लगता है सीओ के कंधों पर है प्रदेश की कानून व्यवस्था का भार…दहेज हत्या मामले में कोर्ट की टिप्पणी

दहेज हत्या मामले में खुद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से गवाही कराने का अनुरोध करने वाले सीओ पेश नहीं हुए। इस पर अपर जिला जज ने टिप्पणी करते हुए कहा, लगता है सीओ के कंधे पर ही पूरे प्रदेश की कानून व्यवस्था का भार है।

क्या अमेरिका के इस टॉप साइंटिस्ट ने वुहान लैब को दिए थे पैसे, जहां से फैली थी Covid-19 महामारी? इस ‘खुलासे’ से दुनिया में मचा तहलका!

अमेरिका की राजनीति और खुफिया विभाग से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिका की निवर्तमान डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस (DNI) तुलसी गबार्ड ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिन कुछ ऐसे सीक्रेट दस्तावेज जारी किए हैं, जिसने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया है। गबार्ड ने सीधे तौर पर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के मुख्य चिकित्सा सलाहकार रहे डॉ. एंथनी फाउची पर कोरोना महामारी (COVID-19) के सच को दबाने और अमेरिका की संसद से झूठ बोलने का गंभीर आरोप लगाया है।

गबार्ड के दफ्तर से जारी बयान के मुताबिक, डॉ. फाउची ने चीन की उसी वुहान लैब (WIV) को पैसे दिए थे, जहां से कोरोना वायरस के लीक होने का दावा पूरी दुनिया में किया जाता है।

चीनी लैब को दिए अमेरिकी टैक्सपेयर्स के करोड़ों डॉलर

तुलसी गबार्ड ने अपने आखिरी दिन “पहले कभी न देखे गए” खुफिया दस्तावेजों को सार्वजनिक करते हुए सनसनीखेज दावे किए हैं:

खतरनाक रिसर्च की फंडिंग: डॉ. फाउची ने अमेरिकी जनता के टैक्स के लाखों-करोड़ों डॉलर चीन के ‘वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी’ (WIV) को दिए थे। इस पैसे का इस्तेमाल चमगादड़ों के कोरोना वायरस पर बेहद खतरनाक ‘गेन-ऑफ-फंक्शन’ (वायरस की ताकत और फैलने की क्षमता बढ़ाने वाली) रिसर्च के लिए किया गया था।

सच्चाई को दबाया: जब 2020 की शुरुआत में कोरोना महामारी फैली, तो फाउची ने खुफिया एजेंसियों के कुछ बड़े अधिकारियों के साथ मिलकर इस बात को पूरी तरह दबा दिया कि यह वायरस चीन की लैब से लीक (Lab-Leak) हुआ था।

‘डीप स्टेट’ का हथकंडा: खुफिया एजेंसियों को मोहरा बनाया

गबार्ड के दफ्तर द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि 85 वर्षीय डॉ. फाउची, जो 38 सालों तक अमेरिका की प्रमुख स्वास्थ्य संस्था (NIAID) के हेड रहे, उन्होंने बड़ी-बड़ी फार्मा कंपनियों (दवा निर्माताओं) के फायदे और ट्रिलियन डॉलर के वैक्सीन बाजार के चक्कर में इस खतरनाक रिसर्च को बढ़ावा दिया।

पीछे से घुमाई पूरी बाजी

बयान के मुताबिक, फाउची ने पर्दे के पीछे से खेल रचा। उन्होंने अपने पसंदीदा वैज्ञानिकों की एक टीम बनाई और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों पर दबाव डाला कि वे जनता के सामने यही कहें कि कोरोना वायरस किसी लैब से नहीं, बल्कि प्राकृतिक रूप से जानवरों के जरिए फैला है। उन्होंने एक फर्जी रिसर्च पेपर भी तैयार करवाया ताकि लैब-लीक थ्योरी को झुठलाया जा सके। जो भी वैज्ञानिक या अधिकारी फाउची की बात से असहमत होता था, उसे नौकरी से हटाने या करियर बर्बाद करने की धमकियां दी जाती थीं।

“संसद के सामने कसम खाकर बोला झूठ”

तुलसी गबार्ड, जिन्होंने हाल ही में अपने बीमार पति की देखभाल के लिए डोनाल्ड ट्रंप की इंटेलिजेंस चीफ का पद छोड़ने का फैसला किया था, उन्होंने कहा कि फाउची के ये पैंतरे सीधे तौर पर ‘डीप स्टेट’ (पर्दे के पीछे से सरकार चलाने वाले सीक्रेट नेटवर्क) जैसे हैं।

