CBSE Class 10 Second Board Result 2026: 10वीं कक्षा दूसरी बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट कभी भी हो सकता है जारी, परिणाम में देरी पर उठ रहे हैं सवाल

CBSE Class 10 Second Board Result 2026: सीबीएसई बोर्ड से 10वीं कक्षा की दूसरी बोर्ड परीक्षा दे चुके तकरीबन 6.5 लाख छात्र अपने रिजल्ट का बेसब्री से रास्ता देख रहे हैं। लेकिन 21 मई के बाद से अब लगभग एक महीने का समय बीत जाने के बावजूद केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की तरफ से 10वीं कक्षा दूसरी बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट पर कोई अपडेट नहीं है। मीडिया में आ रही है कई खबरों में कहा जा रहा है कि सीबीएसई 10वीं कक्षा दूसरी बोर्ड परीक्षा रिजल्ट 2026 जून के आखिर तक आ सकते हैं।

यह इंतजार छात्रों और अभिभावकों के बीच चर्चा का एक बड़ा मुद्दा बन गया है। खासकर इसलिए क्योंकि यह सीबीएसई के नए दो-बोर्ड-एग्जाम सिस्टम का पहला साल है। रिजल्ट जारी होने के बाद, छात्र बोर्ड के आधिकारिक रिजल्ट पोर्टल के जरिए अपना रिजल्ट देख सकेंगे।

दूसरा परीक्षा साइकिल 15 मई से 21 मई, 2026 तक हुआ था। सीबीएसई के आंकड़ों के मुताबिक, तकरीबन 6.5 लाख छात्र इस एग्जाम में शामिल हुए थे। ये परीक्षा बोर्ड के संशाधित मूल्यांकन व्यवस्था के तहत शुरू की गई थी, जो 10वीं कक्षा के छात्रों को अपने स्कोर सुधारने या उन विषयों को पास करने का एक और मौका देता है जिनमें वे साल की शुरुआत में हुए मेन बोर्ड एग्जाम के दौरान क्वालिफाई नहीं कर पाए थे।

नए फॉर्मेट के तहत, फरवरी बोर्ड एग्जाम अनिवार्य रहेगा, जबकि दूसरा एग्जाम वैकल्पिक है। दूसरे फेज में छात्र ज्यादा से ज्यादा तीन विषयों की परीक्षा दे सकते हैं। सीबीएसई उन्हें दोनों एग्जाम में मिले बेहतर स्कोर को बनाए रखने की इजाजत देता है। खबर है कि 5 लाख से ज्यादा कैंडिडेट्स ने इम्प्रूवमेंट कैटेगरी में रजिस्टर किया, जबकि हजारों दूसरे कंपार्टमेंट एग्जाम में शामिल हुए। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे अपडेट के लिए सीबीएसई की ऑफिशियल वेबसाइट देखते रहें। रिजल्ट जारी होने के बाद अस्थायी मार्कशीट भी ऑनलाइन उपलब्ध होगी।

सीबीएसई 10वीं कक्षा सेकंड बोर्ड रिजल्ट 2026 कैसे चेक करें

  • ऑफिशियल सीबीएसई रिजल्ट वेबसाइट पर जाएं।
  • सीबीएसई 10वीं सेकंड बोर्ड रिजल्ट 2026 लिंक पर क्लिक करें।
  • अपना रोल नंबर और दूसरे ज़रूरी क्रेडेंशियल डालें।
  • डिटेल्स सबमिट करें।
  • आगे के लिए रिजल्ट देखें और डाउनलोड करें।

रिजल्ट कहां चेक करें

स्टूडेंट्स अपना रिजल्ट इन तरीकों से देख पाएंगे:

  • cbseresults.nic.in
  • results.cbse.nic.in
  • cbse.gov.in
  • DigiLocker
  • UMANG App

उम्मीद है कि ऑफिशियल वेबसाइट पर ज्यादा ट्रैफिक होने पर सीबीएसई छात्रों को अपने स्कोरकार्ड आसानी से देखने में मदद करने के लिए दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी रिजल्ट उपलब्ध कराएगा।

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ब्राजील को बड़ा झटका, कप्तान नेमार के बिना उतरना पड़ेगा अगले मैच में

ब्राजील फुटबॉल महासंघ (CBF) ने गुरुवार को कहा कि नेमार विश्व कप के ग्रुप सी में हैती के खिलाफ होने वाले मैच के लिए टीम के साथ फिलाडेल्फिया नहीं जा रहे और न ही वह उस मैच में खेलेंगे। सीबीएफ ने एक विज्ञप्ति में कहा, “वह अपनी रिकवरी प्रक्रिया के अंतिम चरण को बेहतर बनाने के लिए न्यू जर्सी में ही रहेंगे, और द रिज होटल और कोलंबिया पार्क प्रशिक्षण केंद्र की उत्कृष्ट सुविधाओं का लाभ उठाएंगे।”

34 वर्षीय नेमार, जो दाहिनी पिंडली की चोट के कारण एक महीने से बाहर थे, ने बुधवार को मॉरिसटाउन, न्यू जर्सी में क्लब के अभ्यास सत्र में इस विश्व कप के दौरान पहली बार अपनी ब्राजील टीम के साथियों के साथ संक्षिप्त रूप से प्रशिक्षण लिया।

वह बुधवार को राफिन्हा , ब्रूनो गुइमारेस , गैब्रियल मैगलहेस और फैबिन्हो के साथ मैदान पर उतरे और मीडिया के सदस्यों से मजाक करते हुए कहा, “क्या आपको मेरी याद आई।” अमेरिका पहुंचने के बाद मंगलवार को उन्होंने पहली बार अकेले ही मैदान के किनारे प्रशिक्षण भी लिया था।

