिस खिलाड़ी हैं – वह मनिका से छह स्थान आगे हैं। यशस्वी घोरपड़े, दिया चितले, सुतीर्था मुखर्जी और युवा खिलाड़ी सिंड्रेला दास ने भी टीम में जगह बनाई है।

पुरुष टीम की अगुवाई अनुभवी जी. साथियान करेंगे, और उनके साथ हरमीत देसाई, मानव ठक्कर, मानुष शाह और पायस जैन भी टीम का हिस्सा होंगे। (टोक्यो ओलंपिक तक मनिका बत्रा की यह उपलबधियां रही है)-

Manika Batra

 


भीषण गर्मी से बचने के लिए मुंबई में लोग सी-बीच पर सोने को मजबूर, IMD ने बताया कब मिलेगी राहत?

Mumbai Beach

Mumbai Weather News: “सपनों की नगरी मुंबई से आई इस तस्वीर ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है! करोड़ों के आलीशान फ्लैट्स वाली मायानगरी में आज सैकड़ों लोग सिर्फ एक अदद ठंडी हवा के लिए समंदर के किनारे रेत पर सोने को मजबूर हैं। उमस और हीटवेव के इस डबल अटैक के बीच, आखिर मुंबईकरों को मानसून की राहत कब मिलेगी? देखें ग्राउंड रिपोर्ट।”

 

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई इस वक्त उमस और भीषण गर्मी की दोहरी मार झेल रही है। सोशल मीडिया (विशेषकर 'X' और इंस्टाग्राम) पर वरसोवा बीच (Versova Beach) की कुछ तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसमें सैकड़ों लोग रात के समय समंदर किनारे रेत पर सोते हुए दिखाई दे रहे हैं। चिलचिलाती धूप, आसमान छूती उमस और झुग्गी बस्तियों में बिजली कटौती (Power Outages) के कारण लोग अपने घरों को छोड़कर खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को विवश हैं। 

 

वरसोवा बीच से आई वायरल तस्वीरों की क्या है हकीकत? 

समाचार एजेंसी ANI और स्थानीय टेक-मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बीच पर सोने वाले ये अधिकांश लोग स्थानीय स्लम (झुग्गी) बस्तियों में रहने वाले मजदूर और छोटे परिवार हैं। ALSO READ: मानसून की रफ्तार पर ब्रेक! 15 जून तक 64% कम बारिश, MP-गुजरात समेत कई राज्यों में बढ़ी बेचैनी

  • घरों में वेंटिलेशन की कमी : जून के इस महीने में मुंबई का तापमान भले ही 33 से 35 डिग्री सेल्सियस दिख रहा हो, लेकिन तटीय इलाका होने के कारण यहां की उमस (Humidity) 75% से 80% के पार पहुंच चुकी है। टिन की छतों वाले और बेहद सघन (Densely Packed) घरों में वेंटिलेशन न होने के कारण रात के समय कमरे 'भट्ठी' की तरह तपने लगते हैं। 
  • समुद्री हवा का सहारा : स्थानीय निवासी राहुल ने बताया, “कमरे के अंदर दम घुटने लगता है। रात को बिजली कट जाए तो नरक जैसी स्थिति हो जाती है। इसलिए हम लोग शाम ढलते ही वरसोवा बीच पर आ जाते हैं, यहां समंदर की ठंडी हवा (Sea Breeze) में थोड़ी राहत मिलती है और भोर (सुबह) होते ही सब अपने काम पर लौट जाते हैं।” 

इस घटना ने मुंबई के इंफ्रास्ट्रक्चर, ओवरपॉपुलेशन और गरीब तबके के लिए 'सस्ती और हवादार हाउसिंग' (Affordable Housing) की कमी पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।

मौसम विभाग (IMD) का बुलेटिन : कब मिलेगी इस उमस से राहत?

