उत्‍तराखंड मंत्रिमंडल की हुई बैठक, धामी सरकार ने लिए अहम फैसले

cabinet meeting was held under chairmanship of Chief Minister Pushkar Singh Dhami

Chief Minister Pushkar Singh Dhami : उत्‍तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में गुरुवार को मंत्रिमंडल की बैठक हुई। बैठक में सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी और प्रसिद्ध निशानेबाज, पद्मश्री जसपाल राणा के निधन पर शोक व्यक्त किया गया। बैठक में कुल 12 प्रस्ताव आए। मंत्रिमंडल ने बैठक में कई अहम फैसले लिए। धामी सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए उत्तराखंड राज्य को पूर्ण साक्षर राज्य की मंजूरी दे दी है। धामी कैबिनेट ने राज्य की साक्षात्कार दर 98 प्रतिशत रिकॉर्ड होने के बाद ये फैसला लिया। इस दौरान उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा संशोधन नियमावली 2026 को भी मंजूरी दी, जिसके तहत संस्कृत विद्यालयों की मान्यता, पाठ्यक्रम निर्धारण और परीक्षा संचालन संबंधी व्यवस्थाओं में संशोधन किए जाएंगे।

 

उत्‍तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में गुरुवार को मंत्रिमंडल की बैठक हुई। बैठक में सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी और प्रसिद्ध निशानेबाज, पद्मश्री जसपाल राणा के निधन पर शोक व्यक्त किया गया। बैठक में कुल 12 प्रस्ताव आए। मंत्रिमंडल ने बैठक में कई अहम फैसले लिए। धामी सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए उत्तराखंड राज्य को पूर्ण साक्षर राज्य की मंजूरी दे दी है।

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धामी कैबिनेट ने राज्य की साक्षात्कार दर 98 प्रतिशत रिकॉर्ड होने के बाद ये फैसला लिया। इस दौरान उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा संशोधन नियमावली 2026 को भी मंजूरी दी, जिसके तहत संस्कृत विद्यालयों की मान्यता, पाठ्यक्रम निर्धारण और परीक्षा संचालन संबंधी व्यवस्थाओं में संशोधन किए जाएंगे।

बैठक में उपनल कर्मचारियों को भी बड़ी राहत दी गई। समान कार्य-समान वेतन के लाभ के लिए निर्धारित कटऑफ तिथि को 12 नवंबर 2018 से बढ़ाकर 15 अगस्त 2024 कर दिया गया है। आबकारी विभाग के प्रस्ताव में होलोग्राम दोहराव की स्थिति में दोहरा कर नहीं लगाने का फैसला लिया गया। अब ऐसी परिस्थितियों में केवल एक बार ही कर वसूला जाएगा, जिससे संबंधित व्यापारियों और विभागीय प्रक्रियाओं को राहत मिलेगी।

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बैठक में पर्यटन क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय हिमालयन कार रैली के आयोजन को मंजूरी दी गई है। सरकार का मानना है कि इस तरह के आयोजन राज्य में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड की पहचान को और मजबूत करेंगे। चारधाम यात्रा से जुड़े प्रस्ताव में यात्रा के दौरान संचालित घोड़ा-खच्चरों के लिए बीमा सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया गया।

बैठक में कृषि और उद्यानिकी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सेलाकुई स्थित सगंध एवं हर्बल केंद्र में मिलावट जांच की सुविधा विकसित करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए पांच नए पदों को भी स्वीकृति प्रदान की गई है। गृह विभाग से संबंधित दो महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी मंजूरी मिली। इनमें उत्तराखंड कारागार नियमावली में संशोधन और कारागार अधीनस्थ सेवा नियमावली को स्वीकृति देना शामिल है।

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बैठक में लोक निर्माण विभाग से जुड़े प्रस्ताव में बिटुमेन की कीमतों पर चर्चा हुई। पशुपालन विभाग के प्रस्ताव के तहत एम्ब्रियो ट्रांसफर तकनीक के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाले गौवंश के विकास और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए पायलट परियोजना को मंजूरी दी गई।
Edited By : Chetan Gour

ईरान डील का सबसे बड़ा चेहरा बने जेडी वेंस:जंग रुकी तो अगले राष्ट्रपति बनने के सबसे बड़े दावेदार, फेल हुई तो करियर तबाह