गबार्ड ने बताया कि जून 2024 में जब अमेरिकी संसद की सुनवाई के दौरान फाउची से कसम खिलवाकर पूछा गया था कि— “क्या उन्होंने महामारी के पहले या बाद में एफबीआई (FBI), सीआईए (CIA) या किसी अन्य खुफिया एजेंसी से वायरस रिसर्च को लेकर कोई बात की थी?” तो फाउची ने सवालों से बचते हुए साफ झूठ बोल दिया कि उनके संज्ञान में ऐसी कोई बात नहीं है। जबकि नए दस्तावेज गवाही दे रहे हैं कि वे लगातार खुफिया अधिकारियों के संपर्क में थे।

अमेरिकी जनता को चाहिए इंसाफ

तुलसी गबार्ड ने भावुक होते हुए कहा, “कोविड-19 महामारी ने लाखों अमेरिकी नागरिकों और दुनिया भर के अनगिनत लोगों को असहनीय दर्द और तकलीफें दी हैं। सालों के झूठ, सेंसरशिप और सच को छुपाने के खेल के बाद, अब अमेरिकी जनता पारदर्शिता, सच्चाई और इंसाफ की हकदार है।”

गबार्ड के इन बेहद संगीन और सीधे आरोपों पर फिलहाल डॉ. एंथनी फाउची या उनके करीबियों की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या सफाई सामने नहीं आई है। लेकिन इस खुलासे ने दुनिया के सबसे बड़े वैश्विक संकट यानी कोरोना वायरस के जन्म को लेकर एक बार फिर महासंग्राम छेड़ दिया है।

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योग में सिर्फ आसन नहीं, सम्मान और कृतज्ञता भी जरूरी, श्रीश्री रविशंकर ने बताया साधना का असली मंत्र

योग: साधना में सम्मान का महत्व

गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर

 

 

विश्व योग दिवस पर जब हम योग की चर्चा करते हैं, तो प्रायः हमारा ध्यान आसनों, प्राणायाम और शारीरिक स्वास्थ्य पर केंद्रित हो जाता है। निस्संदेह ये योग के महत्वपूर्ण आयाम हैं, लेकिन योग का वास्तविक स्वरूप इससे कहीं अधिक व्यापक है। योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने की विधि नहीं, बल्कि मन, बुद्धि और चेतना को परिष्कृत करने का विज्ञान है।
 

महर्षि पतंजलि ने योगसूत्र में साधना की सफलता का एक महत्वपूर्ण सूत्र दिया है-
 

 ‘स तु दीर्घकाल नैरन्तर्य सत्कारासेवितो दृढ़भूमिः।’ 

अर्थात् योग का अभ्यास तब दृढ़ता से स्थापित होता है, जब उसे लंबे समय तक, बिना किसी अंतराल के और आदर-भाव के साथ किया जाए।

हममें से अधिकांश लोग जीवन में परिवर्तन तो चाहते हैं, लेकिन उसके लिए आवश्यक निरंतरता नहीं रख पाते। कुछ दिनों तक उत्साहपूर्वक योग, ध्यान या प्राणायाम करते हैं, फिर व्यस्तता, आलस्य या ऊब के कारण उसे छोड़ देते हैं। परिणामस्वरूप साधना का प्रभाव भी क्षीण पड़ जाता है। जीवन की हर महत्वपूर्ण उपलब्धि समय मांगती है। एक संगीतकार वर्षों तक रियाज़ करता है, एक खिलाड़ी प्रतिदिन अभ्यास करता है और एक कलाकार अपनी कला को निखारने में लंबे समय तक समर्पित रहता है।

यदि बाहरी कौशल विकसित करने में इतना समय और श्रम लगता है, तो मन और चेतना को विकसित करने के लिए धैर्य और निरंतरता की आवश्यकता और भी अधिक है। योग का उद्देश्य केवल शरीर को लचीला बनाना नहीं, बल्कि मन को वर्तमान क्षण में स्थिर करना है। सामान्यतः हमारा मन अतीत की स्मृतियों और भविष्य की आशंकाओं के बीच भटकता रहता है। योग हमें वर्तमान में लौटना सिखाता है। वर्तमान में स्थित होना ही शांति, संतोष और आंतरिक स्वतंत्रता का आधार है।
 

किन्तु पतंजलि केवल अभ्यास की बात नहीं करते। वे “सत्कारासेवितो” शब्द का प्रयोग करते हैं, जिसका अर्थ है आदर, श्रद्धा और सम्मान के साथ साधना करना। यही वह बिंदु है जिसे हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं।