तस्वीरें सामने आने के बाद आम जनता केवल एक ही सवाल पूछ रही है—मुंबई में झमाझम बारिश कब शुरू होगी? भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 19 जून 2026 को जारी अपने आधिकारिक बुलेटिन में मुंबईकरों के लिए राहत की खबर दी है: ALSO READ: मानसून पर 'अल नीनो' का साया! भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में बड़ी हलचल, IMD ने दी चेतावनी

 

IMD का पूर्वानुमान (Monsoon Update) : “दक्षिण-पश्चिम मानसून (Southwest Monsoon) तेजी से आगे बढ़ रहा है और अगले 4 से 5 दिनों के भीतर इसके पूरे महाराष्ट्र और मुंबई को कवर करने की प्रबल संभावना है। मौसम विभाग ने मुंबई और कोंकण क्षेत्र के लिए येलो अलर्ट (Yellow Alert) जारी किया है, जिसके तहत अगले 48 से 72 घंटों में गरज-चमक के साथ छिटपुट बारिश (Isolated Rainfall) और तेज हवाएं चल सकती हैं।”

 

हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि जब तक मॉनसून पूरी तरह सक्रिय नहीं हो जाता, तब तक अगले 3 दिनों तक महाराष्ट्र के अंदरूनी हिस्सों में अधिकतम तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस की मामूली बढ़ोतरी देखी जा सकती है, जिसके बाद ही तापमान में गिरावट आएगी।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह : इस जानलेवा उमस से खुद को कैसे बचाएं?

जब तक बारिश मुंबई को पूरी तरह सराबोर नहीं कर देती, तब तक इस चिपचिपी गर्मी से बचने के लिए केईएम (KEM) अस्पताल के डॉक्टरों ने निम्नलिखित जरूरी उपाय सुझाए हैं:

 

1. इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन : केवल पानी पीना काफी नहीं है। इस मौसम में शरीर से अत्यधिक पसीना निकलता है, इसलिए पानी में ओआरएस (ORS), नींबू-पानी या नारियल पानी मिलाकर पिएं ताकि शरीर में नमक की कमी न हो।

2. सूती कपड़ों का चयन : घरों के भीतर हल्के रंग के और ढीले-ढाले सूती (Cotton) कपड़े ही पहनें, जिससे त्वचा को हवा मिलती रहे और घमौरियों या स्किन इन्फेक्शन का खतरा न हो।

3. कमरे को ठंडा रखने का देसी तरीका : यदि घर में वेंटिलेशन कम है, तो शाम के समय खिड़कियों पर गीले पर्दे लटकाएं। इससे बाहर से आने वाली हवा थोड़ी ठंडी होकर कमरे में प्रवेश करेगी।

मानसून ही एकमात्र सहारा

उत्तर प्रदेश और बिहार के रहने वाले और मुंबई में मजदूरी करने वाले एक नागरिक ने दर्द साझा करते हुए कहा, “हम तब तक ही समंदर किनारे सो सकते हैं जब तक सूखा है, जैसे ही भारी मानसूनी बारिश शुरू होगी, हमें अंदर ही रहना होगा, लेकिन तब कम से कम गर्मी से राहत मिल चुकी होगी। साफ है कि मायानगरी के इस बड़े तबके की उम्मीदें अब पूरी तरह से इंद्रदेव और मानसून की फुहारों पर टिकी हैं। 

 

कानपुर में रिटायर्ड दारोगा के बेटे को घर से बुलाकर गोली मारी, पुरानी रंजिश में वारदात

कानपुर के कल्याणपुर में पुरानी रंजिश के चलते रिटायर दरोगा के बेटे प्रदीप सिंह को गोली मार दी गई। गोली पेट चीरते हुए आरपार हो गई। गंभीर हालत में उनका इलाज चल रहा है। पुलिस ने तीन नामजद आरोपितों समेत अन्य के खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कर तीन टीमें तलाश में लगाई हैं।

International Yoga Day : 3 लाख करोड़ रुपए की हुई वेलनेस इंडस्ट्री, जानिए योग से जुड़े किन शेयरों से हो सकती है कमाई

International Yoga Day : योग अब सिर्फ सेहत का मंत्र नहीं,बल्कि 3 लाख करोड़ की वेलनेस इंडस्ट्री बन चुका है। लोग अब बीमारी के इलाज से ज्यादा प्रिवेंटिव हेल्थकेयर पर ध्यान दे रहे हैं। यही वजह है कि आयुर्वेद,हेल्थ फूड्स और न्यूट्रास्यूटिकल्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। आखिर कितनी बड़ी है ये इंडस्ट्री और कहां हैं कमाई मौके, आइए जानते हैं।