सीबीएफ द्वारा जारी फुटेज के अनुसार, बार्सिलोना और पेरिस सेंट-जर्मेन के पूर्व फॉरवर्ड ने मंगलवार को कार्लो एंसेलोटी के कोचिंग स्टाफ के एक सदस्य के साथ अपने पहले रनिंग ड्रिल का प्रदर्शन किया और व्यायाम किया।

कर्नाटक में NDA को बड़ा झटका! भाजपा-JDS में हुई भारी ‘क्रॉस वोटिंग’, डीके शिवकुमार के चक्रव्यूह में फंसी BJP

karnataka MLC Election Results 2026

karnataka MLC Election Results 2026: बेंगलुरु से इस वक्त की सबसे बड़ी राजनीतिक खबर! काउंटिंग रूम से निकलते ही भाजपा के पैरों तले जमीन खिसक गई। अपनों ने ही दिया धोखा—जानिए कैसे भाजपा-JDS के 11 विधायकों ने गुपचुप कांग्रेस को जिता दिया।

 

कर्नाटक की राजनीति में गुरुवार, 18 जून को एक ऐसा भूचाल आया जिसने विपक्षी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को हिलाकर रख दिया है। कर्नाटक विधान परिषद (MLC) की 7 सीटों पर हुए द्विवार्षिक चुनाव के नतीजों ने सबको चौंका दिया है। राज्य के मुख्यमंत्री और कांग्रेस के कद्दावर रणनीतिकार डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) के बिछाए राजनीतिक चक्रव्यूह में भाजपा और जेडीएस इस कदर फंसे कि उनके अपने ही विधायकों ने कांग्रेस के पक्ष में भारी 'क्रॉस वोटिंग' (Cross Voting) कर दी। 

 

इस चुनावी उलटफेर के बाद कांग्रेस ने 7 में से 5 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है, जबकि भाजपा के खाते में सिर्फ 2 सीटें आईं और जेडीएस (JDS) के इकलौते उम्मीदवार को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा। 

चुनावी अंकगणित : कहां गायब हुए NDA के 12 वोट? 

विधानसभा के आधिकारिक आंकड़ों और चुनाव अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस के पास अपने 135 विधायक हैं। इसके अलावा उन्हें 2 निर्दलीय, 1 सर्वोदय कर्नाटक पक्ष और भाजपा से निष्कासित 2 विधायकों (एसटी सोमशेखर और शिवराम हेब्बार) का समर्थन मिलाकर कुल 140 वोट मिलने तय थे।

 

लेकिन, जब पहली वरीयता के वोटों की गिनती खत्म हुई, तो कांग्रेस के हिस्से में उम्मीद से 11 वोट अधिक यानी कुल 151 वोट आए। वही दूसरी ओर, एनडीए (NDA) खेमे का गणित पूरी तरह बिगड़ गया: 

  • भाजपा का नुकसान : 64 विधायकों वाली भाजपा के दोनों उम्मीदवारों को मिलाकर कुल 56 वोट ही मिले, जो उनकी तय ताकत से 8 वोट कम थे। भाजपा के लिंगराज पाटिल को 30 की जगह केवल 27 वोट मिले।
  • जेडीएस की करारी हार : 18 विधायकों वाली जेडीएस के उम्मीदवार एन. गोविंदराजू को केवल 14 वोट मिले।

एनडीए के समझौते के तहत भाजपा ने अपने 3 अतिरिक्त विधायक जेडीएस को ट्रांसफर किए थे, जिससे गोविंदराजू को 21 वोट मिलने चाहिए थे, लेकिन वे अपनी पार्टी के विधायकों के वोट भी नहीं बचा पाए।

विपक्ष के नेता का कबूलनामा: भाजपा के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने हार स्वीकार करते हुए कहा कि हमारे कुछ विधायकों ने पार्टी लाइन को पार किया है। हमारी पार्टी में क्रॉस वोटिंग हुई है, हम उन विधायकों की पहचान कर रहे हैं और उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

शिवकुमार का 'मॉक पोल' चक्रव्यूह और कांग्रेस की रणनीति

राजनीतिक विश्लेषकों (Expertise) के अनुसार, इस चुनाव में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अपनी कुशल संगठनात्मक क्षमता का परिचय दिया। चुनाव से पहले ही कांग्रेस ने अपने विधायकों की एकजुटता बनाए रखने के लिए बेंगलुरु के एक रिसॉर्ट में तीन बार 'मॉक वोटिंग' (प्रशिक्षण मतदान) कराया था, ताकि पहली बार के विधायकों का एक भी वोट अमान्य (Invalid) न हो।

 

जीत के बाद मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने बेहद सधे हुए अंदाज में प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हमें विपक्षी विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग की कोई पूर्व जानकारी नहीं थी। यह हमारी सरकार की 5 गारंटी योजनाओं और जन कल्याणकारी नीतियों पर अन्य दलों के विधायकों का 'अंतरात्मा की आवाज पर दिया गया वोट' (Conscience Vote) है।” 

कर्नाटक MLC चुनाव परिणाम 2026 : एक नजर में

karnataka MLC Election Results 2026

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इस उलटफेर का राज्यसभा और कर्नाटक की राजनीति पर क्या होगा असर?

इस प्रचंड जीत के बाद कर्नाटक विधान परिषद (75 सदस्यीय उच्च सदन) में कांग्रेस ने इतिहास में पहली बार पूर्ण बहुमत (39 सीटें) हासिल कर लिया है।

  • सदन में बिल पास कराना आसान : अब सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की सरकार को किसी भी नए कानून या संशोधन बिल को पास कराने के लिए विपक्ष के सामने नहीं झुकना पड़ेगा। 
  • राज्यसभा सीटों पर संकट : इस क्रॉस वोटिंग ने भाजपा-जेडीएस गठबंधन की अंदरूनी गुटबाजी और कलह को उजागर कर दिया है। इसका सीधा असर आगामी राज्यसभा चुनावों पर पड़ेगा, जहां भाजपा के लिए अपनी सीटें बचाना अब एक बड़ी चुनौती बन गया है।

नीट विवाद के बीच 11 छात्रों ने की खुदकुशी, अभिजीत दीपके ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, 1 करोड़ मुआवजे की मांग

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नीट पेपर लीक विवाद के बीच अब सुसाइड मामलों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सुसाइड करने वाले छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में विफलता का आरोप लगाते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे या उन्हें बर्खास्त करने की भी मांग की। ALSO READ: इंदौर में तीसरी मंजिल से गिरी NEET छात्रा, अस्पताल में मौत, हादसा या नीट पेपर लीक से है कनेक्‍शन?