जब हम किसी नए कार्य को आरंभ करते हैं, तो उसमें उत्साह और सजगता होती है। ध्यान के शुरुआती दिनों में गहराई का अनुभव होता है, प्राणायाम में आनंद आता है और साधना ताज़गी प्रदान करती है। लेकिन समय के साथ वह नवीनता कम होने लगती है। अभ्यास बना रहता है, पर उसके प्रति सम्मान कम हो जाता है। तब साधना धीरे-धीरे एक मशीनी क्रिया बन जाती है।
 

यहीं से उसकी शक्ति कम होने लगती है।

सम्मान का अर्थ केवल किसी व्यक्ति, परंपरा या पद्धति का सम्मान करना नहीं है। सम्मान का अर्थ है वर्तमान क्षण के प्रति पूर्ण सजगता और कृतज्ञता। जब हम किसी कार्य को आदर के साथ करते हैं, तब हमारा मन पूरी तरह उसमें उपस्थित होता है। यही उपस्थिति साधना को गहराई प्रदान करती है। जब आप अपने शरीर का सम्मान करते हैं, तब योगासन साधना बन जाते हैं। जब आप अपनी श्वास का सम्मान करते हैं, तब प्राणायाम चेतना को जागृत करने का माध्यम बन जाता है। जब आप अपने मन का सम्मान करते हैं, तब ध्यान सहज रूप से गहरा होने लगता है।
 

आज जीवन में असंतोष का एक बड़ा कारण यह है कि हमने सम्मान और कृतज्ञता की भावना खो दी है। स्वस्थ शरीर, चलती हुई श्वास, प्रकृति का सौंदर्य, परिवार का स्नेह और जीवन के अनगिनत उपहार हमें इतने स्वाभाविक लगने लगे हैं कि हम उनका मूल्य ही भूल गए हैं। योग हमें पुनः कृतज्ञता की ओर लौटाता है। कृतज्ञता से संतोष आता है और संतोष से मन में स्थिरता आती है।
 

ज्ञान के प्रति सम्मान भी उतना ही आवश्यक है। जब हम किसी ज्ञान, शिक्षा या मार्गदर्शन को श्रद्धा के साथ ग्रहण करते हैं, तो हमारा मन अधिक ग्रहणशील हो जाता है। सम्मान हमारी चेतना को जागृत करता है और सजगता को बढ़ाता है। यही सजगता ध्यान को गहरा और जीवन को अधिक सार्थक बनाती है।
 

महर्षि पतंजलि ने मन की स्थिरता के लिए दो आधार बताए हैं- अभ्यास और वैराग्य। अभ्यास हमें बार-बार वर्तमान में लौटाता है, जबकि वैराग्य हमें अपेक्षाओं और परिणामों के बोझ से मुक्त रखता है। यदि केवल अभ्यास हो और वैराग्य न हो, तो मन परिणामों में उलझ जाता है। यदि केवल वैराग्य हो और अभ्यास न हो, तो प्रगति रुक जाती है। दोनों का संतुलन ही योग को पूर्णता प्रदान करता है।
 

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि योग कोई एक दिन का आयोजन नहीं है। यह जीवन जीने की एक कला है। प्रतिदिन कुछ मिनटों की साधना, सजग श्वास और कृतज्ञता का भाव हमारे जीवन की दिशा बदल सकता है।
 

योग का अर्थ जीवन से दूर जाना नहीं, बल्कि जीवन के प्रत्येक क्षण को पूरी जागरूकता के साथ जीना है। जब साधना में निरंतरता, मन में कृतज्ञता और हृदय में सम्मान जागृत हो जाता है, तब योग केवल अभ्यास नहीं रहता; वह हमारे व्यक्तित्व, व्यवहार और जीवन का स्वभाव बन जाता है। यही योग का वास्तविक उत्सव है और यही पतंजलि के सूत्रों का शाश्वत संदेश भी।

फिर बंद कर दिया होर्मुज? ईरान ने बताई पूरी सच्चाई, लेबनान पर इजरायल के हमले से बढ़ा तनाव!

