194 साल से जिंदा है जोनाथन, एफिल टॉवर से भी ज्यादा पुराना…वैज्ञानिकों के लिए बना रहस्य!

दुनिया में कुछ जानवर इंसानों की तुलना में बहुत लंबा जीवन जीते हैं, लेकिन एक कछुआ ऐसा है जो लगभग दो सदियों से जीवित है। गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के मुताबिक, सेंट हेलेना द्वीप पर रहने वाला सेशेल्स जायंट कछुआ जोनाथन दुनिया का सबसे उम्रदराज़ ज्ञात स्थलीय जानवर और अब तक का सबसे बुजुर्ग कछुआ माना जाता है। जोनाथन की उम्र करीब 194 साल है। माना जाता है कि उसका जन्म वर्ष 1832 के आसपास हुआ था। वह ब्रिटेन के विक्टोरियन युग, लंदन के प्रसिद्ध टॉवर ब्रिज और पेरिस के एफिल टॉवर से भी ज्यादा पुराना है।

जोनाथन की उम्र है 194 साल

सेशेल्स जायंट कछुए की इस प्रजाति का वैज्ञानिक नाम एल्डाब्राचेलिस गिगेंटिया होलोलिसा है। वर्तमान में जोनाथन दक्षिण अटलांटिक महासागर के सेंट हेलेना द्वीप पर रहता है।इतनी अधिक उम्र होने के बावजूद जोनाथन की सेहत काफी अच्छी बताई जाती है। स्थानीय पशु चिकित्सकों के अनुसार वह आज भी स्वस्थ है और अच्छी तरह खाना खाता है। हालांकि, बढ़ती उम्र के कारण उसकी सूंघने की क्षमता लगभग खत्म हो चुकी है।

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल

वैज्ञानिक जोनाथन के डीएनए पर भी शोध कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि उसकी कोशिकाओं में इंसानों की कोशिकाओं की तरह तेजी से बदलाव नहीं होते। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अनुसार, इस अध्ययन से उम्र बढ़ने और लंबे जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण रहस्यों को समझने में मदद मिल सकती है। हालांकि, सेंट हेलेना के लोग उसे प्यार से “जोनो” कहकर बुलाते हैं। वह गवर्नर के आवास के बगीचे में रहने वाले तीन अन्य कछुओं के साथ शांतिपूर्ण जीवन बिताता है। जोनो को हरी घास खाना और धूप में आराम करना बेहद पसंद है। जोनाथन अपने जन्मदिन के खास जश्न के लिए भी मशहूर है। हर साल उसका जन्मदिन वीगन केक के साथ मनाया जाता है, जिसे वह बड़े चाव से खाता है।

आदिवासी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं द्रौपदी मुर्मु

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 20 जून को अपना 68वां जन्मदिन मनाएंगी। आदिवासी समाज के साथ ही पूरे देश के लिए द्रौपदी मुर्मु प्रेरणास्रोत हैं। हालांकि, जीवन यात्रा के दौरान दो जवान बेटे उनकी आंखों के सामने दुनिया को छोड़कर चले गए। बाद में जीवनसाथी की भी मौत हो गई। समय बार-बार उनका इम्तिहान ले रहा था। यह गम ऐसा था, जो किसी को भी अंदर से तोड़ सकता था लेकिन उन्होंने आत्मविश्वास और हौसलों के साथ इन हालातों का सामना किया और खुद को मजबूत किया। अध्यात्म के सहारे खुद को इतना सबल बनाया कि मुश्किलें उनके सामने सिर झुकाने लगीं। देश की प्रथम नागरिक और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के जीवन की कहानी सच में प्रेरणादायक है।

ओडिशा के एक छोटे से आदिवासी गांव से निकलकर देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचना किसी के लिए भी आसान नहीं था। खासकर सीमित संसाधन, सामाजिक चुनौतियां और कठिन हालात में उन्होंने जिस तरह शिक्षा को अपना हथियार बनाया और आगे बढ़ती रहीं, वह उनकी मजबूत  इच्छाशक्ति का उदाहरण है। अपने गांव से कॉलेज जाने वाली पहली छात्रा से लेकर राष्ट्रपति बनने तक उनका सफर भी लोकतंत्र की ताकत को दिखाता है।

द्रौपदी मुर्मु का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा के दूरस्थ मयूरभंज जिले के उपरबेड़ा गांव में एक संथाल आदिवासी परिवार में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा उपरबेड़ा प्राथमिक विद्यालय में हुई। अपने दृढ़ संकल्प के माध्यम से और शिक्षा प्राप्त करने के उद्देश्य से वे 8वीं कक्षा से आगे की पढ़ाई के लिए भुवनेश्वर गईं। वह मैट्रिक की परीक्षा पास करने और कला स्नातक की उपाधि प्राप्त करने वाली अपने गांव की पहली बालिका बनीं। उन्होंने साल 1979 में भुवनेश्वर के रमादेवी महिला महाविद्यालय से राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र में कला स्नातक की उपाधि प्राप्त की। 1980 में उनकी शादी श्यामचरण मुर्मु से हुई, जो एक बैंक अधिकारी थे।

