लगातार दूसरे दिन सोने की चमक पड़ी फीकी, चांदी में भी छाई सुस्ती

Gold Rate

सोने और चांदी की कीमत में शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट देखने को मिली। इससे सोने का दाम 1.45 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी का दाम 2.32 लाख रुपए प्रति किलो से नीचे आ गया है। 

इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम 3,123 रुपए कम होकर 1,44,970 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,48,093 रुपए प्रति 10 ग्राम था।

22 कैरेट सोने का दाम 1,35,653 रुपए प्रति 10 ग्राम से कम होकर 1,32,793 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है। 18 कैरेट सोने की कीमत कम होकर 1,08,728 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है, जो कि पहले 1,11,070 रुपए प्रति 10 ग्राम थी।

सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है।

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चांदी का दाम 8,218 रुपए कम होकर 2,31,93 रुपए प्रति किलो हो गया है, जो कि पहले 2,40,191 रुपए प्रति किलो था।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। कॉमेक्स पर सोना 1.68 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 4,174.47 डॉलर प्रति औंस और चांदी 2.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ 64.91 डॉलर प्रति औंस पर थी।

एलकेपी सिक्योरिटीज के जतिन त्रिवेदी ने कहा कि फेडरल रिजर्व की ओर से 2026 में ब्याज दरें एक बार बढ़ाने के संकेत के बाद सोने की कीमतों पर दबाव देखने को मिल रहा है। इससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ और सोने जैसी बिना रिटर्न वाली संपत्तियों का आकर्षण कम हो गया। फेड के सख्त रुख के कारण बुलियन बाजारों में बड़े पैमाने पर प्रॉफिट बुकिंग देखी गई।

उन्होंने आगे कहा कि फेड की पॉलिसी के ऐलान के बाद पिछले कुछ सेशन में कॉमेक्स गोल्ड की कीमत लगभग 4375 डॉलर प्रति औंस से गिरकर 4150 डॉलर प्रति औंस हो गई है, जबकि एमसीएक्स गोल्ड का दाम लगभग 1,54,000 रुपए से घटकर 1,47,200 रुपए पर आ गया। डॉलर के मजबूत होने की संभावना और ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदों का असर मार्केट सेंटीमेंट पर पड़ रहा है।

Pic Credit : ANI

तुलसी का बड़ा धमाका, US की पूर्व इंटेलिजेंस चीफ गबार्ड ने सार्वजनिक किए गुप्त दस्तावेज, Corona पर खुलासे से पूरी दुनिया में हड़कंप

Tulsi Gabbard Fauci Leak

Tulsi Gabbard Fauci Leak: अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस चीफ तुलसी गबार्ड (अब पूर्व) ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिन एक ऐसा 'परमाणु बम' फोड़ा है, जिसने न सिर्फ अमेरिकी राजनीति बल्कि पूरी दुनिया में भूचाल ला दिया है। गबार्ड ने उन अति-गोपनीय (Top Secret) दस्तावेजों को सार्वजनिक कर दिया है, जो सीधे तौर पर पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के मुख्य चिकित्सा सलाहकार डॉ. एंथनी फाउची को कोरोना महामारी के असली गुनहगार के रूप में कटघरे में खड़ा करते हैं।

 

इन लीक दस्तावेजों के अनुसार, डॉ. फाउची ने अमेरिकी टैक्सपेयर्स के लाखों डॉलर चीन की उसी वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (WIV) को ट्रांसफर किए थे, जिसे कोविड-19 वायरस का जन्मदाता माना जाता है। ALSO READ: तुलसी गबार्ड ने अमेरिकी खुफिया विभाग के चीफ पद से दिया इस्तीफा, बताया यह कारण

चमगादड़ों पर 'खतरनाक रिसर्च' के लिए दिया गया पैसा

गबार्ड द्वारा जारी किए गए सबूत चौंकाने वाले हैं। दस्तावेजों से साफ हुआ है कि फाउची ने वुहान की लैब में चमगादड़ कोरोना वायरस पर 'गेन-ऑफ़-फ़ंक्शन' (Gain-of-Function) जैसी बेहद खतरनाक और प्रतिबंधित रिसर्च के लिए अमेरिकी फंड का इस्तेमाल होने दिया। आरोप है कि जब 2020 में यह वायरस लीक हुआ, तो फाउची ने 'डीप स्टेट' और इंटेलिजेंस कम्युनिटी के बड़े अधिकारियों के साथ मिलकर इस सच को दबा दिया और दुनिया के सामने झूठ परोसा कि यह वायरस प्राकृतिक रूप से फैला है।

डॉ. फाउची ने संसद में बोला 'सफेद झूठ'

तुलसी गबार्ड के ऑफिस द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि डॉ. फाउची ने 2024 में अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के सामने शपथ लेकर झूठ बोला था। उन्होंने इंटेलिजेंस अधिकारियों के साथ अपनी मिलीभगत को छिपाया। यही नहीं, जिन वैज्ञानिकों या व्हिसलब्लोअर्स ने इस सच्चाई को सामने लाने की कोशिश की, उन्हें डराया-धमकाया गया और उनके करियर तबाह कर दिए गए। 85 वर्षीय फाउची, जिन्होंने करीब 38 सालों तक अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी (NIAID) पर एकछत्र राज किया, उन पर आरोप है कि उन्होंने अपनी चमड़ी बचाने के लिए निर्वाचित राष्ट्रपति तक से देश की सुरक्षा से जुड़े इन महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर रखा। ALSO READ: Pakistan अमेरिका के लिए सबसे बड़ा परमाणु खतरा': तुलसी गबार्ड की इस चेतावनी ने पूरी दुनिया में मचाया हड़कंप!

यह खुलासा कब हुआ?

यह सनसनीखेज खुलासा गुरुवार, 18 जून 2026 को हुआ। यह तुलसी गबार्ड का बतौर नेशनल इंटेलिजेंस चीफ कार्यकाल का आखिरी दिन था। अपने पद से हटते-हटते उन्होंने इन फाइलों को डीक्लासिफाई (सार्वजनिक) करके पूरी दुनिया के सामने सच रख दिया।

अमेरिका पर इसका क्या असर हो सकता है?