ईरान ने शुक्रवार को उन खबरों का खंडन किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया गया है। ईरान ने कहा कि 18 जून को अमेरिका के साथ हुए युद्धविराम समझौते के तहत इस अहम जलमार्ग से कमर्शियल शिपिंग जारी है। सरकारी ब्रॉडकास्टर ‘प्रेस टीवी’ से बात करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने इन दावों को “बेबुनियाद” और गलत बताया।

बघाई ने स्ट्रेट के बंद होने की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि MoU पर हस्ताक्षर के बाद, तेहरान ने सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही “फिलहाल सामान्य रूप से चल रही है”।

दरअसल कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ये दावा किया गया था कि ईरान की नौसेना ने अचानक एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला ऐलान कर दिया। ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को दोबारा पूरी तरह बंद कर दिया है।

रिपोर्ट में कहा गया कि ईरान ने साफ कहा है कि जब तक इजरायल लेबनान से अपनी सेना नहीं हटाता और अमेरिका इस इलाके को खाली नहीं करता, तब तक यह रास्ता बंद रहेगा।

दावा- ईरान ने दी थी खुली धमकी!

इसमें बताया गया कि समुद्री रेडियो चैनलों पर ईरान के सबसे खतरनाक सैन्य संगठन इरेक्ट (IRGC – इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) ने एक बयान जारी कर अमेरिका पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। ईरान का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के बीच बुधवार को जो समझौता हुआ था, अमेरिका उसका पालन नहीं कर रहा है।

ईरानी सेना ने सख्त लहजे में चेतावनी दी, “क्योंकि लेबनान से इजरायल की वापसी, समुद्री नाकाबंदी को पूरी तरह हटाना और अमेरिकी आतंकवादी ताकतों का फारस की खाड़ी से बाहर निकलना हमारी मुख्य शर्तें थीं, इसलिए जब तक ये शर्तें पूरी नहीं होतीं, ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ बंद रहेगा। सभी जहाजों से अनुरोध है कि वे अपनी सुरक्षा के लिए इस रास्ते के पास न आएं। अगर किसी भी जहाज ने इस आदेश को मानने से इनकार किया, तो उसे सीधे निशाना बनाया जाएगा (यानी उड़ा दिया जाएगा)।”

आपको बता दें कि दुनिया का लगभग 20% (पांचवां हिस्सा) तेल और गैस का व्यापार इसी रास्ते से होता है। इसी साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद भी इसे बंद कर दिया गया था, जिससे दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम आसमान पर पहुंच गए थे।

लेबनान पर इजरायल के हमले से नाराज हुआ ईरान!

बताया गया कि ईरान के इस गुस्से के पीछे इजरायल का लेबनान पर किया गया ताजा हमला है। अमेरिका-ईरान डील के तहत यह माना जा रहा था कि इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच भी जंग रुक जाएगी। लेकिन कल आधी रात से इजरायल ने लेबनान के 11 शहरों पर भीषण हवाई हमले किए, जिसमें कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई और 33 घायल हो गए।

इस बीच, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कह दिया है कि उनकी सेना “जब तक जरूरी होगा” लेबनान में ही रहेगी। वहीं, इजरायल के धुर दक्षिणपंथी मंत्री इतामार बेन ग्विर ने सोशल मीडिया पर लिख दिया कि “पूरे लेबनान को जल जाना चाहिए।” इस पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह किसी मामूली पागल का बयान नहीं है, बल्कि इजरायली सरकार के सुरक्षा मंत्री की सोच है। तेल अवीव (इजरायल) में बैठी यह सरकार पूरी मानवता के लिए खतरा है और इसका मकसद सिर्फ स्थायी युद्ध (Permanent War) करना है।”

अमेरिका का दावा: “हमने तो रास्ता खोल दिया था”

दूसरी तरफ, अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने गुरुवार को ही ऐलान किया था कि उसने पिछले दो महीनों से ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई अपनी नाकाबंदी को आधिकारिक रूप से हटा लिया है। ऐसे में अमेरिका के लिए यह समझना मुश्किल हो रहा है कि ईरान किस अधूरी नाकाबंदी की बात कर रहा है।

यहां तक कि समुद्री जहाजों पर नजर रखने वाली एजेंसी ‘AXSMarine’ के मुताबिक, इस समझौते के तुरंत बाद गुरुवार को रिकॉर्ड 25 कमर्शियल जहाज इस रास्ते से सुरक्षित गुजरे थे, जो पिछले दो महीनों में सबसे बड़ी संख्या थी। लेकिन अब ईरान के इस नए कदम ने पूरी दुनिया को एक बार फिर महायुद्ध और भयंकर आर्थिक संकट के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।

मोजतबा खामेनेई का बड़ा दावा, ईरान डील के लिए ‘बेताब’ ट्रंप ने हर तरह के हथकंडे अपनाए