 

अभिजीत दीपके ने अपने पत्र में लिखा कि मैं आज भारी मन से आपको यह पत्र लिख रहा हूं, ताकि आपका ध्यान एक ऐसे गंभीर संकट की ओर आकर्षित कर सकूं, जो हमारे राष्ट्र के भविष्य को ही खतरे में डाल रहा है, हमारे युवा छात्रों के जीवन और मानसिक स्वास्थ्य को खतरे में डाल रहा है।

 

11 नीट उम्मीदवारों ने सुसाइड किया

उन्होंने अपने पत्र में दावा किया कि छले एक सप्ताह में 11 नीट उम्मीदवारों ने सुसाइड किया है। सबसे सबसे चिंताजनक बात यह है कि इनमें से 5 दिल दहला देने वाली घटनाएं पिछले 48 घंटों के भीतर हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार होने वाले परीक्षा विवादों से छात्रों का भरोसा कमजोर हुआ है और कई छात्र मानसिक दबाव झेल रहे हैं। पिछले दो महीनों में, मैं व्यक्तिगत रूप से उन कई शोकग्रस्त परिवारों से मिला हूं जिनके छात्रों ने आत्महत्या कर ली है। अपने बच्चे को खोने के असहनीय भावनात्मक आघात के अलावा, ये परिवार अब गंभीर और लगातार बिगड़ती आर्थिक बर्बादी का सामना कर रहे हैं।

 

क्यों मांगा 1 करोड़ का मुआवजा?

बेहतर भविष्य की तलाश में, कई परिवारों ने अपने बच्चों के सपनों को साकार करने के लिए भारी मात्रा में शैक्षिक ऋण लिए थे, जो व्यवस्थागत विफलताओं के कारण बेरहमी से चकनाचूर हो गए। जिन बच्चों की शिक्षा पर उन्होंने अपनी पूरी जमा पूंजी लगा दी थी, उन्हें खो देने के बाद ये परिवार पूरी तरह से बेसहारा हो गए हैं। सरकार को तत्काल राहत प्रदान करने के लिए आगे आना चाहिए। हम मांग करते हैं कि आपका प्रशासन कागजी सूचनाओं के रिसाव के बढ़ते संकट के कारण आत्महत्या करने वाले सभी परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा जारी करे।”

 

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग

अभिजीत दीपके ने सरकार से जवाबदेही की अपनी पार्टी की मांग को दोहराया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने लिखा कि कॉकरोच जनता पार्टी पिछले एक महीने से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रही है और अपनी मांगों को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन कर रही है। हम छात्रों की बस यही मांग है कि जानमाल के नुकसान के लिए जवाबदेही तय की जाए।

edited by : Nrapendra Gupta

सलमान खान की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई टली

बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की ओर से फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी’ की रिलीज पर रोक लगाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर शुक्रवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनवाई टाल दी है। अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 1 जुलाई तय की है। 

फिल्म निर्माताओं की ओर से अदालत में कहा गया कि उन्हें सलमान खान की तरफ से दाखिल की गई पूरी याचिका की कॉपी अभी तक नहीं मिली है। उन्हें सिर्फ एक आवेदन की कॉपी दी गई है। इस पर जस्टिस मधु जैन ने सलमान खान के वकील को निर्देश दिया कि वे सुनिश्चित करें कि दूसरे पक्ष को याचिका की पूरी कॉपी उपलब्ध कराई जाए।

इससे पहले की सुनवाई में अदालत ने फिल्म के निर्माता अमित जानी और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया था और उनसे जवाब मांगा था।

यह पूरा विवाद फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी’ से जुड़ा है, जो सलमान खान से संबंधित बहुचर्चित ब्लैकबक शिकार मामले पर आधारित बताई जा रही है। सलमान खान का आरोप है कि इस फिल्म में उनके नाम, छवि और व्यक्तित्व का बिना अनुमति उपयोग किया गया है, जो उनके पर्सनैलिटी राइट्स का सीधा उल्लंघन है।

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याचिका में कहा गया है कि फिल्म के पोस्टर में ऐसे तत्व शामिल हैं, जो सीधे तौर पर सलमान खान की सार्वजनिक पहचान से मिलते-जुलते हैं, जिसके चलते फिल्म की रिलीज, प्रमोशन और डिजिटल स्ट्रीमिंग तक पर रोक लगाई जाए।

सलमान खान ने यह याचिका प्रोड्यूसर अमित जानी, जानी फायरफॉक्स फिल्म्स, डायरेक्टर भरत श्रीनाटे, अक्षय पांडे और प्रोजेक्ट से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ दायर की थी।

‘काला हिरण: बैटल फॉर लिगेसी’ के फर्स्ट लुक और टीजर में सलमान खान से प्रेरित किरदार का नाम अयान खान रखा गया। अयान खान के किरदार को अभिनेता काशिफ इकबाल खान निभा रहे हैं। दर्शकों को उनका लुक, चलने का स्टाइल और हर हाव-भाव सलमान से एकदम मेल खाता नजर आया है। काशिफ इकबाल खान ठीक वैसा ही ब्रेसलेट पहने नजर आए, जैसा सलमान पहनते हैं। ऐसे में सोशल मीडिया पर लोग अपनी-अपनी राय दे रहे हैं।

