इंदौर के साथ 5 जिले, 38 तहसील और 2781 गांव से होगा विकसित मध्य प्रदेश का सूर्योदय

mohan yadav on UIMR

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजन के साथ UIMR मध्यप्रदेश की प्रगति का नया प्रवेश द्वार बनने जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत विकास की अवधारणा को इंदौर जैसे बड़े शहरों से जोड़कर आसपास के अंचल के छोटे कस्बों और तहसीलों तक पहुँचाने का संकल्प लिया गया है। यही कारण है कि इस रीजन का दायरा 6 बार बढ़ाकर अब 16,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक कर दिया गया है। अब इंदौर के साथ उज्जैन, देवास, धार, रतलाम और शाजापुर जैसे 6 जिलों की 38 तहसीलें और 2,781 गांव तेजी से डेवलप होंगे। जहां सवा करोड लोग निवास करते हैं। यह रणनीतिक ढांचा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत @2047' के सपने को साकार करने में मध्यप्रदेश की अग्रणी भागीदारी सुनिश्चित करेगा।

 

मध्यप्रदेश में 5 लाख नौकरियों के अवसर और नया औद्योगिक लैंड बैंक

मालवा क्षेत्र को एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने के लिए यूआईएमआर के पास 13,500 हेक्टेयर से अधिक का विशाल लैंड बैंक और 14 नए प्रस्तावित औद्योगिक पार्क हैं। इस औद्योगिक क्रांति के माध्यम से स्थानीय युवाओं के लिए 5 लाख नई नौकरियों के अवसर सृजित होने का अनुमान है। पीथमपुर को इलेक्ट्रिक व्हीकल और उन्नत इंजीनियरिंग के नए युग के लिए तैयार किया जा रहा है, जबकि उज्जैन की विक्रम उद्योगपुरी को एक 'एंकर सिटी' के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके अलावा, रतलाम को एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स और ट्रेड नोड बनाकर निर्यात हब के रूप में नई पहचान दी जाएगी।

 

ग्रीनफील्ड कॉरिडोर: मतलब 16000 वर्ग किलोमीटर की कनेक्टिविटी मात्र 1 घंटे में

इसकी सफलता का सबसे बड़ा आधार इसका अभूतपूर्व कनेक्टिविटी विजन है, जिसका लक्ष्य पूरे 16,000 वर्ग किमी क्षेत्र में '60 मिनट की पहुँच' सुनिश्चित करना है। इसके लिए इंदौर और उज्जैन के बीच एक 'ग्रीनफील्ड कॉरिडोर' और इंदौर-भोपाल एक्सप्रेसवे जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू हो चुका है। उज्जैन इंदौर मेट्रो विस्तार योजना के तहत पब्लिक ट्रांसपोर्ट को उन्नत बनाया जाएगा, ताकि नागरिक महज एक घंटे के भीतर मुख्य आर्थिक केंद्रों तक पहुँच सकें। यह रीजन सीधे दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (डीएमआईसी) और एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा, जिससे यहाँ के कारखानों में बना सामान कुछ ही घंटों में प्रमुख बंदरगाहों तक पहुँच सकेगा।

 

मध्यप्रदेश मेट्रोपॉलिटन रीजन लैंड पूलिंग मॉडल और किसानों की भागीदारी

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के पहले चरण की नींव रखकर विकास के एक नए युग की शुरुआत की है। यह देश का ऐसा पहला लैंड पूलिंग मॉडल है, जहाँ 17 गाँवों के किसानों को उनकी 60% विकसित जमीन वापस दी जाएगी, जिससे किसान केवल जमीन देने वाले नहीं बल्कि सीधे तौर पर विकास का लाभ उठाने वाले बनेंगे। इस 'मल्टी-नोडल नेटवर्क' रणनीति के तहत देवास, धार, मक्सी और शाजापुर जैसे शहरों को भी ग्रोथ नोड्स के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि इंदौर जैसे बड़े शहरों पर आबादी और संसाधनों का दबाव कम हो सके।

 

मेट्रो विस्तार योजना और ब्लू-ग्रीन डेवलपमेंट पॉलिसी

विकास की इस दौड़ में पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए 'ब्लू-ग्रीन डेवलपमेंट' पॉलिसी लागू की गई है। यहां ब्लू का मतलब है जल क्षेत्र और ग्रीन का मतलब है वन क्षेत्र। इसके तहत नर्मदा नदी सहित अन्य जल निकायों (ब्लू) और वन क्षेत्रों (ग्रीन) के पास निर्माण पर कड़ा प्रतिबंध रहेगा और हरियाली बढ़ाने के लिए व्यापक प्लांटेशन को अनिवार्य बनाया गया है। औद्योगिक क्षेत्रों में 'जीरो लिक्विड डिस्चार्ज' प्रणाली अपनाई जाएगी ताकि नदियों में प्रदूषित पानी न जाए। भविष्य के ये औद्योगिक क्लस्टर 'कार्बन न्यूट्रल' होंगे और अपनी बिजली की जरूरतों के लिए सौर और पवन ऊर्जा जैसे अक्षय ऊर्जा स्रोतों से करेंगे।

 

मालवा क्षेत्र में आध्यात्मिक पर्यटन और 10 फीसदी जीडीपी का लक्ष्य

'विकास भी, विरासत भी' के अद्भुत संगम पर आधारित है। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2047 तक पर्यटन क्षेत्र का राज्य की जीडीपी में योगदान 10% तक पहुँचे। अकेले उज्जैन में 2023 में 5 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पहुँचे, जिसे देखते हुए उज्जैन, ओंकारेश्वर, मांडू और महेश्वर को एक लक्जरी टूरिज्म सर्किट के रूप में जोड़ा जा रहा है। इसमें रूरल टूरिज्म, नर्मदा रिवर फ्रंट डेवलपमेंट और हेरिटेज होटल्स का एक बड़ा नेटवर्क शामिल होगा, जो स्थानीय स्तर पर आय के असीमित स्रोत खोलेगा।

 