Devshayani Ekadashi 2026: आषाढ़ माह में किया जाएगा देवशनी एकादशी का व्रत, जानें कब से बंद होंगे मांगलिक कार्य

Devshayani Ekadashi 2026: देवशयनी एकादशी का व्रत आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। हिंदू कैलेंडर की एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है। माना जाता है कि इस दिन विधि-विधान और पूरी आस्था से भगवान विष्णु का व्रत करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। हिंदू धर्म में देवशयनी एकादशी व्रत का अहम स्थान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन से भगवान विष्णु पाताल लोक में शयन करने चले जाते हैं। इस दिन से चार माह तक वह योग निद्रा में रहते और मांगलिक कार्यों पर ब्रेक लग जाता है।

चतुर्मास के बाद कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भगवान विष्णु जब योगनिद्रा से बाहर आते हैं, तब मांगलिक और शुभ कार्य फिर से शुरू होते हैं। इस दिन देवउठनी एकादशी का व्रत किया जाता है। देवशयनी एकादशी से चातुर्मास आरंभ हो जाता है। चातुर्मास चार महीनों तक रहता है और इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश या अन्य कोई मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस समय भगवान विष्णु की आराधना करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

कब है देवशयनी एकादशी?

वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है। वर्ष 2026 में एकादशी तिथि 24 जुलाई को सुबह 9 बजकर 12 मिनट से शुरू होगी। इसका समापन 25 जुलाई को दोपहर 11 बजकर 34 मिनट पर होगा। उदया तिथि को ध्यान में रखते हुए 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा।

देवशयनी एकादशी पारण समय

देवशयनी एकादशी का पारण 26 जुलाई के दिन किया जाएगा। 26 जुलाई को सुबह 05 बजकर 39 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 22 मिनट के मध्य साधक स्नान-ध्यान कर विधि-विधान से लक्ष्मी नारायण की पूजा करें। इसके बाद अन्न का दान कर एकादशी का पारण करें।

देवशयनी एकादशी शुभ योग

आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर ब्रह्मऔर इंद्र योग समेत कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं। वहीं, देवशयनी एकादशी पर शिववास योग का भी निर्माण हो रहा है। इन योग में लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करने से साधक को मनचाहा वरदान मिलेगा।

विवाह मुहूर्त कब से शुरू होंगे?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग की शय्या पर विश्राम करने के लिए चले जाते हैं। भगवान विष्णु चार महीने बाद कार्तिक शुक्ल एकादशी यानी देवउठनी एकादशी के दिन जागते हैं। भगवान विष्णु के जागरण के बाद नवंबर में फिर से विवाह मुहूर्त शुरू होंगे। नवंबर में 21, 24, 25 और 26 तारीख को विवाह के शुभ योग बन रहे हैं। वहीं, दिसंबर में 2, 3, 4, 5, 6 और 11 दिसंबर को भी विवाह के लिए अनुकूल तिथियां रहेंगी।

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उत्‍तर प्रदेश में अब तक 2.99 करोड़ से ज्‍यादा नए ड्राइविंग लाइसेंस जारी

– आरटीओ के चक्कर कम हुए, योगी सरकार ने परिवहन सेवाओं को बनाया स्मार्ट और ऑनलाइन

– 5.30 करोड़ से अधिक वाहनों का डिजिटल प्रबंधन, तकनीक के दम पर आगे बढ़ रहा यूपी

– लखनऊ आरटीओ सबसे आगे, ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन पंजीकरण में रिकॉर्ड उपलब्धि

– डिजिटल गवर्नेंस का मॉडल बना यूपी परिवहन विभाग, पारदर्शिता और सुविधा बढ़ी

– वाहन और सारथी पोर्टल के माध्यम से 49 फेसलेस सेवाओं से बढ़ी पारदर्शिता

Uttar Pradesh News : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में डिजिटल गवर्नेंस को नई पहचान मिली है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण प्रदेश का परिवहन विभाग बनकर उभरा है, जहां तकनीक के व्यापक उपयोग से सेवाओं को पारदर्शी, सरल और नागरिकों के लिए अधिक सुलभ बनाया गया है। डिजिटल माध्यमों के जरिए वाहन पंजीकरण, ड्राइविंग लाइसेंस, कर भुगतान और अन्य सेवाओं की प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और तेज हो गई है।
 