Pic Credit : ANI

Jio Platforms का आएगा मेगा आईपीओ, कंपनी आज सेबी के पास डीआरएचपी फाइल करेगी

रिलायंस इंडस्ट्रीज चेयरमैन एवं एमडी मुकेश अंबानी ने 19 जून को बड़ा ऐलान किया। उन्होंने आरआईएल की 49वी एजीएम में कहा कि जियो प्लेटफॉर्म्स के बोर्ड ने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्ट्स (DRHP) को मंजूरी दे दी है। इसे आज यानी 19 जून को सेबी के पास फाइल कर दिया जाएगा।

आकाश, ईशा और अनंत जियो प्रोसेस को आगे बढ़ा रहे

अंबानी ने 19 जून को RIL के एजीएम को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने शेयर्ड ग्रोथ यानी साझा विकास के धीरूभाई अंबानी की विरासत को आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा, “आकाश, ईशा और अनंत जियो के आईपीओ के प्रोसेस को आगे बढ़ा रहे हैं। इससे भविष्य में अगली पीढी की वैल्यू क्रिएशन के मौके बनेंगे।”

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जियो ने वॉयसेज को ग्राहकों के लिए फ्री किया

अंबानी ने कहा कि 10 साल पहले जियो ने भारत में डिजिटल असमानता खत्म करने के मकसद के साथ शुरुआत की थी। तब वॉयसेज बहुत महंगे थे। डेटा के लिए बड़ी कीमत चुकानी पड़ती थी और स्पीड और क्वाविलीट काफी खराब थी। जियो ने वॉयस को फ्री कर दिया। हाई स्पीड डेटा को सस्ता बना दिया।

जियो प्लेटफॉर्म्स अगली पीढ़ी के मिशन की तैयारी में

आरआईएल के चेयरमैन ने कहा कि जियो ने जियो ने हर भारतीय के लिए डिजिटल लाइफ को मुमकिन बनाया है। अब कंपनी अगली पीढी के बड़े मिशन की तैयारी कर रही है। जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ का काफी समय से इंतजार हो रहा था। 19 जून को यह इंतजार खत्म हो गया।

जियो प्लेटफॉर्म्स देश का सबसे बड़ा आईपीओ हो सकता है

जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ देश के सबसे बड़े आईपीओ में से एक होगा। इस मेगा आईपीओ को इनवेस्टर्स का जबर्दस्त रिस्पॉन्स मिल सकता है। रायटर्स ने इस साल जनवरी में कहा था कि यह आईपीओ 4 अरब डॉलर का हो सकता है। इसका मतलब है कि यह 36,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का होगा। इस तरह यह देश का सबसे बड़ा आईपीओ बन सकता है।

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अमेरिका में करोड़ों की कंपनी चलाने वाली हिमाक्षी की दादी को उनके काम से ज्यादा शादी की चिंता! गजब का वीडियो शेयर किया

न्यूयॉर्क में रहने वाली एक सीनियर बिज़नेस एग्जीक्यूटिव का परिवार से जुड़ा एक ऐसा अनुभव सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिससे शादी, सफलता और महिलाओं से जुड़ी पीढ़ियों की उम्मीदों पर एक बड़ी बहस छिड़ गई है।

‘प्रिया ग्रोन डायमंड्स’ की प्रेसिडेंट हेमाक्षी मोटका ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया। इसमें उन्होंने बताया कि भारत में उनकी दादी हाल ही में एक कम्युनिटी इवेंट से निराश होकर लौटीं। इस इवेंट में शहर की सिर्फ़ शादीशुदा बेटियों को ही कंबल बांटे गए थे। चूंकि मोटका की शादी नहीं हुई है, इसलिए उनकी दादी उनके लिए कंबल नहीं ले पाईं।

अब वायरल हो रहे वीडियो में घटना के बारे में बताते हुए मोटका ने कहा- “मेरी दादी इसलिए दुखी हैं क्योंकि वह एक कार्यक्रम में गई थीं, जहां शहर की सभी शादीशुदा बेटियों को कंबल दिए जा रहे थे, और उन्हें कंबल नहीं मिल पाया क्योंकि मेरी शादी नहीं हुई है।”

इंटरनेट को यकीन नहीं हो रहा था कि उनकी दादी की निराशा की वजह यही थी, लेकिन अलग-अलग पीढ़ियां चीज़ों को अलग-अलग नज़रिए से देखती हैं। उन्होंने कहा, “तो मैं यहां न्यूयॉर्क शहर में सचमुच एक मल्टी-मिलियन डॉलर की कंपनी चला रही हूं। मैंने मैराथन भी दौड़ी है – 42 किलोमीटर की। फिर भी, एक कंबल के सामने मेरी ये सारी उपलब्धियां फीकी पड़ गईं।”

हालांकि कई दर्शकों को इस स्थिति की विडंबना पर हंसी आई, लेकिन मोटका ने कहा कि इस घटना ने उन्हें इस बारे में गहराई से सोचने पर मजबूर किया कि कैसे अक्सर महिलाओं को अपनी खुशी और आज़ादी के बजाय दूसरों की मंज़ूरी और पारंपरिक पड़ावों को ज़्यादा अहमियत देने के लिए तैयार किया जाता है।

वीडियो के साथ लिखे कैप्शन में उन्होंने कहा- “और भले ही मुझे हंसी आई, लेकिन इसने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया। महिलाओं के तौर पर, हमें अक्सर उन पलों का जश्न मनाना सिखाया जाता है जब हमें चुना जाता है। जैसे प्रपोज़ल, शादी या मंज़ूरी मिलना। लेकिन आपका असली दम खुद को चुनने में है। यह करियर बनाने, जोखिम उठाने, खुद पैसे कमाने और ऐसी ज़िंदगी बनाने का आत्मविश्वास है जिस पर आपको गर्व हो। क्योंकि पद और दूसरों की राय बदल सकती है। खुद के साथ आपका रिश्ता हमेशा बना रहता है। कंबल अच्छा होता है, लेकिन आत्मविश्वास हर जगह आपके साथ रहता है। अपने आत्मविश्वास को अपनाएं।”