डेटा ड्रिवन प्लानिंग और मध्यप्रदेश महानगरीय क्षेत्र विकास अधिनियम 2025

शहरी नियोजन की बाधाओं को खत्म करने के लिए सरकार 'मध्यप्रदेश महानगरीय क्षेत्र नियोजन एवं विकास अधिनियम, 2025' लेकर आई है। अब शहरों का विस्तार पारंपरिक सोच के बजाय वैज्ञानिक डेटा और जियोस्पेशियल टूल्स के आधार पर होगा। एक सशक्त 'मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी' का गठन किया जाएगा, जिसके पास पूरे क्षेत्र के लिए योजना बनाने और उसे लागू करने का सर्वोच्च वैधानिक अधिकार होगा। यह अथॉरिटी अगले 20 से 50 वर्षों की संभावित आबादी और ट्रैफिक की जरूरत का आकलन कर बुनियादी ढांचा पहले ही तैयार कर लेगी (प्रो-एक्टिव प्लानिंग), जिससे भविष्य की पीढ़ियों को अव्यवस्था का सामना न करना पड़े।

अयोध्या के श्री रामलला मंदिर पर लोभ का साया

 A scene related to the Ayodhya Ram Mandir in the image

अयोध्या में जब राम मंदिर के दानपात्र से चोरी और वित्तीय हेराफेरी का मामला सामने आया, तो सहज ही मन में विचार कौंधा कि त्रेतायुग में प्रभु श्री राम ने रावण संहार और लंका विजय के लिए मानव सेना से ज्यादा, वानर सेना पर भरोसा क्यों जताया होगा। संभव था कि यदि प्रभु राम मनुष्यों को ले जाते, तो वे सोने की लंका और वैभव देखकर, लोभवश निष्ठा को दरकिनार करके रावण के पक्ष में हो जाते। वानर सेना निश्छल, लोभहीन और राम-भक्त थी, तभी राम जी की जीत संभव हुई।ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर दान घोटाला, आस्था के केंद्र पर 'चंदा चोरी' का साया, SIT जांच से मचा हड़कंप

 

आज कलयुग में जब 500 वर्षों के संघर्षों के बाद बने श्री रामलला के मंदिर से भक्तों की समर्पण राशि में हेराफेरी की खबरें आती हैं, तो मानव जाति का वही आदिम लोभ और छलावा पुनः उजागर हो जाता है। आस्था के परम केन्द्र से जून 2026 के प्रारंभ में इस घटना की खबर से करोड़ों रामभक्तों को कष्ट पहुंचा है। इसने हमारी व्यवस्थागत शुचिता पर बड़ा प्रश्न-चिन्ह खड़ा किया है। इस संवेदनशील मामले में राम मंदिर ट्रस्ट के आंतरिक और सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच में नियमित ऑडिट के दौरान मंदिर को मिले दान के रिकॉर्ड और बैंक लेजर बैलेंस में गंभीर विसंगतियां पाई गईं हैं। 

 

जब शक की सूई घूमी और सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, तो कुछ कर्मचारियों की संदिग्ध गतिविधियां कैमरे में कैद मिलीं। फिर ट्रस्ट ने पुलिस की मौजूदगी में आंतरिक जांच और संदिग्ध कर्मियों से पूछताछ की तो इसने बड़े घोटाले का रूप ले लिया क्योंकि कर्मचारियों के पास से लाखों रुपये नकदी बरामद हुए। इस खुलासे के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हड़कंप मच गया।

 

जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, तो इस वित्तीय जालसाजी का मुख्य सूत्रधार अनुकल्प मिश्रा और दान राशि गिनने वाला लवकुश मिश्रा माना जा रहा है। इन दोनों के पास से जांच टीम ने लाखों की नकदी बरामद की है। इसके अलावा, ट्रस्ट के रसूखदार पदाधिकारी का पूर्व ड्राइवर और सेवादार रहा रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू भी गंभीर आरोपों के घेरे में है। टिन्नू पर कम समय में करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्ति बनाने और मंदिर प्रबंधन में अवैध हस्तक्षेप का आरोप है। हालांकि उसने इन आरोपों को खारिज किया है।

 

यूं तो मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने त्वरित कार्रवाई की और कमिश्नर विजय विश्वास पंत एवं आईजी किरण एस. की अध्यक्षता में तीन-सदस्यीय उच्च स्तरीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। वर्तमान में एसआईटी और एसओजी की टीमें हिरासत में लिए गए कर्मचारियों, सेवादारों और संबंधित बैंक कर्मियों से सघन पूछताछ कर रही हैं।ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर के उप-मंदिरों में दर्शन शुरू, ऑनलाइन पास की मची होड़

 

एसआईटी ने चंपत राय और गोपाल राव जैसे वरिष्ठ पदाधिकारियों से भी मंदिर की व्यवस्था को लेकर पूछताछ की है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने मीडिया में तो कोई औपचारिक बयान नहीं दिया, लेकिन अनौपचारिक रूप से राम जी के एक-एक पैसे के लिए ट्रस्ट की पूरी जवाबदेही स्वीकार की है। उन्होंने एसआईटी की पूछताछ में भी पूरा सहयोग दिया है। 

 

इस विवाद के बाद विपक्षी दलों और कुछ स्थानीय संतों ने उनके प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग भी की थी। वहीं निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य जैसे वरिष्ठ नेताओं ने चंपत राय की अटूट निष्ठा और ईमानदारी का खुलकर बचाव किया है।

 

इस विवाद ने अयोध्या की सियासत को पूरी तरह गरमा दिया है। यह विवाद कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है कि पिछले 11 महीनों में मंदिर की सुरक्षा और प्रबंधन पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद इतनी बड़ी मानवीय और तकनीकी चूक कैसे हो गई?