उनके प्रारंभिक जीवन को संघर्ष, धैर्य और उनके परिवार से मिले मजबूत नैतिक मूल्यों से आकार मिला। उन्होंने अनेक सामाजिक और वित्तीय कठिनाइयों का सफलतापूर्वक सामना किया और वे आदिवासी समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनीं। इन प्रारंभिक संघर्ष भरे वर्षों में उनकी सार्वजनिक सेवा और नेतृत्वशीलता से प्राप्त उपलब्धियों की नींव रखी गई।

एक समय ऐसा आया जब 2009 में द्रौपदी मुर्मु डिप्रेशन में चली गई थीं। 25 साल की उम्र में उनके बेटे की असमय मौत हो गई थी, जिससे उन्हें गहरा सदमा लगा था और वे डिप्रेशन में जा चुकी थीं। खुद को हिम्मत देने के लिए उन्होंने आध्यात्म का रास्ता चुना और वे ब्रह्माकुमारी संस्था के साथ जुड़ गईं। वह धीरे-धीरे डिप्रेशन से बाहर आ ही रही थीं लेकिन समय ने उनकी एक और परीक्षा ले ली। दुख का पहाड़ ऐसा टूटा था कि सिर्फ चार साल के बाद 2013 में एक अन्य दुर्घटना में द्रौपदी मुर्मु के दूसरे बेटे का भी निधन हो गया था।

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दोनों बेटों का निधन उनके लिए किसी बड़ी त्रासदी से कम नहीं था लेकिन दुखों का यह दौर यहीं समाप्त नहीं हुआ। दूसरे बेटे की मृत्यु के कुछ दिनों बाद ही उनकी मां और उनके भाई का निधन हो गया था। वे इस गम को भुला पातीं, उसके पहले 2014 में पति श्यामचरण मुर्मु भी दुनिया को छोड़कर चले गए। इस तरह कुछ वर्षों में ही धीरे-धीरे परिवार के कई सदस्य उनको छोड़कर चले गए। हालांकि, उन्होंने आध्यात्म के साथ योग शुरू किया, ताकि खुद डिप्रेशन से बाहर आ सकें। उन्होंने इसके खिलाफ तब तक लड़ाई लड़ी जब तक उन्होंने उसे हरा नहीं दिया।

अपने कष्टसाध्य व्यक्तिगत जीवन के बावजूद द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्र निर्माण के प्रति गहरे समर्पण से कार्य किया है, जिससे उनकी समय के अनुसार ढल जाने की असाधारण क्षमता का पता चलता है। उनकी दृढ़ता और उद्देश्यपूर्ण यात्रा से ऐसे समावेशी और सशक्त भारत बनाने की प्रेरणा मिलती रहेगी जहां हर व्यक्ति की गरिमा का सम्मान हो और सबको आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध हों।

द्रौपदी मुर्मु जमीनी स्तर पर लोकतंत्र से गहराई से जुड़ी रही हैं। उन्होंने समावेश, प्रतिसंवेदना और हाशिए पर पड़े लोगों के उत्थान के प्रति दृढ़ संकल्प रखते हुए शासन के तीनों स्तरों पर अपनी सेवाएं दी हैं।

मुर्मू ने 1997 में रायरंगपुर नगर पंचायत में पार्षद के तौर पर अपना राजनीतिक करियर शुरू किया। 2000 में, वह ओडिशा में भाजपा-बीजेडी गठबंधन सरकार के दौरान मंत्री बनीं। उन्हें 2007 में ओडिशा विधानसभा की ओर से सर्वश्रेष्ठ विधायक के लिए पंडित ‘नीलकंठ दास-सर्वश्रेष्ठ विधायक’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

वह ओडिशा के रायरंगपुर से भाजपा के टिकट पर दो बार (2000 और 2009) विधायक रहीं। 2009 के चुनावों में जब बीजेडी ने भाजपा से गठबंधन तोड़ लिया और सीएम नवीन पटनायक ने बड़ी जीत हासिल की, तब भी उन्होंने अपनी सीट बरकरार रखी।

द्रौपदी मुर्मु ने ओडिशा सरकार के परिवहन, वाणिज्य, मत्स्य पालन और पशुपालन मंत्रालयों का कामकाज संभाला। वह ओडिशा में भाजपा के अनुसूचित जनजाति मोर्चा की उपाध्यक्ष और बाद में अध्यक्ष रहीं। मुर्मू को 2010 में भाजपा की मयूरभंज (पश्चिम) इकाई का जिला अध्यक्ष चुना गया और 2013 में वह फिर से चुनी गईं। उसी साल उन्हें भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी (एसटी मोर्चा) का सदस्य भी बनाया गया। 2015 में उन्हें झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया और वे इस पद पर पहुंचने वाली पहली आदिवासी नेता बनीं।

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ईरान जंग में दुनिया से 115 करोड़ बैरल तेल गायब:ऑयल रिजर्व 36 साल में सबसे कम; ट्रम्प बोले- 4 हफ्ते में भंडार खत्म हो जाते