वेलनेस इंडस्ट्री की हेल्दी हेल्थ पर नजर डाले तो योग और वेलनेस इंडस्ट्री 3 लाख करोड़ रुपए की हो गई है। अगले 5-10 साल तक इसमें 15-20% सालाना ग्रोथ की उम्मीद है। आयुर्वेद और नेचुरल हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स के सेक्टर में कई लिस्टेड कंपनियां काम कर रही है। इनमें डाबर इंडिया (Dabur India), पतंजलि फूड्स (Patanjali Foods), इमामी( Emami), जीना सीखो लाइफ केयर (Jeena Sikho Lifecare) और केआरएम आयुर्वेद (KRM Ayurveda) जैसी कंपनियां शामिल हैं।

न्यूट्रिशन और वेलनेस प्रोडक्ट्स की लिस्टेड कंपनियों के बात करें तो इनमें जायडस वेलनेस (Zydus Wellness), टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (Tata Consumer Products), मैरिको (Marico), नेस्ले इंडिया (Nestle India), आईटीसी (ITC)और हिंदुस्तान यूनीलीवर (Hindustan Unilever) के नाम शुमार हैं।

प्रिवेंटिव हेल्थकेयर

प्रिवेंटिव हेल्थकेयर का लिस्टेड कंपनियों पर नजर डालें तो इसमें पीएंडजी हेल्थकेयर (P&G Health), सनोफी कंज्यूमर हेल्थकेयर (Sanofi Consumer Healthcare), अमृतांजन हेल्थ केयर ( Amrutanjan Health Care) और हेक्सागॉन न्युट्रिशन (Hexagon Nutrition) के नाम शामिल हैं।

योगा डे से योगा डे: पिछले 1 साल के रिटर्न

पिछले योगा डे से इस योगा डे तक जिन कंपनियों की सेहत अच्छी रही उनमें केआरएम आयुर्वेदा ने 40 फीसदी, जीना सीखो ने 28 फीसदी, जाइडस वेलनेस ने 27 फीसदी, मैरिको ने 21 फीसदी, नेस्ले इंडिया ने 19 फीसदी, टाटा कंज्यूमर ने 5 फीसदी और पीएंडजी हेल्थ ने 5 फीसदी रिटर्न दिया है।

योगा डे से योगा डे: खराब रही सेहत

योगा डे से योगा डे तक जिन कंपनियों की सेहत खराब रही है उनमें पतंजलि फूड्स में 23 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है। वहीं, इमामी का शेयर इस अवधि में 30 फीसदी टूटा है। आईटीसी में भी 28 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है। जबकि, अमृतांजन हेल्थ 22 फीसदी और डाबर 9 फीसदी टूटा है।

 

Accenture Q3 Results: एक्सेंचर के कमजोर नतीजों ने तोड़ी आईटी शेयरों की कमर, अब इस सेक्टर में क्या हो निवेश रणनीति?

इंफोसिस, टीसीएस, एचसीएल टेक में बड़ी गिरावट से Nifty IT Index 5 फीसदी क्रैश, निवेशकों को क्या करना चाहिए?

आईटी शेयरों में 19 जून को बड़ी गिरावट आई। इसकी वजह रेवेन्यू ग्रोथ को लेकर एक्सेंचर का नया अनुमान है। उसने पूरे साल के लिए रेवेन्यू ग्रोथ के अपने अनुमान को घटा दिया है। इससे आईटी सर्विसेज की डिमांड कमजोर रहने का संकेत मिलता है। इसका असर 19 जून को आईटी कंपनियों के शेयरों पर दिखा। टीसीएस, इंफोसिस और एचसीएल टेक जैसी दिग्गज आईटी कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट आई।

आईटी शेयरों पर बीते कुछ महीनों में बड़ा दबाव दिखा है। इसका असर म्यूचुअल फंडों की आईटी फोकस वाली स्कीमों पर भी पड़ा है। बीते एक साल में इन स्कीमों का रिटर्न निगेटिव रहा है। हालांकि, लंबी अवधि में प्रदर्शन अभी पॉजिटिव बना हुआ है। फ्रैंकलिन इंडिया टेक्नोलॉजी फंड का 3 सालों में सालाना रिटर्न 12.62 फीसदी रहा है।