 

इस पूरे घटनाक्रम पर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और भाजपा का रुख पूरी तरह स्पष्ट, पारदर्शी और कड़ा है। सरकार की नीयत और कार्रवाई की दिशा में रत्ती भर भी ढील या पोल नहीं है, बल्कि यह कृत्य चंद लोभी और अनैतिक मानसिकता वाले लोगों की निजी करतूत है, जिसे किसी भी स्तर पर संरक्षण नहीं मिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रही सरकार में सभी के लिए एक ही दंड संहिता है और गलत पाए जाने पर न्याय होना पूरी तरह सुनिश्चित है। 

 

ऐसे में विपक्षी दलों द्वारा इस संवेदनशील मामले को राजनीतिक रूप से भुनाने की कोशिशें बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं। जो विपक्ष कभी आमंत्रण मिलने पर भी प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर में दर्शन करने तक नहीं गया, जिसने राम जी के दानपात्र में एक रुपया दान नहीं किया, आज उसका इस मुद्दे पर सियासत करना केवल खोखला अवसरवाद है, इसलिए प्रबुद्ध जनता सब समझ रही है।

 

इस संकट से उबरने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अब कुछ कड़े और दूरगामी कदम उठाना अत्यंत आवश्यक है। निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने इस संदर्भ में एक बेहद महत्वपूर्ण सुझाव दिया है कि मंदिर व्यवस्था को अधिक सुदृढ़, पेशेवर और पारदर्शी बनाने के लिए एक स्वतंत्र सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) की नियुक्ति की जानी चाहिए। 

 

साथ ही, अब मंदिर की पूरी वित्तीय प्रणाली को कैशलेस और डिजिटल मॉडल पर ले जाना होगा। दान काउंटर पर केवल डिजिटल रसीदें और सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर की व्यवस्था हो, ताकि मानवीय हस्तक्षेप न्यूनतम हो सके। नोटों की गिनती की प्रक्रिया को पूरी तरह से बायोमेट्रिक सुरक्षा, हाई-डेफिनिशन कैमरों की लाइव निगरानी और तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) के ऑडिट के अधीन किया जाना चाहिए। इसके अलावा, कर्मचारियों की नियुक्ति से पहले उनका कड़ा पुलिस वेरिफिकेशन और बैकग्राउंड चेक अनिवार्य होना चाहिए।

 

हम राम भक्तों के लिए रामलला का मंदिर केवल पाषाणों पर सुंदर नक्काशीदार ढांचा नहीं है, बल्कि यह सभी सनातनियों की अटूट आस्था का जीवंत प्रतीक है। एक गरीब से गरीब भक्त ने भी अपनी गाढ़ी कमाई का अंश प्रभु के चरणों में इस विश्वास के साथ अर्पित किया था कि उसका उपयोग धर्म और समाज के उत्थान में होगा। वहां से एक भी पैसे की चोरी सीधे तौर पर जनमानस की पवित्र आस्था पर आघात है। 

 

राजनीतिक नफा-नुकसान से परे, एसआईटी की जांच के माध्यम से इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी जल्द होना अनिवार्य है ताकि दोषियों को ऐसी सख्त और नजीर बनने वाली सजा मिले, जिससे व्यवस्था की शुचिता बनी रहे। योगी सरकार के कड़े रुख से यह पूरी तरह साफ है कि न्याय हर हाल में होकर रहेगा और प्रभु के दरबार की पवित्रता तथा भक्तों का अटूट विश्वास सदैव अक्षुण्ण रहेगा।ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर दान चोरी कांड, अब सर्विलांस स्टाफ रडार पर! RMO की भी खुलेगी कुंडली

 

(इस लेख में व्यक्त विचार/विश्लेषण लेखक के निजी हैं। 'वेबदुनिया' इसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेती है।)

अयोध्या के श्री रामलला मंदिर पर लोभ का साया

Image showing a scene related to the theft of donations from the Ayodhya Ram Mandir

अयोध्या में जब राम मंदिर के दानपात्र से चोरी और वित्तीय हेराफेरी का मामला सामने आया, तो सहज ही मन में विचार कौंधा कि त्रेतायुग में प्रभु श्री राम ने रावण संहार और लंका विजय के लिए मानव सेना से ज्यादा, वानर सेना पर भरोसा क्यों जताया होगा। संभव था कि यदि प्रभु राम मनुष्यों को ले जाते, तो वे सोने की लंका और वैभव देखकर, लोभवश निष्ठा को दरकिनार करके रावण के पक्ष में हो जाते। वानर सेना निश्छल, लोभहीन और राम-भक्त थी, तभी राम जी की जीत संभव हुई।ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर दान घोटाला, आस्था के केंद्र पर 'चंदा चोरी' का साया, SIT जांच से मचा हड़कंप

 

आज कलयुग में जब 500 वर्षों के संघर्षों के बाद बने श्री रामलला के मंदिर से भक्तों की समर्पण राशि में हेराफेरी की खबरें आती हैं, तो मानव जाति का वही आदिम लोभ और छलावा पुनः उजागर हो जाता है। आस्था के परम केन्द्र से जून 2026 के प्रारंभ में इस घटना की खबर से करोड़ों रामभक्तों को कष्ट पहुंचा है। इसने हमारी व्यवस्थागत शुचिता पर बड़ा प्रश्न-चिन्ह खड़ा किया है। इस संवेदनशील मामले में राम मंदिर ट्रस्ट के आंतरिक और सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच में नियमित ऑडिट के दौरान मंदिर को मिले दान के रिकॉर्ड और बैंक लेजर बैलेंस में गंभीर विसंगतियां पाई गईं हैं। 

 

जब शक की सूई घूमी और सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, तो कुछ कर्मचारियों की संदिग्ध गतिविधियां कैमरे में कैद मिलीं। फिर ट्रस्ट ने पुलिस की मौजूदगी में आंतरिक जांच और संदिग्ध कर्मियों से पूछताछ की तो इसने बड़े घोटाले का रूप ले लिया क्योंकि कर्मचारियों के पास से लाखों रुपये नकदी बरामद हुए। इस खुलासे के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हड़कंप मच गया।

 

जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, तो इस वित्तीय जालसाजी का मुख्य सूत्रधार अनुकल्प मिश्रा और दान राशि गिनने वाला लवकुश मिश्रा माना जा रहा है। इन दोनों के पास से जांच टीम ने लाखों की नकदी बरामद की है। इसके अलावा, ट्रस्ट के रसूखदार पदाधिकारी का पूर्व ड्राइवर और सेवादार रहा रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू भी गंभीर आरोपों के घेरे में है। टिन्नू पर कम समय में करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्ति बनाने और मंदिर प्रबंधन में अवैध हस्तक्षेप का आरोप है। हालांकि उसने इन आरोपों को खारिज किया है।

 

यूं तो मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने त्वरित कार्रवाई की और कमिश्नर विजय विश्वास पंत एवं आईजी किरण एस. की अध्यक्षता में तीन-सदस्यीय उच्च स्तरीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। वर्तमान में एसआईटी और एसओजी की टीमें हिरासत में लिए गए कर्मचारियों, सेवादारों और संबंधित बैंक कर्मियों से सघन पूछताछ कर रही हैं।ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर के उप-मंदिरों में दर्शन शुरू, ऑनलाइन पास की मची होड़

 

एसआईटी ने चंपत राय और गोपाल राव जैसे वरिष्ठ पदाधिकारियों से भी मंदिर की व्यवस्था को लेकर पूछताछ की है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने मीडिया में तो कोई औपचारिक बयान नहीं दिया, लेकिन अनौपचारिक रूप से राम जी के एक-एक पैसे के लिए ट्रस्ट की पूरी जवाबदेही स्वीकार की है। उन्होंने एसआईटी की पूछताछ में भी पूरा सहयोग दिया है। 

 

इस विवाद के बाद विपक्षी दलों और कुछ स्थानीय संतों ने उनके प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग भी की थी। वहीं निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य जैसे वरिष्ठ नेताओं ने चंपत राय की अटूट निष्ठा और ईमानदारी का खुलकर बचाव किया है।

 

इस विवाद ने अयोध्या की सियासत को पूरी तरह गरमा दिया है। यह विवाद कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है कि पिछले 11 महीनों में मंदिर की सुरक्षा और प्रबंधन पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद इतनी बड़ी मानवीय और तकनीकी चूक कैसे हो गई?

 

इस पूरे घटनाक्रम पर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और भाजपा का रुख पूरी तरह स्पष्ट, पारदर्शी और कड़ा है। सरकार की नीयत और कार्रवाई की दिशा में रत्ती भर भी ढील या पोल नहीं है, बल्कि यह कृत्य चंद लोभी और अनैतिक मानसिकता वाले लोगों की निजी करतूत है, जिसे किसी भी स्तर पर संरक्षण नहीं मिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रही सरकार में सभी के लिए एक ही दंड संहिता है और गलत पाए जाने पर न्याय होना पूरी तरह सुनिश्चित है। 

 

ऐसे में विपक्षी दलों द्वारा इस संवेदनशील मामले को राजनीतिक रूप से भुनाने की कोशिशें बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं। जो विपक्ष कभी आमंत्रण मिलने पर भी प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर में दर्शन करने तक नहीं गया, जिसने राम जी के दानपात्र में एक रुपया दान नहीं किया, आज उसका इस मुद्दे पर सियासत करना केवल खोखला अवसरवाद है, इसलिए प्रबुद्ध जनता सब समझ रही है।

 

इस संकट से उबरने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अब कुछ कड़े और दूरगामी कदम उठाना अत्यंत आवश्यक है। निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने इस संदर्भ में एक बेहद महत्वपूर्ण सुझाव दिया है कि मंदिर व्यवस्था को अधिक सुदृढ़, पेशेवर और पारदर्शी बनाने के लिए एक स्वतंत्र सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) की नियुक्ति की जानी चाहिए। 

 

साथ ही, अब मंदिर की पूरी वित्तीय प्रणाली को कैशलेस और डिजिटल मॉडल पर ले जाना होगा। दान काउंटर पर केवल डिजिटल रसीदें और सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर की व्यवस्था हो, ताकि मानवीय हस्तक्षेप न्यूनतम हो सके। नोटों की गिनती की प्रक्रिया को पूरी तरह से बायोमेट्रिक सुरक्षा, हाई-डेफिनिशन कैमरों की लाइव निगरानी और तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) के ऑडिट के अधीन किया जाना चाहिए। इसके अलावा, कर्मचारियों की नियुक्ति से पहले उनका कड़ा पुलिस वेरिफिकेशन और बैकग्राउंड चेक अनिवार्य होना चाहिए।

 

हम राम भक्तों के लिए रामलला का मंदिर केवल पाषाणों पर सुंदर नक्काशीदार ढांचा नहीं है, बल्कि यह सभी सनातनियों की अटूट आस्था का जीवंत प्रतीक है। एक गरीब से गरीब भक्त ने भी अपनी गाढ़ी कमाई का अंश प्रभु के चरणों में इस विश्वास के साथ अर्पित किया था कि उसका उपयोग धर्म और समाज के उत्थान में होगा। वहां से एक भी पैसे की चोरी सीधे तौर पर जनमानस की पवित्र आस्था पर आघात है। 

 

राजनीतिक नफा-नुकसान से परे, एसआईटी की जांच के माध्यम से इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी जल्द होना अनिवार्य है ताकि दोषियों को ऐसी सख्त और नजीर बनने वाली सजा मिले, जिससे व्यवस्था की शुचिता बनी रहे। योगी सरकार के कड़े रुख से यह पूरी तरह साफ है कि न्याय हर हाल में होकर रहेगा और प्रभु के दरबार की पवित्रता तथा भक्तों का अटूट विश्वास सदैव अक्षुण्ण रहेगा।ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर दान चोरी कांड, अब सर्विलांस स्टाफ रडार पर! RMO की भी खुलेगी कुंडली

 

(इस लेख में व्यक्त विचार/विश्लेषण लेखक के निजी हैं। 'वेबदुनिया' इसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेती है।)