अमेरिका और ईरान के बीच बुधवार रात ऐतिहासिक और विवादित पीस डील हुई। इसके बाद से अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इसका सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक वेंस लगातार फ्रंटफुट पर आकर इस फैसले का बचाव कर रहे हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस ब्रीफिंग से लेकर द न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू तक, वेंस इस डील को डिफेंड करने की पूरी कमान संभाले हुए हैं। जब इस समझौते को लेकर इजराइल और अमेरिकी रिपब्लिकन पार्टी के अंदर से ही तीखी आलोचना शुरू हुई, तो वेंस ने बेहद कड़े शब्दों में जवाब दिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक रिपोर्टर ने उनसे पूछा कि क्या राष्ट्रपति ट्रम्प ने उन्हें अमेरिका-ईरान समझौते के लिए ‘बलि का बकरा’ बना दिया है। इस पर वेंस ने कहा कि उन्हें लगता है कि ट्रम्प मजाक कर रहे थे। दरअसल, एक दिन पहले ट्रम्प ने कहा था कि अगर यह समझौता विफल हो जाता है तो वह इसका दोष वेंस पर डाल सकते हैं। हाल के महीनों में वह कई बार ऐसा बयान दे चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अगर ईरान के साथ हुआ समझौता कामयाब होता है तो वे 2028 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के सबसे बड़े दावेदार हो सकते हैं। ईरान के साथ बातचीत का जिम्मा वेंस के कंधे पर व्हाइट हाउस के मुताबिक, जेडी वेंस राष्ट्रपति ट्रम्प की राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के सबसे भरोसेमंद सदस्य बनकर उभरे हैं। ट्रम्प के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जैरेड कुशनर के साथ मिलकर वेंस ने इस डील की बैक-चैनल बातचीत की अगुवाई की है। स्विट्जरलैंड में होने वाली आगामी 60 दिनों की औपचारिक तकनीकी वार्ताओं की देखरेख का जिम्मा भी वेंस के कंधों पर है। चूंकि ट्रम्प ने इस पूरी बातचीत की प्रक्रिया में वेंस को प्रमुख भूमिका दी है, इसलिए इस समझौते की सफलता या विफलता का सबसे बड़ा राजनीतिक असर भी उन्हीं पर पड़ सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यह शांति समझौता सफल रहता है और मिडिल ईस्ट में युद्ध रुक जाता है, तो साल 2028 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में जेडी वेंस खुद को एक कुशल डिप्लोमैट और युद्ध खत्म कराने वाले ‘ग्लोबल लीडर’ के रूप में पेश कर सकेंगे। वेंस की किताब की अमेरिकी मीडिया खूब चर्चा हो रही 16 जून को वेंस की किताब ‘कम्यूनियन: फाइंडिंग माई वे बैक टू फेथ’ रिलीज हुई है। राजनीतिक गलियारों और अमेरिकी मीडिया में इस किताब की टाइमिंग और इसके कंटेंट को सीधे तौर पर साल 2028 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में उनकी संभावित दावेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है। अमेरिकी राजनीति के इतिहासकार इस किताब की तुलना 1975 में जिमी कार्टर की लिखी गई किताब ‘व्हाई नॉट द बेस्ट’ से कर रहे हैं। कार्टर ने राष्ट्रपति चुनाव जीतने से ठीक पहले अपनी आस्था और धर्म पर किताब लिखी थी, जिसने अमेरिकी जनता, विशेषकर धार्मिक झुकाव वाले वोटर्स के बीच उन्हें एक ‘भरोसेमंद चेहरा’ बना दिया था। जेडी वेंस भी इसी रास्ते पर चल रहे हैं। अपनी राजनीतिक उपलब्धियों के बजाय अपनी आस्था और धर्म (ईसाई धर्म और कैथोलिक बनने का सफर) पर किताब लिखकर वे खुद को 2028 के चुनाव से पहले देश के सामने एक बेहद गंभीर, ईमानदार और पारिवारिक व्यक्ति के रूप में पेश कर रहे हैं। वेंस 2019 में नास्तिकता छोड़कर कैथोलिक ईसाई बने थे। इस किताब के जरिए वे रिपब्लिकन पार्टी (GOP) के पारंपरिक और धार्मिक आधार को मजबूत कर रहे हैं। 2028 के प्राइमरी चुनावों (पार्टी के भीतर उम्मीदवार चुनने की रेस) में यह धार्मिक कार्ड उन्हें अन्य रिपब्लिकन दावेदारों (जैसे मार्को रुबियो) के मुकाबले मजबूत बढ़त दिला सकता है। मार्को रुबियो 2028 के राष्ट्रपति पद के दावेदार माने जाते हैं विदेश मंत्री मार्को रुबियो, जिन्हें 2028 के रिपब्लिकन राष्ट्रपति पद की दौड़ का संभावित दावेदार माना जाता है। अमेरिका ने जनवरी में किसी बड़े सैन्य खर्च या अमेरिकी सैनिकों की जान जोखिम में डाले वेनेजुएला के तानाशाह निकोलस मादुरो को सत्ता से बेदखल करने में कामयाबी हासिल की थी। उनकी निगरानी में ही इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया गया था ऐसे में इस पूरे मामले का क्रेडिट मार्को रूबियो को मिला। इस घटना ने उन्हें रिपब्लिकन वोटर्स के बीच एक ‘एक्शन-ओरिएंटेड’ लीडर बना दिया। मार्को रुबियो की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) यह है कि वे पार्टी के भीतर दो विरोधी विचारधाराओं (पारंपरिक रिपब्लिकन वोटर्स और ट्रम्प की अमेरिका फर्स्ट समर्थक वोटर्स) को एक साथ जोड़ सकते हैं। ज्यादातर सर्वे में वेंस को बढ़त, रूबियो कड़ी टक्कर दे रहे दुनिया के सबसे बड़े प्रेडिक्शन मार्केट पॉलिमार्केट के मुताबिक रूबियो सर्वे में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। साल 2026 की शुरुआत में रुबियो सिंगल डिजिट पर थे। जून 2026 की ताजा ट्रेडिंग के मुताबिक, रिपब्लिकन उम्मीदवार बनने की रेस में मार्को रुबियो के शेयर बढ़कर 30% के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गए हैं। हालांकि इस प्लेटफॉर्म पर वेंस अभी भी 33% के साथ मामूली बढ़त बनाए हुए हैं। वही, प्रेडिक्शन मार्केट कालशी के मुताबिक मार्को रुबियो 18% की संभावना के साथ पहले स्थान पर आ गए हैं। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस 17% के साथ दूसरे और डेमोक्रेट गेविन न्यूसम 16% के साथ तीसरे स्थान पर खिसक चुके हैं। एक तीसरी सर्वे एजेंसी एमरसन कॉलेज पोल के मुताबिक मई 2026 में वेंस और रूबियो दोनों ही 35% के साथ बराबरी पर थे। जबकि फरवरी में यह आंकड़ा वेंस (52%) और रूबियो (20%) था। वेंस को बड़े राजनीतिक नुकसान की आशंका कुछ रिपब्लिकन नेताओं का मानना है कि ईरान से जुड़े इस समझौते की जिम्मेदारी वेंस के लिए एक ऐसा काम बन गई है, जिसमें मेहनत तो ज्यादा है लेकिन राजनीतिक फायदा कम। नाम न बताने की शर्त पर एक सूत्र ने बीबीसी से कहा, जेडी वेंस पर जिम्मेदारी डाल देना ट्रम्प की पुरानी आदत रही है। वहीं, दूसरे सूत्र ने कहा, अगर कोई विवाद खड़ा हो जाए तो जेडी वेंस को आगे कर देना ट्रम्प के लिए कोई नई बात नहीं है। अमेरिकी अखबार द वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक ईरान के साथ हुआ यह ऐतिहासिक समझौता जेडी वेंस के राजनीतिक करियर के लिए एक दोधारी तलवार बन चुका है। अखबार के मुताबिक वेंस इस समय भले ही व्हाइट हाउस के सबसे शक्तिशाली संकटमोचक दिख रहे हों, लेकिन वे वास्तव में एक राजनीतिक चक्रव्यूह में फंस चुके हैं। 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की रेस में खुद को बनाए रखने के लिए वेंस को हर हाल में अगले 60 दिनों (स्विट्जरलैंड वार्ता) में इस ईरान डील को बिना किसी विवाद के सफल बनाना ही होगा, वरना उनका ‘प्रेसिडेंशियल ड्रीम’ यहीं दफन हो सकता है। —————————— वेंस से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प के बाद कौन संभालेगा अमेरिका:पहले उपराष्ट्रपति वेंस आगे थे, वेनेजुएला पर हमले के बाद विदेश मंत्री रूबियो का रुतबा बढ़ा अमेरिकी सेना ने 3 जनवरी की रात वेनेजुएला पर हमला किया और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को अगवा कर अमेरिका लेकर आ गए। यह मिलिट्री एक्शन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मंजूरी से हुआ। अमेरिकी मीडिया हाउस पॉलिटिको के मुताबिक ट्रम्प ने वेनेजुएला की जिम्मेदारी पूरी तरह मार्को रूबियो को सौंप दी है। इस पूरे ऑपरेशन में रूबियो की अहम भूमिका के बाद उनकी अगले अमेरिकी राष्ट्रपति बनने की संभावना तेजी से बढ़ी है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Gold Silver Price: MCX पर सोने का भाव ₹1.47 लाख के नीचे, अब आगे क्या होनी चाहिए निवेश रणनीति