एसबीआई टेक्नोलॉजी अपॉर्चुनिटीज फंड ने 5 सालों में सालाना 9.67 फीसदी रिटर्न दिया है। अगर आईटी फोकस वाले म्यूचुअल फंड्स की कैटेगरी की बात की जाए तो बीते तीन सालों में इनका औसत रिटर्न करीब 5.4 फीसदी रहा है। इनमें क्वांट टेक फंड, मोतीलाल ओसवला डिजिटल इंडिया फंड, इनवेस्को इंडिया टेक्नोलॉजी फंड और एडलावाइज टेक्नोलॉजी फंड के अच्छे प्रदर्शन का हाथ है।

हालांकि, बीते छह महीनों में एवरेज रिटर्न करीब 15.4 फीसदी निगेटिव रहा है। इसकी वजह बीते महीनों में टेक्नोलॉजी शेयरों में आई बड़ी गिरावट है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि मीडियम और लॉन्ग टर्म के लिहाज से आईटी म्यूचुअल फंडों में निवेश का बड़ा मौका दिख रहा है।

वेल्थमिल्स सिक्योरिटीज में डायरेक्टर (रिसर्च) क्रांति बाथिनी ने कहा का कि म्यूचुअल फंड की कोई स्कीम कितनी अट्रैक्टिव है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि इनवेस्टर कितना रिस्क ले सकता है और वह कितने समय के लिए निवेश करना चाहता है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए आईटी-फोकस वाले म्यूचुअल फंड्स को कंट्रेरियन अपॉर्चुनिटीज माना जा सकता है।

उन्होंने कहा कि आईटी शेयरों की वैल्यूएशंस हिस्टोरिकल एवरेज के करीब आ गई हैं। इससे ये मध्यम और लंबी अवधि के निवेश के लिहाज से अट्रैक्टिव हो गए है। उन्होंने कहा, “हालांकि, साइक्लिकल नेचर को देखते हुए निवेश एकमुश्त की जगह धीरे-धीरे सिस्टमैटिक ऐलोकेशन के जरिए होना चाहिए।”

इक्विरियल सिक्योरिटीज में डायरेक्टर (रिसर्च एनालिस्ट) संदीप शाह ने कहा कि आईटी शेयरों में बड़े करेक्शन के बावजूद ऐसे शेयरों में निवेश किया जा सकता है, जिनकी ग्रोथ विजिबिलिटी अच्छी है। लार्जकैप आईटी शेयरों में इंफोसिस और टेक महिंद्रा का प्रदर्शन अच्छा रह सकता है। मिडकैप शेयरों में Mphasis, eClerx और KPIT Technologies के शेयर अपेक्षाकृत बेहतर दिखते हैं।

ईरानी सिंगर को 74 कोड़े की सजा:2 साल देश छोड़ने पर बैन; 2024 में बिना हिजाब स्लीवलेस ड्रेस पहनकर गाना गाया था