पश्चिम बंगाल: टीएमसी नेता जहांगीर खान की पत्नी गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल पुलिस को शनिवार को उस समय बड़ी सफलता मिली, जब तीन दिनों से फरार चल रही तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता जहांगीर खान की पत्नी रेजिना बीबी को गिरफ्तार कर लिया गया। रेजिना बीबी पर फाल्टा पुलिस थाने पर हमले की कोशिश की मुख्य साजिशकर्ता होने का आरोप है। 

पुलिस पहले ही जहांगीर खान को गिरफ्तार कर चुकी है। अब रेजिना बीबी की गिरफ्तारी के बाद उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023, आर्म्स एक्ट, 1959 और एक्सप्लोसिव्स एक्ट, 1884 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस उसे दक्षिण 24 परगना की जिला अदालत में पेश करेगी।

राज्य पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि राज्य पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के जवानों ने टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा फाल्टा पुलिस थाने पर हमले और जहांगीर खान को छुड़ाने की कोशिश के मामले में भारत-नेपाल सीमा के निकट स्थित एक ठिकाने से रेजिना बीबी को गिरफ्तार किया। रेजिना बीबी की गिरफ्तारी के साथ ही अब इस मामले में कुल 26 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

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पुलिस की प्रारंभिक जांच में पता चला है कि फाल्टा पुलिस थाने पर हमले की योजना सोमवार को एक गुप्त स्थान पर आयोजित बैठक में बनाई गई थी। आरोप है कि यह बैठक रेजिना बीबी ने बुलाई थी।

जिला पुलिस के एक अधिकारी ने कहा, “बैठक में तय किया गया था कि समर्थक फाल्टा पुलिस थाने से करीब तीन किलोमीटर दूर एक निर्धारित स्थान पर एकत्र होंगे। इसके बाद वे अचानक और संगठित तरीके से पुलिस थाने पर धावा बोलकर जहांगीर खान को छुड़ाने का प्रयास करेंगे।

शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा था कि उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिया है कि वे पुलिस स्टेशन पर हमले में शामिल लोगों की संपत्तियों की पहचान करें, उन्हें जब्त करें, उनकी नीलामी करें और नीलामी से मिली रकम से सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई करें।

मुख्यमंत्री अधिकारी ने शुक्रवार को कहा था फाल्टा घटना के सिलसिले में हमलावरों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की अलग-अलग धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें देश-विरोधी गतिविधियों से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं। हम न केवल हमलावरों को कड़ी सजा दिलाना सुनिश्चित करेंगे, बल्कि उनकी संपत्तियों को जब्त करके नुकसान का मुआवजा भी वसूल करेंगे।

Pic Credit : ANI

NTA की भारी चूक: नागपुर के NEET छात्र को थमाया अबू धाबी का सेंटर; छात्र के पास पासपोर्ट तक नहीं

NEET NTA mistake

NEET UG Re-exam 2026 : नीट पुनर्परीक्षा से पहले एनटीए से उस समय बड़ी चूक हो गई जब नागपुर के छात्र को आबू धाबी का परीक्षा केंद्र दे दिया गया। छात्र की शिकायत पर एनटीए हेल्पलाइन ने संशोधित एडमिट कार्ड जारी करने का आश्वासन दिया है। ALSO READ: NEET Re-Exam कल: टेलीग्राम बंद, गाड़ियों में GPS और पैरामिलिट्री का पहरा; परीक्षा से पहले जान लें नए नियम

 

छात्र ने परीक्षा केंद्र के लिए नागपुर को अपनी पहली पसंद चुना था। दूसरे और तीसरे विकल्प के रूप में उसने वर्धा और भंडारा चुना था। जब उसने नया एडमिट कार्ड डाउनलोड किया तो उसमें परीक्षा केंद्र संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी में दिखाया गया।

 

छात्र को मूल रूप से नीट परीक्षा के लिए नागपुर के सरस्वती विद्यालय में परीक्षा केंद्र आवंटित किया गया था। लेकिन पेपर लीक विवाद के बाद जब पुनर्परीक्षा की प्रक्रिया शुरू हुई और नया एडमिट कार्ड जारी हुआ, तब परीक्षा केंद्र बदलकर अबू धाबी इंडियन स्कूल कर दिया गया। ALSO READ: इंदौर में तीसरी मंजिल से गिरी NEET छात्रा, अस्पताल में मौत, हादसा या नीट पेपर लीक से है कनेक्‍शन?

 

छात्र के पास नहीं है पासपोर्ट

एडमिट कार्ड देख छात्र और उसके परिजन हैरान रह गए। परीक्षा 21 जून को होनी है और परीक्षार्थी के पास तो पासपोर्ट भी नहीं है। ऐसे इतनी कम अवधि में विदेश जाकर परीक्षा देना छात्र और उसके परिवार के लिए लगभग असंभव है। ALSO READ: राहुल गांधी के साथ कोटा में खड़ा हुआ Gen-Z, NEET पेपर लीक और देश के एजुकेशन सिस्‍टम का किया पोस्‍टमार्टम

 

NTA की साख पर सवाल

ऐसे में परिवार ने एनटीए के हेल्पलाइन पर संपर्क कर मामले की जानकारी दी। हेल्पलाइन ने भी गलती स्वीकारते हुए उसे परीक्षा से पहले संशोधित एडमिट कार्ड जारी करने का आश्वासन दिया गया है। पेपर लीक के बाद पहले से ही विवादों में घिरे NTA की इस तकनीकी गड़बड़ी से उसकी साख पर सवाल उठ रहे हैं।

edited by : Nrapendra Gupta

NTA की भारी चूक: नागपुर के NEET छात्र को थमाया अबू धाबी का सेंटर; छात्र के पास पासपोर्ट तक नहीं

NEET NTA mistake

NEET UG Re-exam 2026 : नीट पुनर्परीक्षा से पहले एनटीए से उस समय बड़ी चूक हो गई जब नागपुर के छात्र को आबू धाबी का परीक्षा केंद्र दे दिया गया। छात्र की शिकायत पर एनटीए हेल्पलाइन ने संशोधित एडमिट कार्ड जारी करने का आश्वासन दिया है। ALSO READ: NEET Re-Exam कल: टेलीग्राम बंद, गाड़ियों में GPS और पैरामिलिट्री का पहरा; परीक्षा से पहले जान लें नए नियम