तुलसी गबार्ड के इस खुलासे के बाद अमेरिका में एक बड़ा राजनीतिक और कानूनी संकट खड़ा होना तय है। अमेरिकी संसद के सामने शपथ लेकर झूठ बोलना एक गंभीर संघीय अपराध है। इन पुख्ता दस्तावेजों के आधार पर डॉ. फाउची के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चल सकता है और उन्हें जेल भी हो सकती है। चूंकि फाउची बाइडन के सबसे भरोसेमंद मेडिकल एडवाइजर थे और बाइडन सरकार ने उनकी हर नीति को आंख मूंदकर लागू किया था, इस खुलासे से विपक्षी खेमे को वर्तमान और पूर्व डेमोक्रेटिक नेतृत्व को घेरने का बहुत बड़ा हथियार मिल गया है।

 

अमेरिका में लंबे समय से आरोप लगते रहे हैं कि कुछ अन-इलेक्टेड (गैर-निर्वाचित) अधिकारी और खुफिया एजेंसियां मिलकर सरकार चलाती हैं, जिसे 'डीप स्टेट' कहा जाता है। इस खुलासे से अमेरिकी जनता का अपनी ही खुफिया एजेंसियों और हेल्थ सिस्टम पर से भरोसा पूरी तरह उठ सकता है। यह दस्तावेज आधिकारिक तौर पर साबित करता है कि वुहान लैब में कुछ तो ऐसा चल रहा था जिसे छिपाने के लिए अमेरिका और चीन के कुछ धड़े एक साथ काम कर रहे थे। इससे अमेरिकी संसद में चीन के खिलाफ और सख्त कार्रवाई की मांग उठेगी।

तुलसी पर खुलासे का क्या असर होगा?

तुलसी गबार्ड (जो पहले डेमोक्रेटिक पार्टी में थीं और बाद में रिपब्लिकन बनीं) का यह कदम उन्हें अमेरिकी कंजर्वेटिव और 'एंटी-डीप स्टेट' जनता के बीच एक 'नेशनल हीरो' बना देगा। इस खुलासे के बाद ट्रंप समर्थक खेमे और रिपब्लिकन पार्टी में उनकी लोकप्रियता चरम पर पहुंच जाएगी। भविष्य में उनके लिए अमेरिकी सीनेट (Senate) का चुनाव लड़ने या 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में एक मजबूत दावेदार के रूप में उभरने का रास्ता साफ हो सकता है।

 

गबार्ड ने सीधे तौर पर अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और स्वास्थ्य विभाग के गठजोड़ पर हमला किया है। वाशिंगटन का जो पुराना प्रशासनिक ढांचा (जिसे अक्सर 'डीप स्टेट' या एस्टेब्लिशमेंट कहा जाता है) है, वह उनका कड़ा विरोधी बन जाएगा। डॉ. फाउची और कोविड ओरिजिन से जुड़े मामलों में इतने बड़े राज खोलने के बाद तुलसी गबार्ड को निजी सुरक्षा (Personal Security) के मोर्चे पर बड़े खतरों का सामना करना पड़ सकता है। उन पर कानूनी शिकंजा कसने की कोशिशें भी की जा सकती हैं।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

तुलसी का बड़ा धमाका, US की पूर्व इंटेलिजेंस चीफ गबार्ड ने सार्वजनिक किए गुप्त दस्तावेज, Corona पर खुलासे से पूरी दुनिया में हड़कंप

Tulsi Gabbard Fauci Leak

Tulsi Gabbard Fauci Leak: अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस चीफ तुलसी गबार्ड (अब पूर्व) ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिन एक ऐसा 'परमाणु बम' फोड़ा है, जिसने न सिर्फ अमेरिकी राजनीति बल्कि पूरी दुनिया में भूचाल ला दिया है। गबार्ड ने उन अति-गोपनीय (Top Secret) दस्तावेजों को सार्वजनिक कर दिया है, जो सीधे तौर पर पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के मुख्य चिकित्सा सलाहकार डॉ. एंथनी फाउची को कोरोना महामारी के असली गुनहगार के रूप में कटघरे में खड़ा करते हैं।

 

इन लीक दस्तावेजों के अनुसार, डॉ. फाउची ने अमेरिकी टैक्सपेयर्स के लाखों डॉलर चीन की उसी वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (WIV) को ट्रांसफर किए थे, जिसे कोविड-19 वायरस का जन्मदाता माना जाता है। ALSO READ: तुलसी गबार्ड ने अमेरिकी खुफिया विभाग के चीफ पद से दिया इस्तीफा, बताया यह कारण

चमगादड़ों पर 'खतरनाक रिसर्च' के लिए दिया गया पैसा

गबार्ड द्वारा जारी किए गए सबूत चौंकाने वाले हैं। दस्तावेजों से साफ हुआ है कि फाउची ने वुहान की लैब में चमगादड़ कोरोना वायरस पर 'गेन-ऑफ़-फ़ंक्शन' (Gain-of-Function) जैसी बेहद खतरनाक और प्रतिबंधित रिसर्च के लिए अमेरिकी फंड का इस्तेमाल होने दिया। आरोप है कि जब 2020 में यह वायरस लीक हुआ, तो फाउची ने 'डीप स्टेट' और इंटेलिजेंस कम्युनिटी के बड़े अधिकारियों के साथ मिलकर इस सच को दबा दिया और दुनिया के सामने झूठ परोसा कि यह वायरस प्राकृतिक रूप से फैला है।

डॉ. फाउची ने संसद में बोला 'सफेद झूठ'

तुलसी गबार्ड के ऑफिस द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि डॉ. फाउची ने 2024 में अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के सामने शपथ लेकर झूठ बोला था। उन्होंने इंटेलिजेंस अधिकारियों के साथ अपनी मिलीभगत को छिपाया। यही नहीं, जिन वैज्ञानिकों या व्हिसलब्लोअर्स ने इस सच्चाई को सामने लाने की कोशिश की, उन्हें डराया-धमकाया गया और उनके करियर तबाह कर दिए गए। 85 वर्षीय फाउची, जिन्होंने करीब 38 सालों तक अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी (NIAID) पर एकछत्र राज किया, उन पर आरोप है कि उन्होंने अपनी चमड़ी बचाने के लिए निर्वाचित राष्ट्रपति तक से देश की सुरक्षा से जुड़े इन महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर रखा। ALSO READ: Pakistan अमेरिका के लिए सबसे बड़ा परमाणु खतरा': तुलसी गबार्ड की इस चेतावनी ने पूरी दुनिया में मचाया हड़कंप!

यह खुलासा कब हुआ?

यह सनसनीखेज खुलासा गुरुवार, 18 जून 2026 को हुआ। यह तुलसी गबार्ड का बतौर नेशनल इंटेलिजेंस चीफ कार्यकाल का आखिरी दिन था। अपने पद से हटते-हटते उन्होंने इन फाइलों को डीक्लासिफाई (सार्वजनिक) करके पूरी दुनिया के सामने सच रख दिया।

अमेरिका पर इसका क्या असर हो सकता है?