Gold Silver Price: ग्लोबल बुलियन कीमतों में कमज़ोर ट्रेंड के बाद, शुक्रवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भारत में सोने और चांदी की कीमतें तेज़ी से गिरकर खुलीं। ज़्यादा ब्याज़ दरों और मज़बूत डॉलर की उम्मीदों से कीमती धातुओं की कीमतों पर असर पड़ा।

MCX पर अगस्त फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट के लिए सोने का रेट ₹2,134, या 1.43% कम होकर ₹1,47,175 प्रति 10 ग्राम पर खुला, जबकि पिछला बंद भाव ₹1,49,309 था। MCX पर जुलाई फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट के लिए चांदी का रेट ₹5,201, या 3.17% कम होकर ₹2,32,371 प्रति किलोग्राम पर खुला, जबकि पिछला बंद भाव ₹2,37,572 था।

सुबह 10.30 बजे, MCX पर सोने का भाव 1.98% की गिरावट के साथ ₹1,46,346 प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था। MCX पर चांदी का भाव ₹6,798 या 2.86% गिरकर ₹2,30,037 प्रति किलोग्राम पर आ गया।

इंटरनेशनल मार्केट में, सोने के भाव गिरे और लगातार तीसरे हफ़्ते गिरावट की ओर बढ़ रहे थे, जिसकी वजह मजबूत डॉलर और US फ़ेडरल रिज़र्व के कड़े संकेत थे।