 

छात्र ने परीक्षा केंद्र के लिए नागपुर को अपनी पहली पसंद चुना था। दूसरे और तीसरे विकल्प के रूप में उसने वर्धा और भंडारा चुना था। जब उसने नया एडमिट कार्ड डाउनलोड किया तो उसमें परीक्षा केंद्र संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी में दिखाया गया।

 

छात्र को मूल रूप से नीट परीक्षा के लिए नागपुर के सरस्वती विद्यालय में परीक्षा केंद्र आवंटित किया गया था। लेकिन पेपर लीक विवाद के बाद जब पुनर्परीक्षा की प्रक्रिया शुरू हुई और नया एडमिट कार्ड जारी हुआ, तब परीक्षा केंद्र बदलकर अबू धाबी इंडियन स्कूल कर दिया गया। ALSO READ: इंदौर में तीसरी मंजिल से गिरी NEET छात्रा, अस्पताल में मौत, हादसा या नीट पेपर लीक से है कनेक्‍शन?

 

छात्र के पास नहीं है पासपोर्ट

एडमिट कार्ड देख छात्र और उसके परिजन हैरान रह गए। परीक्षा 21 जून को होनी है और परीक्षार्थी के पास तो पासपोर्ट भी नहीं है। ऐसे इतनी कम अवधि में विदेश जाकर परीक्षा देना छात्र और उसके परिवार के लिए लगभग असंभव है। ALSO READ: राहुल गांधी के साथ कोटा में खड़ा हुआ Gen-Z, NEET पेपर लीक और देश के एजुकेशन सिस्‍टम का किया पोस्‍टमार्टम

 

NTA की साख पर सवाल

ऐसे में परिवार ने एनटीए के हेल्पलाइन पर संपर्क कर मामले की जानकारी दी। हेल्पलाइन ने भी गलती स्वीकारते हुए उसे परीक्षा से पहले संशोधित एडमिट कार्ड जारी करने का आश्वासन दिया गया है। पेपर लीक के बाद पहले से ही विवादों में घिरे NTA की इस तकनीकी गड़बड़ी से उसकी साख पर सवाल उठ रहे हैं।

edited by : Nrapendra Gupta

Yoga Day 2026: डिप्रेशन और माइग्रेन से राहत दिला सकते हैं ये 5 योगासन, जानिए सही तरीका

The picture shows a girl meditating, while the others are performing yoga postures.

21 June World Yoga Day : ज़िंदगी की भागदौड़, तनाव और अंतहीन चिंताएं अक्सर हमारे मन को दुखों से भर देती हैं। जब यह दुख परमानेंट ठिकाना बना ले, तो डिप्रेशन और माइग्रेन जैसी अनचाही कड़वाहटें ज़िंदगी में घुलने लगती हैं। अगर आप भी सिरदर्द की इस टीस और उदासी के साए से परेशान हैं, तो इस योग दिवस पर खुद को एक नया मौका दें। अपनी लाइफस्टाइल में शामिल करें ये 5 जादुई योग टिप्स और पाइए एक सुकून भरी मुस्कुराती हुई ज़िंदगी।

 

1. सांसों का संतुलन: तीन खास प्राणायाम

मन को शांत और सिर को हल्का करने के लिए चंद्रभेदी, सूर्यभेदी और भ्रामरी प्राणायाम को अपना हमसफ़र बना लीजिए। इन्हें सीखना बेहद आसान है, लेकिन इनका असर सीधा आपके मानसिक तनाव को जड़ से मिटाने पर होता है।

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2. आसनों से जगाएं ऊर्जा

शरीर और मस्तिष्क में नई ऊर्जा का संचार करने के लिए योग मैट बिछाइए। आप अपनी सहूलियत के हिसाब से जानुशिरासन, सुप्तवज्रासन, पवनमुक्तासन, पश्चिमोत्तानासन, उष्ट्रासन या ब्रह्ममुद्रा का अभ्यास कर सकते हैं। अगर वक्त की कमी है, तो इन सब की जगह रोज़ाना कुछ चक्र सूर्य नमस्कार के कर लेना ही काफी है।

 

3. ध्यान: मानसिक डिटॉक्स

अगर आप आसनों के चक्रव्यूह में नहीं पड़ना चाहते, तो कोई बात नहीं। रोज़ाना बस 10 मिनट के लिए मौन होकर ध्यान (Meditation) में बैठ जाएं। यह आपके दिमाग के सारे क्लटर (कबाड़) को साफ कर देगा।

 

4. डीप ब्रीदिंग: सांसों का गणित

व्यस्तता के बहाने छोड़िए और सांस लेने का यह सिंपल फॉर्मूला आज़माइए। पेट तक एक गहरी लंबी सांस अंदर खींचें, फिर उसे दोगुने समय के लिए अंदर ही रोक कर रखें (कुंभक), और फिर धीरे-धीरे पूरी सांस बाहर छोड़ दें। इस प्रक्रिया को कम से कम 10 बार दोहराएं। यह डिप्रेशन के लिए इंस्टेंट रिलीफ का काम करता है।

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5. योग निद्रा: सुकून का रामबाण इलाज

तनाव भगाने का सबसे रिलैक्सिंग तरीका है योग निद्रा। रोज़ाना सिर्फ 20 मिनट के लिए योग निद्रा की मुद्रा में लेट जाएं और बैकग्राउंड में अपना पसंदीदा शांत संगीत चलाकर उसमें खो जाएं। साथ ही 5 मिनट का ध्यान और भ्रामरी प्राणायाम इसमें जोड़ लें, तो यह माइग्रेन और डिप्रेशन के खिलाफ आपके लिए सबसे अचूक और रामबाण हथियार साबित होगा।

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NEET UG Re-exam 2026: नागपुर के छात्र को दे डाला अबु धाबी में परीक्षा केंद्र, राहुल गांधी ने एक्स पर उठाया मुद्दा तो एनटीए ने दिया गलती सुधारने का भरोसा