तुलसी गबार्ड के इस खुलासे के बाद अमेरिका में एक बड़ा राजनीतिक और कानूनी संकट खड़ा होना तय है। अमेरिकी संसद के सामने शपथ लेकर झूठ बोलना एक गंभीर संघीय अपराध है। इन पुख्ता दस्तावेजों के आधार पर डॉ. फाउची के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चल सकता है और उन्हें जेल भी हो सकती है। चूंकि फाउची बाइडन के सबसे भरोसेमंद मेडिकल एडवाइजर थे और बाइडन सरकार ने उनकी हर नीति को आंख मूंदकर लागू किया था, इस खुलासे से विपक्षी खेमे को वर्तमान और पूर्व डेमोक्रेटिक नेतृत्व को घेरने का बहुत बड़ा हथियार मिल गया है।

 

अमेरिका में लंबे समय से आरोप लगते रहे हैं कि कुछ अन-इलेक्टेड (गैर-निर्वाचित) अधिकारी और खुफिया एजेंसियां मिलकर सरकार चलाती हैं, जिसे 'डीप स्टेट' कहा जाता है। इस खुलासे से अमेरिकी जनता का अपनी ही खुफिया एजेंसियों और हेल्थ सिस्टम पर से भरोसा पूरी तरह उठ सकता है। यह दस्तावेज आधिकारिक तौर पर साबित करता है कि वुहान लैब में कुछ तो ऐसा चल रहा था जिसे छिपाने के लिए अमेरिका और चीन के कुछ धड़े एक साथ काम कर रहे थे। इससे अमेरिकी संसद में चीन के खिलाफ और सख्त कार्रवाई की मांग उठेगी।

तुलसी पर खुलासे का क्या असर होगा?

तुलसी गबार्ड (जो पहले डेमोक्रेटिक पार्टी में थीं और बाद में रिपब्लिकन बनीं) का यह कदम उन्हें अमेरिकी कंजर्वेटिव और 'एंटी-डीप स्टेट' जनता के बीच एक 'नेशनल हीरो' बना देगा। इस खुलासे के बाद ट्रंप समर्थक खेमे और रिपब्लिकन पार्टी में उनकी लोकप्रियता चरम पर पहुंच जाएगी। भविष्य में उनके लिए अमेरिकी सीनेट (Senate) का चुनाव लड़ने या 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में एक मजबूत दावेदार के रूप में उभरने का रास्ता साफ हो सकता है।

 

गबार्ड ने सीधे तौर पर अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और स्वास्थ्य विभाग के गठजोड़ पर हमला किया है। वाशिंगटन का जो पुराना प्रशासनिक ढांचा (जिसे अक्सर 'डीप स्टेट' या एस्टेब्लिशमेंट कहा जाता है) है, वह उनका कड़ा विरोधी बन जाएगा। डॉ. फाउची और कोविड ओरिजिन से जुड़े मामलों में इतने बड़े राज खोलने के बाद तुलसी गबार्ड को निजी सुरक्षा (Personal Security) के मोर्चे पर बड़े खतरों का सामना करना पड़ सकता है। उन पर कानूनी शिकंजा कसने की कोशिशें भी की जा सकती हैं।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

Monsoon Update 2026: IMD का बड़ा अपडेट, तेजी से आगे बढ़ रहा मानसून, कई राज्यों में हो सकती है भारी बारिश

Monsoon Update 2026: भारत मौसम विभाग (IMD) ने शुक्रवार को बताया कि मानसून के आगे बढ़ने के लिए मौसम अनुकूल है। 23 जून तक इसके महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ तक पहुंचने की संभावना है। बता दें कि मानसून इस साल 4 जून को केरल पहुंचा था, जो सामान्य तारीख 1 जून से तीन दिन देर से था। इसके बाद यह केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के अधिकतर हिस्सों, महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के कुछ हिस्सों के साथ-साथ पूरे पूर्वोत्तर भारत में फैल चुका है।

इन राज्यों में होगी बारिश

मौसम विभाग ने कहा कि जैसे-जैसे मॉनसून उपमहाद्वीप में आगे बढ़ रहा है और उत्तर-पश्चिमी भारत पर पश्चिमी विक्षोभ का असर हो रहा है, अगले कुछ दिनों में जम्मू, कश्मीर, लद्दाख और मुजफ्फराबाद, पश्चिमी राजस्थान, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, पूर्वोत्तर राज्यों, कोंकण और गोवा, गुजरात, कर्नाटक, केरल, तटीय आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में बारिश होने की उम्मीद है।

मानसून की चाल पर क्यों रखी जाती है नजर

गौरतलब है मानसून की चाल पर इसलिए बारीकी से नजर रखी जाती है क्योंकि भारत में सालाना बारिश का लगभग 70% हिस्सा दक्षिण-पश्चिम मानसून से मिलता है, जो खरीफ की बुआई के लिए बहुत जरूरी है। अच्छा मानसून आम तौर पर ग्रामीण मांग, खपत और व्यापक आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है।

हालांकि, 2026 में एल नीनो (El Niño) की स्थिति बनी हुई है। इसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है, जिससे भारत का मानसून कमजोर पड़ सकता है और सामान्य से कम बारिश का खतरा बढ़ जाता है। IMD ने मौसमी बारिश का अनुमान ‘लॉन्ग पीरियड एवरेज’ (LPA) का 90% लगाया है, जो सामान्य से कम बारिश का संकेत है और इससे खेती और जल संसाधनों पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता बढ़ गई है।

IMD के अनुसार, 19 से 25 जून के बीच बिहार और झारखंड में छिटपुट बारिश हो सकती है। साथ ही 19 से 22 जून के बीच हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। वहीं, 25 जून को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी बारिश हो सकती है।

मौसम विभाग ने बताया कि पिछले 24 घंटों में उत्तर प्रदेश, बिहार और विदर्भ के कुछ हिस्सों में लू (हीटवेव) जैसी स्थिति देखी गई, हालांकि शुक्रवार के बयान में लू की कोई भविष्यवाणी नहीं की गई थी।

1 से 18 जून के बारिश के आंकड़ों से पता चला कि भारत के 741 जिलों में से 258 जिलों में कम बारिश हुई, जबकि 223 जिलों में बहुत कम बारिश दर्ज की गई। एक दिन पहले, ये आंकड़े क्रमशः 239 और 230 जिलों के थे।