उनकी बातों ने सोशल मीडिया यूज़र्स का दिल जीत लिया। कई लोगों ने शादी को लेकर परिवार की उम्मीदों और समाज के दबाव से जुड़े अपने अनुभव भी शेयर किए। कुछ यूज़र्स ने उन्हें इस परंपरा को पूरी तरह से चुनौती देने के लिए प्रोत्साहित किया। एक व्यक्ति ने सुझाव दिया- “एक ऐसा कार्यक्रम आयोजित करें, जिसमें आप अविवाहित बेटियों को कंबल बांटें – कुछ अलग करके दिखाएं।”

वहीं, कुछ लोगों ने दादी के नज़रिए का बचाव करते हुए कहा कि बड़ी उम्र की और युवा महिलाओं की सोच और संस्कृति में बहुत अंतर होता है। एक कमेंट करने वाले ने लिखा, “मैं आपकी दादी को दोष नहीं देता, क्योंकि वे बिल्कुल अलग दौर और पीढ़ी से ताल्लुक रखती हैं… लेकिन मैं आपकी तारीफ़ करता हूं कि आप वही कर रही हैं जो आप चाहती हैं और अपने तरीके से कर रही हैं।”

एक और यूज़र ने कहा कि ऐसी सोच अक्सर निजी फ़ैसले के बजाय सामाजिक माहौल की वजह से बनती है। “आपकी दादी को उनके आस-पास के माहौल ने ऐसा सोचने के लिए तैयार किया था। इसमें उनकी कोई ग़लती नहीं है। अफ़सोस की बात है कि कई महिलाओं को पता ही नहीं होता या उन्हें ज़िंदगी में आगे बढ़ने के मौके नहीं मिलते।”

हालांकि, कुछ प्रतिक्रियाएं मज़ाकिया भी थीं। एक यूज़र ने मज़ाक में कहा- “यह दादी का आपको अगले इवेंट से पहले शादी करने के लिए प्रेरित करने का तरीका है, ताकि उन्हें मुफ़्त में ‘कंबल’ (DHAABLO) मिल सके।”

विश्व सिकल सेल दिवस : राष्ट्रपति मुर्मू ने की मप्र सरकार की सराहना, कहा- समय से पहले पूरा हो गया स्क्रीनिंग का लक्ष्य

President Murmu praised Madhya Pradesh for National Sickle Cell Anemia Elimination Mission

– पीएम मोदी ने शुरू किया था राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन 2047

– मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन बोले- दृढ़ संकल्प के साथ काम कर रही सरकार

– देश में 7 करोड़ और प्रदेश में सवा करोड़ लोगों की हो चुकी स्क्रीनिंग

– खंडवा के ओंकारेश्वर में आयोजित हुआ राज्य स्तरीय कार्यक्रम
'अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस' के अवसर पर इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण चुनौती का सामना करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। इस आयोजन से जुड़े सभी लोगों की मैं सराहना करती हूं। राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के अंतर्गत मध्य प्रदेश ने जो बहुआयामी उपलब्धियां हासिल की हैं, उसके लिए मैं राज्य सरकार की सराहना करती हूं। यह संतोष की बात है कि वर्ष 2023 में राष्ट्रीय मिशन का शुभारंभ करते समय जो अनेक बड़े लक्ष्य देश के सामने रखे गए थे, उनमें से स्क्रीनिंग का लक्ष्य समय से पहले ही पूरा हो गया।


यह बात राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने कही। राष्ट्रपति मुर्मू 19 जून को विश्व सिकल सेल दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। यह कार्यक्रम खंडवा जिले के ओंकारेश्वर में राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन-2047 के तहत आयोजित किया गया। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

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कार्यक्रम में राज्यपाल मंगु भाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम और राष्ट्रीय गान जन गण मन के साथ हुई। इस दौरान सिकल सेल एनीमिया पर केंद्रित लघु फिल्म और जागरूकता के लिए बनाए गए वीडियो का भी प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन 2047 में उत्कृ्ष्ट कार्य करने वाली ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधि और अधिकारियों को सम्मानित किया गया।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू ने कहा कि मुझे बताया गया है कि नवजात शिशुओं से लेकर 40 वर्ष की आयु तक के 7 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य पूरा हो चुका है। यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। यह पूरे विश्व में आनुवंशिक रोगों की जांच-परख की सबसे बड़ी पहलों में से एक है। इस उपलब्धि में मध्यप्रदेश का महत्वपूर्ण योगदान है। प्रदेश में अब तक सवा करोड़ से भी अधिक लोगों की स्क्रीनिंग हो चुकी है। इनमें से अधिकांश लोगों को जेनेटिक काउंसलिंग कार्ड भी दिए जा चुके हैं।

सिकल सेल से जुड़ी चुनौती को भारत सरकार ने बहुत ही गंभीरता से लिया और पिछले कुछ वर्षों में एक समग्र दृष्टि से सरकार ने जो प्रयास किए हैं, वे अत्यंत सराहनीय हैं। लगभग तीन वर्ष पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश के शहडोल से राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन को लॉन्च किया था। इस पहल के पीछे न केवल सरकार का गंभीर प्रयास का दृढ़ संकल्प था बल्कि इस चुनौती से जुड़े हर आयाम की समुचित प्रतिक्रिया देने की दूरदर्शी सोच भी थी।

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मिशन में अनेक स्तरों पर किए गए वैज्ञानिक और सामाजिक अध्ययन 