प्रदेश में परिवहन विभाग के आंकड़े इस बदलाव की गवाही दे रहे हैं। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में कुल 5 करोड़ 30 लाख 25 हजार 689 वाहन पंजीकृत हैं। इनमें 34 लाख 76 हजार 928 वाणिज्यिक वाहन तथा 4 करोड़ 95 लाख 48 हजार 761 निजी वाहन शामिल हैं। इतने बड़े वाहन नेटवर्क का प्रभावी प्रबंधन डिजिटल प्लेटफॉर्म और आधुनिक तकनीकी व्यवस्था वाहन और सारथी पोर्टल के जरिए किया जा रहा है।
 

वाहन पंजीकरण के मामले में लखनऊ का ट्रांसपोर्ट नगर आरटीओ प्रदेश में सबसे आगे है, जहां कुल 32 लाख 49 हजार 911 वाहन पंजीकृत हैं। इसके बाद क्रमश: प्रयागराज (32.49 लाख), कानपुर नगर (19.79 लाख), आगरा (16.92 लाख) और वाराणसी (16.70 लाख) वाहन रजिस्ट्रेशन के साथ शीर्ष पर हैं। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि परिवहन विभाग की सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है और डिजिटल प्रणाली के कारण रिकॉर्ड संख्या में कार्यों का निष्पादन संभव हो रहा है।

 

सबसे ज्यादा डीएल जारी करने में टॉप पर लखनऊ आरटीओ

ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में अब तक 2.99 करोड़ से अधिक नए ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं। सबसे अधिक ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने वाले आरटीओ कार्यालयों में लखनऊ (13.66 लाख), गाजियाबाद (13.11 लाख), मेरठ (10.58 लाख), कानपुर नगर (10.51 लाख) और प्रयागराज (10.16 लाख) शामिल हैं।
 

व्यावसायिक ड्राइविंग लाइसेंस (ट्रांसपोर्ट डीएल) जारी करने में भी प्रदेश ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। अब तक 29 लाख 5 हजार 937 ट्रांसपोर्ट ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं। इस श्रेणी में प्रयागराज, कानपुर नगर, गोरखपुर, जौनपुर और आजमगढ़ के कार्यालय अग्रणी रहे हैं।

 

परिवहन विभाग की 49 सेवाएं फेसलेस और कॉन्टैक्टलेस मोड पर

योगी सरकार ने परिवहन विभाग में तकनीक आधारित सुधारों को प्राथमिकता देकर भ्रष्टाचार की संभावनाओं को कम किया है और सेवाओं की पारदर्शिता को बढ़ाया है। परिवहन विभाग ने डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देते हुए नागरिक सेवाओं को पूरी तरह सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है। विभाग द्वारा वाहन (VAHAN) और सारथी (SARATHI) पोर्टल के माध्यम से वर्तमान में 49 सेवाएं फेसलेस और कॉन्टैक्टलेस मोड में उपलब्ध कराई जा रहीं हैं। इनका विवरण पोर्टल पर देखा जा सकता है। 
 

इसके तहत नागरिकों को अब किसी परिवहन कार्यालय के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं है और वे घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर विभिन्न सेवाओं का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। विभाग का कहना है कि फेसलेस प्रणाली से समय की बचत, पारदर्शिता और सुविधा बढ़ी है, वहीं मानव हस्तक्षेप कम होने से सेवाएं अधिक तेज, सरल और प्रभावी हुई हैं।
 

उत्तर प्रदेश परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने कहा कि हमारा लक्ष्य नागरिकों को कम समय में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। कार्यालयों में आने के बजाए अब लोग ऑनलाइन ही विभिन्न सेवाओं का लाभ ले रहे हैं। डिजिटल गवर्नेंस के तहत यह विभाग की बड़ी उपलब्धि है।
Edited By : Chetan Gour