वहीं, IMD ने उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और गुजरात में भारी बारिश की भी जानकारी दी, जबकि तमिलनाडु और ओडिशा में कुछ जगहों पर 60-80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाओं के साथ आंधी-तूफान दर्ज किए गए।

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Operation CyHawk : 700 करोड़ की साइबर ठगी का भंडाफोड़! 916 साइबर अपराधी गिरफ्तार, 21 राज्यों में दिल्ली पुलिस की मेगा रेड

cyber frod delhi police

पूर्व प्रधानमंत्री इंदर कुमार गुजराल के बेटे और पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश गुजराल के साथ WhatsApp के जरिए ₹7.8 करोड़ की भारी साइबर ठगी का मामला सामने आया था। इस बीच देशभर में तेजी से फैल रहे साइबर अपराध के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने “ऑपरेशन साइहॉक 5.0”  (Operation CyHawk ) चलाया। इस ऑपरेशन में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए 916 साइबर ठगों और अपराधियों को गिरफ्तार किया है।

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एक्सपर्ट्‍स के मुताबिक साइबर अपराध भारत के सामने सबसे तेजी से उभरते खतरों में से एक बन चुका है। ठग अब फर्जी पहचान, सोशल इंजीनियरिंग और एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर आम लोगों से लेकर बड़ी कंपनियों तक को निशाना बना रहे हैं।

 

दिल्ली पुलिस का मानना है कि 'ऑपरेशन साइहॉक 5.0' जैसी कार्रवाई संगठित साइबर अपराध नेटवर्क को तोड़ने और करोड़ों रुपये की ठगी रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस मेगा कार्रवाई में करीब 700 करोड़ रुपए की ऑनलाइन ठगी का खुलासा हुआ है। ऑपरेशन में देशभर में फैले साइबर अपराध सिंडिकेट्स की जड़ों तक पहुंचकर बड़ा झटका दिया है।

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दिल्ली पुलिस के संयुक्त पुलिस आयुक्त (जॉइंट सीपी) रजनीश गुप्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस ऑपरेशन को लेकर पूरी जानकारी दी। 

पूर्व पीएम के बेटे के साथ ठगी का खुलासा

दिल्ली पुलिस ने पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश गुजराल से जुड़े हाई-प्रोफाइल साइबर फ्रॉड मामले का भी खुलासा किया है। जांच के मुताबिक, एक कंपनी के मालिक को एक ZIP फाइल भेजी गई थी, जिसे उन्होंने वित्त विभाग को फॉरवर्ड कर दिया। जैसे ही कर्मचारी ने फाइल खोली, कंपनी का सिस्टम हैकर्स के नियंत्रण में चला गया।

इसके बाद साइबर अपराधियों ने सिस्टम में मौजूद नरेश गुजराल के संपर्क नंबर को बदलकर अपना नंबर दर्ज कर दिया। फिर खुद को अधिकृत व्यक्ति बताकर कर्मचारियों को फोन किया और पैसे ट्रांसफर करने के निर्देश दिए। इस धोखाधड़ी में चार अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए 7.86 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए गए। हालांकि दिल्ली पुलिस ने अब तक लगभग 4 करोड़ रुपये फ्रीज कर लिए हैं और बाकी रकम की तलाश जारी है। 

715 पुलिस टीमों ने चलाया मेगा ऑपरेशन

उन्होंने बताया कि 16 और 17 जून को चलाए गए इस विशेष अभियान में 715 से अधिक पुलिस टीमें और 2,500 से ज्यादा पुलिसकर्मी शामिल हुए। सभी जिला पुलिस इकाइयों और 15 साइबर पुलिस स्टेशनों ने मिलकर समन्वित कार्रवाई की। पुलिस ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज 2,500 से अधिक शिकायतों का विश्लेषण किया, जिनमें कुल ठगी की रकम लगभग 700 करोड़ रुपये पाई गई।

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झारखंड के जामताड़ा से हरियाणा के नूंह तक फैला नेटवर्क

जांच में सामने आया कि गिरफ्तार किए गए कई आरोपी झारखंड के कुख्यात साइबर फ्रॉड हब जामताड़ा और हरियाणा के नूंह से जुड़े हुए हैं। ये नेटवर्क फिशिंग, फर्जी निवेश योजनाओं, ऑनलाइन स्कैम और डिजिटल ठगी जैसे अपराधों में सक्रिय थे। ऑपरेशन के दौरान दिल्ली पुलिस ने कई अवैध कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ किया, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी के लिए किया जा रहा था।

पुलिस ने बड़ी संख्या में लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण भी जब्त किए हैं। इन आरोपियों तक पहुंचने के लिए पुलिस टीमों ने 21 राज्यों में छापेमारी की, जिससे इस साइबर नेटवर्क की देशव्यापी पहुंच का अंदाजा लगाया जा सकता है।

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7,000 से ज्यादा लोगों से पूछताछ

कार्रवाई के दौरान लगभग 7,000 लोगों को हिरासत में लेकर सत्यापन और पूछताछ की गई। इसके अलावा करीब 600 लोगों को एहतियाती कार्रवाई के तहत पाबंद किया गया, जबकि 2,000 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि अभियान का मकसद सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, बल्कि साइबर अपराध को बढ़ावा देने वाले पूरे नेटवर्क को खत्म करना है। Edited by : Sudhir Sharma

रिलायंस Jio आसमान में बिछाएगा सैटेलाइट्स का जाल, भारत के जंगलों और पहाड़ों पर भी मिलेगी सुपरफास्ट कनेक्टिविटी

रिलायंस इंडस्ट्रीज की 49वीं AGM में बोलते हुए रिलायंस जियो के एमडी आकाश अंबानी ने कहा कि रिलायंस जियो एक सॉवरेन लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन (पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित किए जाने वाले उपग्रहों का जाल) डेवलप करने पर विचार कर रही है और साथ ही इस तरह की कैपेसिटी लीज पर लेने के लिए ग्लोबल सैटेलाइट ऑपरेटरों के साथ साझेदारी भी कर रही है।

यह कदम सैटेलाइट ब्रॉडबैंड के क्षेत्र में जियो की अब तक की सबसे बड़ी पहल है। इसका मकसद भारत के सबसे दूर-दराज और पिछड़े इलाकों तक कनेक्टिविटी पहुंचाना है। आकाश अंबानी ने कहा,”जियो ने जमीन पर भारत को जोड़ा है। अब हमें आसमान से भारत को जोड़ना होगा।” उन्होंने बताया कि दूर-दराज के गांव ओर द्वीपों पर रहने वाले लोग और सीमावर्ती चौकियां अभी भी जमीनी मोबाइल नेटवर्क की पहुंच से बाहर हैं।