स्पॉट गोल्ड का भाव 0.6% गिरकर $4,184.33 प्रति औंस पर आ गया। इस हफ़्ते अब तक कॉन्ट्रैक्ट 0.9% नीचे था। अगस्त डिलीवरी के लिए US गोल्ड फ़्यूचर्स 1% गिरकर $4,202.10 पर आ गया। स्पॉट सिल्वर 1.5% गिरकर $64.83 प्रति औंस पर आ गया।

डॉलर एक साल के हाई के आस-पास रहा, जिससे डॉलर की कीमत वाला बुलियन दूसरे करेंसी होल्डर्स के लिए ज़्यादा महंगा हो गया।

US फेड ने बुधवार को अपनी इंटरेस्ट रेट में कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन US सेंट्रल बैंक के 19 पॉलिसीमेकर्स में से नौ का अब मानना ​​है कि उन्हें इस साल पॉलिसी रेट बढ़ाने की ज़रूरत होगी।

CME फेडवॉच टूल के अनुसार, ट्रेडर्स को अब दिसंबर में US फेड द्वारा रेट बढ़ाने की 87% संभावना दिख रही है, जो फेड के फैसले से पहले 61% थी। जब रेट ज़्यादा होते हैं तो सोने की अपील कम हो जाती है, क्योंकि इस पर इंटरेस्ट नहीं मिलता है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

LIVE: टेलीग्राम को बड़ा झटका, नहीं हटा अस्थाई बैन

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Latest News Today Live Updates in Hindi : दिल्ली हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर लगा अस्थाई बैन हटाने से इनकार कर दिया। केंद्र सरकार ने NEET परीक्षा को देखते हुए टेलीग्राम पर अस्थाई बैन लगाया है। पल पल की जानकारी…

LIVE: राम मंदिर में चढ़ावा चोरी पर बोले CM योगी, सबूत है तो SIT को दें

Yogi in Acton

Latest News Today Live Updates in Hindi : Latest News Today Live Updates in Hindi : सीएम योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी पर  कहा कि किसी के पास कोई सबूत है तो SIT को सौंपे। दूध का दूध और पानी का पानी होगा। SIT जांच में सब सामने आ जाएगा। पल पल की जानकारी…

-अमेरिका ने ईरान के साथ शांति समझौते के बाद आज स्ट्रेट ऑफ हार्मुज से नाकेबंदी खत्म कर दी है।

-व्हाइट हाउस के अनुसार, अमेरिकी उपराष्‍ट्रपति जेडी वेंस ईरान से वार्ता के लिए स्विट्जरलैंड नहीं जा रहे हैं- जिनेवा जा रहे प्रतिनिधिमंडल को ईरान ने रोका। इस वजह से आज अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली वार्ता टल गई है।

प्रसिद्ध तीर्थस्थल पावागढ़ पहाड़ी पर शुक्रवार तड़के एक दर्दनाक हादसा हो गई। पहाड़ी पर स्थित पाटियापुल के पास अचानक भारी चट्टानें नीचे गिरने से कुछ तीर्थयात्रियों के मलबे के नीचे दबे गए। इस हादसे में अब तक 2 श्रद्धालुओं की मौत हो गई जबकि 15 लोग घायल है। ALSO READ: पावागढ़ में पहाड़ी से गिरीं विशाल चट्टानें, 2 श्रद्धालुओं की मौत; कई और दबे होने की आशंकाटेलीग्राम पर अस्थायी बैन का फैसला बरकरार, दिल्ली हाईकोर्ट ने टेलीग्राम पर से बैन हटाने से किया इनकार।अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी पर बोले सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी के पास कोई सबूत है तो SIT को सौंपे। दूध का दूध और पानी का पानी होगा। SIT जांच में सब सामने आ जाएगा। उन्होंने कहा कि कुछ लोग है जो नहीं चाहते कि अयोध्या का नाम हो। अयोध्या को बदनाम करने वालों के बहकावे में ना आएं।

Shilpa Shinde: शिल्पा शिंदे ने टीवी निर्माताओं को कहा माफिया, सपोर्ट न मिलने पर को-स्टार्स पर भी भड़की एक्ट्रेस

Shilpa Shinde: एक्टर शिल्पा शिंदे ने एक बार फिर एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में कलाकारों को होने वाली परेशानियों के बारे में बात की है। शहज़ादा धामी को लगभग ₹30 लाख का बकाया अभी तक नहीं मिलने की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए, शिल्पा ने टेलीविज़न इंडस्ट्री के प्रोड्यूसर्स को “माफ़िया” कहा।

एक्टर ने उस आलोचना पर भी बात की जो उन्हें तब झेलनी पड़ी थी, जब उन्होंने माना कि ‘भाभीजी घर पर हैं’ के प्रोड्यूसर संजय कोहली के खिलाफ़ दर्ज कराई गई यौन उत्पीड़न की शिकायत झूठी थी। ट्रोल करने वालों को जवाब देते हुए शिल्पा ने कहा कि बाहरी लोगों को इस बात का अंदाज़ा नहीं है कि ज़िंदगी के उस दौर में असल में उन्होंने क्या-क्या सहा। साथ ही, उन्होंने अपने को-स्टार्स से सपोर्ट न मिलने पर निराशा भी जताई।