ट्रम्प बोले-मेलानी मेरे साथ फोटो खिंचाने के लिए बेताब थीं:इटली PM का जवाब- उनकी कहानी झूठी, विदेश मंत्री ने US दौरा रद्द किया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच तनातनी खुलकर सामने आ गई है। ट्रम्प ने दावा किया कि G7 समिट के दौरान मेलोनी उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए बेताब थीं। इस पर मेलोनी ने पलटवार करते हुए कहा कि ट्रम्प की यह कहानी पूरी तरह झूठी और मनगढ़ंत है। ट्रम्प ने इतालवी टीवी चैनल La7 से बातचीत में कहा, “वह मेरे साथ फोटो चाहती थीं। मैं ऐसा नहीं करना चाहता था, लेकिन मुझे उन पर तरस आ गया।” इस पर मेलोनी ने कहा, विवाद बढ़ने के बाद इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो तायानी ने अगले हफ्ते का अपना अमेरिकी दौरा रद्द कर दिया। उन्होंने कहा कि ट्रम्प के गंभीर और अपमानजनक शब्द सिर्फ प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि पूरे इटली का अपमान हैं। G7 में साथ दिखे थे ट्रम्प और मेलोनी फ्रांस में हुए G7 शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रम्प और मेलोनी को एक सोफे पर बैठकर लंबी बातचीत करते देखा गया था। हाल के दिनों में दोनों नेताओं के बीच रिश्ते सुधरने के संकेत भी मिले थे, लेकिन ट्रम्प के ताजा बयान के बाद दोनों देशों के बीच फिर तनाव बढ़ गया है। मेलोनी ट्रम्प की पुरानी समर्थक रही हैं और 2025 में उनके शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने वाली इकलौती यूरोपीय नेता थीं। हालांकि, इस साल ईरान युद्ध और पोप लियो को लेकर ट्रम्प की टिप्पणियों के बाद दोनों नेताओं के बीच मतभेद सामने आने लगे थे। ट्रम्प पर यूरोप-अमेरिका रिश्ते बिगाड़ने का आरोप मेलोनी के करीबी सहयोगी और प्रधानमंत्री कार्यालय के अंडरसेक्रेटरी जियोवानबातिस्ता फज्जोलारी ने कहा कि ट्रम्प जानबूझकर या अनजाने में अमेरिका और यूरोप के ऐतिहासिक रिश्तों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ट्रम्प के ऐसे बयानों ने पूरे यूरोप में अमेरिका की छवि को नुकसान पहुंचाया है और इसका सबसे ज्यादा नुकसान खुद अमेरिका को होगा। मोदी और मेलोनी की दोस्ती भी चर्चा में इस विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जॉर्जिया मेलोनी के करीबी संबंध भी चर्चा में हैं। दोनों नेता हाल के G7 सम्मेलन समेत कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साथ नजर आए हैं। सोशल मीडिया पर उनकी दोस्ती को #Melodi नाम से भी लोकप्रियता मिली है। फ्रांस के एवियां में आयोजित 2026 G7 सम्मेलन के दौरान मेलोनी ने मजाक में नरेंद्र मोदी से कहा था कि दोनों इंस्टाग्राम के सबसे चर्चित जोड़े हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी की रोम यात्रा के दौरान उन्होंने मेलोनी को भारत की मशहूर मेलोडी टॉफियां भी गिफ्ट की थीं। इस बातचीत से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था और इसे 10 करोड़ से ज्यादा बार देखा गया। मेलोनी ने सार्वजनिक तौर पर नरेंद्र मोदी को दुनिया का सबसे लोकप्रिय नेता बताया है। दोनों नेताओं की अनौपचारिक तस्वीरें और सेल्फी सोशल मीडिया पर अक्सर चर्चा में रहती हैं।

भ्रष्टाचार पर CM धामी का बड़ा प्रहार, हरिद्वार भूमि खरीद मामले में बड़े अफसरों पर गिरी गाज

भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद प्रकरण में बड़ी और कड़ी कार्रवाई की है। प्रकरण में तत्कालीन नगर आयुक्त हरिद्वार नगर निगम वरुण चौधरी को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर की संस्तुति की गई है। वहीं, तत्कालीन जिलाधिकारी हरिद्वार कर्मेंद्र सिंह को अपने पदीय दायित्वों एवं कर्तव्यों के समुचित निर्वहन में गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए उनके विरुद्ध दीर्घ शास्ति (मेजर पनिशमेंट) अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है। दोनों अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को संस्तुति भेजी जा रही है।

 

इसके अलावा, उस समय कार्यरत एसडीएम अजयवीर सिंह के विरुद्ध परनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने तथा उनकी तीन वेतनवृद्धियां रोकने के निर्देश भी दिए गए हैं।

 

गौरतलब है कि हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद मामले के सामने आते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त रुख अपनाया था। प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने पर तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह और पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी सहित कई अधिकारियों को निलंबित किया गया था। इसके बाद विशेष जांच और ऑडिट के माध्यम से पूरे प्रकरण की गहन पड़ताल कराई गई।

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट कहा है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि शासन-प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित सर्वोपरि है तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई जारी रहेगी।

 

धामी सरकार की इस कार्रवाई को राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है, जिसने स्पष्ट संदेश दिया है कि जनधन के दुरुपयोग और पद के दुरुपयोग को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। Edited by : Sudhir Sharma