ईरान-अमेरिका समझौते के बाद इस हफ्ते होर्मुज स्ट्रेट फिर से खुल गया है। हालांकि दुनिया अभी भी तेल संकट से पूरी तरह बाहर नहीं निकली है। एनालिटिक्स फर्म केपलर की रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध के करीब चार महीनों में वैश्विक बाजार से 115 करोड़ बैरल तेल की सप्लाई गायब हो चुकी है। इसका असर आने वाले महीनों तक बना रह सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध के दौरान मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई लगभग बंद रही। इस वजह से दुनिया के स्ट्रेटजिक और कॉमर्शियल ऑयल रिजर्व तेजी से घटे हैं। पिछले कुछ महीनों में 19 करोड़ बैरल तेल स्टॉक से निकल चुका है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के स्ट्रेटजिक रिजर्व 1990 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं, जबकि अमेरिका का इमरजेंसी रिजर्व 43 साल के निचले स्तर पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को वर्साय में G7 बैठक के दौरान कहा कि अगर जंग खत्म नहीं करते तो हमारे रिजर्व करीब चार हफ्तों में खत्म हो जाते। सीजफायर के बाद तेल सस्ता हुआ अमेरिका-ईरान समझौते की खबर से तेल बाजार ने राहत की सांस ली। युद्ध के दौरान 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा ब्रेंट क्रूड अब 80 डॉलर से नीचे आ गया है। लेकिन कीमतों में यह गिरावट पूरी कहानी नहीं बताती। रिपोर्ट के मुताबिक होर्मुज स्ट्रेट खुलने के बाद भी तेल की सप्लाई तुरंत सामान्य नहीं होगी। पहले समुद्री रास्तों से बारूदी सुरंगें हटानी होंगी। इसके बाद खाली टैंकरों की वापसी, तेल उत्पादन बढ़ाने और सप्लाई चेन को पटरी पर लाने में वक्त लगेगा। तेल उद्योग से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि पूरी व्यवस्था को सामान्य होने में कई महीने लग सकते हैं। तब तक दुनिया को मौजूदा तेल भंडार के सहारे ही काम चलाना होगा। RBC कैपिटल मार्केट्स की हेलिमा क्रॉफ्ट ने कहा कि बाजार जरूरत से ज्यादा उत्साहित है। उनके मुताबिक, संकट खत्म मान लेना जल्दबाजी होगी, क्योंकि तेल की सप्लाई को सामान्य स्तर पर लाने में अभी बड़ी चुनौतियां बाकी हैं। कई एक्सपर्ट्स को अभी भी राहत की उम्मीद इंफ्रास्ट्रक्चर केपिटल एडवाइजर्स के CEO जे हैटफील्ड का मानना है कि नकदी संकट से जूझ रहे OPEC सदस्य देश उत्पादन बढ़ाने के लिए तैयार हैं। इससे बाजार में अतिरिक्त सप्लाई आएगी और कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। मैक्वेरी ग्रुप के ग्लोबल ऑयल एंड गैस स्ट्रैटेजिस्ट विकास द्विवेदी ने कहा कि जंग शुरू होने से पहले दुनिया के पास तेल का अच्छा-खासा स्टॉक था। इसी वजह से इतनी बड़ी सप्लाई रुकने के बावजूद बाजार पूरी तरह नहीं हिला। उन्होंने कहा कि अमेरिका में डीजल और पेट्रोल का भंडार जरूर कम हुआ है, लेकिन हालात अभी काबू में हैं। संकट के दौरान रिफाइनरियों को तेल खरीदने के लिए कई जगह फोन करने पड़ रहे थे, लेकिन आने वाले हफ्तों में तस्वीर बदल सकती है। तब तेल बेचने वाले खुद खरीदारों के पास पहुंचेंगे। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि युद्ध के दौरान गायब हुए 115 करोड़ बैरल तेल की भरपाई आसान नहीं होगी। अगर दुनिया रोजाना मांग से 50 लाख बैरल ज्यादा तेल भी पैदा करे, तब भी इस कमी को पूरा करने में करीब एक साल लग जाएगा।

योगी सरकार में ओबीसी परिवारों के लिए संबल बनी सामूहिक विवाह योजना

Mass marriage scheme becomes source of support for OBC families under Yogi government

– सरकार की योजनाएं समाज के हर वर्ग तक समान रूप से पहुंच रही हैं और पात्र लोगों को उनका अधिकार मिल रहा

– वित्तीय वर्ष 2025-26 में 26,286 ओबीसी जोड़े हुए लाभान्वित, समाज कल्याण विभाग निभा रहा अहम भूमिका

– अन्य पिछड़ा वर्ग के 1.80 लाख से अधिक जोड़ों को मिला मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का सहारा

Uttar Pradesh news : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ किसी भेदभाव के बिना समाज के सभी वर्गों तक पहुंच रहा है। योगी सरकार की प्राथमिकता है कि पात्रता के आधार पर प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचे। इसी सोच का परिणाम है कि समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, सामान्य वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय के गरीब परिवारों के लिए सहारा बनी है।

 

अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के परिवारों की बात करें तो योगी सरकार के नौ वर्षों में 1,80,017 जोड़ों का विवाह इस योजना के माध्यम से संपन्न कराया गया है। वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में 26,286 ओबीसी जोड़े योजना से लाभान्वित हुए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार की योजनाएं समाज के हर वर्ग तक समान रूप से पहुंच रही हैं और पात्र लोगों को उनका अधिकार मिल रहा है। 

 

पात्रता के आधार पर मिल रहा योजनाओं का लाभ

योगी सरकार ने योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दी है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना इसका प्रमुख उदाहरण है, जहां किसी वर्ग विशेष के बजाय सभी पात्र परिवारों को लाभ दिया जा रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के सम्मानजनक विवाह के उद्देश्य से शुरू की गई यह योजना लाखों परिवारों के जीवन में खुशियां लेकर आई है।

 

समाज कल्याण विभाग निभा रहा सक्रिय भूमिका

समाज कल्याण विभाग योजना के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विभाग की ओर से लाभार्थियों का सत्यापन कर सामूहिक विवाह समारोह आयोजित किए जाते हैं। विवाह की संपूर्ण व्यवस्था प्रशासनिक स्तर पर सुनिश्चित की जाती है। समारोह में खान-पान, पंडाल, सजावट सहित अन्य व्यवस्थाएं की जाती हैं, ताकि लाभार्थी परिवारों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

 

आर्थिक सहायता से मिल रहा सामाजिक संबल

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत प्रत्येक जोड़े को एक लाख रुपए की सहायता प्रदान की जा रही है। इसमें 60 हजार रुपए वधू के बैंक खाते में सीधे हस्तांतरित किए जाते हैं, 25 हजार रुपए के उपहार एवं गृहस्थी के सामान दिए जाते हैं, जबकि 15 हजार रुपए विवाह आयोजन पर खर्च किए जाते हैं। इससे गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ कम होता है और बेटियों का विवाह सम्मानपूर्वक संपन्न हो पाता है।

 

 

योगी सरकार में पात्र परिवारों को मिल रहा योजनाओं का लाभ

समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में समाज के प्रत्येक पात्र परिवार तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत बीते 9 वर्षों में अन्य पिछड़ा वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिली है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में 4,957 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ, जो 2018-19 में बढ़कर 13,866 और 2019-20 में 15,417 तक पहुंच गया।

वर्ष 2020-21 में 6,901, 2021-22 में 15,256, 2022-23 में 31,903, 2023-24 में 33,913 तथा 2024-25 में 31,518 जोड़ों का विवाह कराया गया। वहीं, वर्ष 2025-26 में 26,286 जोड़े इस योजना से लाभान्वित हुए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में आर्थिक संबल के साथ सामाजिक समरसता और सबका साथ, सबका विकास की अवधारणा को मजबूत करते हुए कुल 5,54,202 जोड़ों की शादियां हुई हैं।
Edited By : Chetan Gour

Barun Sobti: ‘वह अजीब तरह से बात कर रहे हैं…’, फराह खान के व्लॉग में बरुन सोबती को देखकर फैंस हुए परेशान

Barun Sobti: फराह खान का कुकिंग व्लॉग एक बार फिर से चर्चा में हैं। लेकिन इस बार वजह सिर्फ़ खाना नहीं है। फ़िल्ममेकर ने हाल ही में अपने YouTube चैनल पर एक्टर बरुण सोबती को बुलाया, जिन्हें टीवी फ़ैंस ‘इस प्यार को क्या नाम दूं?’ के अर्नव सिंह रायजादा के तौर पर जानते और पसंद करते हैं। जहां कई फ़ैंस एपिसोड में अपने “चाइल्डहुड क्रश” को देखकर बहुत खुश थे, वहीं कुछ दर्शकों ने व्लॉग के दौरान एक्टर के बर्ताव को लेकर भी तरह-तरह की बातें शुरू कर दीं।

बरुण, जिन्होंने सालों में टेलीविज़न और OTT पर अपनी ज़बरदस्त फ़ैन-फ़ॉलोइंग बनाई है, फ़राह के कुकिंग चैनल पर अपनी पत्नी पश्मीन मनचंदा के साथ नज़र आए। वीडियो के आते ही फ़ैंस कमेंट सेक्शन में उमड़ पड़े। कई लोगों ने एक्टर को इतने नॉर्मल माहौल में देखकर पुरानी यादें ताज़ा कीं और उत्साह ज़ाहिर किया।

बरुण की मौजूदगी की वजह से इस एपिसोड ने तुरंत सबका ध्यान खींच लिया। कई फ़ैन्स ने माना कि थंबनेल में उन्हें देखते ही उन्होंने वीडियो पर क्लिक कर दिया। एक यूज़र ने कमेंट किया, “किसी वीडियो पर इतनी जल्दी कभी क्लिक नहीं किया! फ़राह मैम, हमारे बचपन के क्रश को अपने चैनल पर लाने के लिए आपका शुक्रिया!”