NEET UG Re-exam 2026: नीट यूजी 2026 री-एग्जाम का आयोजन कल, रविवार, 21 जून 2026 को पूरे देश में किया जाएगा। परीक्षा में अब जहां बहुत कम समय बचा, वहीं नागपुर के एक छात्र की परेशानी ने कल होने वाली परीक्षा की तैयारियों पर फिर से सवालिया निशान लगा दिया है। इस छात्र को महाराष्ट्र में परीक्षा केंद्र चुनने के बावजूद अबु धाबी में परीक्षा केंद्र अलॉट करने का मामला सामने आया है। इस मामले को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अपने एक्स हैंडल के जरिए उठाया है। उनकी पोस्ट पर जवाब देते हुए एनटीए ने मामले का तुरंत संज्ञान लेते हुए गलती सुधारने का आश्वासन दिया है।

होमटाउन से हजारों किलोमीटर दूर अबू धाबी में सेंटर अलॉट किया

यह मामला नागपुर के छात्र अब्दुल्ला का है, जिसे नीट यूजी री-एग्जाम के लिए यूएई के अबू धाबी में परीक्षा केंद्र किया गया था। इस घटना से छात्र और उसके परिवार के लोग परेशान है। खास बात यह है कि अब्दुल्ला को पिछली परीक्षा के दौरान नागपुर में एक सेंटर अलॉट किया गया था। अब्दुल्ला ने एप्लीकेशन फॉर्म भरते समय नागपुर, वर्धा और भंडारा को अपने पसंदीदा एग्ज़ामिनेशन सेंटर के तौर पर चुना था। इसके बावजूद, उसे उसके होमटाउन से हजारों किलोमीटर दूर अबू धाबी में सेंटर अलॉट किया गया। छात्र की परेशानी इसलिए और भी बढ़ गई है, क्योंकि परीक्षा में अब सिर्फ एक दिन का समय बचा है और उसके पास न तो पासपोर्ट है और विदेश जाने के पैसे। ऐसे हालात में, परिवार के लिए इतने कम समय में पासपोर्ट और वीजा की फॉर्मैलिटी पूरी करना और उसे परीक्षा देने के लिए विदेश भेजना लगभग असंभव है।

छात्र के परिवार ने एनटीए से किया संपर्क

गलती का पता चलने के बाद, छात्र के अभिभावकों ने तुरंत एनटीए के हेल्पलाइन पर संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई। परिवार के मुताबिक, एनटीए अधिकारियों ने माना कि एक टेक्निकल गड़बड़ी हुई थी और उन्हें भरोसा दिलाया कि सुधार की कार्रवाई की जाएगी। शुक्रवार देर रात बातचीत के बाद स्टूडेंट को बताया गया कि उसे नागपुर में एक परीक्षा केंद्र दिया जाएगा और शनिवार शाम 4 बजे तक रिवाइज्ड एडमिट कार्ड जारी कर दिया जाएगा।

पार्टी महासचिव राहुल गांधी और महाराष्ट्र कांग्रेस नेता ने उठाई आवाज

इस घटना पर कांग्रेस महासचिव और सांसद राहुल गांधी ने अपने एक्स अकाउंट से पोस्ट किया। राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में कहा कि परिवार के पास न पासपोर्ट है और न विदेश जाने के पैसे। उसको जो तनाव हुआ है, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। इससे पहले महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता डॉ. अनीस अहमद ने कड़ी नाराजगी जताते हुए एनटीए से मांग की कि एजेंसी तुरंत एक बदला हुआ एडमिट कार्ड जारी करे और गलती सुधारे।

राहुल की पोस्ट पर एनटीए ने मानी गलती

राहुल गांधी की पोस्ट पर एनटीए ने जवाब देते हुए भरोसा दिया कि छात्र की शिकायत दर्ज कर ली गई है। उस पर तत्काल प्रभाव से एक्शन भी लिया जा रहा है। जरूरी सत्यापन के बाद अगले कुछ घंटों में उसे नागपुर के पास ही कोई परीक्षा केंद्र आवंटित कर सूचित कर दिया जाएगा।

NEET-UG Re-Exam 2026: कल होने वाली परीक्षा के लिए एनटीए आज करेगा पूरे देश में मॉक ड्रिल, पूरे देश में 5500 केंद्रों पर परीक्षा देंगे छात्र

LIVE: नीट पुनर्परीक्षा से पहले एनटीए की चूक

neet re exam 2026

Latest News Today Live Updates in Hindi : नीट पुनर्परीक्षा से पहले एनटीए की चूक, नागपुर के छात्र को आबू धाबी में दिया परीक्षा केंद्र। छात्र की शिकायत पर एनटीए हेल्पलाइन ने संशोधित एडमिट कार्ड जारी करने का आश्वासन दिया है। पल पल की जानकारी…

-इजराइल और लेबनान सीजफायर के लिए राजी।

-डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत अमेरिका-ईरान वार्ता के लिए स्विट्जरलैंड रवाना।

अयोध्या राम मंदिर में दान चोरी मामले में SIT जांच का आज छठा दिन है। बताया जा रहा है कि आज SIT मुख्‍यमंत्री को रिपोर्ट सौंप सकती है।

-21 जून को होने वाली नीट पुनर्परीक्षा से 1 दिन पहले देश भर के सभी 5000 से ज्यादा केंद्रों पर मॉकड्रील जारी।

-नीट पुनर्परीक्षा से पहले एनटीए की चूक, नागपुर के छात्र को आबू धाबी में दिया परीक्षा केंद्र। परीक्षा प्रबंधन और केंद्र आवंटन प्रक्रिया को लेकर खड़े हुए सवाल।

IPOs This Week: 22 जून से शुरू हफ्ते में खुलेंगे 8 नए इश्यू, 6 कंपनियां होंगी लिस्ट