उन्होंने आगे कहा कि इसके लिए Jio दोहरी रणनीति अपनाएगी। कंपनी तेजी से सेवाएं शुरू करने के लिए पहले से मौजूद ग्लोबल सैटेलाइट नेटवर्क से सैटेलाइट क्षमता लीज पर लेगी। साथ लॉन्ग टर्म रणनीति के तहत अपना खुद का सैटेलाइट नेटवर्क बनाएगी। इस तरीके से कंपनी भारत की कनेक्टिविटी जरूरतों को तेजी से पूरा कर पाएगी और साथ ही एक ऐसा भारतीय सैटेलाइट ब्रॉडबैंड प्लेटफ़ॉर्म तैयार कर पाएगी जिसे दुनिया भर में फैलाया जा सके।

Jio भारत में बना रही  ग्राउंड स्टेशन इंफ्रास्ट्रक्चर

इन योजनाओं को सपोर्ट करने के लिए,Jio भारत में ग्राउंड स्टेशन इंफ्रास्ट्रक्चर भी बना रही है। ये सुविधाएं पार्टनर सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन और Jio के भविष्य के सैटेलाइट,दोनों को सपोर्ट करेंगी। इससे स्पेस और जमीनी नेटवर्क को जोड़ने वाला एक इंटीग्रेटेड सैटेलाइट ब्रॉडबैंड इकोसिस्टम बन सकेगा।

रिलायंस की तरफ से यह ऐलान ऐसे समय में हुआ है जब भारत के सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेक्टर में कॉम्पिटिशन बढ़ रहा है और स्टारलिंक,यूटेलसैट वनवेब और अमेजन LEO जैसी कंपनियां इस मार्केट पर नजर बनाए हुए हैं। अंबानी ने कहा कि इस पहल से स्पेस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता मजबूत होगी और देश को ग्लोबल सैटेलाइट ब्रॉडबैंड मैप पर मजबूती से स्थापित करने में मदद मिलेगी।

 JioSat के जरिए दी जाएगी सैटेलाइट कम्युनिकेशन सुविधा

इसके अलावा,रिलायंस जियो की कंपनी’जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस’ने डिपार्टमेंट ऑफ़ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) से ‘ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट'(GMPCS) लाइसेंस और इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर (IN-SPACe) से जरूरी मंजूरी हासिल कर ली है। इससे भारत में कमर्शियल सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सर्विस शुरू करने में आने वाली दो बड़ी रेगुलेटरी रुकावटें दूर हो गई हैं।

इन मंजूरियों के मिलने से JioSat उन कुछ कंपनियों में शामिल हो गई है जो भारत के उभरते सैटकॉम (सैटेलाइट कम्युनिकेशन) मार्केट में उतरने के लिए तैयार हैं। कंपनी का प्लान है कि वह SES के साथ अपने जॉइंट वेंचर का इस्तेमाल करके दूर-दराज,ग्रामीण और कम सुविधा वाले इलाकों में हाई-स्पीड कनेक्टिविटी पहुंचाए। हालांकि,कमर्शियल सर्विस शुरू करने से पहले कंपनी को अभी भी स्पेक्ट्रम अलॉटमेंट और दूसरी ऑपरेशनल मंजूरियां लेनी होंगी।

 

 

RIL AGM 2026 : ग्लोबल चुनौतियों के बावजूद रिलायंस ने हासिल किया रिकॉर्ड तोड़ रेवेन्यू,EBITDA और नेट प्रॉफिट

 

Reliance AGM 2026 : भारत को AI के क्षेत्र में क्रिएटर और ग्लोबल लीडर बनाने पर होना चाहिए फोकस -मुकेश अंबानी

मानसून की बेरुखी से सुलग उठी इंदौर की रसोई, टमाटर, गिलकी, लौकी खा रहे भाव, दूसरे राज्‍यों से सप्‍लाय कम

indore sabji

आसमान में बादलों की लुकाछिपी और मानसून की लेटलतीफी ने इस बार इंदौर के घरों में भोजन का स्वाद बिगाड़ कर रख दिया है। बारिश में देरी का सीधा असर अब लोगों के किचन पर दिखने लगा है, जहां हरी सब्जियों के आसमान छूते दामों ने गृहिणियों का बजट पूरी तरह झुलसा दिया है।

चोइथराम और निरंजनपुर मंडी में बाहरी आवक कम होने के कारण जो टमाटर कुछ दिन पहले आम आदमी की थाली का हिस्सा था, वह अब 'लाल' होकर तेवर दिखा रहा है। वहीं गिलकी, लौकी और तुरई जैसी आम सब्जियां भी अब आम नहीं रहीं, बल्कि मंडियों से लेकर कॉलोनियों के ठेलों तक खूब भाव खा रही हैं।

क्या कहती हैं इंदौर की गृहिणियां?
सब्जियों के इस तीखे तेवर पर शहर की महिलाओं का दर्द साफ छलक रहा है: साकेत नगर में रहने वाली अल्पना जोशी ने बताया कि मानसून की देरी ने तो रसोई का पूरा बजट ही बिगाड़ दिया है। पहले लगता था कि हरी सब्जियां सेहत और जेब दोनों के लिए अच्छी हैं, लेकिन अब तो लौकी और गिलकी जैसी साधारण सब्जियां भी वीआईपी हो गई हैं। 20-30 किलो मिलने वाला टमाटर अब सीधा 60 के पार जा रहा है। समझ नहीं आता कि थाली में रंग कहां से लाएं।

महालक्ष्मी नगर की निवासी रीना शर्मा ने बताया कि मंडी में आवक इतनी कम है कि ताजी सब्जी ढूंढना मुश्किल हो रहा है, और जो मिल रही है, उसके दाम सुनकर ही पसीना आ जाता है। दालें पहले ही महंगी थीं, अब सब्जी भी हाथ से निकल रही है। अगर एक-दो हफ्ते और पानी नहीं गिरा, तो किचन संभालना भारी पड़ जाएगा। अब तो तड़के में टमाटर डालना भी एक लग्जरी जैसा लगने लगा है।