हालांकि, अच्छे कमेंट्स के साथ-साथ कुछ दर्शकों ने यह भी कहा कि वरुण व्लॉग में कुछ अलग लग रहे थे। कुछ यूज़र्स ने एपिसोड के दौरान उनकी एनर्जी और बातचीत के तरीके पर सवाल उठाए। एक ने लिखा, “चाहे उन्हें कुछ भी हुआ हो, हमें व्लॉग बहुत पसंद आया।”

एक और दर्शक ने पूछा, “क्या उन्होंने वीड लिया है?” वहीं एक कमेंट में लिखा था, “फराह खान के शो पर पहली बार किसी गेस्ट की एनर्जी इतनी अजीब लगी। एक तीसरे यूज़र ने लिखा, “उनके साथ कुछ तो गड़बड़ है। वे अजीब तरह से बात कर रहे हैं।” इन कमेंट्स के बाद एपिसोड को लेकर और भी चर्चा होने लगी। कुछ दर्शक इस बात पर बहस करने लगे कि क्या वरुण कैमरे पर बस रिलैक्स्ड और कैज़ुअल थे या फिर उनका व्यवहार वाकई अजीब लग रहा था।

वीडियो में बरुण की पत्नी पश्मीन मनचंदा भी दिखीं और कुछ दर्शकों को लगा कि वह व्लॉग के दौरान स्थिति को संभालने की कोशिश कर रही थीं। एक यूज़र ने लिखा, “पत्नी के लिए बहुत बुरा लगा, यकीन नहीं होता कि उन्होंने व्लॉग कैसे बनाया। एक और यूज़र ने कमेंट किया, “मुझे उनकी पत्नी अच्छी लगीं कि वह स्थिति को संभालने की कोशिश कर रही थीं।”

इन अटकलों के बावजूद, कई फ़ैन्स ने बरुण का बचाव किया और इस एपिसोड की तारीफ़ की क्योंकि इसमें उन्हें एक्टर की ज़िंदगी की एक निजी और बिना बनावट वाली झलक देखने को मिली। कई लोगों के लिए, फ़राह के चैनल पर उनका दिखना ही उनके टीवी के दिनों और दर्शकों के बीच उनके ज़बरदस्त क्रेज़ की यादें ताज़ा करने के लिए काफ़ी था।

बरुण सोबती भारतीय टेलीविज़न के सबसे पसंदीदा एक्टर्स में से एक बने हुए हैं। उन्होंने 2009 में ‘श्रद्धा’ शो से अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की और बाद में ‘दिल मिल गए’ और ‘बात हमारी पक्की है’ में नज़र आए। हालांकि, 2011 में उनका करियर तब पूरी तरह बदल गया जब उन्होंने ‘इस प्यार को क्या नाम दूं?’ में सनाया ईरानी के साथ अर्णव सिंह रायज़ादा का रोल निभाया।

यह रोमांटिक ड्रामा बहुत सफल रहा और बरुण घर-घर में पहचाने जाने लगे। सनाया ईरानी के साथ उनकी जोड़ी को न सिर्फ़ भारत में बल्कि विदेशों में भी दर्शकों का बहुत प्यार मिला। शो खत्म होने के कई साल बाद भी, बरुण की पहचान अर्णव के किरदार से जुड़ी हुई है, जो भारतीय टेलीविज़न के सबसे लोकप्रिय रोमांटिक लीड किरदारों में से एक है।

टेलीविज़न पर सफलता पाने के बाद, बरुण ने फ़िल्मों और स्ट्रीमिंग प्रोजेक्ट्स में भी काम किया। उन्होंने ‘मेन और मिस्टर राइट’ से फ़िल्मों में डेब्यू किया और बाद में ‘तू है मेरा संडे’ और ’22 यार्ड्स’ में नज़र आए। OTT पर, कई प्रोजेक्ट्स के ज़रिए उन्हें नई पहचान और तारीफ़ मिली, जिससे वे अपनी रोमांटिक टेलीविज़न वाली छवि से आगे बढ़ पाए। वे ‘तन्हाइयां’, ‘द ग्रेट इंडियन डिसफंक्शनल फ़ैमिली’, ‘असुर’, ‘द मिसिंग स्टोन’, ‘हलाहल’, ‘बदतमीज़ दिल’, ‘कोहरा’ और ‘रात जवान है’ जैसे शोज़ में नज़र आए।

‘असुर’ में निखिल नायर और ‘कोहरा’ में अमरपाल गरूंडी के तौर पर उनके काम को दर्शकों और क्रिटिक्स से बहुत तारीफ़ मिली। इन दोनों किरदारों ने स्ट्रीमिंग स्पेस में गहरे और कई परतों वाले रोल निभाने में सक्षम एक्टर के तौर पर बरुण की जगह पक्की कर दी। हालांकि फ़राह खान के व्लॉग में उनके हालिया अपीयरेंस पर ऑनलाइन मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिली हैं, लेकिन इसने फ़ैन्स को यह भी याद दिलाया है कि अलग-अलग पीढ़ियों के दर्शकों के बीच उन्हें कितना प्यार मिलता है।

“मुझसे फोटो के लिए गिड़गिड़ाई थीं मेलोनी”… ट्रंप के दावे पर भड़कीं इटली की पीएम, कहा- ‘हम कभी भी भीख नहीं मांगते’