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू ने कहा कि मुझे बताया गया है कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और केन्द्रीय जनजातीय मंत्रालय के संयुक्त मॉडल के रूप में देश में पहली बार ऐसा मिशन प्रारंभ किया। इसे केवल स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या के रूप में नहीं देखा गया। इसे जनजातीय स्वास्थ्य का मुद्दा, आनुवंशिकता से जुड़ी जागरूकता और प्रिवेंटिव हेल्थकेयर की चुनौती के साथ ही सामाजिक आचरण में बदलाव के मिशन के रूप में देखा गया। मुझे बताया गया है कि इस मिशन की पृष्ठभूमि में अनेक स्तरों पर किए गए वैज्ञानिक और सामाजिक अध्ययन रहे हैं।

आईमुख्‍यमंत्रीआर, ट्राइबल हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट, एम्स, एनएचएम, डब्ल्यूएचओ और विभिन्न राज्य सरकारों ने इस विषय के विभिन्न आयामों पर अध्ययन किए हैं। इनसे मुख्य रूप से यह आकलन सामने आया कि भारत में लगभग 2 से 2.5 करोड़ लोग सिकल सेल जीन के वाहक हो सकते हैं, लाखों लोग सक्रिय रोग से पीड़ित हैं, सबसे अधिक प्रभाव मध्य भारत की जनजातीय पट्टी में है, अनेक परिवार पीढ़ियों से इस रोग से प्रभावित थे लेकिन उन्हें बीमारी का नाम तक मालूम नहीं था।

अध्ययनों से यह भी पता चला कि भारत के जनजातीय क्षेत्रों में सिकल सेल रोग का प्रसार सामान्य आबादी की तुलना में कई गुना अधिक है। फलस्वरूप, देश में पहली बार सार्वजनिक स्वास्थ्य, जनजातीय कल्याण, जेनेटिक साइंस और डिजिटल मॉनिटरिंग को एक साथ जोड़कर यह राष्ट्रव्यापी अभियान प्रारंभ किया गया। देश के 17 राज्यों में चलाये जा रहे इस अभियान के प्रति राज्यों ने भी पूरी तत्परता से भागीदारी की है।

  

प्रभावित करते हैं बीमारी के उन्मूलन के प्रयास

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू ने कहा कि मुझे इस मिशन की परिकल्पना ने प्रभावित किया है। इसलिए मैं इस मिशन के तीन प्रमुख आयामों का उल्लेख करना चाहूंगी, पहला- बड़े स्तर पर जागरूकता फैलाना और विवाह पूर्व जेनेटिक काउंसलिंग करना, दूसरा- व्यापक स्क्रीनिंग करके समय रहते रोग की पहचान करना और तीसरा- प्रबंधन की समग्रता को सुनिश्चित करते हुए स्वास्थ्य देखभाल की निरंतरता बनाए रखना। सार्वजनिक स्वास्थ्य की पहल के लिहाज से देखें तो देश में पहली बार इतनी बड़ी जनसंख्या की आनुवंशिक स्क्रीनिंग, डिजिटल ट्रैकिंग के साथ की जा रही है।

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मिशन मोड में हुई स्क्रीनिंग का ही परिणाम है कि अभी तक लगभग ढाई लाख लोगों में सिकल सेल संबंधी रोग चिन्हित किए जा चुके हैं और इस रोग के 20 लाख से भी अधिक वाहक यानी वाहक भी पहचाने जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि वाहकों की इतनी बड़ी संख्या से जुड़ी चुनौती को समझने की आवश्यकता है। सिकल सेल के वाहक लोगों में इस रोग के लक्षण नहीं होते, इसलिए उन्हें इसकी भविष्य की गंभीरता का कोई अंदाज नहीं लग पाता। अधिकांशतः वाहकों को यह नहीं पता होता कि वे अपनी संतान को ये रोग दे सकते हैं।

 

रोगियों की समुचित स्वास्थ्य देखभाल सराहनीय कदम

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू ने कहा कि संतोष की बात है कि केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों ने मिशन मोड में पिछले कुछ वर्षों में सिकल सेल से जुड़े रोगियो और वाहकों की पहचान के साथ-साथ उनकी समुचित स्वास्थ्य देखभाल पर सराहनीय कार्य किया है। मेरे संज्ञान में लाया गया है कि बहुस्तरीय प्रयासों के क्रम में मध्य प्रदेश में सभी प्रभावित लोगों, गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं के लिए पॉइंट ऑफ केयर टेस्ट आधारित जांच सुविधा को आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्तर तक विस्तारित किया गया है।

गत वर्ष 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चले “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान” के अंतर्गत मध्य प्रदेश ने 4 लाख से अधिक महिलाओं की सिकल सेल स्क्रीनिंग का कीर्तिमान स्थापित करके इस समस्या के समाधान हेतु अमूल्य योगदान दिया है। मुझे बताया गया है कि मध्य प्रदेश में बड़े पैमाने पर विद्यार्थियों की सिकल सेल स्क्रीनिंग की जा रही है। जनजातीय विद्यार्थियों को भी परामर्श, उपचार एवं स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जा रहा है। दूरस्थ एवं दुर्गम जनजातीय क्षेत्रों में मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से निरंतर स्क्रीनिंग की जा रही है।

उन्होंने कहा है कि मुझे बताया गया कि पिछले वर्ष विश्व सिकल सेल दिवस पर प्रदेश में “सिकल मित्र” पहल का शुभारंभ किया गया था। इसके अंतर्गत जागरूकता बढ़ाने, रोगियों को सहायता प्रदान करने तथा उन्हें शासकीय स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने के लिए शासकीय एवं गैर शासकीय संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों तथा एनसीसी कैडेट्स को प्रशिक्षित किया गया है।