आसमान छू रहे सब्‍जियों के दाम : बता दें कि भीषण गर्मी और मानसून में हो रही देरी ने मध्यप्रदेश में आम जनजीवन को बुरी तरह से प्रभावित करना शुरू कर दिया है। इस मौसमी संकट की सबसे सीधी गाज रसोई के बजट पर गिरी है, जिससे हरी सब्जियों की आवक में भारी कमी आई है और उनके दाम आसमान छूने लगे हैं। मंडियों में गिलकी, लौकी, टमाटर, पालक और बैंगन जैसी रोजमर्रा की सब्जियों की आवक बहुत कम हो गई है, जिसके चलते बाजार में कीमतों का ग्राफ लगातार ऊपर चढ रहा है।

टमाटर महंगा, गिलकी-लोकी-पालक दिखा रहे आंख : चोइथराम मंडी के सब्जी व्यापारी अंकित शर्मा ने बताया कि सब्जियों की महंगाई का सबसे गहरा असर टमाटर पर देखने को मिल रहा है, जिसकी कीमतें अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं। रिटेल बाजारों में टमाटर की कीमतें 60 रुपए प्रति किलोग्राम के स्तर को छू चुकी हैं, जिससे मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों की थाली से टमाटर पूरी तरह गायब होने की कगार पर पहुंच गया है। टमाटर के साथ-साथ बाजार में गिलकी 60 रुपए, लौकी 40 से 50 रुपए, पालक 40 से 50 रुपए और बैंगन भी 60 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से बिक रहे हैं।

सब्‍जियां सूखने से आवक भी प्रभावित हुई : दरअसल, इस महंगाई के पीछे मुख्य कारण पड़ोसी राज्यों से होने वाली सप्लाई का ठप हो जाना भी है। ग्रीष्मकाल के इस विशेष सीजन में मध्यप्रदेश के मालवा निमाड़ सहित अन्य प्रमुख हिस्सों में राजस्थान से भारी मात्रा में सब्जियां आती हैं, लेकिन इस साल भीषण तपिश के कारण कई इलाकों में सब्जियों की फसलें अपने निर्धारित समय से एक सप्ताह पहले ही पूरी तरह सूखकर समाप्त हो गई हैं। इसका सीधा परिणाम यह हुआ कि राजस्थान से प्रदेश की बड़ी मंडियों में आने वाले मालवाहक वाहनों के पहिए पूरी तरह थम गए हैं।

महाराष्‍ट्र के भरोसे इंदौर की मंडियां : बता दें कि राजस्थान की तरफ से आवक नहीं होने से मध्यप्रदेश की थोक मंडियां अब पूरी तरह से महाराष्ट्र की फसलों के भरोसे टिक गई हैं। मौजूदा समय में इंदौर सहित कई अन्य बड़े शहरों में महाराष्ट्र के कन्नड़, चालीसगांव, संभाजी नगर और कलवन जैसे क्षेत्रों से सब्जियां मंगवाई जा रही हैं। साथ ही महाराष्ट्र में पड़ रही रिकॉर्ड तोड़ गर्मी ने सब्जियों के पौधों को झुलसा कर रख दिया है, जिसके कारण वहां भी कुल उत्पादन अपने न्यूनतम स्तर पर आ चुका है।

इंदौर के सब्जी व्यापारियों की जुबानी मंडी का हाल
पानी की कमी से फसलें खेतों में ही झुलस गई : आढ़तिया व थोक व्यापारी, चोइथराम मंडी रमेश यादव कहते हैं कि इस बार मानसून की लेटलतीफी ने पूरा गणित बिगाड़ दिया है। लोकल बेल्ट (इंदौर के आसपास के ग्रामीण इलाकों) से जो गिलकी, लौकी और तुरई की आवक जून के इस हफ्ते तक भरपूर हो जाती थी, वो इस बार आधी भी नहीं है। गर्मी और पानी की कमी से फसलें खेतों में ही झुलस गई हैं। आवक कम होने से थोक में ही दाम दोगुने हो चुके हैं, जिससे चिल्ला (रिटेल) बाजार तक पहुंचते-पहुंचते ये सब्जियां आम जनता की पहुंच से बाहर हो रही हैं।

भाड़ा बढ़ने और माल की किल्लत : सब्जी सप्लायर व व्यापारी, निरंजनपुर मंडी सतीश पाटीदार ने बताया कि इंदौर में टमाटर का सबसे बड़ा सहारा दूसरे राज्यों (जैसे महाराष्ट्र और कर्नाटक) की सप्लाई होती है। लेकिन वहां भी मौसम की मार के कारण इस बार गाड़ियां बहुत कम आ रही हैं। जो टमाटर की गाड़ियां पहले रोज इंदौर पहुंचती थीं, उनकी संख्या अब आधी रह गई है। भाड़ा बढ़ने और माल की किल्लत के कारण टमाटर मंडियों में ही 'लाल' हो रहा है। जब तक अच्छी बारिश नहीं होती और नई खेप नहीं आती, तब तक दामों में नरमी की उम्मीद कम ही है।
Edited By: Naveen R Rangiyal

Salman Khan: ‘बाबा सिद्दीकी की मौत के बाद सलमान खान मानसिक और शारीरिक रूप से टूट गए थे’, सिकंदर को-स्टार ने कहा- वह बहुत दर्द में थे

Salman Khan: बॉलीवुड एक्टर सलमान खान ने ‘सिकंदर’ की शूटिंग के दौरान अपनी ज़िंदगी के सबसे मुश्किल दौर का सामना किया है। अक्टूबर 2024 में, अपने करीबी दोस्त और नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या से वे बुरी तरह टूट गए थे। इस घटना ने फिल्म इंडस्ट्री में हलचल मचा दी थी और एक्टर की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गईं थी। साथ ही, सलमान पसली की दर्दनाक चोट से भी जूझ रहे थे और इसके बावजूद फिल्म की शूटिंग जारी रखे हुए थे।

उस समय को याद करते हुए, ‘सिकंदर’ में उनके साथ काम करने वाले विशाल वशिष्ठ ने ‘फ्री प्रेस जर्नल’ को दिए एक हालिया इंटरव्यू में बताया कि इमोशनल उथल-पुथल और शारीरिक तकलीफ के बावजूद, सलमान काम के प्रति पूरी तरह समर्पित रहे और अपनी पर्सनल लाइफ में मुश्किल दौर से गुजरने के बावजूद शूटिंग जारी रखी।