अभी कुछ ही दिन पहले फ्रांस के एवियान (Evian) में हुए G7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit) (15 से 17 जून) में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच गर्मजोशी भरी मुलाकात की तस्वीरें सामने आई थीं। लेकिन अब इस दोस्ती में बहुत बड़ा धमाका हो गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में दावा कर दिया कि जॉर्जिया मेलोनी ने उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए बकायदा “भीख मांगी थी” (Begged)। इस दावे के बाद मेलोनी काफी ज्यादा भड़क गई हैं और उन्होंने ट्रंप को करारा जवाब दिया है।

ट्रंप का विवादित दावा: “तरस खाकर खिंचवाई फोटो”

इटली के एक न्यूज चैनल ‘La7 TV’ को दिए फोन इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी ही धुन में मेलोनी का मजाक उड़ाते हुए कहा, “वह शायद खुश होंगी कि मैंने उनसे बात की, जबकि मुझे उनसे बात करने की कोई जरूरत नहीं थी। उन्होंने मेरे साथ एक तस्वीर खिंचवाने के लिए मुझसे भीख मांगी थी। वह मेरे साथ फोटो खिंचवाने के लिए इतनी बेताब थीं कि पूछिए मत। मैं तो फोटो नहीं खिंचवाता, लेकिन मुझे उन पर तरस आ गया, इसलिए मैं मान गया।”

मेलोनी का पलटवार: “ईश्वर गवाह है, इटली कभी भीख नहीं मांगता!”

ट्रंप के इस बयान के बाद जॉर्जिया मेलोनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो जारी कर ट्रंप के दावों की धज्जियां उड़ा दीं।

मेलोनी ने वीडियो में साफ-साफ कहा, “डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान पूरी तरह मनगढ़ंत और झूठा है। मैं सच में उनके इस व्यवहार से हैरान हूं। मुझे नहीं पता कि अमेरिकी राष्ट्रपति अपने ही सहयोगियों के साथ ऐसा बर्ताव क्यों करते हैं; वैसे यह कोई पहली बार नहीं है।”

मेलोनी यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने ट्रंप की दुखती रग पर हाथ रखते हुए आगे कहा, “बड़े दुख की बात है कि ट्रंप अपनी यह आक्रामकता और तेवर पश्चिमी देशों या अमेरिका के असली दुश्मनों के खिलाफ नहीं दिखाते, बल्कि उनके सामने तो वह बेहद नरम पड़ जाते हैं। खैर, उन्हें एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए: मैं और मेरा देश इटली, कभी किसी के आगे भीख नहीं मांगते।”

इटली में भारी गुस्सा: डिप्टी पीएम ने रद्द किया अमेरिका दौरा

ट्रंप की इस टिप्पणी से पूरे इटली के नेताओं में गुस्सा उबल पड़ा है। इसे पूरे देश का अपमान माना जा रहा है।

इटली के डिप्टी पीएम एंटोनियो तायानी ने गुस्से में अपना 21 और 22 जून का अमेरिका दौरा रद्द कर दिया है। उन्होंने कहा, “ट्रंप के ये शब्द पूरे इटली का अपमान हैं, इसलिए मैं अमेरिका नहीं जा रहा।”

इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने कहा, “मैं तो बंदूक की नोक पर भी मेलोनी को किसी से फोटो के लिए भीख मांगते नहीं देख सकता। मेलोनी ने इटली और यूरोप के भले के लिए ट्रंप की पुरानी कड़वी बातों को भुलाकर उनसे मुलाकात की थी, लेकिन ट्रंप ने फिर से अपनी खराब तहज़ीब (Lapse in style) दिखा दी।”

कभी पक्के दोस्त थे, अब क्यों आई इतनी कड़वाहट?

आपको बता दें कि जॉर्जिया मेलोनी कभी डोनाल्ड ट्रंप की बहुत बड़ी समर्थक हुआ करती थीं। यहां तक कि साल 2025 में जब ट्रंप ने दोबारा राष्ट्रपति पद की शपथ ली, तो मेलोनी उस समारोह में शामिल होने वाली अकेली यूरोपीय नेता थीं।

लेकिन फिर रिश्ते क्यों बिगड़े?

दरअसल ट्रंप ने ईसाई धर्मगुरु पोप लियो (Pope Leo) पर कुछ विवादित टिप्पणियां की थीं, जिससे मेलोनी नाराज हो गईं। इस साल शुरू हुए ईरान युद्ध को लेकर दोनों के विचार बिल्कुल अलग हो गए और मेलोनी ने ट्रंप से दूरी बना ली।

हालांकि, इस G7 समिट में दोनों ने पैच-अप (रिश्ते सुधारने) की कोशिश की थी, लेकिन ट्रंप के इस एक बयान ने दोनों देशों के बीच एक नया ‘विवाद’ खड़ा कर दिया है।

मोजतबा खामेनेई का बड़ा दावा, ईरान डील के लिए ‘बेताब’ ट्रंप ने हर तरह के हथकंडे अपनाए

 