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उन्होंने कहा कि इन सार्थक पहलों के लिए मैं प्रदेश के सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों को बधाई देती हूं।मुझे विश्वास है कि सभी प्रदेशों की समेकित शक्ति और सक्रियता से हम वर्ष 2047 से बहुत पहले ही देश से सिकल सेल संबंधी रोगों के उन्मूलन के अपने राष्ट्रीय लक्ष्य में अवश्य सफल होंगे। देश में जनजातीय समुदाय के लोगों के सबसे बड़ी संख्या मध्य प्रदेश में है। मैं आशा करती हूं कि मध्य प्रदेश द्वारा जनजातीय विकास के अनेक प्रतिमान स्थापित किए जाएंगे। इसी आशा के साथ मैं आप सब के उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना करती हूं। 

 

इस मिशन में एमपी ने बनाया रिकॉर्ड

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आरंभ किए गए राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन-2047 में राज्यपाल मंगुभाई पटेल के निर्देशन में मध्यप्रदेश ने रिकॉर्ड बनाया है। मिशन की सफलता से  भविष्य की कई पीढ़ियां सुरक्षित होंगी। विश्व सिकल सेल दिवस 2026 के अवसर पर ओंकारेश्वर में सादगी, शुचिता और संघर्ष की मिसाल महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मू की उपस्थिति प्रदेशवासियों को संबल प्रदान कर रही है।

राज्य सरकार  दृढ़ संकल्प के साथ सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन के लिए  कार्य कर रही है। सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन में राज्य सरकार एक साथ चार मोर्चों पर काम कर रही है। प्रदेश में 1 करोड़ 32 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। गर्भवती महिलाओं को चिह्नित कर उन्हें रोग के बारे में परामर्श और इलाज दिया जा रहा है। जेनेटिक काउंसलिंग करते हुए भावी पीढ़ी को सुरक्षित रखने के लिए सिकल सेल कार्ड बांटे जा रहे हैं। जन जागरूकता अभियान के लिए 3700 से अधिक सिकल मित्र एनसीसी कैडेट्स की तरह हमारे प्रयासों को गति दे रहे हैं।

हम मध्यप्रदेश की धरती पर सिकल सेल एनीमिया को जड़ से खत्म कर अपना संकल्प पूरा करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में चिकित्सा सुविधाओं के विकास के साथ मेडिकल कॉलेजों की संख्या में वृद्धि हुई है। पिछली सरकारों में 55 साल में सिर्फ 5 मेडिकल कॉलेज थे और अब मध्यप्रदेश में इनकी कुल संख्या 32 हो गई है। उन्होंने कहा कि राज्य में चिकित्सा और शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर कार्य हुआ है। 

 

स्वास्थ्य को लेकर प्रतिबद्ध है राज्य सरकार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कई बीमारियां ऐसी होती हैं, जिनकी जानकारी नहीं होने पर वे अनजाने में हमारी भावी पीढ़ियों के साथ आगे बढ़ती रहती हैं। राज्य सरकार अनुसूचित जाति और जनजातीय वर्ग के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ पीएम जनमन योजना के माध्यम से कार्य कर रही है। खंडवा में क्रांतिसूर्य टंट्या मामा के नाम पर विश्वविद्यालय की स्थापना कर राज्य सरकार विकास के सभी पैमाने पर आगे बढ़ रही है।

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वीरांगना रानी दुर्गावती और राजा भभूत सिंह जैसे महान नायकों के नाम पर कैबिनेट बैठकें आयोजित की गई हैं। छिंदवाड़ा में बादल भोई और जबलपुर में राजा शंकर शाह-रघुनाथ शाह संग्रहालय का लोकार्पण किया है। सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करने के लिए भगोरिया को राजकीय उत्सव का दर्जा दिया गया है। कन्या छात्रावासों के नाम भी आदिवासी नायकों के नाम पर रखे गए हैं। जनजातीय भाई-बहनों का कल्याण और उनका समग्र विकास सरकार की प्राथमिकता है। 

 

लगातार हो रहे प्रयास

कार्यक्रम में उप-मुख्यमंत्री, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि मध्यप्रदेश ने सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन- 2047 में सबसे अच्छा कार्य किया है। सिकल सेल को जड़ से खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2023 में शहडोल से एक मिशन की शुरुआत की थी। इस मिशन को राज्यपाल के प्रयासों ने और गति प्रदान की है। प्रदेश के जनजातीय बहुल जिलों में अब तक 1 करोड़ 32 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है।

मध्यप्रदेश सिकल सेल एमीनिया की स्क्रीनिंग के मामले में अग्रणी राज्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने वर्ष 2026 के अंत तक 1 करोड़ 60 लाख स्क्रीनिंग का टारगेट रखा है। अब कुंडली से पहले सिकल सेल स्क्रीनिंग कार्ड का मिलान किया जाने लगा है। इसके लिए प्रदेश में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, ताकि कोई भी सिकल सेल का वाहक न बने।
Edited By : Chetan Gour

अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे वनडे के लिए भारतीय टीम में शामिल हुए हर्षित राणा

अफगानिस्तान के खिलाफ खेली जा रही वनडे सीरीज के तीसरे मुकाबले से पहले हर्षित राणा को भारतीय टीम में शामिल किया गया है। हर्षित ने अपना रिहैब पूरा कर लिया है और वह चेन्नई में टीम से जुड़ेंगे।  

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने हर्षित को तीसरे वनडे के लिए भारतीय टीम में शामिल किए जाने की जानकारी दी है। बीसीसीआई ने बताया कि हर्षित ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) में अपना रिहैब पूरा कर लिया है और वह अब पूरी तरह से फिट हैं। हर्षित को आयरलैंड-इंग्लैंड और एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय टी20 टीम में भी शामिल किया गया है।

अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज में भारतीय टीम पहले ही 2-0 की अजेय बढ़त हासिल कर चुकी है। लखनऊ के इकाना स्टेडियम में खेले गए दूसरे वनडे में भारतीय टीम ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए अफगानिस्तान को 170 रनों से रौंदा। पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम इंडिया ने स्कोरबोर्ड पर 402 रन लगाए। भारतीय टीम की ओर से शुभमन गिल ने बेहतरीन बल्लेबाजी करते हुए 110 गेंदों में 154 रनों की लाजवाब पारी खेली, जबकि ईशान किशन ने 79 गेंदों में 125 रन बनाए।

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हालांकि, 403 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए अफगानिस्तान की पूरी टीम सिर्फ 232 रन बनाकर ऑलआउट हुई। गेंदबाजी में भारत की ओर से गुरनूर बरार ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 60 रन देकर 3 विकेट चटकाए, जबकि अर्शदीप सिंह ने 45 रन देकर तीन विकेट झटके। वहीं, प्रिंस यादव ने अपने डेब्यू मुकाबले में 56 रन देकर 2 विकेट निकाले।

अफगानिस्तान की तरफ से रहमत शाह ने 89 गेंदों का सामना करते हुए सर्वाधिक 79 रन बनाए, जबकि रहमानुल्लाह गुरबाज ने 41 रनों का योगदान दिया। यह अफगानिस्तान की रनों के लिहाज से वनडे क्रिकेट में दूसरी सबसे बड़ी हार रही। बारिश से प्रभावित पहले वनडे मुकाबले में भारत ने अफगानिस्तान को 7 विकेट से मात दी थी। सीरीज का तीसरा और आखिरी मुकाबला 20 जून को चेन्नई में खेला जाना है।

Pic Credit : ANI

महाकाल में फिर VIP दर्शन पर विवाद, अक्षय आनंद ने गर्भगृह में ली फोटो, आम श्रद्धालु कतार में, सांसद फिरोजिया ने उठाए सवाल

mahakal temple

उज्‍जैन महाकाल मंदिर में एक बार फिर से दर्शन को लेकर विवाद सामने आया है। दरअसल, महाकाल दर्शन के बाद सोशल मीडिया पर दिल्ली के रहने वाले इन्‍फ्लूएंसर अक्षय आनंद ने अपने फेसबुक और सोशल मीडिया अकाउंट पर कुछ तस्वीरें पोस्ट कीं। इन तस्‍वीरों में वे महाकाल के गर्भगृह में नजर आ रहे हैं। वहां फोटो ली गई और देर तक दर्शन किए गए। इसके बाद उन्‍होंने ये फोटो अपने सोशल मीडिया में शेयर की। जबकि मंदिर परिसर में फोटोग्राफी प्रतिबंधित है। जैसे ही फोटो वायरल हुईं इस पर विवाद शुरू हो गया है। आम श्रद्धालु अब मंदिर समिति के कामकाज और आम भक्तों के साथ हो रहे भेदभाव पर सवाल उठा रहे हैं।

मंदिर में वीआईपी कल्चर हावी : तस्‍वीरें सामने आने के बाद उज्जैन सांसद अनिल फिरोजिया ने वीआईपी कल्‍चर पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि महाकाल मंदिर में वीआईपी कल्चर हावी हो गया है और वे इसके घोर विरोधी हैं। उन्‍होंने कहा कि मैं आज भी आम श्रद्धालुओं के साथ लाइन में लगकर भगवान महाकाल के दर्शन करता हूं। मेरी माताजी भी पिछले 60 साल से महाकाल दर्शन करने जाती हैं और वे भी सामान्य श्रद्धालुओं की तरह ही दर्शन करती हैं। उन्होंने कहा कि भगवान के लिए कोई राजा या रंक नहीं होता। सांसद ने अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि अंत में सबको महाकाल की शरण में ही जाना है और किए गए कर्मों का फल यहीं भुगतना पड़ता है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी अनुरोध कर चुके हैं। उनका कहना है कि जिस दिन गर्भगृह आम श्रद्धालुओं के लिए खुलेगा, वे भी सामान्य भक्त की तरह लाइन में लगकर जलाभिषेक करेंगे।

क्‍या है तस्‍वीरों में : अक्षय आनंद की ये तस्वीरें 15 जून की बताई जा रही हैं। उस दिन सोमवती अमावस्या होने के कारण महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी। इसी दौरान दिल्ली निवासी अक्षय आनंद ने अपने फेसबुक और सोशल मीडिया अकाउंट पर कुछ तस्वीरें पोस्ट कीं। तस्वीरों में वह अपनी पत्नी और मित्रों के साथ महाकाल मंदिर के गर्भगृह में दर्शन करते नजर आ रहे हैं। अक्षय धोती-सोला पहनकर गर्भगृह में पहुंचे थे और वहां फोटो भी खिंचवाई। जबकि मंदिर परिसर में फोटोग्राफी प्रतिबंधित है।

बता दें कि उज्‍जैन महाकाल में जाने वाले आम श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए काफी इंतजार करना पडता है। जैसे ही लोग बाबा महाकाल के सामने पहुंचते हैं, सुरक्षाकर्मी उन्‍हें वहां से आगे बढा देते हैं। आम लोगों को एक मिनट भी वहां प्रार्थना नहीं करने दिया जाता है, जैसे ही कोई खडा होता है उसे आगे धकेल दिया जाता है। जबकि वीआईपी गर्भगृह में बैठकर आराम से प्रार्थना और पूजा करते हैं। फोटो, वीडियो और तस्‍वीरें लेते हैं। ये भेदभाव लगातार मंदिर में हो रहा है। इस मामले में भी यही हुआ। सोमवती अमावस्‍या होने की वजह से श्रद्धालुओं की काफी भीड थी, बावजूद इसके अक्षय आनंद को गर्भग्रह में प्रवेश देकर वीआईपी दर्शन करवाए गए, जहां उन्‍होंने फोटो भी निकाले। लोग इस वीआईपी कल्चर को बंद करने की मांग कर रहे हैं।
Edited By: Naveen R Rangiyal