विशाल ने याद किया कि कैसे सलमान ने बेहद मुश्किल हालात में ‘सिकंदर’ की शूटिंग की। उन्होंने कहा, “वह मानसिक और भावनात्मक रूप से पूरी तरह थक चुके थे, और शारीरिक रूप से भी उन्हें काफी तकलीफ हो रही थी। हमने खुद यह सब देखा। यह कोई मनगढ़ंत कहानी नहीं थी, बल्कि हकीकत थी। वह धीरे-धीरे चलते थे और किसी तरह सीन पूरा करते थे। जैसे ही डायरेक्टर ‘कट’ बोलते, वह वापस जाकर फिजियोथेरेपी करवाते थे। उन्हें चलते-फिरते रहना जरूरी था क्योंकि उन्हें वे सभी एक्शन सीक्वेंस करने थे। उन्हें दर्द हो रहा था, फिर भी वह काम करते रहे। बाहर जान का खतरा बना हुआ था, लेकिन फिर भी वह काम पर आते रहे। यह बहुत मुश्किल था।”

एक्टर ने बताया कि अपनी पर्सनल ज़िंदगी में चल रही तमाम मुश्किलों के बावजूद सलमान रोज़ सेट पर आते रहे। उन्होंने कहा कि सलमान की इस बात का उन पर गहरा असर पड़ा। विशाल ने यह भी याद किया कि कैसे सपोर्टिंग एक्टर्स और क्रू अक्सर सेट या अपनी वैनिटी वैन में घंटों इंतज़ार करते थे, लेकिन हर कोई उस स्थिति को समझता था जिससे वह गुज़र रहे थे।

विशाल ने आगे बताया कि फ़िल्म के एक्शन सीन बाद के लिए रखे गए थे क्योंकि सलमान को ठीक होने के लिए समय चाहिए था। उन्होंने कहा, “आख़िरी दिन तक उनकी सेहत में थोड़ा सुधार हुआ था। उससे पहले, घर वाले सीन के दौरान उन्हें काफ़ी तकलीफ़ हो रही थी। तकलीफ़ का मतलब है कि कुर्सी से उठना और बैठना भी उनके लिए बहुत मुश्किल था। बैकग्राउंड में जो कुछ भी हो रहा था, उसे देखते हुए यह आसान नहीं रहा होगा। हर समय अपने आस-पास इतने सारे सिक्योरिटी गार्ड्स के बीच रहना ही दम घोंटने वाला होता है। यह बहुत मुश्किल स्थिति थी।”

अक्टूबर 2024 में, 66 साल के बाबा सिद्दीकी की मुंबई के बांद्रा ईस्ट में उनके बेटे जीशान सिद्दीकी के ऑफ़िस के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई। सीने में दो गोलियां लगने के बाद उन्हें लीलावती अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। बताया जाता है कि तीनों हमलावरों का संबंध लॉरेंस बिश्नोई गैंग से था। यह गैंग लंबे समय से सलमान खान को निशाना बनाता रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूछताछ के दौरान एक आरोपी ने बताया कि सलमान खान भी गैंग की ‘हिट लिस्ट’ में थे, लेकिन कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के कारण उन तक पहुंचना मुश्किल था। बाबा सिद्दीकी की मौत के बाद, सलमान को जान से मारने की नई धमकियां मिलीं और इसके बाद उन्हें Y+ सुरक्षा कवर दिया गया। इसी दौरान, एक्टर ने यह भी बताया कि वह पसली की चोट से जूझ रहे थे, जिसकी वजह से ‘सिकंदर’ की शूटिंग में देरी हुई।

‘हिम्मत है तो रिंग में आओ’, हरभजन सिंह को इस दिग्गज क्रिकेटर ने दी खुली चुनौती…इस बात पर भड़के

श्रीसंत और हरभजन का थप्पड़ कांड, भारतीय क्रिकेट के सबसे विवादित घटनाओं में से एक है। ने एक बार फिर हरभजन सिंह के साथ अपने पुराने विवाद को लेकर बयान दिया है। आईपीएल की चर्चित ‘स्लैपगेट’ घटना के करीब 18 साल बाद उन्होंने, हरभजन सिंह को खुली चुनौती देते हुए कहा कि दोनों अपने मतभेद बॉक्सिंग रिंग में मुकाबला करके सुलझा सकते हैं। श्रीसंत ने हरभजन सिंह को माफ कर दिया था, लेकिन इस घटना को कभी नहीं भूलेंगे।

18 साल बाद फिर सामने आया ये विवाद

हाल ही में एक पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान श्रीसंत ने आरोप लगाया कि हरभजन सिंह ने इस पुराने विवाद से फायदा उठाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि अगर हरभजन चाहें तो दोनों आमने-सामने मुकाबला कर सकते हैं। गौरतलब है कि साल 2008 में आईपीएल के दौरान हुई ‘स्लैपगेट’ घटना के बाद दोनों खिलाड़ियों के रिश्तों में तनाव आ गया था। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में ऐसा माना जा रहा था कि दोनों इस विवाद को पीछे छोड़ चुके हैं और उनके संबंध सामान्य हो गए हैं। यह नया विवाद तब शुरू हुआ जब श्रीसंत ने हरभजन सिंह के एक हालिया विज्ञापन पर आपत्ति जताई। उनका मानना है कि उस विज्ञापन में पुराने ‘स्लैपगेट’ विवाद की ओर इशारा किया गया था। श्रीसंत ने दोनों खिलाड़ियों की एक पुरानी प्रचार तस्वीर का भी जिक्र किया, जिसमें वे बॉक्सिंग की पोशाक में आमने-सामने खड़े नजर आ रहे थे। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हरभजन सिंह वास्तव में रिंग में मुकाबला करने के लिए तैयार हैं।

रिंग में उतरने की कही

लल्लनटॉप को दिए एक इंटरव्यू में एस. श्रीसंत ने हरभजन सिंह को खुली चुनौती देते हुए कहा, “क्या आपमें मेरे साथ रिंग में उतरने की हिम्मत है? क्या आप आधिकारिक तौर पर मुकाबले के लिए तैयार हैं? मैं सीधा उनसे पूछ रहा हूं कि क्या वे मेरे साथ बॉक्सिंग रिंग में आ सकते हैं। यह कोई अभिनय नहीं है, बल्कि असली मुकाबला होगा।” श्रीसंत ने कहा कि वह इस चुनौती को गंभीरता से दे रहे हैं और अब फैसला हरभजन सिंह को करना है। उन्होंने यह भी कहा कि तस्वीरों और विज्ञापनों में दिखने के बजाय असली मुकाबला रिंग में होना चाहिए।