योगी का ऐलान, पाताल से भी ढूंढ निकालेंगे चोर, 500 साल इंतजार किया 15 दिन और सही

Yogi adityanath

Yogi Adityanath Ayodhya: राम की नगरी अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले ने उत्तर प्रदेश की सियासत में भूचाल ला दिया है। शुक्रवार को खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या की धरती से हुंकार भरते हुए इस पूरे मामले पर अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दोषी चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, वह पाताल से भी ढूंढ निकाला जाएगा और उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

 

मुख्‍यमंत्री योगी ने कहा कि राम मंदिर के लिए देश ने 500 साल इंतजार किया है, अब चढ़ावा चोरी की जांच के लिए 15 दिन और सही। एसआईटी (SIT) जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली और सनसनीखेज खबर यह रही कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे से ठीक पहले एक बड़ा अंदरूनी एक्शन देखने को मिला।

योगी के कार्यक्रमों से चंपत राय दूर रखा गया

सूत्रों के मुताबिक, राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की जांच के बीच, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से दूर रहने के सख्त निर्देश दिए गए थे। यही वजह रही कि 245 करोड़ की विकास परियोजनाओं के शिलान्यास और लोकार्पण के इस बड़े सरकारी कार्यक्रम में चंपत राय पूरे समय कहीं नजर नहीं आए। सीएम योगी के इस कड़े रुख से प्रशासनिक और ट्रस्ट के गलियारों में हड़कंप मच गया है। CM योगी ने आम जनता से भी अपील की है कि अगर किसी के पास भी इस महा-चोरी से जुड़ा कोई भी सबूत या साक्ष्य हो, तो वह बिना डरे सीधे SIT को सौंपे। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर दान चोरी कांड, अब सर्विलांस स्टाफ रडार पर! RMO की भी खुलेगी कुंडली

सपा और कांग्रेस पर बरसे योगी

अयोध्या पहुंचे मुख्यमंत्री का गुस्सा सिर्फ चोरों पर ही नहीं, बल्कि विपक्ष पर भी जमकर फूटा। समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव को आड़े हाथों लेते हुए सीएम योगी ने अतीत के पन्ने पलट दिए। उन्होंने गरजते हुए कहा कि जिन्होंने रामभक्तों पर क्रूरता से गोलियां चलवाई थीं, आज वही लोग हमें उपदेश दे रहे हैं। 

 

उन्होंने कहा कि जो लोग रामभक्तों को अपमानित करते थे और अपराधियों की कब्र पर जाकर फातिहा पढ़ते थे, वे असल में बाबर को मानने वाले लोग हैं। इनकी सोच सिर्फ कब्रिस्तान और उसकी बाउंड्री बनाने तक सीमित थी, जबकि हमारी सरकार अयोध्या का कायाकल्प कर रही है। योगी ने कांग्रेस को भी 'दोगले चरित्र' की पार्टी बताते हुए कहा कि जो कभी राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे और कहते थे कि 'राम हैं ही नहीं', आज वे रामभक्तों के नाम पर मचल रहे हैं। ALSO READ: अयोध्या में रामलला को चढ़ाया सबसे महंगा आम, कीमत जानकर चौंक जाएंगे

क्या है यह पूरा मामला?

दरअसल, हाल ही में अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले दान और चढ़ावे की रकम/सामग्री में भारी हेराफेरी और चोरी का मामला सामने आया था। चूंकि यह करोड़ों रामभक्तों की आस्था से जुड़ा मामला था, इसलिए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष ने इसे लपक लिया और सीधे ट्रस्ट व सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। विपक्ष का आरोप था कि रामलला के दरबार में भी भ्रष्टाचार हो रहा है। योगी सरकार का तुरंत बड़ा एक्शन : मामले की संवेदनशीलता और जनता के आक्रोश को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिना देर किए इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए एसआईटी (SIT) का गठन कर दिया।

चंपत राय की अनदेखी क्यों? 

मंदिर की व्यवस्था और दान-दक्षिणा की देखरेख का जिम्मा मुख्य रूप से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का है, जिसके सर्वेसर्वा चंपत राय हैं। जांच के घेरे में मंदिर प्रशासन के लोग भी शामिल हैं। यही वजह है कि निष्पक्ष जांच का संदेश देने के लिए सीएम योगी ने चंपत राय को अपने आधिकारिक कार्यक्रम से दूर रखने का अभूतपूर्व कदम उठाया, जिससे यह साफ हो गया कि सरकार इस मामले में किसी भी तरह का ढुलमुल रवैया बर्दाश्त नहीं करेगी।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala