मिडिल ईस्ट में फिर छिड़ी जंग? अमेरिकी एयरस्ट्राइक के बाद ईरान की खुली धमकी- ‘वाशिंगटन को भुगतना होगा अंजाम’

US Iran Conflict: मिडिल ईस्ट में अभी शांति समझौता पूरी तरह लागू भी नहीं हुआ था कि अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो गई है। हाल ही में हुए सीजफायर के बाद दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही थी, लेकिन इसी बीच अमेरिकी फाइटर जेट्स ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर भीषण बमबारी कर दी है।

इस हमले के बाद ईरान भड़क उठा है। ईरानी संसद के राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने शनिवार को अमेरिका को सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि इस हरकत के बाद वाशिंगटन को सिर्फ ‘पीछे हटना और पछताना’ पड़ेगा। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि अब अमेरिका का यह ‘ब्लेम गेम’ यानी एक-दूसरे पर दोष मढ़ने का खेल नहीं चलेगा। आइए जानते हैं कि इस ताजा विवाद की असल वजह क्या है।

क्यों भड़का विवाद? अमेरिका ने क्यों किए ईरान पर हमले?

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने शुक्रवार को ईरान के मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज लोकेशन्स के साथ-साथ तटीय रडार साइटों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए। अमेरिका ने साफ किया कि यह कार्रवाई ईरान द्वारा एक कमर्शियल जहाज पर किए गए हमले का बदला है।

25 जून की घटना: अमेरिकी सेना के मुताबिक, 25 जून को ईरान ने ओमान के तट के पास जलडमरूमध्य से गुजर रहे सिंगापुर के झंडे वाले मालवाहक जहाज ‘एम/वी एवर लवली’ पर वन-वे अटैक ड्रोन से हमला किया था।

रणनीतिक रास्ता: यह हमला होर्मुज जलडमरूमध्य के पास हुआ, जो दुनिया के कुल ऊर्जा व्यापार के लगभग पांचवें हिस्से का मुख्य रास्ता है। इसी के जवाब में अमेरिका ने ईरान के खिलाफ एक्शन लिया।

ईरान का पलटवार: ‘बातचीत के बीच में पीठ पर छुरा घोंपा’

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के पूर्व कमांडर और सांसद इब्राहिम अजीजी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अमेरिका को आड़े हाथों लिया। उन्होंने लिखा, ‘अमेरिका ने एक बार फिर बातचीत के बीच में ही ईरान पर हमला कर दिया है। नाकाम अमेरिकी राष्ट्रपति ने दिखा दिया है कि वह बातचीत या सीजफायर के सिद्धांतों को नहीं मानते हैं।’

अजीजी ने चेतावनी दी कि सीजफायर का यह लापरवाह उल्लंघन अमेरिका को भारी पड़ेगा। अजीजी के इस बयान के कुछ ही घंटों बाद IRGC ने भी ऐलान कर दिया कि उसने देश के दक्षिणी हिस्से पर हुए अमेरिकी हमलों के जवाब में पूरे क्षेत्र में फैले अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।

‘हिंसा का जवाब हिंसा से मिलेगा’

इस बीच अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी ईरान को दोटूक चेतावनी दी है। उन्होंने ‘X’ पर लिखा, ‘ईरान ने सीजफायर समझौते पर हस्ताक्षर किए थे और हमने उसका सम्मान किया। अगर उन्हें एमओयू (MOU) के लागू होने के तरीके को लेकर कोई आपत्ति या असहमति थी, तो वे बात कर सकते थे। लेकिन हिंसा का जवाब हमेशा हिंसा से ही दिया जाएगा।’ वेंस ने ईरान से अपील की कि वे विवादों को सुलझाने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाएं।

नाजुक मोड़ पर बातचीत: क्या फिर छिड़ेगी जंग?

यह पूरा टकराव बेहद नाजुक समय पर हुआ है। वाशिंगटन और तेहरान के बीच पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को खत्म करने के लिए राजनयिक बातचीत चल रही थी। पिछले हफ्ते ही दोनों पक्षों के बीच सीजफायर का ऐलान हुआ था, जिसके बाद एक व्यापक फ्रेमवर्क को अंतिम रूप देने के लिए 60 दिनों का बातचीत का समय तय किया गया था। लेकिन इन हमलों के बाद शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है और मिडिल ईस्ट में एक बार फिर युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं।

PM मोदी सेशेल्स रवाना, 11 साल में दूसरा दौरा:राष्ट्रीय दिवस समारोह में बतौर चीफ गेस्ट शामिल होंगे; यहां हर 8वां व्यक्ति भारतीय मूल का

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 से 29 जून तक तीन दिन सेशेल्स दौरे के लिए शनिवार सुबह 8.50 बजे रवाना हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के निमंत्रण पर वहां जा रहे हैं। मोदी सेशेल्स की आजादी के 50 साल पूरे होने के समारोह में मुख्य अतिथि होंगे। इस मौके पर होने वाली परेड में भारतीय सशस्त्र बलों की एक टुकड़ी और भारतीय नौसेना के दो युद्धपोत भी हिस्सा लेंगे। मोदी सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे। इसके अलावा सेशेल्स की राष्ट्रीय विधानसभा को भी संबोधित करेंगे। सेशेल्स में रहने वाले भारतीय समुदाय से मुलाकात करेंगे। मोदी का पिछले 11 साल में यह दूसरा सेशेल्स का दौरा है। इससे पहले उन्होंने साल 2015 में इस द्वीप देश की यात्रा की थी। सेशेल्स की आबादी 1.35 लाख है। इसमें से 12 हजार के करीब लोग भारतीय मूल के हैं। यह करीब 8 से 9% हिस्सा है। मोदी सेशेल्स जाने वाले सिर्फ दूसरे प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने साल 1976 में सेशेल्स गई थीं। उसी साल सेशेल्स आजाद हुआ था। भारत ने सेशेल्स के स्वतंत्रता समारोह में नौसेना का युद्धपोत आईएनएस नीलगिरि भी भेजा था। इसके बाद इंदिरा गांधी 1981 में फिर सेशेल्स का दौरा किया था। उनकी यात्रा के बाद, लगभग 34 साल तक किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री ने सेशेल्स की यात्रा नहीं की थी। इस दौरे का सबसे बड़ा उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी और समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना था। मोदी की इस यात्रा के दौरान भारत ने सेशेल्स को दूसरा डोर्नियर समुद्री निगरानी विमान देने की घोषणा की, ताकि समुद्री निगरानी और तटीय सुरक्षा मजबूत हो सके। मोदी ने भारत की मदद से बने तटीय निगरानी रडार नेटवर्क का उद्घाटन किया। यह हिंद महासागर में जहाजों की निगरानी और समुद्री सुरक्षा बढ़ाने की भारत की बड़ी रणनीति का हिस्सा था। उस समय चीन हिंद महासागर के द्वीपीय देशों में अपना प्रभाव बढ़ा रहा था। ऐसे में मोदी का दौरा भारत की ‘पड़ोसी पहले’ और हिंद महासागर में रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने की नीति का अहम हिस्सा माना गया।

PM मोदी सेशेल्स रवाना, 11 साल में दूसरा दौरा:राष्ट्रीय दिवस समारोह में बतौर चीफ गेस्ट शामिल होंगे; यहां हर 8वां व्यक्ति भारतीय मूल का

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 से 29 जून तक तीन दिन सेशेल्स दौरे के लिए शनिवार सुबह 8.50 बजे रवाना हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के निमंत्रण पर वहां जा रहे हैं। मोदी सेशेल्स की आजादी के 50 साल पूरे होने के समारोह में मुख्य अतिथि होंगे। इस मौके पर होने वाली परेड में भारतीय सशस्त्र बलों की एक टुकड़ी और भारतीय नौसेना के दो युद्धपोत भी हिस्सा लेंगे। मोदी सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे। इसके अलावा सेशेल्स की राष्ट्रीय विधानसभा को भी संबोधित करेंगे। सेशेल्स में रहने वाले भारतीय समुदाय से मुलाकात करेंगे। मोदी का पिछले 11 साल में यह दूसरा सेशेल्स का दौरा है। इससे पहले उन्होंने साल 2015 में इस द्वीप देश की यात्रा की थी। सेशेल्स की आबादी 1.35 लाख है। इसमें से 12 हजार के करीब लोग भारतीय मूल के हैं। यह करीब 8 से 9% हिस्सा है। मोदी सेशेल्स जाने वाले सिर्फ दूसरे प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने साल 1976 में सेशेल्स गई थीं। उसी साल सेशेल्स आजाद हुआ था। भारत ने सेशेल्स के स्वतंत्रता समारोह में नौसेना का युद्धपोत आईएनएस नीलगिरि भी भेजा था। इसके बाद इंदिरा गांधी 1981 में फिर सेशेल्स का दौरा किया था। उनकी यात्रा के बाद, लगभग 34 साल तक किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री ने सेशेल्स की यात्रा नहीं की थी। इस दौरे का सबसे बड़ा उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी और समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना था। मोदी की इस यात्रा के दौरान भारत ने सेशेल्स को दूसरा डोर्नियर समुद्री निगरानी विमान देने की घोषणा की, ताकि समुद्री निगरानी और तटीय सुरक्षा मजबूत हो सके। मोदी ने भारत की मदद से बने तटीय निगरानी रडार नेटवर्क का उद्घाटन किया। यह हिंद महासागर में जहाजों की निगरानी और समुद्री सुरक्षा बढ़ाने की भारत की बड़ी रणनीति का हिस्सा था। उस समय चीन हिंद महासागर के द्वीपीय देशों में अपना प्रभाव बढ़ा रहा था। ऐसे में मोदी का दौरा भारत की ‘पड़ोसी पहले’ और हिंद महासागर में रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने की नीति का अहम हिस्सा माना गया।

Silver Rate Today India: चांदी के नए भाव जारी, जानें आपके शहर में कितनी है कीमत

Silver Rate Today India: अगर आप चांदी के गहने खरीदने या फिर निवेश की योजना बना रहे हैं, तो सबसे पहले आपको इसका ताजा भाव जानना बहुत जरूरी है। दरअसल, भारत में आज के दिन चांदी की कीमतों में स्थिरता देखने को मिली। बाजार के ताजा रेट के अनुसार चांदी ₹240.10 प्रति ग्राम और ₹2,40,100 प्रति किलोग्राम पर उपलब्ध है।

बता दें कि भारत में चांदी की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों पर निर्भर करती है, जो ऊपर-नीचे होती रहती है। इसके अलावा यह रुपये और डॉलर की विनिमय दर पर भी निर्भर करती है। अगर रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होता है और अंतरराष्ट्रीय कीमतें स्थिर रहती हैं, तो चांदी महंगी हो जाती है।

आज भारत में चांदी की कीमत प्रति ग्राम/किलो (INR)

ग्रामआज (Today)कल (Yesterday)बदलाव (Change)
1₹240.10₹240+ ₹0.10
8₹1,920.80₹1,920+ ₹0.80
10₹2,401₹2,400+ ₹1
100₹24,010₹24,000+ ₹10
1000₹2,40,100₹2,40,000+ ₹100

आज भारत के प्रमुख शहरों में चांदी के दाम

शहर10 ग्राम100 ग्राम1 किलोग्राम
मुंबई₹2,401₹24,010₹2,40,100
कोलकाता₹2,401₹24,010₹2,40,100
चेन्नई₹2,451₹24,510₹2,45,100
पटना₹2,401₹24,010₹2,40,100
लखनऊ₹2,401₹24,010₹2,40,100
अयोध्या₹2,401₹24,010₹2,40,100
मेरठ₹2,401₹24,010₹2,40,100
कानपुर₹2,401₹24,010₹2,40,100
गुरुग्राम₹2,401₹24,010₹2,40,100
चंडीगढ़₹2,401₹24,010₹2,40,100
गाजियाबाद₹2,401₹24,010₹2,40,100
नोएडा₹2,401₹24,010₹2,40,100
जयपुर₹2,401₹24,010₹2,40,100
लुधियाना₹2,401₹24,010₹2,40,100
गुवाहाटी₹2,401₹24,010₹2,40,100
इंदौर₹2,401₹24,010₹2,40,100
अहमदाबाद₹2,401₹24,010₹2,40,100
वडोदरा₹2,401₹24,010₹2,40,100
सूरत₹2,401₹24,010₹2,40,100
पुणे₹2,401₹24,010₹2,40,100
नागपुर₹2,401₹24,010₹2,40,100
नासिक₹2,401₹24,010₹2,40,100
बेंगलुरु₹2,401₹24,010₹2,40,100
भुवनेश्वर₹2,401₹24,010₹2,40,100
कटक₹2,401₹24,010₹2,40,100
रायपुर₹2,401₹24,010₹2,40,100
हैदराबाद₹2,451₹24,510₹2,45,100

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Veloce Aperion revealed, eight-cylinder two-stroke makes 280hp

Veloce Aperion static from Bike Shed Moto Show 2026

Two-strokes have all but become a relic of the past, pushed out by increasingly stringent emissions regulations. However, there are still manufacturers challenging that notion, and just this past month we saw Kawasaki keep that spirit alive with the introduction of the KX237. More often than not, though, it’s small garage-based outfits and ambitious engineering startups that experiment with concepts like this. The latest example comes from Oxfordshire, UK-based startup Veloce Motorcycles.

What you’re looking at in the image above is what the company calls the Aperion – presumably a play on the Greek word Apeiron, meaning something that is limitless or unbounded. And that is certainly one way to describe this motorcycle.

  1. Eight-cylinder, 1,000cc two-stroke producing a claimed 280hp at 12,000rpm
  2. Engine, chassis and transmission combined into a single structural unit
  3. Limited to 24 units

Veloce Aperion details

The X configuration allows opposing forces within the engine to cancel each other out

The Veloce Aperion is built around a 1,000cc, eight-cylinder, two-stroke engine producing a claimed 280hp at 12,000rpm. Yes, your eyes aren’t deceiving you. Described by the company as an ‘X8’, the engine consists of eight cylinders arranged in two V4 banks around a central gearbox housing. Reports suggest the cylinders are derived from the Aprilia RS125, with fuelling via eight 24mm Dellorto carburettors fed through a distinctive spiral throttle cable arrangement, running on pre-mixed petrol and two-stroke oil – an engineering feat not only to package them all into a compact space around the engine but also to tune them to work together efficiently.

Veloce says the X-cylinder layout was chosen specifically for a two-stroke because the absence of a conventional lubrication system allows such a configuration to be realised far more easily than it would in a four-stroke engine. It also brings a significant balancing advantage. Diagonally opposed pistons fire simultaneously, which the company claims allows the engine’s combustion, inertial and rotational forces to naturally cancel each other out, resulting in exceptionally smooth operation.

The exhaust system is arguably one of the most captivating aspects of the motorcycle. Expansion chambers are critical to extracting power from a two-stroke engine, and packaging eight of them into a road-going motorcycle is an extraordinary engineering challenge. Veloce has addressed this with a laser-sintered, all-alloy resonance exhaust system. Laser sintering allows engineers to create mathematically precise and highly complex shapes that would be difficult, if not impossible, to manufacture using conventional techniques. The engine, chassis and transmission are also integrated into a single structural unit, which Veloce says delivers exceptional rigidity while reducing weight.

The bike was first shown publicly at the Bike Shed Moto Show in London, and commissions are available for 2027 with production strictly limited to 24 units, priced at a reported £78,000 (approximately Rs 97.3 lakh) each. All examples will receive individual UK Motor Single Vehicle Approval (MSVA) certification for road use, meaning this outrageous two-stroke could legally find its way onto public roads in the UK.

Veloce is also developing a second model called the Ethereal, which follows a similarly unhinged engineering philosophy. It uses a 500cc four-cylinder, two-stroke engine producing a claimed 145hp at 12,000rpm, with the focus shifting towards lower weight, greater agility and even sharper handling.

Source: MCN

क्या आपने नोटिस किया? कई होटलों में नहीं मिलता 13 नंबर का कमरा

होटल में ठहरते समय ज्यादातर लोगों का ध्यान कमरे की सुविधाओं, व्यू या सर्विस पर जाता है, लेकिन कुछ ऐसी छोटी-छोटी बातें भी होती हैं जो हैरान कर देती हैं। इन्हीं में से एक है कई होटलों में Room 13 या 13वीं मंजिल का न होना। पहली नजर में यह किसी तकनीकी गलती या नंबरिंग की चूक लग सकती है, लेकिन इसके पीछे एक दिलचस्प सोच और लंबे समय से चली आ रही परंपरा छिपी है। दुनिया के कई देशों में होटल अपने मेहमानों की पसंद, मानसिक सहजता और सांस्कृतिक मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए कमरे और मंजिलों की नंबरिंग तय करते हैं।

यही वजह है कि कुछ नंबर आसानी से दिखाई देते हैं, जबकि कुछ को जानबूझकर छोड़ दिया जाता है। आखिर ऐसा क्यों किया जाता है, इसके पीछे क्या इतिहास, मनोविज्ञान और बिजनेस से जुड़ी वजहें हैं, आइए जानते हैं।

13 नंबर से आखिर क्यों डरते हैं लोग?

दुनियाभर में कई लोग 13 अंक को अशुभ मानते हैं। इस डर को ट्रिस्काइडेकाफोबिया (Triskaidekaphobia) कहा जाता है। होटल उद्योग मानता है कि मेहमान जितना सहज महसूस करेंगे, उनका अनुभव उतना बेहतर होगा। इसलिए कई होटल 13 नंबर से दूरी बना लेते हैं।

होटलों का सीधा गणित 

कई यात्रियों को Room 13 में ठहरना पसंद नहीं होता। इससे उस कमरे की बुकिंग प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से कई होटल 13वीं मंजिल को सीधे 14 बता देते हैं, जबकि कुछ इसे 12A, M Floor या तकनीकी उपयोग के लिए सुरक्षित रख देते हैं।

दिमाग का खेल भी है बड़ी वजह

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि इंसान उन जगहों पर ज्यादा सहज महसूस करता है जो उसे सामान्य और सुरक्षित लगें। भले ही कोई खुद को अंधविश्वासी न माने, लेकिन Room 13 का नाम देखकर मन में हल्की झिझक पैदा हो सकती है। होटल इसी असहजता से बचना चाहते हैं।

सदियों पुरानी कहानियों ने बनाया 13 को अशुभ

13 नंबर की बदनामी नई नहीं है। नॉर्स पौराणिक कथाओं में 13वें मेहमान के आने से दुखद घटना जुड़ी है। वहीं ईसाई परंपरा में अंतिम भोज (Last Supper) में 13वें व्यक्ति को विश्वासघात से जोड़ा जाता है। समय के साथ ये मान्यताएं लोगों की सोच का हिस्सा बन गईं।

हर देश में अलग है ‘अनलकी नंबर’

दिलचस्प बात यह है कि हर संस्कृति में 13 अशुभ नहीं माना जाता। कई एशियाई देशों में 4 और 9 नंबर से लोग बचते हैं। वहीं कुछ होटल 420, 666 और 911 जैसे नंबरों का भी इस्तेमाल नहीं करते क्योंकि इनसे अलग-अलग सांस्कृतिक या सामाजिक धारणाएं जुड़ी हैं।

आज भी जिंदा है सदियों पुराना विश्वास

हालांकि कुछ होटल Room 13 को खास आकर्षण बनाकर पेश करते हैं, लेकिन अधिकांश होटल आज भी इस नंबर से बचना पसंद करते हैं। यह दिखाता है कि इतिहास, मनोविज्ञान और मेहमानों की सोच आज भी आधुनिक होटल इंडस्ट्री के फैसलों को प्रभावित करती है।

Jyeshtha Month Vat Purnima 2026: 29 जून को वट पूर्णिमा को मिलेगा स्ट्रॉबेरी मून का साथ, जानें ज्येष्ठ पूर्णिमा में स्नान-दान और पूजा का मुहूर्त

Byju’s के लेंडर्स सेटलमेंट के लिए तैयार, लेकिन बदले में आकाश एजुकेशनल सर्विसेज में चाहते हैं 30% हिस्सा

एडटेक प्लेटफॉर्म Byju’s के ग्लोबल लेंडर्स (कर्ज देने वाले) फाउंडर बायजू रवींद्रन के खिलाफ सभी कानूनी कार्रवाई वापस लेने को तैयार हैं। लेकिन बदले में कंपनी की हिस्सेदारी वाली आकाश एजुकेशनल सर्विसेज में लगभग 30 प्रतिशत हिस्सेदारी चाहते हैं। इस प्रस्ताव पर बातचीत चल रही है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों का कहना है कि Byju’s के लेंडर्स विवाद को सुलझाने के अंतिम चरण में हैं और संभावना है कि वे ऑफलाइन कोचिंग संस्थान आकाश एजुकेशनल सर्विसेज में लगभग 30 प्रतिशत हिस्सेदारी लें।

समझौते के तहत सभी पक्ष एक साथ सभी मामले वापस ले लेंगे। Byju’s ने 2021 में 1 अरब डॉलर की डील में आकाश एजुकेशनल सर्विसेज को खरीदा था। लेकिन तब से अब तक इसमें Byju’s की हिस्सेदारी काफी कम हो चुकी है और अब यह माइनॉरिटी स्टेकहोल्डर है। अब आकाश में मणिपाल हेल्थ सबसे बड़ी शेयरहोल्डर है।

Aakash पूरे भारत में 300 से ज्यादा सेंटर चलाती है, जो मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं के साथ-साथ स्कूल परीक्षाओं के लिए तैयारी कराते हैं। इसमें 5,000 से ज्यादा एक्सपर्ट्स की फैकल्टी है और इसकी पिछली रिपोर्ट के अनुसार सालाना रेवेन्यू लगभग 25.4 करोड़ डॉलर था। रॉयटर्स के सूत्रों का कहना है कि सेटलमेंट की बातचीत में बायजू रवींद्रन, ग्लास ट्रस्ट, आकाश और मणिपाल हेल्थ शामिल हैं। आकाश की वैल्यू लगभग 2 अरब डॉलर आंकी गई है।

Byju’s: अर्श से यूं आई फर्श पर

Byju’s एक समय 21 से ज्यादा देशों में ऑपरेशनल थी और COVID-19 महामारी के दौरान ऑनलाइन कोर्सेज के जरिए लोकप्रिय हुई थी। लेकिन 2023 की शुरुआत में हालात बदल गए, जब अमेरिका स्थित लेंडर्स के साथ कंपनी का बड़ा विवाद शुरू हुआ। अमेरिका स्थित ग्लास ट्रस्ट ने बायजू रवींद्रन पर कुप्रबंधन का आरोप लगाया और 2024 में Byju’s के भारत में दिवालियापन के लिए आवेदन करने के बाद 1 अरब डॉलर के बकाया की मांग की।

Volkswagen Layoffs: 1 लाख तक लोगों की जा सकती है नौकरी, 4 फैक्ट्रियां बंद करने का भी प्लान

हालांकि रवींद्रन और Byju’s ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है। लेकिन इस विवाद के चलते Byju’s ढह गई और 2024 में रवींद्रन ने कहा कि कंपनी की वैल्यू शून्य है। कानूनी विवाद Byju’s के दिवालिया होने के बाद से जारी है और भारत, सिंगापुर और अमेरिका की अदालतों में चल रहा है।

4 साल की बच्ची की छाती पर मारी लात, कौन है आंगनवाड़ी की महिला? हरकत में आई पुलिस

पनवेल में एक महिला ने आंगनवाड़ी जाने से मना करने पर 4 साल की बच्ची की छाती पर जोरदार लात मार दी। इस खौफनाक घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने आरोपी मां को हिरासत में लिया है।

मलबे में दबे 18 दिन के बच्चे का रेस्क्यू:ढह चुकी इमारतों में अभी भी फंसे लोग; सड़क पर रिलीफ कैंप; वेनेजुएला भूकंप के 20 PHOTOS-VIDEOS

वेनेजुएला के ला गुआइरा में रेस्क्यू टीम ने शुक्रवार को 18 दिन के बच्चे को उसकी मां के साथ बिल्डिंग के मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला। कई लोग अभी भी ढह चुकी इमारतों के नीचे दबे हुए हैं। वेनेजुएला में गुरुवार को 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो भूकंपों से तबाही मच गई। पूरे देश में 39 हजार से ज्यादा लोग लापता हैं। 40 सेकेंड के अंदर राजधानी कराकस की ऊंची इमारतें मलबे के ढेर में बदल गईं। भूकंप के बाद के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं। जहां लोग रेस्क्यू टीम्स के साथ मिलकर अपनों को ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं। सड़कों पर रेस्क्यू कैंप्स में लोगों का इलाज चल रहा है और मलबा हटाने की कोशिश अभी भी जारी है। 20 PHOTO-VIDEO में देखें, वेनेजुएला में रेस्क्यू, इलाज, तबाही और राहत का मंजर… मलबे से रेस्क्यू, 4 तस्वीरें ढह गई बिल्डिंग्स में फंसे लोग, 2 तस्वीरें तबाह हुआ शहर, 2 तस्वीरें दुनियाभर से आती मदद, 6 तस्वीरें मलबा हटाने की कोशिश, 4 तस्वीरें सड़कों पर रिलीफ कैम्प, 2 तस्वीरें
————————————————– ये खबर भी पढ़ें… वेनेजुएला भूकंप- मलबे में बच्चे का जन्म: गिरती बिल्डिंग से भागे लोग, रनवे पर खड़ा प्लेन थर्राया, यात्रियों में चीखपुकार मची; 26 PHOTOS-VIDEOS वेनेजुएला में 25 जून को 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो भूकंपों से तबाही मच गई। पूरे देश में 39 हजार से ज्यादा लोग लापता हैं। कई लोगों के अभी भी मलबे में दबे होने की आशंका है। 40 सेकेंड के अंदर राजधानी कराकास की ऊंची इमारतें मलबे के ढेर में बदल गईं। पूरी खबर पढ़ें…

इंसाफ मांगता अमेरिकी हमले में मारे गए भारतीय नाविक का परिवार

family seeks justice after indian sailor killed in us strike

-आदिल भट

ओमान की खाड़ी में अमेरिकी हमले में मारे गए एक भारतीय नाविक के मामले से नाविकों की सुरक्षा, जवाबदेही और भारत की प्रतिक्रिया को लेकर जरूरी सवाल उठ रहे हैं। डीडब्ल्यू ने इस हादसे का शिकार हुए नाविक के परिवार से भी बात की। ALSO READ: नाटो प्रमुख से खुश लेकिन यूरोपीय साझेदारों से चिढ़े ट्रंप

 

सुशीला देवी गहरे सदमे और दुख में डूबी हुई हैं। उनके पति और भारतीय नाविक शिवानंद चौरसिया की बीते 9 जून को ओमान की खाड़ी में एक व्यापारिक जहाज ‘एमटी सेटेबेलो' पर हुए अमेरिकी हमले में मौत हो गई थी।

 

पेशे से इंजीनियरिंग फिटर, शिवानंद ने अपने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए सालों तक समंदर में काम करने की कड़ी ट्रेनिंग ली थी। लेकिन अब, उनका परिवार उनके बिना अपने भविष्य की कल्पना करने और इस कड़वे सच को स्वीकार करने की जद्दोजहद में जुटा है।

 

इस महीने की शुरुआत में जब अमेरिकी सेना ने पलाऊ के झंडे वाले इस तेल और केमिकल टैंकर जहाज पर हमला किया, तो उसमें तीन भारतीय नाविक मारे गए थे, जिनमें चौरसिया भी एक थे। अमेरिकी सेना का कहना था कि वे ईरान युद्ध के बीच ईरान से होने वाले तेल के निर्यात पर लगी पाबंदी या नाकेबंदी  को लागू कर रहे थे। इस हमले में चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश और डेक कैडेट आदित्य शर्मा भी मारे गए थे। जहाज पर मौजूद बाकी 21 भारतीय क्रू सदस्यों को बचा लिया गया था।

 

अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि टैंकर में ईरानी तेल था और उसे बार-बार चेतावनी दी गई थी। वहीं, जहाज के मैनेजर ने इस बात का खंडन किया है। उनका कहना है कि जहाज का ईरान से कोई संबंध नहीं था और हमले से पहले उन्हें कोई चेतावनी नहीं मिली थी। ALSO READ: UN महासचिव ने AI कंपनियों से मांगा बिजली, पानी और जमीन का हिसाब

 

‘अमेरिका ने मेरे पति को मारा'

सुशीला देवी ने डीडब्ल्यू से कहा, “उन्होंने मेरी सारी खुशियां छीन ली। अमेरिका ने ही मेरे पति की जान ली है। इसीलिए प्रधानमंत्री [नरेंद्र] मोदी और [उत्तर प्रदेश के] मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चुप हैं। उन्हें अपने लोगों के लिए आवाज उठानी चाहिए थी और पूछना चाहिए था कि उन्होंने हमारे साथ ऐसा क्यों किया।”

 

शिवानंद चौरसिया का परिवार पूर्वी उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के एक खेतिहर गांव में रहता है, जहां मुख्य रूप से धान की खेती होती है। गांव के ज्यादातर मकान मिट्टी और ईंट से बने हुए हैं। ईंट से बने अपने साधारण से घर के भीतर पूरा परिवार गुमसुम और शांत बैठा है। रिश्तेदार और पड़ोसी लगातार घर आ-जा रहे हैं और उन्हें सांत्वना दे रहे हैं। शिवानंद की बहन सोनी चौरसिया कहती हैं, “भाई की मौत से हमें बहुत ज्यादा दुख पहुंचा है। अब मेरा इस दुनिया में जीने का मन नहीं करता, क्योंकि परिवार ने अपनी एकमात्र उम्मीद खो दी है।”

 

परिवार को लगता है कि भारतीय सरकार की चुप्पी ने उन्हें बेसहारा छोड़ दिया है। किसी भी नेता ने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात नहीं की है। सोनी ने कहा, “हम गरीब हैं। इसीलिए, मोदी सरकार को कोई परवाह नहीं है। अगर हम अमीर होते, तो वे हमसे मिलने जरूर आते।”

 

उत्तर प्रदेश के इस इलाके के ज्यादातर परिवारों की तरह, चौरसिया परिवार भी खेती-बाड़ी पर निर्भर है और बमुश्किल इतना अनाज उगा पाता है जिससे सबका पेट भर सके। समंदर की यह नौकरी शिवानंद चौरसिया के लिए तंगहाली से बाहर निकलने का रास्ता थी। उनके मरीन इंजीनियरिंग के कोर्स की फीस भरने के लिए परिवार ने अपनी जमीन बेच दी थी और करीब 8,60,000 रुपये का कर्ज लिया था। आखिरकार, उन्हें एक ऑयल टैंकर पर नौकरी मिल गई थी।

 

समंदर में कितने भारतीय कर्मचारी मौजूद

दुनिया भर के समुद्री जहाजों पर काम करने वाले कर्मचारियों का एक बहुत बड़ा हिस्सा भारत के लोगों का है। उद्योग के अनुमानों के मुताबिक, दुनिया के कुल नाविकों में से करीब 12 फीसदी भारतीय नागरिक हैं। इनमें से हजारों नाविक उन व्यापारिक जहाजों पर काम करते हैं, जो दुनिया के सबसे अशांत और खतरनाक समुद्री रास्तों से होकर गुजरते हैं।

 

चौरसिया के घर के पास एक पेड़ के नीचे कुछ लोग इकट्ठा होकर यह चर्चा कर रहे थे कि आखिर वहां क्या हुआ था और इससे उनके जीवन पर क्या असर पड़ेगा। उनमें से कई लोगों के रिश्तेदार समंदर में काम करते हैं, जिनमें से कुछ फारस की खाड़ी में भी तैनात हैं।

 

जो परिवार पहले से ही कर्ज के बोझ तले दबे थे, उनके लिए समंदर की यह नौकरी कभी गरीबी से बाहर निकलने के रास्ते के तौर पर दिखती थी। लेकिन अब यह एक ऐसा जुआ बन चुकी है, जहां दांव पर सीधे इंसान की जिंदगी लगी है। गांव के एक व्यक्ति ने कहा, “हम अब अपने आदमियों को समुद्र में नहीं भेजेंगे।” वहां मौजूद दूसरे लोगों ने भी सहमति जताते हुए अपना सिर हिलाया। ALSO READ: ईरान युद्ध के लक्ष्यों में डोनाल्ड ट्रंप को क्या हासिल हुआ

 

गए थे रोजी-रोटी के लिए, फंस गए जंग में

ईरान-अमेरिका संघर्ष शुरू होने के बाद, ईरानी हमलों में भी भारतीय नाविक घायल हुए हैं। भूमेश (जो सिर्फ अपने पहले नाम से जाने जाते हैं) एक ऐसे नाविक हैं जो 1 मार्च को ‘स्काईलाइट' नामक टैंकर जहाज पर हुए ईरानी हमले में बाल-बाल बचे थे। यह हमला तब हुआ था जब तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाने के लिए नाकेबंदी कर रहा था। यह जहाज इस युद्ध के दौरान हमले का शिकार होने वाले सबसे शुरुआती जहाजों में से एक था।

 

जब हमला हुआ, उस वक्त भूमेश जहाज के मुख्य कंट्रोल रूम (ब्रिज) पर ही मौजूद थे। भूमेश ने बताया, “मुझे नहीं पता था कि मैं जिंदा बचूंगा या नहीं। मैं बस लगातार यही सोच रहा था कि मेरे बिना मेरा परिवार इस सदमे को कैसे झेलेगा और क्या मैं कभी सही-सलामत घर वापस लौट पाऊंगा।”

 

उस धमाके में जहाज के कप्तान और एक अन्य भारतीय नाविक की मौत हो गई थी। भूमेश के मुताबिक, इस हादसे की यादें आज भी उनका पीछा करती हैं। हफ्तों तक वे सो नहीं पाए। उन्होंने कहा, “नाविक वहां कोई जंग लड़ने नहीं जाते हैं। हम तो सिर्फ अपनी रोजी-रोटी कमाने वहां जाते हैं।” अब समंदर में वापस न जाने के कारण, वे दिल्ली के बाहरी इलाके में किराए के एक कमरे में रहते हैं और ट्रक चलाते हैं। तीन महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन वे अब भी शिपिंग कंपनी से मिलने वाले मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं।

 

भूमेश का यह अनुभव उन दर्जनों मामलों में से एक है, जिन पर भारतीय नाविक यूनियन लगातार नजर रखे हुए है। फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया के जनरल सेक्रेटरी मनोज यादव ने डीडब्ल्यू को बताया, “यह गंभीर चिंता का विषय है। बिना किसी चेतावनी के उन पर हमला क्यों किया गया?” यादव के पास फंसे हुए नाविकों के फोन दिन भर आते रहते हैं। ये नाविक बताते हैं कि खाड़ी में फंसे कई जहाजों पर खाने-पीने की चीजों और जरूरी सामान की भारी किल्लत हो रही है और वे बहुत मुश्किलों से जूझ रहे हैं। यूनियन के पास हर दिन उन नाविकों के परेशान और चिंतित घरवालों के भी ढेरों फोन आते हैं। यादव ने कहा, “वे जानना चाहते हैं कि क्या उनका बेटा सुरक्षित है? क्या उनका पति घर लौट रहा है?”

 

भले ही अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है और समुद्री रास्ते (होर्मुज जलडमरूमध्य) में तनाव कम हो रहा है, लेकिन वहां फंसे हर एक जहाज को सुरक्षित बाहर निकालने में अब भी कई अड़चनें आ रही हैं। इसी हफ्ते, संयुक्त राष्ट्र की संस्था ‘अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन' (आईएमओ) ने होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे 11,000 से ज्यादा नाविकों और सैकड़ों जहाजों को वहां से सुरक्षित निकालने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है।

 

कूटनीति और परिवार की पीड़ा

हमले के कई दिनों बाद भी भारत के ज्यादातर नेता पूरी तरह चुप रहे। जबकि, पीड़ितों के परिवार पल-पल की जानकारी के लिए इंतजार करते रहे। नेताओं की यह चुप्पी जल्द ही एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई।

 

नई दिल्ली (भारत सरकार) ने एक वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक के सामने अपनी कड़ी आपत्ति और कड़ा विरोध दर्ज कराया। वहीं दूसरी ओर, भारत के जहाजरानी और बंदरगाह मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस घटना पर दुख जताते हुए कहा कि यह ‘समुद्री क्षेत्र से जुड़े हमारे परिवार के लिए एक बहुत बड़ी और गहरी क्षति' है।

 

विपक्ष ने सरकार पर बहुत कम कदम उठाने का आरोप लगाया और हमले को लेकर प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए। आखिरकार, जी7 सम्मेलन के दौरान मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के सामने यह मुद्दा उठाया और दुनिया भर के शिपिंग रूट पर काम करने वाले भारतीय नाविकों की सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया।

 

हालांकि, चौरसिया परिवार के लिए, यह उच्च-स्तरीय कूटनीति बहुत दूर की बात लग रही थी। उनके मन में अब भी कई ऐसे सवाल थे जिनका कोई जवाब नहीं मिला था। मसलन, क्या उन्हें कोई मुआवजा मिलेगा? क्योंकि उनके घर का कमाने वाला मुख्य सदस्य अचानक उनसे छिन चुका है और सिर पर कर्ज का भारी बोझ अब भी बना हुआ है। वे यह भी जानना चाहते हैं कि क्या उन खतरनाक समुद्री रास्तों पर काम कर रहे अन्य भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं?

 

आखिरकार, वे बस यही चाहते थे कि उनके परिवार के सदस्य का शव उन्हें वापस मिल जाए। कई दिनों तक, शिवानंद चौरसिया के छोटे भाई रामप्रवेश का ध्यान बस अपने फोन पर ही लगा रहा। फोन की हर घंटी के साथ एक नई उम्मीद जगती थी। फिर, नौवें दिन, आखिरकार वह फोन कॉल आ ही गया। शिवानंद का पार्थिव शरीर आखिरकार उनके गांव पहुंचा।

 

कुछ घंटों बाद, सैकड़ों ग्रामीण शिवानंद की अंतिम यात्रा में शामिल हुए, चिता से लहरे उठीं और अंतिम संस्कार पूरा हो गया। शिवानंद का शव देश में आने का इंतजार तो खत्म हो गया, लेकिन उनके परिवार के लिए, जवाबदेही, मुआवजे और न्याय की तलाश तो अभी शुरू ही हुई है।