Jio Platforms IPO: जियो प्लेटफॉर्म्स ने आईपीओ के लिए ड्राफ्ट पेपर्स फाइल किए, यहां जानिए इश्यू के बारे में सबकुछ

Jio Platforms IPO: जियो प्लेटफॉर्म्स ने 19 जून को सेबी के पास आईपीओ के लिए ड्राफ्ट पेपर्स फाइल कर दिए। इस आईपीओ का लंबे समय से इंतजार रहा है। रिलायंस इडस्ट्र्रीज की 49वीं एजीएम में चेयरमैन मुकेश अंबानी ने जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ का ऐलान किया।

जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ में करीब 27 करोड़ नए शेयर इश्यू करेगी। आईपीओ से आए पैसे में से 27,500 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कंपनी कर्ज चुकाने के लिए करेगी। सेबी के पास फाइल डीआरएचपी के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स पर 27,579.20 करोड़ रुपये का कर्ज है।

जियो प्लेटफॉर्म्स कंज्यूमर मोबाइल और फिक्स्ड डिजिटल कनेक्टिविटी सर्विसेज ऑफर करती है। इसमें वायरलेस और फिक्स्ड ब्रॉडबैंड शामिल हैं। कंपनी कई तरह की डिजिटल सर्विसेज ऑफर करती है, जिसमें एंटरटेनमेंट, क्लाउड गेमिंग, क्लाउड कंप्यूट, क्लाउड पीसी, स्टोरेज और स्मार्ट होम सॉल्यूशंस शामिल हैं।

जियो प्लेटफॉर्म्स एंटरप्राइज-ग्रेड ब्रॉडबैंड और लिज्ड लाइन कनेक्टिविटी भी ऑफर करती है। इसकी सब्सिडियरी कंपनी रिलायंस जियो इंफोकॉम का ब्रांड काफी स्ट्रॉन्ग है। यह देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम बन गई है। कंपनी के आईपीओ में कोई ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) नहीं होगा। इसका मतलब है कि कंपनी आईपीओ में सिर्फ नए शेयर जारी करेगी।

31 मार्च, 2026 को जियो प्लेटफॉर्म्स की सब्सिडियरी कंपनी रिलायंस जियो इंफोकॉम के ग्राहकों की संख्या 52.44 करोड़ थी। इसमें 26.85 करोड़ 5जी के ग्राहक और 2.71 करोड़ फिक्स्ड ब्रॉडबैंड के कस्टमर्स शामिल हैं। जियो प्लेटफॉर्म्स ने खुद को ‘टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म’ बताया है। कंपनी में 11,000 एंप्लॉयीज है। इसने 6,817 पेटेंट्स के लिए अप्लाई किया है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज की जियो प्लेटफॉर्म्स में 66.43 फीसदी हिस्सेदारी है। इसमें मेटा की 9.99 फीसदी, गूगल की 7.73 फीसदी, सऊदी अरबिया वेल्थ फंड्स की 2.31 फीसदी, विस्टा इक्विटी पार्टनर्स की 2.31 फीसदी, सिल्वर लेक की 1.88 फीसदी, मुबादला की 1.85 फीसदी, जीए सिंगापुर की 1.34 फीसदी, अबुधाबी इनवेस्टमेंट अथॉरिटी की 1.16 फीसदी और टीपीजी कैपिटल की 0.93 फीसदी हिस्सेदारी है।

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अमरनाथ यात्रा को क्षति पहुंचाने की साजिश, सुरक्षाबलों ने किया आतंकी षड्यंत्र का भंडाफोड़, लापता 3 युवकों समेत 5 गिरफ्तार

Security forces achieved big success in Shopian and Kishtwar districts

सुरक्षाबलों ने अमरनाथ यात्रा को क्षति पहुंचाने के एक आतंकी षड्यंत्र का भंडाफोड़ करने का दावा किया है। यह खतरा कितना बड़ा था अंदाजा इसी से लगाया जा सकता था कि पकड़े गए 3 ओजीडब्ल्यू से प्लास्टिक विस्फोटक पीईके बरामद किया गया है जो किसी भी स्कैनर की पकड़ में नहीं आता है। इस बीच किश्तवाड़ में भी 2 आतंकी मददगार पकड़े गए हैं।

अधिकारियों ने बताया कि शोपियां जिले में सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है। जम्मू कश्मीर पुलिस ने शुक्रवार को पुडसू इलाके में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान तीन ओवर ग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) को गिरफ्तार किया है।
 

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, खुफिया सूचना के आधार पर शोपियां पुलिस ने पुडसू क्षेत्र में तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान तीन संदिग्ध ओजीडब्ल्यू को पकड़ा गया। तलाशी में उनके कब्जे से दो हैंड ग्रेनेड, करीब 2.5 किलोग्राम प्लास्टिक विस्फोटक सामग्री पीईके, चार मोबाइल फोन और प्रतिबंधित आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े चार पोस्टर बरामद किए गए हैं।

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सूत्रों ने बताया कि गिरफ्तार किए गए तीनों युवक 31 मई 2026 से अपने घरों से लापता थे। आशंका जताई जा रही है कि ये तीनों आतंकी संगठन में शामिल हो गए थे। फिलहाल पुलिस ने गिरफ्तार ओजीडब्ल्यू की पहचान और मामले के अन्य विवरण को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी साझा नहीं की है।