ईरान की मशहूर सिंगर परस्तू अहमदी और उनके साथ काम करने वाले 8 लोगों को ऑनलाइन कॉन्सर्ट के लिए 74-74 कोड़े मारने की सजा सुनाई गई है। उन पर 2 साल तक देश छोड़ने और 2 साल तक किसी भी आर्टिस्टिक एक्टिविटीज पर रोक लगाई गई है। यह सजा ईरान के कोम प्रांत की अदालत ने यूट्यूब पर पब्लिश किए गए एक कॉन्सर्ट के मामले में सुनाई है। अदालत ने आर्टिस्ट पर अश्लील कंटेट पब्लिश करने और सार्वजनिक शालीनता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। यह मामला दिसंबर 2024 का है। उस समय 29 साल की परस्तू अहमदी ने बिना हिजाब पहने यूट्यूब पर एक लाइव कॉन्सर्ट किया था। इस दौरान उन्होंने ईरान का लोकप्रिय देशभक्ति गीत ‘अज खूने जवानाने वतन’ (मातृभूमि के युवाओं के खून से) गाया था। कॉन्सर्ट का वीडियो कुछ ही समय में वायरल हो गया। यूट्यूब पर इसे लाखों लोगों ने देखा। वीडियो जारी होने के बाद ईरानी अधिकारियों ने परस्तू अहमदी और कई संगीतकारों को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया था। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया, लेकिन वीडियो प्रकाशित करने के मामले में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रही। गाने 4 पुरुषों के साथ स्लीवेस ड्रेस में दिखी परस्तू अहमदी ने 27 मिनट का एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें वह बिना हिजाब और स्लीव ड्रेस पहनकर चार पुरुष संगीतकारों के साथ गाना गाती नजर आ रही थीं। वीडियो के कैप्शन में उन्होंने इसे काल्पनिक कॉन्सर्ट बताया था। परस्तू के इस प्रोग्राम का वीडियो यूट्यूब पर लाखों बार देखा गया। कई लोगों ने इसे महिलाओं की अभिव्यक्ति की आजादी का प्रतीक बताया, जबकि ईरानी अधिकारियों ने इसे कानून के खिलाफ माना। ईरान में महिलाओं के लिए सार्वजनिक जगहों पर हिजाब पहनना अनिवार्य है। अधिकारियों ने बिना हिजाब पहनकर गाने को नियमों का उल्लंघन माना। पब्लिक में अकेले गाना नहीं गा सकती महिलाएं ईरान के कानून के मुताबिक महिलाएं सार्वजनिक रूप से अकेले गाना नहीं गा सकतीं और न ही बिना हिजाब लोगों के सामने आ सकती हैं। परस्तू अहमदी ने बिना हिजाब और खुले कंधों के साथ परफॉर्म कर इन लंबे समय से लागू प्रतिबंधों को खुली चुनौती दी। वीडियो वायरल होने के बाद परस्तू अहमदी और उनके साथ मौजूद कुछ सिंगर्स को हिरासत में लिया गया था। हालांकि बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया, लेकिन उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रही। परस्तू 2022 में हिजाब विरोधी प्रदर्शनों के दौरान पहली बार चर्चा में आई थीं। तब उन पर हिजाब विरोधी प्रदर्शन के समर्थन में गाने का आरोप लगा था। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया था और उनके घर की तलाशी भी ली गई थी। मानवाधिकार संगठनों ने नाराजगी जताई अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स इन ईरान की एडवोकेसी डायरेक्टर बहार घंदेहरी ने इस सजा की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि सिर्फ गाना गाने और बिना हिजाब सार्वजनिक रूप से नजर आने पर 74 कोड़ों की सजा देना दिखाता है कि ईरान में मानवाधिकारों की स्थिति अब भी नहीं बदली है। घंदेहरी ने कहा कि ईरानी सरकार दुनिया के सामने खुद को उदार और सुधारवादी दिखाने की कोशिश करती है, लेकिन कलाकारों के खिलाफ ऐसे कदम उसकी असली तस्वीर सामने लाते हैं। उनके मुताबिक, सरकार जो दिखाती है और जमीन पर जो होता है, दोनों में बड़ा फर्क है। मानवाधिकार वकील मोइन खजाएली ने भी फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ईरानी कानून में महिलाओं के गाना गाने, संगीत कार्यक्रम करने या संगीत से जुड़ा कंटेंट बनाने को अपराध नहीं माना गया है। ऐसे में इन कामों को अश्लीलता फैलाने जैसा अपराध बताकर सजा देना कानूनी तौर पर भी कमजोर दलील है। खजाएली का कहना है कि कलाकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं या आम लोगों को कोड़े मारने जैसी सजा सिर्फ कानूनी मुद्दा नहीं, बल्कि मानवाधिकारों का मामला भी है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई मानवाधिकार संगठन कोड़ों की सजा को न्यायिक दंड नहीं, बल्कि यातना और अमानवीय व्यवहार मानते हैं। ईरान में हिजाब को लेकर लंबे समय से विवाद 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से ईरान में महिलाओं के लिए हिजाब पहनना कानूनी रूप से जरूरी है। कानून के मुताबिक महिलाओं को पुरुषों की मौजूदगी में सिर ढकना होता है। हालांकि कई महिलाएं इन नियमों का विरोध करती रही हैं। यह मुद्दा 2022 में पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया था, जब 22 वर्षीय महसा अमिनी को तेहरान में हिजाब सही तरीके से न पहनने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। गिरफ्तारी के तीन दिन बाद उनकी मौत हो गई थी। ईरानी सरकार ने कहा था कि उनकी मौत पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं के कारण हुई। लेकिन मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र की जांच टीम ने इस दावे पर सवाल उठाए। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया था कि अमीनी की मौत ईरानी अधिकारियों की पिटाई के कारण हुई। महसा अमीनी की मौत के बाद पूरे ईरान में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। हजारों महिलाएं सड़कों पर उतरीं और हिजाब कानूनों के खिलाफ आवाज उठाई। हालांकि सरकार ने इन प्रदर्शनों को सख्ती से दबाया। ईरान में पहले भी महिलाओं को सजा मिली