श्रीसंत ने दी बड़ी चुनौती

पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज ने हाल के दिनों में कॉम्बैट स्पोर्ट्स से अपने जुड़ाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगर किसी बात को लेकर मतभेद हैं, तो उन्हें विज्ञापनों या सार्वजनिक बयानों के जरिए उछालने के बजाय सीधे मुकाबले के जरिए सुलझाया जा सकता है। श्रीसंत ने साफ कहा कि यह उनका खुला चैलेंज है और अब देखना होगा कि हरभजन सिंह इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। एस. श्रीसंत ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा कि वह इस समय ‘बेयर नकल फाइट लीग’ से जुड़े हुए हैं और उन्होंने हरभजन सिंह को सीधे मुकाबले के लिए चुनौती दी है। उन्होंने कहा, “भज्जी, मैं आपको खुला चैलेंज दे रहा हूं। अगर आपको उस थप्पड़ वाले मामले और मुझसे इतनी ही परेशानी है, तो आइए रिंग में मुकाबला करते हैं। विज्ञापनों और बयानबाजी की जगह आमने-सामने मुकाबला होना चाहिए।” श्रीसंत ने कहा कि वह इस चुनौती को पूरी गंभीरता से दे रहे हैं और हरभजन सिंह के जवाब का इंतजार कर रहे हैं।

श्रीसंत के इन बयानों के बाद एक बार फिर भारतीय क्रिकेट की सबसे चर्चित विवादित घटनाओं में से एक चर्चा में आ गई है। साल 2008 में आईपीएल के पहले सीजन के दौरान मुंबई इंडियंस और किंग्स इलेवन पंजाब के बीच मैच के बाद हरभजन सिंह और श्रीसंत के बीच विवाद हुआ था। उस दौरान हरभजन सिंह पर श्रीसंत को थप्पड़ मारने का आरोप लगा था। घटना के बाद मैदान पर भावुक हुए श्रीसंत की तस्वीरें काफी चर्चा में रही थीं। इस मामले को लेकर हरभजन सिंह की व्यापक आलोचना हुई थी और उनके खिलाफ BCCI की ओर से एक्शन भी लिया गया था। यह विवाद आईपीएल इतिहास की सबसे चर्चित घटनाओं में गिना जाता है।

सीएम योगी ने 4901.65 करोड़ के कार्य प्रस्तावों को दी मंजूरी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को महज 13 दिनों बाद फिर गोंडा का दौरा किया। उन्होंने अपने दो घंटे के कार्यक्रम के दौरान 33 विधानसभा क्षेत्रों से जनप्रतिनिधियों द्वारा भेजे गए प्रस्तावों का प्रेजेंटेशन भी देखा। इसमें प्रमुख रूप से मां पाटेश्वरी शक्तिपीठ धाम संग अन्य धार्मिक स्थलों तक कनेक्टिविटी को बेहतर करने के निर्देश दिए। 

सीएम योगी ने देवीपाटन मंडल के मां पाटेश्वरी देवी शक्तिपीठ, स्वामीनाराण मंदिर से बस्ती के मखौड़ा धाम व अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोड़ने वाले प्रमुख 13 मार्गों के विकास को मंजूरी दी। कुल 4901.65 करोड़ रुपए की एक हजार से अधिक विकास परियोजनाओं के प्रस्तावों को स्वीकृति दी। उन्होंने महाराजा सुहेलदेव सभागार में लोक निर्माण विभाग की परियोजनाओं की समीक्षा की। साथ ही नई कार्य योजनाओं पर जनप्रतिनिधियों के साथ मंथन किया।

इस दौरान देवीपाटन मंडल के गोंडा, बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती की सड़क व संपर्क मार्ग परियोजनाओं की प्रगति परखी। इसके साथ बस्ती मंडल के बस्ती, सिद्धार्थनगर और संतकबीरनगर की विकास परियोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों को मुख्य मार्गों से जोड़ने, जर्जर सड़कों के पुनर्निर्माण, संपर्क मार्गों के सुदृढ़ीकरण और पुल, सेतु से जुड़े निर्माण कार्यों पर मंथन किया। मुख्यमंत्री को देवीपाटन मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल व लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने सड़क, पुल, सेतु और अन्य आधारभूत विकास परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी दी।

मुख्यमंत्री ने लंबित कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को विभिन्न विकास परियोजनाओं की अद्यतन प्रगति रिपोर्ट दी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने गड्ढामुक्त अभियान की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 810 कामों को मंजूरी दी। इसमें करीब 1472.83 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इससे ग्रामीण अंचलों में 1602 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाकर बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाएगी। करीब पचास से अधिक सड़कों का चौड़ीकरण व दुरुस्तीकरण किया जाएगा।

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सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र की करीब 50-50 करोड़ की विकास परियोजनाओं का प्रस्तुतीकरण देखा। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से विकास परियोजनाओं की स्थिति पर चर्चा की। उन्होंने नगरीय व ग्रामीण क्षेत्रों की बेहतर कनेक्टिविटी और सुगम यातायात के लिए सड़क मार्गों के दुरुस्तीकरण पर केंद्रित प्रस्तावों को प्राथमिकता के साथ देखा। इसमें आधारभूत संरचना के कार्य भी शामिल रहे। मुख्यमंत्री ने पिछड़े क्षेत्रों व आकांक्षात्मक ब्लॉक क्षेत्रों में जारी विकास परियोजनाओं की भी समीक्षा की।

उन्होंने ने दो राज्य राजमार्गों, प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों की बेहतर कनेक्टिविटी, 81 लघु सेतुओं, और सात बड़े पुलों को बनाने की मंजूरी दी। शहरी क्षेत्रों में बेहतर यातायात व्यवस्था के लिए बाईपास मार्गों, ओवरब्रिज आदि के कामों को मंजूरी दी। देवीपाटन मंडल में सड़क सुरक्षा के कार्यों को कराने का कभी निर्देश दिया। इसके साथ जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में 12 हेलीपैड के निर्माण कार्यों को भी मंजूरी दी।

उन्होंने हरदौपट्टी संपर्क मार्ग का विशेष मरम्मत कार्य, कटरा बाजार के पंडितपुरवा नहवा परसौरा वाया खजुहा संपर्क मार्ग का विशेष मरम्मत कार्य, सुभानपुर बेलवानोहर मार्ग के चौड़ीकरण व सुदृढ़ीकरण कार्य, हट्टीपुरवा से कुढ़ियांव संपर्क मार्ग का विशेष मरम्मत कार्य, चांदपुरडीहा संपर्क मार्ग निर्माण कार्य आदि की अद्यतन स्थिति पर भी जानकारी ली।

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