22 जून से शुरू हफ्ते में देश में 8 नए IPO खुलने वाले हैं। इनमें से 3 मेनबोर्ड सेगमेंट के हैं। इसके अलावा नए सप्ताह में पहले से खुले 4 IPO में भी पैसे लगाने का मौका रहेगा। इनमें से एक मेनबोर्ड सेगमेंट का है। शेयर बाजार में होने जा रही नई लिस्टिंग्स की बात करें तो नए शुरू हो रहे सप्ताह में 6 कंपनियों के शेयर अपनी शुरुआत करने वाले हैं। ये सभी SME हैं। आइए जानते हैं डिटेल…

नए IPO

Advit Jewels IPO: मेनबोर्ड सेगमेंट में यह इश्यू 23 जून को ओपन होगा। प्राइस बैंड ₹130-₹138 प्रति शेयर है। लॉट साइज 100 शेयर है। कंपनी का इरादा ₹165.16 करोड़ जुटाने का है। 25 जून को इश्यू की क्लोजिंग होने के बाद शेयर NSE और BSE पर 1 जुलाई को लिस्ट हो सकते हैं।

Waterways Leisure Tourism IPO: मेनबोर्ड सेगमेंट में ₹585 करोड़ का इश्यू 23 जून को ओपन होगा और क्लोजिंग 25 जून को होगी। प्राइस बैंड ₹769-₹808 प्रति शेयर है। लॉट साइज 18 शेयर है। कंपनी की लिस्टिंग NSE और BSE पर 1 जुलाई को होने की उम्मीद है।

Shreedhar Spinners IPO: ₹30.68 करोड़ का इश्यू 23 जून को खुलेगा और 25 जून को बंद होगा। प्राइस बैंड ₹51-₹53 प्रति शेयर है। लॉट साइज 2,000 शेयर है। इश्यू की क्लोजिंग के बाद लिस्टिंग NSE SME पर 1 जुलाई को होने वाली है।

Jivial Industries IPO: यह 23 जून को खुलेगा और 25 जून को बंद होगा। कंपनी ₹31.99 करोड़ जुटाना चाहती है। फाइनल इश्यू प्राइस ₹196 प्रति शेयर और लॉट साइज 600 शेयर है। शेयर BSE SME पर 1 जुलाई को लिस्ट हो सकते हैं।

Dhanwel Hybrid Seeds IPO: यह 24 जून को खुलेगा और 29 जून को बंद होगा। इश्यू साइज ₹26.73 करोड़ है। प्राइस बैंड ₹95-₹99 प्रति शेयर और लॉट साइज 1,200 शेयर है। कंपनी के शेयर BSE SME पर 2 जुलाई को शुरुआत कर सकते हैं।

CSM Technologies IPO: कंपनी ₹145.78 करोड़ जुटाना चाहती है। इश्यू 24 जून को खुलेगा और 29 जून को बंद होगा। प्राइस बैंड ₹107-₹113 प्रति शेयर और लॉट साइज 132 शेयर है। लिस्टिंग NSE और BSE पर 2 जुलाई को हो सकती है।

Sri Priyanka Geo Commex IPO: यह ₹94.51 करोड़ का है। ओपनिंग 24 जून को होगी। बोली ₹207-₹212 प्रति शेयर के भाव पर लगा सकते हैं। लॉट साइज 600 शेयर है। 29 जून को इश्यू बंद होने के बाद शेयर NSE SME पर 2 जुलाई को लिस्ट हो सकते हैं।

IC Electricals IPO: यह 25 जून को खुलेगा और 30 जून को बंद होगा। अभी साइज, प्राइस बैंड, लॉट साइज तय नहीं हुआ है। शेयर NSE SME पर 3 जुलाई को शुरुआत कर सकते हैं।

Jio Platforms IPO: साइज, वैल्यूएशन से लेकर फंड के इस्तेमाल और कंपनी की वित्तीय सेहत तक, 10 पॉइंट में पूरी डिटेल

पहले से खुले IPO

Riyaasat Lifestyle IPO: ₹30.77 करोड़ का इश्यू 18 जून को खुला था और 22 जून को बंद होगा। प्राइस बैंड ₹102-₹108 प्रति शेयर और लॉट साइज 1,200 शेयर है। अभी तक यह महज 8 प्रतिशत भरा है। शेयर BSE SME पर 25 जून को लिस्ट हो सकते हैं।

Avience Biomedicals IPO: ₹30.24 करोड़ का इश्यू 22 जून को बंद होगा। 18 जून से अब तक यह 43.79 गुना सब्सक्राइब हो चुका है। प्राइस बैंड ₹196-₹208 प्रति शेयर है। लॉट साइज 600 शेयर है। कंपनी के शेयर NSE SME पर 25 जून को लिस्ट हो सकते हैं।

Anubhav Plast IPO: यह 19 जून को खुला था और 23 जून को बंद होगा। कंपनी ₹24 करोड़ जुटाना चाहती है। इश्यू अब तक 1.21 गुना भर चुका है। बोली ₹77-₹80 प्रति शेयर के प्राइस बैंड में लगा सकते हैं। लॉट साइज 1,600 शेयर है। कंपनी के BSE SME पर 29 जून को लिस्ट होने की उम्मीद है।

Turtlemint Fintech Solutions IPO: यह इश्यू भी 19 जून को खुला था और 23 जून को बंद होगा। साइज ₹882.67 करोड़ है। प्राइस बैंड ₹144-₹152 प्रति शेयर और लॉट साइज 98 शेयर है। अभी तक यह IPO 46 प्रतिशत सब्सक्राइब हो चुका है। शेयरों की लिस्टिंग NSE और BSE पर 29 जून को हो सकती है।

इन कंपनियों की होगी लिस्टिंग

नए सप्ताह में 24 जून को NSE SME पर Clay Craft की लिस्टिंग होने वाली है। इसी दिन BSE SME पर Diksha Polymers, Leapfrog Engineering और Liotech Industries के शेयर अपनी शुरुआत कर सकते हैं। इसके बाद 25 जून को BSE SME पर Riyaasat Lifestyle के लिस्ट होने की उम्मीद है। इसी दिन NSE SME पर Avience Biomedicals की लिस्टिंग हो सकती है।

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