स्लीवलेस ड्रेस पहनी, ईरानी सिंगर को 74 कोड़ों की सजा:2 साल तक देश छोड़ने पर भी बैन, बिना हिजाब के 2024 में गाना गाया था

ईरान की मशहूर सिंगर परस्तू अहमदी और उनके साथ काम करने वाले 8 लोगों को ऑनलाइन कॉन्सर्ट के लिए 74-74 कोड़े मारने की सजा सुनाई गई है। उन पर 2 साल तक देश छोड़ने और 2 साल तक किसी भी आर्टिस्टिक एक्टिविटीज पर रोक लगाई गई है। यह सजा ईरान के कोम प्रांत की अदालत ने यूट्यूब पर पब्लिश किए गए एक कॉन्सर्ट के मामले में सुनाई है। अदालत ने आर्टिस्ट पर अश्लील कंटेट पब्लिश करने और सार्वजनिक शालीनता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। यह मामला दिसंबर 2024 का है। उस समय 29 साल की परस्तू अहमदी ने बिना हिजाब पहने यूट्यूब पर एक लाइव कॉन्सर्ट किया था। इस दौरान उन्होंने ईरान का लोकप्रिय देशभक्ति गीत ‘अज खूने जवानाने वतन’ (मातृभूमि के युवाओं के खून से) गाया था। इस दौरान वह बिना हिजाब और स्लीवलेस ड्रेस में थीं। कॉन्सर्ट का वीडियो कुछ ही समय में वायरल हो गया। यूट्यूब पर इसे लाखों लोगों ने देखा। वीडियो जारी होने के बाद ईरानी अधिकारियों ने परस्तू अहमदी और कई संगीतकारों को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया था। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया, लेकिन वीडियो प्रकाशित करने के मामले में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रही। गाने में 4 पुरुषों के साथ स्लीवेस ड्रेस में दिखीं परस्तू अहमदी ने 27 मिनट का एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें वह बिना हिजाब और स्लीव ड्रेस पहनकर चार पुरुष संगीतकारों के साथ गाना गाती नजर आ रही थीं। वीडियो के कैप्शन में उन्होंने इसे काल्पनिक कॉन्सर्ट बताया था। परस्तू के इस प्रोग्राम का वीडियो यूट्यूब पर लाखों बार देखा गया। कई लोगों ने इसे महिलाओं की अभिव्यक्ति की आजादी का प्रतीक बताया, जबकि ईरानी अधिकारियों ने इसे कानून के खिलाफ माना। ईरान में महिलाओं के लिए सार्वजनिक जगहों पर हिजाब पहनना अनिवार्य है। अधिकारियों ने बिना हिजाब पहनकर गाने को नियमों का उल्लंघन माना। पब्लिक में अकेले गाना नहीं गा सकती ईरानी महिलाएं ईरान में महिलाओं पर कई सामाजिक प्रतिबंध हैं। कानून के अनुसार वे सार्वजनिक जगह पर अकेले गाना नहीं गा सकतीं और बिना हिजाब लोगों के सामने नहीं आ सकतीं। गायिका परस्तू अहमदी ने बिना हिजाब और स्लीवलेस ड्रेस में परफॉर्म कर इन नियमों का खुलकर विरोध किया। परस्तू पहली बार 2022 में हिजाब विरोधी प्रदर्शनों के दौरान चर्चा में आई थीं। उन पर इन प्रदर्शनों के समर्थन में गाना गाने का आरोप लगा था। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने उनसे पूछताछ की और उनके घर की तलाशी भी ली थी। मानवाधिकार संगठनों ने नाराजगी जताई अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स इन ईरान की एडवोकेसी डायरेक्टर बहार घंदेहरी ने इस सजा की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि सिर्फ गाना गाने और बिना हिजाब सार्वजनिक रूप से नजर आने पर 74 कोड़ों की सजा देना दिखाता है कि ईरान में मानवाधिकारों की स्थिति अब भी नहीं बदली है। मानवाधिकार वकील मोइन खजाएली ने भी फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ईरानी कानून में महिलाओं के गाना गाने, संगीत कार्यक्रम करने या संगीत से जुड़ा कंटेंट बनाने को अपराध नहीं माना गया है। ऐसे में इन कामों को अश्लीलता फैलाने जैसा अपराध बताकर सजा देना कानूनी तौर पर भी कमजोर दलील है। ईरान में हिजाब को लेकर लंबे समय से विवाद 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से ईरान में महिलाओं के लिए हिजाब पहनना कानूनी रूप से जरूरी है। कानून के मुताबिक महिलाओं को पुरुषों की मौजूदगी में सिर ढकना होता है। हालांकि कई महिलाएं इन नियमों का विरोध करती रही हैं। यह मुद्दा 2022 में पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया था, जब 22 साल की महसा अमिनी को तेहरान में हिजाब सही तरीके से न पहनने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। गिरफ्तारी के तीन दिन बाद उनकी मौत हो गई थी। ईरानी सरकार ने कहा था कि उनकी मौत पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं के कारण हुई। लेकिन मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र की जांच टीम ने इस दावे पर सवाल उठाए। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया था कि अमीनी की मौत ईरानी अधिकारियों की पिटाई के कारण हुई। महसा अमीनी की मौत के बाद पूरे ईरान में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। हजारों महिलाएं सड़कों पर उतरीं और हिजाब कानूनों के खिलाफ आवाज उठाई। हालांकि सरकार ने इन प्रदर्शनों को सख्ती से दबाया। ईरान में पहले भी महिलाओं को सजा मिली ————————————— ईरान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… ईरान पीस डील का सबसे बड़ा चेहरा बने जेडी वेंस:जंग रुकी तो अगले राष्ट्रपति बनने के सबसे बड़े दावेदार, फेल हुई तो करियर तबाह अमेरिका और ईरान के बीच बुधवार रात ऐतिहासिक और विवादित पीस डील हुई। इसके बाद से अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इसका सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं। ‌BBC की रिपोर्ट के मुताबिक वेंस लगातार फ्रंट फुट पर आकर इस फैसले का बचाव कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें

Kala Hiran: ‘काला हिरन’ के निर्माता का बड़ा खुलासा, सलमान खान के फैन ने दी जान से मारने की धमकी, बोला- ‘3 दिन में कर देगा मर्डर’

Kala Hiran: ‘काला हिरण’ फ़िल्म के प्रोड्यूसर अमित जानी ने 18 जून को आरोप लगाया था कि फ़िल्म रिलीज़ होने से पहले उन्हें पाकिस्तान से धमकियां मिल रही हैं। अब उन्होंने दावा किया है कि पुलिस को पहली धमकी की जानकारी देने के कुछ ही घंटों बाद, 24 घंटे के अंदर उन्हें जान से मारने की दूसरी धमकी मिली है।

जोधपुर पुलिस को दी गई एक नई शिकायत के बारे में प्रोड्यूसर ने X पर जानकारी दी। उन्होंने शिकायत पत्र की एक तस्वीर शेयर की और दावा किया कि एक अनजान कॉलर ने उन्हें तीन दिन के अंदर जान से मारने की धमकी दी। उन्होंने कैप्शन में लिखा: “24 घंटे में दूसरी बार मुझे जान से मारने की धमकी मिली है। जैसे ही पहला मामला दर्ज हुआ, दूसरी धमकी आ गई। मैं @Igp_Jodhpur @CP_Jodhpur @RajPoliceHelp @PoliceRajasthan @RajPoliceHelp @RajGovOfficial @HMOIndia से गुज़ारिश करता हूं कि वे तुरंत मामला दर्ज करें और धमकी देने वाले व्यक्ति को गिरफ़्तार करवाएं।”

पत्र में लिखा है- “मुझे आज पाकिस्तानी आतंकवादी शहजाद ब्रह्मादग बुगती द्वार भी धमकी दी गई थी, जिसकी सूचना मैंने आपके थाने में दर्ज कराई है। “एक बार पुन- मुझे मेरे मोबाइल नंबर 9811999801 पर रात 11:06 बजे पर 9735279983 से धमकी भरा कॉल आया है। धमकी देने वाले की आवाज को सुरक्षित (रिकॉर्ड) कर लिया गया है।

धमकी देने वाला बता रहा है कि वाह फिल्म अभिनेता सलमान खान का फैन है और वाह मुझे अगले तीन दिन के अंदर हत्या कर देगा। मेरे मोबाइल नंबर 9811999801 पर रात 11:06 बजे 9735279983 नंबर से धमकी भरा फोन आया। फोन करने वाले की आवाज सुरक्षित रूप से रिकॉर्ड कर ली गई है। फोन करने वाले ने खुद को फिल्म अभिनेता सलमान खान का प्रशंसक बताया और अगले तीन दिनों के भीतर मेरी हत्या करने की धमकी दी।

उन्होंने कहा कि ज्ञाताव्य है कि प्रकरण संख्या 32 उम्मीद विरासत में रुका हुआ हूं तथा आज भी तीन घंटे के अंतराल में मुझे याह हत्या की दूसरी धमकी मिली है। उन्होंने पुलिस से इन धमकियों को जारी करने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार करने और उनकी शिकायत पर मामला दर्ज करने का अनुरोध किया।

कृपया धमकी देने वाले को गिरफ्तार करना तथा मेरा मुकदमा दर्ज करने का कष्ट करना। मुझे आशा है कि यह धमकी देने वाला आतंकवादी भी हो सकता है और आतंकवादी शहजाद ब्रह्मदाग बुगती का गुर्गा भी हो सकता है। चुनकी मुझे मात्र तीन दिन का समय दिया गया है, इसलिए प्रार्थना है कि मुक़दमा दर्ज करते हुए शीघरा इसकी गिरफ़्तारी करने का कष्ट करें।

18 जून को, जानी ने X (पूर्व में ट्विटर) पर एक लंबा नोट लिखा, जिसमें उन्होंने बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान का समर्थन करने वाले एक “पाकिस्तानी आतंकवादी” द्वारा दी गई धमकी का विवरण साझा किया। उन्होंने लिखा, “मुझे देर रात शहजाद भट्टी, जो खुद को पाकिस्तानी आतंकवादी घोषित कर चुका है, के फोन और संदेश आ रहे हैं, जिसमें सलमान खान का समर्थन करते हुए ड्रोन और ग्रेनेड हमले में मेरी जान से मारने की धमकी दी जा रही है। मैंने गृह मंत्रालय, राजस्थान पुलिस और सीआरपीएफ अधिकारियों को सूचित कर दिया है।”

उन्होंने कहा, “सलमान खान दो मोर्चों पर लड़ रहे हैं; एक तरफ, दिल्ली हाई कोर्ट में उनके खिलाफ ‘काला हिरण’ मामले की सुनवाई हो रही है, और दूसरी तरफ, उन्होंने अपनी टूलकिट के ज़रिए हज़ारों धमकियां दिलवाई हैं।”

“काला हिरण” फ़िल्म बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान से जुड़े काले हिरण के शिकार के मामले पर आधारित है। यह फ़िल्म असल ज़िंदगी की घटनाओं से प्रेरित है, इसलिए प्रोड्यूसर ने आरोप लगाया है कि सुपरस्टार की ओर से फ़िल्म रिलीज़ न करने का भारी दबाव डाला जा रहा है।

उन्होंने आगे कहा, “जब मैं ‘डी कंपनी’ के नाम से मिली धमकी से नहीं डरा, तो अब उन्होंने घोषित आतंकवादी शहज़ाद भट्टी से मुझे कॉल और मैसेज करवाया है… आपके स्टारडम और ‘बीइंग ह्यूमन’ (इंसानियत) के झूठे नारे पर शर्म आती है। लेकिन मैं डरता नहीं हूँ। अगर मेरी हत्या भी हो जाती है, तो मेरी मौत के बाद मेरी टीम ‘काला हिरण’ रिलीज़ करेगी ताकि दुनिया बिश्नोई समुदाय के संघर्ष की गाथा और बलिदान का इतिहास देख सके।”