गुरुवार को शिल्पा ने इंस्टाग्राम पर शहज़ादा धामी की शिकायत पर अपनी बात रखी। उन्होंने एक कड़े शब्दों वाला वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने टीवी इंडस्ट्री में चल रहे गलत तौर-तरीकों का ज़िक्र किया। कलाकारों के साथ होने वाले बर्ताव को लेकर प्रोड्यूसर्स की आलोचना करते हुए शिल्पा ने कहा कि ऐसे लोगों के सामने झुकने के बजाय वह एक्टिंग छोड़ देंगी और सब्ज़ियां बेचेंगी।

कलाकारों का साथ न देने के लिए कलाकारों के संगठनों की आलोचना करते हुए शिल्पा ने कहा, “टीवी इंडस्ट्री में प्रोड्यूसर्स माफिया की तरह काम करते हैं। वे व्हाइट-कॉलर माफिया हैं। जो प्रोड्यूसर्स उनका साथ देने से मना करते हैं, उन्हें धमकाया जाता है और कहा जाता है कि अगर भविष्य में उनके साथ कुछ हुआ, तो कोई उनका साथ नहीं देगा। उनके काम में भी रुकावटें डाली जाती हैं। हम कलाकार ऐसा नहीं कर सकते क्योंकि प्रोड्यूसर्स हमारी पेमेंट 90 दिनों तक रोक कर रखते हैं, और अक्सर वह पेमेंट मिलती ही नहीं है।”

उन्होंने उन लोगों पर भी तंज कसा जो कलाकारों की मौत पर दुख तो जताते हैं, लेकिन जीते-जी उनका साथ नहीं देते। नाराज़ शिल्पा ने कहा कि विवाद के समय उन्हें अकेला छोड़ दिया गया था और इंडस्ट्री से कोई भी उनके समर्थन में आगे नहीं आया।

उन्होंने आगे कहा, “उन्होंने मेरा साथ नहीं दिया। आज भी, जब उनके पास मेरे साथ खड़े होने का मौका था, तब भी वे नहीं आए। मुझे कुछ कहने की ज़रूरत नहीं थी। किसी को पता भी नहीं है कि उस समय मैं किन हालात से गुज़री थी। लोग मुझ पर झूठा आरोप लगा रहे हैं कि मैंने यह सब सिर्फ़ पैसे के लिए किया। आज, 10 साल बाद भी, वह प्रोड्यूसर टीवी शो और फ़िल्में बना रहा है। किसी में भी अपने लिए इंसाफ़ की लड़ाई लड़ने की हिम्मत नहीं है। और फिर लोग आत्महत्या जैसा कदम उठा लेते हैं।”

शिल्पा ने अपनी बात पर कायम रहते हुए कहा कि उन्होंने सच कहा था और सार्वजनिक रूप से बोलने के उनके अपने कारण थे और उन्हें पूरी तरह से पता था कि उन्होंने उस समय बोलने का फैसला क्यों किया था।

शिल्पा ने कहा- आज मौका था, मेरे सह-कलाकार बोल सकते हैं, यह बात मुख्य है। मेरा ईमान जानता है कि क्या हुआ था मेरे साथ और क्या नहीं। मुझे काम नहीं करना है आप लोगों के साथ, चाहिए भी नहीं मुझे रोल। घटिया काम करते हो आप लोग। आज कल क्रिएटिविटी बची ही नहीं है, सब बकवास शो करते हो आप लोग। क्या इस तरह के घटिया कलाकार इस इंडस्ट्री में हैं, आप इस पर काम करना चाहते हैं? मुझे करना ही नहीं है। रास्ते में सब्जी बेचूंगी पर ऐसे लोगों की नहीं चाटूंगी मैं।

Horizon Reclaim India Listing: 46% से ज्यादा बढ़त में लिस्टिंग के बाद 5% टूटा शेयर, लगा लोअर सर्किट

19 जून को SME सेक्टर की कंपनी होराइजन रीक्लेम (इंडिया) की शेयर बाजार में लिस्टिंग शानदार रही। लेकिन तुरंत ही थोड़ी मायूसी भी हाथ लगी। शेयर BSE SME पर 46.6 प्रतिशत प्रीमियम के साथ 151 रुपये पर लिस्ट हुआ। लेकिन फिर तुरंत ही 5 प्रतिशत लुढ़का और 143.45 रुपये पर लोअर सर्किट लग गया। IPO प्राइस 103 रुपये प्रति शेयर था। कंपनी रीक्लेम्ड रबर बनाती है। यह रबर पुराने टायरों, रबर ट्यूब्स, ट्रेड पीलिंग और इंडस्ट्रियल स्क्रैप जैसे इस्तेमाल किए गए रबर मैटेरियल्स से रीसाइकिल करके बनाया जाता है।

54.27 करोड़ रुपये का IPO 12 जून को खुला था ओर 16 जून को बंद हुआ। इसमें 53 लाख नए शेयर जारी हुए। पब्लिक इश्यू कुल 304.11 गुना भरा था। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 186.72 गुना, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 450.74 गुना और रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 308.30 गुना सब्सक्राइब हुआ था।