मामले की जांच जारी है। जबकि सूत्रों का दावा था कि प्रारंभिक पूछताछ में यह सामने आया है कि तीनों इस विस्फोटक सामग्री का इस्तेमाल अमरनाथ यात्रा को क्षति पहुंचाने के लिए करना चाहते थे। फिलहाल इसकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

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इस बीच पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि किश्तवाड़ जिले में आतंकवादियों को मदद पहुंचाने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें वन विभाग का एक कर्मचारी भी शामिल है। एक अधिकारी ने बताया कि ये गिरफ्तारियां किश्तवाड़ पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम और शस्त्र अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज एक मामले की जांच के दौरान की गईं।
 

आरोपियों की पहचान वन विभाग के सरकारी कर्मचारी तारिक अहमद गिनू और मोहम्मद इकबाल के तौर पर हुई है, ये दोनों किश्तवाड़ जिले के डच्चन इलाके के टंडर के रहने वाले हैं। पुलिस ने बताया कि ये दोनों स्थानीय आतंकवादियों की मदद करने और उन्हें सहयोग देने में शामिल थे। इससे पहले, इसी मामले के सिलसिले में छात्रू इलाके के दो अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया था।

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किश्तवाड़ के सीनियर सुपरिटेंडेंट आफ पुलिस नरेश सिंह ने कहा कि ये गिरफ्तारियां विस्तृत जांच के बाद की गईं और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने की कोशिशें जारी हैं।
Edited By : Chetan Gour

गौतम गंभीर की आलोचना की श्रीसंथ ने, कहा विराट रोहित खेलें वनडे विश्वकप (Video)

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एक प्रसिद्ध डिजिटल मीडिया संस्थान को दिए गए इंटरव्यू में श्रीसंथ ने कहा है कि गौतम गंभीर भारतीय टीम के लिए सही कोच साबित नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि ड्रेसिंग रूम में गौतम गंभीर बुत बनकर बैठे रहते हैं। इससे अच्छा गुजरात टाइटंस के कोच आशीष नेहरा को कोच बना देते।

इसके अलावा एक सवाल के जवाब पर उन्होंने कहा कि विराट कोहली और रोहित शर्मा के भविष्य का फैसला उनको खुद लेना चाहिए। दरअसल पत्रकार ने सवाल किया था कि क्या इन दोनों दिग्गज बल्लेबाजों को संन्यास ले लेना चाहिए तो उन्होंने कहा कि दोनों के कितने रन है।

गौतम गंभीर के खुद 10 से 12 हजार रन है वहीं विराट कोहली के कुल अंतरराष्ट्रीय रन 30 हजार से ज्यादा है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि ऐसे में जब कोच के कुल रन ही दोनों खिलाड़ियों से कम हैं तो वह इन दोनों को कैसे बोल सकते हैं संन्यास पर सोचने का।

श्रीसंथ को एक बार गंभीर ने कहा था फिक्सर, साथ खेले विश्वकप

3 साल पहले गौतम गंभीर ने श्रीसंथ को लीजेंड्स लीग क्रिकेट के मैच के दौरान ‘Fixer’ कहा था। इंडियन कैपिटल्स और गुजरात जायंट्स के बीच एलिमिनेटर मैच के दौरान श्रीसंथ और उनके पूर्व साथी गंभीर के बीच तीखी बहस हो गयी थी। इसके बाद विश्व कप विजेता खिलाड़ियों को अलग करने के लिए अंपायर को हस्तक्षेप करना पड़ा था।

श्रीसंथ ने वर्ष 2005 और 2011 के बीच सभी प्रारूपों में भारत के लिए 90 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले और उनमें से 49 खेलों में गंभीर एकादश में उनके टीम-साथी थे। वे 2007 टी-20 विश्वकप और 2011 एकदिवसीय विश्वकप में भारत की खिताब जीतने वाली टीमों का हिस्सा थे।गौतम गंभीर ने जहां टी-20 विश्वकप फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ एक निर्णायक पारी खेली थी तो श्रीसंथ ने अंत में मिस्बाह का कैच लेकर जीत की मुहर लगाई थी। जब साल 2011 आया तो गौतम गंभीर श्रीसंथ से काफी आगे निकल चुके थे। श्रीसंथ सिर्फ पहले और आखिरी मैच में अंतिम एकादश में शामिल हुए थे और गौतम गंभीर ने 97 रनों की शानदार पारी खेलकर टीम को एकदिवसीय विश्वकप के करीब लाए थे।

फीक्सिंग में फंसे थे श्रीसंथ

श्रीसंत पर इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2013 में स्पॉट फिक्सिंग प्रकरण में उनकी कथित लिप्तता के कारण बीसीसीआई (भारतीय क्रिकेट बोर्ड) की अनुशासनात्मक समिति ने आजीवन प्रतिबंध लगाया था।लेकिन उच्चतम न्यायालय ने 2019 में इस प्रतिबंध को घटाकर सात साल का कर दिया था।