Horizon Reclaim (India) का मार्केट कैप लगभग 280 करोड़ रुपये है। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। कंपनी ने IPO की ओपनिंग से पहले एंकर इनवेस्टर्स से 15.46 करोड़ रुपये जुटाए थे। कंपनी के प्रमोटर मोहित बजाज और ​मल्लिका बजाज हैं।

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कंपनी की वित्तीय सेहत

Horizon Reclaim (India) का वित्त वर्ष 2026 के दौरान शुद्ध मुनाफा 10.50 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले यह 7 करोड़ रुपये था। कुल इनकम 50 करोड़ रुपये दर्ज की गई, जो वित्त वर्ष 2025 में 36.39 करोड़ रुपये थी। EBITDA 16.32 करोड़ रुपये रहा, जो वित्त वर्ष 2025 में 10.46 करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी पर 35.76 करोड़ रुपये की उधारी थी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

INR vs USD: डॉलर के मुकाबले रुपया 94.35 पर खुला, क्रूड में नरमी से मिल रहा सपोर्ट, आगे कैसा रहेगा आउटलुक

INR vs USD:  शुक्रवार, 19 जून को रुपया US डॉलर के मुकाबले 2 पैसे की मामूली गिरावट के साथ 94.35 पर खुला, क्योंकि US फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के बाद घरेलू फ्लो और सेंटिमेंट में सुधार से मजबूत डॉलर के असर को कम करने में मदद मिली।

मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने बताया कि हाल के सेशंस में कैपिटल फ्लो भारतीय करेंसी के लिए तेजी से सपोर्टिव हो गया है। घरेलू डेट मार्केट में मजबूत इनफ्लो, इक्विटी से विदेशी पोर्टफोलियो आउटफ्लो में कमी और इंपोर्टर्स और एक्सपोर्टर्स की बैलेंस्ड भागीदारी ने फॉरेक्स मार्केट में डिमांड-सप्लाई डायनामिक्स को बेहतर बनाने में मदद की है।

बैंकर्स ने बताया कि इंपोर्टर हेजिंग एक्टिविटी अभी भी ऊंची बनी हुई है, लेकिन मार्केट में एकतरफा डॉलर डिमांड से एक साफ बदलाव देखा गया है, जिसने हाल के हफ्तों में रुपये पर दबाव डाला था। इससे पहले, इंपोर्टर्स की तेज खरीदारी और लगातार विदेशी फंड आउटफ्लो ने लोकल करेंसी पर दबाव बनाए रखा था।

रुपये को विदेशी कैपिटल को आकर्षित करने और डॉलर इनफ्लो को बढ़ाने के मकसद से पॉलिसी उपायों से भी फायदा हुआ है। इसके अलावा, US-ईरान शांति समझौते के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट से भारत के इंपोर्ट बिल को लेकर चिंता कम हुई है, जिससे करेंसी को लेकर ओवरऑल सेंटिमेंट बेहतर हुआ है।

मज़बूत इनफ्लो, तेल की कम कीमतों और मार्केट में बढ़ते भरोसे के मेल से US डॉलर में नई मज़बूती के बावजूद रुपया मज़बूत बना हुआ है।

क्रूड में नरमी से मिला रुपये को मजबूत सपोर्ट

मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कच्चा तेल अभी भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये के लिए सबसे बड़ा पॉज़िटिव फ़ैक्टर बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड अभी $75–78 प्रति बैरल की रेंज में ट्रेड कर रहा है, जो इस साल की शुरुआत में ईरान संघर्ष से पहले के लेवल पर वापस आ गया है। हालांकि हाल ही में हुए US-ईरान शांति समझौते ने तुरंत सप्लाई की चिंताओं को कम किया है, लेकिन एनालिस्ट एक बड़े स्ट्रक्चरल ट्रेंड की ओर इशारा करते हैं जो तेल की कीमतों को कम रख सकता है।

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) को उम्मीद है कि 2027 तक ग्लोबल तेल सप्लाई लगभग 8 मिलियन बैरल प्रति दिन बढ़ जाएगी, जबकि डिमांड ग्रोथ केवल लगभग 2 मिलियन बैरल प्रति दिन रहने का अनुमान है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सप्लाई-डिमांड के इस बढ़ते अंतर से तेल की कीमतों पर एक नैचुरल लिमिट लग सकती है, जिससे भारत जैसी तेल इंपोर्ट करने वाली इकॉनमी को सपोर्ट मिल सकता है।

पॉजिटिव सेंटिमेंट में यह भी शामिल है कि गल्फ के रास्ते तेल शिपमेंट नॉर्मल हो गए हैं, सऊदी अरब और UAE के टैंकर महीनों की रुकावटों के बाद रेगुलर ऑपरेशन फिर से शुरू कर रहे हैं, जिससे सप्लाई में रुकावटों को लेकर चिंता और कम हो गई है।

बेहतर फंडामेंटल्स के बीच रुपये में रिकवरी जारी

करेंसी स्ट्रैटेजिस्ट्स का कहना है कि तेल की कीमतों में गिरावट पर रुपये ने पॉजिटिव रिस्पॉन्स दिया है, लगातार पांच सेशन तक मजबूत हुआ है और 94.30–94.60 प्रति डॉलर की रेंज में आराम से ट्रेड कर रहा है। यह कुछ हफ्ते पहले देखे गए दबाव से एक बड़ी रिकवरी है, जब क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतों और विदेशी आउटफ्लो ने करेंसी पर दबाव डाला था।

एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि कैपिटल फ्लो में सुधार, इंपोर्ट से जुड़ी डॉलर की कम डिमांड और जियोपॉलिटिकल रिस्क में कमी, इन सभी ने रुपये की हालिया मजबूती में योगदान दिया है।

फेड के सख्त रवैये से डॉलर को मिला सपोर्ट

हालांकि रुपया मजबूत हुआ है, लेकिन एनालिस्ट चेतावनी दे रहे हैं कि फेडरल रिजर्व के पॉलिसी रुख से US डॉलर को सपोर्ट मिलता रहेगा।

US सेंट्रल बैंक ने इंटरेस्ट रेट को 3.50%-3.75% पर बिना किसी बदलाव के रखा, लेकिन पॉलिसी बनाने वालों ने तुलनात्मक रूप से सख्त रुख बनाए रखा, जिसमें कमिटी के लगभग आधे सदस्य अभी भी इस साल कम से कम एक और रेट बढ़ने की उम्मीद कर रहे हैं।

हाल के US इकोनॉमिक डेटा ने भी डॉलर की मजबूती को और मजबूत किया है। शुरुआती बेरोजगारी के दावे कम होकर 226,000 हो गए, जबकि छंटनी अब भी ऐतिहासिक रूप से कम है। हालांकि लगातार दावे बढ़े हैं, एक्सपर्ट्स का कहना है कि लेबर मार्केट तेजी से कमजोर होने के बजाय धीरे-धीरे ठंडा होता दिख रहा है।

इस वजह से, डॉलर को जल्द ही सपोर्ट मिल सकता है, हालांकि मार्केट यह देखना जारी रखेंगे कि क्या महंगाई कम होने और एनर्जी की कीमतों में नरमी से फेड आखिरकार ज्यादा न्यूट्रल रुख अपना पाएगा।

एक्सपर्ट्स का यह भी मानना ​​है कि रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया अपने बाहरी बफ़र्स को मज़बूत करने के लिए अच्छे मार्केट हालात का फ़ायदा उठा रहा है। कच्चे तेल की कम कीमतों और बेहतर विदेशी करेंसी इनफ़्लो से रुपये को सपोर्ट मिलने के साथ, RBI से उम्मीद है कि वह फ़ॉरेक्स रिज़र्व को फिर से भरने के लिए एक्टिव रूप से डॉलर खरीदेगा और धीरे-धीरे अपनी बड़ी फ़ॉरवर्ड डॉलर पोज़िशन को कम करेगा, जिसका अनुमान लगभग $110 बिलियन है।

मार्केट पार्टिसिपेंट्स का अनुमान है कि सेंट्रल बैंक ने पिछले कुछ सेशन में मार्केट से $3-5 बिलियन एब्ज़ॉर्ब किए होंगे। एनालिस्ट्स ज़ोर देते हैं कि इस तरह का दखल करेंसी के ट्रैजेक्टरी को लेकर किसी चिंता के बजाय समझदारी भरे रिज़र्व मैनेजमेंट को दिखाता है।

हालांकि ये खरीदारी रुपये की बढ़त की रफ़्तार को कम कर सकती हैं, एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनसे करेंसी की रिकवरी ज़्यादा टिकाऊ होगी और भविष्य के बाहरी झटकों से कम कमज़ोर होगी।

रुपये का आउटलुक

CR फ़ॉरेक्स एडवाइज़र्स के MD, अमित पाबारी के अनुसार, तेल की कीमतें सपोर्टिव बनी हुई हैं, विदेशी इनफ़्लो बेहतर हो रहे हैं, और डॉलर की मज़बूती नए सवालों का सामना कर रही है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

June 21 Yoga Day: विश्व योग दिवस क्या है? जानें वर्ष 2026 की थीम

A photo highlighting the importance of yoga on World Yoga Day and inspiring a healthy lifestyle

International Day of Yoga 2026: विश्व योग दिवस, जिसे दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस- International Day of Yoga कहा जाता है, यह हर साल 21 जून को मनाया जाने वाला एक वैश्विक उत्सव है। यह दिन पूरी दुनिया को मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए 'योग' को अपने जीवन में अपनाने का संदेश देता है। यह भारत की एक ऐसी ऐतिहासिक पहल है, जिसे आज दुनिया के लगभग सभी देश एक साथ मिलकर मनाते हैं।ALSO READ: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026: जानिए इस बार की थीम, उद्देश्य और खास कार्यक्रम

 

यह दिन योग के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए समर्पित है। योग भारत की प्राचीन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर है, जिसने आज पूरी दुनिया में स्वास्थ्य और संतुलित जीवनशैली का एक प्रभावी माध्यम के रूप में पहचान बनाई है। योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करने की एक समग्र जीवन पद्धति है।

 

  • विश्व योग दिवस की मुख्य बातें
  • किसने की शुरुआत? 
  • 21 जून को ही क्यों मनाया जाता है?
  • विश्व योग दिवस का उद्देश्य
  • इस वर्ष (2026) की थीम क्या है?

 

विश्व योग दिवस की मुख्य बातें

शुरुआत कब हुई? पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2015 को मनाया गया था।

 

किसने की शुरुआत? 

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में इसका प्रस्ताव रखा था, जिसे रिकॉर्ड 177 देशों ने अपना समर्थन दिया और इसे मंजूरी मिली।

 

उद्देश्य क्या है? इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को योग के फायदों (जैसे तनाव से मुक्ति, लचीला शरीर और शांत मन) के प्रति जागरूक करना है।

 

21 जून को ही क्यों मनाया जाता है?

21 जून की तारीख चुनने के पीछे एक बेहद दिलचस्प वैज्ञानिक और सांस्कृतिक कारण है:

 

21 जून का दिन उत्तरी गोलार्ध (Northern Hemisphere) का सबसे लंबा दिन होता है, जिसे 'ग्रीष्म संक्रांति' (Summer Solstice) कहते हैं। इसके बाद सूर्य दक्षिणायन होने लगता है। भारतीय संस्कृति और योग विज्ञान में सूर्य के दक्षिणायन के समय को आध्यात्मिक सिद्धियों, सकारात्मक ऊर्जा और ध्यान के लिए बेहद पवित्र माना गया है।

 

विश्व योग दिवस का उद्देश्य

* विश्वभर में स्वास्थ्य, शांति और सद्भाव को बढ़ावा देना।

* योग के प्रति जागरूकता बढ़ाना।

* स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करना।

* तनाव और मानसिक समस्याओं को कम करने के लिए योग अपनाने का संदेश देना।

* भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक पहचान दिलाना।ALSO READ: Inspirational Yoga Poem: स्वास्थ्य लाभ पर बेहतरीन हिन्दी कविता: योग जीवन का अमृत

 

इस वर्ष (2026) की थीम क्या है?

हर साल योग दिवस को एक विशेष विषय यानी Theme के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 में 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम 'स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग' (Yoga for Healthy Ageing) रखी गई है, जो उम्र बढ़ने के साथ-साथ शरीर को सक्रिय और आत्मनिर्भर बनाए रखने पर जोर देती है।

 

सीधे शब्दों में कहें तो, विश्व योग दिवस पूरी दुनिया को बिना किसी भेदभाव के एक सूत्र में पिरोने और 'करें योग, रहें निरोग' के मंत्र को सच करने का एक वैश्विक माध्यम है।

 

विश्व योग दिवस केवल एक विशेष दिन नहीं, बल्कि स्वस्थ, संतुलित और सकारात्मक जीवन जीने का संदेश है। योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से अधिक सशक्त बन सकता है। इसलिए योग दिवस हमें निरोग जीवन और आत्मिक शांति की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

 

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पावागढ़ में पहाड़ी से गिरीं विशाल चट्टानें, 2 श्रद्धालुओं की मौत; कई और दबे होने की आशंका

pavagadh accident

प्रसिद्ध तीर्थस्थल पावागढ़ पहाड़ी पर शुक्रवार तड़के एक दर्दनाक हादसा हो गई। पहाड़ी पर स्थित पाटियापुल के पास अचानक भारी चट्टानें नीचे गिरने से कुछ तीर्थयात्रियों के मलबे के नीचे दबे गए। इस हादसे में अब तक 2 श्रद्धालुओं की मौत हो गई जबकि 15 लोग घायल है।

 

मूसलाधार बारिश के कारण खिसकी मिट्टी

बताया जा रहा है कि यह हादसा सुबह करीब 5:00 बजे हुआ। पिछले कुछ समय से हो रही भारी बारिश के कारण पहाड़ी पर पानी का बहाव बहुत बढ़ गया था। पानी के तेज प्रवाह की वजह से पहाड़ी की मिट्टी खिसक गई और भारी चट्टानें नीचे आ गिरीं। सुबह-सुबह माताजी के दर्शन के लिए जा रहे श्रद्धालु अचानक इन गिरते पत्थरों की चपेट में आ गए। अब तक 2 श्रद्धालुओं के शव बरामद किए जा चुके हैं।

 

युद्ध स्तर पर राहत कार्य

घटना की सूचना मिलते ही रोप-वे की स्थानीय टीम तुरंत मौके पर पहुंची और पत्थरों के नीचे दबे लोगों को बाहर निकालने के लिए बचाव कार्य शुरू कर दिया। इस गंभीर हादसे की जानकारी पावागढ़ पुलिस को भी दी गई, जिसके बाद पुलिस का काफिला तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गया। फिलहाल पुलिस और स्थानीय टीम मिलकर संयुक्त रूप से रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं।

 

अभी भी कई लोगों के दबे होने की आशंका

यह हादसा इतना भीषण है कि अभी भी पत्थरों और मलबे के नीचे कुछ और तीर्थयात्रियों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। इस स्थिति को देखते हुए प्रशासन और बचाव दलों ने राहत कार्य को और तेज कर दिया है, ताकि समय रहते लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया जा सके।

 

 

edited by : Nrapendra Gupta